अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया (California) में 3 सितंबर को तेलंगाना (Telangana) के रहने वाले भारतीय टेक्नी और स्टूडेंट मोहम्मद निज़ामुद्दीन (Mohammed Nizamuddin) की पुलिस फायरिंग में मौत हो गई। अमेरिकी पुलिस (US Police) का दावा है कि निज़ामुद्दीन ने अपने रूममेट पर चाकू से हमला किया था, जिसके बाद हालात बिगड़ गए और गोली चलानी पड़ी। हालांकि परिवार और भारतीय समुदाय इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
America में Discrimination और Harassment का आरोप
Mohammed Nizamuddin ने मौत से पहले सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि अमेरिका में एशियन और भारतीय छात्रों को नस्लीय भेदभाव (Racism) और शोषण का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कॉर्पोरेट कंपनियों पर प्रवासी कर्मचारियों का शोषण करने और “White Supremacy” को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
Job Loss और Salary Fraud का दावा
Mohammed Nizamuddin गूगल (Google) प्रोजेक्ट पर आईटी कंपनी EPAM Systems के जरिए काम कर रहे थे। उनका कहना था कि उन्हें ग़लत तरीके से नौकरी से निकाला गया और अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट के नियमों के मुताबिक जो वेतन मिलना चाहिए था, वह नहीं दिया गया।
Roommates और Police द्वारा परेशान करने की शिकायत
नौकरी जाने के बाद भी उनके हालात बिगड़ते गए। निज़ामुद्दीन ने आरोप लगाया कि उनके रूममेट्स और कुछ सहकर्मी लगातार उन्हें परेशान करते रहे। उन्होंने यहां तक कहा कि उनकी खाने-पीने की चीज़ों में ज़हर मिलाने की कोशिश हुई और एक पुलिस डिटेक्टिव भी उत्पीड़न में शामिल था।
आखिरी मैसेज – “American Mentality Must End”
मौत से ठीक पहले Mohammed Nizamuddin ने LinkedIn पर लिखा –
“अमेरिकी मानसिकता (American Mentality) और White Supremacy अब ख़त्म होना चाहिए। कॉर्पोरेट Tyrants का अन्याय रुकना चाहिए।”
उन्होंने भारतीय और एशियन छात्रों से अपील की थी कि वे अन्याय और भेदभाव के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ।
परिवार की मांग और जांच
भारत के Telangana में रह रहे निज़ामुद्दीन के परिवार ने भारत सरकार और अमेरिकी प्रशासन दोनों से निष्पक्ष जांच (Fair Investigation) की अपील की है। फिलहाल अमेरिकी पुलिस मामले की जांच कर रही है।
हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
