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Pragya Thakur

Supreme Court Closes Plea Against Pragya Thakur’s Bail, Final Verdict in Malegaon Blast Case Awaited

Supreme Court ने बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में मिली ज़मानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई बंद कर दी है। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट यानी एनआईए अदालत ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है, इसलिए अब टॉप कोर्ट का हस्तक्षेप करना ठीक नहीं होगा। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि प्रज्ञा ठाकुर की ज़मानत रद्द की जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “जब निचली अदालत इस पर फैसला देने वाली है, तो हम इसमें दखल नहीं दे सकते।” सितंबर 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए धमाकों में 6 लोगों की मौत हुई थी और 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे। बम मोटरसाइकिल पर रखे गए थे। इस मामले में प्रज्ञा ठाकुर को आरोपी बनाया गया था। उन्हें कई साल जेल में रहना पड़ा, फिर 2017 में उन्हें ज़मानत मिली। आज वे भोपाल से सांसद हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने कहा कि एनआईए कोर्ट ने पूरी सुनवाई कर ली है और अब वो जल्द ही फैसला सुनाएगी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का दखल देना ज़रूरी नहीं है। यह फैसला प्रज्ञा ठाकुर के लिए फिलहाल राहत भरा है, लेकिन असली फैसला एनआईए कोर्ट का होगा – जो ये तय करेगा कि वो दोषी हैं या नहीं। यह मामला सिर्फ कानून की किताबों तक सीमित नहीं है। इसमें उन परिवारों की भी बात है जिन्होंने 2008 में अपनों को खोया। पिछले 16 सालों से वे इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, प्रज्ञा ठाकुर, जो अब एक सांसद हैं, खुद को निर्दोष बताती रही हैं। अब सबकी निगाहें एनआईए कोर्ट के आखिरी फैसले पर टिकी हैं।
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India to Buy 26 Rafale Marine Jets for ₹63,000 Crore, Boost for Navy

India to Buy 26 Rafale Marine Jets for ₹63,000 Crore, Boost for Navy

India-France Deal Finalized आज भारत और फ्रांस के बीच एक बड़ी डील पर मुहर लग गई है। भारत अब फ्रांस से 63,000 करोड़ रुपये में 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमान खरीदेगा। ये खास विमान परमाणु हथियार ले जाने और दागने की क्षमता रखते हैं। इन्हें भारतीय नौसेना (नेवी) के बेड़े में शामिल किया जाएगा, जिससे समंदर में भारत की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। राफेल मरीन विमान खास तौर पर समुद्र से उड़ान भरने और युद्ध करने के लिए बनाए गए हैं। इन्हें भारतीय नौसेना के एयरक्राफ्ट करियर ‘INS विक्रांत’ पर तैनात किया जाएगा। इससे देश की समुद्री सीमा पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी। इस डील के बाद भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास समंदर से परमाणु हमला करने की ताकत होगी। देशवासियों के लिए यह गर्व का पल है, क्योंकि अब हमारी नौसेना और भी ज्यादा आधुनिक और मजबूत हो जाएगी। भारत-फ्रांस की दोस्ती भी इस डील से और गहरी हो गई है। राफेल विमान पहले भी भारतीय वायुसेना के बेड़े का हिस्सा बन चुके हैं और अब नेवी में भी राफेल की गड़गड़ाहट सुनाई देगी। सरकार ने इस कदम को भारत की सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया है। आने वाले समय में ये राफेल मरीन विमान भारत के दुश्मनों को करारा जवाब देने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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Pakistan’s Nuclear Threats to India

