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भोपाल में युवा मोर्चा की नई कार्यकारिणी घोषित, ऋषभ विश्वकर्मा बने अध्यक्ष

भोपाल में युवा नेतृत्व को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए युवा मोर्चा की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने भवानी चौक, सोमवारा निवासी ऋषभ विश्वकर्मा को युवा मोर्चा का अध्यक्ष नियुक्त किया। इसके साथ ही संगठन के विभिन्न पदों पर पदाधिकारियों और कार्यकारिणी सदस्यों की घोषणा भी की गई। युवाओं को संगठन से जोड़ना होगा मुख्य उद्देश्य समिति अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि युवा मोर्चा का उद्देश्य शहर के अधिक से अधिक युवाओं को संगठन से जोड़ना, सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाना तथा हिंदू समाज की संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्य करना है। उन्होंने कहा कि संगठन सामाजिक मुद्दों पर भी युवाओं के माध्यम से जनजागरण अभियान चलाएगा और समाजहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएगा। नई कार्यकारिणी में कई पदों पर नियुक्तियां युवा मोर्चा अध्यक्ष ऋषभ विश्वकर्मा ने नई कार्यकारिणी का गठन करते हुए 15 उपाध्यक्ष, 2 महामंत्री, 5 मंत्री, कार्यालय मंत्री, सह कार्यालय मंत्री, कोषाध्यक्ष, मीडिया प्रभारी तथा कार्यकारिणी सदस्यों की नियुक्ति की। उन्होंने बताया कि सभी पदाधिकारियों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि भोपाल के विभिन्न हिस्सों में संगठन की गतिविधियों का प्रभावी संचालन किया जा सके। प्रमुख नियुक्तियां उपाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी संगठन ने अभिषेक परमार, राहुल मारण, अलंकार शर्मा, अमित त्रिपाठी, प्रतीक जैन, अमित वर्मा, जयदीप ठाकुर, सुरेश साहू, नीतेश लोधी, राहुल डाबी, साहित्य साहू, अमित गुप्ता, उदय श्रीवास्तव, प्रभात सोनी और दीपक खेमानी सहित अन्य पदाधिकारियों को उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके अलावा दीपक साहू, गर्व सक्सेना, दीपक सिंह परमार, संजू दांगी, नितिन बमन और बबलू बरार को मंत्री तथा राहुल सक्सेना को कार्यकारिणी सदस्य की जिम्मेदारी सौंपी गई। संगठन ने विश्वास जताया है कि नई कार्यकारिणी युवाओं को सामाजिक कार्यों से जोड़ते हुए शहर में जनहित और सांस्कृतिक गतिविधियों को नई गति देगी। भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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जेल से रिहा होने के बाद सम्मानपुर पहुंचे डॉ. अजय यादव, प्रभावित परिवारों को कानूनी मदद का भरोसा

रायपुर। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रमुख डॉ. अजय यादव जेल से रिहा होने के बाद सीधे रायपुर जिले के नकटी (सम्मानपुर) गांव पहुंचे। यहां उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, क्षतिग्रस्त मकानों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान डॉ. यादव ने कहा कि संगठन प्रभावित 77 परिवारों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेगा और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का रुख भी करेगा। प्रभावित परिवारों के साथ खड़े रहने का दावा डॉ. अजय यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी शुरुआत से ही सम्मानपुर के ग्रामीणों के साथ खड़ी रही है। उनका आरोप है कि जब तक संगठन के प्रमुख पदाधिकारी आंदोलन में सक्रिय थे, तब तक मकानों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि उनके और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के अध्यक्ष अमित बघेल के जेल जाने के बाद प्रशासन ने 77 परिवारों के मकानों को अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। कानूनी रिपोर्ट तैयार करने का दावा बैठक के दौरान संगठन ने दावा किया कि पूरे मामले पर एक विस्तृत कानूनी प्रतिवेदन तैयार किया गया है। संगठन के अनुसार, इसमें राजस्व रिकॉर्ड, ग्राम सभा के प्रस्ताव, शासन के दिशा-निर्देश और सुप्रीम कोर्ट के संबंधित निर्णयों का अध्ययन किया गया है। संगठन का कहना है कि यदि ग्राम सभा के अधिकारों की अनदेखी हुई है या कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना कार्रवाई की गई है, तो मामले की न्यायिक समीक्षा कराई जाएगी। मुफ्त कानूनी सहायता देने की घोषणा छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने प्रभावित परिवारों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का ऐलान किया है। संगठन ने कहा कि जरूरत पड़ने पर न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी और मुकदमे का पूरा खर्च भी संगठन वहन करेगा। इसके साथ ही ध्वस्तीकरण से जुड़े आदेशों, नोटिसों और राजस्व रिकॉर्ड की वैधानिक जांच कराने की भी मांग की जाएगी। पुनर्वास और मुआवजे तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान डॉ. अजय यादव ने कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि प्रभावित ग्रामीणों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रभावित परिवारों को उचित पुनर्वास और मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठन की प्रमुख मांगें छत्तीसगढ़ की ताजा और विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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इंदौर में कांग्रेस नेता अनवर कादरी फर्जी आर्म्स लाइसेंस मामले में गि

