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Donald Trump

Donald Trump vs Venezuela Maduro Arrest Claim के बाद Caracas में Explosions से हड़कंप

अमेरिका और वेनेज़ुएला के रिश्तों में शनिवार को उस वक्त भूचाल आ गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाला दावा किया। ट्रंप ने कहा कि वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) और उनकी पत्नी को अमेरिकी सुरक्षा बलों ने पकड़ लिया है और उन्हें देश से बाहर ले जाया गया है। यह दावा ऐसे समय पर आया है जब वेनेज़ुएला की राजधानी कराकस (Caracas) समेत कई इलाकों में जोरदार धमाकों और सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आईं। Trump का बड़ा बयान, दुनिया में हलचल डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह कार्रवाई “बड़े पैमाने पर किए गए सैन्य ऑपरेशन” का हिस्सा थी। उन्होंने इसे अमेरिका की एक “सफल रणनीतिक कार्रवाई” बताया और कहा कि जल्द ही इस पर आधिकारिक ब्रीफिंग दी जाएगी। ट्रंप के इस बयान के बाद दुनियाभर के मीडिया और सरकारों में हलचल मच गई। हालांकि, अब तक मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन या स्वतंत्र एजेंसी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। Caracas में धमाके, लोगों में डर का माहौल स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार तड़के कराकस और आसपास के इलाकों में कई जोरदार विस्फोट सुने गए। कुछ इलाकों में बिजली गुल हो गई और आसमान में धुएँ के गुबार देखे गए।इन घटनाओं के बाद आम लोगों में डर और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। Venezuela सरकार का पलटवार वेनेज़ुएला सरकार ने अमेरिकी दावों को “झूठा और भड़काऊ प्रचार” बताया है। सरकारी बयान में कहा गया कि अमेरिका ने देश की संप्रभुता पर हमला किया है, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। मादुरो सरकार ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर दी है और सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि देश अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। पहले से तनावपूर्ण थे US–Venezuela संबंध अमेरिका और वेनेज़ुएला के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से अमेरिका, मादुरो सरकार पर जैसे गंभीर आरोप लगाता रहा है। ट्रंप पहले भी मादुरो को “नार्को-टेररिस्ट” कह चुके हैं और उन पर इनाम तक घोषित किया गया था। अभी क्या है सच्चाई? फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है किक्या वाकई Nicolas Maduro गिरफ्तार हो चुके हैं? ट्रंप का दावा ज़रूर सुर्खियों में है, लेकिन जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं होती, तब तक स्थिति पूरी तरह साफ नहीं कही जा सकती। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Venezuela

Venezuela में Explosions Caracas में धमाकों से बढ़ी Panic, अमेरिका-Venezuela Tensions और भी तेज़

वेनेजुएला (Venezuela) की राजधानी काराकास में आज सुबह कई जोरदार धमाके (explosions) सुनाई दिए, जिससे शहर में अफरा-तफरी और panic फैल गया। स्थानीय लोग सुबह के समय अचानक उठे और बाहर निकलकर देखा कि आसमान में low-flying aircrafts उड़ रहे थे और कुछ इलाकों में smoke उठ रही थी। धमाकों के समय शहर के कई हिस्सों में power outage भी हुआ। लोगों ने बताया कि यह आवाज़ इतनी तेज़ थी कि घर और गाड़ियों में कंपन महसूस हुआ। हालांकि, अभी तक कोई official confirmation नहीं आई है कि धमाके किस कारण हुए या इसके पीछे कौन जिम्मेदार है। अमेरिका और Venezuela के बीच बढ़ता तनाव यह घटना ऐसे समय में हुई है जब US और Venezuela के बीच political और military tensions बढ़ रहे हैं। पिछले हफ्तों में अमेरिका ने Caribbean क्षेत्र में अपनी military presence बढ़ाई और ड्रग ट्रैफिकिंग के मामलों में strikes on vessels किए। दिसंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुलासा किया था कि अमेरिकी बलों ने Venezuela में एक suspected drug facility को निशाना बनाया था। दूसरी ओर, वेनेजुएला (Venezuela) के राष्ट्रपति Nicolás Maduro ने अमेरिका के साथ dialogue और talks की पेशकश की है, लेकिन उन्होंने वाशिंगटन पर regime change की कोशिश और देश के oil resources पर नियंत्रण का आरोप भी लगाया। क्या नहीं पता इस घटना का महत्व यह Caracas में हाल के महीनों की सबसे गंभीर सुरक्षा घटना मानी जा रही है। इससे: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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China

China Taiwan Military Drill 2025 Wang Yi के बयान के बाद ताइवान के पास युद्धाभ्यास

