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NCERT ने 9वीं की इंग्लिश की दो किताबें मिलाकर बनाई एक नई किताब

NCERT ने 9वीं की इंग्लिश की दो किताबें मिलाकर बनाई एक नई किताब

स्कूल शिक्षा में बदलाव करते हुए National Council of Educational Research and Training (NCERT) ने कक्षा 9 की इंग्लिश की दो अलग-अलग किताबों को मिलाकर अब एक ही किताब बना दी है। इस नई किताब में भारतीय लेखकों की रचनाओं को पहले से ज्यादा जगह दी गई है, ताकि छात्र अपने देश के साहित्य और संस्कृति को बेहतर तरीके से समझ सकें। पहले कक्षा 9 में इंग्लिश की दो किताबें पढ़ाई जाती थीं – Beehive और Moments। अब इन दोनों को मिलाकर एक नई और सरल किताब तैयार की गई है। इस बदलाव का मकसद यह है कि छात्रों को कम किताबों में ज्यादा और बेहतर कंटेंट मिल सके, साथ ही पढ़ाई भी थोड़ी आसान हो जाए। सुधा मूर्ति की किताब से लिया गया पहला पाठ नई किताब का पहला चैप्टर प्रसिद्ध लेखिका Sudha Murty की एक रचना से लिया गया है। उनकी कहानियां सरल भाषा और मानवीय मूल्यों के लिए जानी जाती हैं। NCERT का मानना है कि ऐसे लेखकों की रचनाएं छात्रों को पढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं और उन्हें जीवन से जुड़ी सीख भी देती हैं। भारतीय लेखकों पर ज्यादा फोकस नई किताब में भारतीय लेखकों और भारतीय परिवेश से जुड़ी कहानियों को ज्यादा शामिल किया गया है। इससे छात्रों को अपनी संस्कृति, समाज और जीवन मूल्यों के बारे में पढ़ने का मौका मिलेगा। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बदलाव से बच्चों की पढ़ाई ज्यादा रोचक और समझने में आसान हो सकती है। साथ ही यह छात्रों को भारतीय साहित्य से भी जोड़ने का अच्छा प्रयास है। छात्रों के लिए क्या बदलेगा कुल मिलाकर, NCERT का यह कदम छात्रों की पढ़ाई को आसान बनाने और भारतीय साहित्य को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कई राज्यों में Commercial LPG Cylinder की सप्लाई बंद, होटल-रेस्टोरेंट पर संकट

कई राज्यों में Commercial LPG Cylinder की सप्लाई बंद, होटल-रेस्टोरेंट पर संकट

देश के कई राज्यों में इन दिनों Commercial LPG Cylinder की सप्लाई अचानक रुक गई है। इससे होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट चलाने वालों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कई जगहों पर कारोबारियों का कहना है कि उन्हें समय पर गैस नहीं मिल रही, जिससे खाना बनाना मुश्किल हो गया है। स्थिति को देखते हुए सरकार ने Essential Commodity Act (आवश्यक वस्तु अधिनियम) लागू कर दिया है। इसका मकसद गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना है, ताकि जरूरतमंद लोगों तक गैस सिलेंडर की सप्लाई सही तरीके से पहुंच सके। होटल और रेस्टोरेंट मालिकों की बढ़ी चिंता गैस की कमी से सबसे ज्यादा परेशानी होटल, ढाबे और छोटे रेस्टोरेंट चला रहे लोगों को हो रही है। कई कारोबारियों का कहना है कि अगर जल्द गैस की सप्लाई शुरू नहीं हुई तो उन्हें अपना कारोबार कुछ समय के लिए बंद करना पड़ सकता है। एक रेस्टोरेंट संचालक ने कहा,“हमारा पूरा काम गैस पर ही चलता है। अगर सिलेंडर नहीं मिलेगा तो खाना कैसे बनेगा? ऐसे में दुकान बंद करने की नौबत आ सकती है।” सरकार की सख्ती सरकार का कहना है कि गैस की कमी को लेकर शिकायतें मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है। Essential Commodity Act लागू होने के बाद अब प्रशासन जमाखोरी करने वालों और ज्यादा कीमत पर गैस बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकेगा। आम लोगों पर भी पड़ सकता है असर अगर कॉमर्शियल गैस की समस्या जल्दी हल नहीं हुई तो इसका असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। होटल-रेस्टोरेंट बंद होने से लोगों को बाहर खाने-पीने की सुविधा कम हो सकती है और खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही गैस सिलेंडर की सप्लाई सामान्य हो जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IRAN युद्ध को लेकर संसद में हंगामा, लोकसभा में शोर-शराबा, जयशंकर बोले– भारतीयों को पहले ही किया था अलर्ट