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में सदर बाजार थाना पुलिस ने कांग्रेस नेता अनवर डकैत उर्फ अनवर कादरी को कथित फर्जी हथियार लाइसेंस मामले में गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी लंबे समय से इस मामले में फरार था। उसके खिलाफ पहले से 27 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। पुलिस ने एसीपी अशोक जादौन के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए गुरुवार शाम सदर बाजार क्षेत्र से अनवर कादरी को गिरफ्तार किया। फर्जी आर्म्स लाइसेंस का आरोप पुलिस के मुताबिक, फरवरी 2025 में सदर बाजार थाना क्षेत्र में अवैध हथियार के साथ मारपीट की घटना के बाद अनवर कादरी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान यह सामने आया कि जिस बंदूक का उपयोग किया जा रहा था, उसका लाइसेंस कथित रूप से फर्जी था और उसे जम्मू-कश्मीर से बनवाया गया था। पुलिस का कहना है कि हाल ही में आरोपी एक अन्य मामले में जमानत पर जेल से बाहर आया था, जिसके बाद उसे इस प्रकरण में गिरफ्तार किया गया। कई गंभीर मामलों में दर्ज हैं केस पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अनवर कादरी के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, मारपीट, धमकी, आर्म्स एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं सहित कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। अधिकारियों के अनुसार उसके खिलाफ कुल 27 से अधिक मामले विभिन्न थानों में दर्ज हैं। पहले भी विवादों में रहा नाम अनवर कादरी का नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। जून महीने में एक वीडियो वायरल होने के बाद उस पर कुछ युवकों ने गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं, इससे पहले वह कथित लव जिहाद फंडिंग मामले में भी जांच और कानूनी कार्रवाई का सामना कर चुका है। 2011 में जानलेवा हमले के मामले में हुई थी सजा वर्ष 2011 में एक जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने अनवर कादरी, उसके भाई और एक अन्य आरोपी को एक-एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। यह मामला वर्ष 2009 में इंदौर के आजाद नगर क्षेत्र में हुई हमले की घटना से जुड़ा था। डकैती के मामले के बाद पड़ा ‘अनवर डकैत’ नाम पुलिस के अनुसार वर्ष 1996 में उज्जैन के महाकाल थाना क्षेत्र में दर्ज डकैती के एक मामले के बाद अनवर कादरी को “अनवर डकैत” के नाम से पहचान मिलने लगी। बाद के वर्षों में भी उसके खिलाफ मारपीट, धमकी और अन्य मामलों में कई प्रकरण दर्ज हुए। अनवर कादरी इंदौर नगर निगम में तीन बार पार्षद रह चुका है, जबकि उसकी पत्नी भी दो बार पार्षद चुनी जा चुकी हैं। वह कांग्रेस संगठन में शहर महामंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुका है। फिलहाल पुलिस फर्जी आर्म्स लाइसेंस मामले में उससे पूछताछ कर रही है और जांच आगे बढ़ाई जा रही है। मध्य प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करेंdeshharpal.com
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स्वामी आत्मानंद स्कूलों की भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, अब पूरे प्रदेश में होगी CBT परीक्षा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी एवं हिंदी माध्यम विद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अब तक जिला स्तर पर मेरिट सूची के आधार पर होने वाली नियुक्तियों की जगह पूरे प्रदेश के लिए कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) आयोजित किया जाएगा। इसी परीक्षा के आधार पर राज्य स्तरीय मेरिट सूची तैयार होगी और उसी के अनुसार विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। भर्ती के लिए परीक्षा एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने भर्ती परीक्षा आयोजित कराने के लिए परीक्षा एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर टेंडर जारी किया गया है। एजेंसी का चयन होने के बाद ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे और राज्यभर में कंप्यूटर आधारित परीक्षा आयोजित की जाएगी। जिला स्तर की जगह बनेगी राज्य स्तरीय मेरिट अब तक अलग-अलग जिलों में अलग मेरिट सूची के आधार पर भर्ती की जाती थी, जिससे चयन प्रक्रिया में असमानता और कई तरह की विसंगतियों की शिकायतें सामने आती थीं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी अभ्यर्थियों को एक समान परीक्षा देनी होगी और राज्य स्तरीय मेरिट के आधार पर नियुक्तियां की जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष होगी तथा सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिलेगा। इन पदों पर होगी भर्ती नई भर्ती प्रक्रिया के तहत कई शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें शामिल हैं— पूरी भर्ती प्रक्रिया का संचालन लोक शिक्षण संचालनालय करेगा। पदों के अनुसार निर्धारित होगी योग्यता व्याख्याता पद के लिए संबंधित विषय में स्नातकोत्तर के साथ बी.एड. अनिवार्य होगा। शिक्षक पद के लिए स्नातक, डी.एल.एड. या बी.एड. के साथ सीजी-टीईटी उत्तीर्ण होना आवश्यक रहेगा। सहायक शिक्षक पद के लिए 12वीं के साथ डी.एल.एड. अथवा बी.एड. और प्राथमिक स्तर की पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होना जरूरी होगा। अन्य पदों के लिए शासन द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यताएं लागू रहेंगी। रायपुर के कई स्कूलों में लंबे समय से रिक्त हैं पद राजधानी रायपुर के कई स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों के पद लंबे समय से खाली हैं। इनमें पीएमश्री आर.डी. तिवारी स्वामी आत्मानंद विद्यालय, बीपी पुजारी शासकीय स्वामी आत्मानंद विद्यालय, शहीद स्मारक स्वामी आत्मानंद विद्यालय, पीएमश्री स्वामी आत्मानंद स्कूल कचना और मानिकपुरी स्थित विद्यालय सहित कई स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों में शिक्षक, सहायक शिक्षक, कंप्यूटर शिक्षक, विज्ञान प्रयोगशाला सहायक, व्यायाम शिक्षक, प्रधान पाठक और भृत्य जैसे पद रिक्त होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पहले की भर्ती प्रक्रिया हुई थी निरस्त रायपुर जिले के 31 स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में 151 संविदा पदों पर भर्ती के लिए पहले विज्ञापन जारी किया गया था, लेकिन नई भर्ती नीति लागू होने के बाद उस प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया। अब सभी उम्मीदवारों का चयन राज्य स्तरीय CBT परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। एजेंसी चयन के बाद जारी होगा आवेदन शेड्यूल डीपीआई ने बताया कि परीक्षा एजेंसी का चयन पूरा होने के बाद ऑनलाइन आवेदन की तिथियां घोषित की जाएंगी। इसके बाद राज्य स्तर पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा आयोजित होगी और उसी के आधार पर अंतिम चयन सूची जारी की जाएगी। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समान और गुणवत्तापूर्ण बनेगी, जिससे स्कूलों में रिक्त पद जल्द भरने की उम्मीद है। छत्तीसगढ़ और शिक्षा से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ की दो बेटियां जूनियर एशिया कप-2026 में दिखाएंगी दम, भारतीय हॉकी टीम में मधु सिदार और गीता यादव का चयन

