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लू

Extreme Heat Alert: अकोला में 46.9°C रिकॉर्ड, UP में लू का कहर; वाराणसी में खास इंतजाम

देश में इस साल गर्मी ने समय से पहले ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। अप्रैल के आखिर में ही हालात ऐसे हो गए हैं कि कई शहरों में दोपहर के समय लू बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। सबसे ज्यादा चर्चा अकोला की है, जहां तापमान 46.9°C तक पहुंच गया और यह देश का सबसे गर्म शहर बन गया। Heatwave का असर: UP के 60 जिलों में Alert मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के करीब 60 जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है। सुबह से ही तेज धूप और दोपहर तक चलने वाली गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर रही हैं। सड़कों पर सन्नाटा और बाजारों में कम भीड़ इसका साफ संकेत है कि लोग अब जरूरी काम होने पर ही घर से निकल रहे हैं। वाराणसी में Health System Alert पर गर्मी के बढ़ते खतरे को देखते हुए वाराणसी के अस्पतालों ने खास तैयारी शुरू कर दी है। यहां हीटस्ट्रोक के मरीजों के लिए अलग यूनिट बनाई गई है। इतना ही नहीं, मरीजों के शरीर का तापमान तेजी से कम करने के लिए बाथटब की व्यवस्था भी की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर इलाज मिले तो जान बचाई जा सकती है। क्यों बढ़ रही है इतनी ज्यादा गर्मी? मौसम विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बार तापमान तेजी से बढ़ने के पीछे कई कारण हैं । बारिश की कमी, सूखी हवाएं और लगातार तेज धूप। यही वजह है कि अप्रैल में ही मई-जून जैसी गर्मी महसूस हो रही है। लोगों के लिए जरूरी सलाह गर्मी को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में कुछ आसान सावधानियां आपको सुरक्षित रख सकती हैं: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bengal crude bomb case

Bengal Crude Bomb Case: TMC कार्यकर्ता के घर से बम बरामद, NIA जांच शुरू

Bengal crude bomb case में बड़ा खुलासा हुआ है, जहां TMC कार्यकर्ता से जुड़े घर से दर्जनों बम बरामद हुए हैं। अब NIA जांच शुरू हो चुकी है। जानिए पूरी घटना और चुनाव पर इसका असर। Bengal crude bomb case ने चुनावी माहौल में बड़ा सनसनीखेज मोड़ ला दिया है। इस Bengal crude bomb case में पश्चिम बंगाल के भांगड़ इलाके से एक TMC से जुड़े व्यक्ति के घर से भारी मात्रा में कच्चे बम बरामद हुए हैं, जिसके बाद अब जांच राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है। Bengal crude bomb case में क्या हुआ? इस Bengal crude bomb case में पुलिस ने दक्षिण 24 परगना जिले के भांगड़ क्षेत्र में छापेमारी के दौरान दर्जनों कच्चे बम बरामद किए। NIA investigation Bengal: क्यों बढ़ी जांच? इस Bengal crude bomb case की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच National Investigation Agency को सौंप दी है। आगे क्या होगा? अब इस Bengal crude bomb case में NIA की जांच तय करेगी: यह भी पढ़े -500 Crore का ‘क्लब नेटवर्क’! ममता बनर्जी के समर्थन में जुटे 1 लाख क्लब, क्या BJP को पड़ेगा भारी?
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PM Modi on Oil Crisis, Work From Home India,

