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Islamabad

Islamabad Blast शिया समुदाय पर लक्षित आत्मघाती हमला

इस्लामाबाद, पाकिस्तान — शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को इस्लामाबाद (Islamabad) के तरलाई इलाके में स्थित शिया मस्जिद इमाम बारगाह (Imambargah) में जुमे की नमाज़ के दौरान एक भयानक आत्मघाती विस्फोट (Suicide Blast) हुआ। घटना के समय मस्जिद में भारी भीड़ थी, और विस्फोट के कारण 10 लोगों की मौत हुई जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना का विवरण स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हमलावर ने मस्जिद के मुख्य द्वार पर खुद को विस्फोट कर लिया। धमाके की आवाज पूरे इलाके में सुनी गई और मलबा चारों ओर बिखर गया।लोग खून से लथपथ और घायल स्थिति में बाहर भागते दिखे। तत्काल पुलिस और राहत टीमें (Rescue Teams) मौके पर पहुंची और घायल लोगों को अस्पताल ले जाया गया। मुख्य बिंदु: सुरक्षा और प्रतिक्रिया (Security & Response) इस्लामाबाद पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया और इमरजेंसी (Emergency) घोषित कर दी। सुरक्षा एजेंसियाँ घटनास्थल पर फोरेंसिक जांच कर रही हैं। अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है, लेकिन प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट है कि यह धार्मिक समुदाय को निशाना बनाने वाला आतंकी हमला (Targeted Terror Attack) था। सामाजिक और मानवीय प्रभाव (Social & Human Impact) यह हमला न केवल इस्लामाबाद बल्कि पूरे पाकिस्तान में शिया समुदाय और अन्य धार्मिक समूहों के लिए चिंता का विषय बन गया है।घायलों के परिवार सदमे में हैं और स्थानीय प्रशासन उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध करा रहा है। स्थानीय लोग और विश्व समुदाय इस हमले की निंदा कर रहे हैं। सामाजिक मीडिया पर भी “Prayers for Islamabad” और “Shia Mosque Blast” ट्रेंड कर रहा है। इस्लामाबाद में यह आत्मघाती हमला पाकिस्तान में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की संवेदनशीलता को उजागर करता है।स्थानीय प्रशासन ने चेतावनी जारी की है और जनता से शांति बनाए रखने का आग्रह किया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ajit Doval की बैकडोर बातचीत के बाद बनी अमेरिकी ट्रेड डील

Ajit Doval की बैकडोर बातचीत के बाद बनी अमेरिकी ट्रेड डील

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) Ajit Doval की बैकडोर कूटनीति के बाद ही अमेरिका के साथ यह समझौता संभव हो पाया। सूत्रों के मुताबिक, डोभाल ने साफ शब्दों में विदेश मंत्री से कहा था कि भारत किसी दबाव में नहीं झुकेगा और जरूरत पड़ी तो डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति पद से हटने तक इंतजार करेगा। बताया जा रहा है कि उस समय अमेरिका की ओर से भारत पर ट्रेड डील को जल्द मंजूरी देने का दबाव बनाया जा रहा था। लेकिन भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी और मजबूती से अपनी शर्तों पर बातचीत जारी रखी। सूत्रों का कहना है कि डोभाल की रणनीति यही थी कि बिना जल्दबाजी किए संतुलित और सम्मानजनक समझौता किया जाए, ताकि भारत के किसानों, उद्योगों और छोटे व्यापारियों के हित सुरक्षित रह सकें। इस बैकडोर बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत की दिशा बदली और आखिरकार एक ऐसी ट्रेड डील पर सहमति बनी, जिसमें भारत की शर्तों को भी महत्व दिया गया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम दिखाता है कि भारत अब वैश्विक मंच पर किसी भी दबाव के आगे झुकने के बजाय अपने हितों के साथ मजबूती से खड़ा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran

Iran ने अमेरिका को चेतावनी दी US Warship और Fighter Jet के खौफनाक दृश्य

ईरान (Iran) और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच तेहरान के Enghelab चौक में ईरान ने एक विशाल पोस्टर जारी कर अमेरिका को सैन्य कार्रवाई से बचने की कड़ी चेतावनी दी है। पोस्टर में US युद्धपोत (Aircraft Carrier) और Fighter Jet को ध्वस्त और समुद्र में खून बहते हुए दिखाया गया है। पोस्टर पर अंग्रेज़ी में लिखा है:“If you sow the wind, you will reap the whirlwind”(जो बुवाई करेगा, तूफान काटेगा) — यह स्पष्ट संदेश है कि किसी भी आक्रामक कदम का जवाब ईरान द्वारा दिया जाएगा। क्यों बढ़ रहा है तनाव? पोस्टर का संदेश विशेषज्ञों के अनुसार यह पोस्टर सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है। इसमें दिखाए गए ध्वस्त युद्धपोत और नष्ट विमान, समुद्र में खून के दृश्य के साथ, यह संदेश देते हैं कि यदि वास्तविक टकराव हुआ तो परिणाम भयंकर होंगे। यह ईरान द्वारा अमेरिका और उसके सहयोगियों को भेजी गई सख्त चेतावनी है। अंतरराष्ट्रीय नजर अंतरराष्ट्रीय समुदाय फिलहाल सैन्य टकराव रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। अमेरिका और Iran दोनों ही अपनी तैयारियों में लगे हैं, लेकिन किसी भी अप्रत्याशित कदम से मध्य पूर्व में सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अमेरिका