साल 2025 का अंत दुनिया के लिए बेचैनी भरी खबरों के साथ हुआ, जब चीन और ताइवान के बीच तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया। चीन ने ताइवान के चारों ओर बड़े पैमाने पर Live Fire Military Exercise शुरू कर दिए, जिनमें मिसाइल, रॉकेट, युद्धपोत और लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया। इन सैन्य अभ्यासों ने पूरे एशिया में युद्ध की आशंका (War Fear in Asia) को और गहरा कर दिया है। ताइवान के चारों ओर सैन्य घेराबंदी China की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने ताइवान को चारों तरफ़ से घेरते हुए समुद्र और आसमान दोनों में युद्धाभ्यास किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन ड्रिल्स में ताइवान के अहम बंदरगाहों और समुद्री रास्तों को रोकने की रणनीति का अभ्यास किया गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ़ अभ्यास नहीं, बल्कि ताइवान पर दबाव बनाने की खुली रणनीति है। Wang Yi का सख़्त बयान China के विदेश मंत्री Wang Yi ने साफ़ शब्दों में कहा कि ताइवान चीन का हिस्सा है और उसका एकीकरण “ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी” है। उन्होंने अमेरिका और पश्चिमी देशों पर आरोप लगाया कि वे ताइवान के ज़रिए चीन को उकसाने की कोशिश कर रहे हैं। बीजिंग का कहना है कि हाल ही में हुए US–Taiwan Arms Deal और ताइवान के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय संपर्कों ने हालात और तनावपूर्ण बना दिए हैं। Taiwan on High Alert China की गतिविधियों के बाद ताइवान की सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। ताइवानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, चीन के दर्जनों युद्धपोत और बड़ी संख्या में फाइटर जेट्स ताइवान के आसपास देखे गए। ताइवान सरकार ने इन ड्रिल्स को खतरनाक, उकसावे वाला और क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा बताया है। आम नागरिकों के बीच भी डर का माहौल है, क्योंकि उड़ानों और समुद्री व्यापार पर असर पड़ा है। International Reaction: दुनिया की बढ़ती चिंता China की इस सैन्य कार्रवाई पर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अन्य Indo-Pacific देशों ने चिंता जताई है। अमेरिका ने एक बार फिर ताइवान की सुरक्षा के समर्थन की बात कही, जबकि कई देशों ने चीन से संयम बरतने की अपील की है। विश्लेषकों का कहना है कि ताइवान स्ट्रेट में किसी भी तरह का टकराव Global Trade Routes और Supply Chain को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। क्यों अहम है China–Taiwan Conflict? यह चीन द्वारा हाल के वर्षों में किया गया सबसे बड़ा और आक्रामक सैन्य प्रदर्शन माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह अभ्यास भविष्य की रणनीति का संकेत है और ताइवान के साथ-साथ पूरी दुनिया के लिए चेतावनी भी। 2025 के अंत में बढ़ा यह तनाव दिखाता है कि आने वाले समय में China–Taiwan Relations और ज्यादा जटिल और खतरनाक हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Thailand

Border Tension Ends Thailand–Cambodia Ceasefire से सीमा पर लौटी राहत और उम्मीद

कई हफ्तों तक चली भीषण झड़पों और निर्दोष लोगों की पीड़ा के बाद आखिरकार Thailand और Cambodia ने राहत की सांस ली है। दोनों देशों ने आपसी सहमति से तत्काल Ceasefire (संघर्ष विराम) लागू करने का ऐलान किया है। इस फैसले से हजारों विस्थापित परिवारों को अपने घर लौटने की उम्मीद जगी है। कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह संघर्ष विराम 27 दिसंबर को दोपहर 12 बजे (स्थानीय समय) से प्रभावी हो गया। समझौते पर दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने हस्ताक्षर किए और सीमा पर सभी तरह की सैन्य कार्रवाइयों को रोकने का निर्णय लिया गया। सीमा पर थमी गोलियां, इंसानियत को मिली राहत पिछले कुछ हफ्तों में Thailand–Cambodia सीमा पर हालात बेहद चिंताजनक हो गए थे। तोपखाने, रॉकेट हमलों और हवाई हमलों ने आम लोगों की जिंदगी को तहस-नहस कर दिया। स्कूल बंद हो गए, खेत खाली रह गए और करीब पांच लाख से ज्यादा लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए। इस Ceasefire Agreement के तहत दोनों देशों ने तय किया है कि: 18 सैनिकों की रिहाई और ASEAN की भूमिका समझौते में यह भी कहा गया है कि यदि संघर्ष विराम 72 घंटे तक बना रहता है, तो थाईलैंड द्वारा हिरासत में लिए गए 18 कंबोडियाई सैनिकों को रिहा कर दिया जाएगा। इसके अलावा, Ceasefire की निगरानी के लिए ASEAN (आसियान) के पर्यवेक्षकों को तैनात किया जाएगा, ताकि दोनों पक्ष समझौते का पालन करें। पुराना विवाद, नई चुनौती Thailand और कंबोडिया के बीच सीमा लगभग 817 किलोमीटर लंबी है और इसके कुछ हिस्सों को लेकर दशकों से विवाद चला आ रहा है। इस महीने की शुरुआत में एक पुराना तनाव फिर से हिंसा में बदल गया था, जिससे पहले हुआ संघर्ष विराम भी टूट गया। इस संघर्ष में 100 से अधिक लोगों की जान गई, जिनमें आम नागरिक भी शामिल थे। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और क्षेत्रीय संगठन लगातार शांति की अपील कर रहे थे। क्या यह शांति टिक पाएगी? विशेषज्ञों का मानना है कि यह Ceasefire एक अहम कदम है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए सिर्फ हथियारों का शांत होना काफी नहीं है। दोनों देशों को अब बातचीत की मेज पर बैठकर सीमा विवाद का राजनीतिक और कूटनीतिक हल निकालना होगा। फिलहाल, सीमा पर रहने वाले लोगों के लिए यह खबर किसी उम्मीद से कम नहीं। गोलियों की आवाज़ थम चुकी है और लोग एक बार फिर सामान्य जीवन की ओर लौटने की कोशिश कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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टोरंटो

