आपका चैनल --
ताज़ा खबर
BREAKINGमध्य प्रदेशग्वालियर: साइबर ठगी के पैसों से खरीदा 50 ग्राम का सोने का सिक्का, ज्वेलर्स का बैंक खाता हुआ फ्रीजBREAKINGप्रदेशभरतपुर: REET में पास कराने के नाम पर लिए 5 लाख, पैसे वापस मांगने पर ठेकेदार की हत्या; 14 महीने बाद हुआ खुलासाBREAKINGस्पोर्ट्सग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स: पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत पदक से चूका, स्विमिंग और बॉक्सिंग में बढ़ीं उम्मीदेंBREAKINGदेश-हरपलGold Price Today: सोना ₹824 सस्ता, चांदी में मामूली तेजी; जानें आज के ताजा भावBREAKINGBreaking NewsNEET पेपर लीक मामला: शिक्षा मंत्रालय का बड़ा एक्शन, NTA के 47 अधिकारी बर्खास्त, दर्ज होंगे आपराधिक केसBREAKINGछत्तीसगढ़बस्तर: रेप केस दर्ज कराने वाली युवती ने आरोपी से जेल में रचाई शादी, कोर्ट की अनुमति से लिए सात फेरेBREAKINGमध्य प्रदेशगुना रेलवे स्टेशन के पास चलती ट्रेनों में दो चोरी की वारदात, यात्रियों के लाखों के सामान पर हाथ साफBREAKINGदेश-हरपलCJI सूर्यकांत की सफाई: CJP लाठीचार्ज मामले में सुनवाई से इनकार नहीं किया, मीडिया रिपोर्टों को बताया गलतBREAKINGमध्य प्रदेशग्वालियर: साइबर ठगी के पैसों से खरीदा 50 ग्राम का सोने का सिक्का, ज्वेलर्स का बैंक खाता हुआ फ्रीजBREAKINGप्रदेशभरतपुर: REET में पास कराने के नाम पर लिए 5 लाख, पैसे वापस मांगने पर ठेकेदार की हत्या; 14 महीने बाद हुआ खुलासाBREAKINGस्पोर्ट्सग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स: पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत पदक से चूका, स्विमिंग और बॉक्सिंग में बढ़ीं उम्मीदेंBREAKINGदेश-हरपलGold Price Today: सोना ₹824 सस्ता, चांदी में मामूली तेजी; जानें आज के ताजा भावBREAKINGBreaking NewsNEET पेपर लीक मामला: शिक्षा मंत्रालय का बड़ा एक्शन, NTA के 47 अधिकारी बर्खास्त, दर्ज होंगे आपराधिक केसBREAKINGछत्तीसगढ़बस्तर: रेप केस दर्ज कराने वाली युवती ने आरोपी से जेल में रचाई शादी, कोर्ट की अनुमति से लिए सात फेरेBREAKINGमध्य प्रदेशगुना रेलवे स्टेशन के पास चलती ट्रेनों में दो चोरी की वारदात, यात्रियों के लाखों के सामान पर हाथ साफBREAKINGदेश-हरपलCJI सूर्यकांत की सफाई: CJP लाठीचार्ज मामले में सुनवाई से इनकार नहीं किया, मीडिया रिपोर्टों को बताया गलत

NE

News Elementor

Latest Posts

Tariff

Global Trade Tension अमेरिका की नई Investigation में India समेत 16 देश, Tariff का खतरा

