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बिलासपुर में नशे के खिलाफ पंचायतों का अभियान, गांव में निकाली जागरूकता रैली

Bilaspur में नशे और अवैध शराब के खिलाफ अब ग्राम पंचायतें भी सक्रिय हो गई हैं। जिला मुख्यालय से सटे ढेका ग्राम पंचायत में गुरुवार को सरपंच और जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों के साथ जागरूकता रैली निकाली। इस दौरान लोगों से शराब और नशे से दूर रहने की अपील की गई। साथ ही अवैध शराब बेचने वालों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। गांव-गांव जाकर लोगों को किया जागरूक ढेका ग्राम पंचायत के सरपंच मनीष घोरे और अन्य जनप्रतिनिधि गांव में लगातार नशामुक्ति अभियान चला रहे हैं। वे ग्रामीणों को नशे के दुष्प्रभाव समझा रहे हैं और युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील कर रहे हैं। यह अभियान लालखदान महमंद से लगे ढेका पंचायत क्षेत्र में हाईवे किनारे ढाबों और दुकानों में चल रही अवैध गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से भी चलाया जा रहा है। “अवैध दारू-गांजा बंद करो” के लगे नारे रैली के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने “अवैध दारू-गांजा बंद करो” के नारे लगाए। सरपंच मनीष घोरे ने ग्रामीणों से हाथ जोड़कर अपील की कि गांव को नशामुक्त बनाने में सभी सहयोग करें। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन और पुलिस अवैध शराब व मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई करती है, तो पंचायत किसी भी आरोपी का समर्थन नहीं करेगी। अवैध कारोबारियों को दी चेतावनी अभियान के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों ने ढाबों, चाय-नाश्ते की दुकानों और ठेलों की आड़ में चल रहे अवैध शराब कारोबार पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने ऐसे कारोबारियों को तुरंत अवैध गतिविधियां बंद करने की चेतावनी दी। साथ ही कहा कि जरूरत पड़ने पर पुलिस के साथ मिलकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस को सूचना देने की अपील ग्रामीणों को बताया गया कि नशे की वजह से गांव का माहौल खराब हो रहा है और युवाओं पर इसका गलत असर पड़ रहा है। अभियान के दौरान लोगों से अपील की गई कि किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस और ग्राम पंचायत को दें। यह अभियान एसएसपी रजनेश सिंह की पहल से जुड़कर चलाया जा रहा है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ में D.Ed अभ्यर्थियों ने दी आमरण अनशन की चेतावनी, AAP ने सरकार को लिखा पत्र

Chhattisgarh में D.Ed अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर मामला फिर गरमा गया है। Aam Aadmi Party ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर 10 जून तक पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दी गई, तो 11 जून से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने इस संबंध में मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai को पत्र लिखा है। 2300 पद खाली होने का दावा उत्तम जायसवाल ने दावा किया कि राज्य में सहायक शिक्षक के करीब 2300 पद खाली हैं। इनमें करीब 1600 पद आदिवासी महिला और पुरुष अभ्यर्थियों से जुड़े बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि लंबे समय से पात्र अभ्यर्थी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। 153 दिनों से जारी है प्रदर्शन D.Ed अभ्यर्थी पिछले 153 दिनों से रायपुर के तूता धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि नौकरी नहीं मिलने से वे आर्थिक, मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। AAP नेता ने कहा कि अभ्यर्थी लगातार शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। कोर्ट के आदेश का भी दिया हवाला उत्तम जायसवाल ने पत्र में दावा किया कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सरकार को न्यायालय के निर्देशों का सम्मान करते हुए जल्द नियुक्ति देनी चाहिए। आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी का आरोप पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को कई बार गिरफ्तार किया गया। AAP का कहना है कि आंदोलनकारियों को तीन बार जेल भेजा गया और चार दिन तक हिरासत में रखा गया। इसके बावजूद अभ्यर्थियों ने शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखा। “सरकार जल्द फैसला ले” उत्तम जायसवाल ने कहा कि नियुक्ति में लगातार देरी के कारण कई अभ्यर्थी मानसिक दबाव में हैं। उन्होंने इसे सामाजिक और मानवीय संकट बताते हुए सरकार से संवेदनशील निर्णय लेने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि 10 जून तक नियुक्ति नहीं हुई, तो 11 जून से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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सागर में शिवरात्रि जुलूस में हमला करने वाला मुख्य आरोपी गिरफ्तार, 3 महीने से था फरार

