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बिलासपुर सहित पूरे प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल, दफ्तरों में सन्नाटा, कामकाज पूरी तरह ठप

बिलासपुर समेत छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में सरकारी विभागों के कर्मचारियों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। हड़ताल के पहले ही दिन कलेक्ट्रेट सहित अधिकांश सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा, जिससे सरकारी कामकाज पूरी तरह प्रभावित हुआ। जरूरी कार्यों के लिए कार्यालय पहुंचे आम नागरिक भटकते नजर आए। वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों ने नेहरू चौक पर एकत्र होकर धरना-प्रदर्शन किया और शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारी नेताओं ने साफ कहा कि यह आंदोलन लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर किया जा रहा है, जिसे सरकार लगातार नजरअंदाज करती रही है। कर्मचारी नेताओं का आरोप: सरकार के रवैए से बढ़ा आक्रोश कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वे काफी समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखते आ रहे थे, लेकिन शासन की ओर से केवल आश्वासन ही मिले। धरातल पर कोई ठोस फैसला नहीं होने के कारण कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता गया और अब उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। यह हड़ताल सोमवार से बुधवार तक चलेगी। पहले ही दिन दिखा हड़ताल का असर सोमवार को कलेक्ट्रेट समेत सभी प्रमुख सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी नदारद रहे। इसके चलते फाइलों का निपटारा नहीं हो सका और आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग जरूरी काम के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटते नजर आए। नेहरू चौक पर प्रदर्शन, बेमियादी हड़ताल की चेतावनी हड़ताल के पहले दिन कर्मचारियों ने नेहरू चौक पर प्रदर्शन किया। इस दौरान नेताओं ने कहा कि पुरानी पेंशन योजना कर्मचारियों के बुढ़ापे का सहारा थी, जिसे सरकार ने बंद कर दिया। अन्य मांगों को लेकर भी लगातार संवाद की कोशिश की गई, लेकिन सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो वे बेमियादी हड़ताल पर जाएंगे। ये हैं अधिकारी-कर्मचारियों की 11 सूत्रीय मांगें 👉 छत्तीसगढ़ की हर बड़ी खबर और अपडेट के लिए पढ़ते रहें: deshharpal.com
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भारत माला प्रोजेक्ट घोटाला: छत्तीसगढ़ में ED की बड़ी कार्रवाई, 9 ठिकानों पर रेड, जमीन मुआवजा गड़बड़ी की जांच तेज

भारत माला परियोजना से जुड़े बहुचर्चित भूमि अधिग्रहण घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की टीम ने रायपुर और महासमुंद सहित कुल 9 ठिकानों पर छापेमारी की। रायपुर में हरमीत सिंह खनूजा और महासमुंद के मेघ बसंत इलाके में स्थित व्यवसायी जसबीर सिंह बग्गा के निवास पर ईडी ने रेड की है। इसके अलावा हरमीत खनूजा के ससुर ट्रांसपोर्टर हरमीत सिंह चावला और उनके एक करीबी के घर पर भी कार्रवाई जारी है। सूत्रों के मुताबिक, CRPF जवानों की सुरक्षा में ईडी की 10 सदस्यीय टीम चार गाड़ियों में सुबह पहुंची। टीम ने पंजाबीपारा स्थित हरमीत सिंह चावला के घर में प्रवेश कर दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू की। हरमीत सिंह चावला, मुख्य आरोपी हरमीत खनूजा के ससुर बताए जा रहे हैं। वहीं, महासमुंद में आर्यन होंडा एजेंसी के संचालक जसबीर सिंह बग्गा के मेघ बसंत कॉलोनी स्थित घर पर भी छापेमारी की गई। ED का दावा: मुआवजा भुगतान में बड़ी गड़बड़ी ईडी के अनुसार, भारत माला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में मुआवजा भुगतान को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। फिलहाल आरोपियों के ठिकानों के बाहर सुरक्षा बल तैनात हैं और किसी भी व्यक्ति को घर के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। ईडी की टीमें डिजिटल सबूतों, बैंक लेनदेन और दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं। क्या है पूरा मामला? जांच में सामने आया है कि हरमीत सिंह खनूजा इस घोटाले के मुख्य आरोपी और जमीन दलाल हैं। आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज, नकली बंटवारे और म्यूटेशन के जरिए भूमि मुआवजा हासिल किया और रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाई। ईडी की जांच में उनके ससुर हरमीत सिंह चावला के पास भी घोटाले से जुड़े अहम लेनदेन और जानकारियां मिलने की बात कही जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सरकारी अधिकारी भी जांच के घेरे में ईडी के मुताबिक, भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा राशि के निर्धारण और भुगतान में नियमों का उल्लंघन हुआ है। इस मामले में निजी व्यक्तियों के साथ-साथ कुछ सरकारी अधिकारी और जमीन मालिक भी जांच के दायरे में हैं। आरोप है कि बैकडेट में दस्तावेज तैयार कर जमीन को टुकड़ों में बांटा गया और मुआवजा राशि को कई गुना बढ़ा दिया गया। बताया जा रहा है कि भारत माला प्रोजेक्ट में करीब 43 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। जमीन को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ रुपये के भुगतान का दावा किया गया। इस केस में पहले भी कार्रवाई हो चुकी है, जिसमें कोरबा के डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू को सस्पेंड किया गया था। अभनपुर क्षेत्र में 9.38 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 324 करोड़ रुपये का मुआवजा तय किया गया था, जिसमें से 246 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है, जबकि 78 करोड़ रुपये का भुगतान फिलहाल रोक दिया गया है। 👉 भारत माला प्रोजेक्ट घोटाले समेत छत्तीसगढ़ की हर बड़ी और ताज़ा खबर के लिए पढ़ते रहें: deshharpal.com
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बिलासपुर: ध्वनि प्रदूषण, रास्ता बंद और कचरा जलाने पर हाईकोर्ट सख्त, अफसरों से शपथपत्र तलब

