भारत सरकार की कड़ी कार्रवाई और मजबूत इंटेलिजेंस ऑपरेशन के बाद देश के सबसे खतरनाक नक्सली कमांडर Hidma को आखिरकार सुरक्षा बलों ने मार गिराया। कहा जाता है कि गृहमंत्री अमित शाह ने हिड़मा को खत्म करने की एक समयसीमा (Deadline) तय की थी, और उससे 12 दिन पहले ही यह बड़ी सफलता मिल गई।
हिड़मा वही नाम है, जिसके नाम से जंगल का बच्चा-बच्चा डरता था। वह 2010 में दांतेवाड़ा में हुए हमले का मुख्य आरोपी था, जिसमें 76 CRPF जवान शहीद हो गए थे। इस हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था और सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हुए थे। यही वजह थी कि हिड़मा नक्सली दुनिया का सबसे वांछित चेहरा बन गया।
सरकार, सुरक्षा एजेंसियां और स्पेशल फोर्सेज लगातार हिड़मा का पीछा कर रही थीं। कई सालों तक वह घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और स्थानीय नेटवर्क की मदद से बचता रहा। लेकिन इस बार केंद्रीय एजेंसियों ने सटीक जानकारी जुटाई और संयुक्त ऑपरेशन में उसे ढेर कर दिया।
इस सफलता के बाद सुरक्षा बलों का मनोबल और भी मजबूत हुआ है और नक्सल समस्या पर एक ऐतिहासिक प्रहार माना जा रहा है। अब सरकार का लक्ष्य बचे हुए नेटवर्क को भी पूरी तरह खत्म करना है ताकि बस्तर, छत्तीसगढ़ और आस-पास के इलाकों में शांति और विकास का रास्ता तेज हो सके।
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