अमेरिका में 5 साल के बच्चे की हिरासत US Immigration Action ने इंसानियत पर सवाल खड़े किए

अमेरिका से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने इंसानियत, कानून और बच्चों के अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मिनेसोटा राज्य में एक पाँच साल के बच्चे को उसके पिता के साथ इमिग्रेशन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया। यह सब उस वक्त हुआ, जब बच्चा रोज़ की तरह स्कूल से घर लौट रहा था। घटना क्या थी? कोलंबिया हाइट्स इलाके में पाँच साल का लियाम कोनेजो रामोस अपने पिता एड्रियन अलेक्जेंडर कोनेजो एरियस के साथ प्री-स्कूल से लौट रहा था। तभी अमेरिकी इमिग्रेशन और कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के एजेंटों ने उनकी गाड़ी रुकवाई और दोनों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद पिता और बेटे को टेक्सास के एक डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया। बच्चे को “चारा” बनाने का आरोप स्थानीय स्कूल अधिकारियों और समुदाय के लोगों का कहना है कि एजेंटों ने बच्चे को जानबूझकर अपने साथ रखा ताकि घर के अन्य लोगों को बाहर बुलाया जा सके। इस दावे ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। कई लोगों का कहना है कि एक छोटे बच्चे को इस तरह की कार्रवाई में घसीटना अमानवीय है और उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकता है। सरकार का जवाब होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और ICE ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि बच्चा किसी तरह से निशाना नहीं था और कार्रवाई का उद्देश्य केवल पिता को हिरासत में लेना था। एजेंसी के मुताबिक, बच्चे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक अधिकारी को उसके साथ रखा गया। कानूनी स्थिति पर सवाल परिवार के समर्थकों और वकीलों का कहना है कि इस परिवार का अमेरिका में शरण (asylum) का मामला पहले से चल रहा था और उन्हें देश से निकालने का कोई अंतिम आदेश नहीं मिला था। ऐसे में अचानक हिरासत में लेना कानूनी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है। लोगों की प्रतिक्रिया और विरोध घटना सामने आते ही स्थानीय स्कूल प्रशासन, सामाजिक संगठनों और कई नेताओं ने ICE की कार्रवाई की आलोचना की। उनका कहना है कि इससे प्रवासी परिवारों में डर का माहौल बनता है और बच्चों की पढ़ाई व भावनात्मक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है। कई माता-पिता ने चिंता जताई कि अगर स्कूल से लौटते बच्चों के साथ ऐसा हो सकता है, तो कोई भी सुरक्षित नहीं है। इंसानियत बनाम कानून यह मामला सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि अमेरिका की इमिग्रेशन नीतियों और उनके लागू होने के तरीकों पर बड़ा सवाल है। आलोचकों का कहना है कि कानून लागू करना ज़रूरी है, लेकिन बच्चों को ऐसी सख्त कार्रवाई में शामिल करना न तो नैतिक है और न ही मानवीय। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Greenland

