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Delhi

Delhi Operation Aaghat 3.0 में Police की सख्ती, हथियार-नशा बरामद, 285 Arrest

नए साल की रौनक से पहले राजधानी दिल्ली (Delhi) में सुरक्षा को लेकर पुलिस पूरी तरह सतर्क नजर आई। इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस ने Operation Aaghat 3.0 के तहत एक बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए शहर के कई संवेदनशील इलाकों में रातभर छापेमारी की। इस अभियान में 285 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 500 से ज्यादा संदिग्धों को निवारक हिरासत में लिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस विशेष ड्राइव का उद्देश्य नए साल के जश्न के दौरान किसी भी तरह की आपराधिक घटना को रोकना और आम लोगों को सुरक्षित माहौल देना था। ऑपरेशन खासतौर पर दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के उन इलाकों में चलाया गया, जहां पहले अपराध की घटनाएं सामने आती रही हैं। Arms Act से लेकर NDPS तक, कई मामलों में केस दर्ज ऑपरेशन के दौरान पकड़े गए आरोपियों पर Arms Act, NDPS Act, Excise Act और Gambling Act जैसी धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने इस कार्रवाई में 116 आदतन अपराधियों, जिन्हें स्थानीय भाषा में “बैड कैरेक्टर” कहा जाता है, को भी हिरासत में लिया। हथियार, शराब और ड्रग्स की बड़ी बरामदगी छापेमारी के दौरान पुलिस के हाथ कई चौंकाने वाली बरामदगियां लगीं। इनमें शामिल हैं: आम लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन आघात 3.0 का मकसद सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ना और लोगों में सुरक्षा का भरोसा पैदा करना है। पुलिस का कहना है कि ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे, खासकर त्योहारों और बड़े आयोजनों के दौरान। नए साल के मौके पर दिल्ली में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि जश्न में कोई खलल न पड़े। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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डिग्विजय सिंह

Congress के भीतर डिग्विजय सिंह की चेतावनी Rahul Gandhi और Party Working Style पर चर्चा

वरिष्ठ कांग्रेस नेता डिग्विजय सिंह ने आज कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) मीटिंग में पार्टी के वर्किंग स्टाइल और राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पार्टी के निर्णय लेने के तरीके और संगठनात्मक ढांचे पर चिंता जताई, और कहा कि बहुत ज्यादा अधिकार केवल शीर्ष नेतृत्व तक सीमित है। डिग्विजय सिंह ने बैठक में यह भी कहा कि पार्टी में विकेंद्रीकरण (Decentralization) की जरूरत है, ताकि सभी स्तरों के नेताओं को निर्णय में हिस्सा मिल सके। उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व के तरीकों पर भी संकेत दिए, जिससे यह साफ़ हुआ कि कांग्रेस के अंदर सुधार और बदलाव पर चर्चा जारी है। यह बैठक दिल्ली में आयोजित की गई थी, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया, डी. के. शिवकुमार और शशि थरूर भी मौजूद थे। CWC मीटिंग का मकसद पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर विचार करना था, खासकर आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सवाल उठाना दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी आंतरिक सुधार और रणनीतिक सोच पर गंभीर है। डिग्विजय सिंह की टिप्पणियाँ यह दिखाती हैं कि पार्टी लीडरशिप और संगठनात्मक कार्यशैली को सुधारने की दिशा में कदम उठा रही है। इस बैठक से यह भी संकेत मिलता है कि कांग्रेस आगामी राजनीतिक चुनौती और चुनावों के लिए खुद को मजबूत बनाने पर काम कर रही है, और यह बदलाव पार्टी की रणनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh में Hindu Minorities पर बढ़ते Attacks Blasphemy Allegations का खतरा

