नेपाल (Nepal) इन दिनों एक ऐसी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है, जिसने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी है। लगातार बारिश, Flash Flood और भूस्खलन के बाद कई इलाकों में हालात बेहद मुश्किल बने हुए हैं। राहत और बचाव अभियान को शुरू हुए करीब एक सप्ताह हो चुका है, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं।
Nepal में बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 1,127 लोगों की मौत की खबर है। वहीं, करीब 4,800 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। सुरक्षा बलों और Rescue Teams की मदद से प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान लगातार चलाया जा रहा है।
PM बालेन्द्र शाह ने Parliament में भारत का जताया आभार
मुश्किल हालात के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने संसद में भारत समेत पड़ोसी देशों की मदद का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संकट के समय पड़ोसी देशों ने सही समय पर सहायता पहुंचाई।
भारत की ओर से नेपाल को राहत सामग्री और बचाव दल उपलब्ध कराए गए हैं। इस मदद को लेकर नेपाली प्रधानमंत्री ने भारत के प्रति आभार जताया। दोनों देशों के बीच आपदा के समय सहयोग की यह भूमिका एक बार फिर सामने आई है।
India ने भेजी Relief और Rescue Team
नेपाल में आपदा की खबर सामने आने के बाद भारत ने राहत अभियान में मदद बढ़ाई। भारत की ओर से जरूरी दवाइयां और राहत सामग्री भेजी गई। इसके अलावा भारतीय Rescue Team को भी नेपाल भेजा गया, ताकि मुश्किल इलाकों में फंसे लोगों की तलाश और बचाव में स्थानीय एजेंसियों की मदद की जा सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बातचीत कर आपदा में हुई जनहानि पर संवेदना जताई। भारत ने इस कठिन समय में नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिया।
7 दिन बाद भी जारी है Search Operation
आपदा के एक सप्ताह बाद भी नेपाल में Search and Rescue Operation थमा नहीं है। कई इलाकों में बाढ़ का पानी और मलबा जमा होने के कारण बचाव दलों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
पहाड़ी क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त सड़कें और संपर्क मार्ग भी राहत कार्य में बड़ी बाधा बने हुए हैं। कई स्थानों तक पहुंचने के लिए सुरक्षा बलों और बचाव टीमों को बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है।
सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों को लेकर है, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों के परिवार लगातार उनकी खबर मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
Infrastructure को भी भारी नुकसान
बाढ़ ने नेपाल में सिर्फ लोगों की जान ही नहीं ली, बल्कि Infrastructure को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। सड़कें, पुल, बिजली व्यवस्था और Hydropower Projects प्रभावित हुए हैं। कई जगहों पर मलबा जमा होने से सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है।
अब सरकार के सामने राहत पहुंचाने के साथ-साथ प्रभावित लोगों के Rehabilitation और Infrastructure Reconstruction की चुनौती भी है।
China और दूसरे देशों से भी मिली मदद
नेपाल की इस आपदा के बाद भारत के अलावा चीन और कुछ अन्य देशों की ओर से भी सहायता पहुंचाई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Rescue और Relief Efforts में सहयोग दिया जा रहा है।
फिलहाल नेपाल के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और जरूरी सेवाओं को दोबारा बहाल करना है।
संकट की घड़ी में पड़ोसी का साथ
नेपाल की इस त्रासदी के बीच भारत की मदद का जिक्र दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। प्राकृतिक आपदा के वक्त राजनीतिक मतभेदों से अलग हटकर मानवीय मदद सबसे महत्वपूर्ण होती है।
नेपाल में हजारों परिवार अभी भी मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में Rescue Operation से लेकर राहत और पुनर्वास तक आने वाले दिनों में सरकार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।
