नेपाल की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ आया है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शुक्रवार रात पूर्व सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस सुशीला कार्की (Sushila Karki) को अंतरिम प्रधानमंत्री (Interim PM) नियुक्त किया। यह कदम तब उठाया गया जब नेपाल में Gen-Z Protest ने राजनीतिक अस्थिरता को नई दिशा दी। युवाओं की पसंद मानी जा रही सुशीला कार्की अब देश को चुनाव तक लीड करेंगी।
पहली महिला प्रधानमंत्री (First Woman PM of Nepal)
नेपाल के 220 साल के राजनीतिक इतिहास में पहली बार किसी महिला को प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला है। Sushila Karki पहले नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रह चुकी हैं और अब वह नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री भी बन गईं।
उनकी नियुक्ति को युवाओं और खासकर Gen-Z Movement की बड़ी जीत माना जा रहा है।
न्यायपालिका से सत्ता तक का सफर
Sushila Karki अपने कड़े और निडर फैसलों के लिए जानी जाती हैं। साल 2017 में प्रचंड सरकार ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव (Impeachment Motion) लाया था। सरकार को डर था कि वह न्यायपालिका की आज़ादी से समझौता नहीं करेंगी। लेकिन जनता और वकीलों के विरोध के चलते यह प्रस्ताव वापस लेना पड़ा।
उनके कार्यकाल का एक अहम फैसला सरोगेसी (Surrogacy) से जुड़ा रहा, जिसमें उन्होंने इसे बिजनेस बनने से रोकते हुए कहा कि इससे गरीब महिलाओं का शोषण हो सकता है।
परिवार से जुड़ा विवाद
Sushila Karki के पति दुर्गा प्रसाद सुबेदी भी विवादों में रहे हैं। 1973 में उन्होंने एक विमान हाईजैक किया था। हालांकि यात्रियों को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया गया, लेकिन यह घटना नेपाल की राजनीति के इतिहास में दर्ज है।
छह महीने में होंगे चुनाव (Upcoming Elections in 6 Months)
फिलहाल अंतरिम सरकार में कोई मंत्री नहीं बनाया गया है। राष्ट्रपति पौडेल ने घोषणा की है कि 6 महीनों के भीतर आम चुनाव कराए जाएंगे। इसका मतलब है कि कार्की का कार्यकाल पूरी तरह से अंतरिम रहेगा और उनका काम देश को चुनाव तक स्थिरता प्रदान करना है।
Gen-Z Protest का असर
पिछले दिनों नेपाल में Gen-Z Protest ने बड़ी भूमिका निभाई। युवा वर्ग ने शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक सुधारों की मांग को लेकर आंदोलन तेज किया। सोशल मीडिया पर भी #GenZForChange जैसे कैंपेन छाए रहे। माना जा रहा है कि राष्ट्रपति का यह फैसला युवाओं को भरोसा दिलाने के लिए लिया गया है।
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