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सुप्रीम कोर्ट

Protest Rights: सुप्रीम कोर्ट ने Police Action पर जताई चिंता, SOP बनाने के दिए निर्देश

देशभर में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठते सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने साफ कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर पुलिस की बर्बरता को उचित नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रदर्शनकारी पुलिस पर हमला करते हैं या हिंसा का सहारा लेते हैं, तो वह भी उतना ही गंभीर मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को सुझाव दिया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर एक Standard Operating Procedure (SOP) तैयार किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों में स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध हों। लोकतंत्र में Protest की अहम भूमिका सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी बात रखने और सरकार के फैसलों का शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है। यह अधिकार भारतीय संविधान से मिलता है और इसे कमजोर नहीं किया जा सकता। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण होना चाहिए और इससे आम जनता के अधिकारों या सार्वजनिक व्यवस्था पर अनावश्यक असर नहीं पड़ना चाहिए। Police Action पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में देखने को मिला है कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के दौरान जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया जाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस को केवल उतना ही बल इस्तेमाल करना चाहिए, जितना स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक हो। न्यायालय ने कहा कि कानून लागू कराने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी केवल व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना भी है। इसलिए हर कार्रवाई संवैधानिक मूल्यों और मानवाधिकारों के अनुरूप होनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों की हिंसा भी चिंता का विषय अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिम्मेदारी केवल पुलिस की नहीं है। यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला किया जाता है, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है या हिंसा भड़काई जाती है, तो ऐसे कृत्य भी लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विरोध जताने का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। SOP बनने से क्या होगा फायदा? अदालत का मानना है कि यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भूमिका, भीड़ नियंत्रण, बल प्रयोग की सीमा और जवाबदेही को लेकर स्पष्ट SOP बनाई जाती है, तो भविष्य में विवाद और टकराव की घटनाओं में कमी आ सकती है। इससे पुलिस को भी तय नियमों के तहत काम करने में सुविधा होगी और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। नागरिक अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन जरूरी सुप्रीम कोर्ट ने अपने अवलोकन में कहा कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है, जब नागरिकों के अधिकार और कानून-व्यवस्था दोनों का समान सम्मान किया जाए। अदालत की यह टिप्पणी आने वाले समय में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत के सुझावों के अनुरूप स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार होता है, तो इससे प्रदर्शन के दौरान होने वाले विवादों में कमी आएगी और नागरिकों तथा पुलिस के बीच विश्वास भी मजबूत होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

Monsoon Update: MP और Rajasthan में तेज बारिश का अलर्ट, Himachal में 135 सड़कें बंद

देश के कई हिस्सों में मानसून (Monsoon) ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मध्य प्रदेश (MP) और राजस्थान (Rajasthan) में सोमवार से भारी बारिश का नया दौर शुरू हो गया है। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश (UP) में चार नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। वहीं हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन ने हालात मुश्किल बना दिए हैं। कई सड़कें बंद हैं और जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। MP और Rajasthan में फिर सक्रिय हुआ मानसून भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसून ट्रफ के कारण मध्य प्रदेश और राजस्थान में तेज बारिश की स्थिति बन गई है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, कोटा, जयपुर, उदयपुर और आसपास के कई जिलों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना है। बारिश के चलते निचले इलाकों में जलभराव, छोटे नदी-नालों के उफान पर आने और यातायात प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। UP Flood Update: चार नदियां खतरे के निशान से ऊपर उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश का असर अब नदियों के जलस्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। राज्य की चार प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने लगी है। नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। राहत और बचाव दलों को अलर्ट पर रखा गया है, जबकि लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और नदी के आसपास न जाने की अपील की गई है। Himachal Pradesh में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में मानसून लगातार कहर बरपा रहा है। बीते 27 दिनों में बारिश, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं में 15 लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार बारिश के कारण 135 सड़कें बंद हैं, जिससे कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। लोक निर्माण विभाग और प्रशासन सड़कें खोलने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में बाधा बन रही है। कई राज्यों के लिए जारी हुआ Rain Alert मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ इलाकों में तेज हवाएं, बिजली गिरने और अचानक जलभराव की भी संभावना जताई गई है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है। लोगों के लिए जरूरी सावधानियां आने वाले दिनों में कैसा रहेगा मौसम? मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 3 से 5 दिनों तक उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण बाढ़, जलभराव और भूस्खलन जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में यदि आप बारिश प्रभावित क्षेत्रों में रहते हैं या यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो मौसम का ताजा अपडेट देखकर ही घर से निकलें। थोड़ी सी सावधानी आपको और आपके परिवार को सुरक्षित रख सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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धर्मेंद्र प्रधान

