Assam में बकरीद 2026 से पहले एक ऐसा फैसला सामने आया है, जिसने पूरे राज्य में सामाजिक और राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। Himanta Biswa Sarma ने राज्य की कई ईदगाह कमेटियों द्वारा “गो-वध मुक्त बकरीद” मनाने के फैसले का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री ने इसे समाज में भाईचारा और शांति बनाए रखने की दिशा में सकारात्मक पहल बताया।
दरअसल, असम के कई जिलों में मुस्लिम संगठनों और ईदगाह कमेटियों ने इस बार बकरीद पर गाय की कुर्बानी नहीं देने का निर्णय लिया है। कमेटियों का कहना है कि उनका उद्देश्य त्योहार को शांतिपूर्ण माहौल में मनाना और सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करना है।
Eidgah Committees के फैसले पर CM सरमा ने जताई खुशी
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राज्य में कई संगठनों ने स्वेच्छा से यह फैसला लिया है, जो सामाजिक सौहार्द को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि असम हमेशा से विविध संस्कृतियों और परंपराओं का राज्य रहा है, इसलिए आपसी सम्मान बनाए रखना बेहद जरूरी है।
सीएम ने अपने बयान में कहा,
“गो-वध मुक्त बकरीद का फैसला स्वागत योग्य है। इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और भाईचारा मजबूत होगा।”
उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे सामाजिक एकता की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इसे राजनीतिक नजरिए से देख रहे हैं।
बकरीद से पहले बढ़ी प्रशासन की तैयारी
बकरीद को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आ रहा है। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को त्योहार के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष निगरानी रखने को कहा गया है।
इसके साथ ही लोगों से अफवाहों से बचने और सोशल Media पर जिम्मेदारी से व्यवहार करने की अपील भी की गई है।
सामाजिक सौहार्द पर फोकस
स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे फैसले समाज में तनाव कम करने और आपसी विश्वास बढ़ाने में मदद करते हैं। कई सामाजिक संगठनों ने भी ईदगाह कमेटियों के फैसले की सराहना की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों के दौरान संवेदनशील मुद्दों पर संवाद और समझदारी समाज को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती है। असम में इस बार बकरीद को लेकर लिया गया यह फैसला भी उसी दिशा में देखा जा रहा है।
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