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ध्वनि प्रदूषण, रास्ता बंद करने और खुले में कचरा जलाने जैसी नागरिक समस्याओं पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। जनहित याचिका के रूप में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण वातावरण में जीने और सोने का मौलिक अधिकार देता है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने मामले में कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त से व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी। प्रकाशित खबरों पर HC का संज्ञान मीडिया रिपोर्ट्स में शहर और जिले से जुड़ी जनसमस्याएं सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने तीन मामलों को जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई शुरू की। कोर्ट ने माना कि इन समस्याओं से आम नागरिकों के मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। गर्डर लगाकर रास्ता बंद, स्कूली बच्चों को परेशानी सरकंडा क्षेत्र के शर्मा विहार और गीतांजलि सिटी कॉलोनी को जोड़ने वाली सड़क पर बिल्डर द्वारा गर्डर लगाकर रास्ता बंद करने का मामला सामने आया। इससे चारपहिया वाहनों की आवाजाही रुक गई और स्कूली बच्चों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है।हाईकोर्ट ने इसे गंभीर विषय बताते हुए नगर निगम आयुक्त को व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ जवाब देने के निर्देश दिए हैं। धार्मिक आयोजनों के नाम पर देर रात तक लाउडस्पीकर सरकंडा के ओम विहार इलाके में देर रात से सुबह तक तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजने से लोग परेशान हैं। शिकायतों के बावजूद राहत न मिलने पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अनुच्छेद 21 नागरिकों को शांत वातावरण में रहने और सोने का अधिकार देता है। इस मामले में कलेक्टर से शपथपत्र मांगा गया है। खुले में कचरा जलाने से बढ़ रहा प्रदूषण वार्ड नंबर 7, कालिका नगर में रोजाना कचरा जलाने से फैलने वाले धुएं से बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी हो रही है। लोगों का कहना है कि समय पर कचरा न उठने के कारण यह स्थिति बन रही है। इस पर भी हाईकोर्ट ने कलेक्टर और निगम आयुक्त से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि नागरिक सुविधाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। 👉 ऐसी ही छत्तीसगढ़ और देशभर की ताज़ा, भरोसेमंद खबरों के लिए पढ़ते रहें — deshharpal.com
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Bilaspur Dhan Khareedi Scam: नियमों के खिलाफ वसूली, बिचौलियों का धान खपाने का आरोप, 3 लाख का अवैध धान जब्त

बिलासपुर जिले के धान खरीदी केंद्रों पर किसानों से नियमों के विपरीत वसूली और मनमानी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आरोप है कि व्यापारी और बिचौलियों का धान खरीदी केंद्रों में खपाया जा रहा है, जबकि जरूरतमंद किसान टोकन मिलने के बाद भी धान बेचने के लिए भटकने को मजबूर हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को प्रशासन ने अवैध धान भंडारण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए राइस मिल और किराना दुकान से करीब 3 लाख रुपए का धान जब्त किया है। समर्थन मूल्य की व्यवस्था पर सवाल राज्य सरकार ने किसानों को उनकी उपज का समर्थन मूल्य (MSP) दिलाने के लिए धान खरीदी की व्यवस्था की है, लेकिन जमीनी स्तर पर अफसरों और खरीदी केंद्र प्रभारियों की मिलीभगत से व्यवस्था प्रभावित होने का आरोप है। किसानों का कहना है कि उनका धान पीछे किया जा रहा है, जबकि बिचौलियों का धान आसानी से खरीदा जा रहा है। प्रति बोरी 1 किलो तक ज्यादा धान लेने का आरोप शासन के नियमों के अनुसार एक बोरी में 40 किलो 700 ग्राम धान लिया जाना चाहिए, लेकिन कई केंद्रों पर किसानों से 41 किलो 500 ग्राम से 41 किलो 700 ग्राम तक धान लिया जा रहा है। यानी प्रति बोरी करीब 1 किलो अतिरिक्त। किसानों ने इसकी शिकायतें भी कीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। टोकन के बाद भी नहीं हो रही तौल किसानों का कहना है कि टोकन कटवाने के बाद भी उनकी तौल नहीं हो रही। शुक्रवार को पहुंचे किसानों की तौल नहीं हुई और शनिवार-रविवार केंद्र बंद रहने के कारण उन्हें सोमवार तक इंतजार करना पड़ेगा। किसानों को डर है कि सोमवार को भी नंबर आएगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं। प्रशासन की कार्रवाई, 3 लाख का धान जब्त जिला प्रशासन का दावा है कि अवैध धान भंडारण पर लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन केस दर्ज किया गया। यह कार्रवाई बेलगहना नायब तहसीलदार समर्थ थवाईत, कोटा मंडी उप निरीक्षक सीजी गोस्वामी और नीतिश नायक की टीम ने की। कुल मिलाकर करीब 3 लाख रुपए का धान जब्त किया गया और मंडी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। 👉 इस मुद्दे से जुड़ी हर अपडेट, ग्राउंड रिपोर्ट और ब्रेकिंग न्यूज के लिए Deshharpal साइट विज़िट करें deshharpal.com
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बिलासपुर नगर निगम में स्टाफ की भारी कमी, विकास कार्य ठप—6 साल से नए सेटअप की मांग अधर में

बिलासपुर नगर निगम पिछले 6 साल से नए सेटअप की मांग कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हाल ही में महापौर पूजा विधानी ने उपमुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव से मुलाकात कर बताया कि लगातार रिटायर हो रहे कर्मचारियों के कारण स्टाफ बेहद कम हो गया है। इसका सीधा असर शहर के विकास कार्यों की गति पर पड़ रहा है। 2019 में वार्ड बढ़े, इलाके बढ़े… लेकिन स्टाफ वही का वही साल 2019 में बिलासपुर नगर निगम का क्षेत्र 30 से बढ़कर 133 वर्ग किलोमीटर हो गया।वार्डों की संख्या भी 56 से बढ़कर 70 हो गई। लेकिन इतने बड़े विस्तार के बावजूद— इसका नतीजा है कि आज निगम के कई दफ्तर स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहे हैं। जोन-1: छह वार्ड, पर सब इंजीनियर सिर्फ एक! जोन-1 की सहायक जोन कमिश्नर रंजना अग्रवाल ने बताया कि उनके जोन में 6 वार्ड हैं, लेकिन काम संभालने के लिए उन्होंने माना कि इंजीनियरों की कमी से विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है। जोन-3: एक ही अधिकारी कई जिम्मेदारियों में उलझा जोन-3 के ईई प्रवीण शुक्ला पर एक साथ कई प्रभार हैं।वे— यह स्थिति साफ दिखाती है कि नगर निगम के लगभग हर जोन में इंजीनियरों की भारी कमी है। आने वाले महीनों में और खाली होंगे कई बड़े पद जोन क्रमांक 5 के जोन कमिश्नर प्रवेश कश्यप ने बताया— यानी आने वाले महीनों में इंजीनियरों की और कमी होने वाली है। निगम में इंजीनियरों के 50 से ज्यादा पद पहले से खाली बिलासपुर नगर निगम में अभी— निगम की मांग है कि बढ़े हुए वार्ड और एरिया के हिसाब से नया सेटअप तुरंत मंजूर किया जाए, ताकि पानी, सड़क, बिजली जैसी बुनियादी सेवाएं सुचारू रूप से चल सकें। जानिए—कितने पद खाली हैं? For more information, visit: www.deshharpal.com
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बिलासपुर: 10वीं का छात्र 12 दिनों से लापता, रेलवे स्टेशन में मिली स्कूटी—परिजन बेहाल, पुलिस पर लापरवाही का आरोप

