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Weather Update - MP- UP समेत 7 राज्यों में घना कोहरा, कई शहरों में विजिबिलिटी शून्य

Weather Update – MP- UP समेत 7 राज्यों में घना कोहरा, कई शहरों में विजिबिलिटी शून्य

देश के कई हिस्सों में सर्दी ने एक बार फिर से अपना कड़ा रूप दिखाना शुरू कर दिया है। MP, UP, बिहार समेत करीब 7 राज्यों में घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। अंबाला, कानपुर, बरेली और ग्वालियर जैसे शहरों में विजिबिलिटी शून्य के करीब पहुंच गई है। घने कोहरे के कारण सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए। सुबह के समय लोगों को दफ्तर और स्कूल पहुंचने में भारी परेशानी हुई। कई जगह ट्रेन और बस सेवाएं भी देरी से चल रही हैं। मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में आज 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की संभावना है। इसके साथ ही हल्की बारिश भी हो सकती है, जिससे ठंड और बढ़ सकती है। लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक उत्तर भारत के कई राज्यों में कोहरा और ठंड का असर बना रहेगा। ऐसे में बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को खासतौर पर सतर्क रहने की जरूरत है।
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Ghaziabad : मोबाइल गेम की लत ने छीनी तीन बहनों की जिंदगी

Ghaziabad : मोबाइल गेम की लत ने छीनी तीन बहनों की जिंदगी

Ghaziabad से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। मोबाइल गेम की लत से परेशान तीन सगी बहनों ने 9वीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। तीनों बहनों की उम्र क्रमशः 12, 14 और 16 साल बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि तीनों बहनें लंबे समय से मोबाइल गेम खेलने की आदी थीं। परिवार के लोग उन्हें बार-बार समझा रहे थे, लेकिन वे इस आदत से बाहर नहीं निकल पा रही थीं। सुसाइड नोट में छलका दर्द घटना स्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें तीनों बहनों ने लिखा है –“सॉरी मम्मी-पापा, हम गेम नहीं छोड़ पा रहे हैं।” यह शब्द माता-पिता के लिए ऐसा दर्द छोड़ गए हैं, जिसे शायद शब्दों में बयां करना मुश्किल है। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ घटना के बाद पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों के अनुसार, तीनों बहनें पढ़ाई में ठीक थीं, लेकिन धीरे-धीरे मोबाइल गेम की लत उनके जीवन पर हावी होती चली गई। पुलिस जांच में जुटी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि तीनों ने यह कदम आपसी सहमति से उठाया। बच्चों में बढ़ती मोबाइल लत चिंता का विषय यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। बच्चों में मोबाइल और ऑनलाइन गेम की बढ़ती लत न केवल उनकी पढ़ाई बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए और उनके डिजिटल इस्तेमाल पर नजर रखनी चाहिए। अगर आप या आपके आसपास कोई बच्चा मोबाइल या गेमिंग की लत से जूझ रहा है, तो समय रहते काउंसलिंग और मार्गदर्शन बेहद जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi : अमेरिकी ट्रेड डील में PM मोदी पर दबाव, बोले- देशवासियों का खून-पसीना बेचा

Rahul Gandhi : अमेरिकी ट्रेड डील में PM मोदी पर दबाव, बोले- देशवासियों का खून-पसीना बेचा

कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी ट्रेड डील को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी ने कहा कि इस डील में प्रधानमंत्री पर अमेरिका की ओर से दबाव था और सरकार ने देश के किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों के खून-पसीने की कमाई को बेच दिया। राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह पहली बार हुआ है जब अमेरिका के राष्ट्रपति के भाषण पर नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका गया। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। राहुल गांधी का कहना है कि सरकार पारदर्शिता से काम नहीं कर रही और आम जनता को यह नहीं बताया जा रहा कि ट्रेड डील की शर्तें क्या हैं और इसका असर किन-किन वर्गों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, “देश जानना चाहता है कि आखिर इस समझौते से किसे फायदा हुआ और किसे नुकसान। सरकार को सच सामने रखना चाहिए।” कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए आम लोगों के हितों की अनदेखी कर रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump के फैसले से बाजार में बहार, निवेशकों के चेहरे खिले

