Israel और Hamas के बीच संघर्ष एक बार फिर भड़क गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के नेतृत्व में बना “Middle East Peace Plan” अब फेल साबित हो रहा है। इज़रायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने ग़ाज़ा पट्टी में भारी एयरस्ट्राइक के आदेश दिए हैं, जिससे इलाके में हालात फिर बिगड़ गए हैं।
Gaza में दोबारा शुरू हुई तबाही
Hamas ने Israel की सीमा के पास कई रॉकेट दागे, जिसके जवाब में इज़रायल ने ग़ाज़ा पर ज़ोरदार बमबारी की। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर Ceasefire तोड़ने का आरोप लगाया है। नेतन्याहू ने कहा —
“हमास ने शांति का रास्ता छोड़ आतंक चुना है, अब उसे उसके कर्मों का परिणाम भुगतना होगा।”
Trump Peace Plan क्यों हुआ नाकाम?
ट्रम्प की यह योजना मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने की कोशिश थी, लेकिन यह जमीन पर कारगर नहीं हो सकी।
इस असफलता के पीछे कई बड़ी वजहें बताई जा रही हैं —
- हमास और इज़रायल के बीच भरोसे की भारी कमी,
- सीमाओं और सुरक्षा पर अस्पष्ट समझौता,
- अरब देशों की अधूरी भागीदारी,
- और वित्तीय सहायता का अभाव।
इस कारण यह Peace Plan “कागज़ी शांति” बनकर रह गया।
Arab देशों ने दिखाया सीमित सहयोग
सऊदी अरब, मिस्र और जॉर्डन जैसे देशों ने ट्रम्प के प्लान को समर्थन दिया था, लेकिन उन्होंने ज़मीनी कदम नहीं उठाए। किसी ने शांति सेना नहीं भेजी और न ही आर्थिक मदद दी। इससे पूरी प्रक्रिया कमजोर पड़ गई।
West Bank में भी बढ़ा तनाव
ग़ाज़ा के अलावा वेस्ट बैंक में भी इज़रायली सेना और फ़िलिस्तीनी गुटों के बीच झड़पें जारी हैं। अब तक दर्जनों लोगों की मौत और सैकड़ों घायल हो चुके हैं। इससे पूरे Middle East में instability बढ़ गई है।
आगे की राह मुश्किल
संयुक्त राष्ट्र (UN) और अमेरिका ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन फिलहाल हालात में सुधार के संकेत नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि —
“जब तक राजनीतिक भरोसा और मानवीय संवाद नहीं बढ़ेगा, तब तक कोई भी Peace Deal टिक नहीं पाएगी।”
Trump का Middle East Peace Plan अब इतिहास की एक और असफल कोशिश बन गया है। ग़ाज़ा में बढ़ता संघर्ष यह साबित करता है कि शांति केवल डिप्लोमेसी से नहीं, भरोसे से बनती है।
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