बिलासपुर में कक्षा 10वीं का छात्र विनय नायक (17) पिछले 12 दिनों से लापता है। 15 नवंबर को वह सुबह घर से स्कूल जाने के लिए निकला था, लेकिन उसके बाद वह कभी घर नहीं लौटा। उसका मोबाइल भी उसी दिन से बंद है, जबकि उसकी स्कूटी रेलवे स्टेशन पार्किंग में खड़ी मिली। यह मामला तोरवा थाना क्षेत्र का है। बेटे के गायब होने से घबराए परिजन लगातार उसकी तलाश में भटक रहे हैं। कई दिनों तक इंतज़ार के बाद जब कोई सुराग नहीं मिला, तो वे SP ऑफिस पहुंचे और एसएसपी रजनेश सिंह से गुहार लगाई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस खोजबीन में लापरवाही कर रही है। स्कूल में उसी दिन पैरेंट्स-टीचर मीटिंग थी विनय के पिता महेश नायक, जो बारदाना खरीदी-बिक्री का काम करते हैं, बताते हैं कि 15 नवंबर को स्कूल में पैरेंट्स-टीचर मीटिंग थी। वे मीटिंग के लिए स्कूल गए थे, जबकि उनका बेटा सुबह 9 बजे स्कूल के लिए निकला था—लेकिन वह स्कूल पहुंचा ही नहीं। आखिरी बार पिता से हुई थी बात सुबह 9:45 बजे महेश ने विनय को फोन किया था, और उसी समय आखिरी बार उससे बात हुई। इसके बाद मोबाइल बंद हो गया और तब से विनय का कोई पता नहीं चला। परिवार खुद ही खोजबीन करता रहा, लेकिन कुछ सुराग हाथ नहीं लगा। रेलवे स्टेशन की पार्किंग में मिली स्कूटी तलाश करते हुए जब परिवार रेलवे स्टेशन पहुंचा, तो वहाँ विनय की स्कूटी पार्किंग में मिली। इससे आशंका है कि वह कहीं ट्रेन से गया हो, या उसे कोई बहला-फुसला कर अपने साथ ले गया हो। लेकिन उसका कोई निशान नहीं मिल पाया। परिजन बोले—पुलिस गंभीर नहीं है परिवार ने 16 नवंबर को ही घटना की सूचना पुलिस को दे दी थी, लेकिन उनका कहना है कि पुलिस पूरी गंभीरता से खोजबीन नहीं कर रही। इसी वजह से 12 दिन बीत जाने के बाद भी विनय का कोई पता नहीं चल सका। पोस्टर, सोशल मीडिया—हर जगह ढूंढ रहे हैं बेटा बेटे को खोजने के लिए परिजन पोस्टर बांट रहे हैं, सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट कर रहे हैं। 12 दिनों की बेचैनी के बाद अब परिवार को अनहोनी का डर सताने लगा है। परिजनों ने आखिरकार एसएसपी से शिकायत की है। एसएसपी रजनेश सिंह ने आश्वासन दिया है कि छात्र की तलाश के लिए हरसंभव कोशिश की जाएगी। For more information, visit: www.deshharpal.com
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वन मंत्री केदार कश्यप का कांग्रेस पर प्रहार: “दीपक बैज की लड़ाई अपनी ही पार्टी से”

छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज की असली लड़ाई पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और टी.एस. सिंहदेव से है, क्योंकि कांग्रेस के नेता अपने ही अध्यक्ष को लीडर नहीं मान रहे हैं। कश्यप ने तंज कसा कि इसी वजह से दीपक बैज को अपना कद बढ़ाने के लिए बाइक रैली निकालनी पड़ रही है। “कांग्रेस में फूट साफ दिखाई दे रही है” – कश्यप बिलासपुर में 20 नवंबर को आयोजित स्वदेशी मेले के समापन समारोह में पहुंचे मंत्री केदार कश्यप ने मीडिया से बातचीत में कहा: कश्यप ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को यह पसंद नहीं कि देश का नेतृत्व एक “चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी” के हाथ में है। इसलिए वे अराजकता फैलाने की कोशिश में लगे हैं। धान खरीदी को लेकर बड़ा दावा धान खरीदी में अव्यवस्था के कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कश्यप ने कहा— 200 यूनिट बिजली रियायत और ‘सूर्य घर योजना’ से राहत मंत्री कश्यप ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 200 यूनिट तक बिजली बिल में रियायत की घोषणा की है।इसके साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत लोग: स्वदेशी मेले में अपील – “देश को मजबूत बनाना है, तो स्वदेशी अपनाएँ” साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित 7 दिवसीय स्वदेशी मेले के समापन पर केदार कश्यप ने कहा कि: बृजमोहन अग्रवाल बोले— “गांव के उत्पाद अपनाओ, देश को ताकतवर बनाओ” सांसद व पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ी में कहा— बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने भी “स्व” के भाव के साथ आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। अचार, पापड़ से लेकर गौशाला की धूपबत्ती— स्वदेशी मेले में खूब बिकीं घरेलू चीजें सात दिन चले मेले में लोगों ने भारी उत्साह दिखाया।खास लोकप्रिय चीजें रहीं: 20 नवंबर को समापन पर भारी भीड़ और जाम ने साबित किया कि लोगों का भरोसा स्वदेशी पर लगातार बढ़ रहा है। केश सज्जा प्रतियोगिता में बच्चों और महिलाओं ने दिखाई प्रतिभा स्वदेशी मेले में गुरुवार को केश सज्जा प्रतियोगिता हुई।महिलाओं, युवतियों और मूक-बधिर बच्चों ने विभिन्न हेयर स्टाइल बनाकर अपनी प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया। सभी स्टाइल को फूलों, पिन, मोतियों और रंग-बिरंगे फीते से खूबसूरती से सजाया गया। इस कार्यक्रम में रुपसाय सलाम, लखन लाल साहू, आशीष जायसवाल, बबलू खंडेलवाल, मनोज भंडारी, गुलशन ऋषि, डॉ. देवेंद्र कौशिक सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। For More Info:www.deshharpal.com
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बिलासपुर: धान खरीदी तेज, लक्ष्य से अधिक आवक की संभावना; कस्टम मिलिंग की तैयारियाँ शुरू