Trump के फैसले से बाजार में बहार, निवेशकों के चेहरे खिले

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा कुछ आयात शुल्क (टैरिफ) में कटौती की घोषणा के बाद दुनियाभर के शेयर बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखा। सोमवार को सेंसेक्स करीब 2300 अंकों की जबरदस्त बढ़त के साथ 84,000 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी भी करीब 700 अंक उछलकर मजबूत स्थिति में पहुंच गया। इस तेजी का सबसे ज्यादा फायदा अडाणी ग्रुप के शेयरों को मिला। ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में 13% तक की तेजी देखी गई। निवेशकों में एक बार फिर भरोसा लौटता नजर आया है। निवेशकों को क्यों मिल रही राहत? टैरिफ घटने से वैश्विक व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे कंपनियों की लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ सकता है। इसी उम्मीद में निवेशक बाजार में जमकर खरीदारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों की राय बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर इसी तरह सकारात्मक संकेत मिलते रहे, तो आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार और मजबूती दिखा सकता है। निवेशकों के लिए यह समय सतर्कता के साथ अवसर तलाशने का है, क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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तीन दिन में Silver ₹1.60 लाख सस्ती, अब ₹2.41 लाख/किलो; Gold भी फिसलकर ₹1.40 लाख पर

तीन दिन में Silver ₹1.60 लाख सस्ती, अब ₹2.41 लाख/किलो; Gold भी फिसलकर ₹1.40 लाख पर

लगातार तेजी के बाद अब Gold और Silver की कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है। बाजार में मुनाफा वसूली बढ़ने से पिछले तीन दिनों में चांदी करीब ₹1.60 लाख प्रति किलो सस्ती हो गई है। फिलहाल चांदी की कीमत घटकर लगभग ₹2.41 लाख प्रति किलो पर आ गई है। वहीं सोने की कीमत में भी गिरावट दर्ज की गई है। सोना अब करीब ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। बीते कुछ दिनों में सोने-चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर थीं, जिसके बाद निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू किया। इसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव, डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर बने माहौल का असर घरेलू बाजार पर भी दिख रहा है। हालांकि जानकारों के मुताबिक, लंबी अवधि में सोना-चांदी निवेश के लिहाज से अब भी सुरक्षित विकल्प बने हुए हैं। सर्राफा बाजार से जुड़े व्यापारियों का मानना है कि आगे कीमतों में कुछ और उतार-चढ़ाव संभव है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी करने के बजाय सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Pakistan पर बॉयकॉट का असर: क्रिकेट और साख दोनों पर पड़ सकता है भारी संकट

Pakistan पर बॉयकॉट का असर: क्रिकेट और साख दोनों पर पड़ सकता है भारी संकट

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में Pakistan एक बार फिर मुश्किल दौर से गुजर रहा है। कई देशों द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ बॉयकॉट की चर्चा तेज हो गई है, जिसका सीधा असर उसकी टीम के प्रदर्शन, टूर्नामेंट में भविष्य और अंतरराष्ट्रीय छवि पर पड़ सकता है। अगर हालात नहीं सुधरे, तो पाकिस्तान को खेल के मैदान के साथ-साथ वैश्विक मंच पर भी बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है। बॉयकॉट की स्थिति में पाकिस्तान को पूरे मुकाबले खेलने का मौका नहीं मिल सकता। ऐसे में टीम का अभ्यास और तैयारी प्रभावित होगी। इससे ग्रुप स्टेज में ही बाहर होने का खतरा बढ़ सकता है। खिलाड़ी मानसिक दबाव में आ सकते हैं, जिसका असर उनके खेल पर साफ दिखेगा। अगर विवाद ज्यादा बढ़ता है और नियमों का उल्लंघन होता है, तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) पाकिस्तान पर बैन लगाने पर भी विचार कर सकती है। इसका मतलब यह होगा कि पाकिस्तान की टीम कुछ समय तक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट से बाहर रह सकती है। पाकिस्तान पहले ही सुरक्षा कारणों से कई साल तक बड़े टूर्नामेंटों की मेजबानी से वंचित रहा है। अब अगर बॉयकॉट की स्थिति बनती है, तो भविष्य में किसी भी बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी मिलना और कठिन हो जाएगा। इससे देश के क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ेगा। पाकिस्तान में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जुनून है। ऐसे में फैंस को डर है कि इन हालातों का असर उनके पसंदीदा खिलाड़ियों के करियर और देश के क्रिकेट भविष्य पर पड़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Budget में 15% बढ़ोतरी, आम जनता को राहत और स्वास्थ्य-रेल सेक्टर को बड़ी सौगात