Indian Students Murdered in Canada टोरंटो में दो भारतीय छात्रों की हत्या

टोरंटो, Canada में पिछले दो हफ्तों के भीतर दो भारतीय छात्रों की हत्या की घटनाओं ने पूरे समुदाय को झकझोर दिया है। यह घटनाएँ न केवल भारतीय छात्रों बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय छात्र समुदाय के लिए एक चेतावनी हैं। Shivank Awasthi – A Bright Student Lost Too Soon 20 वर्षीय शिवांक अवस्थी, टोरंटो विश्वविद्यालय के स्कारबोरो परिसर में डॉक्टोरल स्टूडेंट थे। 23 दिसंबर 2025 को उन्हें Highland Creek Trail और Old Kingston Road के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई।पुलिस ने इसे हत्याकांड (Homicide) करार दिया और अभी तक आरोपी फरार हैं। इस घटना ने टोरंटो में इस साल की 41वीं हत्या के रूप में दर्ज की गई। भारतीय कांसुलेट जनरल, टोरंटो ने इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त किया और परिवार की सहायता के लिए कदम उठाए। शिवांक के दोस्तों और सहपाठियों में गहरा शोक फैला हुआ है। Himanshi Khurana – Tragic Loss of a Young Life 30 वर्षीय हिमांशी खुराना, टोरंटो में रह रही भारतीय नागरिक, अपने घर में मृत पाई गईं। पुलिस का मानना है कि यह इंटिमेट पार्टनर वायलेंस (Intimate Partner Violence) का मामला हो सकता है। इस मामले में 32 वर्षीय अब्दुल गफूरी के खिलाफ कनाडा वाइड वारंट जारी किया गया है। हिमांशी की हत्या के साथ ही टोरंटो में इस साल 40वीं हत्या दर्ज की गई। भारतीय कांसुलेट ने उनके परिवार को मदद और समर्थन देने का आश्वासन दिया। Impact on Indian Students and Community इन दोनों घटनाओं ने टोरंटो में भारतीय छात्रों और समुदाय के लोगों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। छात्र और परिवार सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं।सामाजिक मीडिया और स्थानीय न्यूज़ चैनल्स पर भी इन घटनाओं को लेकर चर्चा बढ़ी है। लोग अंतरराष्ट्रीय छात्रों की सुरक्षा बढ़ाने और पुलिस से तेजी से कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। Conclusion टोरंटो में हुई ये हत्याएँ सिर्फ अपराध की घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि यह हमारे समाज को याद दिलाती हैं कि सुरक्षा और समर्थन कितना महत्वपूर्ण है। भारतीय कांसुलेट और स्थानीय प्रशासन दोनों ही इस मामले में पूरी गंभीरता से काम कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lord Vishnu

Lord Vishnu Statue Demolition in Thailand Cambodia Border भारत और हिंदू भावनाओं पर असर

थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा पर हाल ही में हुई घटना ने भौगोलिक विवाद और धार्मिक भावनाओं को एक साथ उजागर कर दिया है। सीमा के विवादित इलाके में स्थित भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की मूर्ति को थाई सेना द्वारा तोड़ दिया गया, जिससे क्षेत्रीय तनाव फिर से बढ़ गया है। क्या हुआ? – What Happened कंबोडिया के Preah Vihear प्रांत के अनसेस (An Ses) इलाके में 2014 में बनाई गई यह प्रतिमा अचानक ध्वस्त कर दी गई। स्थानीय अधिकारियों का दावा है कि यह कंबोडियाई क्षेत्र में ही थी, और इसे तोड़ने का काम थाई सेना ने भारी मशीनरी से किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने लोगों की भावनाओं को झकझोर दिया। कंबोडिया की प्रतिक्रिया – Cambodia Reacts कंबोडियाई अधिकारियों ने इसे सांस्कृतिक और धार्मिक अपमान बताया। उनका कहना है कि प्रतिमा उनके क्षेत्र में होने के बावजूद इसे नष्ट करना उनकी संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव के खिलाफ है। भारत की चिंता – India’s Concern भारत ने इस घटना को गंभीर और असम्मानजनक माना। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि यह कार्य विश्वभर के श्रद्धालुओं की भावनाओं को चोट पहुँचाता है।MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भगवान विष्णु जैसी धार्मिक प्रतिमाएं सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत का हिस्सा हैं। उन्होंने दोनों देशों से कूटनीतिक संवाद और शांति बहाल करने का आग्रह किया। थाईलैंड का बयान – Thailand’s Statement थाई अधिकारियों ने कहा कि यह प्रतिमा कोई अधिकारिक धार्मिक स्थल नहीं थी। उनका कहना है कि इसे हटाने का उद्देश्य सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक प्रबंध था, न कि किसी धर्म का अपमान। सीमा विवाद का संदर्भ – Border Dispute Context यह घटना थाईलैंड-कंबोडिया सीमा विवाद के बीच हुई है। दोनों देशों में सीमा क्षेत्रों को लेकर पहले भी कई बार सैन्य झड़पें हुई हैं। इस साल जुलाई में पहले बड़े संघर्ष हुए थे, और हाल ही में फिर से लड़ाई तेज हो गई है। क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है – Why This Matters हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bethlehem

Bethlehem Christmas 2025 Religious Spirit और Human Emotions का संगम

बेथलहम (Bethlehem) के मैनेजर स्क्वायर में इस साल क्रिसमस 2025 (Christmas 2025) का जश्न दो साल बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से मनाया गया। स्काउट ट्रूप्स की परेड से सजा यह त्योहार लोगों के लिए खुशी और राहत लेकर आया, लेकिन माहौल में दुःख की छाया भी थी। स्थानीय लोगों ने इसे “आधा खुशी, आधा दुःख (Half Joy, Half Sadness)” बताया। इसका कारण गाजा और वेस्ट बैंक में जारी संघर्ष और रोज़मर्रा की कठिनाइयाँ हैं। पिछले दो सालों में यह जश्न स्थगित रहा, ताकि गाजा में पीड़ितों के प्रति सहानुभूति दिखाई जा सके। Religious Leadership और Hope का संदेश जेरूसलम के लैटिन पैट्रियार्क, पियर्बटिस्टा पिज़ाबेला ने इस साल समारोह में हिस्सा लिया और शांति, आशा और उम्मीद (Peace & Hope) का संदेश दिया।Church of the Nativity में पारंपरिक क्रिसमस सेवा हुई, जिसमें लोगों ने आध्यात्मिक अनुभव और समुदाय की भावना का अनुभव किया। संघर्ष के बीच Christmas Spirit हालांकि जश्न मनाया गया, जीवन में मुश्किलें अभी भी बरकरार हैं। फिर भी, लोगों ने उम्मीद और एकता की भावना के साथ त्योहार का जश्न मनाया। Economic Impact और Cultural Revival बेथलहम की अर्थव्यवस्था मुख्यतः tourism और pilgrimage पर निर्भर है। पिछले दो सालों में होटल बुकिंग और स्थानीय व्यापार में गिरावट आई थी। इस साल समारोह के कारण tourists और स्थानीय लोगों की संख्या बढ़ी, जिससे व्यापार और हॉटल इंडस्ट्री में हल्की जान आई। स्थानीय लोगों और धर्मगुरुओं ने इस पर्व को सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि resilience, unity और peace का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद और विश्वास कायम रह सकता है। बेथलहम का यह Christmas 2025 हमें यह याद दिलाता है कि हर अंधेरे में एक रोशनी जरूर होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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H-1B Visa

USA H-1B Visa Update हाई पेड और हाई स्किल कर्मचारियों के लिए नए नियम

अमेरिका ने अपने H-1B वीजा (H-1B Visa) सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है। अब पुरानी रैंडम लॉटरी सिस्टम को समाप्त कर दिया गया है और उच्च वेतन (High-Paid) और उच्च कौशल (High-Skilled) वाले कर्मचारियों को वीजा में प्राथमिकता दी जाएगी। नया H-1B Selection Process इस बदलाव के अनुसार, वीजा आवेदकों का चयन अब वेतन और कौशल स्तर के आधार पर किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि जो उम्मीदवार अधिक वेतन प्राप्त करेंगे और जिनके पास विशेष तकनीकी या पेशेवर कौशल होंगे, उन्हें वीजा मिलने की संभावना अधिक होगी। सभी वेतन स्तरों के उम्मीदवार अभी भी पात्र हैं, लेकिन कम वेतन वाले नए कर्मचारियों या फ्रेशर्स के लिए अवसर कम हो सकते हैं। क्यों किया गया यह बदलाव? अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अमेरिकी मजदूरी बाजार की सुरक्षा और देश की आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुरूप विदेशी कर्मचारियों का चयन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। नियोक्ताओं को अब कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों की बजाय हायर स्किल और हायर पेड कर्मचारियों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। लागू होने की तारीख H-1B Visa पर इसका प्रभाव व्यापक नजरिया यह बदलाव अमेरिकी प्रशासन की मजदूरी संरक्षण नीति और इमिग्रेशन नियंत्रण के हिस्से के रूप में आया है। पिछले वर्षों में H-1B Visa पर फीस बढ़ोतरी और अतिरिक्त वेरिफिकेशन जैसी अन्य नीतियां भी लागू की गई हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Donald Trump

