अमेरिका-भारत-रूस के बीच बढ़ता तनाव
भारत, रूस और अमेरिका के बीच तेल व्यापार और टैरिफ युद्ध ने नई राजनीतिक जटिलताएँ खड़ी कर दी हैं। अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से कच्चे तेल (Russian Oil) का आयात घटाए, लेकिन भारत ने इसे राष्ट्रीय Sovereignty और Economic Independence का मुद्दा बताया है।
US Tariffs और दबाव की रणनीति
- अमेरिका ने भारत के निर्यात पर 25% टैरिफ लगाया और इसे 50% तक बढ़ाने की तैयारी है।
- अमेरिकी नेताओं का आरोप है कि भारत सस्ता रूसी तेल खरीदकर उसे रिफाइन कर महंगे दामों पर बेचता है।
- G7 देशों ने चेतावनी दी है कि रूस से अधिक तेल खरीदने वाले देशों पर सीधी कार्रवाई होगी।
India का जवाब: National Interest First
- तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत लाभ के लिए नहीं, बल्कि ज़रूरत के चलते रूस से तेल खरीदता है।
- भारत ने कहा कि यदि रूसी तेल आपूर्ति बाधित हुई तो Global Oil Market को बड़ा झटका लगेगा।
- भारत ने अमेरिका से ईरान और वेनेज़ुएला से तेल खरीदने की अनुमति देने की अपील की है।
- सरकार का कहना है कि रूस पर कोई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध नहीं है, इसलिए भारत का व्यापार पूरी तरह वैध है।
Putin का बयान: Modi जी Wise Leader
- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर Putin ने अमेरिका को चेतावनी दी कि भारत किसी दबाव में नहीं झुकेगा।
- Putin ने कहा कि भारत को कोई “Humiliation” बर्दाश्त नहीं करनी पड़ेगी।
- उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वे “Wise और Balanced Leader” हैं।
- रूस ने भारत को तेल आपूर्ति के लिए Special Mechanism की पेशकश की है।
Global Impact: Oil Price और Trade Relations
- यदि भारत रूसी तेल आयात बंद करता है तो कीमतें $100 प्रति बैरल तक जा सकती हैं।
- भारत को रूसी तेल पहले से अधिक डिस्काउंट पर मिल रहा है।
- भारत आज रूस से समुद्री मार्ग से सबसे बड़ा तेल आयातक बन चुका है।
- हालांकि, US Tariff War के चलते भारत को अमेरिकी बाज़ार में बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
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