Budget में 15% बढ़ोतरी, आम जनता को राहत और स्वास्थ्य-रेल सेक्टर को बड़ी सौगात

केंद्र सरकार ने Budget में देश की सुरक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार ने रक्षा बजट में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जिससे सेना को और ज्यादा आधुनिक संसाधन मिल सकेंगे। सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे मध्यम वर्ग को बड़ी राहत की उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। हालांकि, स्वास्थ्य क्षेत्र में कई अहम फैसले लिए गए हैं। कैंसर मरीजों को राहत सरकार ने 17 जरूरी कैंसर दवाओं को ड्यूटी फ्री करने का फैसला किया है। इससे इन दवाओं की कीमत कम होगी और मरीजों को इलाज में बड़ी राहत मिलेगी। 3 नए आयुर्वेदिक एम्स की घोषणा देश में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए तीन नए आयुर्वेदिक एम्स स्थापित किए जाएंगे। इससे आयुष सिस्टम को मजबूती मिलेगी और लोगों को बेहतर इलाज मिलेगा। देश को मिलेंगे 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर बजट में 7 नए हाईस्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की गई है। इससे यात्रा का समय कम होगा और आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार मिलेगी। सरकार का कहना है कि यह बजट देश की सुरक्षा को मजबूत करने, आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने और विकास की गति तेज करने की दिशा में अहम कदम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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सर्दी का कहर: Uttarakhand के कालापानी में पारा माइनस 35°, यूपी में कोहरे से बड़ा हादसा

सर्दी का कहर: Uttarakhand के कालापानी में पारा माइनस 35°, यूपी में कोहरे से बड़ा हादसा

Uttarakhand के सीमावर्ती इलाके कालापानी में तापमान माइनस 35 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। यहां हालात इतने कठिन हैं कि लोगों की आंखों में आंसू तक जम रहे हैं। भारी बर्फबारी और तेज हवाओं के चलते पहाड़ी इलाकों में सड़कें फिसलन भरी हो गई हैं। सेना और प्रशासन के जवान बेहद कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी निभा रहे हैं। स्थानीय लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है और जरूरी सेवाओं को ही बाहर जाने की अनुमति दी जा रही है। वहीं उत्तर प्रदेश में घने कोहरे ने आफत मचा रखी है। दृश्यता बेहद कम होने के कारण एक ही स्थान पर 11 गाड़ियां आपस में टकरा गईं। हादसे में कई लोग घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चेतावनी जारी की है। लोगों से अपील की गई है कि अनावश्यक यात्रा से बचें, गर्म कपड़े पहनें और सुरक्षित रहें। इस भीषण सर्दी ने एक बार फिर याद दिलाया है कि प्रकृति के आगे इंसान कितना असहाय है, लेकिन सावधानी और सतर्कता से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Budget से बड़ी उम्मीदें: 300 नई ट्रेनों का ऐलान संभव, 13 लाख तक की कमाई टैक्स फ्री हो सकती है

Budget से बड़ी उम्मीदें: 300 नई ट्रेनों का ऐलान संभव, 13 लाख तक की कमाई टैक्स फ्री हो सकती है

देश का आम आदमी, नौकरीपेशा वर्ग और किसान – सभी की नजरें आने वाले केंद्रीय budget पर टिकी हैं। हर किसी को उम्मीद है कि इस बार बजट में राहत भरे फैसले होंगे। सूत्रों के मुताबिक, सरकार 300 नई ट्रेनों की घोषणा कर सकती है और 13 लाख रुपए तक की सालाना आय को टैक्स फ्री करने पर भी विचार चल रहा है। इसके साथ ही बजट में 5 बड़े ऐलान संभव बताए जा रहे हैं। मुख्य बिंदु : अगर ये घोषणाएं बजट में शामिल होती हैं, तो आम जनता की जेब को सीधी राहत मिलेगी और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। अब सभी को इंतजार है बजट के दिन का, जब पता चलेगा कि सरकार आम लोगों की उम्मीदों पर कितना खरी उतरती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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GOLD पहली बार ₹1.5 लाख के पार, आम लोगों की पहुंच से हुआ दूर