Donald Trump की तस्वीर हटाई और फिर बहाल Epstein Files में नया विवाद

अमेरिका में कुख्यात Jeffrey Epstein Files के दस्तावेज़ों के सार्वजनिक होने के बाद एक नया विवाद सामने आया है। इन दस्तावेज़ों में राष्ट्रपति Donald Trump की तस्वीर भी थी, जिसे कुछ समय के लिए हटाया गया, लेकिन भारी backlash और सोशल मीडिया पर चर्चा के बाद इसे फिर से बहाल कर दिया गया। तस्वीर हटने की वजह क्या थी? अमेरिकी Department of Justice (DOJ) ने बताया कि तस्वीर को अस्थायी रूप से हटाने का कदम “सावधानी” के तहत लिया गया था। न्यूयॉर्क के Southern District Court ने सुझाव दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि तस्वीर में किसी भी संभावित पीड़ित की पहचान उजागर न हो। हालांकि, DOJ ने बाद में स्पष्ट किया कि तस्वीर में किसी पीड़ित की पहचान नहीं थी। यह कदम पूरी तरह से victim protection को ध्यान में रखते हुए उठाया गया था, न कि राजनीतिक कारणों से। सोशल मीडिया और राजनीतिक प्रतिक्रिया तस्वीर हटते ही सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने आरोप लगाया कि न्याय विभाग जानबूझकर ट्रंप से जुड़े दस्तावेज़ों को छुपा रहा है। डेमोक्रेट नेताओं ने इसे पारदर्शिता के खिलाफ कदम बताते हुए न्याय विभाग से जवाब मांगा। तस्वीर क्यों बहाल की गई? DOJ ने समीक्षा के बाद तस्वीर को बिना किसी बदलाव के सार्वजनिक डेटाबेस में वापस डाल दिया। विभाग ने दोहराया कि तस्वीर हटाने का निर्णय केवल पीड़ितों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। Epstein Files और व्यापक संदर्भ Jeffrey Epstein Files में कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, किसी की तस्वीर या नाम का होना अपराध का प्रमाण नहीं है। DOJ ने स्पष्ट किया है कि दस्तावेज़ों की समीक्षा का उद्देश्य सच को सामने लाना है, न कि किसी व्यक्ति को राजनीतिक रूप से निशाना बनाना। यह मामला सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्टिंग में एक बार फिर Donald Trump और Jeffrey Epstein के बीच के संबंधों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Epstein

Epstein Documents Leak ट्रंप से प्रिंस एंड्रयू तक, कौन कितना शामिल?

