भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के क्षेत्र में विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने और घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए EV Policy 2025 (Electric Vehicle Manufacturing Policy 2025 )की घोषणा की है। इस नई नीति का उद्देश्य वैश्विक ऑटो कंपनियों को भारत में EV उत्पादन के लिए आकर्षित करना है, जिसके बदले में उन्हें टैक्स (Import Duty) में बड़ी छूट मिलेगी।
EV Policy 2025 Highlights: क्या है इस नई स्कीम में?
- Low Import Duty: भारत सरकार ने EV पर आयात शुल्क को 70% से घटाकर सिर्फ 15% कर दिया है, बशर्ते कंपनियां भारत में EV मैन्युफैक्चरिंग की प्रतिबद्धता दें।
- Eligibility Criteria: यह छूट $35,000 या उससे अधिक कीमत वाली कारों पर ही लागू होगी।
- Import Limit: हर साल अधिकतम 8,000 यूनिट्स तक आयात की अनुमति होगी, और यह सुविधा 5 सालों तक उपलब्ध रहेगी।
निवेश और Make in India Commitment
- EV कंपनियों को कम से कम ₹4,150 करोड़ (करीब $500 मिलियन) का निवेश करना होगा।
- तीन वर्षों में भारत में निर्माण शुरू करना होगा।
- 25% लोकल वैल्यू एडिशन (Local Value Addition) तीसरे साल तक और 50% वैल्यू एडिशन पाँचवे साल तक ज़रूरी होगा।
Bank Guarantee का प्रावधान
- कंपनियों को एक बैंक गारंटी जमा करनी होगी, जिसकी राशि सरकार द्वारा दी गई ड्यूटी छूट के बराबर या ₹6,484 करोड़ में से जो भी अधिक हो — वही मानी जाएगी।
- यदि कंपनियाँ निवेश व लोकल प्रोडक्शन की शर्तें पूरी नहीं करतीं, तो यह गारंटी ज़ब्त की जा सकती है।
Global और Local कंपनियों की प्रतिक्रिया
- Tesla के लिए ये नीति आकर्षक मानी जा रही थी, लेकिन फिलहाल कंपनी ने भारत में निवेश में रुचि नहीं दिखाई है।
- वहीं, Mercedes-Benz और Volkswagen जैसी यूरोपीय कंपनियाँ इस नीति के तहत भारत में EV निर्माण पर विचार कर रही हैं।
- Tata Motors और Mahindra जैसी घरेलू कंपनियों को इस नीति से विदेशी प्रतिस्पर्धा बढ़ने की चिंता है।
भारत का EV लक्ष्य 2030 तक
सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक कुल नई कार बिक्री में 30% हिस्सेदारी EVs की हो। इस लक्ष्य को पाने के लिए:
- EV बैटरी कंपोनेंट्स पर Import Duty में कटौती की गई है।
- लोकल मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहन देने के लिए उत्पादन से जुड़ी योजनाएं लागू की जा रही हैं।
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