Supreme Court ने राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए महत्वपूर्ण Presidential Reference पर बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि Governor और President के लिए Bill Assent की कोई Fixed Timeline संविधान में नहीं है, इसलिए कोर्ट भी ऐसी कोई Deadline तय नहीं कर सकती। साथ ही कोर्ट ने ‘Deemed Assent’ जैसे विचार को पूरी तरह असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया।
यह फैसला राज्यों और केंद्र के बीच चल रही संवैधानिक बहस को लेकर बेहद अहम माना जा रहा है।
क्या कहा Supreme Court ने?
1. Governor–President पर Timeline लागू नहीं
कोर्ट ने कहा कि:
- Article 200 (Governor)
- Article 201 (President)
इन दोनों में किसी ठोस समयसीमा का ज़िक्र नहीं है।
संविधान ने जानबूझकर इन्हें Flexible रखा है, इसलिए कोर्ट इन्हें “Compulsory Deadline” में नहीं बदल सकती।
‘Deemed Assent’ Idea Unconstitutional
Supreme Court ने स्पष्ट कहा कि:
“अगर अदालत कोई Deadline बना दे और वह बीत जाए, तो बिल को स्वीकृत मान लेना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।”
इसका मतलब:
- न समयसीमा बनाई जा सकती
- न ही समय निकलने पर Bill को Automatically Passed माना जा सकता
यानी Deemed Assent का कोई अस्तित्व नहीं है।
लंबी Delay पर Court कर सकती है हस्तक्षेप
कोर्ट ने यह भी माना कि:
- यदि Governor या President बहुत लंबे समय तक बिना कारण Bills रोके रखें,
तो High Court / Supreme Court Limited Direction दे सकते हैं कि वे
“Reasonable Time” में निर्णय लें।
लेकिन:
- कोर्ट Bill की Quality, कामकाज या Policy पर टिप्पणी नहीं करेगी
- सिर्फ Delay की वजह पूछ सकती है
यह Judicial Review की सीमा है।
Article 361 Governor को Personal Immunity देता है, लेकिन Office Review हो सकता है
कोर्ट ने कहा कि Governor पर व्यक्तिगत केस नहीं चल सकता,
लेकिन अगर:
- संवैधानिक दायित्व में
- “Prolonged Inaction” यानी अनुचित देरी हो
तो Court Governor Office पर समीक्षा कर सकती है।
Governor के पास Bill पर क्या विकल्प हैं?
जब Bill Governor के पास पहुँचता है, तो वह:
- Assent दे सकते हैं
- Assent रोककर Bill वापस Assembly भेज सकते हैं
- Bill को President के पास Reserve कर सकते हैं
कोर्ट ने कहा:
“बिल रोककर बिना वापस भेजे बैठना संघीय संरचना (Federalism) के लिए हानिकारक है।”
President को हर बार Supreme Court से सलाह लेने की जरूरत नहीं
Supreme Court ने स्पष्ट किया कि:
- President को Article 143 का Reference हर बार करना जरूरी नहीं
- केवल जटिल संवैधानिक स्थिति में ही ऐसा करना आवश्यक है
फैसले का Impact क्या है?
राज्यों पर असर
- Governor की delay का मुद्दा जारी रहेगा क्योंकि Deadline तय नहीं हुई
- लेकिन अब Court में Delay को चुनौती देना संभव होगा
केंद्र–राज्य संबंधों पर प्रभाव
- Governor का Discretion बरकरार
- लेकिन Oversight भी सुनिश्चित
न्यायपालिका की स्थिति
- Court ने Separation of Powers को मजबूत किया
- Executive के काम में सीधे दखल से दूरी बनाई
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