Bangladesh में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर हाल ही में गंभीर चेतावनी सामने आई है। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार रिपोर्टों के अनुसार, कट्टरपंथी समूह झूठे Blasphemy (ईशनिंदा) के आरोप लगाकर हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं। ये हमले केवल व्यक्तिगत हिंसा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि घरों, मंदिरों और जमीन पर कब्जा करने जैसी घटनाओं तक फैल गए हैं। प्रमुख घटना: दीपु चंद्र दास की हत्या 18 दिसंबर 2025 को म्यमेंसिंग जिले में 27 वर्षीय हिंदू गारमेंट वर्कर दीपु चंद्र दास को झूठे ईशनिंदा के आरोपों के बाद भीड़ ने पीटा, लटकाया और आग लगा दी। इस दुखद घटना ने न केवल बांग्लादेश में, बल्कि भारत में भी चिंता पैदा कर दी। पुलिस ने मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। विरोध और प्रदर्शन इस हिंसा के बाद ढाका और अन्य शहरों में हिंदू संगठनों द्वारा प्रदर्शन किए गए। प्रदर्शनकारियों ने न्याय की मांग की और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। भारत सरकार ने भी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए बांग्लादेश को चेतावनी दी कि अल्पसंख्यकों पर हमले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राजनीतिक संदर्भ आगामी Bangladesh के 2026 के चुनाव के मद्देनजर, हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय राजनीतिक रूप से अधिक सक्रिय हो रहा है। कुछ नई पार्टियाँ अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सुरक्षा की वकालत करते हुए चुनाव में उतर रही हैं। झूठे Blasphemy आरोपों का खतरा हालांकि बांग्लादेश में ईशनिंदा के आरोप कानूनी रूप से उतने कड़े नहीं हैं, लेकिन सोशल मीडिया और व्यक्तिगत विवादों के कारण झूठे आरोप तेजी से फैल जाते हैं। ये आरोप कभी-कभी भीड़ हिंसा और समुदाय में भय फैलाने का कारण बन जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय नजरिया अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन लगातार बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमलों की चेतावनी दे रहे हैं। ये रिपोर्ट बताती हैं कि हिंसा के कारण घर, मंदिर और व्यक्तिगत सुरक्षा पर खतरा बढ़ रहा है। Bangladesh में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर स्थिति चिंताजनक है। झूठे Blasphemy आरोपों से उत्पन्न हिंसा न केवल उनके जीवन के लिए खतरा है, बल्कि समाज में डर और विभाजन भी पैदा कर रही है। न्याय और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार, समाज और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सतर्कता बेहद जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Shashi Tharoor

Shashi Tharoor Big Statement “PM की हार को India की हार कहना खतरनाक सोच”

भारतीय राजनीति में जब ज़्यादातर बहसें दलों और आरोप-प्रत्यारोप के इर्द-गिर्द घूमती हैं, ऐसे समय में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor)का बयान चर्चा का केंद्र बन गया है। थरूर ने साफ शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री की हार को देश की हार के रूप में देखना खतरनाक सोच है, क्योंकि विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा किसी एक पार्टी की बपौती नहीं होती। उनका यह बयान न सिर्फ सियासी हलकों में, बल्कि आम लोगों के बीच भी गंभीर बहस को जन्म दे रहा है। Foreign Policy किसी Party की नहीं, Nation की होती है Shashi Tharoor ने कहा कि भारत की विदेश नीति राष्ट्रहित से जुड़ा विषय है, न कि चुनावी राजनीति का हथियार। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर कोई व्यक्ति प्रधानमंत्री की अंतरराष्ट्रीय असफलता पर खुश होता है, तो वह अनजाने में भारत की वैश्विक छवि को कमजोर करने की कामना कर रहा होता है। थरूर के मुताबिक, “दुनिया भारत को किसी पार्टी के चश्मे से नहीं देखती, बल्कि प्रधानमंत्री को देश के प्रतिनिधि के रूप में देखती है।” Pakistan Threat को नजरअंदाज़ करना भारी पड़ सकता है अपने बयान में थरूर ने पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा खतरों पर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की रणनीति लगातार बदल रही है और वहां की सैन्य शक्ति अब भी असली फैसले ले रही है। थरूर का मानना है कि: यह बयान ऐसे समय में आया है जब दक्षिण एशिया में सुरक्षा हालात फिर से संवेदनशील बने हुए हैं। Congress के भीतर असहजता, बाहर तारीफ Shashi Tharoor के इस रुख ने कांग्रेस पार्टी के अंदर मतभेद को भी उजागर किया है। पार्टी के कुछ नेताओं को लगता है कि प्रधानमंत्री की सार्वजनिक सराहना से राजनीतिक संदेश कमजोर पड़ता है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि थरूर का यह बयान थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी दूसरी पार्टी में जाने की सोच नहीं रहे हैं और उनका रुख सैद्धांतिक और वैचारिक है, न कि राजनीतिक अवसरवाद। Global मंच पर भारत की छवि पर जोर Shashi Tharoor, जो खुद लंबे समय तक संयुक्त राष्ट्र (UN) में काम कर चुके हैं, मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्थिति बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि “अगर भारत कमजोर दिखता है, तो उसका असर सिर्फ सरकार पर नहीं, बल्कि हर नागरिक पर पड़ता है।” यही वजह है कि वे विदेश नीति को दलगत राजनीति से ऊपर रखने की वकालत करते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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31 दिसंबर से पहले निपटा लें aadhaar-pan-link, वरना हो सकता है नुकसान