Pakistan’s Nuclear Threats to India

130 Nuclear Weapons Aimed at India: Why Does Pakistan Keep Threatening a Nuclear Attack? जब भी INDIA और PAKISTAN के बीच तनाव बढ़ता है, पाकिस्तान अक्सर परमाणु हमले की धमकी देने लगता है। हाल ही में फिर से पाकिस्तान ने कहा कि उसके पास भारत को निशाना बनाने के लिए 130 परमाणु हथियार हैं। सवाल उठता है — पाकिस्तान बार-बार ऐसी धमकियाँ क्यों देता है और भारत इसका सामना कैसे करेगा? पाकिस्तान की धमकी का कारण पाकिस्तान जानता है कि पारंपरिक युद्ध में वह भारत का मुकाबला नहीं कर सकता। भारत की सेना, वायुसेना और नौसेना, तीनों ही पाकिस्तान से कई गुना मजबूत हैं। इसलिए पाकिस्तान “न्यूक्लियर थ्रेट” का सहारा लेता है ताकि भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके। यह उसकी एक पुरानी रणनीति है — डर दिखाकर दुनिया का ध्यान खींचना और भारत को बातचीत की टेबल पर मजबूर करना। भारत का जवाब शांत लेकिन सख्त भारत हमेशा से संयमित रहा है। हमारे देश की “नो फर्स्ट यूज़” (पहले हमला नहीं करेंगे) नीति बहुत साफ है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि भारत कमजोर है। अगर पाकिस्तान किसी तरह की नादानी करता है, तो भारत के पास भी पूरी तैयारी है। भारत की परमाणु ताकत न सिर्फ जवाब देने में सक्षम है, बल्कि किसी भी दुश्मन को पूरी तरह खत्म करने की ताकत रखती है। दुनिया क्या सोचती है? पाकिस्तान की बार-बार की धमकियों से उसकी साख खुद कमजोर हो गई है। दुनियाभर के देश जानते हैं कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक समस्याओं से घिरा हुआ है — आर्थिक संकट, आतंकवाद और राजनीतिक अस्थिरता। भारत एक जिम्मेदार परमाणु ताकत के रूप में देखा जाता है, जबकि पाकिस्तान पर भरोसा करने से कई देश कतराते हैं।
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सिंधु जल समझौता: सूखा और बाढ़ से मची अफरा-तफरी, क्या भारत ने शुरू किया बड़ा खेल?

“Sindhu Water Treaty: Drought Followed by Floods, Is India Playing a Big Game?”

भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुए सिंधु जल समझौते पर अब असर दिखने लगा है। पहले जहां पाकिस्तान को सूखे का सामना करना पड़ा, अब वहां बाढ़ जैसी हालात बन रहे हैं। इस अचानक बदलते मौसम और जल संकट के पीछे क्या भारत की कोई बड़ी रणनीति है? पिछले कुछ महीनों में भारत ने सिंधु नदी के पानी के बहाव को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। जानकारों का मानना है कि भारत अब समझौते की हर एक शर्त को सख्ती से लागू कर रहा है, ताकि पाकिस्तान पर दबाव बनाया जा सके। पहले पानी की कमी ने पाकिस्तान की खेती और पीने के पानी पर असर डाला। अब ज्यादा पानी छोड़ने से वहां बाढ़ जैसे हालात पैदा हो रहे हैं। आम जनता में बढ़ी बेचैनीपाकिस्तान के गांवों और शहरों में पानी को लेकर अफरा-तफरी मची है। एक तरफ खेत सूखे से झुलस गए थे, अब वहीं पानी में डूब रहे हैं। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर यह सब अचानक कैसे हो रहा है? सरकारें भी इस संकट से निपटने के लिए तैयार नहीं दिख रही हैं। भारत का ‘सॉफ्ट पावर’ गेम?कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने यह जल नीति सोच-समझकर अपनाई है। युद्ध के बिना ही पाकिस्तान को पानी के जरिए मुश्किल में डालना एक बड़ा कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। वैसे भी, पानी को ‘नीला सोना’ कहा जाता है और इसकी अहमियत आने वाले समय में और बढ़ने वाली है। क्या आगे और बढ़ेगा दबाव?अगर भारत सिंधु जल समझौते में और सख्ती दिखाता है, तो पाकिस्तान को और बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में भारत किस तरह कदम बढ़ाता है, उस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
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मिशा अग्रवाल का दुखद निधन: जन्मदिन के दो दिन बाद सोशल मीडिया स्टार ने कहा अलविदा