बिलासपुर जिले में इस बार धान खरीदी में तेजी देखने को मिल रही है। किसानों द्वारा लगातार धान लाए जाने से अनुमान है कि लक्ष्य से अधिक धान खरीदी हो सकती है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने कस्टम मिलिंग की तैयारियाँ भी शुरू कर दी हैं। मंगलवार को कलेक्टर संजय अग्रवाल ने राइस मिलर्स की बैठक ली और जरूरी दिशा–निर्देश दिए। कलेक्टर ने पात्र राइस मिलर्स को निर्देश दिया कि वे अगले तीन दिनों के अंदर कस्टम मिलिंग के लिए पंजीयन कराएं। जिले में कुल 170 राइस मिलें हैं, जिनमें से 121 मिलें कस्टम मिलिंग के लिए पात्र हैं। राज्य शासन के अनुसार वही मिलें पंजीयन करा सकती हैं, जिन्होंने पिछले वर्ष की 70% या उससे अधिक चावल जमा कर दिया है। पिछले साल का बकाया चावल जल्द जमा करने के निर्देश बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिया कि पिछले वर्ष का करीब 13 हजार मीट्रिक टन बकाया चावल इस महीने के अंत तक जमा किया जाए।इसके अलावा एफसीआई से मिले स्टेक को भी 15 दिनों के भीतर पूरा करने की बात कही गई। खरीदी केंद्रों में धान जमा, मिलर्स को जल्द उठाव करने के निर्देश कलेक्टर ने बताया कि जिले में धान खरीदी शुरू हो चुकी है और फड़ों में धान तेजी से जमा हो रहा है। इसलिए मिलर्स को निर्देश दिए गए कि वे इस धान को जल्द से जल्द उठाकर कस्टम मिलिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाएं। उन्होंने राइस मिलर्स को धान खरीदी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। समस्याओं के समाधान का आश्वासन कलेक्टर ने मिलर्स से कहा कि वे शासन के नियमों के अनुसार समय सीमा में अपना काम पूरा करें। बैठक में मिलर्स की समस्याएँ भी सुनी गईं और उनके समाधान का आश्वासन दिया गया।इस बैठक में खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर, डीएमओ अमित चंद्राकर, राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित अग्रवाल सहित कई राइस मिलर्स उपस्थित रहे। More updates and latest agriculture news on:www.deshharpal.com
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गृहमंत्री अमित शाह ने दी थी Hidma को खत्म करने की डेडलाइन, 12 दिन पहले ही ढेर

गृहमंत्री अमित शाह ने दी थी Hidma को खत्म करने की डेडलाइन, 12 दिन पहले ही ढेर

भारत सरकार की कड़ी कार्रवाई और मजबूत इंटेलिजेंस ऑपरेशन के बाद देश के सबसे खतरनाक नक्सली कमांडर Hidma को आखिरकार सुरक्षा बलों ने मार गिराया। कहा जाता है कि गृहमंत्री अमित शाह ने हिड़मा को खत्म करने की एक समयसीमा (Deadline) तय की थी, और उससे 12 दिन पहले ही यह बड़ी सफलता मिल गई। हिड़मा वही नाम है, जिसके नाम से जंगल का बच्चा-बच्चा डरता था। वह 2010 में दांतेवाड़ा में हुए हमले का मुख्य आरोपी था, जिसमें 76 CRPF जवान शहीद हो गए थे। इस हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था और सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हुए थे। यही वजह थी कि हिड़मा नक्सली दुनिया का सबसे वांछित चेहरा बन गया। सरकार, सुरक्षा एजेंसियां और स्पेशल फोर्सेज लगातार हिड़मा का पीछा कर रही थीं। कई सालों तक वह घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और स्थानीय नेटवर्क की मदद से बचता रहा। लेकिन इस बार केंद्रीय एजेंसियों ने सटीक जानकारी जुटाई और संयुक्त ऑपरेशन में उसे ढेर कर दिया। इस सफलता के बाद सुरक्षा बलों का मनोबल और भी मजबूत हुआ है और नक्सल समस्या पर एक ऐतिहासिक प्रहार माना जा रहा है। अब सरकार का लक्ष्य बचे हुए नेटवर्क को भी पूरी तरह खत्म करना है ताकि बस्तर, छत्तीसगढ़ और आस-पास के इलाकों में शांति और विकास का रास्ता तेज हो सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

छत्तीसगढ़ में पहली बार देशभर के डीजीपी-आईजीपी का सबसे बड़ा सम्मेलन, नवा रायपुर में होगी रणनीति तय