Greenland समझौता और Trump का टैरिफ फैसला Europe Relations पर असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यूरोपीय देशों पर लगाई जाने वाली 10% टैरिफ (Tariff) की धमकी वापस ले ली है। ये टैरिफ 1 फरवरी से लागू होने वाला था और इसे भविष्य में 25% तक बढ़ाने की चेतावनी भी दी गई थी। लेकिन अब ट्रंप ने इसे रद्द कर दिया है, और इसकी वजह उन्होंने NATO और Greenland पर एक समझौते का फ्रेमवर्क (Framework) बताया। किन देशों पर था टैरिफ खतरा? टैरिफ की योजना के तहत कुल 8 यूरोपीय देश निशाने पर थे: ट्रंप के अनुसार, NATO महासचिव मार्क रुट्टे के साथ बातचीत के बाद ग्रीनलैंड और आर्कटिक क्षेत्र पर भविष्य का फ्रेमवर्क तय हुआ। इसी के आधार पर उन्होंने टैरिफ को वापस लेने का निर्णय लिया। Greenland और Arctic की स्ट्रैटेजिक अहमियत ग्रीनलैंड को ट्रंप रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानते हैं। उन्होंने इसे अमेरिका के नियंत्रण में लाने की बात भी कही थी। इस प्रस्ताव ने यूरोपीय देशों में विरोध उत्पन्न किया था। टैरिफ की धमकी ने अमेरिकी-यूरोपीय संबंधों में तनाव पैदा किया और वैश्विक मार्केट में हलचल मचाई। हालांकि, फ्रेमवर्क की पूरी डिटेल अभी सार्वजनिक नहीं हुई है और कुछ यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप के दावों पर सवाल उठाए हैं। फिर भी, टैरिफ वापस लेने का कदम दोनों पक्षों के बीच संबंध सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। Human Angle: क्यों यह फैसला महत्वपूर्ण है? यह सिर्फ राजनीतिक निर्णय नहीं है, बल्कि लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर भी असर डालता है। टैरिफ से महंगाई बढ़ सकती थी और व्यापारिक रिश्तों में तनाव भी बढ़ सकता था। इसे वापस लेने से यूरोप और अमेरिका के बीच भरोसे का माहौल बना है और आर्थिक स्थिरता के संकेत भी मिल रहे हैं। संक्षेप में, ट्रंप ने ग्रीनलैंड विवाद को सुलझाने का दावा करते हुए यूरोपीय देशों पर टैरिफ योजना वापस ली। उन्होंने कहा कि NATO और अमेरिका के बीच भविष्य के समझौते का फ्रेमवर्क तैयार है। यह कदम दोनों पक्षों के बीच संबंधों में सुधार और भरोसा बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump

Trump Air Force One में तकनीकी खराबी Davos जाते समय बीच उड़ान से लौटे राष्ट्रपति ट्रम्प

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Trump) जब स्विट्ज़रलैंड के दावोस में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (World Economic Forum – WEF) में हिस्सा लेने के लिए रवाना हुए, तब उनकी यात्रा अचानक सुर्खियों में आ गई। राष्ट्रपति का विशेष विमान एयरफोर्स-वन टेकऑफ़ के कुछ ही देर बाद तकनीकी खराबी के कारण बीच उड़ान से वापस वाशिंगटन लौट आया। क्या थी तकनीकी खराबी जानकारी के मुताबिक, उड़ान के दौरान विमान में एक “मामूली इलेक्ट्रिकल समस्या” सामने आई। पायलटों और तकनीकी टीम ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जोखिम न लेने का फैसला किया और विमान को तुरंत मैरीलैंड स्थित जॉइंट बेस एंड्रयूज़ की ओर मोड़ दिया। कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि प्रेस केबिन की लाइट्स थोड़ी देर के लिए बंद हो गई थीं, जिससे यात्रियों को अंदाजा हो गया था कि कुछ गड़बड़ है। व्हाइट हाउस का बयान व्हाइट हाउस ने साफ किया कि यह कोई गंभीर संकट नहीं था, बल्कि एक एहतियाती कदम था। राष्ट्रपति ट्रम्प और उनका दल सुरक्षित रूप से बेस पर उतर गए। इसके बाद उन्हें दूसरे सरकारी विमान में स्थानांतरित किया गया ताकि वे दावोस की यात्रा जारी रख सकें। दावोस दौरे का महत्व ट्रम्प का दावोस दौरा काफ़ी अहम माना जा रहा है। वहां वे वैश्विक नेताओं और उद्योगपतियों से मुलाकात कर आर्थिक मुद्दों, निवेश और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर चर्चा करने वाले हैं। इस तकनीकी रुकावट से उनके कार्यक्रम में थोड़ी देरी जरूर हुई, लेकिन दौरा रद्द नहीं किया गया। पुराने विमान, नए सवाल गौरतलब है कि मौजूदा एयरफोर्स-वन विमान लगभग चार दशक पुराने हैं। पहले भी इनके रखरखाव और भरोसेमंद संचालन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इस ताज़ा घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि नए राष्ट्रपति विमानों की जरूरत कितनी जरूरी हो चुकी है। Trump का एयरफोर्स-वन तकनीकी खराबी के कारण बीच उड़ान से लौटना भले ही एक छोटी घटना लगे, लेकिन इससे राष्ट्रपति सुरक्षा, विमान की उम्र और आधुनिक तकनीक की जरूरत जैसे बड़े मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं। राहत की बात यह रही कि सब कुछ सुरक्षित रहा और राष्ट्रपति अपनी दावोस यात्रा दूसरे विमान से जारी रखने में सफल रहे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Asim Munir