IRAN युद्ध को लेकर संसद में हंगामा, लोकसभा में शोर-शराबा, जयशंकर बोले– भारतीयों को पहले ही किया था अलर्ट

IRAN में चल रहे युद्ध और उससे भारत पर पड़ने वाले असर को लेकर सोमवार को संसद में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा की मांग की, जबकि सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। लोकसभा में जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने ईरान युद्ध के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग उठाई। उनका कहना था कि इस संघर्ष का असर भारतीयों और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, इसलिए सरकार को साफ स्थिति बतानी चाहिए। इसी मांग को लेकर सदन में काफी शोर-शराबा हुआ। वहीं राज्यसभा में भी यही मुद्दा उठा। विपक्ष ने चर्चा की मांग करते हुए वॉकआउट कर दिया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार को इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर संसद को भरोसे में लेना चाहिए। इस बीच विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार पहले से ही सतर्क है। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों को जनवरी महीने में ही संभावित खतरे को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया था। जयशंकर ने कहा कि सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और विदेशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए भी सभी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे। गौरतलब है कि ईरान में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के कारण पूरे गल्फ क्षेत्र में चिंता का माहौल है। वहां बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं, इसलिए भारत सरकार भी इस मामले को गंभीरता से देख रही है। सरकार का कहना है कि भारतीय दूतावासों के जरिए लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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India को रूस से तेल खरीदने की मिली राहत: अमेरिका ने 3 अप्रैल तक दी छूट

India को रूस से तेल खरीदने की मिली राहत: अमेरिका ने 3 अप्रैल तक दी छूट

India के लिए राहत भरी खबर है। रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने भारत को अस्थायी छूट दे दी है। यह छूट 3 अप्रैल तक के लिए दी गई है। माना जा रहा है कि इससे फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव नहीं पड़ेगा। दरअसल, ईरान और क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे समय में भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह राहत काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने कुछ देशों को रूस से तेल खरीदने की सीमित अनुमति दी है, ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो। भारत भी इस छूट का फायदा उठा सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रूस से तेल की सप्लाई जारी रहती है तो भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की संभावना कम रहेगी। इससे आम लोगों को भी राहत मिलेगी। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में रूस से मिलने वाला सस्ता तेल भारतीय अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं दोनों के लिए फायदेमंद साबित होता है। हालांकि, यह छूट फिलहाल 3 अप्रैल तक ही है। इसके बाद अमेरिका क्या फैसला लेता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। अगर आगे भी छूट मिलती रही तो भारत के लिए तेल की आपूर्ति और कीमतों के मामले में स्थिति स्थिर रह सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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India से चोरी हुई करोड़ों की मूर्ति इंग्लैंड के म्यूजियम ने लौटाई

India से चोरी हुई करोड़ों की मूर्ति इंग्लैंड के म्यूजियम ने लौटाई

India की एक चोरी हुई प्राचीन मूर्ति को इंग्लैंड के एक म्यूजियम ने वापस लौटाया है। वहीं समुद्र में संकट में फंसे ईरानी जहाज से श्रीलंका ने 32 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया। आइए जानते हैं आज की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय खबरें। इंग्लैंड के म्यूजियम ने भारत को लौटाई करोड़ों की प्राचीन मूर्ति भारत की एक बेहद कीमती और ऐतिहासिक मूर्ति, जो वर्षों पहले चोरी होकर विदेश पहुंच गई थी, अब वापस भारत आ रही है। इंग्लैंड के एक म्यूजियम ने इस मूर्ति को भारत को सौंपने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि यह मूर्ति करोड़ों रुपये की है और भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लंबे समय से भारत सरकार विदेशों में मौजूद ऐसी चोरी की कलाकृतियों को वापस लाने की कोशिश कर रही है। इसी प्रयास के तहत यह मूर्ति अब अपने देश लौट रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में बड़ी सफलता है। ईरान के डूबते जहाज से श्रीलंका ने बचाए 32 नाविक दूसरी बड़ी खबर समुद्र से सामने आई। ईरान का एक जहाज समुद्र में संकट में फंस गया था और उसके डूबने का खतरा पैदा हो गया था। स्थिति गंभीर होने पर श्रीलंका की नौसेना तुरंत सक्रिय हुई और राहत अभियान शुरू किया। इस अभियान के दौरान जहाज पर मौजूद 32 नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। नौसेना की इस त्वरित कार्रवाई की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है। सभी नाविकों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है और उनकी हालत सामान्य बताई जा रही है। क्यों अहम हैं ये घटनाएं एक तरफ भारत अपनी ऐतिहासिक धरोहर को वापस पाने में सफल हो रहा है, वहीं दूसरी ओर समुद्र में फंसे लोगों को बचाकर मानवता का उदाहरण भी सामने आया है। ये दोनों घटनाएं अंतरराष्ट्रीय सहयोग और जिम्मेदारी की भावना को दिखाती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IRAN पर अमेरिकी हमले के 100 घंटे पूरे: 1000 से ज्यादा लोगों की मौत