छत्तीसगढ़ में पहली बार देशभर के पुलिस महानिदेशक (DGP) और महानिरीक्षक (IGP) का सबसे बड़ा मंच आयोजित होने जा रहा है। 28 से 30 नवंबर तक नवा रायपुर स्थित IIM परिसर में 60वां अखिल भारतीय DGP-IGP सम्मेलन होगा। यह राज्य के लिए बेहद गर्व का मौका माना जा रहा है। तीन दिन चलेगा मंथन, शाह और मोदी रहेंगे मौजूद सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हिस्सा लेंगे, जबकि समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहेंगे। छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय मिश्रा ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। इन अहम मुद्दों पर होगी चर्चा इस राष्ट्रीय स्तर की बैठक में आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी— इस बार खास फोकस नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, विशेषकर बस्तर पर रहेगा। हाल के महीनों में राज्य पुलिस और केंद्रीय बलों की संयुक्त कार्रवाई ने कई बड़ी सफलताएं दी हैं। इसी “बस्तर मॉडल” को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने पर भी बात होगी। बस्तर मॉडल को और मजबूत करने पर जोर अधिकारियों के अनुसार, हाल ही के ऑपरेशनों में सफल होने के पीछे बेहतर ग्राउंड इंटेलिजेंस, आधुनिक हथियार और संयुक्त ऑपरेशन मुख्य वजह रहे हैं। सम्मेलन में आगे की रणनीति का ब्लूप्रिंट तैयार किए जाने की संभावना है। भुवनेश्वर के बाद अब छत्तीसगढ़ को मिली मेजबानी साल 2024 में यह सम्मेलन भुवनेश्वर में हुआ था। इस बार पहली बार इसकी मेजबानी छत्तीसगढ़ कर रहा है, जो राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। एक महीने में पीएम का दूसरा दौरा प्रधानमंत्री मोदी नवंबर में दूसरी बार छत्तीसगढ़ आएंगे। इससे पहले 1 नवंबर को वे राज्य स्थापना दिवस के कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। अब वे 28-30 नवंबर को होने वाले इस बड़े सुरक्षा सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे नवा रायपुर में बनेगा अस्थायी पीएमओ सम्मेलन के दौरान नवा रायपुर में बंगला M-01 को अस्थायी मिनी PMO में बदल दिया जाएगा। यह बंगला विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का आवास है। 500 से ज्यादा शीर्ष अधिकारी होंगे शामिल इस बड़े आयोजन में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, NSA अजित डोभाल, 70 DG, पैरामिलिट्री चीफ और कुल 500 शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। सुरक्षा के लिए NSG कमांडो तैनात किए जाएंगे और VVVIP मूवमेंट के लिए 400 वाहनों का बेड़ा तैयार रहेगा। छत्तीसगढ़ में होने वाला यह सम्मेलन न सिर्फ सुरक्षा रणनीतियों को मजबूत करेगा, बल्कि राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी देगा। और खबरों के लिए विजिट करें –www.deshharpal.com
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SIR

Delhi SIR Protest: बंगला साहिब के पास प्रदर्शन, ‘ज्ञानेश कुमार गद्दी छोड़ो’ के नारे

दिल्ली में SIR (Special Intensive Revision) को लेकर विरोध तेज होता नजर आ रहा है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास प्रदर्शनकारियों ने जुटकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने ‘ज्ञानेश कुमार गद्दी छोड़ो’ के नारे लगाते हुए चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने का ऐलान किया। इसे देखते हुए पुलिस ने इलाके में बैरिकेडिंग की और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। इस प्रदर्शन के केंद्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया है। आंदोलन से जुड़े संगठन इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं और चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। Delhi Protest: बंगला साहिब के पास जुटे प्रदर्शनकारी SIR के विरोध में विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने दिल्ली में प्रदर्शन का आह्वान किया। प्रदर्शनकारियों के जुटने के लिए बंगला साहिब गुरुद्वारे के आसपास, गोल डाकखाना और गोल मार्केट जैसे स्थानों का जिक्र किया गया। आंदोलन से जुड़े लोगों ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च निकालने की योजना बनाई। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय ध्वज के साथ मार्च निकालने और अपनी मांगें उठाने की बात कही। आयोजकों की योजना के मुताबिक, मार्च रोके जाने की स्थिति में शांतिपूर्ण सभा करने का विकल्प भी रखा गया था। SIR Controversy: आखिर क्यों हो रहा है विरोध? SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विशेष जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज जानकारी का सत्यापन करना और सूची को अपडेट करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर कई संगठनों ने चिंता जताई है। प्रदर्शन कर रहे संगठनों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटने का खतरा है। उनका कहना है कि किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। आंदोलन से जुड़े कुछ संगठनों ने मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए 13.41 करोड़ लोगों के नाम और मतदान अधिकार बहाल करने की मांग उठाई है। यह आंकड़ा संगठनों का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। Election Commission से प्रदर्शनकारियों की क्या मांगें हैं? SIR के विरोध में उतरे संगठनों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं: इन मांगों के जरिए प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग पर दबाव बनाना चाहते हैं। हालांकि, इन मांगों पर आयोग की ओर से किसी नए आधिकारिक फैसले या प्रतिक्रिया की पुष्टि होने पर ही स्थिति स्पष्ट होगी। Delhi Police Alert: बैरिकेडिंग और Traffic Advisory प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने संबंधित इलाकों में बैरिकेडिंग की और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। चुनाव आयोग की ओर जाने वाले रास्तों पर भीड़ और यातायात की स्थिति को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई। यातायात प्रतिबंधों या रूट डायवर्जन के कारण आम लोगों को परेशानी हो सकती है। ऐसे में इन इलाकों से गुजरने वाले लोगों को निकलने से पहले दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ताजा एडवाइजरी देखनी चाहिए और अतिरिक्त समय लेकर यात्रा करनी चाहिए। पहले भी उठ चुका है SIR का मुद्दा SIR को लेकर दिल्ली में पहले भी विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली है। आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं, SIR के उद्देश्य और इसके क्रियान्वयन को लेकर जारी बहस में मतदाता सूची की शुद्धता, नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग की जवाबदेही जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। आगे क्या होगा? दिल्ली में इस प्रदर्शन के बाद अब सबकी नजर चुनाव आयोग तक मार्च की स्थिति और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर होने वाली प्रतिक्रिया पर है। पुलिस की ओर से मार्च को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं और चुनाव आयोग इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान देता है या नहीं, यह आगे महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल, प्रदर्शनकारियों ने SIR के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया के साथ पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Tiger Shroff

Tiger Shroff Firing Case: कोटा में पकड़े गए 3 आरोपी, ट्रेन के General Coach में पुलिस का ऑपरेशन