अमेरिका ने भारत सहित दुनिया के 16 बड़े व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ एक नई Trade Investigation शुरू कर दी है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि कुछ देशों की व्यापार नीतियों से अमेरिकी उद्योगों को नुकसान हो रहा है। अगर जांच में आरोप सही पाए गए, तो इन देशों से आने वाले उत्पादों पर भारी टैरिफ (Import Tax) लगाया जा सकता है। यह कदम वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें भारत जैसे तेजी से उभरते निर्यातक देश भी शामिल हैं। क्या है पूरा मामला अमेरिका ने यह जांच Trade Act 1974 के Section 301 के तहत शुरू की है। यह वही कानून है जिसके जरिए अमेरिका पहले भी कई देशों पर टैरिफ लगा चुका है। इस कानून के तहत अगर अमेरिका को लगता है कि कोई देश अनुचित व्यापार नीतियां अपना रहा है—जैसे भारी सरकारी सब्सिडी देकर सस्ते सामान का निर्यात—तो वह उस देश के उत्पादों पर अतिरिक्त टैक्स लगा सकता है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि कुछ देशों में अत्यधिक उत्पादन (Overcapacity) और सरकारी सहायता के कारण वैश्विक बाजार में सस्ते उत्पाद आ रहे हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों की प्रतिस्पर्धा कमजोर हो रही है। किन देशों को जांच में शामिल किया गया इस जांच में कुल 16 देशों और क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिनमें प्रमुख हैं: इन देशों को अमेरिका के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार माना जाता है, इसलिए इस जांच का असर वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है। अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन घरेलू उद्योगों को मजबूत करने के लिए कड़े व्यापारिक कदम उठाने की तैयारी में है। इसके अलावा हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कुछ पुराने टैरिफ नियमों पर सवाल उठाए थे। इसके बाद प्रशासन अब नए कानूनी रास्तों के जरिए संभावित टैरिफ लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। भारत के लिए क्या मायने भारत के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजारों में से एक है। अगर भविष्य में टैरिफ लगाए जाते हैं, तो भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। खासकर स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो कंपोनेंट्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि अभी यह सिर्फ जांच का शुरुआती चरण है और अंतिम फैसला आने में समय लग सकता है। आगे क्या होगा अमेरिकी एजेंसियां अब इन देशों की व्यापार नीतियों और औद्योगिक सब्सिडी की जांच करेंगी। इसके बाद एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अगर जांच में अनुचित व्यापार के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो अमेरिका इन देशों के उत्पादों पर नए टैरिफ लागू कर सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस जांच पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका असर केवल अमेरिका और भारत ही नहीं बल्कि पूरे वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Iran

Iran-US Tension फारस की खाड़ी में टैंकर पर हमला, भारतीय नाविक की मौत

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Iran और United States के बीच टकराव का असर अब समुद्री व्यापार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में Persian Gulf में एक अमेरिकी-संबंधित तेल टैंकर पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। Persian Gulf में हमले से बढ़ा तनाव रिपोर्टों के अनुसार, फारस की खाड़ी के पास एक तेल टैंकर को निशाना बनाया गया, जो अमेरिकी हितों से जुड़ा बताया जा रहा है। हमले में जहाज को नुकसान पहुंचा और उस पर सवार एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत हो गई। यह घटना ऐसे समय हुई है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव बढ़ा हुआ है। जहाजरानी कंपनियां और कई देश इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि यहां से रोजाना बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य सामान दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचता है। क्यों महत्वपूर्ण है Strait of Hormuz Strait of Hormuz दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में तेल इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इस मार्ग में किसी तरह की रुकावट आती है तो उसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और व्यापार पर पड़ सकता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में होने वाली हर घटना पर पूरी दुनिया की नजर रहती है। भारत के जहाजों को मिली राहत तनावपूर्ण हालात के बीच भारत के लिए राहत की खबर भी सामने आई। कूटनीतिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दे दी है। सूत्रों के अनुसार, भारत के विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar और ईरानी नेतृत्व के बीच बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। इससे भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर बनी चिंता कुछ हद तक कम हुई है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर नजर सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री इलाकों में कई भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। ऐसे में सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। भारत के दूतावास और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां भी जहाज कंपनियों के साथ संपर्क में हैं, ताकि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से वैश्विक बाजारों में कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Iran

Middle East War Iran में 8000 घरों पर हमला, 140 अमेरिकी सैनिक घायल, Israel में भी बमबारी