Sagar जिले के देवरी में शिवरात्रि जुलूस के दौरान हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने तीन महीने से फरार चल रहे मुख्य आरोपी 19 वर्षीय मयंक यादव को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को शुक्रवार को मुखबिर की सूचना के आधार पर पकड़ा गया। पूछताछ के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया। शिव बारात में हुआ था विवाद जानकारी के अनुसार, 15 फरवरी को देवरी थाना क्षेत्र में शिव बारात निकाली जा रही थी। इसी दौरान जुलूस में तलवार लाने की बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और मारपीट की स्थिति बन गई। आरोप है कि मयंक यादव, देव उर्फ देवरा यादव और ओम यादव ने कार्यक्रम के आयोजक अनिल उर्फ अन्ना कोष्टी पर हमला कर दिया। आयोजक पर चाकू से किया हमला हमले के दौरान मयंक यादव ने अनिल पर चाकू से वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को तुरंत देवरी अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे सागर रेफर कर दिया था। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। वारदात में इस्तेमाल चाकू बरामद देवरी थाना प्रभारी हरिराम मानकर ने बताया कि आरोपियों की तलाश लगातार की जा रही थी। मामले में एक नाबालिग आरोपी को पहले ही पकड़ा जा चुका है। शुक्रवार को लोकेशन ट्रेस कर पुलिस ने मयंक यादव को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी के पास से वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद किया है। एक आरोपी अब भी फरार पुलिस के मुताबिक इस मामले में शामिल एक अन्य आरोपी ओम यादव अभी भी फरार है। उसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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जबलपुर में किसान को मारी गोली, पुरानी रंजिश में कट्टे से किया हमला

Jabalpur जिले के पाटन थाना क्षेत्र में शनिवार सुबह एक किसान को गोली मार दी गई। ग्राम खमदेही में खेत जा रहे किसान पर बाइक सवार युवक ने कट्टे से फायर कर दिया। गोली किसान के पेट में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल किसान को पहले पाटन स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर कर दिया गया। खेत जाते समय हुआ हमला जानकारी के अनुसार, खमदेही गांव निवासी धर्मेंद्र रैकवार शनिवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे अपने खेत की ओर जा रहा था। इसी दौरान गांव के बाहर बाइक से पहुंचे रामनारायण पटेल ने उसे रोक लिया। दोनों के बीच पहले कहासुनी हुई और फिर विवाद बढ़ गया। आरोप है कि गुस्से में आरोपी ने कट्टा निकालकर फायर कर दिया। गोली धर्मेंद्र के पेट में लगी और वह मौके पर ही गिर पड़ा। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। छह महीने पुरानी रंजिश गोली चलने की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल किसान को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। घायल धर्मेंद्र ने पुलिस को बताया कि करीब छह महीने पहले रामनारायण के खेत में काम करने वाले कर्मचारियों से उसका विवाद हुआ था। उस समय दोनों पक्षों के बीच मारपीट भी हुई थी। पीड़ित का आरोप है कि उसी पुरानी रंजिश के चलते उस पर हमला किया गया। आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस घटना की सूचना मिलते ही पाटन थाना प्रभारी गोपेंद्र सिंह बघेल पुलिस टीम के साथ अस्पताल पहुंचे और घायल के बयान दर्ज किए। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में मामला पुरानी दुश्मनी से जुड़ा नजर आ रहा है। टीआई गोपेंद्र सिंह बघेल ने बताया कि धर्मेंद्र खेत जाने से पहले गांव के नए सामुदायिक केंद्र में पानी डालने के लिए रुका था। इसी दौरान आरोपी वहां पहुंचा और मौका मिलते ही गोली चला दी। पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही है। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
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ओंकारेश्वर में RTO और ट्रैफिक पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 13 यात्री बसों पर जुर्माना; 4 ऑटो जब्त

तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आरटीओ और ट्रैफिक पुलिस ने संयुक्त रूप से सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली 13 यात्री बसों पर कार्रवाई करते हुए 44 हजार 500 रुपए का जुर्माना वसूला गया। वहीं बिना जरूरी दस्तावेजों के चल रहे 4 ऑटो रिक्शा भी जब्त किए गए हैं। अभियान के दौरान जब्त किए गए ऑटो रिक्शा को मांधाता थाना परिसर में सुरक्षित खड़ा कराया गया है। कार्रवाई से वाहन चालकों में हड़कंप की स्थिति रही। 52 यात्री बसों की हुई जांच अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी दीपक मांझी ने बताया कि जांच अभियान के दौरान कुल 52 यात्री बसों की जांच की गई। इस दौरान बसों के फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट, बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) की बारीकी से जांच की गई। जिन वाहनों में दस्तावेजों की कमी या अन्य अनियमितताएं मिलीं, उनके खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई की गई। श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर प्रशासन का फोकस परिवहन विभाग का कहना है कि ओंकारेश्वर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में यात्रियों को सुरक्षित सफर उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। अधिकारियों ने साफ किया है कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए आगे भी इस तरह के सघन जांच अभियान लगातार चलाए जाएंगे। अधिक खबरों और अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com।
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पुणे पोर्श केस में फिर मचा बवाल: जमानत के बाद पार्टी करता दिखा आरोपी परिवार, पीड़ितों के परिजनों में नाराजगी

महाराष्ट्र के पुणे में मई 2024 में हुए चर्चित पोर्श कार हादसे को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में आरोपी नाबालिग के पिता को जमानत मिलने के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें आरोपी परिवार पार्टी करता और डांस करता नजर आ रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पीड़ित परिवारों में नाराजगी बढ़ गई है। यह मामला पुणे के कल्याणी नगर इलाके का है, जहां तेज रफ्तार पोर्श कार ने दो आईटी इंजीनियरों को कुचल दिया था। हादसे में दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई थी। बताया गया था कि कार एक 17 वर्षीय नाबालिग चला रहा था। एमपी के दो इंजीनियरों की गई थी जान मृतकों में मध्यप्रदेश के जबलपुर निवासी अश्विनी कोष्ठा और उमरिया के रहने वाले एक अन्य युवा इंजीनियर शामिल थे। हादसे के बाद पूरे देश में गुस्सा देखने को मिला था और जुवेनाइल जस्टिस सिस्टम पर भी सवाल उठे थे। घटना के बाद जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी नाबालिग को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी थी। वहीं आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। वायरल वीडियो पर भड़का पीड़ित परिवार अब सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। जबलपुर निवासी मृतक इंजीनियर अश्विनी कोष्ठा के पिता ने आरोपी परिवार के व्यवहार को बेहद असंवेदनशील बताया है। उन्होंने कहा कि जिस परिवार की लापरवाही से दो युवाओं की जान चली गई, उसी परिवार का इस तरह जश्न मनाना पीड़ित परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने कहा कि आरोपी परिवार में न शर्म बची है और न ही संवेदनशीलता। इस तरह की हरकतें न्याय व्यवस्था का मजाक उड़ाने जैसी हैं। पीड़ित परिवार ने आरोपी को मिली जमानत पर दोबारा विचार करने की मांग भी की है। आरोपी परिवार ने दी सफाई वहीं आरोपी परिवार ने वायरल वीडियो को पुराना बताया है। परिवार का कहना है कि यह वीडियो 2 सितंबर 2023 का है, जब गोवा में उनकी 25वीं शादी की सालगिरह मनाई गई थी। परिवार ने आरोप लगाया कि वीडियो को गलत तरीके से पेश कर माहौल बनाया जा रहा है। आरोपी पक्ष का यह भी कहना है कि यह उनका निजी वीडियो है, जिसे बिना अनुमति सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। उन्होंने वीडियो लीक करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात भी कही है। सोशल मीडिया से लेकर कानूनी गलियारों तक चर्चा फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया से लेकर कानूनी गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग लगातार इस केस में सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। अधिक खबरों और अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com।
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ग्वालियर रेत फड़ गोलीकांड: मुख्य आरोपी विष्णु दुबे और भतीजा गिरफ्तार, लाइसेंसी पिस्टल जब्त