मुंबई में बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff) की कार पर फायरिंग की घटना ने सभी को चौंका दिया था। वारदात के बाद आरोपी शहर से निकल गए, लेकिन पुलिस की जांच और लगातार मिल रहे इनपुट के चलते उनकी फरारी ज्यादा लंबी नहीं चल सकी। राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने ट्रेन के जनरल कोच से तीनों आरोपियों को पकड़ लिया। इस पूरे ऑपरेशन में करीब 15 से 20 मिनट लगे। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों को पकड़ने के लिए मुंबई पुलिस से मिली जानकारी, तकनीकी इनपुट और स्थानीय पुलिस की टीमों ने अहम भूमिका निभाई। अब मुंबई पुलिस इस मामले में हमले की वजह और कथित साजिश की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। Tiger Shroff Firing Case: क्या है पूरा मामला? 18 अक्टूबर 2026 की शाम मुंबई के जुहू इलाके में Tiger Shroff की कार पर फायरिंग की घटना सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, बाइक पर सवार हमलावरों ने कार को निशाना बनाते हुए कई राउंड फायर किए। इस घटना में टाइगर श्रॉफ सुरक्षित रहे, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति को चोटें आईं। घटना के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। मौके से मिले सुराग, आसपास के CCTV फुटेज और संदिग्धों की आवाजाही की जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। पुलिस यह पता लगाने में जुटी कि हमले की योजना किसने बनाई और इसमें किन लोगों की भूमिका थी। मुंबई से सूरत होते हुए कोटा पहुंचे आरोपी जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि घटना के बाद आरोपी मुंबई से बाहर निकल गए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, वे सूरत पहुंचे और फिर ट्रेन से जयपुर की ओर जा रहे थे। पुलिस को शक था कि उनका अगला पड़ाव दिल्ली हो सकता है और वहां से वे नेपाल जाने की कोशिश कर सकते हैं। मुंबई पुलिस से मिले इनपुट के बाद कोटा पुलिस ने रेलवे स्टेशन पर तलाश शुरू की। पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस के जनरल कोच में संदिग्धों की पहचान की गई। इसके बाद अलग-अलग टीमों ने मिलकर कार्रवाई की और तीनों को हिरासत में ले लिया। 15 मिनट में पूरा हुआ Kota Police का ऑपरेशन कोटा पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम के मुताबिक, इस कार्रवाई में स्थानीय पुलिस, साइबर सेल और रेलवे से जुड़ी टीमों ने मिलकर काम किया। पुलिस ने ट्रेन और स्टेशन परिसर में तलाश की। करीब 15 से 20 मिनट के भीतर तीनों संदिग्धों को पकड़ लिया गया। इस कार्रवाई की खास बात यह रही कि पुलिस को मुंबई से मिली जानकारी के आधार पर सीमित समय में संदिग्धों तक पहुंचना था। गिरफ्तारी के बाद तीनों को मुंबई पुलिस के हवाले कर दिया गया, जहां उनसे पूछताछ की गई। कौन हैं Tiger Shroff Firing Case के तीन आरोपी? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रेहान उर्फ सुक्का, ऋतिक कुर्मी उर्फ रोशन और फूल सिंह के रूप में हुई है। पुलिस इन तीनों की कथित भूमिका, आपसी संपर्क और घटना से जुड़े अन्य लोगों के बारे में पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियों को यह भी पता लगाना है कि हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार कहां से आए और घटना के पीछे क्या मकसद था। पुलिस ने अदालत में हथियार बरामद करने और कथित साजिश की जांच के लिए आरोपियों की हिरासत मांगी थी। Latest Update: 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत 21 अक्टूबर 2026 को मुंबई की अदालत ने तीनों आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के जरिए हमले की वजह, हथियारों की बरामदगी और दूसरे संदिग्धों की भूमिका का पता लगाया जाएगा। जांच में कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस कथित तौर पर हथियारों की सप्लाई और आरोपियों के संपर्कों की कड़ियां जोड़ रही है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है। अब पुलिस किन सवालों के जवाब तलाश रही है? टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। हमले की साजिश किसने रची, आरोपियों को किसने मदद दी और घटना के पीछे असली मकसद क्या था—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। कोटा रेलवे स्टेशन पर हुई गिरफ्तारी ने जांच को आगे बढ़ाने में मदद की है। अब मुंबई पुलिस की पूछताछ और आगे मिलने वाले सबूतों से इस मामले की बाकी कड़ियां स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Global Protest

Global Protest Network: फ्रांस से भारत तक प्रदर्शनों की चर्चा, 101 संगठनों पर रिपोर्ट