MISHA AGRAWAL का दुखद निधन: जन्मदिन के दो दिन बाद सोशल मीडिया स्टार ने कहा अलविदा

दिल को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है।मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर MISHA AGRAWAL का निधन हो गया है। सबसे दर्दनाक बात यह है कि Misha ने अभी दो दिन पहले ही अपना 25वां जन्मदिन मनाया था। Misha सोशल मीडिया पर अपनी मुस्कान, पॉजिटिव एनर्जी और शानदार कंटेंट के लिए जानी जाती थीं। लाखों लोग उनके वीडियोज और पोस्ट से जुड़ाव महसूस करते थे। लेकिन किसे पता था कि उनकी ज़िंदगी इतनी जल्दी थम जाएगी। बताया जा रहा है कि Misha अचानक तबीयत बिगड़ने की वजह से दुनिया छोड़कर चली गईं। उनके चाहने वालों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया पर फैंस और दोस्त उन्हें नम आँखों से याद कर रहे हैं। मिशा का जाना यह सिखाता है कि ज़िंदगी कितनी नाज़ुक और अनिश्चित है।उनकी प्यारी मुस्कान और जिंदादिली हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी।
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भारत ने सिंधु जल संधि पर लगाई रोक: 65 साल पुराने समझौते को लेकर पाकिस्तान को भेजा सख्त संदेश

India Suspends Indus Water Treaty: Ends 65-Year-Old Agreement, Sends Strong Message to Pakistan

भारत ने सिंधु जल संधि पर लगाई रोक: 65 साल पुराने समझौते को लेकर पाकिस्तान को भेजा सख्त संदेश – BHARAT ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 65 साल पुरानी सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। इस फैसले की आधिकारिक जानकारी पाकिस्तान को एक पत्र भेजकर दी गई है। इस संधि के तहत Bharat हर साल पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का पानी जाने देता था। यह समझौता 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था, जब विश्व बैंक की मध्यस्थता से यह जल बंटवारा तय किया गया था। लेकिन बीते कुछ सालों में पाकिस्तान की ओर से बार-बार आतंकी गतिविधियों और सीमा पार गोलीबारी के चलते भारत में आक्रोश बढ़ता गया। अब सरकार ने साफ संदेश दे दिया है — “Blood and water cannot flow together.” यह फैसला केवल एक कूटनीतिक कदम नहीं है, बल्कि यह देश की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा हुआ है। भारत अब अपने जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करेगा और विकास के नए रास्ते खोलेगा। पाकिस्तान को भेजे गए पत्र में साफ लिखा गया है कि भारत इस संधि की समीक्षा और बदलाव चाहता है। अब नई परिस्थितियों के अनुसार समझौते को दोबारा से देखा जाएगा। देश की जनता का समर्थन भी इस फैसले के साथ है। लोगों का मानना है कि जब पड़ोसी मुल्क बार-बार पीठ में छुरा घोंपता है, तो ऐसे पुराने समझौते अब कोई मायने नहीं रखते।
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अनुराग कश्यप ने ब्राह्मण समाज को लेकर दिए बयान पर मांगी माफी, बोले- गुस्से में अपनी मर्यादा भूल गया

ANURAG KASHYAP ने BRAHMIN समाज को लेकर दिए बयान पर मांगी माफी, बोले- गुस्से में अपनी मर्यादा भूल गया