31 दिसंबर से पहले निपटा लें aadhaar-pan-link, वरना हो सकता है नुकसान

अगर आप चाहते हैं कि नया साल बिना किसी झंझट के शुरू हो, तो 31 दिसंबर से पहले निपटा लें Aadhaar-PAN-link, गाड़ी खरीदने और छोटी बचत योजनाएं शुरू करने तक शामिल हैं। आधार-पैन लिंक कराना जरूरी आयकर विभाग ने आधार और पैन को लिंक करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर तय की है। अगर आपने अब तक लिंक नहीं कराया है, तो आपके पास सिर्फ 5 दिन बचे हैं।अगर तय समय तक लिंक नहीं हुआ तो पैन निष्क्रिय हो सकता है, जिससे बैंकिंग और टैक्स से जुड़े काम अटक सकते हैं। गाड़ी खरीदने का सही मौका साल के आखिर में वाहन कंपनियां भारी छूट दे रही हैं। 31 दिसंबर से पहले गाड़ी खरीदने पर आपको स्मॉल सेविंग्स स्कीम में निवेश शुरू करें पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाएं जैसे साल खत्म होने से पहले निवेश करने पर आपको टैक्स छूट का फायदा भी मिलेगा और भविष्य की सुरक्षा भी पक्की होगी। टैक्स प्लानिंग पूरी कर लें अगर आपने अभी तक टैक्स सेविंग निवेश नहीं किया है, तो 31 दिसंबर से पहले प्लान बना लें। इससे आपको मार्च में जल्दबाजी नहीं करनी पड़ेगी और पैसा भी बचेगा। नया साल खुशहाल और तनाव-मुक्त बनाना है, तो ये चारों काम 31 दिसंबर से पहले निपटा लें। थोड़ी सी समझदारी आपको आने वाले पूरे साल फायदा दे सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rashtriya Bal Puraskar 2025 - PM मोदी बोले– जेन Z और जेन अल्फा ही बनाएंगे विकसित भारत

Rashtriya Bal Puraskar 2025 – PM मोदी बोले– जेन Z और जेन अल्फा ही बनाएंगे विकसित भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रिकेटर वैभव सहित 20 प्रतिभाशाली बच्चों को Rashtriya Bal Puraskar 2025 से सम्मानित किया। इस मौके पर PM मोदी ने बच्चों की तारीफ करते हुए कहा कि जेन Z और जेन अल्फा भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे। बच्चों की मेहनत को मिला सम्मान पुरस्कार पाने वाले बच्चों ने खेल, शिक्षा, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में असाधारण काम किया है। युवा क्रिकेटर वैभव ने अपने शानदार प्रदर्शन से न सिर्फ राज्य बल्कि देश का नाम रोशन किया, जिसके लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया। PM मोदी का संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों से बातचीत करते हुए कहा, “आज का भारत अपने युवाओं और बच्चों की ताकत पर आगे बढ़ रहा है। जेन Z और जेन अल्फा में वो ऊर्जा है, जो 2047 तक भारत को विकसित देश बनाएगी।” उन्होंने बच्चों को नए विचारों, तकनीक और नवाचार के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। आत्मविश्वास और सपनों की उड़ान PM मोदी ने कहा कि देश को अपने बच्चों पर गर्व है और सरकार उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव सहयोग कर रही है। उन्होंने बच्चों से कहा कि सपने बड़े देखें और उन्हें पूरा करने के लिए ईमानदारी से मेहनत करें। पूरे देश के लिए प्रेरणा बाल पुरस्कार पाने वाले ये 20 बच्चे आज देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। इनकी सफलता यह दिखाती है कि अगर हुनर और मेहनत हो, तो उम्र कभी रुकावट नहीं बनती। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BrahMos

BrahMos Next Generation Missile भारत की रक्षा में नई ताकत

भारत अपने सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल BrahMos के नए और उन्नत संस्करण पर तेजी से काम कर रहा है। रूस के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा यह प्रोजेक्ट भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। नए ब्रह्मोस संस्करण में लंबी दूरी, हल्कापन और बहु-प्लेटफ़ॉर्म क्षमता जैसी विशेषताएं होंगी, जिससे रणनीतिक ताकत में वृद्धि होगी। ब्रह्मोस के नए वर्ज़न और उनकी खासियतें क्यों है यह महत्वपूर्ण? उत्पादन और टाइमलाइन भारत के इस नए ब्रह्मोस संस्करण के आने से देश की रक्षा क्षमता और रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी। यह मिसाइल न केवल सुरक्षा को बढ़ाएगी, बल्कि भारतीय तकनीकी और उत्पादन क्षमता का भी उदाहरण बनेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Veer Bal Diwas

Veer Bal Diwas Special बहादुरी और प्रतिभा के लिए 20 बच्चों को मिलेगा PM National Child Award