मध्य-पूर्व में चल रहा Iran–Israel War अब और गंभीर होता जा रहा है। इस संघर्ष में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक युद्ध का असर अब सैनिकों के साथ-साथ आम लोगों की ज़िंदगी पर भी गहराई से दिखाई देने लगा है। 140 अमेरिकी सैनिक घायल, 7 की मौत अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार अब तक इस संघर्ष में करीब 140 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं। इनमें कुछ सैनिकों को मामूली चोटें आई हैं, जबकि कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार 7 अमेरिकी सैनिकों की मौत की भी पुष्टि हुई है। घायल सैनिकों का इलाज सैन्य अस्पतालों में चल रहा है और कई सैनिक उपचार के बाद फिर से अपनी ड्यूटी पर लौट चुके हैं। यह घटना दिखाती है कि युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता, बल्कि इसके असर हजारों परिवारों तक पहुंचते हैं। ईरान में भारी तबाही, 8000 घरों पर हमले इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर ईरान के कई शहरों में देखा गया है। रिपोर्टों के मुताबिक अब तक लगभग 8000 घरों और इमारतों पर हमले हुए हैं। इन हमलों के कारण कई इलाकों में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। बिजली, पानी और संचार सेवाओं पर भी इसका असर पड़ा है। स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ युद्ध की खबर नहीं, बल्कि उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी की कठिन सच्चाई बन चुकी है। Israel में भी मिसाइल और ड्रोन हमले दूसरी ओर Israel भी इस संघर्ष से अछूता नहीं रहा है। ईरान की ओर से किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण देश के कई हिस्सों में बमबारी की घटनाएं सामने आई हैं। इजराइल ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया है ताकि अधिकतर मिसाइलों को हवा में ही नष्ट किया जा सके। फिर भी कुछ हमलों से नुकसान हुआ है और कई शहरों में लोगों को बंकरों में शरण लेनी पड़ी। कैसे बढ़ा Iran–Israel Conflict विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कुछ सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन के जरिए जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच हमले और जवाबी हमलों का सिलसिला जारी है। दुनिया भर में बढ़ी चिंता इस संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है। कई देशों और संगठनों ने शांति वार्ता और युद्धविराम की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध और बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Iran

Iran में बड़ा सत्ता बदलाव मोजतबा खामेनेई बने सुप्रीम लीडर, अमेरिका से बढ़ा टकराव

मध्य-पूर्व की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। Iran के लंबे समय तक सर्वोच्च नेता रहे Ali Khamenei के बाद उनके बेटे Mojtaba Khamenei को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। इस फैसले के साथ ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है, खासकर Iran और United States के बीच तनाव और बढ़ता दिखाई दे रहा है। कैसे चुने गए नए सुप्रीम लीडर Iran में सुप्रीम लीडर का चयन देश की शक्तिशाली धार्मिक संस्था Assembly of Experts करती है। इसी संस्था ने अली खामेनेई के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया। यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ईरान की इस सर्वोच्च धार्मिक-राजनीतिक सत्ता में पहली बार नेतृत्व लगभग “पारिवारिक उत्तराधिकार” की तरह पिता से बेटे को गया है। कुछ विशेषज्ञ इसे ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव मान रहे हैं। “Epstein गैंग हमारा भविष्य तय नहीं करेगी” ईरान (Iran) के धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व ने पश्चिमी देशों के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि देश का भविष्य किसी बाहरी ताकत से तय नहीं होगा। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “Epstein गैंग” या पश्चिमी ताकतें ईरान के नेतृत्व को तय नहीं कर सकतीं। इस बयान को सीधे तौर पर पश्चिमी प्रभाव और बाहरी दबाव को खारिज करने के रूप में देखा जा रहा है। ट्रम्प का बयान अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि ईरान को नया सुप्रीम लीडर चुनने से पहले अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका की मंजूरी के बिना चुना गया नेतृत्व क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती बन सकता है। क्यों अहम है सुप्रीम लीडर का पद Iran में सुप्रीम लीडर देश का सबसे शक्तिशाली पद होता है। यह पद राष्ट्रपति से भी ऊपर माना जाता है। सुप्रीम लीडर के पास सेना, न्यायपालिका, सुरक्षा एजेंसियों और विदेश नीति पर अंतिम निर्णय का अधिकार होता है। इस वजह से मोजतबा खामेनेई का सत्ता में आना सिर्फ ईरान की आंतरिक राजनीति ही नहीं बल्कि पूरे मध्य-पूर्व की रणनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। आगे क्या असर पड़ सकता है विशेषज्ञों का मानना है कि: ईरान में नेतृत्व परिवर्तन के इस घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और आने वाले समय में इसके दूरगामी असर देखने को मिल सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Iran