Asim Munir Statement Islamic Countries में Pakistan को खास दर्जा मिलने का दावा

पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर (Asim Munir) का हालिया बयान इन दिनों न केवल पाकिस्तान बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान अपने गठन के “मूल मकसद” को पूरा करने के बेहद करीब पहुंच चुका है और अब उसकी पहचान इस्लामी देशों (Islamic World) के बीच पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो रही है। इस बयान के बाद कई सवाल उठ रहे हैं — क्या पाकिस्तान सच में अपनी दिशा बदल रहा है? और आखिर वह “मकसद” क्या है जिसकी बात आसिम मुनीर कर रहे हैं? पाकिस्तान का “मकसद” क्या बताया आसिम मुनीर ने? अपने संबोधन में आसिम मुनीर (Asim Munir) ने साफ तौर पर कहा किपाकिस्तान की नींव इस्लाम के नाम पर रखी गई थी, और अब देश उस सोच को वास्तविक रूप देने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उनका मानना है कि आज पाकिस्तान को मुस्लिम देशों के बीच जो सम्मान और स्थान मिल रहा है, वह यूं ही नहीं है, बल्कि यह वर्षों की रणनीति और संघर्ष का नतीजा है। उन्होंने इसे “अल्लाह की मेहरबानी” भी बताया। Islamic World में पाकिस्तान की बढ़ती अहमियत Asim Munir के बयान के पीछे हालिया घटनाक्रम भी अहम माने जा रहे हैं, जैसे: इन सबको मिलाकर देखा जाए तो पाकिस्तान खुद को अब सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि Muslim World का एक प्रभावशाली प्रतिनिधि के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा है। बयान का समय क्यों है खास? यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान: ऐसे में यह बयान केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राजनीतिक और रणनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। समर्थन और विरोध – दोनों तरफ से प्रतिक्रियाएं जहां एक ओर पाकिस्तान में कुछ लोग आसिम मुनीर के बयान को“राष्ट्रीय आत्मविश्वास बढ़ाने वाला” मान रहे हैं,वहीं आलोचकों का कहना है कि: भारत और दक्षिण एशिया पर असर? Asim Munir का यह बयान भारत और पड़ोसी देशों के लिए भी अहम माना जा रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार: निष्कर्ष: सिर्फ बयान या आने वाले बदलाव की झलक? Asim Munir का यह बयान केवल एक भाषण नहीं, बल्कि पाकिस्तान की भविष्य की सोच और रणनीति की झलक देता है।क्या पाकिस्तान सच में अपने “मकसद” के करीब है या यह सिर्फ एक राजनीतिक-धार्मिक नैरेटिव है — इसका जवाब आने वाला समय देगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Greenland

Greenland क्यों बना Global Hotspot आर्कटिक की बर्फ पिघलने से बढ़ा खतरा

दुनिया का ध्यान अब ग्रीनलैंड (Greenland) की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आर्कटिक (Arctic) की बर्फ पिघल रही है और इस छोटे से बर्फीले इलाके ने वैश्विक राजनीति और आर्थिक रणनीति में अपनी जगह बना ली है। कभी शांत, दूर-दराज और उपेक्षित माना जाने वाला यह क्षेत्र आज अमेरिका, रूस और चीन जैसी महाशक्तियों के लिए रणनीतिक और आर्थिक मोर्चा बन गया है। बर्फ पिघलना और नए अवसर ग्रीनलैंड की बर्फ के तेज़ी से पिघलने का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं है। इससे: खनिजों का खजाना: Rare Minerals ग्रीनलैंड में रेयर अर्थ एलिमेंट्स, लिथियम, कोबाल्ट, निकल और यूरेनियम जैसे खनिज पाए जाते हैं। ये आधुनिक दुनिया की तकनीक और ग्रीन एनर्जी (Green Energy) के लिए जीवनदायिनी हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, मोबाइल, मिसाइल सिस्टम और सेमीकंडक्टर उद्योग इन खनिजों पर निर्भर हैं। यही वजह है कि बड़ी शक्तियाँ इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती हैं। महाशक्तियों की बढ़ती दिलचस्पी अमेरिका (USA) अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड सिर्फ डेनमार्क का हिस्सा नहीं, बल्कि उत्तरी अमेरिका की सुरक्षा और आर्कटिक में रणनीतिक ताकत का आधार है। थ्यूल स्पेस बेस (Thule Space Base) जैसे सैन्य अड्डे अमेरिका की पकड़ मजबूत करते हैं। रूस (Russia) रूस ने आर्कटिक में नए सैन्य ठिकाने, परमाणु पनडुब्बियाँ और रडार सिस्टम स्थापित किए हैं। ग्रीनलैंड पर किसी अन्य देश का प्रभाव रूस के लिए चुनौतीपूर्ण है। चीन (China) चीन खुद को “Near-Arctic State” कहता है और निवेश, खनिज दोहन और इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता है। बढ़ता सैन्य और सुरक्षा खतरा आर्कटिक अब ‘नो-मैन ज़ोन’ नहीं रहा। बर्फ पिघलने से मिसाइल और सैन्य गतिविधियों के लिए सबसे छोटा रास्ता खुल गया है। बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ किसी भी गलती या मिसअंडरस्टैंडिंग से वैश्विक संघर्ष का कारण बन सकती हैं। ग्रीनलैंड के सामने चुनौतियाँ ग्रीनलैंड की आबादी कम है, लेकिन संसाधन बहुत हैं। आर्थिक विकास और विदेशी निवेश की ज़रूरत है, लेकिन महाशक्तियों के मोहरे में बदलने का डर भी है। इसके अलावा स्थानीय आबादी और पर्यावरण पर खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। ग्रीनलैंड अब सिर्फ बर्फीला क्षेत्र नहीं रह गया है। यह वैश्विक राजनीति, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और तकनीकी वर्चस्व की चाबी बन चुका है। जैसे-जैसे आर्कटिक की बर्फ पिघलेगी, ग्रीनलैंड की महत्वता और महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा और तेज़ होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tariff

