लेह-लद्दाख (Leh-Ladakh) इस समय बड़े Gen Z Protest की वजह से सुर्खियों में है। 2019 में Article 370 हटने के बाद इसे केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) बनाया गया था, लेकिन बिना विधानसभा के। इसी वजह से यहां के लोग अब Statehood (राज्य का दर्जा) और Sixth Schedule (छठी अनुसूची) जैसी संवैधानिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
Ladakh Protest की Background Story
लद्दाख के लोग चाहते हैं कि यहां की Tribal Identity, Ecology और Local Resources को सुरक्षित रखने के लिए संसद से मजबूत कानूनी प्रावधान मिले।
- मार्च 2025 में लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के नेताओं ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।
- लेकिन उनकी मांगों (Statehood और Sixth Schedule) पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ।
- इसी से लोगों का असंतोष और बढ़ता गया।
24 सितंबर को हिंसा क्यों हुई?
24 सितंबर को हालात अचानक बिगड़ गए जब भूख हड़ताल पर बैठे कुछ प्रदर्शनकारियों की तबीयत खराब हो गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके बाद LAB के युवा विंग ने Shutdown Call दिया।
- प्रदर्शन हिंसक हो गया, भीड़ ने BJP Office और CRPF Vehicle पर हमला कर दिया।
- कई सरकारी दफ्तरों में तोड़फोड़ हुई।
- झड़पों में 4 लोगों की मौत हो गई और कई पुलिसकर्मी व प्रदर्शनकारी घायल हुए।
स्थिति को काबू में करने के लिए प्रशासन ने Curfew और Section 144 लागू कर दी।
Sonam Wangchuk Vs Government
पर्यावरणविद और शिक्षा सुधारक Sonam Wangchuk ने 10 सितंबर से Hunger Strike शुरू की थी। उनका कहना है कि युवाओं का गुस्सा सरकार की U-turn Policies और Broken Promises की वजह से है।
- वांगचुक का दावा है कि हिंसा “Organic” थी और यह युवाओं का स्वतःस्फूर्त आक्रोश था।
- जबकि सरकार ने उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने Provocative Statements दिए और भीड़ को भड़काया।
Political Blame Game
- BJP Leaders का आरोप है कि इस हिंसा के पीछे कांग्रेस और विपक्षी दलों की भूमिका है।
- वहीं Omar Abdullah जैसे नेताओं का कहना है कि लद्दाख को न विधानसभा मिली और न राज्य का दर्जा—यह जनता के साथ Betrayal (धोखा) है।
- लद्दाख के उपराज्यपाल ने इसे Conspiracy करार दिया।
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