दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) और कथित Vote Chori के मुद्दे पर INDIA Bloc ने अब विरोध प्रदर्शन को तेज करने की तैयारी कर ली है। विपक्षी दल 31 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक जनमहाभियोग कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इसके अगले दिन यानी 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली निकाली जाएगी।
हालांकि, इस रैली से पहले दिल्ली के कारोबारियों ने कांग्रेस नेतृत्व से कार्यक्रम टालने की अपील की है। व्यापारिक संगठनों को आशंका है कि दिवाली से ठीक पहले लाखों लोगों की भीड़ और वाहनों की आवाजाही से दिल्ली के प्रमुख बाजारों में कारोबार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में अब इस राजनीतिक कार्यक्रम को लेकर विपक्ष और व्यापारिक संगठनों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
आज 31 अक्टूबर को CEC के खिलाफ होगा जनमहाभियोग कार्यक्रम
INDIA ब्लॉक ने पहले 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक जनमहाभियोग कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई थी। लेकिन दिल्ली में बारिश के कारण इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया।
अब यह कार्यक्रम 31 अक्टूबर को दोपहर 3:30 से 4 बजे के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास, 10 राजाजी मार्ग पर आयोजित होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार कर सकती हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से प्रस्ताव पेश किया जाएगा, जबकि राहुल गांधी समापन संबोधन देंगे। इसमें INDIA ब्लॉक के कई दलों के नेता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
विपक्ष का कहना है कि इस आयोजन के जरिए चुनाव आयोग के कामकाज और CEC के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जनता के सामने रखा जाएगा।
यहां एक बात समझना जरूरी है कि जनमहाभियोग कोई आधिकारिक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है। यह विपक्ष की ओर से आयोजित प्रतीकात्मक सार्वजनिक सुनवाई है। इससे CEC को सीधे पद से नहीं हटाया जा सकता।
SIR और Vote Chori पर क्यों आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग?
इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR है।
राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के अन्य नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव के नाम पर बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।
विपक्ष लगातार चुनाव आयोग से SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है।
दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलतियों को दूर करना है। आयोग के अनुसार, मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान करना इस प्रक्रिया का हिस्सा है।
इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। INDIA ब्लॉक इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के तहत बता रहा है।
संसद में CEC को हटाने का नोटिस भी हो चुका है खारिज
ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग विपक्ष पहले भी संसद में उठा चुका है।
12 मार्च को विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में CEC को हटाने से संबंधित नोटिस दिए थे। इन नोटिसों पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों के हस्ताक्षर थे।
हालांकि, 6 अप्रैल को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इन नोटिसों को खारिज कर दिया था।
इसके बाद विपक्ष ने इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने का फैसला किया। इसी रणनीति के तहत अब सार्वजनिक जनमहाभियोग कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में होगी Vote Bachao Rally
जनमहाभियोग कार्यक्रम के अगले दिन यानी 1 नवंबर को INDIA ब्लॉक दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करेगा। इस अभियान को ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ नाम दिया गया है।
राहुल गांधी ने आम लोगों, युवाओं, छात्रों और सामाजिक संगठनों से इस रैली में शामिल होने की अपील की है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि मताधिकार और चुनावी व्यवस्था में भरोसे से जुड़ी है।
कांग्रेस के मुताबिक, रैली के तहत मिंटो रोड और कनॉट प्लेस जंक्शन से मार्च निकालने की योजना है, जो रामलीला मैदान पहुंचकर समाप्त होगा।
इसमें INDIA ब्लॉक के कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है। दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान में रैली के लिए शर्तों के साथ अनुमति दी है। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर भी तैयारियां की जा रही हैं।
दिल्ली के कारोबारियों ने सोनिया गांधी को लिखा पत्र
रैली से पहले दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने अपनी चिंता जाहिर की है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख बदलने की मांग की है।
कारोबारियों का कहना है कि दिवाली से पहले दिल्ली के बाजारों में खरीदारी और माल की सप्लाई बढ़ जाती है। ऐसे समय में बड़ी रैली होने से ट्रैफिक जाम, पार्किंग की समस्या और बाजारों तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है।
CTI का अनुमान है कि रैली के कारण दिल्ली के करीब 20 प्रमुख बाजारों में 10,000 से 12,000 करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित होने का जोखिम है। यह आंकड़ा व्यापारिक संगठन का अनुमान है, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा नहीं।
CTI ने सोनिया गांधी के सामने दो सुझाव रखे हैं:
- रैली की तारीख बदलें: कार्यक्रम को 10 या 11 नवंबर अथवा दिवाली के बाद आयोजित किया जाए।
- जगह बदलने पर विचार करें: रामलीला मैदान की जगह बुराड़ी मैदान में रैली आयोजित की जाए, जहां संगठन के मुताबिक करीब 15 हजार वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था हो सकती है।
कारोबारियों का कहना है कि वे राजनीतिक कार्यक्रम के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन त्योहार से ठीक पहले इसके समय और जगह को लेकर उन्हें परेशानी हो सकती है।
राहुल गांधी ने कारोबारियों की अपील पर क्या कहा?
राहुल गांधी पहले भी कारोबारियों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटा दें, तो विपक्ष का विरोध 30 सेकंड में खत्म हो सकता है।
व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा कि विपक्ष उनकी परेशानियों को समझता है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वहीं, 31 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, INDIA ब्लॉक ने 1 नवंबर की रैली को स्थगित करने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। रैली अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित करने की तैयारी जारी है।
सुरक्षा और Traffic व्यवस्था को लेकर भी तैयारी
रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर रही है।
रैली स्थल और आसपास के इलाकों में निगरानी, प्रवेश और निकास व्यवस्था तथा ट्रैफिक प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मध्य दिल्ली के कुछ हिस्सों में यातायात प्रभावित होने की आशंका है।
ऐसे में रामलीला मैदान, ITO, दिल्ली गेट और आसपास के बाजारों की ओर जाने वाले लोगों को यात्रा से पहले दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ताजा एडवाइजरी देखने की सलाह दी गई है।
अब 1 नवंबर की रैली पर टिकी सबकी नजर
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक का जनमहाभियोग कार्यक्रम और रामलीला मैदान की रैली अब दिल्ली की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गए हैं।
एक तरफ विपक्ष SIR और कथित Vote Chori के मुद्दे पर अपनी बात जनता तक पहुंचाना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ कारोबारी दिवाली के दौरान बाजारों में होने वाली खरीदारी और माल की आवाजाही को लेकर चिंतित हैं।
अब देखना होगा कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में विपक्ष की रैली कैसी रहती है और कारोबारियों की मांग पर कांग्रेस नेतृत्व क्या फैसला लेता है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों से लेकर व्यापारिक संगठनों तक की नजर बनी हुई है।
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