Trump Greenland Threat ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी से बढ़ा वैश्विक तनाव, कनाडा-डेनमार्क आमने-सामने

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Trump) एक बार फिर अपने बयानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। इस बार मामला दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड (Greenland) का है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर दूसरे देश अमेरिका के ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की योजना का समर्थन नहीं करते, तो उन पर भारी टैरिफ (Tariff Threat) लगाए जा सकते हैं। उनके इस बयान ने वैश्विक राजनीति में नई बहस और चिंता को जन्म दे दिया है। ट्रंप की धमकी और अमेरिका का तर्क Trump का कहना है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) के लिए बेहद अहम है। उन्होंने आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका अपने हितों की अनदेखी नहीं कर सकता। ट्रंप के मुताबिक, टैरिफ लगाना उन देशों पर दबाव बनाने का एक तरीका हो सकता है जो अमेरिका की इस रणनीति के रास्ते में खड़े हैं। डेनमार्क और ग्रीनलैंड का सख्त रुख Trump के बयान के बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड की प्रतिक्रिया भी उतनी ही साफ और सख्त रही। डेनमार्क ने दो टूक कहा कि ग्रीनलैंड उसकी संप्रभुता के अंतर्गत आता है और किसी भी तरह की धमकी या सौदेबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी। वहीं ग्रीनलैंड के स्थानीय नेताओं ने भावनात्मक लहजे में कहा कि यह द्वीप “बिकाऊ नहीं है” और वहां के लोग अपने भविष्य का फैसला खुद करेंगे। कनाडा और यूरोपीय देशों का समर्थन इस पूरे विवाद में कनाडा भी खुलकर सामने आया है। कनाडाई प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देश हर हाल में ग्रीनलैंड के साथ खड़ा है और उसकी संप्रभुता का सम्मान करता है। इसके अलावा कई यूरोपीय देशों और नाटो सहयोगियों ने भी ट्रंप की टैरिफ धमकी को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि किसी भी क्षेत्र पर जबरन कब्जे की सोच आधुनिक विश्व व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। क्यों इतना अहम है ग्रीनलैंड? ग्रीनलैंड केवल बर्फ से ढका एक द्वीप नहीं है। यह इलाका के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जलवायु परिवर्तन के कारण यहां नए रास्ते और संसाधन सामने आ रहे हैं, जिससे बड़ी ताकतों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। ग्रीनलैंड को लेकर Trump की टैरिफ धमकी ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वैश्विक राजनीति में शक्ति और हितों की टकराहट कितनी गहरी हो सकती है। जहां अमेरिका अपने सुरक्षा हितों की बात कर रहा है, वहीं ग्रीनलैंड, डेनमार्क और उनके समर्थक देश संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर जोर दे रहे हैं। आने वाले समय में यह विवाद किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Venezuela

