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गुना के महूगढ़ा स्टेशन पर बनेगा गति शक्ति कार्गो टर्मिनल, माल गोदाम होगा शहर से बाहर शिफ्ट

गुना जिले के महूगढ़ा रेलवे स्टेशन को जल्द ही ‘गति शक्ति कार्गो टर्मिनल’ के रूप में विकसित किया जाएगा। रेलवे ने इस परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। साथ ही माल ढुलाई को और सुगम बनाने के लिए तरावटा रेलवे स्टेशन पर नया गुड्स शेड बनाने का प्रस्ताव भी भेजा गया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद गुना शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन से माल गोदाम को बाहर शिफ्ट करने की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने की उम्मीद है। रेलवे ने पूरी की टेंडर प्रक्रिया केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने गुना की विभिन्न संस्थाओं ने रेलवे से जुड़ी कई समस्याएं उठाई थीं। इनमें सबसे प्रमुख मांग शहर के बीच स्थित माल गोदाम को स्थानांतरित करने की थी। शहर की बढ़ती आबादी और यातायात को देखते हुए यह मांग लंबे समय से की जा रही थी। पश्चिम मध्य रेलवे, जबलपुर के उप महाप्रबंधक ने जानकारी दी कि महूगढ़ा रेलवे स्टेशन की रेलवे भूमि पर कार्गो टर्मिनल विकसित करने के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस टर्मिनल को सीधे सड़क मार्ग से जोड़ा जाएगा, जिससे माल ढुलाई तेज, आसान और कम खर्चीली होगी। तरावटा स्टेशन पर भी बनेगा नया गुड्स शेड रेलवे ने माल परिवहन को और मजबूत बनाने के लिए तरावटा रेलवे स्टेशन पर नए गुड्स शेड का प्रस्ताव भी तैयार किया है। इसके बनने से क्षेत्र के व्यापारियों और उद्योगों को माल की आवाजाही में बेहतर सुविधा मिलेगी। मेमू ट्रेन के किराए की समस्या का भी होगा समाधान बीना-कोटा मेमू ट्रेन के किराए में अलग-अलग स्टेशनों पर अंतर की शिकायत भी रेलवे के सामने रखी गई। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यह ट्रेन दो अलग-अलग जोन में संचालित होती है। भोपाल जोन में इसे एक्सप्रेस और कोटा मंडल में पैसेंजर ट्रेन माना जाता है, जिसके कारण किराए में अंतर आता है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए रेलवे बोर्ड से सभी मेमू ट्रेनों में एक समान किराया लागू करने का अनुरोध किया गया है। स्टेशन पर पानी की व्यवस्था होगी बेहतर गुना रेलवे स्टेशन पर पेयजल संकट को दूर करने के लिए रेलवे ने नगर पालिका के साथ समन्वय शुरू किया है। फिलहाल स्टेशन पर प्रतिदिन दो लाख लीटर पानी की आपूर्ति हो रही है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए 10 लाख लीटर पानी की व्यवस्था के लिए नगर पालिका में राशि जमा करा दी गई है। साथ ही स्टेशन परिसर में नए पानी के नल भी लगाए जा रहे हैं। अन्य सुविधाओं में भी होगा सुधार रेलवे ने स्थानीय लोगों द्वारा उठाई गई अन्य समस्याओं पर भी ध्यान देने का आश्वासन दिया है। इनमें रेलवे अंडरब्रिज में जलभराव, टिकट विंडो की संख्या बढ़ाने और स्टेशन के शौचालयों की नियमित सफाई जैसे मुद्दे शामिल हैं। रेलवे का कहना है कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए इन सभी बिंदुओं पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। धिक जानकारी और लेटेस्ट अपडेट्स के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ में मानसून ने पूरे प्रदेश को किया कवर, सरगुजा में आकाशीय बिजली गिरने से 3 की मौत

छत्तीसगढ़ में मानसून ने अब पूरे प्रदेश को अपनी चपेट में ले लिया है। मौसम विभाग के अनुसार 22 जून को राज्य में प्रवेश करने वाला मानसून अब सभी जिलों तक पहुंच चुका है। हालांकि, बारिश के साथ आकाशीय बिजली भी कहर बरपा रही है। सरगुजा जिले में सोमवार शाम बिजली गिरने से दो बच्चों और एक युवक की मौत हो गई, जबकि एक बच्ची गंभीर रूप से झुलस गई। पेड़ के नीचे खड़े थे बच्चे, अचानक गिरी बिजली यह दर्दनाक घटना सरगुजा जिले के धौरपुर थाना क्षेत्र के डुमकी गांव की है। सोमवार शाम कुछ बच्चे आम बीनने के लिए पेड़ के नीचे खड़े थे। इसी दौरान बैल चरा रहे राम साय (36) भी वहां पहुंच गए। तभी अचानक पेड़ पर आकाशीय बिजली गिर गई और चारों उसकी चपेट में आ गए। हादसे में 5 वर्षीय सागर, 9 वर्षीय रानी और 36 वर्षीय राम साय की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं सागर की 12 वर्षीय बड़ी बहन श्रद्धा गंभीर रूप से झुलस गई, जिसका इलाज जारी है। बिलासपुर में तेज बारिश और आंधी से जनजीवन प्रभावित सोमवार शाम बिलासपुर में तेज आंधी और बारिश के कारण कई इलाकों में जलभराव हो गया। कलेक्टर बंगले के पास एक बड़ा पेड़ कार पर गिर गया, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि कार में सवार लोग सुरक्षित बच गए। पेड़ गिरने से बिजली के तार भी टूट गए, जिसके चलते आसपास के इलाके में कुछ समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। 22 जून को दंतेवाड़ा से हुई थी मानसून की एंट्री दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 22 जून को दंतेवाड़ा जिले से छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था। इसके बाद धीरे-धीरे यह पूरे प्रदेश में फैलता गया। 30 जून को उत्तर और उत्तर-पूर्व छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में भी मानसून पहुंच गया। हालांकि इन इलाकों में पहले से ही प्री-मानसून बारिश हो रही थी। अगले चार दिन भारी बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश की संभावना जताई है। कई जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका है। लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास जाने से बचने की अपील की गई है। इन जिलों में पहुंच चुका है मानसून मानसून रायपुर, दुर्ग, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद, बलौदाबाजार, बेमेतरा, कबीरधाम, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर सहित कई जिलों में पहले ही सक्रिय हो चुका था। 30 जून को सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, जशपुर, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और रायगढ़ में भी मानसून ने दस्तक दे दी। धिक जानकारी और लेटेस्ट अपडेट्स के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ में बड़ा एक्शन: 62 कोचिंग सेंटरों को नोटिस, कई संस्थान सील

लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से 15 छात्रों की मौत के बाद छत्तीसगढ़ में भी प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। दुर्ग, बिलासपुर और रायपुर में कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की गई, जिसमें भारी लापरवाही सामने आने पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। बुधवार रात SDRF और पुलिस की संयुक्त टीम ने दुर्ग जिले में सरप्राइज निरीक्षण किया। जांच के दौरान इमरजेंसी एग्जिट, फायर सेफ्टी सिस्टम और अन्य सुरक्षा मानकों में गंभीर खामियां मिलने पर 62 कोचिंग सेंटरों को नोटिस जारी किया गया। संस्थानों को व्यवस्थाएं सुधारने के लिए 24 घंटे का समय दिया गया है। वहीं गंभीर अनियमितता पाए जाने पर रामा कोचिंग, कैड एकेडमी मोशन, मोशन कोटा स्टडी सर्किल और वेदांतु को सील कर दिया गया। दुर्ग में सुरक्षा इंतजामों की खुली पोल जानकारी के अनुसार दुर्ग जिले में करीब 150 से 200 कोचिंग सेंटर संचालित हैं, जिनमें सबसे अधिक भिलाई के न्यू सिविक सेंटर क्षेत्र में स्थित हैं। जांच के दौरान एक भी ऐसा संस्थान नहीं मिला जहां सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन किया जा रहा हो। कई कोचिंग सेंटरों में फायर एक्सटिंग्विशर एक्सपायर पाए गए, जबकि कई जगह उन्हें सही तरीके से लगाया ही नहीं गया था। अधिकांश संस्थानों में इमरजेंसी एग्जिट नहीं मिला और कई भवनों में केवल एक ही प्रवेश और निकास मार्ग था। आपात स्थिति में फंस सकते हैं छात्र निरीक्षण के दौरान कई इमारतों में बेहद संकरी सीढ़ियां मिलीं, जहां एक समय में केवल एक छात्र ही आ-जा सकता है। अधिकारियों ने आशंका जताई कि किसी आपदा की स्थिति में छात्रों की सुरक्षित निकासी बेहद मुश्किल हो सकती है। एसडीआरएफ टीम ने मौके पर ही 62 संस्थानों को नोटिस जारी करते हुए निर्धारित समय में कमियां दूर करने के निर्देश दिए हैं। बिलासपुर में उड़ान एकेडमी सील बिलासपुर में पुलिस, नगर निगम और फायर ब्रिगेड की संयुक्त टीम ने छह कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया। जांच में उड़ान आईएएस, चंद्रा एकेडमी, आचार्य एकेडमी, ऑक्सीडेशन कोचिंग, प्रीमियर एकेडमी और पटेल ट्यूटोरियल में विभिन्न प्रकार की खामियां पाई गईं। सबसे गंभीर अनियमितताएं उड़ान आईएएस में मिलीं। यहां केवल एक प्रवेश-द्वार था, फायर सेफ्टी सिस्टम मौजूद नहीं था, लिफ्ट की व्यवस्था नहीं थी और बड़ी संख्या में छात्रों के अनुपात में पर्याप्त जगह भी उपलब्ध नहीं थी। इसके चलते नगर निगम ने संस्थान को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। अन्य पांच संस्थानों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय में कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। रायपुर में भी कई संस्थानों को नोटिस रायपुर में 23 और 24 जून को सात प्रमुख कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया गया। जांच में अनअकैडमी, विद्यापीठ और एलन में सुरक्षा व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। वहीं अकादजा, आरसीसी एकेडमी, आभा लाइब्रेरी और टुटेजा एकेडमी में फायर एनओसी, इमरजेंसी एग्जिट और अन्य सुरक्षा मानकों में कमी मिलने पर नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। तय समय में सुधार नहीं हुआ तो होगी सख्त कार्रवाई प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। जिन संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाएगा, उनके खिलाफ सीलिंग समेत अन्य कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरी में बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई करते हैं, इसलिए फायर सेफ्टी, इमरजेंसी एग्जिट और भवन सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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सागर में RTO की बड़ी कार्रवाई: 15 साल पुरानी 2 बसें होंगी स्क्रैप, 6 वाहन जब्त, 42 हजार रुपए का जुर्माना