फ्रांस में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी मीडिया संस्थान Fox News Digital की एक रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक संगठनों के बीच संपर्कों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। 20 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 13 देशों में फैले 101 संगठन प्रदर्शनों को आयोजित करने, उनके बीच तालमेल बनाने और उनके संदेशों को लोगों तक पहुंचाने में सक्रिय हैं। रिपोर्ट में भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद भारत में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी से अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ कथित संपर्कों को लेकर सवाल पूछे हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। हालांकि, रिपोर्ट में बताए गए संपर्कों और भारत में प्रदर्शनों को किसी विदेशी नेटवर्क द्वारा सीधे संचालित किए जाने के दावे के बीच अंतर समझना जरूरी है। Fox News Report: 101 संगठनों के Network में कौन-कौन शामिल? पत्रकार Asra Q. Nomani की रिपोर्ट का शीर्षक है, Global ‘Chaos Inc’ grows to 101 groups with plans for new rounds of demonstrations। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में पहले 54 संगठनों की पहचान की गई थी, जिनकी संख्या बढ़कर 101 हो गई। ये संगठन 13 देशों में फैले बताए गए हैं। रिपोर्ट में छात्र और युवा समूहों, श्रमिक संगठनों, समाजवादी तथा कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़े समूहों और सामाजिक अभियानों का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि 33 संगठनों का नेतृत्व छात्र या युवा करते हैं। Fox News ने इस नेटवर्क को ‘Red-Green Alliance’ नाम दिया है। रिपोर्ट में ‘Red’ का इस्तेमाल वामपंथी, समाजवादी और कम्युनिस्ट समूहों के लिए, जबकि ‘Green’ का इस्तेमाल इस्लामी संगठनों के संदर्भ में किया गया है। यह रिपोर्ट में इस्तेमाल किया गया वर्गीकरण है। इससे यह अपने आप साबित नहीं होता कि सभी संगठन एक ही नेतृत्व के तहत काम करते हैं। जांच में मुख्य रूप से तीन तरह की गतिविधियों पर ध्यान दिया गया है—प्रदर्शन आयोजित करना, अलग-अलग आंदोलनों के बीच तालमेल बनाना और सोशल मीडिया व मीडिया कवरेज के जरिए उनके संदेशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना। India Protest: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले प्रदर्शनों का जिक्र Fox News की रिपोर्ट में भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों को भी शामिल किया गया है। ये प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों के बीच हुए थे। रिपोर्ट में भारत के साथ फ्रांस, स्पेन और अल्बानिया में चल रहे आंदोलनों का भी उल्लेख है। इसके जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठन अलग-अलग देशों में होने वाले विरोध-प्रदर्शनों को एक साझा राजनीतिक विमर्श से जोड़ रहे हैं। यहां सवाल उठता है कि क्या ये संगठन केवल एक-दूसरे के आंदोलनों का समर्थन कर रहे हैं या उनके आयोजन और रणनीति में भी उनकी भूमिका है? इसका जवाब देने के लिए ठोस साक्ष्यों की जरूरत है। किसी प्रदर्शन के समर्थन में बयान देना, सोशल मीडिया पर उसका प्रचार करना और प्रदर्शनकारियों को निर्देश देकर आंदोलन चलाना अलग-अलग बातें हैं। भारत में हुए प्रदर्शनों को विदेशी संगठन द्वारा सीधे संचालित किए जाने की पुष्टि के लिए स्वतंत्र प्रमाण आवश्यक होंगे। Progressive International का नाम क्यों आया? Fox News की रिपोर्ट में Progressive International का खास तौर पर उल्लेख किया गया है। यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका घोषित उद्देश्य दुनिया भर की प्रगतिशील राजनीतिक शक्तियों और सामाजिक आंदोलनों के बीच सहयोग बढ़ाना है। रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने 16 अक्टूबर 2026 की अपनी ब्रीफिंग में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में चल रहे आंदोलनों का एक साथ जिक्र किया था। इसमें इन आंदोलनों के बीच संपर्क बढ़ाने और उन्हें संगठित राजनीतिक शक्ति में बदलने से जुड़े विचार भी सामने आए। Fox News ने इसे अलग-अलग देशों में चल रहे प्रदर्शनों के बीच संभावित राजनीतिक समन्वय के उदाहरण के रूप में पेश किया है। हालांकि, किसी आंदोलन को समर्थन देना और उसके आयोजन को नियंत्रित करना एक जैसी गतिविधियां नहीं हैं। इसलिए Progressive International का नाम रिपोर्ट में आने को भारत में प्रदर्शनों के प्रत्यक्ष संचालन का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। Rahul Gandhi-Sonia Gandhi की मुलाकात पर BJP ने उठाए सवाल Progressive International को लेकर चर्चा के बीच कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी की संगठन के प्रतिनिधिमंडल से हुई मुलाकात भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। अप्रैल 2025 में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नई दिल्ली स्थित 10 जनपथ आवास पर Progressive International के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। उस समय विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई थी। अब भाजपा इसी मुलाकात का हवाला देकर कांग्रेस से सवाल पूछ रही है कि संगठन के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत में किन मुद्दों पर चर्चा हुई थी और क्या भारत में हुए प्रदर्शनों के साथ कोई समन्वय किया गया था। हालांकि, मुलाकात का होना और उसके आधार पर प्रदर्शनों के आयोजन में कथित भूमिका का आरोप लगाना दो अलग बातें हैं। सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी से यह साबित नहीं होता कि बैठक में भारत में विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने या किसी सरकार को बदलने की योजना बनाई गई थी। BJP vs Congress: आरोप-प्रत्यारोप से गरमाई राजनीति Fox News की रिपोर्ट सामने आने के बाद भाजपा ने 22 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए अंतरराष्ट्रीय संगठनों और भारत के प्रदर्शनों के बीच कथित संबंधों को लेकर आरोप लगाए। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी Progressive International और अलग-अलग देशों के आंदोलनों के बीच साझा संदेशों का मुद्दा उठाया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से पूछा कि संगठन के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में क्या बातचीत हुई थी और क्या भारत में हुए प्रदर्शनों के दौरान किसी तरह का समन्वय किया गया था। कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बताते हुए कहा कि भाजपा कथित वोट चोरी से जुड़े सवालों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। इस विवाद में भाजपा...
Jantar Mantar

Jantar Mantar Case: जमानत के बाद भी CJP नेताओं की मुश्किलें बरकरार, फिर बुलाएगी पुलिस

Jantar Mantar पर प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस एक बार फिर पूछताछ के लिए बुला सकती है। दोनों नेता पिछले नोटिस पर क्राइम ब्रांच के सामने पेश नहीं हुए थे और उन्होंने इसके लिए अतिरिक्त समय मांगा था। अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर है। यह मामला 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। CJP के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करना चाहते थे। पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच विवाद की स्थिति बनी। पिछले Notice पर पेश नहीं हुए CJP नेता मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पूछताछ के लिए बुलाया था। उन्हें राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में उपस्थित होना था। हालांकि, सौरव और आशुतोष तय समय पर नहीं पहुंचे और उन्होंने पुलिस से कुछ अतिरिक्त समय मांगा। अब पुलिस उन्हें दोबारा नोटिस जारी कर जांच में शामिल होने के लिए कह सकती है। जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम को लेकर पुलिस पहले ही मामले दर्ज कर चुकी है। जांच एजेंसी प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और लगाए गए आरोपों की पड़ताल कर रही है। Jantar Mantar Protest से कैसे शुरू हुआ विवाद? 13 अक्टूबर को CJP के नेताओं और समर्थकों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश की थी। उनकी प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा था। पार्टी का आरोप था कि SIR प्रक्रिया के कारण मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश की और कुछ लोगों ने बैरिकेडिंग पार की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इस घटना के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ भी कार्रवाई हुई। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर नियमों के उल्लंघन और पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने से जुड़े आरोपों की जांच शुरू की। इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है। सात दिन बाद Jail से मिली थी राहत सौरव दास और आशुतोष रांका करीब सात दिन न्यायिक हिरासत में रहने के बाद 21 अक्टूबर को जेल से बाहर आए थे। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ राहत दी थी। दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा, उन्हें शांति बनाए रखने और अदालत की शर्तों का पालन करने का आश्वासन देना पड़ा। दोनों ने यह भी भरोसा दिया था कि जंतर-मंतर को दोबारा अधिकृत प्रदर्शन स्थल घोषित किए जाने तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। भविष्य में विरोध प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में करने की बात भी कही गई थी। हालांकि, जेल से रिहाई का मतलब यह नहीं है कि मामले की जांच खत्म हो गई है। पुलिस अपनी जांच के लिए दोनों नेताओं को पूछताछ में शामिल होने के लिए बुला सकती है। दो FIR के बाद Crime Branch कर रही जांच जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम को लेकर दिल्ली के कनॉट प्लेस और संसद मार्ग थानों में दो FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें सरकारी आदेश की अवहेलना, कथित अनधिकृत प्रवेश और पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल बताए गए हैं। बाद में दोनों मामलों की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। अब जांच एजेंसी घटना से जुड़े तथ्यों और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। CJP के एक अन्य सदस्य अजिंक्य शिंदे को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था। ऐसे में जांच का दायरा केवल दो नेताओं तक सीमित नहीं है। पुलिस आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर करेगी। अब आगे क्या होगा? फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि सौरव दास और आशुतोष रांका पुलिस के अगले नोटिस पर कब पेश होते हैं। पूछताछ के दौरान पुलिस प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम, प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश के आरोपों और दर्ज FIR से संबंधित सवाल पूछ सकती है। दूसरी ओर, CJP मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी मांगें उठा रही है। ऐसे में यह मामला राजनीतिक विरोध, प्रदर्शन की अनुमति और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों के बीच चर्चा में बना हुआ है। अब सबकी नजर दिल्ली पुलिस की अगली कार्रवाई और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर है। फिलहाल, दोनों नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Jio Platforms IPO