Veer Bal Diwas 2025 के खास अवसर पर देश के उन बच्चों को सम्मानित किया जा रहा है, जिन्होंने कम उम्र में असाधारण साहस, प्रतिभा और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय दिया है। 26 दिसंबर को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (Prime Minister National Child Award) के तहत देशभर से चुने गए 20 बच्चों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलेगा। यह सम्मान समारोह विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित होगा, जहाँ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बच्चों को पुरस्कार प्रदान करेंगी। इसके बाद भारत मंडपम में वीर बाल दिवस का राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बच्चों और युवाओं को संबोधित करेंगे। Prime Minister National Child Award क्या है? प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भारत सरकार द्वारा 5 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों को दिया जाने वाला सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह पुरस्कार उन बच्चों को मिलता है जिन्होंने बहादुरी, खेल, विज्ञान, नवाचार, सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण और कला-संस्कृति जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया है। इन बच्चों की कहानियाँ यह साबित करती हैं कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन हौसले और सोच बड़े होते हैं। 18 राज्यों से चुने गए 20 प्रतिभाशाली बच्चे इस वर्ष 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बच्चों का चयन किया गया है। इनमें वे बच्चे शामिल हैं जिन्होंने Veer Bal Diwas का महत्व वीर बाल दिवस सिख इतिहास के चार साहिबजादों के सर्वोच्च बलिदान की याद में मनाया जाता है। यह दिन बच्चों को साहस, सत्य, देशभक्ति और आत्मबल की सीख देता है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए देश के “छोटे नायकों” को मंच देता है। देश के लिए प्रेरणा बनते बच्चे यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उन सपनों की पहचान है जो कम उम्र में समाज को बेहतर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाते हैं। ये बच्चे आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देते हैं कि अगर इरादा मजबूत हो, तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Railway

Railway Ticket Price Update दिसंबर से ट्रेन टिकट महंगे

अगर आप ट्रेन से लंबी दूरी की यात्रा करते हैं, तो यह खबर आपके लिए जानना जरूरी है। Indian Railways Fare Hike 2025 के तहत भारतीय रेलवे ने 26 दिसंबर 2025 से कुछ ट्रेनों के किराए में मामूली बढ़ोतरी लागू कर दी है। हालांकि राहत की बात यह है कि यह बढ़ोतरी सीमित है और आम यात्रियों पर इसका असर बहुत ज्यादा नहीं पड़ेगा। कब से लागू हुआ नया किराया रेलवे द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, 26 दिसंबर 2025 से बुक होने वाले टिकटों पर नया किराया लागू होगा। इससे पहले बुक किए गए टिकट, भले ही यात्रा बाद की तारीख की हो, पुराने किराए पर ही मान्य रहेंगे। किन यात्रियों पर पड़ेगा असर यह किराया वृद्धि: वहीं, इन सभी के किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कितना बढ़ा ट्रेन का किराया रेलवे ने दूरी और ट्रेन की श्रेणी के अनुसार बढ़ोतरी तय की है: इन चार्जेस में कोई बदलाव नहीं यात्रियों के लिए यह भी राहत की खबर है कि: जैसे थे वैसे ही रहेंगे। रेलवे ने किराया क्यों बढ़ाया रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला Fare Rationalisation के तहत लिया गया है।इसका मकसद है: अनुमान है कि इस छोटे से बदलाव से रेलवे को लगभग ₹600 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, जिससे यात्री सुविधाओं में सुधार किया जा सकेगा। यात्रियों के लिए क्या है निष्कर्ष कुल मिलाकर, यह कहा जा सकता है कि: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gujarat

Gujarat Assembly उपाध्यक्ष Jethabhai Ahir (जेठा भरवाड़) का इस्तीफा, राजनीति में हलचल

गुजरात (Gujarat) की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। गुजरात विधानसभा के उपाध्यक्ष जेठाभाई आहिर, जिन्हें लोग जेठा भरवाड़ (Jetha Bharwad) के नाम से भी जानते हैं, ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष शंकर चौधरी को सौंपा, जिसे औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है। उनके इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा और अटकलों को तेज कर दिया है। अचानक क्यों दिया इस्तीफा? जेठाभाई आहिर ने दिसंबर 2022 में 15वीं गुजरात विधानसभा के गठन के बाद उपाध्यक्ष का पद संभाला था। करीब दो साल के कार्यकाल के बाद उनका इस्तीफा कई लोगों के लिए अप्रत्याशित रहा। हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि यह फैसला उन्होंने अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर ध्यान देने के लिए लिया है। सहकारी क्षेत्र की बढ़ती जिम्मेदारियां राजनीति के साथ-साथ जेठाभाई आहिर की पहचान सहकारी क्षेत्र में भी काफी मजबूत रही है। वे लंबे समय से पंचमहल डेयरी और अन्य सहकारी संस्थाओं से जुड़े रहे हैं। हाल ही में उन्हें NAFED (नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया) का चेयरमैन चुना गया है। माना जा रहा है कि इसी नई और बड़ी जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता से निभाने के लिए उन्होंने विधानसभा उपाध्यक्ष पद से हटने का निर्णय लिया। अनुभवी नेता, मजबूत जनाधार जेठाभाई आहिर पंचमहल जिले की शेहरा विधानसभा सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं। क्षेत्र में उनकी छवि एक जमीनी, सुलझे हुए और अनुभवी नेता की रही है। पार्टी संगठन और सरकार दोनों में उनका भरोसेमंद स्थान माना जाता है। राजनीति में आगे क्या? उनके इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि गुजरात विधानसभा का अगला उपाध्यक्ष कौन बनेगा। साथ ही, राजनीतिक जानकार यह भी मान रहे हैं कि आने वाले समय में जेठाभाई आहिर को संगठन या सहकारी क्षेत्र में और बड़ी भूमिका मिल सकती है। क्या संकेत देता है यह फैसला? भले ही इस्तीफे की वजह आधिकारिक तौर पर निजी और व्यावसायिक जिम्मेदारियों को बताया गया हो, लेकिन यह कदम दिखाता है कि जेठाभाई आहिर अपनी नई भूमिका को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं। गुजरात की राजनीति और सहकारी क्षेत्र—दोनों में उनके अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Supreme Court

