जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। जांच में पता चला है कि तीन पाकिस्तानी आतंकियों को दो स्थानीय कश्मीरी युवकों ने न सिर्फ रहने की जगह, बल्कि भोजन, सुरक्षा और रेकी की जानकारी तक मुहैया कराई थी — और इसके बदले उन्हें मिले थे सिर्फ कुछ हजार रुपये।
कौन हैं आरोपी?
NIA ने जिन दो स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया है, उनके नाम हैं:
- परवेज़ अहमद जोठर (निवासी: बाटकोट, पहलगाम)
- बशीर अहमद जोठर (निवासी: हिल पार्क, पहलगाम)
इन दोनों ने पहलगाम के पास स्थित जंगल में एक झोपड़ी में दो दिन तक आतंकियों को पनाह दी, जो कि बेसरान क्षेत्र से लगभग 2 किलोमीटर दूर है।
क्या-क्या मदद की?
- आतंकियों को खाना और ठिकाना दिया।
- पहलगाम क्षेत्र में सुरक्षा बलों की गतिविधियों की जानकारी आतंकियों तक पहुंचाई।
- रेकी (जासूसी) में मदद की, ताकि हमला आसानी से अंजाम दिया जा सके।
- आतंकियों को फरार होने के लिए रास्तों की जानकारी भी दी।
हमलावर कौन थे?
NIA के अनुसार, इस हमले को अंजाम देने वाले तीनों आतंकी पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े थे। इनमें से एक की पहचान पाकिस्तान आर्मी के पूर्व SSG कमांडो के रूप में हुई है। इससे इस ऑपरेशन की तैयारी और खतरनाक मंशा का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
कोर्ट की कार्रवाई
जम्मू की एक विशेष अदालत ने दोनों आरोपियों को 5 दिन की NIA कस्टडी में भेज दिया है ताकि उनसे और पूछताछ की जा सके और इस नेटवर्क की गहराई तक जांच की जा सके।
हमले की गंभीरता
इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से 25 पर्यटक और 1 स्थानीय नागरिक शामिल था। यह हमला सिर्फ एक आतंकी वारदात नहीं, बल्कि स्थानीय मदद से किया गया एक सुनियोजित नरसंहार था।
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