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है कि खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (KISCE), बिलासपुर की दो महिला हॉकी खिलाड़ी मधु सिदार और गीता यादव का चयन जूनियर एशिया कप-2026 के लिए भारतीय टीम में हुआ है। दोनों खिलाड़ी आगामी 30 अगस्त से 13 सितंबर तक चीन के मोकी में आयोजित होने वाले टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। दोनों खिलाड़ियों के चयन पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए बेहतर प्रदर्शन की कामना की है। किसान परिवार की बेटी हैं मधु सिदार जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड स्थित पोंगरो गांव की रहने वाली मधु सिदार किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके माता-पिता खेती-किसानी करते हैं। मधु ने अपने खेल करियर में सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप, स्कूल नेशनल और इंटर जोन चैंपियनशिप जैसी कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। उन्होंने रायपुर में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था। अप्रैल 2026 से वह बेंगलुरु में भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा हैं। गीता यादव को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव कबीरधाम जिले के बोडला की रहने वाली गीता यादव ने हॉकी की शुरुआती ट्रेनिंग कोच शिवा चौहान से ली थी। गीता इससे पहले नीदरलैंड, बेल्जियम, अर्जेंटीना तथा इंग्लैंड-स्कॉटलैंड दौरे पर भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। अब जूनियर एशिया कप-2026 के लिए टीम में चयन के साथ उन्हें एक और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। खेल विभाग ने दी बधाई खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार और संचालक तनुजा सलाम ने भी दोनों खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी हैं। वर्तमान में दोनों खिलाड़ी बिलासपुर स्थित प्रदेश की पहली आवासीय खेल अकादमी में वरिष्ठ प्रशिक्षक राकेश टोप्पो और हेड कोच अजीत लकड़ा के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही हैं। छत्तीसगढ़ की इन दोनों खिलाड़ियों का भारतीय टीम में चयन राज्य के खेल विकास और प्रतिभाओं के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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Jharkhand परीक्षा विवाद: छात्रों ने सरकार से बातचीत की जताई सहमति

Jharkhand परीक्षा विवाद: छात्रों ने सरकार से बातचीत की जताई सहमति

Jharkhand में परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। इस बीच आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार से बातचीत करने की इच्छा जताई है। हालांकि छात्रों ने साफ कहा है कि बातचीत बंद कमरे में नहीं, बल्कि मीडिया की मौजूदगी में मुख्यमंत्री के साथ होनी चाहिए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और जनता भी सच्चाई जान सके। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वे किसी तरह का टकराव नहीं चाहते। उनकी सिर्फ एक मांग है कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार को खुलकर जवाब देना चाहिए। वहीं दूसरी ओर पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रशासन का कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही पूरे मामले की जांच भी जारी है। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा में हुई गड़बड़ियों से मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है। कई छात्र लंबे समय से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और उन्हें निष्पक्ष परीक्षा की उम्मीद थी। ऐसे में वे चाहते हैं कि सरकार उनकी बात गंभीरता से सुने और जल्द ठोस फैसला ले। अब सभी की नजर सरकार की अगली पहल पर टिकी है। यदि मुख्यमंत्री छात्रों की मांग के अनुसार सार्वजनिक रूप से बातचीत करते हैं, तो इस विवाद का समाधान निकलने की उम्मीद बढ़ सकती है। वहीं छात्र भी साफ कर चुके हैं कि न्याय मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में फायर फाइटर्स की छंटनी का आरोप, कर्मचारियों ने रोजगार और श्रम नियमों पर उठाए सवाल

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की फायर सेफ्टी व्यवस्था में कार्यरत फायर फाइटर्स ने ठेका बदलने के बाद छंटनी किए जाने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि बिना पूर्व सूचना के कई लोगों को काम से हटा दिया गया, जिससे उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। वहीं, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने कर्मचारियों के आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि अनुबंध के अनुसार पर्याप्त कर्मचारी कार्यरत हैं और नियुक्ति या हटाने का अधिकार ठेकेदार के पास है। वर्षों से कर रहे थे सेवा कर्मचारियों के अनुसार, चकरभाठा क्षेत्र के धमनी, कड़ार, सेंवार, हिरी और आसपास के गांवों के कई युवक पिछले 3 से 13 वर्षों से हाईकोर्ट में फायर फाइटर के रूप में कार्यरत थे। उनका कहना है कि वे अलग-अलग शिफ्टों में नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनके मुताबिक, फायर सेफ्टी सिस्टम का ठेका बदलने के बाद नए ठेकेदार ने कई पुराने कर्मचारियों को काम से हटा दिया। निर्धारित संख्या से कम कर्मचारियों से काम कराने का आरोप फायर फाइटर्स का आरोप है कि अनुबंध के अनुसार कुशल और अकुशल मिलाकर 28 कर्मचारियों की नियुक्ति होनी चाहिए। उनका दावा है कि पहले केवल 16 कर्मचारियों से काम लिया गया और बाद में उनमें से भी आठ कर्मचारियों को हटा दिया गया। कर्मचारियों के अनुसार, वर्तमान में तीन शिफ्टों में केवल आठ फायर फाइटर्स से काम कराया जा रहा है। वेतन, ईपीएफ और सुरक्षा सुविधाओं पर भी सवाल कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें कलेक्टर दर के अनुसार मजदूरी नहीं मिल रही है और उनका मासिक वेतन केवल 8 से 10 हजार रुपये तक सीमित है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें ईपीएफ (EPF) और ईएसआई (ESI) जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। इसके अलावा कर्मचारियों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान आवश्यक सुरक्षा उपकरण भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराए जाते, जिससे कार्य के दौरान जोखिम बढ़ जाता है। कंपनी के पंजीकरण पर भी उठाए सवाल फायर फाइटर्स ने आरोप लगाया कि संबंधित कंपनी का पंजीकरण 25 मई 2026 को समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद उसी कंपनी से काम कराया जा रहा है। कर्मचारियों ने पूरे मामले की जांच कराने और श्रम कानूनों के पालन की मांग की है। विभाग ने आरोपों से किया इनकार लोक निर्माण विभाग के एसडीओ बिंद्रा प्रसाद ने कर्मचारियों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हाईकोर्ट में अनुबंध के अनुसार 28 कर्मचारी कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि किसी कर्मचारी को नियुक्त करना या हटाना पूरी तरह ठेकेदार का अधिकार है। विभाग की जिम्मेदारी केवल अनुबंध के तहत कार्यों की निगरानी करना है और कर्मचारियों की नियुक्ति या हटाने के निर्णय में विभाग का कोई हस्तक्षेप नहीं होता। छत्तीसगढ़ और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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ईरान में विदेश मंत्री अराघची के खिलाफ महाभियोग की तैयारी! क्षेत्रीय तनाव के बीच कई बड़े घटनाक्रम