Supreme Court on CJP Protest: प्रदर्शन पर रोक से इनकार, ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर का दावा

दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के अधिकार और व्यापारियों की रोजी-रोटी का मुद्दा चर्चा में रहा। अदालत ने फिलहाल प्रदर्शन रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया। वहीं, व्यापारियों की ओर से दावा किया गया कि प्रदर्शन और उससे जुड़ी पाबंदियों के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने यह मामला रखा गया। याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क और आसपास के बाजारों में कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई। उनका कहना था कि बाजारों में लोगों की आवाजाही बाधित होने से छोटे दुकानदारों और दूसरे कारोबारियों को परेशानी हो सकती है। CJI की टिप्पणी: किसी के लिए प्रदर्शन, किसी के लिए मूंगफली बेचना जरूरी सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन के अधिकार और आम लोगों की आजीविका के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति के लिए प्रदर्शन करना जरूरी हो सकता है, जबकि किसी दूसरे के लिए मूंगफली बेचकर अपना परिवार चलाना महत्वपूर्ण है। CJI सूर्यकांत ने भी छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति का जिक्र किया। त्योहारों के समय दुकानदारों की कमाई बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में यदि बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर उनकी रोजाना की आमदनी पर पड़ सकता है। अदालत की टिप्पणियों से साफ है कि इस मामले में केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि आम लोगों की आजीविका और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है। Delhi Business Loss: रोजाना ₹200 करोड़ के नुकसान का दावा व्यापारियों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कनॉट प्लेस और आसपास के व्यावसायिक इलाकों में प्रदर्शन के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव बड़े कारोबारियों के साथ-साथ छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ सकता है। बाजार में ग्राहकों की संख्या कम होने या आवाजाही प्रभावित होने से उनकी कमाई पर असर पड़ने की आशंका जताई गई। हालांकि, ₹200 करोड़ का आंकड़ा व्यापारियों की ओर से पेश किया गया दावा है। इसे वास्तविक नुकसान का प्रमाणित आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। Central Park को बंद करने का मुद्दा भी उठा सुनवाई के दौरान कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद करने से जुड़े प्रशासनिक फैसले का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि इस कदम से आसपास के बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि किसी प्रतिबंध के कारण कारोबार या लोगों की आजीविका को अनुचित नुकसान पहुंचता है, तो उचित राहत देने के सवाल पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, तत्काल सुनवाई में प्रदर्शन पर रोक लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया। CJP Protest: क्यों किया गया प्रदर्शन का ऐलान? CJP ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च और प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में यह कदम उठाने की बात कही थी। प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था, बाजारों में आवाजाही और कारोबार पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार किया था, जबकि दिल्ली पुलिस ने कानून के अनुसार जरूरी कदम उठाने की बात कही थी। Supreme Court Hearing: अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने मामले को तत्काल आदेश के जरिए निपटाने के बजाय दशहरा अवकाश के बाद 26 या 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध किए जाने का संकेत दिया। फिलहाल, प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया गया है। आगे की सुनवाई में प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और व्यापारियों की आजीविका से जुड़े पहलुओं पर चर्चा महत्वपूर्ण रहेगी। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि विरोध दर्ज कराने के अधिकार और आम लोगों की रोजी-रोटी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। अदालत की अगली सुनवाई से इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi Canada Tour दिसंबर में होगी अहम बातचीत, Trade Deal से दोनों देशों को उम्मीद