सागर में गुरुवार को परिवहन विभाग ने यात्री बसों और स्कूली वाहनों के खिलाफ विशेष चेकिंग अभियान चलाकर बड़ी कार्रवाई की। अभियान के दौरान 15 साल पुरानी दो यात्री बसों का पंजीयन निरस्त कर उन्हें कबाड़ (स्क्रैप) करने के आदेश दिए गए। वहीं नियमों का उल्लंघन करने वाले 6 वाहनों को जब्त किया गया और 10 अन्य वाहनों पर कार्रवाई करते हुए 42 हजार 200 रुपए का जुर्माना वसूला गया। स्कूल वाहनों में मिली गंभीर लापरवाही परिवहन विभाग की टीम ने शहर में कुल 24 स्कूल वाहनों की जांच की। जांच के दौरान एक स्कूल वाहन में कई गंभीर खामियां सामने आईं। वाहन में जरूरी दस्तावेज नहीं थे, अग्निशमन यंत्र और फर्स्ट-एड बॉक्स भी उपलब्ध नहीं था। इतना ही नहीं, आपातकालीन निकास द्वार (इमरजेंसी गेट) के सामने सीट लगाकर सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई थी। इसके अलावा एक ओमनी वैन और एक ऑटो रिक्शा में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर ले जाया जा रहा था। जांच के दौरान तीन ई-रिक्शा भी बिना जरूरी दस्तावेजों के संचालित होते मिले। इन सभी मामलों में कार्रवाई करते हुए 6 वाहनों को जब्त कर परिवहन कार्यालय में खड़ा कराया गया। ओवरलोडिंग और नियम उल्लंघन पर कार्रवाई परिवहन विभाग ने यात्री बसों में ओवरलोडिंग, अधिक किराया वसूली, परमिट की शर्तों के उल्लंघन और टैक्स बकाया जैसे मामलों की भी जांच की। कार्रवाई के दौरान 4 स्कूल बस, 1 मैक्सी कैब और 5 ई-रिक्शा पर मोटरयान अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत चालानी कार्रवाई की गई। इन 10 वाहनों से कुल 42 हजार 200 रुपए का जुर्माना वसूला गया। RTO ने दी सख्त चेतावनी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) मनोज तेनगुरिया ने सभी स्कूल वाहन संचालकों को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करने की हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि स्कूल वाहनों में स्पीड गवर्नर, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र, टैक्स रसीद, फर्स्ट-एड बॉक्स और अग्निशमन यंत्र अनिवार्य रूप से मौजूद होने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वाहन चालक के पास वैध हैवी ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए और निर्धारित यूनिफॉर्म में ही वाहन संचालन किया जाना चाहिए। साथ ही बच्चों को वाहन की निर्धारित क्षमता के अनुसार ही बैठाया जाए। नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई RTO ने साफ कहा कि भविष्य में चेकिंग के दौरान यदि किसी वाहन में सुरक्षा नियमों की अनदेखी या अन्य अनियमितता पाई गई, तो संबंधित संचालकों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें deshharpal.com
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CBSE छात्रों को बड़ी राहत: अब री-वेरिफिकेशन के बाद भी कर सकेंगे उत्तर पुस्तिका की फिजिकल जांच

सीबीएसई (CBSE) बोर्ड ने छात्रों के लिए एक नई और महत्वपूर्ण व्यवस्था शुरू की है। अब वे छात्र, जिन्होंने अपने बोर्ड परीक्षा परिणाम में अंकों के वेरिफिकेशन के लिए आवेदन किया था और जांच के बाद भी उनके नंबरों में कोई बदलाव नहीं हुआ, अपनी उत्तर पुस्तिका (Answer Sheet) की फिजिकल जांच करवा सकेंगे। बोर्ड ने इस संबंध में आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। नई व्यवस्था के तहत छात्र सीधे सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office) जाकर अपनी कॉपी की जांच कर सकेंगे। हालांकि यह सुविधा केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगी, जिनके वेरिफिकेशन का परिणाम “No Change” रहा है। पहली बार लागू हुई नई व्यवस्था सीबीएसई ने पहली बार यह कदम उठाया है। इससे पहले वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद छात्रों के पास अपनी उत्तर पुस्तिका की दोबारा फिजिकल जांच कराने का कोई विकल्प नहीं होता था। बोर्ड का मानना है कि इस फैसले से मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। छात्रों को मिलेगा संदेह दूर करने का मौका कई छात्र ऐसे होते हैं जिन्हें वेरिफिकेशन के बाद भी अपनी कॉपी की जांच को लेकर शंका बनी रहती है। अब उन्हें अपनी उत्तर पुस्तिका को प्रत्यक्ष रूप से देखने और अपनी शंकाओं का समाधान करने का अवसर मिलेगा। इससे छात्रों का बोर्ड की मूल्यांकन प्रक्रिया पर भरोसा और मजबूत होगा। जल्द जारी होगा शेड्यूल सीबीएसई ने बताया है कि उत्तर पुस्तिका की फिजिकल जांच के लिए क्षेत्रीय कार्यालयों में विस्तृत प्रक्रिया और समय-सारणी (Schedule) जल्द जारी की जाएगी। छात्रों को इसके लिए बोर्ड की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है। 12वीं री-इवैल्यूएशन के परिणाम भी जारी इधर, सीबीएसई ने कक्षा 12वीं के री-इवैल्यूएशन (Re-evaluation) के परिणाम भी चरणबद्ध तरीके से जारी करने शुरू कर दिए हैं। बोर्ड के अनुसार अब तक प्राप्त 87 प्रतिशत से अधिक आवेदनों के परिणाम घोषित किए जा चुके हैं। बाकी आवेदनों पर भी तेजी से काम किया जा रहा है और जल्द ही अपडेटेड रिजल्ट जारी किए जाएंगे। छात्रों के लिए क्यों अहम है यह फैसला? यह नया नियम उन विद्यार्थियों के लिए राहत लेकर आया है जो अपने परिणाम को लेकर असमंजस में रहते हैं। अब वे सिर्फ ऑनलाइन प्रक्रिया पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि अपनी उत्तर पुस्तिका की वास्तविक जांच कराकर पूरी पारदर्शिता के साथ अपनी शंकाओं का समाधान कर सकेंगे। अधिक शिक्षा और करियर से जुड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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जोधपुर एक्सप्रेस में दंपती को नशीला पानी पिलाकर लूटा, 36 घंटे बाद जयपुर अस्पताल में आया होश