तेहरान। ईरान में विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ महाभियोग लाने की चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कुछ सांसद उनके खिलाफ आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य जुटाने में लगे हैं। हालांकि, अभी तक महाभियोग की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू नहीं हुई है। एक वरिष्ठ सांसद के हवाले से कहा गया है कि उचित समय आने पर विदेश मंत्री के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया जाएगा। राष्ट्रपति की भूमिका सीमित होने का दावा इजराइली मीडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व ने सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े अहम मामलों में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की भूमिका सीमित कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका के साथ संभावित वार्ता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ कमांडर अहमद वाहिदी की भूमिका अधिक प्रभावी हो सकती है। हालांकि, इस दावे की ईरानी अधिकारियों की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अमेरिका-ईरान वार्ता पर अभी फैसला नहीं अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत को लेकर अभी तक न तो तारीख तय हुई है और न ही स्थान। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान और कतर संभावित मेजबान देशों के रूप में चर्चा में हैं और दोनों देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। ईरान की रणनीति में बदलाव का दावा अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान अब सीधे सैन्य टकराव के बजाय समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों पर दबाव बनाकर अमेरिका और उसके सहयोगियों की रणनीतिक लागत बढ़ाने की नीति पर काम कर सकता है। रीपर ड्रोन मार गिराने का दावा ईरान की IRGC ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर उड़ रहे MQ-9 रीपर ड्रोन को अपने एयर डिफेंस सिस्टम से मार गिराया। हालांकि, ईरान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह ड्रोन किस देश का था और इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हो सकी है। अमेरिका भी नए विकल्पों पर कर रहा विचार मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अपने सैन्य विश्लेषकों से ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए नए रणनीतिक विकल्पों पर सुझाव मांगे हैं। इसे क्षेत्रीय तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हूती धमकी के बाद बदला जहाजों का रूट यमन के हूती विद्रोहियों की धमकियों के बाद छह सऊदी सुपरटैंकरों ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब मार्ग की बजाय अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से लंबा समुद्री रास्ता अपनाया है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। दुनिया की ताजा और विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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रायपुर में भारत ग्रुप के खिलाफ सामूहिक शिकायत, रोजगार और बायबैक के नाम पर लाखों की ठगी का आरोप

रायपुर। राजधानी रायपुर के फाफाडीह स्थित वॉलफोर्ट ओजोन में संचालित भारत ग्रुप के खिलाफ छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के लोगों ने सामूहिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कंपनी ने अगरबत्ती बनाने की मशीन, बायबैक गारंटी और घर बैठे रोजगार का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये वसूले, लेकिन किए गए वादे पूरे नहीं किए। पीड़ितों ने इस मामले की शिकायत जनदर्शन में कलेक्टर से की है। साथ ही कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर मंगलवार को रायपुर पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय भी पहुंचे। घर बैठे कमाई का दिया गया था दावा शिकायतकर्ताओं के अनुसार, कंपनी ने विज्ञापनों के माध्यम से दावा किया था कि लोग घर बैठे हर महीने 18 हजार से 60 हजार रुपये तक कमा सकते हैं। कंपनी ने भरोसा दिलाया था कि उसकी मशीन प्रतिदिन 80 से 100 किलो अगरबत्ती तैयार करेगी और तैयार उत्पाद को तय कीमत पर स्वयं खरीद लेगी। मशीन की सर्विस और रखरखाव की जिम्मेदारी भी कंपनी ने लेने का आश्वासन दिया था। मशीनों पर लाखों खर्च, उत्पादन नहीं मिलने का आरोप पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने अपनी बचत और कर्ज लेकर 1.10 लाख से 1.20 लाख रुपये तक की कीमत में मशीनें खरीदीं। आरोप है कि मशीनों का सही तरीके से इंस्टॉलेशन नहीं किया गया। कई मशीनें पूरी तरह बंद पड़ी हैं, जबकि जो मशीनें चल रही हैं, वे वादा किए गए उत्पादन के मुकाबले केवल 15 से 20 किलो तक ही अगरबत्ती बना पा रही हैं। GST बिल नहीं देने का भी आरोप शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने मशीन बेचते समय वैध GST बिल जारी नहीं किया और केवल कच्चा चालान देकर लेन-देन किया। उन्होंने इस मामले में संभावित कर अनियमितताओं की जांच कराने की मांग भी की है। कम वजन का कच्चा माल मिलने का दावा पीड़ितों का आरोप है कि कंपनी ने दस्तावेजों में जितना कच्चा माल दर्शाया, वास्तविक आपूर्ति उससे कम की गई। उनका दावा है कि कई बोरियों में 2 से 3 किलो तक वजन कम मिला। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसके समर्थन में उनके पास डिजिटल कांटे से की गई तौल के फोटो और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं। तैयार माल खरीदने से किया इनकार शिकायत में यह भी कहा गया है कि कंपनी ने तैयार अगरबत्ती वापस खरीदने का वादा पूरा नहीं किया। आरोप है कि विभिन्न कारण बताकर तैयार माल लेने से इनकार कर दिया गया, जिससे बड़ी मात्रा में उत्पाद खराब हो गया और लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। रिजेक्शन के नाम पर मनमानी कटौती करने का आरोप भी लगाया गया है। धमकी देने का भी आरोप पीड़ितों का कहना है कि जब उन्होंने मशीनों की खराबी, कम वजन या भुगतान को लेकर सवाल उठाए, तो कंपनी के संचालकों और कर्मचारियों ने अनुबंध समाप्त करने और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। कुछ लोगों पर कथित रूप से माफीनामा लिखने का दबाव भी बनाया गया। कलेक्टर से की ये मांग शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कंपनी के वित्तीय लेन-देन और नापतौल की जांच कराने, दोषपूर्ण मशीनें वापस लेने तथा पीड़ितों की जमा राशि ब्याज और मुआवजे सहित लौटाने की मांग की है। साथ ही कंपनी के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी के मामले दर्ज करने की भी मांग की गई है। फिलहाल, मामले में संबंधित अधिकारियों या कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। छत्तीसगढ़ और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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रायपुर के आरंग में महिला की संदिग्ध मौत, परिजनों ने पति पर हत्या का आरोप लगाया