Parliament Session धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान, विपक्ष के हंगामे से Lok Sabha और Rajya Sabha की कार्यवाही प्रभावित

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोमवार का दिन संसद में कई अहम घटनाओं का गवाह बना। एक तरफ धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे, जहां एनडीए (NDA) के सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत करते हुए शॉल ओढ़ाई और मिथिला पाग पहनाकर सम्मानित किया। वहीं दूसरी ओर लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई और दोनों सदनों को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा। यह पूरा घटनाक्रम संसद के मौजूदा सत्र का सबसे चर्चित घटनाक्रम बन गया। संसद पहुंचते ही धर्मेंद्र प्रधान का हुआ भव्य स्वागत शिक्षा मंत्री पद छोड़ने के बाद धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे। संसद परिसर में एनडीए के कई सांसद पहले से उनका इंतजार कर रहे थे। जैसे ही वह पहुंचे, सांसदों ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर और पारंपरिक मिथिला पाग पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान सांसदों ने उनके शिक्षा मंत्री के रूप में किए गए कार्यों की सराहना की। कई नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने और शिक्षा क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने में धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। सम्मान के पीछे क्या है राजनीतिक संदेश? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सम्मान केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं था। इसे भाजपा और एनडीए की ओर से धर्मेंद्र प्रधान के प्रति भरोसे और सम्मान का सार्वजनिक संदेश भी माना जा रहा है। इस्तीफे के बाद भी पार्टी नेतृत्व और सहयोगी दलों का उनके साथ खड़ा दिखना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। इधर संसद में विपक्ष का जोरदार हंगामा जहां संसद परिसर में सम्मान का माहौल था, वहीं सदन के भीतर तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आई। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष लगातार अपनी मांगों पर चर्चा कराने की मांग करता रहा, जबकि सरकार अपने तय एजेंडे के अनुसार कार्यवाही आगे बढ़ाना चाहती थी। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण सदन में शोर-शराबा बढ़ता गया। 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी कार्यवाही लगातार हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी। पीठासीन अधिकारियों ने व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहने पर दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। इस वजह से कई महत्वपूर्ण विधायी और सरकारी कार्य भी तय समय पर नहीं हो सके। शिक्षा मंत्रालय की कमान अब नए मंत्री के हाथों में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को देश का नया शिक्षा मंत्री बनाया है। अब नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, उच्च शिक्षा सुधार और छात्रों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी। शिक्षा जगत की नजर अब नए नेतृत्व के अगले कदमों पर टिकी है। संसद का दिन क्यों रहा खास? सोमवार का दिन संसद में दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आया। एक तरफ धर्मेंद्र प्रधान का सम्मान चर्चा का विषय बना, तो दूसरी तरफ विपक्ष के हंगामे ने संसदीय कार्यवाही को प्रभावित किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में संसद का सत्र और अधिक गर्म रहने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कर्नाटक के पूर्व CM सिद्धारमैया का बड़ा ऐलान, 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे

बेंगलुरु। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने घोषणा की है कि वह वर्ष 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सक्रिय राजनीति से संन्यास नहीं लेंगे और जनता के मुद्दों के लिए पहले की तरह काम करते रहेंगे। शनिवार को मंड्या जिले के के.आर. पेट में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि राजनीति अब पहले जैसी नहीं रही। उनके अनुसार, आज की राजनीति में भ्रष्टाचार बढ़ गया है और ईमानदार राजनीति के लिए जगह लगातार कम होती जा रही है। उन्होंने कहा कि उनकी उम्र अब 79 वर्ष हो चुकी है और मौजूदा सरकार का कार्यकाल पूरा होने तक वह 81-82 वर्ष के हो जाएंगे। बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अब पहले जैसी ऊर्जा के साथ चुनावी राजनीति करना संभव नहीं है। इसी वजह से उन्होंने भविष्य में चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। जनता की सेवा जारी रखने का संकल्प सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में सिद्धारमैया ने बताया कि वरुणा विधानसभा क्षेत्र के लोग उन्हें एक बार फिर चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपना निर्णय बदलने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब कार्यकर्ता और जनता चुनाव जिताने के लिए हरसंभव सहयोग करते थे, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं और चुनाव लड़ने के लिए नेताओं को ही पैसे खर्च करने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 तक उनके राजनीतिक जीवन के 50 वर्ष पूरे हो जाएंगे। इस लंबे सफर में उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और हमेशा जनता के हितों को प्राथमिकता दी। आगे भी उनका जीवन जनता की सेवा के लिए समर्पित रहेगा। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद आया बयान सिद्धारमैया का यह बयान मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लगभग दो महीने बाद आया है। उन्होंने 28 मई 2026 को कांग्रेस आलाकमान के निर्देश और रोटेशनल मुख्यमंत्री व्यवस्था के तहत अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में लंबे समय तक सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार के बीच नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं चलती रहीं। अंततः पार्टी नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ हुआ और सिद्धारमैया ने पद छोड़ दिया। राजनीति से दूरी नहीं, चुनावी राजनीति से विराम सिद्धारमैया ने साफ किया कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन कांग्रेस और जनता के बीच सक्रिय भूमिका निभाते रहेंगे तथा राज्य और देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहेंगे। अधिक राजनीतिक खबरों और ताजा अपडेट के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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तेज प्रताप यादव

Bihar Politics: तेज प्रताप यादव पर केस से भड़के तेजस्वी, सरकार को दी चेतावनी- अब आर-पार की लड़ाई

बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी गर्मी बढ़ गई है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने अपने भाई तेज प्रताप यादव पर दर्ज केस को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला है। तेजस्वी यादव ने कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताते हुए इसे तानाशाही करार दिया और सरकार को जल्द कदम उठाने का अल्टीमेटम दिया है। तेजस्वी यादव का कहना है कि तेज प्रताप यादव के खिलाफ गंभीर धाराओं में दर्ज मामला राजनीतिक दबाव का नतीजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्षी नेताओं को कमजोर करने के लिए जांच एजेंसियों और प्रशासन का इस्तेमाल कर रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी गई है कि नहीं, यह मामले की आगे की कार्रवाई पर निर्भर करेगा। Tej Pratap Yadav Case को लेकर RJD हमलावर तेज प्रताप यादव से जुड़े मामले के सामने आने के बाद आरजेडी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। तेजस्वी यादव ने कहा कि लोकतंत्र में कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विपक्ष में होने की वजह से नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है? उन्होंने साफ किया कि आरजेडी इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। तेजस्वी यादव का सरकार को अल्टीमेटम तेजस्वी यादव ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मामले में निष्पक्षता नहीं दिखाई गई तो पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब देगी। उनके इस बयान के बाद बिहार की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। आरजेडी कार्यकर्ता भी इस मुद्दे को लेकर सक्रिय नजर आ रहे हैं। विपक्ष बनाम सरकार की नई सियासी लड़ाई बिहार में पहले से ही राजनीतिक माहौल काफी सक्रिय है और ऐसे में तेज प्रताप यादव का मामला विपक्ष और सरकार के बीच नई बहस का कारण बन गया है। जहां आरजेडी इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रही है, वहीं सरकार का पक्ष है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी भी मामले में कार्रवाई तथ्यों के आधार पर होती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि तेज प्रताप यादव मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या यह मुद्दा बिहार की राजनीति में बड़ा चुनावी मुद्दा बनता है या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Prahlad Joshi

Prahlad Joshi नए शिक्षा मंत्री के रूप में शुरुआत, छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के लिए अहम होगा कार्यकाल

केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी में बड़ा बदलाव किया है। वरिष्ठ बीजेपी नेता प्रह्लाद जोशी (Prahlad Joshi) ने देश के नए शिक्षा मंत्री (Education Minister) के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। शिक्षा मंत्रालय देश के करोड़ों छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से सीधे जुड़ा हुआ मंत्रालय है। ऐसे में प्रह्लाद जोशी के सामने नई जिम्मेदारी के साथ कई बड़ी चुनौतियां भी होंगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि नए शिक्षा मंत्री शिक्षा व्यवस्था को लेकर क्या नए कदम उठाते हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ बड़ा बदलाव धर्मेंद्र प्रधान ने लंबे समय तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में काम किया। उनके कार्यकाल में नई शिक्षा नीति (NEP 2020), डिजिटल एजुकेशन, स्किल डेवलपमेंट और उच्च शिक्षा में सुधार जैसे कई मुद्दों पर सरकार ने काम किया। हालांकि, पिछले कुछ समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, छात्रों की समस्याओं और परीक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे थे। इन्हीं परिस्थितियों के बीच शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और प्रह्लाद जोशी को नई जिम्मेदारी दी गई। कौन हैं प्रह्लाद जोशी? जानिए नए Education Minister का सफर प्रह्लाद जोशी बीजेपी के अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। वह कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे हैं और केंद्र सरकार में कई अहम पदों पर काम कर चुके हैं। राजनीति में लंबे अनुभव के साथ प्रह्लाद जोशी को संगठन और प्रशासनिक मामलों की अच्छी समझ रखने वाला नेता माना जाता है। अब शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका फोकस देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर रहेगा। छात्रों और शिक्षा क्षेत्र के सामने बड़ी चुनौतियां प्रह्लाद जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का भरोसा मजबूत करना होगी। प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, पेपर लीक जैसी समस्याओं पर नियंत्रण, सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और उच्च शिक्षा में सुधार जैसे कई मुद्दे उनके सामने होंगे। इसके अलावा नई शिक्षा नीति (National Education Policy) को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है। शिक्षा क्षेत्र को नए विजन की उम्मीद शिक्षा सिर्फ नीतियों का विषय नहीं बल्कि देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। ऐसे में नए शिक्षा मंत्री से छात्रों और शिक्षकों को उम्मीद है कि वह शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए ठोस फैसले लेंगे। प्रह्लाद जोशी के सामने यह जिम्मेदारी ऐसे समय आई है जब भारत तेजी से बदलते शिक्षा मॉडल, डिजिटल लर्निंग और रोजगार आधारित शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अब आने वाले दिनों में उनके फैसले यह तय करेंगे कि शिक्षा मंत्रालय किस दिशा में आगे बढ़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bank Holidays

Bank Holidays Alert: अगस्त 2026 में 14 दिन बंद रहेंगे Bank, ग्राहक पहले निपटा लें जरूरी काम

अगस्त 2026 में अगर आपका बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो घर से निकलने से पहले छुट्टियों की लिस्ट जरूर देख लें। इस महीने Bank Holidays के कारण कुल 14 दिन बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। रविवार और शनिवार की नियमित छुट्टियों के अलावा अलग-अलग राज्यों में त्योहारों और स्थानीय आयोजनों के चलते भी बैंक बंद रहेंगे। बैंक की छुट्टियों को लेकर जानकारी पहले से होने पर आप अपने जरूरी काम समय पर पूरे कर सकते हैं और आखिरी समय में होने वाली परेशानी से बच सकते हैं। August 2026 Bank Holiday List: 14 दिन नहीं होगा बैंक में काम अगस्त महीने में बैंक बंद रहने वाले दिनों में साप्ताहिक अवकाश और विशेष छुट्टियां शामिल हैं। इस महीने: यानी अगस्त 2026 में बैंक ग्राहकों को कुल 14 दिनों तक शाखाओं में जाकर काम कराने का मौका नहीं मिलेगा। अलग-अलग राज्यों में अलग होंगी Bank Holidays बैंक की सभी छुट्टियां पूरे भारत में एक जैसी नहीं होती हैं। कुछ छुट्टियां केवल चुनिंदा राज्यों में लागू होती हैं, क्योंकि वहां स्थानीय त्योहारों और विशेष अवसरों के अनुसार बैंक बंद रहते हैं। इसलिए अगर आपको बैंक ब्रांच में जाकर कोई काम करना है, तो अपने शहर और राज्य की छुट्टी की जानकारी जरूर जांच लें। इन बैंकिंग कामों को पहले कर लें पूरा बैंक छुट्टियों के दौरान परेशानी से बचने के लिए ग्राहक अपने जरूरी काम पहले ही निपटा सकते हैं। इनमें शामिल हैं: समय पर काम पूरा करने से छुट्टी के बाद बैंक खुलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। छुट्टी के दिन भी जारी रहेंगी Digital Banking Services बैंक शाखाएं बंद होने के बावजूद डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी। ग्राहक: का इस्तेमाल कर सकेंगे। ऑनलाइन बैंकिंग की मदद से पैसे ट्रांसफर करने, बिल भुगतान करने और कई अन्य जरूरी काम आसानी से किए जा सकते हैं। Bank जाने से पहले जरूर Check करें Holiday List अगस्त में कई दिनों तक बैंक बंद रहने वाले हैं, इसलिए अपनी बैंकिंग प्लानिंग पहले से करना बेहतर रहेगा। खासकर अगर आपको शाखा में जाकर कोई जरूरी काम करना है तो बैंक की छुट्टी जरूर चेक कर लें। Bank Holidays August 2026 की जानकारी आपके समय और मेहनत दोनों को बचा सकती है। इसलिए बैंक जाने से पहले Holiday List देखना न भूलें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Rahul Gandhi vs Amit Shah: छात्रों पर कथित हमले के मुद्दे पर गृह मंत्री को पत्र, कार्रवाई की मांग

