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सागर के गांव में पानी के लिए त्राहिमाम: 2 किमी दूर से पानी ला रहे लोग, टंकी बनी लेकिन एक बूंद नहीं मिली

सागर जिले के ग्राम बम्होरी बीका में भीषण गर्मी के बीच जल संकट गहराता जा रहा है। गांव के लोग पीने के पानी के लिए रोज संघर्ष कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि महिलाओं को 1 से 2 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। गांव की रहने वाली वैजयंती बाई कोरी ने दर्द बयां करते हुए कहा,“गांव में पीने का पानी नहीं है। अभी तक नहाया भी नहीं है। बेटा मजदूरी पर गया है, वह आएगा तब पानी लेने जाएंगे। मैं जब से इस गांव में आई हूं, तब से पानी की परेशानी झेल रही हूं।” टंकी बनी, पाइपलाइन बिछी… लेकिन पानी नहीं गांव में नल-जल योजना के तहत करीब 2-3 साल पहले पानी की टंकी बनाई गई थी। घर-घर पाइपलाइन भी डाली गई, लेकिन आज तक लोगों को एक बूंद पानी नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि टंकी सिर्फ दिखावे के लिए खड़ी है। हालत यह है कि पानी सप्लाई शुरू होने से पहले ही कई जगह पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी है। 45 डिग्री गर्मी में बढ़ा संकट सागर जिले में इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है। लगातार बढ़ती गर्मी के कारण जलस्त्रोत सूखने लगे हैं और गांवों में पानी का संकट गहरा गया है। ग्राम बम्होरी बीका में कुल 4 हैंडपंप हैं, लेकिन उनमें भी पर्याप्त पानी नहीं निकल रहा। निजी कुओं और बोर पर निर्भर ग्रामीण ग्रामीण सूरज पांडे बताते हैं कि गांव में शुरू से ही पानी की समस्या बनी हुई है। कई परिवार निजी कुओं और बोर से पानी के कनेक्शन लेकर पैसे देकर पानी भर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अगर बिजली चली जाए, तो गांव में पानी के लिए हाहाकार मच जाता है। पानी खरीदने को मजबूर लोग गांव में जिन परिवारों के पास निजी बोर या कुआं नहीं है, वे पानी खरीदकर अपनी जरूरत पूरी कर रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द नल-जल योजना शुरू करने और गांव में स्थायी जल व्यवस्था करने की मांग की है। 👉 मध्यप्रदेश और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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ग्वालियर में दवा कारोबारियों की हड़ताल: 2200 मेडिकल स्टोर बंद, मरीजों को हुई परेशानी

ग्वालियर में बुधवार को ऑल इंडिया केमिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले दवा कारोबारियों ने सांकेतिक हड़ताल की। हड़ताल के चलते शहर के करीब 2200 रिटेल मेडिकल स्टोर और थोक दवा कारोबार पूरी तरह बंद रहे। हालांकि सरकारी और निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर इस आंदोलन से अलग रहे, जिससे अस्पतालों में भर्ती मरीजों को दवाइयों की उपलब्धता बनी रही। ऑनलाइन दवा कारोबार के विरोध में आंदोलन दवा कारोबारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री तेजी से बढ़ रही है, जिससे छोटे मेडिकल स्टोर प्रभावित हो रहे हैं। व्यापारियों का आरोप है कि बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर बाजार का संतुलन बिगाड़ रही हैं। साथ ही बिना उचित जांच के ऑनलाइन दवा सप्लाई और नकली दवाइयों की बिक्री मरीजों की सेहत के लिए खतरा बन रही है। इन्हीं मांगों को लेकर यह सांकेतिक हड़ताल की गई। उग्र आंदोलन की चेतावनी दवा कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले समय में देशव्यापी और बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि मेडिकल क्षेत्र में पारदर्शिता और मरीजों की सुरक्षा के लिए ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियम लागू किए जाने चाहिए। मेडिकल बाजारों में पसरा सन्नाटा हड़ताल का असर शहर के प्रमुख मेडिकल मार्केट में साफ दिखाई दिया। अधिकांश मेडिकल स्टोर बंद रहे, जिससे दवा लेने पहुंचे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीज और उनके परिजन जरूरी दवाइयां नहीं खरीद सके। मरीजों और परिजनों को हुई परेशानी दवा लेने पहुंचे बुजुर्ग हरिओम कश्यप ने बताया कि वह अपनी पत्नी की दवा लेने बाजार आए थे, लेकिन पूरा मेडिकल बाजार बंद मिला। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी फेफड़ों के संक्रमण से पीड़ित हैं और डॉक्टर ने नियमित दवा लेने की सलाह दी है। काफी देर तक भटकने के बाद भी उन्हें दवा नहीं मिल सकी। लोगों में नाराजगी हड़ताल के कारण आम लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। कई लोगों का कहना था कि मेडिकल सेवाएं जरूरी सेवाओं में आती हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में गंभीर मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए। वहीं दवा कारोबारियों का कहना है कि उनका आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं, बल्कि दवा कारोबार को बचाने और नकली दवाओं पर रोक लगाने के लिए है। 👉 ग्वालियर और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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इंदौर में अलग-अलग जगहों पर आगजनी: बेलमोर्ट पार्क ऑफिस, सब्जी दुकान और फर्नीचर बिल्डिंग में लगी आग