रायपुर। राजधानी रायपुर से लगे आरंग क्षेत्र में एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतका के परिजनों ने उसके पति पर हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस से निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मृतका की पहचान पुष्पा सोनकर के रूप में हुई है, जो आरंग के वार्ड नंबर-14 स्थित शनि मंदिर के पास रहती थीं। परिजनों का आरोप- पति का दूसरी महिला से था संबंध मृतका के पिता रामधार सोनकर ने पुलिस को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की शादी करीब 20 वर्ष पहले भोला सोनकर से हुई थी। दोनों के चार बच्चे हैं। परिजनों का दावा है कि पिछले तीन वर्षों से भोला सोनकर का दूसरी महिला से संबंध था और उससे एक बच्चा भी है। इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता था। उनका आरोप है कि आरोपी पति आए दिन पुष्पा के साथ मारपीट करता था और उसे जान से मारने की धमकी भी देता था। घटना वाले दिन झगड़े का दावा परिजनों के अनुसार, घटना से एक रात पहले भोला सोनकर घर नहीं लौटा था। मृतका की बेटी का दावा है कि 31 जुलाई की सुबह करीब 5 बजे वह घर पहुंचा, जिसके बाद पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद वह पुष्पा को घर के पीछे स्थित बाड़ी की ओर ले गया। बाद में सुबह करीब 8:15 बजे उसने फोन कर पुष्पा के कुएं में गिरने की सूचना परिवार को दी। इलाज के दौरान हुई मौत परिवार के मुताबिक, सूचना मिलने पर वे मौके पर पहुंचे तो पुष्पा गंभीर हालत में मिलीं। उन्हें पहले आरंग के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने रायपुर रेफर कर दिया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। “तैरना जानती थी, हादसा नहीं लग रहा” मृतका के परिजनों का कहना है कि पुष्पा को तैरना आता था, इसलिए उनके अनुसार कुएं में गिरने की घटना संदिग्ध है। उन्होंने आरोप लगाया है कि दूसरी महिला से संबंधों में बाधा बनने के कारण आरोपी पति ने उन्हें कुएं में धक्का दिया। पुलिस ने कहा- जांच के बाद होगी कार्रवाई मृतका के पिता, भाइयों और बेटियों ने आरंग थाने में लिखित शिकायत देकर आरोपी पति के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है। आरंग पुलिस ने बताया कि परिजनों का आवेदन प्राप्त हुआ है। मामले की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों तथा जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। छत्तीसगढ़ और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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X पर अब लाइक बटन दबाकर भेज सकेंगे $1 की टिप, मस्क ने नए फीचर का किया ऐलान

नई दिल्ली। इलॉन मस्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को फाइनेंशियल सर्विसेज से जोड़ने की दिशा में एक और कदम उठा रहे हैं। मस्क ने ऐलान किया है कि X पर यूजर्स लाइक बटन को लॉन्ग-प्रेस करके किसी यूजर या क्रिएटर को 1 डॉलर की टिप भेज सकेंगे। यह पेमेंट कंपनी के फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म X मनी के जरिए किया जाएगा। मस्क ने X पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि X मनी के माध्यम से किसी को भी 1 डॉलर भेजने के लिए लाइक बटन पर लॉन्ग-प्रेस करने का विकल्प जोड़ा जा रहा है। कैसे काम करेगा नया टिपिंग फीचर? इस फीचर के जरिए यूजर्स किसी पोस्ट के लेखक या क्रिएटर को सीधे आर्थिक मदद दे सकेंगे। इसके लिए लाइक बटन को कुछ देर तक दबाना होगा। इसके बाद X मनी के पेमेंट सिस्टम के जरिए 1 डॉलर ट्रांसफर करने का विकल्प मिलेगा। इस व्यवस्था का मकसद क्रिएटर्स को सपोर्ट करने की प्रक्रिया आसान बनाना है, ताकि यूजर्स को अलग से पेमेंट ऐप या लंबी प्रक्रिया का सहारा न लेना पड़े। हालांकि, X ने अभी तक इस फीचर के लॉन्च की तारीख और इसकी उपलब्धता से जुड़ी शर्तों की जानकारी नहीं दी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यूजर्स 1 डॉलर की तय रकम को बदल सकेंगे या भविष्य में अलग-अलग रकम भेजने के विकल्प भी मिलेंगे। क्या है X मनी और इसमें कौन-सी सुविधाएं हैं? X मनी, X का फाइनेंशियल सर्विस प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए यूजर्स के बीच पैसे ट्रांसफर करने, डिपॉजिट अकाउंट और X-ब्रांडेड वीजा डेबिट कार्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका पेमेंट और बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर क्रॉस रिवर बैंक के साथ जुड़ा है। X मनी खुद बैंक नहीं है, बल्कि बैंकिंग पार्टनर के माध्यम से वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म है। इससे जुड़ी सुविधाओं में पात्र डिपॉजिट पर ब्याज, खरीदारी पर कैशबैक और डेबिट कार्ड को Apple Pay से कनेक्ट करने जैसे विकल्प शामिल हैं। इन सुविधाओं की उपलब्धता यूजर की पात्रता और लागू शर्तों पर निर्भर करती है। X को ‘एवरीथिंग ऐप’ बनाना चाहते हैं मस्क इलॉन मस्क लंबे समय से X को सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखना चाहते। उनका लक्ष्य इसे ‘एवरीथिंग ऐप’ यानी सुपर ऐप के रूप में विकसित करना है, जहां सोशल मीडिया, मैसेजिंग और वित्तीय सेवाएं एक ही जगह मिल सकें। X मनी के जरिए टिप भेजने का फीचर इसी रणनीति का हिस्सा है। अगर यह सुविधा व्यापक स्तर पर शुरू होती है, तो क्रिएटर्स को अपने कंटेंट के जरिए सीधे आर्थिक सहयोग पाने का एक और माध्यम मिल सकता है। भारत में कब शुरू होगा X मनी? X ने भारत में X मनी या नए टिपिंग फीचर को लॉन्च करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। फिलहाल भारतीय यूजर्स के लिए इसकी उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। भारत में पहले से ही UPI आधारित डिजिटल पेमेंट का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। ऐसे में X मनी को भारत में वित्तीय सेवाएं शुरू करने के लिए देश के लागू बैंकिंग, भुगतान और नियामकीय नियमों का पालन करना होगा। क्या होता है ‘एवरीथिंग ऐप’? एवरीथिंग ऐप या सुपर ऐप ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म होता है, जिसमें एक ही ऐप के जरिए कई तरह की सेवाएं इस्तेमाल की जा सकती हैं। इनमें सोशल मीडिया, मैसेजिंग, डिजिटल पेमेंट, शॉपिंग और बैंकिंग जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। चीन का WeChat इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां मैसेजिंग के साथ भुगतान और कई अन्य डिजिटल सेवाएं भी मिलती हैं। मस्क X को भी इसी तरह का बहुउद्देशीय प्लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं।