GOLD पहली बार ₹1.5 लाख के पार, आम लोगों की पहुंच से हुआ दूर

देश में GOLD की कीमतों ने नया इतिहास रच दिया है। पहली बार सोना ₹1.5 लाख के पार पहुंच गया है। बीते कुछ ही दिनों में सोने के दामों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। सोमवार को सोना एक ही दिन में ₹7,795 महंगा हो गया, जिससे आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। पिछले 21 दिनों की बात करें तो सोना करीब ₹22,000 तक महंगा हो चुका है। शादी-ब्याह और निवेश के लिए सोना खरीदने वालों को अब ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है। चांदी भी नहीं रही पीछे सिर्फ सोना ही नहीं, चांदी की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। चांदी ₹10,000 बढ़कर ₹3.20 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है। बाजार में चांदी के दामों ने भी निवेशकों को हैरान कर दिया है। क्यों बढ़ रहे हैं सोना-चांदी के दाम? जानकारों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती, डॉलर में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं की वजह से लोग सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना-चांदी की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं। इसी कारण इनके दाम लगातार बढ़ रहे हैं। आम आदमी पर असर तेजी से बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। शादी के लिए गहने खरीदने वाले परिवार परेशान हैं, वहीं छोटे निवेशकों के लिए सोना अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Araghchi