Bengal Politics: 4 मई के बाद कार्रवाई का भरोसा, PM मोदी का TMC पर तीखा हमला

Bengal में चुनावी माहौल के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने एक जनसभा में सत्तारूढ़ TMC पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि “4 मई के बाद TMC के हर गुंडे, हर अत्याचारी और हर भ्रष्टाचारी का हिसाब होगा।” PM मोदी का सीधा आरोप प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो गई है और आम जनता परेशान है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और हिंसा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जनता से किया वादा PM मोदी ने लोगों को भरोसा दिलाया कि अगर उनकी सरकार आती है, तो राज्य में शांति और विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। TMC पर निशाना अपने भाषण में उन्होंने TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कई गंभीर आरोप लगाए और कहा कि जनता अब बदलाव चाहती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सोच-समझकर वोट करें। चुनावी माहौल गरम बंगाल में चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सभी पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रही हैं, जिससे माहौल और भी गरमा गया है।
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AAP का बड़ा एक्शन: BJP जॉइन करने वाले 7 सांसदों की राज्यसभा सदस्यता रद्द करने की मांग

AAP का बड़ा एक्शन: BJP जॉइन करने वाले 7 सांसदों की राज्यसभा सदस्यता रद्द करने की मांग

दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Aam Aadmi Party (AAP) ने भाजपा में शामिल हुए अपने सात सांसदों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने इन सभी सांसदों की राज्यसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की है। AAP का कहना है कि पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इसके लिए कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। क्या है पूरा मामला? हाल ही में AAP के 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर Bharatiya Janata Party (BJP) का दामन थाम लिया। AAP की क्या है मांग? AAP ने स्पष्ट रूप से कहा है: BJP की प्रतिक्रिया वहीं Bharatiya Janata Party की तरफ से इस मुद्दे पर अलग रुख सामने आया है। आगे क्या हो सकता है? अब यह मामला कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरेगा।
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Swati Maliwal

Swati Maliwal का बड़ा फैसला: BJP जॉइन कर PM Modi की तारीफ, Kejriwal को घेरा

दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कभी आम आदमी पार्टी का अहम चेहरा रहीं Swati Maliwal अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गई हैं। इस फैसले ने न सिर्फ सियासी गलियारों में हलचल बढ़ाई है, बल्कि आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है। BJP में शामिल होते ही PM Modi की तारीफ BJP जॉइन करने के बाद स्वाति मालीवाल ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं।उनके शब्दों में, “देश बदल रहा है और इस बदलाव का हिस्सा बनना जरूरी है।” Kejriwal पर तीखे हमले इस मौके पर मालीवाल ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख Arvind Kejriwal पर बिना नाम लिए भी और सीधे तौर पर भी कई सवाल खड़े किए।उन्होंने कहा कि पार्टी अब अपने मूल एजेंडे से भटक चुकी है और पारदर्शिता की जगह राजनीति हावी हो गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सिर्फ बातें हुईं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर काम उतना नहीं दिखा। आखिर क्यों छोड़ी AAP? करीबी सूत्रों के मुताबिक, स्वाति मालीवाल पिछले कुछ समय से पार्टी के अंदर चल रही खींचतान और फैसलों से असंतुष्ट थीं।उनका मानना था कि जिन मुद्दों के लिए उन्होंने राजनीति में कदम रखा था, वे अब पीछे छूटते जा रहे हैं। यही वजह रही कि उन्होंने इतना बड़ा फैसला लिया। Delhi Politics पर क्या पड़ेगा असर? राजनीतिक जानकार मानते हैं कि स्वाति मालीवाल का BJP में शामिल होना आने वाले चुनावों से पहले एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है।इससे जहां BJP को मजबूती मिल सकती है, वहीं AAP के लिए यह एक झटका माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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केजरीवाल