इंदौर में बुधवार सुबह अलग-अलग स्थानों पर आग लगने की घटनाओं से हड़कंप मच गया। बेलमोर्ट पार्क के ऑफिस, खंडवा रोड स्थित सब्जी दुकान और रेडिसन चौराहे के पास फर्नीचर बिल्डिंग में आग लग गई। हालांकि सभी घटनाओं में समय रहते आग पर काबू पा लिया गया और कोई जनहानि नहीं हुई। बेलमोर्ट पार्क ऑफिस में लगी आग लसूडिया क्षेत्र स्थित बेलमोर्ट पार्क के मेंटेनेंस ऑफिस में सुबह आग लग गई। यहां टाउनशिप बिल्डर का कार्यालय भी संचालित होता है। फायर ब्रिगेड के एएसआई सुशील कुमार दुबे ने बताया कि सुबह करीब 5 बजे गार्ड ने ऑफिस से धुआं निकलते देखा। आसपास मौजूद लोगों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग तेजी से फैल गई। सूचना मिलने पर दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाया गया। आग में ऑफिस का फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कई जरूरी दस्तावेज जलकर नष्ट हो गए। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। खंडवा रोड पर सब्जी दुकान जली इधर, खंडवा रोड स्थित अनुराधा नगर में एक सब्जी दुकान में भी आग लग गई। दुकान संचालक बबली पत्नी प्रीतम सिंह बताई जा रही हैं। दमकल टीम ने करीब 1000 लीटर पानी डालकर आग पर नियंत्रण पाया, लेकिन तब तक दुकान का अधिकांश सामान जल चुका था। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। फर्नीचर बिल्डिंग के सातवें माले में आग रेडिसन चौराहे के पास स्थित महिदपुर वाला फर्नीचर की बिल्डिंग के सातवें माले पर भी बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे आग लग गई। सूचना मिलने के बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कर्मचारियों की मदद से आग पर जल्द काबू पा लिया गया। हालांकि आग के कारण पूरे भवन में धुआं भर गया था, जिससे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक तौर पर यहां भी शॉर्ट सर्किट को आग लगने का कारण माना जा रहा है। घटना की सूचना पर विजयनगर थाना और खजराना थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची। 👉 इंदौर और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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BRICS