PM Modi 11 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर जा सकते हैं। इस यात्रा को भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच ट्रेड डील यानी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत होने की संभावना है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के बीच कनाडा भी अपने कारोबार के लिए नए बाजार तलाश रहा है। कनाडा लंबे समय से अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर रहा है। ऐसे में भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार के साथ व्यापार बढ़ाना उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। दूसरी ओर, भारत की भी कोशिश है कि दूसरे देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़े और भारतीय कारोबारियों को नए अवसर मिलें। India-Canada Trade Deal पर क्यों है सबकी नजर? भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) को लेकर काफी उम्मीदें हैं। इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाना, निवेश के अवसर खोलना और कारोबार से जुड़ी बाधाओं को कम करना है। अगर ट्रेड डील पर सहमति बनती है, तो दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजार में कारोबार बढ़ाने का मौका मिल सकता है। इससे कृषि, ऊर्जा, तकनीक, शिक्षा और कई दूसरे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में प्रस्तावित समझौता इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। Trump के Tariff दबाव के बीच कनाडा क्यों खोज रहा नए बाजार? डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। इसका असर उन देशों पर भी पड़ता है, जिनका कारोबार अमेरिकी बाजार पर ज्यादा निर्भर है। कनाडा भी अपने व्यापारिक रिश्तों में विविधता लाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत इस लिहाज से कनाडा के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। भारत की बड़ी आबादी, बढ़ती अर्थव्यवस्था और अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ती मांग कनाडाई कंपनियों को आकर्षित करती है। हालांकि, भारत के साथ व्यापार बढ़ाना केवल अमेरिका पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच निवेश और कारोबारी सहयोग बढ़ने से लंबे समय में आर्थिक रिश्तों को भी मजबूती मिल सकती है। Energy और Technology सेक्टर में भी बढ़ सकते हैं मौके भारत और कनाडा के बीच कारोबार की संभावनाएं केवल ट्रेड डील तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया जा सकता है। कनाडा के पास प्राकृतिक संसाधन और ऊर्जा क्षेत्र में अनुभव है, जबकि भारत तेजी से बढ़ता हुआ बड़ा बाजार है। दोनों देश अपनी जरूरतों और क्षमताओं के आधार पर साझेदारी को आगे बढ़ा सकते हैं। व्यापार समझौते पर बातचीत आगे बढ़ने से कंपनियों और निवेशकों को भी सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। हालांकि, वास्तविक फायदा समझौते की शर्तों और उसके लागू होने पर निर्भर करेगा। पुराने तनाव के बाद रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश भारत और कनाडा के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कूटनीतिक तनाव भी देखने को मिला। इस वजह से दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को लेकर कई सवाल उठे थे। अब व्यापार और आर्थिक सहयोग जैसे साझा हितों पर बातचीत बढ़ाना दोनों देशों के लिए अहम हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित यात्रा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। फिर भी, व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई मुद्दों पर सहमति जरूरी होगी। इसलिए इस दौरे के दौरान होने वाली बातचीत और आधिकारिक घोषणाओं पर सबकी नजर रहेगी। भारत और कनाडा के लिए क्या होंगे इसके मायने? भारत-कनाडा ट्रेड डील आगे बढ़ती है, तो इससे दोनों देशों के कारोबारियों को नए बाजार मिल सकते हैं। निवेश बढ़ने, व्यापारिक अवसर पैदा होने और अलग-अलग क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत होने की संभावना भी रहेगी। कनाडा के लिए भारत के साथ व्यापार बढ़ाना अपने आर्थिक रिश्तों में विविधता लाने का अवसर है। वहीं, भारत के लिए यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अपनी पहुंच मजबूत करने का एक और रास्ता हो सकता है। अब नजर 11 दिसंबर की प्रस्तावित यात्रा पर है। क्या प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के नेतृत्व के बीच ट्रेड डील को लेकर कोई ठोस सहमति बन पाएगी? इसका जवाब दोनों देशों की बातचीत और आगे होने वाली आधिकारिक घोषणाओं से ही साफ होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Starlink

Reliance-Starlink Controversy: मस्क के आरोपों पर अंबानी की कंपनी का जवाब, कहा- Competition से नहीं डरते