Iran Power Struggle: Araghchi की छुट्टी की चर्चा, Pezeshkian कमजोर और IRGC मजबूत

ईरान की सियासत में इन दिनों सबकुछ सामान्य नहीं है। सत्ता के अलग-अलग केंद्रों के बीच खींचतान की खबरों ने एक बार फिर देश की राजनीति को चर्चा में ला दिया है। सबसे ज्यादा नजर विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) पर है। रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि उन्हें विदेश मंत्री के पद से हटाने की तैयारी चल रही है। हालांकि, अभी तक अराघची को हटाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में इस खबर को फिलहाल दावे और मीडिया रिपोर्टों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने ईरान की सत्ता में चल रहे बड़े Power Struggle को जरूर सामने ला दिया है। Araghchi को हटाने की आखिर क्यों हो रही चर्चा? अब्बास अराघची ईरान की विदेश नीति के अहम चेहरों में शामिल हैं। अमेरिका के साथ बातचीत और दूसरे देशों के साथ कूटनीतिक संपर्क में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार के भीतर कुछ लोगों को अराघची की कार्यशैली को लेकर आपत्ति है। दावा है कि अमेरिका के साथ बातचीत जैसे संवेदनशील मामलों में विदेश मंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय के बीच मतभेद सामने आए हैं। इसी के बाद अराघची को पद से हटाने की चर्चा तेज हुई। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम फैसला लिया जा चुका है या नहीं। Pezeshkian की सरकार के सामने बढ़ी चुनौती ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की सरकार भी इस पूरे विवाद के केंद्र में है। पेजेश्कियान अपेक्षाकृत सुधारवादी रुख के लिए जाने जाते हैं और विदेश नीति में बातचीत तथा कूटनीति को अहमियत देते रहे हैं। दूसरी ओर, ईरान की सुरक्षा और सैन्य व्यवस्था में Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) का प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण है। मौजूदा तनाव के बीच यह सवाल उठ रहा है कि देश के बड़े फैसलों में राष्ट्रपति सरकार की भूमिका कितनी है और सुरक्षा प्रतिष्ठान का प्रभाव कितना बढ़ चुका है। यही सवाल अब ईरान की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। IRGC के बढ़ते प्रभाव की क्यों हो रही चर्चा? ईरान में IRGC सिर्फ एक सामान्य सैन्य संगठन नहीं है। देश की सुरक्षा, क्षेत्रीय रणनीति और राजनीतिक व्यवस्था में इसका लंबे समय से प्रभाव रहा है। हालिया घटनाक्रमों के बाद कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि IRGC का प्रभाव और मजबूत हुआ है। खासकर युद्ध और क्षेत्रीय तनाव के माहौल में सुरक्षा से जुड़े फैसलों में सैन्य नेतृत्व की भूमिका बढ़ने की बात कही जा रही है। अगर यह स्थिति आगे भी बनी रहती है, तो इसका सीधा असर ईरान की Foreign Policy पर पड़ सकता है। Supreme Leader की भूमिका सबसे अहम ईरान की राजनीतिक व्यवस्था को समझने के लिए Supreme Leader की भूमिका को समझना जरूरी है। राष्ट्रपति सरकार और प्रशासन का नेतृत्व करते हैं, लेकिन देश की सर्वोच्च राजनीतिक और सैन्य सत्ता Supreme Leader के पास रहती है। इसी वजह से राष्ट्रपति और विदेश मंत्री की राजनीतिक स्थिति को केवल सरकार के फैसलों से नहीं देखा जा सकता। ईरान में Supreme Leader, राष्ट्रपति कार्यालय और IRGC जैसे अलग-अलग Power Centres के बीच संतुलन बेहद अहम है। मौजूदा घटनाक्रम में इसी Power Balance को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका के साथ बातचीत बनी बड़ा मुद्दा अराघची का नाम अमेरिका के साथ बातचीत से भी जुड़ा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच किसी भी तरह की बातचीत देश की आंतरिक राजनीति में बेहद संवेदनशील मुद्दा बन जाती है। एक तरफ बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश दिखाई देती है, तो दूसरी तरफ ईरान के कट्टरपंथी और सुरक्षा से जुड़े धड़े अमेरिका के प्रति सख्त रुख रखने के पक्ष में रहे हैं। ऐसे माहौल में विदेश मंत्री की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए अराघची को लेकर सामने आई खबरों को ईरान की व्यापक Foreign Policy के संदर्भ में देखा जा रहा है। क्या राष्ट्रपति की Power सच में कम हो रही है? यह सवाल फिलहाल पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। पेजेश्कियान अब भी राष्ट्रपति हैं और उनकी सरकार औपचारिक रूप से देश के प्रशासन को संभाल रही है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषणों में यह चर्चा जरूर बढ़ी है कि संकट के समय सुरक्षा और सैन्य संस्थानों का प्रभाव बढ़ सकता है। राष्ट्रपति की ताकत कमजोर होने और IRGC के ज्यादा प्रभावशाली होने के दावे भी इसी संदर्भ में सामने आए हैं। हालांकि, इन दावों के हर पहलू की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल ईरान की सत्ता में चल रहे Power Struggle के संकेत के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा। Araghchi की कुर्सी का फैसला क्यों होगा अहम? अगर अराघची को वास्तव में विदेश मंत्री पद से हटा दिया जाता है, तो इसका असर सिर्फ ईरान के विदेश मंत्रालय तक सीमित नहीं रहेगा। इससे यह संकेत मिल सकता है कि तेहरान आने वाले दिनों में अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ बातचीत को लेकर अपनी रणनीति बदल रहा है। साथ ही यह भी साफ हो सकता है कि विदेश नीति में राष्ट्रपति सरकार की आवाज ज्यादा मजबूत है या सुरक्षा प्रतिष्ठान का प्रभाव बढ़ रहा है। फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। लेकिन अराघची को लेकर उठी चर्चा ने ईरान की राजनीति में चल रही अंदरूनी खींचतान को जरूर उजागर कर दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि अराघची अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या ईरान की सत्ता में चल रहा यह Power Shift विदेश मंत्रालय में भी बड़ा बदलाव लेकर आता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

गुना गैंगरेप प्रयास केस: आरोपियों के अवैध मकानों पर चला बुलडोजर, वन भूमि से हटाया अतिक्रमण