ग्वालियर के महाराजपुरा थाना क्षेत्र में रेत फड़ पर हुई गोलीबारी और हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी विष्णु दुबे और उसके भतीजे बृजमोहन को घटना के कुछ ही घंटों के भीतर गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों को गोहद से पकड़ा गया है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई लाइसेंसी पिस्टल भी जब्त कर ली है। बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे रेत फड़ पर किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। पुलिस पूछताछ में BSF से रिटायर्ड आरोपी विष्णु दुबे ने बताया कि उसका सत्यभान गुर्जर और भोला उर्फ महेंद्र गुर्जर से झगड़ा हुआ था। आरोपी के मुताबिक विवाद के दौरान उसके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे वह गुस्से में आ गया। इसके बाद वह घर गया, लाइसेंसी पिस्टल लेकर वापस लौटा और फायरिंग कर दी। गोलीबारी में भोला उर्फ महेंद्र गुर्जर को पेट और सीने में दो गोलियां लगीं। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं सत्यभान गुर्जर भी गोली लगने से घायल हो गए, जिनका अस्पताल में इलाज जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपी फिलहाल महाराजपुरा थाना लॉकअप में हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। आरोपी विष्णु दुबे ने पूछताछ में यह भी कहा कि यदि मामले में निर्दोष लोगों को फंसाया गया तो विवाद और बढ़ सकता है। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया था। मृतक भोला गुर्जर के परिजनों ने पोस्टमार्टम के बाद शव को एयरपोर्ट तिराहे पर रखकर चक्का जाम कर दिया। परिजनों ने आरोपियों पर सख्त कार्रवाई, परिवार के एक सदस्य को नौकरी और लाइसेंसी हथियार देने की मांग की। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और समझाइश के बाद जाम खुलवाया। अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इस बीच घटना का CCTV वीडियो भी सामने आया है, जिसमें झगड़े के बाद आरोपी विष्णु दुबे लाइसेंसी पिस्टल से भोला और सत्यभान गुर्जर पर फायरिंग करता दिखाई दे रहा है। फायरिंग के बाद आरोपी मौके से भाग निकला था। पुलिस ने गुरुवार को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें पूछताछ के लिए रिमांड पर भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर रही है।
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भोपाल में डेढ़ करोड़ का अवैध कफ सिरप फैक्ट्री का भंडाफोड़, STF की रेड में 700 से ज्यादा पेटियां जब्त

भोपाल के गांधी नगर इलाके में एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब डेढ़ करोड़ रुपए कीमत का अवैध कफ सिरप पकड़ा है। यह कार्रवाई डोबरा पटेल सिटी कॉलोनी में गुरुवार देर रात की गई। छापेमारी के दौरान एसटीएफ ने 700 से ज्यादा पेटियां, कफ सिरप बनाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और भारी मात्रा में नशीला सिरप बरामद किया। मामले में 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है। जानकारी के मुताबिक, मकान में ‘आफ कफ’ नाम से अवैध रूप से नशीला कफ सिरप तैयार किया जा रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद एसटीएफ की टीम ने रात करीब 12 बजे दबिश दी। कार्रवाई शुक्रवार सुबह 3 बजे तक चली। छापे के दौरान मकान के अलग-अलग कमरों में कफ सिरप की बोतलें और कार्टन भरे मिले। एसटीएफ ने बरामद कफ सिरप के सैंपल जांच के लिए भेज दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी जारी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस पूरी कार्रवाई की भनक स्थानीय गांधी नगर पुलिस को भी नहीं लगी। एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय से इलाके से अवैध नशीले कफ सिरप की सप्लाई की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद गुप्त रूप से निगरानी की जा रही थी। जिस मकान में यह अवैध फैक्ट्री संचालित हो रही थी, वह किसी मालवीय नाम के व्यक्ति का बताया जा रहा है। हालांकि खबर लिखे जाने तक मकान मालिक से संपर्क नहीं हो सका था। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध कारोबार का नेटवर्क किन लोगों तक फैला हुआ है और इसकी सप्लाई प्रदेश के किन इलाकों में की जा रही थी। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि रिहायशी इलाके में इस तरह का अवैध कारोबार चल रहा है।
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गुना में पारिवारिक विवाद से परेशान विवाहिता मोबाइल टावर पर चढ़ी, 3 घंटे बाद प्रशासन ने सुरक्षित उतारा