Delhi CM House Row: केजरीवाल पर आलीशान घर के आरोप, AAP ने बताया साजिश

दिल्ली की सियासत में इन दिनों एक नया विवाद चर्चा का केंद्र बना हुआ है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अरविंद केजरीवाल के कथित नए आवास की कुछ तस्वीरें जारी कर बड़ा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि आम आदमी की बात करने वाले केजरीवाल खुद “आलीशान जिंदगी” जी रहे हैं। वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) ने इन तस्वीरों को पूरी तरह फर्जी बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। क्या है पूरा मामला? BJP की ओर से शेयर की गई तस्वीरों में दावा किया गया कि केजरीवाल का नया घर किसी “शीशमहल” से कम नहीं है। तस्वीरों में महंगे इंटीरियर, साज-सज्जा और लग्ज़री सुविधाओं की बात कही जा रही है। नेताओं का कहना है कि यह सब जनता के पैसे से किया गया है, जो उनके “साधारण जीवन” के दावे के विपरीत है। BJP का सीधा आरोप पार्टी ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर जोर-शोर से उठाया, जिससे बहस और तेज हो गई। AAP का पलटवार: “तस्वीरें फर्जी हैं” AAP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए साफ कहा कि: नेताओं ने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे असली तथ्यों को सामने लाएंगे। राजनीति क्यों गरमाई? दिल्ली में पहले से ही राजनीतिक माहौल काफी गर्म है। ऐसे में यह विवाद और बड़ा मुद्दा बन गया है। एक तरफ BJP इसे भ्रष्टाचार और फिजूलखर्ची से जोड़ रही है, तो दूसरी तरफ AAP इसे राजनीतिक हमला बता रही है। आगे क्या? अब सबकी नजर इस बात पर है कि: फिलहाल, सच्चाई दोनों दावों के बीच कहीं छिपी हुई नजर आ रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal में दूसरी रात भी लू का कहर, लोगों की बढ़ी परेशानी

Bhopal में दूसरी रात भी लू का कहर, लोगों की बढ़ी परेशानी

Bhopal में गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। लगातार दूसरे दिन रात में भी लू चलने से लोगों को राहत नहीं मिल रही। आमतौर पर रात में तापमान थोड़ा कम हो जाता है, लेकिन इस बार रात भी दिन जैसी तप रही है। लोग घरों में बंद रहने को मजबूर हैं और कूलर-पंखे भी ज्यादा राहत नहीं दे पा रहे। देश के कई शहरों में गर्मी अपने चरम पर है। प्रयागराज और अकोला में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को बेहाल कर दिया है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा नजर आ रहा है, क्योंकि लोग जरूरी काम होने पर ही बाहर निकल रहे हैं। गर्मी से राहत देने के लिए कई शहरों में नगर निगम की टीमें सड़कों पर पानी का छिड़काव कर रही हैं, ताकि तापमान थोड़ा कम किया जा सके और लोगों को राहत मिले। इसके बावजूद गर्म हवाओं का असर कम नहीं हो रहा। वहीं, ओडिशा में हालात इतने खराब हो गए हैं कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूलों को बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने लोगों को दोपहर में बाहर न निकलने और ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस भीषण गर्मी में लापरवाही खतरनाक हो सकती है। हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए सिर ढककर निकलें, हल्के कपड़े पहनें और शरीर को हाइड्रेट रखें। गर्मी का यह दौर फिलहाल जारी रहने की संभावना है, ऐसे में सावधानी ही बचाव है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Raghav Chadha news