कुख्यात अमेरिकी फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मामले ने एक बार फिर दुनिया भर में हलचल मचा दी है। एपस्टीन (Epstein) सेक्स स्कैंडल से संबंधित कई अहम दस्तावेज़ अब सार्वजनिक किए गए हैं, जिनमें अमेरिका और ब्रिटेन की राजनीति व शाही परिवार से जुड़े बड़े नामों का ज़िक्र सामने आया है। इनमें डोनाल्ड ट्रंप, बिल क्लिंटन और ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू शामिल हैं। लेकिन बड़ा सवाल यही है — क्या दस्तावेज़ों में नाम आना अपराध साबित करता है? जेफ्री एपस्टीन मामला क्या है? जेफ्री एपस्टीन एक अमीर फाइनेंसर था, जिस पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और सेक्स ट्रैफिकिंग जैसे गंभीर आरोप लगे थे। साल 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई, लेकिन उससे जुड़ा नेटवर्क और दस्तावेज़ आज भी जांच और बहस का विषय बने हुए हैं। इन दस्तावेज़ों में शामिल हैं: ये फाइलें एपस्टीन के राजनीतिक, कारोबारी और सामाजिक संबंधों को उजागर करती हैं। डोनाल्ड ट्रंप का नाम क्यों आया? डोनाल्ड ट्रंप का नाम एपस्टीन के साथ कुछ सामाजिक मुलाकातों और पुरानी तस्वीरों में सामने आया है। हालांकि, इन दस्तावेज़ों में ट्रंप पर किसी भी तरह के अवैध कृत्य का सीधा आरोप या सबूत नहीं दिया गया है। बिल क्लिंटन की भूमिका पर क्या कहा गया है? पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का नाम भी एपस्टीन से जुड़े संपर्क और यात्रा रिकॉर्ड में दर्ज है। लेकिन अब तक सामने आई फाइलों में उनके खिलाफ किसी आपराधिक गतिविधि का प्रमाण नहीं मिला है। क्लिंटन पहले ही एपस्टीन से गलत संबंधों से इनकार कर चुके हैं। प्रिंस एंड्रयू पर सबसे ज्यादा सवाल ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्य प्रिंस एंड्रयू का मामला सबसे ज्यादा विवादित रहा है। उन पर पहले ही यौन शोषण के गंभीर आरोप लग चुके हैं। बाद में उन्होंने समझौते के जरिए केस को निपटाया और शाही जिम्मेदारियों से पीछे हट गए। नई फाइलों में उनका नाम आने से यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। क्या सिर्फ नाम आना अपराध है? कानूनी विशेषज्ञों का साफ कहना है: “किसी दस्तावेज़ या तस्वीर में नाम या मौजूदगी होना, अपने आप में अपराध का सबूत नहीं होता।” एपस्टीन के संपर्क में कई नेता, बिजनेसमैन और सेलेब्रिटी थे, लेकिन सभी को एक ही नजर से देखना सही नहीं माना जा सकता। अब दस्तावेज़ क्यों जारी किए गए? अमेरिका में पारदर्शिता कानूनों के तहत सरकार पर दबाव था कि एपस्टीन केस से जुड़ी अधिकतम जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि: हालांकि, कई हिस्सों को पीड़ितों की निजता और राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण गोपनीय रखा गया है। आगे क्या हो सकता है? Epstein डॉक्यूमेंट्स का लीक होना एक संवेदनशील और गंभीर मामला है।नाम आना और अपराध साबित होना — दोनों अलग बातें हैं। सच सामने आना जरूरी है, लेकिन बिना ठोस सबूत के किसी को दोषी ठहराना भी न्याय नहीं है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Voter ID

30 Crore Voter ID Cards होंगे अपडेट, पहचान और Verification होगा आसान

देशभर के करोड़ों मतदाताओं के लिए जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। चुनाव आयोग पुराने वोटर आईडी कार्ड्स को अपडेट करने की तैयारी में है। इस अभियान के तहत करीब 30 करोड़ Voter ID Cards में मौजूद धुंधले फोटो बदले जाएंगे और जिन कार्ड्स में मकान नंबर की जगह “00” लिखा है, वहां पूरा और सही पता दर्ज किया जाएगा। दरअसल, लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं कि कई वोटर कार्ड्स में फोटो इतने पुराने या धुंधले हैं कि पहचान करना मुश्किल हो जाता है। वहीं कई कार्ड्स में अधूरा पता होने से वोटिंग के दौरान लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब चुनाव आयोग इन खामियों को दूर करने के लिए बड़ा अपडेट अभियान शुरू करने जा रहा है। Blur Photo और गलत Address बने परेशानी की वजह ग्रामीण और शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे वोटर कार्ड पाए गए हैं, जिनमें फोटो साफ दिखाई नहीं देते। कई मामलों में कार्ड पर सिर्फ “00” लिखा होने से सही पता पता नहीं चल पाता। इससे मतदान केंद्रों पर पहचान सत्यापन में समय ज्यादा लगता है और कई बार विवाद जैसी स्थिति भी बन जाती है। इसी को देखते हुए अब रिकॉर्ड को ज्यादा सटीक और डिजिटल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस कदम से फर्जी मतदान रोकने में भी मदद मिलेगी। कैसे होगा Voter Card Update? जानकारी के मुताबिक चुनाव आयोग चरणबद्ध तरीके से यह प्रक्रिया पूरी करेगा। जरूरत पड़ने पर मतदाताओं से नया फोटो और सही पता मांगा जा सकता है। कई जगह ऑनलाइन अपडेट की सुविधा भी दी जाएगी ताकि लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। अगर किसी मतदाता के कार्ड में फोटो साफ नहीं है या पता गलत दर्ज है, तो उसे अपडेट करवाने का मौका मिलेगा। आयोग का फोकस डेटा को पूरी तरह साफ और आधुनिक बनाने पर है। चुनाव से पहले रिकॉर्ड सुधारने की तैयारी आने वाले चुनावों को देखते हुए चुनाव आयोग मतदाता सूची और पहचान संबंधी रिकॉर्ड को मजबूत करना चाहता है। साफ फोटो और सही एड्रेस होने से मतदान प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान करोड़ों लोगों के लिए राहत लेकर आएगा, क्योंकि लंबे समय से लोग पुराने और खराब प्रिंट वाले वोटर कार्ड्स की समस्या झेल रहे थे।
India vs Afghanistan

India vs Afghanistan ODI 2026: पहली बार भारत के खिलाफ वनडे सीरीज खेलेगा अफगानिस्तान