IRAN पर अमेरिकी हमले के 100 घंटे पूरे: 1000 से ज्यादा लोगों की मौत

अमेरिका और Iran के बीच जारी संघर्ष को अब 100 घंटे पूरे हो चुके हैं। इन हमलों में अब तक 1000 से ज्यादा लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में ईरान के 17 जहाज डुबो दिए गए। इन हमलों से ईरान की सैन्य और समुद्री ताकत को बड़ा नुकसान पहुंचा है। कई बंदरगाहों और सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। हमलों के बाद ईरान और उससे जुड़े समूहों ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, 9 अलग-अलग देशों में मौजूद 14 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए। इन हमलों के कारण पूरे क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो यह संघर्ष और भी गंभीर रूप ले सकता है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। इस बीच आम लोगों में डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। लोग शांति की उम्मीद कर रहे हैं ताकि इस टकराव को जल्द से जल्द रोका जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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RAS 2024 Interview: 7वें चरण के इंटरव्यू कल से शुरू, 1096 पदों के लिए उम्मीदवार तैयार रखें ये जरूरी दस्तावेज

RAS 2024 Interview: 7वें चरण के इंटरव्यू कल से शुरू, 1096 पदों के लिए उम्मीदवार तैयार रखें ये जरूरी दस्तावेज

राजस्थान प्रशासनिक सेवा यानी RAS-2024 भर्ती प्रक्रिया अब अपने अहम पड़ाव पर पहुंच गई है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने बताया है कि 7वें चरण के इंटरव्यू कल से शुरू होंगे। इस भर्ती के जरिए कुल 1096 पदों को भरा जाएगा। जो उम्मीदवार इस चरण के लिए चुने गए हैं, उन्हें इंटरव्यू में शामिल होने से पहले अपने सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखने होंगे। आयोग ने साफ कहा है कि जरूरी दस्तावेज न होने पर उम्मीदवार को इंटरव्यू में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह भर्ती हजारों युवाओं के लिए सरकारी सेवा में जाने का बड़ा मौका है, इसलिए अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे समय पर पहुंचें और अपने दस्तावेजों की पूरी जांच पहले ही कर लें। इंटरव्यू के लिए जरूरी दस्तावेज इंटरव्यू में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को आमतौर पर ये दस्तावेज साथ लाने होंगे: उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे मूल दस्तावेजों के साथ उनकी फोटोकॉपी भी साथ रखें। 1096 पदों के लिए चल रही है भर्ती RAS-2024 भर्ती के माध्यम से राज्य प्रशासनिक सेवा सहित कई अन्य विभागों में कुल 1096 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। इस भर्ती प्रक्रिया में लिखित परीक्षा के बाद अब इंटरव्यू चरण चल रहा है, जो अंतिम चयन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। उम्मीदवारों के लिए सलाह इंटरव्यू देने जा रहे उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे: सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले हजारों युवाओं के लिए यह मौका बेहद अहम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Railway में 22,195 पदों पर आवेदन की तारीख बढ़ी, यूपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में 40 और BSNL में 120 भर्तियां

Railway में 22,195 पदों पर आवेदन की तारीख बढ़ी, यूपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में 40 और BSNL में 120 भर्तियां

Railway में 22,195 पद, यूपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में 40 पद और BSNL में 120 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है। इच्छुक उम्मीदवार 31 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं। रेलवे में 22,195 पदों पर भर्ती भारतीय रेलवे ने बड़ी संख्या में भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। कुल 22,195 पदों पर योग्य उम्मीदवारों से आवेदन मांगे गए हैं। कई अभ्यर्थियों की मांग को देखते हुए आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ा दी गई है ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा इसमें आवेदन कर सकें।जो उम्मीदवार रेलवे में नौकरी करना चाहते हैं, उनके लिए यह सुनहरा अवसर माना जा रहा है। यूपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड में 40 पद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी विभिन्न पदों के लिए 40 वैकेंसी जारी की हैं। इन पदों पर चयन लिखित परीक्षा और अन्य प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा। पर्यावरण और तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए यह अच्छा मौका है। BSNL में 120 पदों पर भर्ती सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने भी 120 पदों के लिए भर्ती निकाली है। योग्य उम्मीदवार कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। दूरसंचार क्षेत्र में काम करने के इच्छुक युवाओं के लिए यह एक अच्छा अवसर है। 31 मार्च तक कर सकते हैं आवेदन इन भर्तियों के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 31 मार्च तय की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना जल्द से जल्द आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए ये भर्तियां एक बड़ा अवसर हैं। सही जानकारी और समय पर आवेदन से उम्मीदवार अपने करियर की दिशा बदल सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Holika Dahan आज, मुहूर्त रात 12 बजे तक: जानिए पूजा विधि और होली की पौराणिक कहानी