मुंबई: मशहूर फिल्म निर्देशक ANURAG KASHYAP ने हाल ही में अपने एक बयान से ब्राह्मण समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई, जिसके बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। अब अनुराग कश्यप ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए खुलेआम माफी मांगी है। ANURAG ने कहा, “मैं गुस्से में आकर मर्यादा भूल गया था। मेरा इरादा किसी भी समाज या व्यक्ति को ठेस पहुंचाने का नहीं था। मैं भविष्य में ऐसी कोई गलती नहीं करूंगा।” दरअसल, किसी मुद्दे पर बात करते हुए अनुराग कश्यप ने पूरे ब्राह्मण समाज के लिए गलत शब्दों का इस्तेमाल कर दिया था। उनके इस बयान का वीडियो वायरल हो गया और लोगों ने उनकी जमकर आलोचना की। BRAHMIN COMMUNITY में गहरा आक्रोशउनके बयान से ब्राह्मण समाज में नाराजगी फैल गई। कई संगठनों और सोशल मीडिया यूज़र्स ने उनकी गिरफ्तारी की मांग की और उनके खिलाफ विरोध दर्ज कराया। मानवता और समझदारी की मिसाल बने अनुरागहालांकि बाद में अनुराग कश्यप ने अपनी गलती को माना और बिना देर किए माफी भी मांगी। उनका ये कदम बताता है कि इंसान अगर गलती करता है तो उसमें उसे स्वीकारने की हिम्मत भी होनी चाहिए। माफी मांगकर अनुराग ने एक सकारात्मक संदेश दिया है। SOCIAL MEDIA पर प्रतिक्रियाएं मिली-जुलीकुछ लोग अनुराग की माफी को सच्चे दिल से स्वीकार कर रहे हैं, तो कुछ अब भी उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मगर एक बात तय है—बोलने से पहले सोचने की जरूरत सभी को है, खासकर जब बात समाज की भावनाओं से जुड़ी हो।
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Rahul Gandhi

Rahul Gandhi ने अमेरिका में उठाए चुनाव पर सवाल, बोले- महाराष्ट्र में दो घंटे में कैसे पड़े 65 लाख वोट?

Congress नेता Rahul Gandhi एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते नजर आए हैं। इस बार उन्होंने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय चुनावों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सिर्फ दो घंटे—शाम 5:30 से 7:30 बजे के बीच—में 65 लाख वोट कैसे पड़ सकते हैं? Rahul Gandhi ने यह सवाल उठाते हुए चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक आम आदमी को यह जानने का हक है कि उसका वोट सुरक्षित और सही तरीके से दर्ज हो रहा है या नहीं। “इतने कम समय में इतने ज्यादा वोट पड़ना असंभव सा लगता है,” राहुल ने कहा। Rahul का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में लोकसभा चुनाव का माहौल गरम है और हर पार्टी अपनी रणनीति में जुटी है। राहुल ने यह भी कहा कि आज के समय में लोगों को यह समझना जरूरी है कि लोकतंत्र की बुनियाद क्या है और इसे मजबूत रखने के लिए पारदर्शिता कितनी जरूरी है। उनके इस बयान पर बीजेपी की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया भी आ सकती है, क्योंकि इससे पहले भी कई बार राहुल गांधी ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठा चुके हैं। हालांकि, राहुल गांधी का मकसद चुनावी प्रक्रिया को और मजबूत और साफ-सुथरा बनाना बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये सवाल किसी पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र के हक में हैं।
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भारत आए अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस: 3 महीने में 5 विदेशी दौरे और हर जगह विवाद, अब भारत कैसे करेगा स्वागत?

BHARAT आए AMERICA के VICE PRESIDENT JD VANCE: 3 महीने में 5 विदेशी दौरे और हर जगह विवाद, अब भारत कैसे करेगा स्वागत?

