Bihar Voter List Revision को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। Election Commission द्वारा शुरू की गई Special Electoral Roll Revision प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने Supreme Court का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इस प्रक्रिया से करोड़ों वोटर्स के disenfranchise होने का खतरा है।
क्या है Bihar Voter List Row?
Election Commission ने बिहार में Special Intensive Revision (SIR) की शुरुआत की है। इसके तहत सभी वोटर्स को 25 जुलाई 2025 तक नए फॉर्म भरकर जमा करने होंगे। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इतने कम समय में लाखों लोग वोटर लिस्ट से बाहर हो जाएंगे।
मुख्य मुद्दे:
- फॉर्म भरने की अंतिम तिथि बहुत कम।
- आधार या वोटर ID को पहचान पत्र के रूप में मान्यता नहीं।
- पुराने मतदाताओं के नाम हटने की आशंका।
Opposition का आरोप: “Vote चोरी की साज़िश”
कांग्रेस, राजद, NCP, PUCL, ADR और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने याचिका दायर की है। उनका कहना है कि:
- यह प्रक्रिया गरीब, दलित, पिछड़े और प्रवासी वर्ग को वोटिंग से बाहर करने के लिए है।
- यह एक राजनीतिक एजेंडा है जो 2025 के Bihar Assembly Elections को प्रभावित करेगा।
Bihar Bandh और Protest
9 जुलाई को महागठबंधन ने Bihar Bandh और चक्का जाम का ऐलान किया।
- Rahul Gandhi और Tejashwi Yadav ने सड़कों पर मार्च निकालकर EC के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
- राहुल गांधी ने कहा: “यह लोकतंत्र की हत्या है। करोड़ों वोटर का अधिकार छीना जा रहा है।”
- तेजस्वी यादव ने कहा: “EC केंद्र सरकार के दबाव में काम कर रहा है।”
EC का पक्ष: “कानूनी प्रक्रिया के तहत काम हो रहा है”
Election Commission का कहना है:
- SIR प्रक्रिया संविधान के Article 326 के तहत वैध है।
- 2003 की मतदाता सूची और ऐतिहासिक रिकॉर्ड के आधार पर रोल अपडेट हो रहा है।
- अब तक 87% मतदाताओं को फॉर्म दिया जा चुका है।
Supreme Court Hearing Today
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल हैं, आज (10 जुलाई 2025) याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
- याचिकाकर्ता चाहते हैं कि इस प्रक्रिया पर रोक लगे या इसकी समय सीमा बढ़ाई जाए।
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