मध्य प्रदेश के गुना जिले में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक विवाहिता पारिवारिक विवाद से परेशान होकर गांव के मोबाइल टावर पर चढ़ गई। करीब तीन घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम ने समझाइश देकर महिला को सुरक्षित नीचे उतार लिया। मामला गुना जिले की कुंभराज तहसील के ग्राम खेजरा रामा का है। जानकारी के अनुसार, 23 वर्षीय निकिता की शादी करीब तीन साल पहले कुलदीप मीना से हुई थी। बताया जा रहा है कि ससुराल में लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था। इसी बात से नाराज होकर गुरुवार सुबह करीब 5 बजे निकिता गांव में लगे मोबाइल टावर पर चढ़ गई। ग्रामीणों ने दी पुलिस को सूचना सुबह ग्रामीणों की नजर महिला पर पड़ी तो गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। खबर मिलते ही कुंभराज तहसीलदार कमल मंडेलिया, थाना प्रभारी पंकज त्यागी और पटवारी प्रवीण सिंह राणा टीम के साथ मौके पर पहुंचे। स्थिति को देखते हुए नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। समझाइश से शांत हुआ मामला महिला काफी नाराज थी और नीचे आने को तैयार नहीं हो रही थी। ऐसे में प्रशासन ने बल प्रयोग करने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया। अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के जरिए महिला से लगातार संवाद किया और भरोसा दिलाया कि उसकी हर समस्या सुनी जाएगी। अधिकारियों ने महिला से कहा कि उसकी शिकायतों पर प्रशासन और कानून के दायरे में रहकर उचित कार्रवाई की जाएगी। लगातार समझाइश और भरोसे के बाद महिला का गुस्सा शांत हुआ और वह धीरे-धीरे टावर से नीचे उतर आई। सुरक्षित नीचे उतरने पर लोगों ने ली राहत की सांस महिला के सुरक्षित नीचे आने के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों और अधिकारियों ने राहत की सांस ली। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तुरंत महिला का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। घटना के बाद गांव में काफी देर तक लोगों की भीड़ जुटी रही। www.deshharpal.com पर पढ़ें देश-दुनिया और प्रदेश की ताजा खबरें।
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ईद पर इंदौर से दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, शहर काजी ने गाय को राष्ट्रीय धरोहर बनाने की उठाई मांग

ईद के मौके पर देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द की खूबसूरत तस्वीर सामने आई। सदर बाजार स्थित ईदगाह में नमाज से पहले शहर काजी डॉ. इशरत अली ने भाईचारे, पर्यावरण संरक्षण और नशे से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने खुले मंच से गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की, जिसका वहां मौजूद हजारों नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। इसके बाद शांतिपूर्ण माहौल में ईद की नमाज अदा की गई। गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग शहर काजी डॉ. इशरत अली ने कहा कि गाय को दूसरी कौम के लोग बेहद सम्मान की नजर से देखते हैं। मुसलमानों पर अक्सर गोवंश को लेकर आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए, ताकि उसके वध पर पूरी तरह रोक लग सके। पानी बचाने और पर्यावरण बचाने की अपील अपने संबोधन में शहर काजी ने लोगों से पानी बचाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी को जमीन में उतारना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। सिर्फ सरकार या प्रशासन के भरोसे नहीं रहना चाहिए। उन्होंने लोगों से ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की भी अपील की। नशे के कारोबार पर जताई चिंता शहर काजी ने नशे के बढ़ते कारोबार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समाज के कुछ लोग खुद नशा बेच रहे हैं, जिससे युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है। उन्होंने कहा कि इंदौर में नशे का मुद्दा वे लगातार उठाते रहे हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी इस विषय को गंभीरता से उठा चुके हैं। इंदौर की ईद एक और वजह से खास रही। यहां पिछले 50 वर्षों से एक हिंदू परिवार शहर काजी को उनके घर से ईदगाह तक लाने और वापस छोड़ने की परंपरा निभा रहा है। 50 साल पुरानी परंपरा बनी मिसाल इस बार भी सत्यनारायण सलवाडिया और उनके परिवार ने शहर काजी का फूल-मालाओं से स्वागत किया और उन्हें ससम्मान विशेष रूप से सजाई गई बग्घी में ईदगाह तक पहुंचाया। इस परंपरा को लोगों ने गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बताया। खंडवा में भी उठी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग बकरीद के मौके पर खंडवा के मुख्य ईदगाह समेत करीब 40 मस्जिदों में मुल्क की खुशहाली के लिए दुआ की गई। शहर काजी सैयद निसार अली ने केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि खंडवा के मुस्लिम समाज ने वर्षों से हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए गोवंश की कुर्बानी नहीं दी है। साथ ही उन्होंने गोवंश के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग और अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की। धीरेंद्र शास्त्री ने भी किया समर्थन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को लेकर 27 जुलाई से राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि देशभर में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा और जिलों में ज्ञापन सौंपे जाएंगे। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अब देश में इस मुद्दे को लेकर माहौल बदल रहा है और सभी समाजों से समर्थन मिल रहा है www.deshharpal.com पर पढ़ें देश-दुनिया और प्रदेश की ताजा खबरें।
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अक्षर पटेल का ऑलराउंड शो, शुभमन गिल की कप्तानी पारी; भारत ने इंग्लैंड को 6 विकेट से हराकर पहला वनडे जीता