US–Venezuela Relations मचाडो का भावनात्मक कदम, Trump को दिया Nobel Prize पदक

Venezuela Politics से जुड़ी एक बड़ी और भावनात्मक खबर सामने आई है। वेनेज़ुएला की चर्चित विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो (Maria Corina Machado) ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को अपने Nobel Peace Prize का पदक प्रतीकात्मक रूप से सौंपा है। इस मुलाकात के बाद मचाडो ने कहा कि उन्हें अब “अमेरिकी राष्ट्रपति पर भरोसा है”। यह मुलाकात वॉशिंगटन में हुई, जिसने न सिर्फ वेनेज़ुएला की राजनीति बल्कि US–Venezuela Relations को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। Nobel Prize देना प्रतीकात्मक, नियम नहीं बदले मारिया कोरिना मचाडो को हाल ही में Venezuela में लोकतंत्र, मानवाधिकार और तानाशाही के खिलाफ संघर्ष के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। ट्रंप को दिया गया पदक केवल एक प्रतीकात्मक सम्मान है। नोबेल समिति पहले ही साफ कर चुकी है कि नोबेल पुरस्कार किसी और को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता और आधिकारिक तौर पर यह सम्मान मचाडो के नाम पर ही रहेगा। President बनने की चर्चा थी, लेकिन Trump का खुला समर्थन नहीं पिछले कुछ महीनों से यह चर्चा तेज थी कि मचाडो वेनेज़ुएला (Venezuela) की अगली राष्ट्रपति बन सकती हैं। उन्हें देश के भीतर और बाहर लोकतंत्र समर्थक चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस मुलाकात के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने उनके राष्ट्रपति बनने का खुलकर समर्थन नहीं किया। ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिका वेनेज़ुएला में मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए सभी विकल्प खुले रखना चाहता है। इससे साफ है कि अमेरिका की नीति अभी पूरी तरह किसी एक नेता पर केंद्रित नहीं है। बदला हुआ रुख, भरोसे का संदेश दिलचस्प बात यह है कि पहले मचाडो ट्रंप की नीतियों को लेकर सतर्क नजर आती थीं। लेकिन अब उनका बयान बदला हुआ दिखता है। पदक सौंपने के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका और ट्रंप वेनेज़ुएला में लोकतंत्र बहाल करने में अहम भूमिका निभाएंगे। उनके इस कदम को कई लोग एक राजनीतिक अपील के तौर पर देख रहे हैं, ताकि अमेरिका का समर्थन उनके आंदोलन को और मजबूती दे सके। Expert View: इसका मतलब क्या है? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम एक कूटनीतिक संदेश है। इससे साफ है कि वेनेज़ुएला की सत्ता को लेकर तस्वीर अभी भी धुंधली बनी हुई है। Trump–Machado Meeting और Nobel Peace Prize का यह प्रतीकात्मक कदम भावनात्मक जरूर है, लेकिन इससे तुरंत कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव होना तय नहीं माना जा रहा। मचाडो को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है, पर वेनेज़ुएला की सत्ता तक पहुंचने का रास्ता अब भी लंबा और मुश्किल है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Voter ID

30 Crore Voter ID Cards होंगे अपडेट, पहचान और Verification होगा आसान

देशभर के करोड़ों मतदाताओं के लिए जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। चुनाव आयोग पुराने वोटर आईडी कार्ड्स को अपडेट करने की तैयारी में है। इस अभियान के तहत करीब 30 करोड़ Voter ID Cards में मौजूद धुंधले फोटो बदले जाएंगे और जिन कार्ड्स में मकान नंबर की जगह “00” लिखा है, वहां पूरा और सही पता दर्ज किया जाएगा। दरअसल, लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं कि कई वोटर कार्ड्स में फोटो इतने पुराने या धुंधले हैं कि पहचान करना मुश्किल हो जाता है। वहीं कई कार्ड्स में अधूरा पता होने से वोटिंग के दौरान लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब चुनाव आयोग इन खामियों को दूर करने के लिए बड़ा अपडेट अभियान शुरू करने जा रहा है। Blur Photo और गलत Address बने परेशानी की वजह ग्रामीण और शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे वोटर कार्ड पाए गए हैं, जिनमें फोटो साफ दिखाई नहीं देते। कई मामलों में कार्ड पर सिर्फ “00” लिखा होने से सही पता पता नहीं चल पाता। इससे मतदान केंद्रों पर पहचान सत्यापन में समय ज्यादा लगता है और कई बार विवाद जैसी स्थिति भी बन जाती है। इसी को देखते हुए अब रिकॉर्ड को ज्यादा सटीक और डिजिटल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस कदम से फर्जी मतदान रोकने में भी मदद मिलेगी। कैसे होगा Voter Card Update? जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग चरणबद्ध तरीके से यह प्रक्रिया पूरी करेगा। जरूरत पड़ने पर मतदाताओं से नया फोटो और सही पता मांगा जा सकता है। कई जगह ऑनलाइन अपडेट की सुविधा भी दी जाएगी ताकि लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। अगर किसी मतदाता के कार्ड में फोटो साफ नहीं है या पता गलत दर्ज है, तो उसे अपडेट करवाने का मौका मिलेगा। आयोग का फोकस डेटा को पूरी तरह साफ और आधुनिक बनाने पर है। चुनाव से पहले रिकॉर्ड सुधारने की तैयारी आने वाले चुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग मतदाता सूची और पहचान संबंधी रिकॉर्ड को मजबूत करना चाहता है। साफ फोटो और सही एड्रेस होने से मतदान प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान करोड़ों लोगों के लिए राहत लेकर आएगा, क्योंकि लंबे समय से लोग पुराने और खराब प्रिंट वाले वोटर कार्ड्स की समस्या झेल रहे थे।
India vs Afghanistan

India vs Afghanistan ODI 2026: पहली बार भारत के खिलाफ वनडे सीरीज खेलेगा अफगानिस्तान

