मध्य-पूर्व में महीनों से जारी तनाव के बीच अब दुनिया को राहत देने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच 60 दिन के सीजफायर (Ceasefire) समझौते को लेकर बड़ी प्रगति हुई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच बातचीत अंतिम दौर में पहुंच चुकी है और जल्द आधिकारिक घोषणा हो सकती है।
अगर यह डील पूरी होती है तो इसका असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और ग्लोबल राजनीति पर भी दिखाई देगा। सबसे बड़ी बात यह है कि इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को दोबारा पूरी तरह खोला जा सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है।
60 दिन के Ceasefire में क्या-क्या होगा?
रिपोर्ट्स के अनुसार प्रस्तावित समझौते में 60 दिनों तक किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बन रही है। इस दौरान खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कई बड़े कदम उठाए जाएंगे।
बताया जा रहा है कि ईरान समुद्री मार्गों में बिछाई गई माइन हटाने पर तैयार हो सकता है, ताकि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य तरीके से शुरू हो सके। पिछले कुछ महीनों में इसी रास्ते पर बढ़े तनाव की वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था।
Uranium Program पर बड़ा फैसला संभव
इस पूरे समझौते का सबसे अहम हिस्सा ईरान का यूरेनियम प्रोग्राम माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान हाई-एनरिच्ड यूरेनियम के अपने स्टॉक को सीमित करने और परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता दोहराने को तैयार हो सकता है।
हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि ईरान पूरी तरह अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ेगा या केवल सीमित करेगा, लेकिन अमेरिकी प्रशासन इसे बड़ी कूटनीतिक सफलता के तौर पर देख रहा है। इसके बदले अमेरिका ईरान पर लगे कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने पर विचार कर सकता है।
क्यों अहम है Hormuz Strait?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में अगर यह मार्ग पूरी तरह खुलता है तो भारत समेत कई देशों को तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता लौट सकती है और ऊर्जा संकट का खतरा कुछ हद तक कम होगा।
पाकिस्तान समेत कई देशों ने निभाई भूमिका
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस समझौते को आगे बढ़ाने में पाकिस्तान और कुछ मध्य-पूर्वी देशों ने बैकडोर डिप्लोमेसी के जरिए अहम भूमिका निभाई है। कई दौर की गुप्त बैठकों और बातचीत के बाद दोनों देश इस मुकाम तक पहुंचे हैं।
हालांकि अभी तक अमेरिका और ईरान की ओर से कोई संयुक्त आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन वैश्विक स्तर पर इस संभावित समझौते पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
दुनिया को राहत मिलने की उम्मीद
अगर यह 60 दिन का सीजफायर समझौता सफल रहता है तो मध्य-पूर्व में लंबे समय से चला आ रहा तनाव कम हो सकता है। इससे तेल बाजार को राहत मिलने के साथ-साथ वैश्विक व्यापार और निवेश पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
फिलहाल दुनिया को अब उस आधिकारिक ऐलान का इंतजार है, जो आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा बदल सकता है।
हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
