हाल ही में फ्रांस (France) और नेपाल (Nepal) में युवा वर्ग ने सरकारों के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए। दोनों देशों में युवाओं ने अपनी आवाज़ उठाते हुए सरकारी नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क पर उतरकर ऐतिहासिक आंदोलन किया। ये विरोध प्रदर्शन युवा शक्ति (Youth Power) की वैश्विक प्रभावशाली भूमिका को दिखाते हैं।
🇫🇷 France में ‘ब्लॉक एवरीथिंग’ आंदोलन (Block Everything Protest)
France में 10 सितंबर, 2025 को ‘ब्लॉक एवरीथिंग’ आंदोलन के तहत बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। यह आंदोलन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) की सरकार के खिलाफ जनता की गहरी असंतोष को दर्शाता है।
- विरोध का कारण: प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरो के इस्तीफे के बाद मैक्रों ने सेबेस्टियन लेकोर्नू (Sebastien Lecornu) को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया। यह कदम सरकार की अस्थिरता और नीतिगत निरंतरता की कमी को उजागर करता है।
- प्रदर्शन की प्रकृति: पेरिस, नांतेस, मोंपेलियर, बोर्डो और टूलूज़ में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर आगजनी की, पुलिस पर पथराव किया और यातायात बाधित किया।
- सुरक्षा बलों की तैनाती: सरकार ने 80,000 सुरक्षा बल तैनात किए, जिनमें से 6,000 केवल पेरिस में थे। लगभग 200 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
🇳🇵 नेपाल में ‘Gen Z Protest’
नेपाल में हाल ही में जेन जेड (Gen Z) आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें युवा वर्ग ने सोशल मीडिया पंजीकरण आदेश और भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध किया।
- विरोध की शुरुआत: सरकार ने फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब जैसी सोशल मीडिया साइट्स को पंजीकरण के अधीन करने का आदेश दिया, जिसे युवाओं ने सेंसरशिप माना।
- विरोध का विस्तार: प्रदर्शनकारियों ने सरकार के भ्रष्टाचार और राजनीतिक नेताओं की विलासिता के खिलाफ आवाज़ उठाई।
- परिणाम: प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों में 19 लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। इसके बाद प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली (K.P. Sharma Oli) ने इस्तीफा दे दिया।
France और Nepal विरोध प्रदर्शन में समानताएँ और अंतर
- समानताएँ: दोनों देशों में युवा वर्ग ने सरकार की नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ सक्रिय भागीदारी दिखाई। सोशल मीडिया ने आंदोलन को गति दी।
- अंतर: नेपाल में हिंसा और मौतें अधिक हुईं, जबकि फ्रांस में अधिकांश विरोध शांतिपूर्ण रहे, हालांकि कुछ हिंसा की घटनाएँ हुईं।
इन विरोध प्रदर्शनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि युवा अब सिर्फ दर्शक नहीं बल्कि राजनीतिक बदलाव के महत्वपूर्ण हिस्सेदार बन चुके हैं। Youth Protest और सोशल मीडिया के माध्यम से ये आंदोलन सरकारों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
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