Indore BRICS सम्मेलन में Youth Empowerment और Innovation पर जोर

इंदौर में दो दिवसीय BRICS युवा उद्यमी सम्मेलन का आयोजन किया गया है, जो इस समय चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के युवा उद्यमी हिस्सा ले रहे हैं और अपने-अपने विचार व बिजनेस आइडियाज साझा कर रहे हैं। यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब BRICS को दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला एक प्रमुख वैश्विक मंच माना जाता है, और इस समय इसकी अध्यक्षता भारत कर रहा है। India under BRICS Presidency: वैश्विक भूमिका और बढ़ती जिम्मेदारी इस सम्मेलन में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में भारत BRICS मंच के जरिए न केवल सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ा रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास कर रहा है। भारत की भूमिका सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं, नवाचार और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने पर भी फोकस किया जा रहा है। Youth Empowerment: युवाओं के लिए नए अवसर सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों ने कहा कि जब युवाओं को एक साझा मंच पर लाया जाता है और उन्हें सही दिशा मिलती है, तो उसके परिणाम लंबे समय तक सकारात्मक रहते हैं। इस तरह के आयोजन युवाओं को इंटरनेशनल नेटवर्किंग, स्टार्टअप आइडियाज और बिजनेस ग्रोथ के नए अवसर प्रदान करते हैं। Future Impact: आने वाले समय के लिए अहम पहल यह दो दिवसीय BRICS युवा उद्यमी सम्मेलन न केवल युवाओं के लिए बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और भविष्य की साझेदारी के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मंच आने वाले समय में नए नेतृत्व और नई सोच को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे। India’s Vision: हर वर्ग को जोड़ने की पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि देश के हर वर्ग, खासकर युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जाए और उन्हें विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाया जाए। इसी दिशा में ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को और मजबूत करते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Actress Twisha Death Case: शरीर पर मिले कई चोटों के निशान, बहन ने लगाए गंभीर आरोप

Actress Twisha Death Case: शरीर पर मिले कई चोटों के निशान, बहन ने लगाए गंभीर आरोप

टीवी और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी Actress Twisha की मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिवार के आरोपों के बाद अब इस केस ने नया मोड़ ले लिया है। परिवार का दावा है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि संदिग्ध मौत का मामला है, जबकि पुलिस जांच कई सवालों के घेरे में आ गई है। शरीर पर मिले कई चोटों के निशान रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्विशा की डेडबॉडी पर कई चोटों के निशान पाए गए हैं। परिवार का आरोप है कि शरीर पर मौजूद कुछ निशान फांसी से मेल नहीं खाते। यही वजह है कि परिवार लगातार निष्पक्ष जांच और पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की मांग कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, पोस्टमॉर्टम के दौरान गर्दन के निशानों और अन्य चोटों को लेकर भी सवाल उठे हैं। परिवार का कहना है कि शुरुआती जांच में कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया। बहन ने लगाया CCTV के सामने ‘नाटक’ करने का आरोप ट्विशा की बहन ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि घटना के बाद कुछ लोगों ने CCTV कैमरे के सामने CPR देने का सिर्फ “नाटक” किया। उनका आरोप है कि मदद पहुंचाने में गंभीरता नहीं दिखाई गई और पूरी घटना को अलग दिशा देने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि अगर समय पर सही तरीके से मदद मिलती, तो शायद ट्विशा की जान बचाई जा सकती थी। पुलिस जांच पर उठे सवाल परिवार का आरोप है कि पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में लापरवाही हुई। कुछ अहम सबूत समय पर सुरक्षित नहीं किए गए, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। परिवार अब मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहा है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद तस्वीर और साफ होगी। इंडस्ट्री और सोशल मीडिया में चर्चा तेज ट्विशा की मौत के बाद सोशल मीडिया पर फैंस और इंडस्ट्री से जुड़े लोग लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं। कई लोगों ने इस मामले की पारदर्शी जांच की जरूरत बताई है। अभी जांच जारी फिलहाल पुलिस पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, CCTV फुटेज और कॉल रिकॉर्ड्स समेत कई तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। आधिकारिक तौर पर मौत के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।
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MP में 20 मई को Medical Stores बंद: ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में फार्मासिस्टों की हड़ताल

MP में 20 मई को Medical Stores बंद: ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में फार्मासिस्टों की हड़ताल