भारत और अफगानिस्तान (India vs Afghanistan) के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आगाज आज धर्मशाला के खूबसूरत HPCA स्टेडियम में होने जा रहा है। यह सीरीज इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि अफगानिस्तान पहली बार भारत के खिलाफ पूरी ODI सीरीज खेलने उतर रहा है। दोनों टीमों के फैंस इस मुकाबले का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, लेकिन मैच से पहले मौसम ने चिंता बढ़ा दी है। Kohli-Hardik के बिना उतरेगी Team India भारतीय टीम इस सीरीज में कई बड़े बदलावों के साथ मैदान पर उतरेगी। स्टार बल्लेबाज विराट कोहली चोट के कारण उपलब्ध नहीं हैं, जबकि हार्दिक पंड्या भी फिटनेस समस्या की वजह से टीम से बाहर हैं। ऐसे में टीम इंडिया की जिम्मेदारी कप्तान रोहित शर्मा और युवा खिलाड़ियों पर होगी। टीम मैनेजमेंट इस सीरीज को भविष्य की तैयारी के तौर पर देख रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स को ध्यान में रखते हुए कुछ नए खिलाड़ियों को मौका दिया जा सकता है। ईशान किशन, यशस्वी जायसवाल और नितीश कुमार रेड्डी जैसे युवा खिलाड़ियों पर सभी की नजरें रहेंगी। Afghanistan के पास भी हैं मैच विनर खिलाड़ी अफगानिस्तान की टीम अब सिर्फ कमजोर टीम नहीं मानी जाती। पिछले कुछ वर्षों में टीम ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है। राशिद खान, मोहम्मद नबी और रहमानुल्लाह गुरबाज जैसे खिलाड़ी किसी भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। भारतीय परिस्थितियों में खेलने का अनुभव भी अफगानिस्तान के खिलाड़ियों के पास है। ऐसे में टीम इंडिया के लिए यह सीरीज आसान नहीं रहने वाली। Dharamshala Weather ने बढ़ाई टेंशन धर्मशाला में मौसम मैच का सबसे बड़ा विलेन बन सकता है। मौसम विभाग के अनुसार मुकाबले के दौरान करीब 55 प्रतिशत बारिश की संभावना है। सुबह से ही इलाके में बादल छाए हुए हैं और हल्की बारिश भी देखने को मिली है। अगर बारिश लगातार होती रही तो मैच में ओवर कट सकते हैं या मुकाबला प्रभावित भी हो सकता है। हालांकि फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि मौसम साफ हो और उन्हें पूरा मैच देखने को मिले। तेज गेंदबाजों को मिल सकती है मदद धर्मशाला की पिच आमतौर पर तेज गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। बादलों और नमी की वजह से शुरुआती ओवरों में गेंद ज्यादा स्विंग कर सकती है। ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी चुन सकती है। मैच की जरूरी जानकारी भारत जहां घरेलू मैदान का फायदा उठाकर सीरीज में जीत के साथ शुरुआत करना चाहेगा, वहीं अफगानिस्तान की नजर इतिहास रचने पर होगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि बारिश के बीच कौन सी टीम मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Pranit More

Pranit More Controversy: महिलाओं पर विवादित Comments के बाद कॉमेडियन की माफी

स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे (Pranit More) एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। महिलाओं को लेकर किए गए विवादित कमेंट्स के बाद इंटरनेट पर उनके खिलाफ भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। मामला बढ़ने के बाद अब कॉमेडियन ने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगते हुए लोगों से एक मौका देने की अपील की है। प्रणित मोरे का एक वीडियो पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह महिलाओं को लेकर ऐसी टिप्पणियां करते दिखाई दिए, जिन्हें कई लोगों ने अपमानजनक और असंवेदनशील बताया। वीडियो सामने आने के बाद यूजर्स ने जमकर आलोचना शुरू कर दी और देखते ही देखते मामला सोशल मीडिया ट्रेंड बन गया। Viral Video के बाद बढ़ा विवाद वीडियो वायरल होने के बाद X, Instagram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने कहा कि कॉमेडी के नाम पर महिलाओं का मजाक उड़ाना गलत है। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर मनोरंजन की सीमा क्या होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर #PranitMoreControversy ट्रेंड करने लगा और कई महिला संगठनों ने भी इस बयान पर नाराजगी जताई। सोशल मीडिया पोस्ट में मांगी माफी लगातार बढ़ते विवाद के बीच प्रणित मोरे ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक लंबा नोट शेयर किया। उन्होंने माना कि उनके शब्दों से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। प्रणित ने लिखा, “मैं समझता हूं कि लोग मुझसे नाराज हैं। शायद मैं इस नफरत का हकदार भी हूं, लेकिन मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि लोग मुझे खुद को सुधारने का एक मौका दें।” उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था, लेकिन अब उन्हें अपनी गलती का एहसास हो चुका है। लोगों की राय बंटी हुई नजर आई इस पूरे मामले में सोशल मीडिया यूजर्स दो हिस्सों में बंटे नजर आए। कुछ लोगों का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह की भाषा स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। वहीं दूसरी तरफ कुछ यूजर्स का मानना है कि गलती मान लेने के बाद किसी को सुधारने का मौका मिलना चाहिए। हालांकि, विवाद अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है और सोशल मीडिया पर बहस जारी है। करियर पर पड़ सकता है असर मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि इस विवाद का असर प्रणित मोरे की इमेज और करियर पर पड़ सकता है। आज के डिजिटल दौर में किसी भी बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिलती है और सोशल मीडिया का दबाव कई बार कलाकारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। फिलहाल, सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि दर्शक और इंडस्ट्री उनके माफीनामे को किस तरह लेते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
S Jaishankar

