वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इज़रायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की अहम मुलाकात के बाद गाज़ा (Gaza) को लेकर एक बड़ा और विवादास्पद प्रस्ताव सामने आया है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि फिलिस्तीनी नागरिकों (Palestinians) को गाज़ा छोड़ने की “स्वतंत्र इच्छा” दी जाएगी – यानी जो जाना चाहें, वे जा सकते हैं।
क्या है Netanyahu-Trump का Gaza Relocation Plan?
- नेतन्याहू ने कहा कि अगर गाज़ा के लोग दूसरे देशों में शरण लेना चाहते हैं, तो उन्हें इसका विकल्प मिलना चाहिए।
- ट्रंप ने इस बात का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिका, इज़राइल के साथ मिलकर उन देशों की पहचान करेगा जो Gaza के लोगों को शरण दे सकते हैं।
- योजना को “स्वैच्छिक पलायन” (Voluntary Relocation) बताया जा रहा है।
क्यों हो रही है आलोचना?
- संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकार संगठन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस योजना को Ethnic Cleansing (नस्लीय सफाया) की कोशिश बता रहे हैं।
- इज़राइली रक्षा मंत्री Israel Katz ने प्रस्ताव दिया है कि लगभग 6 लाख गाज़ावासियों को रफ़ा (Rafah) के पास बने एक Humanitarian Zone में शिफ्ट किया जाए।
- आलोचकों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और इससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है।
Ceasefire और Hostage Deal की भी चर्चा
- ट्रंप और नेतन्याहू की बैठक के समानांतर कतर की राजधानी दोहा (Doha) में एक 60 दिन के युद्धविराम (Ceasefire) और बंधकों की अदला-बदली की बातचीत चल रही है।
- इस डील के तहत हमास द्वारा पकड़े गए बंधकों के बदले इज़राइल फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ेगा।
Arab देशों और दुनियाभर से विरोध
- मिस्र, जॉर्डन, लेबनान जैसे देशों ने साफ कर दिया है कि वे गाज़ा से आने वाले शरणार्थियों को स्वीकार नहीं करेंगे।
- यूरोपीय यूनियन और संयुक्त राष्ट्र ने relocation proposal को स्थायी समाधान के खिलाफ बताया है।
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