पूर्व जज संजय किशन कौल का पूर्व CJI चंद्रचूड़ पर निशाना, बोले- जजों की नियुक्ति में सरकार के प्रति ज्यादा झुके थे

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संजय किशन कौल ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ के रवैए पर सवाल उठाए हैं। अपनी आगामी किताब ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ में कौल ने आरोप लगाया है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में चंद्रचूड़ सरकार के प्रति जरूरत से ज्यादा झुके हुए थे। कौल के मुताबिक, नियुक्तियों से पहले सरकार की राय लेने की प्रवृत्ति न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए चिंता का विषय है। कौल ने किताब में कॉलेजियम की उस बैठक का जिक्र किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की छह रिक्तियों को भरने के लिए नामों पर विचार किया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार से निपटने के तरीके को लेकर मतभेदों के कारण चंद्रचूड़ के साथ उनके संबंधों में तनाव आया। कॉलेजियम बैठक में छठे नाम को लेकर मतभेद कौल के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के छह जजों की नियुक्ति पर विचार के दौरान पांच नामों पर पहले सहमति बन चुकी थी। बैठक से ठीक पहले तत्कालीन CJI चंद्रचूड़ ने छठे उम्मीदवार का नाम उनके सामने रखा। कौल ने बताया कि चंद्रचूड़ उन्हें एक अलग कमरे में ले गए और पूछा कि क्या उन्हें सरकार का रुख जानने के लिए फोन करना चाहिए। कौल ने द वायर से बातचीत में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह सरकार को खुश करने का मामला था, लेकिन नामों पर पहले उनके साथ चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि छठे उम्मीदवार के नाम पर उनकी सहमति नहीं थी और उन्हें लगा कि कॉलेजियम के अन्य सदस्य भी उस नाम को स्वीकार नहीं करेंगे। कौल के अनुसार, बैठक में वही हुआ और छठे नाम पर सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने आशंका जताई कि शायद चंद्रचूड़ ने इस नाम सहित अन्य नामों को लेकर सरकार से पहले ही किसी तरह की मंजूरी ले ली थी। नियुक्तियों से पहले सरकार की राय लेने पर आपत्ति जस्टिस कौल ने कहा कि कॉलेजियम की औपचारिक चर्चा से पहले सरकार के साथ नामों पर विचार-विमर्श करने की परंपरा चिंता पैदा करती है। उनके मुताबिक, सरकार से सलाह लेना और पहले से मंजूरी लेना दो अलग-अलग बातें हैं। कौल का मानना है कि कॉलेजियम को न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए सरकार के दबाव का विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर नियुक्तियों से पहले सरकार की सहमति लेने की प्रक्रिया परंपरा बन जाती है, तो भविष्य में आने वाले मुख्य न्यायाधीशों के लिए इससे अलग चलना मुश्किल हो सकता है। NJAC पर भी रखी अपनी राय किताब में कौल ने 2015 में केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट्स कमीशन (NJAC) का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि उस समय नियुक्ति व्यवस्था को लेकर आमने-सामने बैठकर चर्चा की जा सकती थी। कौल के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में सुधार और उसके तौर-तरीकों में बदलाव की गुंजाइश थी। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुधार के नाम पर नियुक्तियों से पहले सरकार की मंजूरी लेने की परंपरा को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। PMLA मामले को दूसरी बेंच में भेजने पर भी सवाल कौल ने अपनी बेंच के एक फैसले से जुड़े मामले को दूसरी बेंच में भेजे जाने पर भी आपत्ति जताई। यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) से जुड़े फैसले के कुछ हिस्सों पर दोबारा विचार करने से संबंधित था। कौल का कहना था कि किसी मामले को इस आशंका के आधार पर एक बेंच से दूसरी बेंच में नहीं भेजा जाना चाहिए कि फैसला किस दिशा में जा सकता है। कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया कौल की किताब अभी बाजार में नहीं आई है, लेकिन उनके बयानों के आधार पर कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि कौल ने न्यायाधीशों की नियुक्ति में सरकार के दखल से जुड़ी चिंताएं सामने रखी हैं। रमेश के मुताबिक, इनमें कॉलेजियम की बैठकों से पहले सरकार की मंजूरी लेने की कोशिश और अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले एक न्यायाधीश की जाति को लेकर सरकार की ओर से पूछताछ का मुद्दा भी शामिल है। उन्होंने कहा कि कौल ने इन विषयों को नपे-तुले शब्दों में दर्ज किया है। कांग्रेस ने इसे न्यायपालिका को सत्ता में बैठे लोगों के दबाव से मुक्त रखने की जरूरत से जोड़कर देखा है। कौल बोले- भविष्य के CJI के लिए परंपरा बदलना मुश्किल होगा कौल ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल सीमित होता है, लेकिन उनके फैसलों से बनी परंपराएं आगे भी जारी रह सकती हैं। उनके मुताबिक, यदि नियुक्तियों से पहले सरकार से चर्चा करने की प्रक्रिया सामान्य बन जाती है, तो बाद में आने वाले मुख्य न्यायाधीशों के लिए उससे अलग रास्ता अपनाना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से उन्होंने चंद्रचूड़ को इस तरह की प्रक्रिया से बचने की सलाह देने की कोशिश की।