AAP Crisis: “आप” की झाड़ू क्यों बिखरी? | केजरीवाल की राजनीति पर बड़ा सवाल

संपादकीय – निखिल सिद्धभट्टी भारतीय घरों में झाड़ू सिर्फ सफाई का साधन नहीं, एक प्रतीक भी है—संगठन का, संतुलन का और टिकाऊपन का। कोई भी गृहिणी आपको बताएगी कि अच्छी झाड़ू वही होती है जिसकी हर एक तिनकी मजबूती से एक-दूसरे से जुड़ी हो और बीच में एक मजबूत आधार हो। लेकिन अगर वही झाड़ू सिर्फ दिखावे के लिए किसी चमकदार पाइप में कसकर बंद कर दी जाए, तो वह ज़्यादा दिन नहीं चलती। यही रूपक आज आम आदमी पार्टी (AAP) की स्थिति पर सटीक बैठता है। AAP की स्थापना भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जनांदोलन के रूप में हुई थी। इसमें समाज के वे लोग जुड़े थे जो पारंपरिक राजनीति से दूर रहकर देश को एक नई दिशा देना चाहते थे—शांति भूषण, योगेंद्र यादव, आशुतोष, कुमार विश्वास और आगे चलकर राघव चड्ढा जैसे नाम इस विचारधारा के स्तंभ बने। यह वह जमात थी जो सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन की बात करती थी। लेकिन समय के साथ यह झाड़ू बिखरती चली गई। सवाल उठता है—क्या यह बिखराव सिर्फ “ऑपरेशन लोटस” जैसी राजनीतिक रणनीतियों का परिणाम है? या इसके पीछे कुछ और गहरी वजहें हैं? निस्संदेह, भारतीय राजनीति में विपक्षी दलों को तोड़ने के आरोप नई बात नहीं हैं। “ऑपरेशन लोटस” का नाम भी इसी संदर्भ में बार-बार सामने आता है। लेकिन अगर हम ईमानदारी से विश्लेषण करें, तो यह मानना मुश्किल है कि AAP से जुड़े इतने शिक्षित, वैचारिक और स्वतंत्र सोच वाले लोग सिर्फ बाहरी दबाव में पार्टी छोड़ते चले गए। असली कारण कहीं अधिक आंतरिक दिखाई देता है। AAP के भीतर समय के साथ एक “वन मैन शो” की छवि उभरती गई। अरविंद केजरीवाल का नेतृत्व शुरुआत में आंदोलनकारी ऊर्जा से भरा हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे उसी नेतृत्व में केंद्रीकरण और कथित “सिंडिकेट संस्कृति” की झलक दिखने लगी। निर्णय लेने की प्रक्रिया सीमित होती गई, असहमति के लिए जगह सिकुड़ती गई, और नतीजा यह हुआ कि एक-एक कर पार्टी के संस्थापक चेहरे किनारे होते चले गए। विडंबना यह भी है कि जो पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ी हुई थी, उसके कई प्रमुख नेता खुद भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरकर जेल तक पहुंच गए। इससे न केवल पार्टी की नैतिक साख को झटका लगा, बल्कि उसके मूल विचार को भी कमजोर किया। राघव चड्ढा जैसे युवा और प्रभावशाली नेता का लंबे समय तक पार्टी की सक्रिय गतिविधियों से दूरी बनाना भी एक संकेत था—एक ऐसा संकेत जिसे शायद समय रहते समझा नहीं गया। आज भी पार्टी के भीतर ऐसे कई चेहरे हैं जो खुलकर सामने नहीं आ रहे, लेकिन “घुटन” महसूस कर रहे हैं। अब सवाल यह नहीं है कि दोष किस पर डाला जाए—BJP, मोदी या अमित शाह पर। सवाल यह है कि क्या AAP अपने भीतर झांकने को तैयार है? अरविंद केजरीवाल के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती आत्ममंथन की है। उन्हें यह समझना होगा कि AAP कोई पारंपरिक पार्टी नहीं थी, बल्कि एक विचार था—और विचार को आदेशों से नहीं, संवाद से चलाया जाता है। उन्हें अपने पुराने और नए साथियों के साथ बैठकर एक नया रास्ता तैयार करना होगा, न कि “सुपर CM” की छवि में सिमट जाना होगा। अगर समय रहते यह झाड़ू फिर से नहीं गूंथी गई, तो वह दिन दूर नहीं जब इस झाड़ू में सिर्फ एक ही तिनका बचेगा—और तब सफाई नहीं, सिर्फ प्रतीक रह जाएगा। अब वक्त है—हर तिनके को फिर से जोड़ने का। वरना इतिहास गवाह है, बिखरी हुई झाड़ू न घर साफ कर पाती है, न राजनीति।
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AAP

