मध्य पूर्व (Middle East) में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। ईरान (Iran) और अमेरिका (US) के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो तेल टैंकरों को मिसाइलों से निशाना बनाया। इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। इसके कुछ ही घंटों बाद ईरान ने बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए। जवाब में अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर करीब पांच घंटे तक लगातार एयर स्ट्राइक की। इस घटनाक्रम ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। Hormuz Strait में UAE के Oil Tankers पर हमला रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे UAE से जुड़े दो ऑयल टैंकरों पर ईरानी मिसाइलों से हमला किया गया। धमाकों के बाद जहाजों में आग लग गई और चालक दल में अफरा-तफरी मच गई। इस हमले में एक भारतीय क्रू सदस्य की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। UAE ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर सीधा हमला बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऐसे हमले जारी रहे तो वैश्विक समुद्री व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है। Bahrain और Jordan में US Military Bases बने निशाना टैंकरों पर हमले के कुछ समय बाद ईरान ने बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कई जगह एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किए गए और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने की कोशिश की गई। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार बड़े पैमाने पर नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इन हमलों ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर पहुंचा दिया है। US का पलटवार, 5 घंटे तक चली Air Strike ईरानी हमलों के जवाब में अमेरिकी सेना ने बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई शुरू की। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के मिसाइल लॉन्च पैड, सैन्य ठिकानों और तटीय रक्षा प्रणाली को निशाना बनाया। यह एयर ऑपरेशन करीब पांच घंटे तक चला। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए की गई है। क्यों अहम है Strait of Hormuz? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा चला तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, शिपिंग लागत में बढ़ोतरी और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव देखने को मिल सकता है। भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता? इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत के बाद भारत के लिए भी चिंता बढ़ गई है। खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं और बड़ी संख्या में भारतीय नाविक अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर तैनात हैं। ऐसे में यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ सकता है। भारत सरकार पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। Middle East Crisis पर दुनिया की नजर ईरान और अमेरिका के बीच लगातार बढ़ रहे हमलों ने यह साफ कर दिया है कि मध्य पूर्व में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। यदि दोनों देशों के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विश्व अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में दोनों देश सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाते हैं या फिर कूटनीतिक बातचीत के जरिए हालात सामान्य करने की कोशिश करते हैं।