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर रिलायंस (Reliance) इंडस्ट्रीज और एलन मस्क की कंपनी Starlink के बीच चर्चा तेज हो गई है। स्टारलिंक की भारत में एंट्री में देरी को लेकर मस्क ने सवाल उठाए थे। अब मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि वह प्रतिस्पर्धा से कभी नहीं डरी और भारत में स्टारलिंक का स्वागत करती है। Reliance के इस बयान के बाद देश के टेलीकॉम और सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में मुकाबले को लेकर चर्चा बढ़ गई है। एक तरफ एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ जियो भी सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। Reliance ने Starlink को लेकर क्या कहा? Reliance इंडस्ट्रीज ने अपने बयान में कहा कि कंपनी ने हमेशा प्रतिस्पर्धा का सामना किया है और वह नई कंपनियों के बाजार में आने से नहीं घबराती। कंपनी के मुताबिक, भारत में कारोबार करने वाली सभी कंपनियों को देश के नियमों का पालन करना चाहिए। रिलायंस ने स्टारलिंक का स्वागत करते हुए यह भी संकेत दिया कि सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में मुकाबला ग्राहकों के लिए फायदेमंद हो सकता है। कंपनी का मानना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवाओं की गुणवत्ता और ग्राहकों के अनुभव में सुधार की गुंजाइश बनती है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर कई कंपनियां तैयारी कर रही हैं। Elon Musk ने Mukesh Ambani पर क्यों उठाए सवाल? एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित कंपनी की भारतीय बाजार में एंट्री को मुश्किल बना रहे हैं। इस विवाद में रिलायंस और मुकेश अंबानी का नाम भी सामने आया। मस्क का कहना है कि स्टारलिंक जैसी कंपनियों को भारतीय बाजार में काम करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि ग्राहकों के पास इंटरनेट सेवा चुनने के अधिक विकल्प हों। हालांकि, इन आरोपों से यह साबित नहीं होता कि स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी के पीछे रिलायंस की भूमिका है। इसके लिए किसी ठोस प्रमाण की जरूरत होगी। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनियों को लाइसेंस के साथ-साथ दूसरी जरूरी मंजूरियां भी हासिल करनी होती हैं। Jio भी Satellite Internet Market में उतरने को तैयार Reliance जियो ने साल 2016 में भारतीय टेलीकॉम बाजार में कदम रखा था। सस्ते डेटा और किफायती सेवाओं के कारण कंपनी ने तेजी से ग्राहक जोड़े और देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में अपनी जगह बनाई। अब जियो की नजर सैटेलाइट इंटरनेट बाजार पर भी है। इस तकनीक के जरिए उन इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड कनेक्शन उपलब्ध कराना मुश्किल है। दूसरी तरफ, स्टारलिंक अपने सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए भारत में इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराना चाहती है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। Starlink की India Launch में देरी की वजह क्या है? भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करना केवल लाइसेंस मिलने तक सीमित नहीं है। कंपनियों को सुरक्षा मानकों, तकनीकी आवश्यकताओं और सरकारी नियमों से जुड़ी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होती हैं। स्टारलिंक के अलावा जियो और भारती समूह से जुड़ी Eutelsat OneWeb भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन कंपनियों की सेवाओं की शुरुआत जरूरी मंजूरियों और नियामकीय शर्तों पर निर्भर करती है। इसलिए स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी को किसी एक कंपनी से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी। वास्तविक स्थिति समझने के लिए सरकारी मंजूरियों और संबंधित कंपनियों की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है। आम लोगों को क्या होगा फायदा? अगर भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू होती हैं, तो इसका फायदा खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिल सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों और उन जगहों पर, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है, यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, ग्राहकों के लिए सबसे अहम सवाल इंटरनेट की कीमत, स्पीड और उपलब्धता का होगा। स्टारलिंक और जियो की सेवाएं कितनी किफायती होंगी, यह उनकी व्यावसायिक योजनाओं और लॉन्च के समय घोषित किए जाने वाले प्लान पर निर्भर करेगा। अब आगे क्या? रिलायंस के बयान से साफ है कि कंपनी सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। वहीं, एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करने का इंतजार कर रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जरूरी सरकारी प्रक्रियाएं कब पूरी होती हैं और कंपनियां ग्राहकों के लिए अपनी सेवाएं कब पेश करती हैं। अगर बाजार में कई कंपनियां उतरती हैं, तो भारतीय ग्राहकों को इंटरनेट के नए विकल्प मिल सकते हैं। फिलहाल, रिलायंस और स्टारलिंक के बीच जारी यह बहस भारत के तेजी से बदलते डिजिटल और टेलीकॉम बाजार की एक अहम तस्वीर पेश करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Weather

Weather Update राजस्थान में बारिश के साथ गिरे ओले, Kedarnath-Badrinath में बर्फबारी

देश के कई हिस्सों में मौसम (Weather) का मिजाज बदल गया है। राजस्थान में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है, जबकि उत्तराखंड के केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी देखने को मिली है। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में बारिश को लेकर अलर्ट की खबर है। मौसम में आए इस बदलाव से कहीं गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है, तो कहीं किसानों और यात्रियों की चिंता बढ़ सकती है। Rajasthan Weather: बारिश के साथ ओलावृष्टि राजस्थान के कई इलाकों में बारिश के साथ ओले गिरने से मौसम सुहावना होने के साथ ठंडा भी हो गया है। अचानक बदले मौसम का असर आम जनजीवन पर पड़ सकता है। जिन इलाकों में ओलावृष्टि हुई है, वहां खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान होने की आशंका भी रहती है। ऐसे में किसानों को स्थानीय मौसम विभाग की सलाह पर ध्यान देना चाहिए। बारिश और तेज हवाओं के दौरान लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। Kedarnath-Badrinath में बर्फबारी, पहाड़ों पर बढ़ी ठंड उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम ने अलग ही रंग दिखाया है। केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी के बाद ठंड बढ़ गई है। पहाड़ों पर मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए यहां जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यात्रा की तैयारी सावधानी से करनी चाहिए। खासतौर पर धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले लोगों को सड़क की स्थिति, मौसम का पूर्वानुमान और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए। UP-Bihar Rain Alert: इन राज्यों में भी बदल सकता है मौसम राजस्थान और उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में बारिश की संभावना को लेकर अलर्ट की खबर सामने आई है। बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि, बारिश का असर हर जिले में एक जैसा नहीं होगा। इसलिए अपने इलाके के लिए मौसम विभाग की ताजा चेतावनी जरूर देखें। किसानों और आम लोगों के लिए जरूरी सलाह बदलते मौसम को देखते हुए कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है। आंधी या बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों में रुकने से बचें। किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह लें। वहीं, पहाड़ी इलाकों में जाने वाले यात्री मौसम और रास्तों की स्थिति की जानकारी पहले ही हासिल कर लें। Weather Update Today: आगे कैसा रहेगा मौसम? अक्टूबर के मध्य में बारिश और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी ने मौसम का रुख बदल दिया है। राजस्थान में ओलावृष्टि और उत्तराखंड में बर्फ गिरने के बीच दूसरे राज्यों के लोगों की नजर भी बारिश के पूर्वानुमान पर है। मौसम से जुड़ी योजनाएं बनाने से पहले अपने शहर का ताजा अपडेट देखना बेहतर रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Parliament