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने छात्रों पर हुए कथित हमले को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah को पत्र लिखा है। राहुल गांधी ने अपने पत्र में छात्रों की सुरक्षा, घटना की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। Rahul Gandhi ने कहा कि देश के युवाओं और छात्रों को सुरक्षित माहौल मिलना जरूरी है। उन्होंने चिंता जताई कि छात्रों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण है। पत्र के माध्यम से उन्होंने गृह मंत्रालय से पूरे मामले की जानकारी साझा करने की मांग की है। Student Safety को लेकर राहुल गांधी ने उठाए सवाल राहुल गांधी ने अपने पत्र में छात्रों की सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि छात्रों के साथ हुई घटना के पीछे क्या कारण थे और प्रशासन ने इस मामले में अब तक क्या कदम उठाए हैं। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों का अधिकार है कि वे बिना डर के अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान दे सकें। Congress ने सरकार से मांगी जवाबदेही इस मामले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। पार्टी का कहना है कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने और सुरक्षित वातावरण में रहने का अधिकार है। ऐसे मामलों में सरकार की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। गृह मंत्रालय के जवाब का इंतजार राहुल गांधी के पत्र के बाद अब सभी की नजर गृह मंत्रालय के रुख पर है। राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। छात्रों से जुड़े मामले पहले भी देश की राजनीति में अहम मुद्दे रहे हैं। शिक्षा, सुरक्षा और युवाओं के अधिकारों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बहस लगातार जारी रहती है। फिलहाल, राहुल गांधी के पत्र के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गृह मंत्रालय इस मामले में क्या जवाब देता है और आगे क्या कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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FSSAI

Train Food Complaint: Chandigarh-Dibrugarh Express की Pantry पर FSSAI की कार्रवाई

चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस में सफर कर रहे यात्रियों के लिए एक बार फिर रेलवे खानपान व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। ट्रेन में खराब गुणवत्ता वाला खाना परोसे जाने की शिकायतों के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सख्त कदम उठाया है। जांच के बाद पेंट्री कार संचालक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया गया है। यह मामला सामने आने के बाद यात्रियों के बीच चिंता बढ़ गई है, क्योंकि लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर करने वाले हजारों लोग भोजन के लिए रेलवे की Catering Service पर निर्भर रहते हैं। यात्रियों की शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस (Train No. 15904) में यात्रियों ने खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। यात्रियों का कहना था कि ट्रेन की पेंट्री कार से मिलने वाला भोजन तय मानकों के अनुसार नहीं था। शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू की। जांच में पेंट्री कार की व्यवस्थाओं और Food Safety Standards को लेकर कुछ कमियां सामने आईं, जिसके बाद FSSAI ने कार्रवाई का फैसला लिया। FSSAI ने Pantry Operator पर लगाया जुर्माना जांच के आधार पर FSSAI ने ट्रेन की पेंट्री कार संचालित करने वाले ऑपरेटर के खिलाफ कार्रवाई की और जुर्माना लगाया। अधिकारियों ने साफ किया कि यात्रियों की सेहत से जुड़ी किसी भी लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। FSSAI की यह कार्रवाई रेलवे Catering System में सुधार और यात्रियों को बेहतर भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। Railway Food Quality पर उठते रहे हैं सवाल भारतीय रेलवे में रोजाना करोड़ों यात्री सफर करते हैं। ऐसे में ट्रेन में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता हमेशा एक बड़ा मुद्दा रही है। कई बार यात्रियों ने भोजन की साफ-सफाई, स्वाद और गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की हैं। रेलवे लगातार अपनी खानपान सेवाओं को बेहतर बनाने का दावा करता रहा है, लेकिन इस तरह के मामले व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत को दिखाते हैं। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सबसे जरूरी ट्रेन यात्रा के दौरान यात्रियों को सुरक्षित और साफ भोजन मिलना बेहद जरूरी है। खराब खाना न सिर्फ यात्रियों की परेशानी बढ़ाता है, बल्कि उनकी सेहत पर भी असर डाल सकता है। FSSAI की इस कार्रवाई से पेंट्री संचालकों को एक स्पष्ट संदेश मिला है कि Food Safety Rules का पालन करना अनिवार्य है। आने वाले समय में रेलवे और खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी से यात्रियों को बेहतर खानपान सुविधा मिलने की उम्मीद है। Chandigarh-Dibrugarh Express Food Case Highlights: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Telangana