नई दिल्ली – अमेरिका के नए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इन दिनों लगातार सुर्खियों में हैं। वजह है उनके एक के बाद एक विदेशी दौरे – और हर दौरे के बाद उठता कोई न कोई विवाद। अब जब वे भारत पहुंचे हैं, तो सवाल ये है – भारत उनका स्वागत कैसे करेगा और रिश्तों को कैसे संभालेगा? 3 महीने में 5 दौरे, हर जगह विवाद जेडी वेंस ने अमेरिका के उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद से अब तक 5 देशों का दौरा कर लिया है – और ये सब सिर्फ तीन महीने के अंदर। हर दौरे के बाद अमेरिका को सफाई देनी पड़ी या संबंधों को संभालना पड़ा। भारत को क्यों है ये दौरा खास? भारत और अमेरिका के रिश्ते इस समय बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। व्यापार, सुरक्षा, तकनीक और एशिया की राजनीति – हर स्तर पर दोनों देश एक-दूसरे के नजदीक आ रहे हैं। भारत के लिए ये दौरा एक मौका भी है और चुनौती भी। जेडी वेंस के साथ बातचीत में ये देखा जाएगा कि अमेरिका की नई सरकार भारत को किस नजर से देखती है। जेडी वेंस का राजनीतिक स्टाइल वेंस को अमेरिका में बोल्ड और विवादास्पद नेता के रूप में जाना जाता है। वे बिना लाग-लपेट के बात करते हैं, जो कई बार राजनयिकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर देती है।लेकिन वहीं, वे एक ईमानदार और स्पष्ट सोच वाले नेता भी माने जाते हैं, जो अमेरिका की घरेलू समस्याओं को समझते हैं। भारत की तैयारी भारत इस दौरे को डिप्लोमैटिक बैलेंस के रूप में देख रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय इस बात को लेकर सतर्क हैं कि बातचीत सकारात्मक दिशा में जाए।सूत्रों के मुताबिक, व्यापार, तकनीक ट्रांसफर, रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर बातचीत होगी। क्या कहता है आम भारतीय? दिल्ली की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक, लोग जेडी वेंस को लेकर मिश्रित भावनाएं रखते हैं। कोई उन्हें अमेरिका का ट्रंप 2.0 कहता है, तो कोई उन्हें बदलाव की उम्मीद मानता है। रजनीश कुमार, एक युवा उद्यमी कहते हैं – “हमें उम्मीद है कि भारत को मजबूत साझेदार की तरह देखा जाएगा, न कि सिर्फ एक बाजार की तरह।”
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अर्शदीप सिंह ने रचा इतिहास: पीयूष चावला का रिकॉर्ड तोड़ा, पंजाब के सबसे बड़े विकेट टेकर बने

ARSHDEEP SINGH ने रचा इतिहास: पीयूष चावला का रिकॉर्ड तोड़ा, पंजाब के सबसे बड़े विकेट टेकर बने

IPL 2025 में एक और दिल छू लेने वाला पल सामने आया जब अर्शदीप सिंह ने इतिहास रच दिया। उन्होंने पंजाब टीम के लिए सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी बनकर पीयूष चावला का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इस युवा तेज़ गेंदबाज़ ने अपने दम पर वो मुकाम हासिल किया, जो हर खिलाड़ी का सपना होता है। रिकॉर्ड ब्रेकर बना मोगा का लाल मोगा, पंजाब से आने वाले अर्शदीप ने अब तक 58 मैचों में 58 विकेट अपने नाम किए हैं, जबकि पीयूष चावला ने 56 विकेट लिए थे। ये सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, बल्कि मेहनत, जज्बा और परिवार के सपनों का नतीजा है। मैदान पर कुछ यादगार मोमेंट्स क्यों खास है ये रिकॉर्ड? अर्शदीप सिर्फ विकेट नहीं ले रहे, वो युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। छोटे शहरों से आने वाले लड़कों को वो ये यकीन दिला रहे हैं कि अगर दिल में आग हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता। आने वाले मैचों में अर्शदीप से उम्मीदें और बढ़ीं जैसे-जैसे सीजन आगे बढ़ रहा है, पंजाब को अर्शदीप से और भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। उनकी लाइन-लेंथ, यॉर्कर और डेथ ओवर में कंट्रोल उन्हें टीम का तुरुप का इक्का बनाता है।
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AAP

Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
INDIA Bloc

Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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