भोपाल में 1.50 लाख की MD ड्रग्स के साथ दो युवक गिरफ्तार, बाइक-मोबाइल समेत 3 लाख का सामान जब्त

भोपाल। राजधानी भोपाल में परवलिया सड़क थाना पुलिस ने बायपास रोड पर घेराबंदी कर दो युवकों को MD ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 12.63 ग्राम MD ड्रग्स बरामद हुई है, जिसकी कीमत करीब 1.50 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल बाइक और मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 3 लाख रुपए आंकी गई है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने की घेराबंदी पुलिस के मुताबिक, 24 अक्टूबर की रात मुखबिर से सूचना मिली थी कि दो युवक बाइक से MD ड्रग्स लेकर थाना क्षेत्र से गुजरने वाले हैं। सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया। थाना प्रभारी के नेतृत्व में पांच पुलिस टीमें गठित कर बायपास रोड पर घेराबंदी की गई। रात करीब 1:40 बजे पुलिस को बाइक पर सवार दो संदिग्ध युवक दिखाई दिए। पुलिस को देखकर दोनों ने बाइक मोड़कर भागने की कोशिश की, लेकिन घेराबंदी के चलते उन्हें पकड़ लिया गया। तरुण सराठे और अखिलेश मेहरा गिरफ्तार पुलिस के अनुसार, तलाशी के दौरान तरुण सराठे (24), निवासी छावनी पठार, बिलखिरिया के पास से 12.63 ग्राम MD ड्रग्स बरामद हुई। बाइक पर उसके साथ मौजूद अखिलेश मेहरा (24), निवासी छावनी पठार को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से ड्रग्स के अलावा तस्करी में इस्तेमाल बाइक और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 3 लाख रुपए बताई गई है। दोनों आरोपियों पर पहले से दर्ज हैं मामले पुलिस के मुताबिक, तरुण सराठे के खिलाफ बिलखिरिया थाने में मारपीट और आर्म्स एक्ट के दो मामले दर्ज हैं। वहीं, अखिलेश मेहरा के खिलाफ मारपीट के चार प्रकरण पहले से दर्ज हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क की जांच जारी गिरफ्तारी के बाद पुलिस दोनों युवकों से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि MD ड्रग्स कहां से लाई गई थी और इसे किसे सप्लाई किया जाना था। पुलिस ड्रग्स की खरीद-फरोख्त से जुड़े नेटवर्क की जानकारी भी जुटा रही है।

हरमनप्रीत और दीप्ति के शतक, भारत ने जिम्बाब्वे को दिया 329 रन का टारगेट

वडोदरा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 6 विकेट पर 328 रन बनाए। वडोदरा के कोटांबी स्टेडियम में रविवार को टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की ओर से कप्तान हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा ने शतक लगाए। दोनों के बीच छठे विकेट के लिए 153 रन की अहम साझेदारी हुई। भारत की शुरुआत खराब, 19 रन पर गिरे 2 विकेट भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। स्मृति मंधाना पारी की चौथी गेंद पर बिना खाता खोले आउट हो गईं। इसके बाद शेफाली वर्मा भी 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। तीसरे ओवर में भारत का स्कोर 19 रन पर 2 विकेट हो गया। मुश्किल समय में प्रतीका रावल और हरमनप्रीत कौर ने पारी को संभाला। दोनों ने संभलकर बल्लेबाजी करते हुए टीम को शुरुआती झटकों से उबारा। प्रतीका रावल ने 67 गेंदों पर 61 रन बनाए। उनकी पारी में 4 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। वह 22.2 ओवर में 143 रन के स्कोर पर आउट हुईं। हरमनप्रीत कौर ने 121 गेंदों पर बनाए 126 रन कप्तान हरमनप्रीत कौर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 121 गेंदों पर 126 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में 15 चौके लगाए। यह उनके वनडे करियर का आठवां शतक रहा। हालांकि, पारी के दौरान उनके तीन कैच भी छूटे। हरमनप्रीत का विकेट 46.2 ओवर में गिरा। उस समय भारतीय टीम 301 रन बना चुकी थी। पारी के बाद उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद धूप में खेलना आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि जब दूसरे छोर पर बल्लेबाज अच्छी लय में रन बना रही हो, तो स्ट्राइक बदलते रहना और साझेदारी को आगे बढ़ाना जरूरी होता है। दीप्ति शर्मा ने 86 गेंदों में जड़ा शतक छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरीं दीप्ति शर्मा ने 86 गेंदों पर 106 रन की पारी खेली। उन्होंने 15 चौके लगाए। दीप्ति ने 37 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और पारी के आखिरी ओवर में चौका लगाकर वनडे करियर का दूसरा शतक पूरा किया। दीप्ति ने हरमनप्रीत के साथ मिलकर भारतीय पारी को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 137 गेंदों पर 153 रन की साझेदारी की। इस दौरान दोनों ने विकेट बचाने के साथ रन गति भी बनाए रखी। दीप्ति शर्मा ने बनाए तीन रिकॉर्ड आखिरी 10 ओवर में बने 72 रन भारतीय टीम ने आखिरी 10 ओवर में 72 रन जोड़े और इस दौरान 2 विकेट गंवाए। हरमनप्रीत के आउट होने के बाद ऋचा घोष भी ज्यादा देर नहीं टिक सकीं। वह 9 गेंदों पर 7 रन बनाकर 47.6 ओवर में आउट हुईं। भारत ने निर्धारित 50 ओवर में 6 विकेट पर 328 रन बनाकर जिम्बाब्वे के सामने 329 रन का लक्ष्य रखा। दोनों टीमों की प्लेइंग-11 भारत: प्रतीका रावल, स्मृति मंधाना (कप्तान), शेफाली वर्मा, हरमनप्रीत कौर, तेजल हसब्निस, दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष (विकेटकीपर), श्री चरणी, जिंतिमणि कलिता, सयाली सतघरे और वैष्णवी शर्मा। जिम्बाब्वे: मोडेस्टर मुपाचिकवा (विकेटकीपर), लोरिन फिरी, चिपो मुगेरी-तिरिपानो, बिलव्ड बिजा, जोसेफिन नकोमो (कप्तान), न्याशा ग्वांजुरा, चिएद्जा धुरुरु, मिशेल मावुंगा, नोमवेलो सिबांडा, तेंदाई मकुशा और ओलिंडर चारे।
BSF