गुना जिले में इंजीनियर और उसकी मंगेतर के साथ मारपीट, लूट और सामूहिक दुष्कर्म के प्रयास के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। आरोपियों के बोरखेड़ा गांव स्थित अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाकर कार्रवाई की गई। जांच में सामने आया कि कई लोग वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा कर मकान बनाकर रह रहे थे। प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम ने जेसीबी की मदद से अवैध निर्माण ध्वस्त कर अतिक्रमण हटाया। जंगल में ले जाकर की थी मारपीट और दुष्कर्म की कोशिश घटना गुरुवार रात की है। नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) में कार्यरत 29 वर्षीय इंजीनियर अपनी मंगेतर के साथ हनुमान टेकरी दर्शन कर लौट रहे थे। शाम करीब 7:30 बजे गादेर गांव के पास रिलायंस पेट्रोल पंप के निकट कुछ बदमाशों ने उनकी बाइक रोक ली। आरोपी दोनों को जबरन सड़क किनारे जंगल में ले गए, जहां उनके साथ मारपीट की, मोबाइल, पर्स और अन्य सामान लूट लिया तथा युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म का प्रयास किया। इसी दौरान एक राहगीर ने घटना की सूचना डायल-112 पुलिस को दी। पुलिस टीम के मौके पर पहुंचते ही आरोपी भाग निकले और युवती के साथ बड़ी घटना होने से बच गई। 24 घंटे में पांच आरोपी गिरफ्तार धरनावदा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और 24 घंटे के भीतर पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी: वन भूमि पर अवैध कब्जे हटाए गए आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद प्रशासन ने उनके मकानों की जांच कराई। जांच में वन भूमि पर अतिक्रमण मिलने के बाद बोरखेड़ा गांव में कार्रवाई करते हुए बुलडोजर से अवैध निर्माण ढहा दिए गए। इस दौरान अन्य अतिक्रमण भी हटाए गए। कलेक्टर ने क्या कहा? कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने बताया कि गैंगरेप के प्रयास के मामले में पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान वन भूमि पर अवैध कब्जे की जानकारी मिली, जिसके बाद वन विभाग ने नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। नोट: मामला अभी जांच के अधीन है। आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप सिद्ध होना शेष है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें:deshharpal.com

सागर में पारिवारिक विवाद बना खूनी संघर्ष, रिटायर्ड पुलिसकर्मी पर बहू की हत्या का आरोप

सागर के गायत्री नगर में मंगलवार सुबह पारिवारिक विवाद के दौरान एक दर्दनाक घटना सामने आई। 65 वर्षीय रिटायर्ड पुलिसकर्मी पर अपनी 36 वर्षीय बहू सविता दीक्षित की हत्या करने का आरोप है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया और आरोपी ससुर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है। मृतका के पति देवेश दीक्षित सीमा सुरक्षा बल (BSF) में जवान हैं और वर्तमान में पश्चिम बंगाल में पदस्थ हैं। घटना की सूचना उन्हें दे दी गई है। सविता अपने सास-ससुर के साथ गायत्री नगर स्थित घर में रहती थीं। पड़ोसियों की सूचना पर पहुंची पुलिस मकरोनिया थाना प्रभारी नितिन पाल के अनुसार, बहू के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची तो आरोपी घर में ही मौजूद मिला। प्रारंभिक जांच में महिला के शरीर पर 7 से 8 चोटों के निशान मिले हैं। पुलिस और एफएसएल टीम ने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी का दूसरा बेटा पुलिस विभाग में कार्यरत है। आरोपी का दावा- बहू ने पहले किया हमला पूछताछ में आरोपी रामनरेश दीक्षित ने दावा किया कि मंगलवार सुबह बहू ने घर में रखे मंदिर को उठाकर फेंक दिया और कुर्सियों में भी तोड़फोड़ की। इसके बाद वह बड़ी बेटी को स्कूल छोड़ने चली गई। आरोपी के मुताबिक, जब वह नहाकर पूजा कर रहे थे, तभी बहू वापस लौटी और छोटी बच्ची को उठाकर पटकने लगी। उसे बचाने पहुंचे तो बहू ने उन पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे उनके हाथ में चोट आई। उन्होंने दावा किया कि चाकू छीनने के बाद दोनों के बीच मारपीट हुई, जिसमें बहू गंभीर रूप से घायल हो गई और उसकी मौत हो गई। लंबे समय से चल रहा था पारिवारिक विवाद आरोपी का कहना है कि बहू के घर आने के बाद से परिवार में लगातार विवाद होते थे और मोहल्ले के लोग भी इस स्थिति से परिचित थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार पुलिस का कहना है कि महिला की मौत का सटीक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल आरोपी के बयान, घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें:deshharpal.com

जबलपुर: मुंह के छाले की सर्जरी के बाद मुंह के अंदर उगने लगे बाल, मरीज ने डॉक्टर पर लापरवाही का लगाया आरोप