भोपाल से जयपुर जा रहे एक दंपती के साथ ट्रेन में हैरान कर देने वाली लूट की वारदात सामने आई है। बदमाश ने पहले सफर के दौरान उनसे दोस्ती की, फिर भरोसा जीतकर नशीला पानी पिला दिया। दंपती बेहोश हो गए और आरोपी उनके सोने-चांदी के जेवर तथा नकदी लेकर फरार हो गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पति-पत्नी को करीब 36 घंटे बाद जयपुर के अस्पताल में होश आया। जानकारी के अनुसार, भोपाल के मिसरोद क्षेत्र के रहने वाले नर्मदा प्रसाद अहिरवार अपनी पत्नी कृष्णा बाई के साथ 18 जून को भोपाल-जोधपुर एक्सप्रेस के जनरल कोच में सफर कर रहे थे। यात्रा के दौरान उनकी सीट के सामने बैठे एक युवक ने बातचीत शुरू की और खुद को दिल्ली जाने वाला यात्री बताया। धीरे-धीरे उसने दंपती का भरोसा जीत लिया। पानी की बोतल में मिलाया नशीला पदार्थ रात में खाना खाने के बाद नर्मदा प्रसाद ने पानी की बोतल मंगवाई। इसी दौरान युवक ने मदद के बहाने बोतल अपने हाथ में ले ली। आरोप है कि उसने चालाकी से पानी में नशीला पदार्थ मिला दिया। शक न हो इसलिए उसने खुद भी पानी पीने का दिखावा किया और फिर बोतल दंपती को दे दी। पानी पीने के कुछ ही देर बाद दोनों की तबीयत बिगड़ने लगी। गुना स्टेशन के आसपास पहुंचते-पहुंचते वे पूरी तरह बेहोश हो गए। जयपुर अस्पताल में खुला लूट का राज दंपती को यह भी याद नहीं कि उन्हें ट्रेन से कब उतारा गया और अस्पताल कैसे पहुंचाया गया। 20 जून को जयपुर के अस्पताल में होश आने पर उन्हें अपने साथ हुई वारदात का पता चला। उस समय उनके परिजन भी अस्पताल पहुंच चुके थे। जेवर और नकदी लेकर फरार हुआ आरोपी पीड़ितों के अनुसार, आरोपी उनके गले से चांदी की चेन, चांदी का ब्रेसलेट, सोने का मंगलसूत्र और कुल 9 हजार रुपए नकद लेकर फरार हो गया। दंपती को शक है कि आरोपी गुना स्टेशन के आसपास ट्रेन से उतर गया होगा। जीरो एफआईआर के बाद गुना में केस दर्ज घटना की शिकायत मिलने पर जयपुर जीआरपी ने पहले जीरो एफआईआर दर्ज की। चूंकि वारदात गुना क्षेत्र के पास हुई थी, इसलिए केस डायरी गुना जीआरपी को भेजी गई। अब गुना जीआरपी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपी की तलाश की जा रही है। यात्रियों के लिए सावधानी जरूरी रेलवे और पुलिस लगातार यात्रियों को अनजान लोगों से खाने-पीने की चीजें न लेने की सलाह देती है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं। पुलिस ने यात्रियों से सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत रेलवे हेल्पलाइन को सूचना देने की अपील की है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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भोपाल मेट्रो में बड़ा बदलाव जल्द, सिग्नलिंग सिस्टम की CMRS जांच शुरू; पहली बार एक ट्रैक पर आमने-सामने आईं दो मेट्रो

भोपाल मेट्रो के यात्रियों के लिए जल्द ही बड़ी राहत मिलने वाली है। मेट्रो की रफ्तार बढ़ाने और संचालन को अधिक सुगम बनाने के लिए लगाए गए नए सिग्नलिंग सिस्टम की जांच शुरू हो गई है। इसी सिलसिले में कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम भोपाल पहुंची और बुधवार को ट्रैक पर उतरकर विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान एक दिलचस्प नजारा भी देखने को मिला, जब रानी कमलापति स्टेशन और एमपी नगर स्टेशन के बीच पहली बार दो मेट्रो ट्रेनें एक ही ट्रैक पर आमने-सामने खड़ी नजर आईं। करीब 30 मिनट तक विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जांच की गई। सिग्नलिंग सिस्टम की हुई कड़ी परीक्षा मेट्रो अधिकारियों के अनुसार यह पूरा अभ्यास सिग्नलिंग सिस्टम की सुरक्षा और कार्यक्षमता परखने का हिस्सा था। जांच टीम ने देखा कि यदि दो ट्रेनें आमने-सामने आ जाएं तो सिस्टम किस तरह प्रतिक्रिया देता है। इसके अलावा अचानक ब्रेक लगने, गति नियंत्रण, ट्रेन के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने और आपातकालीन परिस्थितियों में सिस्टम के व्यवहार की भी जांच की गई। निरीक्षण के बाद मिलेगी ‘ओके’ रिपोर्ट मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि निरीक्षण पूरा होने के बाद CMRS की टीम अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। यदि रिपोर्ट संतोषजनक रही तो नए सिग्नलिंग सिस्टम को शुरू करने की मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद मेट्रो का नया संचालन शेड्यूल और टाइमिंग जारी की जाएगी। संभावना है कि जुलाई से यात्रियों को बेहतर और तेज सेवा मिलना शुरू हो जाएगी। 26 जून से सामान्य समय पर चलेगी मेट्रो मेट्रो प्रबंधन के मुताबिक परीक्षण कार्य पूरा होने के बाद 26 जून से मेट्रो अपने निर्धारित समय पर संचालन शुरू कर देगी। सुभाष नगर से एम्स तक लगभग 7 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का कार्य पूरा हो चुका है। अभी एक ही ट्रैक पर चल रही है मेट्रो फिलहाल भोपाल और इंदौर मेट्रो में आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह लागू नहीं होने के कारण ट्रेनों का संचालन केवल एक ट्रैक पर किया जा रहा है। यही वजह है कि भोपाल मेट्रो की फ्रिक्वेंसी करीब 75 मिनट है और यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। वर्तमान में ट्रेन जिस ट्रैक से जाती है, उसी ट्रैक से वापस भी लौटती है। 800 करोड़ रुपये की परियोजना मेट्रो की परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से सिग्नलिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है। यह करीब 30 किलोमीटर लंबे नेटवर्क के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसका पहला चरण अब पूरा हो चुका है। भोपाल मेट्रो में वही अत्याधुनिक सिग्नलिंग तकनीक लागू की जा रही है, जिसका उपयोग Delhi Metro में किया जाता है। दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक तकनीक इस तकनीक के लागू होने के बाद ट्रेनें दोनों ट्रैक पर संचालित हो सकेंगी, ट्रेनों के बीच का अंतर कम होगा और यात्रियों को कम समय में मेट्रो उपलब्ध हो सकेगी। यात्रियों को क्या होगा फायदा? नए सिग्नलिंग सिस्टम के शुरू होने के बाद: भोपाल मेट्रो के इस तकनीकी अपग्रेड को शहर के सार्वजनिक परिवहन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे आने वाले समय में हजारों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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बिलासपुर में तेज रफ्तार हाईवा का कहर, स्कूटी सवार युवक की मौत; दो साथी गंभीर घायल