भारत और अफगानिस्तान (India vs Afghanistan) के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आगाज आज धर्मशाला के खूबसूरत HPCA स्टेडियम में होने जा रहा है। यह सीरीज इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि अफगानिस्तान पहली बार भारत के खिलाफ पूरी ODI सीरीज खेलने उतर रहा है। दोनों टीमों के फैंस इस मुकाबले का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, लेकिन मैच से पहले मौसम ने चिंता बढ़ा दी है। Kohli-Hardik के बिना उतरेगी Team India भारतीय टीम इस सीरीज में कई बड़े बदलावों के साथ मैदान पर उतरेगी। स्टार बल्लेबाज विराट कोहली चोट के कारण उपलब्ध नहीं हैं, जबकि हार्दिक पंड्या भी फिटनेस समस्या की वजह से टीम से बाहर हैं। ऐसे में टीम इंडिया की जिम्मेदारी कप्तान रोहित शर्मा और युवा खिलाड़ियों पर होगी। टीम मैनेजमेंट इस सीरीज को भविष्य की तैयारी के तौर पर देख रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स को ध्यान में रखते हुए कुछ नए खिलाड़ियों को मौका दिया जा सकता है। ईशान किशन, यशस्वी जायसवाल और नितीश कुमार रेड्डी जैसे युवा खिलाड़ियों पर सभी की नजरें रहेंगी। Afghanistan के पास भी हैं मैच विनर खिलाड़ी अफगानिस्तान की टीम अब सिर्फ कमजोर टीम नहीं मानी जाती। पिछले कुछ वर्षों में टीम ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है। राशिद खान, मोहम्मद नबी और रहमानुल्लाह गुरबाज जैसे खिलाड़ी किसी भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। भारतीय परिस्थितियों में खेलने का अनुभव भी अफगानिस्तान के खिलाड़ियों के पास है। ऐसे में टीम इंडिया के लिए यह सीरीज आसान नहीं रहने वाली। Dharamshala Weather ने बढ़ाई टेंशन धर्मशाला में मौसम मैच का सबसे बड़ा विलेन बन सकता है। मौसम विभाग के अनुसार मुकाबले के दौरान करीब 55 प्रतिशत बारिश की संभावना है। सुबह से ही इलाके में बादल छाए हुए हैं और हल्की बारिश भी देखने को मिली है। अगर बारिश लगातार होती रही तो मैच में ओवर कट सकते हैं या मुकाबला प्रभावित भी हो सकता है। हालांकि फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि मौसम साफ हो और उन्हें पूरा मैच देखने को मिले। तेज गेंदबाजों को मिल सकती है मदद धर्मशाला की पिच आमतौर पर तेज गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। बादलों और नमी की वजह से शुरुआती ओवरों में गेंद ज्यादा स्विंग कर सकती है। ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी चुन सकती है। मैच की जरूरी जानकारी भारत जहां घरेलू मैदान का फायदा उठाकर सीरीज में जीत के साथ शुरुआत करना चाहेगा, वहीं अफगानिस्तान की नजर इतिहास रचने पर होगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि बारिश के बीच कौन सी टीम मैदान पर बेहतर प्रदर्शन करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Pranit More

Pranit More Controversy: महिलाओं पर विवादित Comments के बाद कॉमेडियन की माफी

स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे (Pranit More) एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। महिलाओं को लेकर किए गए विवादित कमेंट्स के बाद इंटरनेट पर उनके खिलाफ भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। मामला बढ़ने के बाद अब कॉमेडियन ने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगते हुए लोगों से एक मौका देने की अपील की है। प्रणित मोरे का एक वीडियो पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह महिलाओं को लेकर ऐसी टिप्पणियां करते दिखाई दिए, जिन्हें कई लोगों ने अपमानजनक और असंवेदनशील बताया। वीडियो सामने आने के बाद यूजर्स ने जमकर आलोचना शुरू कर दी और देखते ही देखते मामला सोशल मीडिया ट्रेंड बन गया। Viral Video के बाद बढ़ा विवाद वीडियो वायरल होने के बाद X, Instagram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने कहा कि कॉमेडी के नाम पर महिलाओं का मजाक उड़ाना गलत है। कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि आखिर मनोरंजन की सीमा क्या होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर #PranitMoreControversy ट्रेंड करने लगा और कई महिला संगठनों ने भी इस बयान पर नाराजगी जताई। सोशल मीडिया पोस्ट में मांगी माफी लगातार बढ़ते विवाद के बीच प्रणित मोरे ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक लंबा नोट शेयर किया। उन्होंने माना कि उनके शब्दों से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। प्रणित ने लिखा, “मैं समझता हूं कि लोग मुझसे नाराज हैं। शायद मैं इस नफरत का हकदार भी हूं, लेकिन मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि लोग मुझे खुद को सुधारने का एक मौका दें।” उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था, लेकिन अब उन्हें अपनी गलती का एहसास हो चुका है। लोगों की राय बंटी हुई नजर आई इस पूरे मामले में सोशल मीडिया यूजर्स दो हिस्सों में बंटे नजर आए। कुछ लोगों का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह की भाषा स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। वहीं दूसरी तरफ कुछ यूजर्स का मानना है कि गलती मान लेने के बाद किसी को सुधारने का मौका मिलना चाहिए। हालांकि, विवाद अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है और सोशल मीडिया पर बहस जारी है। करियर पर पड़ सकता है असर मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि इस विवाद का असर प्रणित मोरे की इमेज और करियर पर पड़ सकता है। आज के डिजिटल दौर में किसी भी बयान पर तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिलती है और सोशल मीडिया का दबाव कई बार कलाकारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। फिलहाल, सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि दर्शक और इंडस्ट्री उनके माफीनामे को किस तरह लेते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
S Jaishankar

