भोपाल के AIIMS (एम्स) अस्पताल में इंसानियत और करुणा की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली। एक 37 वर्षीय युवक, जो सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुआ था, उसे डॉक्टरों ने ब्रेन डेड (Brain Dead) घोषित किया। इसके बाद उसके परिवार ने बड़ा दिल दिखाते हुए अंगदान (Organ Donation) का फैसला लिया, जिससे पाँच मरीजों को नई जिंदगी मिल गई।
ब्रेन डेड के बाद भी बना ‘लाइफसेवर’
डॉक्टरों के अनुसार युवक को सिर में गंभीर चोट लगी थी, जिसके चलते उसे AIIMS भोपाल में भर्ती किया गया। इलाज के दौरान स्थिति बिगड़ती चली गई और अंततः उसे ब्रेन डेड घोषित किया गया। इस बीच अंगदान टीम ने परिजनों को जागरूक किया और वे तैयार हो गए।
परिवार की इस सहमति से युवक के हार्ट (Heart), दो किडनी (Kidneys) और दो कॉर्निया (Corneas) दान किए गए, जिससे पाँच मरीजों को नई उम्मीद की किरण मिली।
एम्स भोपाल में तीसरा सफल Heart Transplant
AIIMS भोपाल में यह तीसरा सफल हार्ट ट्रांसप्लांट (Heart Transplant) रहा। डॉक्टरों की टीम ने बताया कि करीब छह घंटे चली सर्जरी पूरी तरह सफल रही। ट्रांसप्लांट के बाद अस्पताल के स्टाफ और पुलिस कर्मियों ने युवक को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी।
Medico-Legal केस में भी दिखी संवेदनशीलता
क्योंकि मामला मेडिको-लीगल (Medico-Legal Case) था, इसलिए पोस्टमॉर्टम सीधे ऑपरेशन थिएटर (OT) में किया गया। यह AIIMS भोपाल में दूसरी बार हुआ जब ब्रेन डेड मरीज का पोस्टमॉर्टम OT में किया गया हो। इस प्रक्रिया से समय की बचत और अंगों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
परिजनों ने कहा – “उसका जाना बेकार नहीं जाएगा”
परिजनों ने कहा,
“हमारा बेटा अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसके अंग अब दूसरों की जिंदगी बनेंगे – यही उसके जाने का सुकून है।”
उनके इस कदम से अस्पताल का पूरा स्टाफ भावुक हो गया।
डॉक्टरों ने की अपील
AIIMS भोपाल की टीम ने कहा कि अगर समाज में अधिक लोग ऑर्गन डोनेशन (Organ Donation) के लिए आगे आएं, तो हजारों मरीजों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने सभी को अंगदान के प्रति जागरूक होने की अपील की।
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