Holika Dahan आज, मुहूर्त रात 12 बजे तक: जानिए पूजा विधि और होली की पौराणिक कहानी

आज देशभर में Holika Dahan मनाया जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुभ मुहूर्त रात 12 बजे तक है। इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने और अग्नि की परिक्रमा करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसी के साथ रंगों के त्योहार होली की शुरुआत होती है। क्या है होलिका दहन की कहानी? पौराणिक कथा के अनुसार असुर राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने की कई कोशिशें कीं। जब वह सफल नहीं हुआ तो उसने अपनी बहन होलिका की मदद ली, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। तभी से होलिका दहन बुराई के अंत और सच्चाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन की पूजा विधि मान्यता है कि होलिका की अग्नि में पुरानी नकारात्मक ऊर्जा जलकर खत्म हो जाती है और घर में सकारात्मकता आती है। डिजिटल दौर में होली की खास झलक अब होली का जश्न सिर्फ मोहल्लों तक सीमित नहीं रहा। लोग सोशल मीडिया पर डिजिटल इफेक्ट्स, एआर फिल्टर्स और खास फोटो एडिटिंग के जरिए होली की रंगीन यादें साझा कर रहे हैं। कई लोग होलिका दहन की लाइव स्ट्रीमिंग भी कर रहे हैं, ताकि दूर बैठे रिश्तेदार भी इस परंपरा से जुड़ सकें। सामाजिक संदेश भी देता है त्योहार होलिका दहन हमें यह सीख देता है कि अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित है। साथ ही यह पर्व हमें एकजुटता, भाईचारे और प्रेम का संदेश देता है। इस बार होली पर प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, पानी की बचत करें और सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाएं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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America-Iran तनाव का असर: कच्चा तेल 10% महंगा, सेंसेक्स 1100 अंक गिरा, सोना 1.67 लाख के पार

America-Iran तनाव का असर: कच्चा तेल 10% महंगा, सेंसेक्स 1100 अंक गिरा, सोना 1.67 लाख के पार

America – Iran के बीच बढ़ते तनाव का असर भारतीय बाजार पर दिखा। कच्चा तेल 10% महंगा हुआ, सेंसेक्स 1100 अंक गिरा और सोने की कीमत 1.67 लाख रुपये तक पहुंच गई। अमेरिका-ईरान तनाव से वैश्विक बाजार में हलचल अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया भर के बाजारों में साफ दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में जंग जैसे हालात बनने की आशंका से निवेशकों में डर बढ़ गया है। इसका सीधा असर कच्चे तेल, शेयर बाजार और सोने की कीमतों पर पड़ा है। कच्चा तेल 10% तक महंगा जैसे ही युद्ध की खबरें तेज हुईं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10% की तेजी आ गई। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। सेंसेक्स 1100 अंक टूटा घरेलू शेयर बाजार में घबराहट का माहौल रहा। BSE Sensex करीब 1100 अंक टूटकर 80,100 के स्तर पर आ गया। निवेशकों ने सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया और शेयरों में बिकवाली बढ़ गई। बैंकिंग, ऑटो और आईटी सेक्टर में ज्यादा गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी वैश्विक तनाव बढ़ता है, भारतीय बाजार पर उसका असर तुरंत दिखाई देता है। सोना 1.67 लाख के पार तनाव के माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश करते हैं। इसी वजह से सोने की कीमतों में तेज उछाल आया। सोना करीब ₹5,000 बढ़कर 1.67 लाख रुपये (प्रति 10 ग्राम, अंतरराष्ट्रीय रुझानों के अनुसार) के स्तर तक पहुंच गया। बाजार जानकारों का कहना है कि अगर अमेरिका-ईरान के बीच हालात और बिगड़ते हैं, तो सोने की कीमतें और बढ़ सकती हैं। आम लोगों पर क्या असर? आगे क्या? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच की स्थिति पर है। अगर तनाव कम होता है तो बाजार संभल सकते हैं, लेकिन अगर हालात बिगड़े तो महंगाई और बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। ऐसे समय में विशेषज्ञ निवेशकों को धैर्य रखने और सोच-समझकर फैसला लेने की सलाह दे रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
IND vs NZ

IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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