AAP में भूचाल 7 सांसदों का इस्तीफा, ‘Operation Lotus’ का आरोप

आम आदमी पार्टी (AAP) में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक तूफान देखने को मिल रहा है। ताज़ा जानकारी के अनुसार पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद Raghav Chadha समेत कुल 7 सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस खबर ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक राजनीतिक हलचल तेज कर दी है और पार्टी के भीतर अस्थिरता की चर्चाएं बढ़ गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद AAP के वरिष्ठ नेता Sanjay Singh ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे महज इस्तीफा नहीं, बल्कि एक “सुनियोजित राजनीतिक साजिश” करार दिया है। संजय सिंह का कहना है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी को कमजोर करने के लिए “Operation Lotus” जैसे प्रयास किए जा रहे हैं। अंदरूनी कलह या राजनीतिक रणनीति? 7 सांसदों के एक साथ इस्तीफे की खबर के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं—क्या यह पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति का नतीजा है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति काम कर रही है? हालांकि अभी तक पार्टी की ओर से इस पूरे मामले पर विस्तृत आधिकारिक सफाई नहीं आई है। कार्यकर्ताओं में चिंता, विपक्ष हमलावर इस घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं में चिंता का माहौल है। वहीं विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर AAP पर लगातार हमलावर हैं और इसे पार्टी की आंतरिक कमजोरी के रूप में पेश कर रहे हैं। पंजाब की राजनीति पर असर संभव राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह स्थिति आगे बढ़ती है तो इसका सीधा असर पंजाब की राजनीति पर पड़ सकता है, जहां AAP की सरकार पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है। संगठनात्मक स्तर पर भी पार्टी को झटका लग सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें AAP के आधिकारिक बयान पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि आखिर 7 सांसदों के इस्तीफे के पीछे असली वजह क्या है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Raghav Chadha

“आई एम द राइट मैन इन रॉन्ग पार्टी “:Raghav Chadha AAP से इस्तीफा और 7 सांसदों के साथ BJP में एंट्री

देश की राजनीति में इन दिनों आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) को लेकर बड़ी हलचल मची हुई है। सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में यह दावा तेजी से फैल रहा है कि उन्होंने AAP से इस्तीफा दे दिया है और जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो सकते हैं। यहां तक कि यह भी कहा जा रहा है कि कुछ सांसद उनके साथ पार्टी बदल सकते हैं। हालांकि, अब तक इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आखिर क्या है पूरा मामला? पिछले कुछ समय से AAP के भीतर संगठनात्मक बदलाव और नेतृत्व स्तर पर कुछ फैसलों के बाद राघव चड्ढा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। इसी बीच उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गईं। इन अटकलों ने तब और जोर पकड़ा जब सोशल मीडिया पर यह दावा वायरल हुआ कि Raghav Chadha AAP छोड़कर BJP में शामिल हो सकते हैं। कुछ पोस्ट्स में तो यह भी कहा गया कि उनके साथ कई सांसद भी पार्टी बदल सकते हैं। क्या राघव चड्ढा ने इस्तीफा दिया है? ताजा और उपलब्ध जानकारी के अनुसार: पहले भी उड़ चुकी हैं ऐसी खबरें यह पहली बार नहीं है जब राघव चड्ढा को लेकर ऐसी राजनीतिक चर्चाएं सामने आई हों। इससे पहले भी उनके पार्टी में स्थिति और भविष्य को लेकर कई तरह की अफवाहें फैल चुकी हैं, जिन्हें समय-समय पर खारिज किया गया है। राजनीतिक माहौल में बढ़ी अटकलें चुनावी माहौल और राजनीतिक सरगर्मियों के बीच इस तरह की खबरें अक्सर तेजी से फैलती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आता, तब तक इन दावों को केवल अटकल ही माना जाना चाहिए। राघव चड्ढा के AAP छोड़ने और BJP में जाने की खबरें फिलहाल अफवाह और अनकन्फर्म्ड रिपोर्ट्स हैं। किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक बयान का इंतजार करना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
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Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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