Jio Platforms IPO: तीसरे दिन 6 गुना पार Subscription, QIBs ने लगाई ताबड़तोड़ बोली

मुकेश अंबानी की कंपनी Jio Platforms के IPO को लेकर शेयर बाजार में काफी चर्चा है। इश्यू के तीसरे दिन निवेशकों ने जमकर बोली लगाई और सब्सक्रिप्शन का आंकड़ा 6 गुना के पार पहुंच गया। सबसे ज्यादा उत्साह बड़े संस्थागत निवेशकों (QIBs) में देखने को मिला, जिन्होंने अपनी कैटेगरी में 13 गुना से ज्यादा बोली लगाई। अब निवेशकों की नजर IPO के अलॉटमेंट और शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग पर है। Jio Platforms IPO को निवेशकों का शानदार रिस्पॉन्स Jio Platforms का करीब 30,213 करोड़ रुपये का IPO 21 अक्टूबर 2026 को खुला था। इसमें निवेश करने का आखिरी मौका 23 अक्टूबर को है। शुरुआती दो दिनों से ही इस इश्यू को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा था। तीसरे दिन सुबह 9:20 बजे तक IPO का सब्सक्रिप्शन 5.72 गुना पहुंच चुका था और कारोबार आगे बढ़ने के साथ इसमें और तेजी देखने को मिली। IPO में इतनी मजबूत मांग ने इसे शेयर बाजार की प्रमुख चर्चाओं में शामिल कर दिया है। हालांकि, अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़े और शुरुआती कारोबारी आंकड़ों में अंतर हो सकता है। QIBs ने 13 गुना से ज्यादा लगाई बोली इस IPO में सबसे ज्यादा दिलचस्पी Qualified Institutional Buyers यानी QIBs ने दिखाई। इस श्रेणी में बड़े संस्थागत निवेशक शामिल होते हैं, जैसे म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थान। दूसरे दिन के अंत तक QIB कैटेगरी 13.29 गुना सब्सक्राइब हो चुकी थी। वहीं, गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) की ओर से भी अच्छी मांग आई। रिटेल निवेशकों ने भी इश्यू में भागीदारी दिखाई। संस्थागत निवेशकों की मजबूत बोली से IPO को लेकर बाजार का उत्साह साफ नजर आता है। हालांकि, ज्यादा सब्सक्रिप्शन का मतलब यह नहीं है कि शेयर की लिस्टिंग पर निश्चित रूप से मुनाफा होगा। भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल Jio Platforms का इश्यू Jio Platforms का करीब 30,213 करोड़ रुपये का सार्वजनिक निर्गम आकार के लिहाज से भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल है। इससे पहले Hyundai Motor India का करीब 27,859 करोड़ रुपये का IPO देश का सबसे बड़ा इश्यू था। Platforms का कारोबार टेलीकॉम और डिजिटल सेवाओं से जुड़ा है। कंपनी मोबाइल कनेक्टिविटी, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बड़ी संख्या में ग्राहकों तक पहुंच रखती है। डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल और कंपनी की बाजार में मौजूदगी के कारण इस IPO पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। Jio Platforms IPO का Price Band और जरूरी तारीखें निवेशकों के लिए IPO से जुड़ी जरूरी जानकारी यहां दी गई है: अलॉटमेंट और लिस्टिंग की तारीखों में बदलाव संभव है। निवेशकों को अंतिम जानकारी के लिए कंपनी और स्टॉक एक्सचेंज की आधिकारिक घोषणाएं देखनी चाहिए। GMP पर भी निवेशकों की नजर IPO में मजबूत सब्सक्रिप्शन के बीच ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) को लेकर भी निवेशकों की दिलचस्पी रहती है। GMP से बाजार में शेयर की संभावित लिस्टिंग कीमत को लेकर एक संकेत मिल सकता है, लेकिन यह आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। लिस्टिंग के दिन शेयर किस भाव पर खुलेगा, यह बाजार की स्थिति, निवेशकों की मांग और कंपनी के मूल्यांकन समेत कई बातों पर निर्भर करेगा। इसलिए सिर्फ GMP देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। क्या Jio Platforms IPO में निवेश करना सही रहेगा? IPO को मिल रहा शानदार रिस्पॉन्स निश्चित रूप से चर्चा का विषय है, लेकिन निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं और शेयर के मूल्यांकन को समझना जरूरी है। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि IPO में आवेदन करने से शेयर अलॉट होने की गारंटी नहीं होती। इसी तरह, शेयर अलॉट होने के बाद लिस्टिंग पर फायदा होगा या नुकसान, यह पहले से तय नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, Jio Platforms IPO में QIBs की मजबूत भागीदारी ने बाजार का ध्यान खींचा है। अब सबकी नजर सब्सक्रिप्शन के अंतिम आंकड़ों, शेयर अलॉटमेंट और संभावित लिस्टिंग पर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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