3 भारतीयों की मौत से भारत सख्त, US Secretary S Jaishankar की अहम बातचीत

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने नागरिकों की मौत को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री S Jaishankar ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत कर कॉमर्शियल जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता और विरोध दर्ज कराया। भारत ने साफ शब्दों में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर चल रहे व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना पूरी तरह गलत है और इससे वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। क्या है पूरा मामला? हाल ही में मध्य पूर्व के समुद्री क्षेत्र में एक कॉमर्शियल जहाज पर हमला हुआ था। इस हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। घटना के बाद भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पीड़ित परिवारों के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से बातचीत के दौरान इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया और कहा कि निर्दोष नागरिकों की जान जाना बेहद दुखद है। भारत ने क्या कहा? विदेश मंत्री जयशंकर ने बातचीत में कहा कि समुद्री व्यापार दुनिया की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में कॉमर्शियल जहाजों पर हमला न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे वैश्विक व्यापार और कई देशों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और इस तरह की घटनाओं को लेकर बेहद संवेदनशील है। Middle East Tension पर बढ़ी चिंता मध्य पूर्व में पिछले कुछ समय से तनाव लगातार बढ़ रहा है। कई देशों ने समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव और कूटनीतिक गतिविधियों को और तेज कर सकते हैं। भारत भी लगातार शांति और सुरक्षित समुद्री व्यापार की वकालत करता रहा है। भारत सरकार की नजर स्थिति पर सरकार ने कहा है कि प्रभावित भारतीयों के परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी। साथ ही क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। इस घटना के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील भी की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
धर्मेंद्र प्रधान

“खेल और पढ़ाई साथ-साथ चलेंगे” — Bhopal में धर्मेंद्र प्रधान ने खिलाड़ियों को दिया बड़ा संदेश

भोपाल में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खिलाड़ियों के साथ संवाद करते हुए देश की नई शिक्षा और खेल नीति को लेकर बड़ा संदेश दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर धर्मेंद्र प्रधान मध्यप्रदेश पहुंचे, जहां उन्होंने खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के साथ शूटिंग एकेडमी का दौरा किया। खिलाड़ियों से सीधा संवाद, स्किल और स्पोर्ट्स पर जोर इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से मुलाकात की और कहा कि भारत अब शिक्षा के साथ-साथ स्किल और स्पोर्ट्स सेक्टर में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के जरिए पहली बार खेल और पढ़ाई को एक साथ जोड़ने पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। पढ़ाई और खेल साथ-साथ चलेंगे धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अब ऐसा सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिससे खिलाड़ी अपनी पढ़ाई और खेल दोनों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ा सकें। इसके लिए अलग से कोर्स वर्क तैयार किया जा रहा है, ताकि छात्रों को खेल गतिविधियों का भी अकादमिक लाभ मिल सके। APAAR ID और Credit Score सिस्टम पर काम उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों की APAAR ID के माध्यम से उनकी पढ़ाई और खेल उपलब्धियों को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा। साथ ही इंटर स्पोर्ट्स एक्टिविटी को क्रेडिट स्कोर सिस्टम से जोड़ने की तैयारी भी की जा रही है। इससे खिलाड़ियों को भविष्य में शिक्षा और करियर दोनों में फायदा मिलेगा। IIT में Sports Quota से युवाओं को मिलेगा फायदा केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार IIT जैसे बड़े संस्थानों में स्पोर्ट्स कोटा लागू किया गया है। यह कदम उन युवाओं के लिए नई उम्मीद लेकर आया है, जो खेल के साथ-साथ उच्च शिक्षा में भी आगे बढ़ना चाहते हैं। 2036 Olympics और Developed India Vision 2047 पर फोकस उन्होंने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले 20 वर्षों में भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत का फोकस अब 2036 ओलंपिक की तैयारियों पर भी है और देश खेलों में विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में काम कर रहा है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जब भारत आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब प्रधानमंत्री मोदी का विकसित भारत का सपना साकार होगा और देश दुनिया की महाशक्ति के रूप में उभरेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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