BSF Action: कच्छ के Sir Creek में पकड़े गए 4 Pakistani Fishermen

गुजरात के कच्छ से भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को सर क्रीक के संवेदनशील इलाके में चार पाकिस्तानी मछुआरों को पकड़ लिया। इस दौरान उनकी फाइबर से बनी मछली पकड़ने वाली नाव भी जब्त की गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, चारों मछुआरे कथित तौर पर केकड़े पकड़ने के लिए भारतीय जलक्षेत्र में दाखिल हुए थे। यह कार्रवाई खुफिया जानकारी मिलने के बाद की गई। घटना के बाद एक बार फिर कच्छ के समुद्री सीमा क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, मछुआरों के भारतीय जलक्षेत्र में पहुंचने की परिस्थितियों और उनकी गतिविधियों की पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। BSF ने कैसे पकड़े चार पाकिस्तानी मछुआरे? India Today की 25 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, BSF को सूचना मिली थी कि कुछ पाकिस्तानी मछुआरे भारतीय जलक्षेत्र में मौजूद हैं। इसके बाद जवानों ने सर क्रीक इलाके में कार्रवाई करते हुए चारों को पकड़ लिया। पकड़े गए मछुआरों की पहचान कादिर थैमोर, मुहम्मद मूसा, अजगर थैमोर और अहसान जाट के रूप में बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चारों पाकिस्तान के सिंध प्रांत के निवासी हैं। कार्रवाई के दौरान उनकी फाइबर की नाव भी जब्त की गई। फिलहाल, पूछताछ और आगे की कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। आखिर क्या है मछुआरों का अपराध? इस मामले में सबसे अहम सवाल है कि चारों मछुआरे भारतीय जलक्षेत्र में क्यों पहुंचे थे। शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया है कि वे केकड़े पकड़ने के लिए सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में दाखिल हुए थे। भारत के जलक्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करना या वहां अवैध रूप से मछली पकड़ना संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई का कारण बन सकता है। हालांकि, इस मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर तय होगी। अभी तक सामने आई रिपोर्ट में चारों मछुआरों के जासूसी या किसी अन्य गंभीर गतिविधि में शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मामले को लेकर किसी अपुष्ट दावे को तथ्य मानना सही नहीं होगा। कच्छ का Sir Creek इलाका क्यों है संवेदनशील? गुजरात का कच्छ क्षेत्र भारत और पाकिस्तान की समुद्री सीमा के पास स्थित है। सर क्रीक एक ज्वारीय जलमार्ग है, जो अपनी भौगोलिक स्थिति और दलदली इलाके के कारण सीमा पर निगरानी के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए नावों की आवाजाही होती है। समुद्री सीमा के आसपास होने के कारण किसी दूसरे देश की नाव का भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए जांच का विषय बन जाता है। BSF यहां नियमित गश्त और निगरानी करती है। संदिग्ध नाव या गतिविधि दिखाई देने पर जवान संबंधित लोगों से पूछताछ करते हैं और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की जाती है। Kutch Border पर हाल की घटनाओं से बढ़ी निगरानी कच्छ के समुद्री सीमा क्षेत्र में अक्टूबर 2026 के दौरान पाकिस्तानी नागरिकों और नावों से जुड़े दूसरे मामले भी रिपोर्ट किए गए हैं। 19 अक्टूबर को कोटेश्वर के पास क्रीक क्षेत्र में गश्त के दौरान BSF ने एक पाकिस्तानी नागरिक को नाव के साथ पकड़ा था। शुरुआती जांच में नाव से मछली पकड़ने के उपकरण मिलने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद इलाके में तलाशी अभियान चलाए जाने की खबर भी सामने आई। 20 अक्टूबर को कच्छ के लखपत और आसपास के क्रीक क्षेत्र से जुड़ी अन्य घटनाओं की भी रिपोर्ट आई थी। इन मामलों में नावों, पाकिस्तानी नागरिकों और तलाशी अभियान का जिक्र किया गया था। हालांकि, ये अलग-अलग घटनाएं हैं और इन्हें 25 अक्टूबर को पकड़े गए चार मछुआरों के मामले से अलग समझना जरूरी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच समुद्री सीमा पर निगरानी का महत्व बढ़ जाता है। फिर भी, केवल इन घटनाओं के आधार पर किसी बड़ी साजिश का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। क्या पाकिस्तानी नाव से कोई संदिग्ध सामान मिला? 25 अक्टूबर की घटना से जुड़ी शुरुआती रिपोर्ट में फाइबर की नाव जब्त किए जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि, नाव से किसी हथियार, नशीले पदार्थ या अन्य संदिग्ध सामान की बरामदगी के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए फिलहाल ऐसी किसी बरामदगी का दावा नहीं किया जा सकता। आगे की जांच में नाव, मछुआरों की गतिविधियों और भारतीय जलक्षेत्र में उनकी मौजूदगी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है। अब आगे क्या होगा? चारों मछुआरों को पकड़े जाने के बाद अब जांच और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण महत्वपूर्ण होंगे। संबंधित अधिकारी उनकी पहचान, भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश की परिस्थितियों और घटना से जुड़े दूसरे पहलुओं की जांच कर सकते हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, BSF ने गुजरात के कच्छ स्थित सर क्रीक इलाके में चार पाकिस्तानी मछुआरों को पकड़ा है और उनकी नाव जब्त की है। वे भारतीय जलक्षेत्र में किन परिस्थितियों में पहुंचे और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित इस संवेदनशील क्षेत्र में BSF की निगरानी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है। मामले में आधिकारिक अपडेट आने पर आगे की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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