राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के परिवार में बीते दिनों से चल रहा विवाद अब बड़ा रूप ले चुका है। उनकी बेटी रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya), जिन्होंने 2022 में अपने पिता को किडनी दान की थी, अब लगातार परिवार पर गंभीर आरोप लगा रही हैं। यह विवाद सिर्फ एक पारिवारिक तनाव नहीं, बल्कि राजनीति, भावनाओं और जेंडर संवेदनशीलता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है। किडनी Donation के बाद क्यों बढ़ी दूरियां? रोहिणी आचार्य ने दावा किया कि किडनी दान के बाद परिवार में उनके साथ गलत व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि: सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि यह सब उनके लिए मानसिक रूप से बेहद दर्दनाक रहा और उन्होंने परिवार से रिश्ते तोड़ने का फैसला कर लिया। Tejashwi Yadav पर निशाना—“क्यों नहीं दी किडनी?” रोहिणी ने अपने भाई तेजस्वी यादव और उनके सहयोगियों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि: उन्होंने तेजस्वी के सलाहकारों को भी चुनौती दी कि अगर वे इतने नेक और दयालु हैं, तो अस्पताल जाकर जरूरतमंदों को किडनी दान करें। बड़ी दरार: तीन बहनों का घर छोड़ना कई रिपोर्ट्स के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद लालू यादव की तीन और बेटियाँ — रागिनी, चंदा, और राजलक्ष्मी — परिवार के घर से बाहर चली गई हैं। इससे स्पष्ट होता है कि तनाव केवल दो-तीन लोगों तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार के व्यापक हिस्से में फैल चुका है। लालू और तेजस्वी की चुप्पी—RJD पर क्या असर? राजद नेतृत्व की ओर से इस विवाद पर अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। इन सब ने मिलकर राजनीतिक रूप से राजद को नुकसान पहुँचाया है। महिलाओं पर ‘बलिदान’ का दबाव—रोहिणी की बड़ी बात रोहिणी आचार्य ने समाज में बेटियों पर पड़ने वाले भावनात्मक दबाव की बात भी उठाई। उनका कहना है: “माता-पिता का जीवन बचाना जरूरी है, लेकिन बेटियों को हमेशा बलिदान की प्रतीक समझना गलत है। परिवार में बेटा हो तो जिम्मेदारी पहले उसी की होनी चाहिए।” यह बयान सामाजिक और जेंडर बहस को भी जन्म देता है। कानूनी व मेडिकल पहलू: कौन दे सकता है किडनी? भारत के कानूनों के अनुसार: रोहिणी का कहना है कि उन्होंने यह दान स्वेच्छा से और भावनाओं से प्रेरित होकर किया था—लेकिन बाद में उन्हें बदले में अपमान मिला। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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