3 भारतीयों की मौत से भारत सख्त, US Secretary S Jaishankar की अहम बातचीत

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने नागरिकों की मौत को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री S Jaishankar ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत कर कॉमर्शियल जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता और विरोध दर्ज कराया। भारत ने साफ शब्दों में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर चल रहे व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना पूरी तरह गलत है और इससे वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। क्या है पूरा मामला? हाल ही में मध्य पूर्व के समुद्री क्षेत्र में एक कॉमर्शियल जहाज पर हमला हुआ था। इस हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। घटना के बाद भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पीड़ित परिवारों के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से बातचीत के दौरान इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया और कहा कि निर्दोष नागरिकों की जान जाना बेहद दुखद है। भारत ने क्या कहा? विदेश मंत्री जयशंकर ने बातचीत में कहा कि समुद्री व्यापार दुनिया की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में कॉमर्शियल जहाजों पर हमला न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे वैश्विक व्यापार और कई देशों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और इस तरह की घटनाओं को लेकर बेहद संवेदनशील है। Middle East Tension पर बढ़ी चिंता मध्य पूर्व में पिछले कुछ समय से तनाव लगातार बढ़ रहा है। कई देशों ने समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव और कूटनीतिक गतिविधियों को और तेज कर सकते हैं। भारत भी लगातार शांति और सुरक्षित समुद्री व्यापार की वकालत करता रहा है। भारत सरकार की नजर स्थिति पर सरकार ने कहा है कि प्रभावित भारतीयों के परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी। साथ ही क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है। इस घटना के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील भी की है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
धर्मेंद्र प्रधान

“खेल और पढ़ाई साथ-साथ चलेंगे” — Bhopal में धर्मेंद्र प्रधान ने खिलाड़ियों को दिया बड़ा संदेश

भोपाल में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खिलाड़ियों के साथ संवाद करते हुए देश की नई शिक्षा और खेल नीति को लेकर बड़ा संदेश दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर धर्मेंद्र प्रधान मध्यप्रदेश पहुंचे, जहां उन्होंने खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के साथ शूटिंग एकेडमी का दौरा किया। खिलाड़ियों से सीधा संवाद, स्किल और स्पोर्ट्स पर जोर इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से मुलाकात की और कहा कि भारत अब शिक्षा के साथ-साथ स्किल और स्पोर्ट्स सेक्टर में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के जरिए पहली बार खेल और पढ़ाई को एक साथ जोड़ने पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। पढ़ाई और खेल साथ-साथ चलेंगे धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अब ऐसा सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिससे खिलाड़ी अपनी पढ़ाई और खेल दोनों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ा सकें। इसके लिए अलग से कोर्स वर्क तैयार किया जा रहा है, ताकि छात्रों को खेल गतिविधियों का भी अकादमिक लाभ मिल सके। APAAR ID और Credit Score सिस्टम पर काम उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों की APAAR ID के माध्यम से उनकी पढ़ाई और खेल उपलब्धियों को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा। साथ ही इंटर स्पोर्ट्स एक्टिविटी को क्रेडिट स्कोर सिस्टम से जोड़ने की तैयारी भी की जा रही है। इससे खिलाड़ियों को भविष्य में शिक्षा और करियर दोनों में फायदा मिलेगा। IIT में Sports Quota से युवाओं को मिलेगा फायदा केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार IIT जैसे बड़े संस्थानों में स्पोर्ट्स कोटा लागू किया गया है। यह कदम उन युवाओं के लिए नई उम्मीद लेकर आया है, जो खेल के साथ-साथ उच्च शिक्षा में भी आगे बढ़ना चाहते हैं। 2036 Olympics और Developed India Vision 2047 पर फोकस उन्होंने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले 20 वर्षों में भारत को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत का फोकस अब 2036 ओलंपिक की तैयारियों पर भी है और देश खेलों में विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में काम कर रहा है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जब भारत आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब प्रधानमंत्री मोदी का विकसित भारत का सपना साकार होगा और देश दुनिया की महाशक्ति के रूप में उभरेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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