India में रहने वाले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों के लिए इमिग्रेशन नियमों में बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार के नए आदेश के बाद अब हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के उन लोगों को भारत में आगे रहने के लिए उचित श्रेणी का वीजा लेना होगा, जिन्हें पहले कुछ शर्तों के तहत पासपोर्ट और वीजा से छूट मिली हुई थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 4 नवंबर 2026 को Immigration and Foreigners (Exemption) (Amendment) Order, 2026 जारी किया। यह बदलाव 5 नवंबर को सरकारी गजट में प्रकाशित हुआ। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि सरकार ने क्या बदलाव किए हैं और इसका किन लोगों पर असर पड़ेगा। Visa Rules Change: क्या बदला है सरकार ने? 5 बड़ी बातें 1. छह अल्पसंख्यक समुदायों को लेकर बदले नियम नए आदेश में हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों को शामिल किया गया है। ये वे समुदाय हैं, जिनके लोगों को पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न या उसके डर के कारण भारत आने पर कुछ विशेष छूट दी गई थी। 2. 31 दिसंबर 2024 तक भारत आने वालों के लिए प्रावधान इस बदलाव का संबंध उन लोगों से है, जो 31 दिसंबर 2024 या उससे पहले भारत पहुंचे थे। इसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो बिना वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के भारत आए थे या जिनके यात्रा दस्तावेजों की वैधता समाप्त हो चुकी थी। 3. अब भारत में रहने के लिए लेना होगा वीजा पहले निर्धारित शर्तों के तहत इन लोगों को पासपोर्ट और वीजा से छूट मिली हुई थी। लेकिन नए संशोधन के अनुसार, भारत में अपना प्रवास जारी रखने के लिए उन्हें उचित श्रेणी का वीजा लेना होगा। हालांकि, आदेश में प्रवेश से संबंधित पहले वाली छूट को पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है। 4. नेपाल और भूटान की यात्रा के नियमों में भी बदलाव सरकार ने नेपाल और भूटान जाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए भी यात्रा दस्तावेजों से जुड़े प्रावधानों में संशोधन किया है। दोनों देशों के बीच सीधे आने-जाने के लिए निर्धारित पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। वहीं, किसी तीसरे देश के रास्ते यात्रा करने पर पासपोर्ट और लागू परिस्थितियों में वीजा की जरूरत होगी। 5. कुछ पाकिस्तानी नागरिकों के लिए भी विशेष प्रावधान नए आदेश में उन कुछ पाकिस्तानी नागरिकों के लिए भी प्रावधान किया गया है, जो 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले भारत में स्थायी रूप से बसने के इरादे से आए थे। इनमें ऐसे लोग शामिल हैं जो पाकिस्तानी कंप्यूटरीकृत पहचान पत्र (CNIC) नहीं होने के कारण अपना पासपोर्ट रिन्यू नहीं करा पा रहे हैं। हालांकि, भारत में आगे रहने के लिए उन्हें भी उचित वीजा लेना होगा। CAA और नए Visa Rules में क्या अंतर है? सरकार के इस फैसले के बाद नागरिकता संशोधन कानून (CAA) की भी चर्चा हो रही है। हालांकि, दोनों के उद्देश्य और समय-सीमा अलग-अलग हैं। CAA के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के पात्र लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। इसके लिए 31 दिसंबर 2014 तक भारत आने समेत अन्य निर्धारित शर्तें पूरी करनी होती हैं। वहीं, नए इमिग्रेशन संशोधन में 31 दिसंबर 2024 तक भारत आए लोगों के वीजा और भारत में रहने से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। किन लोगों पर पड़ेगा नए नियमों का असर? इस फैसले का असर मुख्य रूप से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए छह गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों के उन लोगों पर पड़ेगा, जो पहले मिली विशेष छूट के आधार पर भारत में रह रहे थे। आसान शब्दों में कहें तो सरकार ने पुराने नियमों के तहत मिली कुछ छूटों में बदलाव किया है। अब संबंधित लोगों को भारत में अपना प्रवास जारी रखने के लिए वीजा संबंधी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!