OBC क्रीमी लेयर के नियमों को लेकर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने मार्च 2026 के अपने फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद अब खासतौर पर Civil Services Examination (CSE) 2025 के OBC उम्मीदवारों की सेवा आवंटन प्रक्रिया को लेकर स्थिति पर सबकी नजर है।
मामला उस फैसले से जुड़ा है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि OBC उम्मीदवार को क्रीमी लेयर में रखने का फैसला केवल उसके माता-पिता की Salary या Income देखकर नहीं किया जा सकता। माता-पिता की नौकरी, पद और सामाजिक स्थिति जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा।
मार्च के फैसले में Supreme Court ने क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने 11 मार्च 2026 को OBC क्रीमी लेयर से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। अदालत ने माना कि सिर्फ माता-पिता की आय को आधार बनाकर किसी OBC उम्मीदवार को क्रीमी लेयर में डालना उचित नहीं है।
यह मामला उन उम्मीदवारों से जुड़ा था, जिनके माता-पिता PSU और निजी क्षेत्र में काम करते थे। अदालत के सामने सवाल था कि क्या ऐसे कर्मचारियों की Salary को सरकारी कर्मचारियों की तरह क्रीमी लेयर तय करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
कोर्ट ने अपने फैसले में क्रीमी लेयर की अवधारणा को सामाजिक उन्नति से जोड़ते हुए कहा कि केवल Income को ही निर्णायक आधार नहीं बनाया जा सकता।
CSE 2025 को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
केंद्र सरकार की मुख्य चिंता CSE 2025 के परिणाम और Service Allocation को लेकर है। सरकार का कहना है कि मार्च में आया फैसला परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद आया था। ऐसे में अगर इसे पुराने मामलों पर लागू किया जाता है, तो कई उम्मीदवारों की OBC स्थिति और सेवा आवंटन पर असर पड़ सकता है।
केंद्र ने इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। सरकार का तर्क है कि OBC क्रीमी लेयर तय करने के लिए निजी क्षेत्र में काम करने वाले माता-पिता की Social Status का आकलन करने की एक समान व्यवस्था स्पष्ट नहीं है।
Supreme Court ने अभी क्या किया?
1 सितंबर 2026 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की याचिका पर विचार किया, लेकिन मार्च के फैसले पर Interim Stay देने से इनकार कर दिया। यानी फिलहाल पहले दिए गए फैसले पर रोक नहीं लगी है। मामले में केंद्र की दलीलों और उसके असर पर आगे सुनवाई होगी।
इसका सीधा मतलब यह है कि OBC Creamy Layer से जुड़े मार्च के फैसले की स्थिति अभी बरकरार है। हालांकि CSE 2025 और उससे जुड़े Service Allocation पर इसे किस तरह लागू किया जाएगा, इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई अहम रहेगी।
OBC उम्मीदवारों के लिए क्या है इसका मतलब?
OBC आरक्षण का लाभ Non-Creamy Layer वर्ग के उम्मीदवारों को मिलता है। ऐसे में क्रीमी लेयर तय करने का तरीका सीधे तौर पर आरक्षण के लाभ से जुड़ा हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट के मार्च के फैसले ने यह सवाल महत्वपूर्ण बना दिया है कि क्या किसी उम्मीदवार के माता-पिता की ज्यादा Salary अपने आप उसे क्रीमी लेयर में रखने के लिए पर्याप्त है। अदालत ने फिलहाल इस तरह के आकलन में सिर्फ आय के बजाय दूसरे सामाजिक और सेवा संबंधी पहलुओं को भी देखने की बात कही है।
अब आगे की सुनवाई में यह साफ होना महत्वपूर्ण होगा कि मार्च 2026 का फैसला CSE 2025 के मामलों पर किस तरह लागू होगा। फिलहाल केंद्र की Stay की मांग स्वीकार नहीं हुई है और पुराने Supreme Court Order पर रोक नहीं लगी है।
नजर अब अगली सुनवाई पर है, क्योंकि इस मामले का असर सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि OBC Creamy Layer के निर्धारण की प्रक्रिया को लेकर आगे की नीति पर भी पड़ सकता है।
हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