बिलासपुर के सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में बुधवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में 22 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि उसके दो साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना भीषण था कि स्कूटी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। घायलों का इलाज सिम्स अस्पताल में जारी है। रात 2 बजे हुआ हादसा पुलिस के अनुसार दुर्घटना रायपुर रोड स्थित सिरगिट्टी मोड़ के पास रात करीब 2 बजे हुई। स्कूटी पर सवार तीन युवक सिरगिट्टी की ओर जा रहे थे। इसी दौरान चकरभाठा की तरफ से आ रहे तेज रफ्तार हाईवा ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। मौके पर हुई युवक की मौत टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि स्कूटी सवार आकाश वर्मा (22) की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उसके साथी अजय श्रीवास और दीपक श्रीवास गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। सिम्स अस्पताल में चल रहा इलाज सूचना मिलते ही सिरगिट्टी पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल अस्पताल भिजवाया। दोनों घायलों को सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार दोनों की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। हाईवा जब्त, चालक गिरफ्तार सिरगिट्टी थाना प्रभारी यशवंत प्रताप सिंह ने बताया कि दुर्घटना के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए हादसे में शामिल हाईवा वाहन को जब्त कर लिया है। साथ ही चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। परिवार में पसरा मातम युवा बेटे की अचानक मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं घायल युवकों के परिवार अस्पताल में उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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बिलासपुर में विवाहिता की संदिग्ध मौत, शरीर पर मिले चोट के निशान; मायके पक्ष ने लगाया हत्या का आरोप

बिलासपुर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में एक 28 वर्षीय विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतका के शरीर पर चोट के निशान मिलने के बाद मायके पक्ष ने इसे हत्या बताते हुए पति और ससुराल पक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं पति का दावा है कि उसकी पत्नी ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। 2019 में हुई थी शादी जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के मधुपुर निवासी अदिति मौर्य (28) की शादी 10 फरवरी 2019 को बिलासपुर के दयालबंद मधुबन रोड निवासी रविकांत मौर्य से हुई थी। दंपती की 13 महीने की एक बेटी भी है। रविकांत तिफरा सब्जी मंडी में व्यवसाय करता है। पति का दावा- फांसी लगाने की कोशिश की थी पुलिस को दिए बयान में रविकांत ने बताया कि वह अपनी बेटी के साथ ऊपर कमरे में सो रहा था, जबकि अदिति नीचे थी। जब वह नीचे पहुंचा तो पत्नी बेड पर पड़ी मिली। उसका कहना है कि अदिति ने सिल्क की साड़ी से फांसी लगाने की कोशिश की थी, लेकिन फंदा खुलने के कारण वह नीचे गिर गई। शादी के बाद से प्रताड़ना का आरोप मृतका के भाई अखिलेश वर्मा ने आरोप लगाया है कि शादी के कुछ समय बाद से ही अदिति को पति और ससुराल पक्ष द्वारा मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। परिजनों का कहना है कि अदिति अक्सर फोन पर मारपीट और उत्पीड़न की जानकारी देती थी। उनका आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से अदिति से सीधे बात नहीं हो पा रही थी। जब भी परिवार वाले संपर्क करने की कोशिश करते थे, पति किसी न किसी बहाने से बात नहीं करवाता था। दूसरी महिला से संबंध को लेकर था विवाद मृतका के भाई अभिषेक वर्मा ने आरोप लगाया कि रविकांत का किसी दूसरी महिला से संबंध था। उनके मुताबिक, एक सप्ताह पहले अदिति ने पति के मोबाइल चैट का वीडियो बनाकर अपनी बड़ी बहन को भेजा था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था। 23 जून को मारपीट का आरोप मायके पक्ष का दावा है कि 23 जून को भी अदिति के साथ मारपीट की गई थी। जब परिवार वालों ने ससुराल पक्ष से संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि पति-पत्नी के बीच विवाद चल रहा है। कुछ देर बाद अदिति की मौत की खबर मिली। सूचना मिलने पर परिजन उत्तर प्रदेश से बिलासपुर पहुंचे, जहां अस्पताल में उन्हें अदिति की मौत की जानकारी दी गई। शरीर पर मिले चोट के निशान परिजनों का आरोप है कि अदिति के हाथ, पैर, गर्दन और कान पर चोट के निशान थे। उनका कहना है कि जिस जगह फांसी लगाने की बात कही जा रही है, वहां परिस्थितियां संदिग्ध हैं। उन्होंने पुलिस को आवेदन देकर हत्या की आशंका जताई है। मृतका के भाई और अन्य परिजनों ने पति रविकांत मौर्य, सास-ससुर, ननद और नंदोई पर हत्या का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। एफएसएल टीम ने जुटाए साक्ष्य घटना की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची। टीम ने कमरे और आसपास के क्षेत्र से साक्ष्य एकत्र किए हैं। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर रिपोर्ट का इंतजार शुरू कर दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगा खुलासा एडिशनल एसपी सिटी पंकज पटेल ने बताया कि मामले की जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस आत्महत्या और हत्या दोनों एंगल से मामले की जांच कर रही है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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अक्षर पटेल का ऑलराउंड शो, शुभमन गिल की कप्तानी पारी; भारत ने इंग्लैंड को 6 विकेट से हराकर पहला वनडे जीता