जबलपुर के अधारताल निवासी 55 वर्षीय मुकेश गंभीर ने एक निजी अस्पताल के डॉक्टर पर ऑपरेशन में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि मुंह के अंदर हुए एक छोटे से छाले की सर्जरी के बाद पिछले 19 महीनों से उनके मुंह के भीतर बाल उग रहे हैं, जिससे खाना-पीना और निगलना बेहद मुश्किल हो गया है। गले की त्वचा लगाने का आरोप पीड़ित के अनुसार, जून 2024 में डॉक्टर अर्पण मिश्रा ने उनके मुंह के छाले का ऑपरेशन किया था। आरोप है कि सर्जरी के दौरान डॉक्टर ने गले की त्वचा (स्किन ग्राफ्ट) का इस्तेमाल मुंह के अंदर किया, जिसके कारण वहां लगातार बाल उगने लगे। मुकेश गंभीर का कहना है कि ऑपरेशन से पहले उन्हें इस तरह के संभावित दुष्प्रभाव या जोखिम के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। आयुष्मान योजना के बावजूद नकद राशि लेने का आरोप पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि इलाज का कुछ हिस्सा आयुष्मान भारत योजना के तहत कवर होने के बावजूद अस्पताल ने उनसे 75 हजार रुपये नकद वसूले। उनका कहना है कि ऑपरेशन से कुछ मिनट पहले घबराहट की स्थिति में उनसे और उनके परिजनों से कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, जिनमें यह उल्लेख था कि अस्पताल ने कोई अतिरिक्त राशि नहीं ली है। कई अस्पतालों में कराया इलाज, नहीं मिली राहत मुकेश गंभीर ने बताया कि समस्या बढ़ने पर उन्होंने संबंधित डॉक्टर से संपर्क किया, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने भोपाल, मेमोरियल अस्पताल और होशंगाबाद सहित कई अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन अब तक स्थायी राहत नहीं मिल सकी। प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग लगातार शारीरिक परेशानी और मानसिक तनाव झेल रहे पीड़ित ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, बेहतर इलाज उपलब्ध कराने और यदि लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। नोट: यह खबर पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों और शिकायत पर आधारित है। संबंधित डॉक्टर या अस्पताल की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें:deshharpal.com
Bihar

Bihar Politics में बड़ा सियासी ट्विस्ट, Bankipur हार के बाद PM Modi से मिले Nitish Kumar

Bihar की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट के नतीजे के बाद हलचल बढ़ गई है। बीजेपी को मिली हार के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात संसद भवन में हुई। इसके बाद बिहार की सियासत में इस बैठक को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बांकीपुर का चुनाव परिणाम बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ऐसे समय में नीतीश कुमार का पीएम मोदी से मिलना राजनीतिक नजरिए से अहम माना जा रहा है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। Bankipur Result के बाद हुई अहम मुलाकात बांकीपुर सीट का नतीजा सामने आने के बाद बीजेपी और एनडीए के राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इसी बीच नीतीश कुमार की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात ने सियासी चर्चाओं को और तेज कर दिया। संसद भवन में हुई इस मुलाकात को बिहार के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि चुनावी नतीजों के बाद एनडीए की आगे की रणनीति क्या रहती है। BJP की हार ने खड़े किए कई सवाल बांकीपुर को पटना की अहम विधानसभा सीटों में माना जाता है। यहां बीजेपी की हार के बाद पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव परिणाम को लेकर विपक्ष भी एनडीए पर निशाना साध रहा है और इसे बिहार की राजनीति में बदलते माहौल का संकेत बता रहा है। हालांकि, किसी एक सीट के परिणाम को पूरे राज्य की राजनीति का सीधा संकेत मानना सही नहीं होगा। फिर भी बांकीपुर का नतीजा बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय जरूर बन गया है। Nitish Kumar और PM Modi की बैठक पर टिकी नजरें नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब बिहार में चुनावी नतीजों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को लेकर आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि बैठक में किसी बड़े राजनीतिक फैसले पर चर्चा हुई। फिलहाल इतना जरूर है कि बांकीपुर के नतीजे के बाद हुई इस मुलाकात ने बिहार की Politics को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है। आगे क्या होगी NDA की रणनीति? बिहार की राजनीति में बीजेपी और जेडीयू लंबे समय से महत्वपूर्ण सहयोगी रहे हैं। चुनावी नतीजों के बाद दोनों दलों के लिए आगे की रणनीति तय करना अहम होगा। खासकर उन सीटों पर पार्टी संगठन और चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा की जा सकती है जहां उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं आए। अब सबकी नजरें आने वाले राजनीतिक बयानों और एनडीए की अगली गतिविधियों पर हैं। बांकीपुर का नतीजा और उसके बाद नीतीश कुमार की पीएम मोदी से मुलाकात फिलहाल बिहार की सियासत में चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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