बर्मिंघम। ऑलराउंडर अक्षर पटेल के शानदार प्रदर्शन और कप्तान शुभमन गिल की बेहतरीन बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड को पहले वनडे मुकाबले में 6 विकेट से हराकर सीरीज में विजयी शुरुआत की। एजबेस्टन मैदान पर खेले गए मैच में भारत ने 259 रन के लक्ष्य को 45.2 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 262 रन बनाकर हासिल कर लिया। अक्षर पटेल ने नाबाद 57 रन बनाए, जबकि वॉशिंगटन सुंदर ने भी नाबाद 52 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम को जीत तक पहुंचाया। कप्तान शुभमन गिल ने 80 रन बनाए, लेकिन मैच के दौरान क्रैम्प्स की समस्या के कारण उन्हें रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। शुरुआती झटकों के बाद गिल ने संभाली पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। रोहित शर्मा 11 रन और विराट कोहली 5 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर ने तीसरे विकेट के लिए 101 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम की पारी को संभाला। श्रेयस 35 रन बनाकर रनआउट हुए, जबकि केएल राहुल बोल्ड होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर ने जिम्मेदारी संभालते हुए पांचवें विकेट के लिए 102 रन की अविजित साझेदारी की और भारत को शानदार जीत दिलाई। जो रूट और लियाम डॉसन ने इंग्लैंड को संभाला इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 47.5 ओवर में 258 रन बनाए। इंग्लैंड की शुरुआत मजबूत रही और टीम ने 61 रन तक कोई विकेट नहीं गंवाया, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने जोरदार वापसी करते हुए महज 19 रन के भीतर 5 विकेट झटक दिए। मध्यक्रम में जो रूट ने 76 रन और लियाम डॉसन ने 68 रन की अहम पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 121 रन की साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। अक्षर पटेल ने गेंद और बल्ले दोनों से निभाई अहम भूमिका भारतीय गेंदबाजों में अक्षर पटेल सबसे सफल रहे। उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट अपने नाम किए। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार ने 2-2 विकेट हासिल किए। जसप्रीत बुमराह और शिवम दुबे को एक-एक सफलता मिली। गेंद और बल्ले दोनों से बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अक्षर पटेल ने टीम इंडिया की जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई और भारत ने सीरीज की शानदार शुरुआत की। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CAG रिपोर्ट में जल जीवन मिशन की पोल: छत्तीसगढ़ में 33% नल कनेक्शन गैर-कार्यशील, ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा

रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन को लेकर कई गंभीर खामियों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार कमजोर योजना, धीमा क्रियान्वयन, निगरानी की कमी और गलत रिपोर्टिंग के कारण ग्रामीण पेयजल योजनाओं की प्रभावशीलता और दीर्घकालिक स्थिरता प्रभावित हुई है। मार्च 2024 तक की अवधि पर आधारित ‘छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का प्रदर्शन ऑडिट’ रिपोर्ट मंगलवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में पेश की। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसके लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद मिशन के कार्यों में तेजी आई है। योजना निर्माण में गंभीर खामियां CAG की रिपोर्ट के मुताबिक जल जीवन मिशन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कई स्थानों पर गांव स्तर की कार्ययोजना तैयार किए बिना ही जिला स्तरीय योजनाएं बना दी गईं, जबकि राज्य स्तरीय कार्ययोजना तैयार ही नहीं की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राज्य स्तर पर जल सुरक्षा योजना नहीं बनाई गई, जिससे जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता और योजनाओं के रखरखाव की स्पष्ट रणनीति विकसित नहीं हो सकी। 33 प्रतिशत नल कनेक्शन निकले गैर-कार्यशील रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 तक 50 लाख ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। जनवरी 2025 तक 40.10 लाख फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) लगाए गए। हालांकि, इनमें से 13.31 लाख (करीब 33%) कनेक्शन गैर-कार्यशील पाए गए। इसके पीछे सूख चुके जल स्रोत, अधूरी ओवरहेड टंकियां, बिजली कनेक्शन का अभाव और सोलर पंप स्थापित नहीं होना प्रमुख कारण बताए गए हैं। ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा राज्य के 19,656 गांवों को मार्च 2024 तक ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाना था, लेकिन केवल 716 गांव (3.64 प्रतिशत) ही इस लक्ष्य तक पहुंच सके। ऑडिट में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां अधूरे कार्यों के बावजूद गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित कर दिया गया। किसी भी जिले में 100% कवरेज नहीं मार्च 2024 तक राज्य के 33 में से किसी भी जिले और 146 में से किसी भी विकासखंड में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज नहीं था। योजनाओं की प्रगति बेहद धीमी रिपोर्ट के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 29,153 सिंगल विलेज स्कीम में से मार्च 2024 तक केवल 172 योजनाएं पूरी हो सकीं। इनमें भी सिर्फ 32 ग्राम पंचायतों को योजनाओं का संचालन सौंपा गया। वहीं, स्वीकृत 70 मल्टी विलेज स्कीम में से मार्च 2025 तक एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी, जिससे करीब 9.85 लाख घरों तक सतही जल स्रोतों से पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावित हुआ। सोलर आधारित योजनाओं में भी अनियमितताएं CAG ने पाया कि कई सोलर आधारित पेयजल योजनाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक नल कनेक्शन जोड़ दिए गए। इसके कारण 28,984 परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वित्तीय और गुणवत्ता संबंधी कमियां रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार केंद्र और राज्यांश मिलाकर 6,480.04 करोड़ रुपये की आवश्यक वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रही। साथ ही मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जिला खनिज न्यास (DMF), सांसद निधि और CSR जैसी योजनाओं के संसाधनों के समन्वय के लिए भी कोई प्रभावी रणनीति नहीं बनाई गई। जल गुणवत्ता जांच की व्यवस्था कमजोर राज्य की 75 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से केवल 4 प्रयोगशालाएं ही सभी 13 निर्धारित जल गुणवत्ता मानकों की जांच करने में सक्षम पाई गईं। इसके अलावा 37 प्रतिशत प्रयोगशालाओं को NABL की मान्यता प्राप्त नहीं थी। रिपोर्ट में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी निर्धारित मानकों के अनुसार जल गुणवत्ता जांच नहीं होने की बात कही गई है। CAG की प्रमुख सिफारिशें रिपोर्ट में सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं— सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को ठहराया जिम्मेदार CAG रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार मिशन को खराब स्थिति में छोड़कर गई थी, जिसके कारण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समय-सीमा 2024 से बढ़ाकर 2028 तक कर दी है। मार्च 2026 में स्वीकृत मिशन के दूसरे चरण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।