Parliament Special Session: इसी महीने बुलाया जा सकता है संसद का सत्र, लोकसभा सीटें बढ़ाने पर नजर

संसद (Parliament) के गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज होने की चर्चा है। केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इस सत्र में लोकसभा की सीटें बढ़ाने, परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों पर आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक विशेष सत्र की तारीखों का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार इस बार जरूरी समर्थन जुटा पाएगी? अप्रैल 2026 में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला था। ऐसे में सरकार के सामने अब राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की चुनौती है। लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने की चर्चा फिलहाल लोकसभा में 543 निर्वाचित सीटें हैं। प्रस्तावित योजना के तहत इनकी संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने की बात सामने आई है। इस बदलाव का संबंध महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया से भी जोड़ा जा रहा है। अगर लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी होती है, तो संसदीय क्षेत्रों और राज्यों के प्रतिनिधित्व में बदलाव हो सकता है। हालांकि, सीटों की अंतिम संख्या और उनके बंटवारे को लेकर स्थिति विधेयक के प्रावधानों तथा संवैधानिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। Delimitation Bill क्या है और इससे क्या बदलेगा? परिसीमन यानी Delimitation का मतलब लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का दोबारा निर्धारण करना है। इसके जरिए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया जा सकता है। यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि परिसीमन का असर संसद में अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक भागीदारी पर पड़ सकता है। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों ने चिंता जताई है कि आबादी के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण होने से उनका मौजूदा प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, सरकार की प्रस्तावित योजना में लोकसभा की सीटें बढ़ाने का मुद्दा शामिल है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए प्रस्ताव में राज्यों के प्रतिनिधित्व से जुड़ी चिंताओं का किस तरह समाधान किया जाता है। महिला आरक्षण 2029 से लागू करने की तैयारी? महिला आरक्षण भी इस पूरे मामले का एक अहम हिस्सा है। संसद ने 2023 में महिला आरक्षण से जुड़ा कानून पारित किया था। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। हालांकि, इस कानून के क्रियान्वयन को जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। इसी वजह से परिसीमन और संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है। अप्रैल में क्यों पास नहीं हो पाया था बिल? अप्रैल 2026 में लोकसभा में संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान हुआ था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे। इसके बावजूद जरूरी विशेष बहुमत नहीं मिल सका और विधेयक पारित नहीं हुआ। संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई मतों की जरूरत होती है। कुछ संविधान संशोधनों के लिए कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से मंजूरी लेना भी जरूरी होता है। यानी सरकार के लिए केवल सांसदों की साधारण बहुमत संख्या पर्याप्त नहीं होगी। उसे संवैधानिक नियमों के मुताबिक जरूरी समर्थन हासिल करना होगा। DMK समेत दूसरे दलों से संपर्क की चर्चा मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सरकार विधेयकों के समर्थन में राजनीतिक दलों से बातचीत कर रही है। इसमें डीएमके (DMK) और कुछ छोटे दलों से संपर्क किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन दलों के अंतिम रुख को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है। विपक्षी दलों की प्रमुख चिंताओं में परिसीमन की प्रक्रिया, राज्यों का प्रतिनिधित्व और प्रस्तावित बदलावों पर व्यापक चर्चा शामिल है। ऐसे में विशेष सत्र बुलाए जाने पर संसद में इस मुद्दे पर बहस तेज हो सकती है। कब हो सकता है संसद का Special Session? मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर सकती है। 26 और 27 अक्टूबर को प्रस्तावित BRICS Parliamentary Forum के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए सत्र की तारीखें तय किए जाने की संभावना भी जताई गई है। लेकिन अभी तक विशेष सत्र का आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है। इसलिए तारीखों और विधेयकों को लेकर सामने आ रही जानकारियों को संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अब सरकार के सामने क्या चुनौती है? सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं—पहली, विधेयकों के लिए जरूरी संवैधानिक समर्थन जुटाना और दूसरी, परिसीमन को लेकर राज्यों की चिंताओं पर सहमति बनाना। अगर विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी, महिला आरक्षण और राज्यों के प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे फिर से चर्चा के केंद्र में आ सकते हैं। फिलहाल सभी की नजर सरकार की आधिकारिक घोषणा और राजनीतिक दलों के रुख पर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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