बर्मिंघम। ऑलराउंडर अक्षर पटेल के शानदार प्रदर्शन और कप्तान शुभमन गिल की बेहतरीन बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड को पहले वनडे मुकाबले में 6 विकेट से हराकर सीरीज में विजयी शुरुआत की। एजबेस्टन मैदान पर खेले गए मैच में भारत ने 259 रन के लक्ष्य को 45.2 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 262 रन बनाकर हासिल कर लिया। अक्षर पटेल ने नाबाद 57 रन बनाए, जबकि वॉशिंगटन सुंदर ने भी नाबाद 52 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम को जीत तक पहुंचाया। कप्तान शुभमन गिल ने 80 रन बनाए, लेकिन मैच के दौरान क्रैम्प्स की समस्या के कारण उन्हें रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। शुरुआती झटकों के बाद गिल ने संभाली पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। रोहित शर्मा 11 रन और विराट कोहली 5 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर ने तीसरे विकेट के लिए 101 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम की पारी को संभाला। श्रेयस 35 रन बनाकर रनआउट हुए, जबकि केएल राहुल बोल्ड होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर ने जिम्मेदारी संभालते हुए पांचवें विकेट के लिए 102 रन की अविजित साझेदारी की और भारत को शानदार जीत दिलाई। जो रूट और लियाम डॉसन ने इंग्लैंड को संभाला इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 47.5 ओवर में 258 रन बनाए। इंग्लैंड की शुरुआत मजबूत रही और टीम ने 61 रन तक कोई विकेट नहीं गंवाया, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने जोरदार वापसी करते हुए महज 19 रन के भीतर 5 विकेट झटक दिए। मध्यक्रम में जो रूट ने 76 रन और लियाम डॉसन ने 68 रन की अहम पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 121 रन की साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। अक्षर पटेल ने गेंद और बल्ले दोनों से निभाई अहम भूमिका भारतीय गेंदबाजों में अक्षर पटेल सबसे सफल रहे। उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट अपने नाम किए। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार ने 2-2 विकेट हासिल किए। जसप्रीत बुमराह और शिवम दुबे को एक-एक सफलता मिली। गेंद और बल्ले दोनों से बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अक्षर पटेल ने टीम इंडिया की जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई और भारत ने सीरीज की शानदार शुरुआत की। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CAG रिपोर्ट में जल जीवन मिशन की पोल: छत्तीसगढ़ में 33% नल कनेक्शन गैर-कार्यशील, ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा

रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन को लेकर कई गंभीर खामियों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार कमजोर योजना, धीमा क्रियान्वयन, निगरानी की कमी और गलत रिपोर्टिंग के कारण ग्रामीण पेयजल योजनाओं की प्रभावशीलता और दीर्घकालिक स्थिरता प्रभावित हुई है। मार्च 2024 तक की अवधि पर आधारित ‘छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का प्रदर्शन ऑडिट’ रिपोर्ट मंगलवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में पेश की। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसके लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद मिशन के कार्यों में तेजी आई है। योजना निर्माण में गंभीर खामियां CAG की रिपोर्ट के मुताबिक जल जीवन मिशन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कई स्थानों पर गांव स्तर की कार्ययोजना तैयार किए बिना ही जिला स्तरीय योजनाएं बना दी गईं, जबकि राज्य स्तरीय कार्ययोजना तैयार ही नहीं की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राज्य स्तर पर जल सुरक्षा योजना नहीं बनाई गई, जिससे जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता और योजनाओं के रखरखाव की स्पष्ट रणनीति विकसित नहीं हो सकी। 33 प्रतिशत नल कनेक्शन निकले गैर-कार्यशील रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 तक 50 लाख ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। जनवरी 2025 तक 40.10 लाख फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) लगाए गए। हालांकि, इनमें से 13.31 लाख (करीब 33%) कनेक्शन गैर-कार्यशील पाए गए। इसके पीछे सूख चुके जल स्रोत, अधूरी ओवरहेड टंकियां, बिजली कनेक्शन का अभाव और सोलर पंप स्थापित नहीं होना प्रमुख कारण बताए गए हैं। ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा राज्य के 19,656 गांवों को मार्च 2024 तक ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाना था, लेकिन केवल 716 गांव (3.64 प्रतिशत) ही इस लक्ष्य तक पहुंच सके। ऑडिट में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां अधूरे कार्यों के बावजूद गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित कर दिया गया। किसी भी जिले में 100% कवरेज नहीं मार्च 2024 तक राज्य के 33 में से किसी भी जिले और 146 में से किसी भी विकासखंड में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज नहीं था। योजनाओं की प्रगति बेहद धीमी रिपोर्ट के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 29,153 सिंगल विलेज स्कीम में से मार्च 2024 तक केवल 172 योजनाएं पूरी हो सकीं। इनमें भी सिर्फ 32 ग्राम पंचायतों को योजनाओं का संचालन सौंपा गया। वहीं, स्वीकृत 70 मल्टी विलेज स्कीम में से मार्च 2025 तक एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी, जिससे करीब 9.85 लाख घरों तक सतही जल स्रोतों से पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावित हुआ। सोलर आधारित योजनाओं में भी अनियमितताएं CAG ने पाया कि कई सोलर आधारित पेयजल योजनाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक नल कनेक्शन जोड़ दिए गए। इसके कारण 28,984 परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वित्तीय और गुणवत्ता संबंधी कमियां रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार केंद्र और राज्यांश मिलाकर 6,480.04 करोड़ रुपये की आवश्यक वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रही। साथ ही मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जिला खनिज न्यास (DMF), सांसद निधि और CSR जैसी योजनाओं के संसाधनों के समन्वय के लिए भी कोई प्रभावी रणनीति नहीं बनाई गई। जल गुणवत्ता जांच की व्यवस्था कमजोर राज्य की 75 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से केवल 4 प्रयोगशालाएं ही सभी 13 निर्धारित जल गुणवत्ता मानकों की जांच करने में सक्षम पाई गईं। इसके अलावा 37 प्रतिशत प्रयोगशालाओं को NABL की मान्यता प्राप्त नहीं थी। रिपोर्ट में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी निर्धारित मानकों के अनुसार जल गुणवत्ता जांच नहीं होने की बात कही गई है। CAG की प्रमुख सिफारिशें रिपोर्ट में सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं— सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को ठहराया जिम्मेदार CAG रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार मिशन को खराब स्थिति में छोड़कर गई थी, जिसके कारण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समय-सीमा 2024 से बढ़ाकर 2028 तक कर दी है। मार्च 2026 में स्वीकृत मिशन के दूसरे चरण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।

रायपुर में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा

रायपुर। राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा 16 जुलाई को धार्मिक आस्था, वैदिक परंपराओं और भव्य आयोजन के साथ निकाली जाएगी। वहीं बाहुड़ा यात्रा 24 जुलाई को आयोजित होगी। मंदिर परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा माता सुभद्रा के तीनों रथों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रथयात्रा से पहले 14 जुलाई की शाम 6 बजे भगवान का नेत्रोत्सव आयोजित किया जाएगा। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सांस्कृतिक एकता, भाईचारे और सनातन परंपरा का भी प्रतीक माना जाता है। भक्त और भगवान के मिलन का महापर्व श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष एवं विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि रथयात्रा भक्तों और भगवान के प्रत्यक्ष मिलन का महापर्व है। वर्ष में केवल इसी अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर निकलकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। 11 वैदिक पंडित कराएंगे विशेष पूजन रथयात्रा के दिन सुबह 11 वैदिक पंडितों के सान्निध्य में भगवान का विशेष अभिषेक, पूजन और हवन कराया जाएगा। चंदन, केसर, कस्तूरी, कपूर सहित विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से भगवान का दिव्य स्नान कराया जाएगा। इसके बाद भगवान को गजामूंग महाप्रसाद अर्पित किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और मंगल वाद्यों की गूंज के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करेंगे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा रथयात्रा की सबसे प्रमुख परंपराओं में शामिल ‘छेरा पहरा’ का निर्वहन इस वर्ष भी किया जाएगा। परंपरा के अनुसार राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान के रथ के आगे सोने की झाड़ू से मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे। यह परंपरा सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश देती है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। भजन, झांकियों और लोकनृत्य से गूंजेगा शहर रथयात्रा के दौरान महिला मंडलों द्वारा भजन-कीर्तन, आकर्षक सांस्कृतिक झांकियां और पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। “जय जगन्नाथ” के जयघोष के साथ मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा। श्रद्धालुओं से की गई विशेष अपील श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति ने प्रदेशभर के श्रद्धालुओं से सपरिवार रथयात्रा में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने और सनातन संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने की अपील की है। रायपुर और छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सरकार और बोर्ड से 10 दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता।” हालांकि, नीति को लागू करने में सामने आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, CBSE और संबंधित पक्षों से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई है। इसके तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। इससे कई छात्रों को पहले से पढ़ी जा रही भाषाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। क्या है विवाद? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने पर्याप्त तैयारी के बिना नई भाषा नीति लागू कर दी है। उनके मुताबिक कई स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े अहम सवाल और जवाब 1. मामला क्या है? सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। हालांकि, CBSE ने 6 जून को संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि इस वर्ष कक्षा 10 के छात्रों को तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। 2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है? पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन) पढ़ते थे। नए नियम के अनुसार अब तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुनी जा सकेगी। 3. याचिका किसने दायर की? यह याचिका छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी की ओर से दायर की गई है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। 4. याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति क्या है? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था अचानक लागू कर दी गई। कई भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे में छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. किताबों को लेकर क्या दलील दी गई? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से फिलहाल केवल तीन भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करना व्यवहारिक रूप से कठिन होगा। 6. शिक्षकों की कमी पर क्या कहा गया? याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि नई भारतीय भाषाएं पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होगी, लेकिन इतने कम समय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषाएं बंद हो जाएंगी? नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन इसके साथ उन्हें दो भारतीय भाषाएं भी पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी। 8. क्या तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा होगी? नहीं। CBSE ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का अलग बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव न बढ़े। 9. अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी। नई शिक्षा नीति 2020 क्या है? भारत सरकार ने 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को मंजूरी दी थी। यह 34 वर्षों बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जाता है। इससे पहले शिक्षा नीति 1986 में लागू हुई थी, जिसे 1992 में संशोधित किया गया था। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना, छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकसित करना है। केंद्र सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से 2030 तक लागू करने का लक्ष्य रखा है। चूंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए इसे लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की भूमिका होती है। देश, शिक्षा और करियर से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बिलासपुर: CM हेल्पलाइन शिकायतों के खराब निराकरण पर PHE के ईई को नोटिस, कलेक्टर ने अधिकारियों को लगाई फटकार

बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों के निराकरण की समीक्षा बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं मिलने पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) रूपेश कुमार धनंजय को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। टीएल (समय-सीमा) बैठक में कलेक्टर ने सभी विभागों के अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का केवल औपचारिक निपटारा करने के बजाय उनका गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने समय-सीमा का पालन करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। एकल शिक्षकीय स्कूलों में जल्द होंगे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने एकल शिक्षकीय स्कूलों में तत्काल अतिथि शिक्षक नियुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं भी ली जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। जर्जर स्कूल भवनों में नहीं लगेंगी कक्षाएं कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जर्जर भवनों में किसी भी स्थिति में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएं। ऐसे विद्यालयों के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था करने और नए भवन या अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के प्रस्ताव शीघ्र भेजने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को भी लगाई फटकार जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए डीएमएफ की राशि का प्रभावी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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