रायपुर में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा

रायपुर। राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा 16 जुलाई को धार्मिक आस्था, वैदिक परंपराओं और भव्य आयोजन के साथ निकाली जाएगी। वहीं बाहुड़ा यात्रा 24 जुलाई को आयोजित होगी। मंदिर परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा माता सुभद्रा के तीनों रथों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रथयात्रा से पहले 14 जुलाई की शाम 6 बजे भगवान का नेत्रोत्सव आयोजित किया जाएगा। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सांस्कृतिक एकता, भाईचारे और सनातन परंपरा का भी प्रतीक माना जाता है। भक्त और भगवान के मिलन का महापर्व श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष एवं विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि रथयात्रा भक्तों और भगवान के प्रत्यक्ष मिलन का महापर्व है। वर्ष में केवल इसी अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर निकलकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। 11 वैदिक पंडित कराएंगे विशेष पूजन रथयात्रा के दिन सुबह 11 वैदिक पंडितों के सान्निध्य में भगवान का विशेष अभिषेक, पूजन और हवन कराया जाएगा। चंदन, केसर, कस्तूरी, कपूर सहित विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से भगवान का दिव्य स्नान कराया जाएगा। इसके बाद भगवान को गजामूंग महाप्रसाद अर्पित किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और मंगल वाद्यों की गूंज के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करेंगे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा रथयात्रा की सबसे प्रमुख परंपराओं में शामिल ‘छेरा पहरा’ का निर्वहन इस वर्ष भी किया जाएगा। परंपरा के अनुसार राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान के रथ के आगे सोने की झाड़ू से मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे। यह परंपरा सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश देती है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। भजन, झांकियों और लोकनृत्य से गूंजेगा शहर रथयात्रा के दौरान महिला मंडलों द्वारा भजन-कीर्तन, आकर्षक सांस्कृतिक झांकियां और पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। “जय जगन्नाथ” के जयघोष के साथ मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा। श्रद्धालुओं से की गई विशेष अपील श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति ने प्रदेशभर के श्रद्धालुओं से सपरिवार रथयात्रा में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने और सनातन संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने की अपील की है। रायपुर और छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सरकार और बोर्ड से 10 दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता।” हालांकि, नीति को लागू करने में सामने आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, CBSE और संबंधित पक्षों से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई है। इसके तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। इससे कई छात्रों को पहले से पढ़ी जा रही भाषाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। क्या है विवाद? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने पर्याप्त तैयारी के बिना नई भाषा नीति लागू कर दी है। उनके मुताबिक कई स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े अहम सवाल और जवाब 1. मामला क्या है? सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। हालांकि, CBSE ने 6 जून को संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि इस वर्ष कक्षा 10 के छात्रों को तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। 2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है? पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन) पढ़ते थे। नए नियम के अनुसार अब तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुनी जा सकेगी। 3. याचिका किसने दायर की? यह याचिका छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी की ओर से दायर की गई है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। 4. याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति क्या है? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था अचानक लागू कर दी गई। कई भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे में छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. किताबों को लेकर क्या दलील दी गई? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से फिलहाल केवल तीन भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करना व्यवहारिक रूप से कठिन होगा। 6. शिक्षकों की कमी पर क्या कहा गया? याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि नई भारतीय भाषाएं पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होगी, लेकिन इतने कम समय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषाएं बंद हो जाएंगी? नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन इसके साथ उन्हें दो भारतीय भाषाएं भी पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी। 8. क्या तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा होगी? नहीं। CBSE ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का अलग बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव न बढ़े। 9. अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी। नई शिक्षा नीति 2020 क्या है? भारत सरकार ने 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को मंजूरी दी थी। यह 34 वर्षों बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जाता है। इससे पहले शिक्षा नीति 1986 में लागू हुई थी, जिसे 1992 में संशोधित किया गया था। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना, छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकसित करना है। केंद्र सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से 2030 तक लागू करने का लक्ष्य रखा है। चूंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए इसे लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की भूमिका होती है। देश, शिक्षा और करियर से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बिलासपुर: CM हेल्पलाइन शिकायतों के खराब निराकरण पर PHE के ईई को नोटिस, कलेक्टर ने अधिकारियों को लगाई फटकार

बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों के निराकरण की समीक्षा बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं मिलने पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) रूपेश कुमार धनंजय को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। टीएल (समय-सीमा) बैठक में कलेक्टर ने सभी विभागों के अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का केवल औपचारिक निपटारा करने के बजाय उनका गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने समय-सीमा का पालन करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। एकल शिक्षकीय स्कूलों में जल्द होंगे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने एकल शिक्षकीय स्कूलों में तत्काल अतिथि शिक्षक नियुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं भी ली जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। जर्जर स्कूल भवनों में नहीं लगेंगी कक्षाएं कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जर्जर भवनों में किसी भी स्थिति में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएं। ऐसे विद्यालयों के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था करने और नए भवन या अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के प्रस्ताव शीघ्र भेजने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को भी लगाई फटकार जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए डीएमएफ की राशि का प्रभावी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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