पश्चिम बंगाल (West Bengal) की फालता विधानसभा सीट पर जारी मतगणना ने राज्य की राजनीति को फिर गर्मा दिया है। शुरुआती रुझानों में BJP उम्मीदवार देबांग्शु ने बढ़त बनाकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वहीं चुनाव से दूरी बनाने वाले TMC नेता जहांगीर का नाम चौथे स्थान पर दिखाई देने से राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
फालता उपचुनाव को इस बार बंगाल की राजनीति का बड़ा टेस्ट माना जा रहा था। चुनाव प्रचार के दौरान जिस तरह आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक बयानबाजी हुई, उससे पहले ही यह सीट सुर्खियों में आ चुकी थी। अब काउंटिंग के शुरुआती आंकड़े नए संकेत दे रहे हैं।
जहांगीर के पीछे हटने का पड़ा असर?
तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर ने चुनाव के बीच में खुद को सक्रिय प्रचार से अलग कर लिया था। इसके बाद माना जा रहा था कि पार्टी के वोटों पर असर पड़ सकता है। अब शुरुआती नतीजों में उनका चौथे नंबर पर पहुंचना इसी बात की ओर इशारा कर रहा है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि TMC के अंदरूनी समीकरण और वोटों का बंटवारा BJP के लिए फायदा बनता दिख रहा है। देबांग्शु को मिल रही बढ़त ने भाजपा कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा दिया है।
BJP समर्थकों में खुशी का माहौल
फालता में बढ़त की खबर आते ही भाजपा समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। कई जगहों पर पार्टी कार्यकर्ता मिठाइयां बांटते और नारे लगाते नजर आए। भाजपा नेताओं का दावा है कि बंगाल की जनता अब बदलाव चाहती है और फालता के रुझान उसी का संकेत हैं।
हालांकि तृणमूल कांग्रेस अभी भी पूरी तरह हार मानने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी नेताओं का कहना है कि अभी कई राउंड की गिनती बाकी है और अंतिम नतीजों तक तस्वीर बदल सकती है।
क्यों खास है Falta Bypoll?
फालता सीट का उपचुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट की लड़ाई नहीं माना जा रहा। इसे 2026 के राजनीतिक माहौल और जनता के मूड से जोड़कर देखा जा रहा है। BJP इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है, जबकि TMC इसे अपनी प्रतिष्ठा की लड़ाई मान रही है।
अगर शुरुआती रुझान अंतिम नतीजों में बदलते हैं, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा संदेश दे सकता है। फिलहाल पूरे राज्य की नजरें काउंटिंग सेंटर और अगले राउंड के आंकड़ों पर टिकी हुई हैं।
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