Telangana Assembly Special Session: 21 साल में चुनाव लड़ने का प्रस्ताव, क्या बदल जाएगा Election का नियम?

Telangana Election Reform: तेलंगाना सरकार ने देश की चुनावी व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में एक अहम पहल की है। राज्य सरकार विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष करने के पक्ष में प्रस्ताव लाने जा रही है। इस मुद्दे पर अगस्त के पहले सप्ताह में विधानसभा और विधान परिषद का विशेष सत्र बुलाया जाएगा। हालांकि, केवल राज्य सरकार के प्रस्ताव से नियम नहीं बदलेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार और संसद की मंजूरी अनिवार्य होगी। युवाओं को राजनीति में आगे लाने की तैयारी मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी का कहना है कि भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। ऐसे में युवाओं को केवल मतदान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें चुनाव लड़ने और नेतृत्व करने का अवसर भी मिलना चाहिए। सरकार का मानना है कि 21 वर्ष की आयु में युवा उच्च शिक्षा पूरी कर चुके होते हैं, नौकरी और कारोबार की जिम्मेदारियां संभालते हैं। ऐसे में यदि वे देश के भविष्य को लेकर अपनी सोच रखते हैं, तो उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उम्मीदवार बनने का भी अधिकार मिलना चाहिए। विधानसभा का Special Session क्यों बुलाया जा रहा है? तेलंगाना सरकार इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप देने के लिए विधानसभा और विधान परिषद का विशेष सत्र बुला रही है। इस सत्र में चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष करने संबंधी प्रस्ताव पारित किया जाएगा। प्रस्ताव पास होने के बाद इसे केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर इस बदलाव पर विचार किया जा सके। क्या सिर्फ राज्य सरकार फैसला ले सकती है? इस सवाल का जवाब है—नहीं। लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु भारतीय संविधान और Representation of the People Act के तहत तय होती है। इसलिए किसी भी राज्य के पास इसे अपने स्तर पर बदलने का अधिकार नहीं है। यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो केंद्र सरकार को कानून में संशोधन का प्रस्ताव लाना होगा। इसके बाद संसद की मंजूरी मिलने पर ही नया नियम पूरे देश में लागू हो सकेगा। युवाओं के लिए कितना बड़ा बदलाव होगा? अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो 21 से 24 वर्ष की आयु के लाखों युवाओं को पहली बार विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे राजनीतिक दलों में युवा नेतृत्व को बढ़ावा मिल सकता है। नई पीढ़ी के लोग अपने विचार सीधे लोकतांत्रिक मंच पर रख सकेंगे और नीति निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। क्या इस प्रस्ताव पर सभी सहमत हैं? इस पहल को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। एक पक्ष का मानना है कि युवाओं को कम उम्र में राजनीति में आने का अवसर मिलना चाहिए, क्योंकि वे नई सोच और ऊर्जा लेकर आते हैं। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जनप्रतिनिधि बनने के लिए अनुभव भी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी होगी। अब आगे क्या होगा? सबसे पहले तेलंगाना विधानसभा के विशेष सत्र में प्रस्ताव पारित किया जाएगा। इसके बाद यह केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। यदि केंद्र इस पर सकारात्मक रुख अपनाता है, तो संसद में संबंधित कानूनों में संशोधन का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल यह प्रस्ताव देशभर में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर नई बहस छेड़ चुका है। आने वाले समय में केंद्र सरकार का फैसला तय करेगा कि क्या 21 साल की उम्र में चुनाव लड़ने का सपना देश के लाखों युवाओं के लिए हकीकत बन पाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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