MP में 20 मई को Medical Stores बंद रहेंगे। ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में प्रदेशभर के फार्मासिस्ट और मेडिकल स्टोर संचालक हड़ताल पर जाएंगे। इस दौरान कई शहरों में दवा दुकानों के शटर बंद रह सकते हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। फार्मासिस्ट संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे मेडिकल स्टोर कारोबारियों पर असर पड़ रहा है। उनका आरोप है कि बिना डॉक्टर की सलाह और नियमों के पालन के ऑनलाइन दवाएं बेची जा रही हैं, जिससे मरीजों की सेहत पर भी खतरा बढ़ सकता है। संगठनों ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियम बनाए जाएं और स्थानीय मेडिकल व्यापारियों के हितों की रक्षा की जाए। हड़ताल के दौरान प्रदेश के कई जिलों में प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने की भी तैयारी की गई है। हालांकि, इमरजेंसी सेवाओं से जुड़ी कुछ दवा दुकानों को खुला रखने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि गंभीर मरीजों को परेशानी न हो। हड़ताल की खबर सामने आने के बाद लोगों ने पहले से जरूरी दवाएं खरीदना शुरू कर दिया है। खासकर बुजुर्ग मरीज और नियमित दवा लेने वाले लोग मेडिकल स्टोरों पर पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दवा बिक्री के बीच संतुलन बनाना जरूरी है, ताकि मरीजों को सुविधा भी मिले और स्थानीय व्यापार भी प्रभावित न हो। अधिक जानकारी और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें Deshharpal News हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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जबलपुर के प्रज्ञाधाम मंदिर में दो बार चोरी: CCTV में कैद हुआ चोर, लोगों में आक्रोश

जबलपुर का प्रसिद्ध प्रज्ञाधाम मंदिर इन दिनों चोरों के निशाने पर है। कुछ ही दिनों के भीतर अज्ञात चोर ने मंदिर में दो बार चोरी की वारदात को अंजाम दिया, लेकिन अब तक पुलिस आरोपी को पकड़ नहीं सकी है। CCTV में कैद हुई चोरी 5 मई की रात हुई चोरी की घटना मंदिर में लगे CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि चोर मंदिर का मुख्य दरवाजा तोड़कर अंदर घुसता है। इसके बाद वह जूते पहनकर मंदिर के भीतर पहुंचता है और भगवान भोलेनाथ पर लगा चांदी का कलश निकाल लेता है। दानपेटी भी खंगाली चोर ने मंदिर में रखी दानपेटी को भी खंगाला और उसमें मिले कुछ रुपए लेकर फरार हो गया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर पुलिस को गंभीर कदम उठाने चाहिए। लोगों ने की आरोपी की गिरफ्तारी की मांग स्थानीय नागरिकों ने कटंगी थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कर जल्द आरोपी को पकड़ने और चोरी गया सामान बरामद करने की मांग की है। पुलिस का कहना है कि CCTV फुटेज के आधार पर आरोपी की तलाश की जा रही है। 👉 जबलपुर और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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ग्वालियर में खाना नहीं देने पर होटल संचालक पर फायरिंग: बदमाशों ने की तोड़फोड़, CCTV में कैद वारदात

ग्वालियर में देर रात खाना नहीं मिलने पर बदमाशों ने होटल संचालक पर फायरिंग कर दी। गोली चलाने के बाद आरोपियों ने होटल में जमकर तोड़फोड़ भी की। पूरी घटना CCTV कैमरों में कैद हो गई है। यह मामला हजीरा चौराहे स्थित करिश्मा होटल का है। होटल बंद होने की बात पर भड़के युवक होटल संचालक सोनू सिंह के मुताबिक, रात करीब डेढ़ बजे वह होटल बंद करने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान स्कूटी सवार कुछ युवक वहां पहुंचे और खाना मांगने लगे। जब उन्हें बताया गया कि होटल बंद हो चुका है और अब खाना नहीं मिल पाएगा, तो आरोपी गाली-गलौज करने लगे। कट्टा निकालकर चला दी गोली प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद बढ़ने पर करण नाम के युवक ने कमर से कट्टा निकाला और होटल संचालक सोनू सिंह पर फायरिंग कर दी। गोली चलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सोनू सिंह ने समय रहते खुद को बचा लिया, जिससे गोली उन्हें नहीं लगी और उनकी जान बच गई। होटल में की जमकर तोड़फोड़ फायरिंग के बाद भी बदमाश नहीं रुके। आरोपियों ने होटल के काउंटर पर तोड़फोड़ की और अंदर रखा सामान इधर-उधर फेंक दिया। कुर्सियां और अन्य सामान भी क्षतिग्रस्त कर दिए गए। काफी देर तक होटल में हंगामा चलता रहा। CCTV में कैद हुई पूरी वारदात घटना की सूचना मिलते ही हजीरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुके थे। पुलिस ने होटल और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में स्कूटी सवार युवक होटल के सामने रुकते और वारदात को अंजाम देते दिखाई दे रहे हैं। मुख्य आरोपी की पहचान थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि मुख्य आरोपी करण बाथम की पहचान कर ली गई है। अन्य आरोपियों की पहचान CCTV फुटेज के आधार पर की जा रही है। पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं और आरोपियों की तलाश जारी है। 👉 ग्वालियर और देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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MP में फिजूलखर्ची पर सख्त हुए CM MOHAN YADAV, निगम-बोर्ड अध्यक्षों को दिया सादगी और अनुशासन का संदेश

