महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति इन दिनों एक बार फिर गरमा गई है। महायुति सरकार के दो बड़े चेहरे — Eknath Shinde और Devendra Fadnavis — के बीच बयानबाज़ी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। “Ram–Ravan Lanka War” जैसी प्रतीकात्मक भाषा ने इस विवाद को और तीखा कर दिया है। क्या है पूरा मामला? पालघर की एक रैली में CM Eknath Shinde ने बिना नाम लिए कहा कि—“रावण भी अहंकारी था, और उसी अहंकार में उसकी लंका जला दी गई थी। जनता को भी अहंकारी नेताओं को सबक सिखाना चाहिए।” राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे सीधा-सीधा BJP और Fadnavis पर तंज माना।हालांकि, शिंदे ने बाद में कहा कि मीडिया ने बात को तोड़-मरोड़कर पेश किया है। Fadnavis का कड़ा जवाब — ‘हम राम भक्त हैं, रावण नहीं’ डहाणू की रैली में Devendra Fadnavis ने तीखा पलटवार किया— “अगर कोई कहता है लंका जला देंगे, तो ठीक है… हम रावण नहीं, राम भक्त हैं। अहंकार होगा तो लंका जल ही जाएगी।” इस बयान ने साफ कर दिया कि महायुति में सब कुछ सामान्य नहीं है। महाराष्ट्र की सत्ता में छिपे तनाव हाल ही में ऐसे कई संकेत आए: दोनों नेता सार्वजनिक तौर पर एकता की बात करते हैं, पर जमीन पर तस्वीर अलग दिख रही है। चुनाव पर क्या असर? 2 दिसंबर के नगरपालिका और नगर पंचायत चुनावों से ठीक पहले इस विवाद ने कई मायने खड़े कर दिए हैं: राम–रावण जैसे धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल चुनावी भाषणों में हमेशा प्रभाव डालता है। इस बार यह प्रतीकवाद सत्तारूढ़ गठबंधन के अंदर ही टकराव का कारण बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह विवाद आगे गठबंधन की स्थिरता, लीडरशिप बैलेंस, और 2026-27 चुनावों पर असर डाल सकता है। “Ram–Ravan Lanka War” विवाद साफ संकेत देता है कि महायुति में सब कुछ ठीक नहीं।शिंदे और फडणवीस के बीच की यह लड़ाई केवल बयानबाज़ी नहीं — बल्कि सत्ता की ताकत, नेतृत्व और राजनीतिक रणनीति की बड़ी जंग है।आने वाले चुनावों में यह विवाद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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