झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों का गुस्सा अब सड़क से लेकर सियासी गलियारों तक पहुंच गया है। भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों को लेकर चल रहे Ranchi Student Protest ने नया मोड़ ले लिया है। विधानसभा मार्च के दौरान हुए विवाद के बाद पुलिस ने करीब 600 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
मामला सिर्फ FIR तक सीमित नहीं है। छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि सरकार के साथ बातचीत के बावजूद कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में रांची में छात्र आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।
क्यों आंदोलन कर रहे हैं छात्र?
छात्रों का आरोप है कि JPSC और JSSC की कुछ भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएं सामने आई हैं। अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक की जांच और प्रभावित परीक्षाओं को रद्द करने जैसी मांगें उठा रहे हैं।
छात्र संगठनों का कहना है कि सरकारी नौकरी की परीक्षा युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती है। ऐसे में अगर परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो अभ्यर्थियों की मेहनत और भरोसे दोनों पर असर पड़ता है।
इसी को लेकर बड़ी संख्या में छात्र कई दिनों से रांची में आंदोलन कर रहे हैं।
विधानसभा मार्च के दौरान बढ़ा तनाव
आंदोलन के दौरान छात्रों ने अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने के लिए विधानसभा की ओर मार्च किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। मार्च के दौरान कुछ स्थानों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
पुलिस के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी। वहीं प्रदर्शनकारी पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
यही घटनाक्रम अब FIR का कारण बना है।
600 प्रदर्शनकारियों पर FIR, CCTV से पहचान
विधानसभा मार्च के बाद पुलिस ने करीब 600 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। रिपोर्टों के अनुसार, FIR में कुछ लोगों को नामजद भी किया गया है।
पुलिस अब प्रदर्शन के दौरान बनाए गए CCTV फुटेज और दूसरे वीडियो रिकॉर्डिंग की मदद से उपद्रव या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप वाले लोगों की पहचान कर रही है।
इस कार्रवाई के बाद छात्रों के बीच भी नाराजगी बढ़ी है। छात्र संगठनों का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठाना उनका अधिकार है और सरकार को बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का दौर
आंदोलन को खत्म करने के लिए सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है। सरकार की तरफ से कुछ मांगों पर कार्रवाई का दावा किया गया है, लेकिन छात्र संगठन अभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं की जांच, जरूरत पड़ने पर परीक्षा रद्द करना और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है।
सरकार की ओर से कुछ परीक्षाओं को रद्द करने और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े कदम उठाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
Hunger Strike से भी बढ़ा दबाव
छात्र आंदोलन के दौरान Hunger Strike का रास्ता भी अपनाया गया। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत कुछ प्रदर्शनकारियों ने मांगों के समर्थन में अनशन किया। लंबे समय तक चले आंदोलन के बीच तबीयत बिगड़ने की खबरों ने सरकार पर दबाव और बढ़ा दिया।
छात्रों का कहना है कि वे अपने भविष्य से जुड़े मुद्दे पर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं।
पुलिस कार्रवाई पर राजनीति भी तेज
छात्रों पर FIR और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। वहीं पुलिस और सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।
इस बीच छात्र संगठनों और राजनीतिक संगठनों की ओर से आंदोलन के समर्थन में अलग-अलग कार्यक्रम भी किए गए हैं।
अब आगे क्या होगा?
रांची का यह छात्र आंदोलन अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां सरकार और छात्रों दोनों के लिए अगला कदम महत्वपूर्ण होगा। एक तरफ सरकार बातचीत और परीक्षा से जुड़े फैसलों के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ छात्र संगठन अपनी मुख्य मांगों पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
600 प्रदर्शनकारियों पर FIR के बाद पुलिस जांच आगे बढ़ेगी और CCTV फुटेज के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है। दूसरी ओर, अगर छात्रों की मांगों पर जल्द कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकलता है तो आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना है।
फिलहाल रांची में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और छात्रों के बीच बातचीत से यह विवाद सुलझेगा या Jharkhand Student Protest आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा?
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