MP में फिजूलखर्ची पर सख्त हुए CM MOHAN YADAV, निगम-बोर्ड अध्यक्षों को दिया सादगी और अनुशासन का संदेश

CM Mohan Yadav ने मध्य प्रदेश के निगम, बोर्ड और मंडल अध्यक्षों को साफ संदेश दिया है कि सरकारी कामकाज में फिजूलखर्ची बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने सभी पदाधिकारियों से सादगी, अनुशासन और सेवा भावना के साथ काम करने की अपील की है। भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सीएम मोहन यादव ने कहा कि जनता के पैसे का सही इस्तेमाल होना चाहिए और अनावश्यक खर्चों पर कड़ा नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने कहा कि पद प्रतिष्ठा दिखाने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की सेवा का जिम्मा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सभी अध्यक्ष और पदाधिकारी आत्मानुशासन अपनाएं और सरकारी संसाधनों का उपयोग जिम्मेदारी से करें। हाल के दिनों में प्रदेश में VIP कल्चर और बड़ी वाहन रैलियों को लेकर सरकार पहले ही सख्त रुख दिखा चुकी है। सरकार का मानना है कि सादगीपूर्ण कार्यशैली से जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाता है और प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ती है। यही वजह है कि अब निगम, मंडल और बोर्डों में भी खर्चों की समीक्षा और जवाबदेही पर जोर दिया जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव की “सख्त प्रशासन और अनुशासन” वाली कार्यशैली के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार चाहती है कि जनता से जुड़े सभी संस्थानों में दिखावे की राजनीति के बजाय विकास और जनसेवा को प्राथमिकता मिले। मध्य प्रदेश में हाल ही में कई निगम और मंडलों में नई नियुक्तियां हुई हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह संदेश नए पदाधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि सरकार सादगी और जवाबदेही के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करेगी। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें Deshharpal News Portal हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gwalior Fire News: फोम गोदाम में भीषण आग, तपिश से जिम की मशीनें पिघलीं

Gwalior Fire News: फोम गोदाम में भीषण आग, तपिश से जिम की मशीनें पिघलीं

Gwalior में फोम के एक गोदाम में भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी भयावह थी कि उसकी तेज तपिश से पास स्थित जिम की मशीनें तक पिघल गईं। घटना के बाद आसपास के लोगों में दहशत फैल गई और इलाके में धुएं का गुबार छा गया। जानकारी के मुताबिक, आग अचानक गोदाम में लगी और देखते ही देखते उसने विकराल रूप ले लिया। गोदाम में बड़ी मात्रा में फोम रखा होने के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंचीं करीब 15 फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग की गर्मी इतनी ज्यादा थी कि बगल में मौजूद जिम की कई मशीनें खराब हो गईं और कुछ मशीनों के हिस्से पिघल गए। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, हालांकि आग लगने की असली वजह का पता लगाने के लिए जांच जारी है। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित कराया। वहीं गोदाम मालिक को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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