Iran President का बयान पड़ोसी देशों से माफी लेकिन National Security के लिए सरेंडर नहीं

मध्य-पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के बीच Iran के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने हाल ही में अपने पड़ोसी देशों से माफी मांगते हुए साफ कहा कि Iran शांति चाहता है, लेकिन किसी भी दबाव में आकर सरेंडर (Surrender) नहीं करेगा। पड़ोसी देशों से क्यों मांगी माफी हाल के दिनों में क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन से जुड़े कुछ सैन्य घटनाक्रम सामने आए, जिससे खाड़ी के कई देशों में चिंता बढ़ गई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान का इरादा अपने पड़ोसी देशों को नुकसान पहुंचाने का नहीं था। उन्होंने अपने बयान में कहा कि अगर हाल की घटनाओं से किसी भी पड़ोसी देश को परेशानी हुई है, तो ईरान इसके लिए खेद व्यक्त करता है। उनका कहना था कि पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखना ईरान की प्राथमिकता है। “Iran सरेंडर नहीं करेगा” – राष्ट्रपति का सख्त बयान माफी के साथ-साथ राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि देश अपनी संप्रभुता और सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें ईरान पर दबाव बनाकर उसे झुकाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन ऐसा कभी संभव नहीं होगा। उनके शब्दों में, जो लोग ईरान के आत्मसमर्पण का सपना देख रहे हैं, वे इस सपने को कभी सच होते नहीं देख पाएंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय राजनीति और सैन्य गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पड़ोसियों से रिश्ते सुधारने की कोशिश विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह बयान दो संदेश देता है।पहला, वह अपने पड़ोसी देशों को यह भरोसा दिलाना चाहता है कि उसका लक्ष्य क्षेत्र में तनाव बढ़ाना नहीं है। दूसरा, वह यह भी दिखाना चाहता है कि बाहरी दबाव के बावजूद ईरान अपनी नीतियों पर कायम रहेगा। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि मध्य-पूर्व में स्थिरता तभी संभव है जब सभी देश एक-दूसरे की सुरक्षा और संप्रभुता का सम्मान करें। Middle East में बढ़ता तनाव पिछले कुछ समय से मध्य-पूर्व में सुरक्षा और राजनीति से जुड़े मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में ईरान की ओर से आया यह बयान काफी अहम माना जा रहा है। एक तरफ ईरान ने पड़ोसी देशों से माफी मांगकर कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश की है, वहीं दूसरी तरफ उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सम्मान के मामले में वह पीछे हटने वाला नहीं है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
इजराइल

Middle East War इजराइल ने Tehran में किए ताबड़तोड़ हमले, Mehrabad Airport बना निशाना

मध्य-पूर्व (Middle East) में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। ताजा घटनाक्रम में इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान में कई अहम ठिकानों पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक (Airstrike) किए हैं। इन हमलों के दौरान तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट (Mehrabad Airport) के आसपास जोरदार धमाकों और आग लगने की खबर सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार देर रात अचानक कई तेज विस्फोटों की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद आसमान में धुएं के बड़े गुबार उठते दिखाई दिए। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एयरपोर्ट परिसर के पास खड़े कुछ विमानों में आग लग गई और सुरक्षा बलों ने तुरंत इलाके को घेर लिया। सैन्य ठिकानों को बनाया गया निशाना इजराइली सेना का कहना है कि यह हमला किसी नागरिक ढांचे को निशाना बनाने के लिए नहीं बल्कि ईरान के सैन्य नेटवर्क को कमजोर करने के लिए किया गया है। सेना के मुताबिक इन हमलों में मिसाइल लॉन्चर, हथियार निर्माण से जुड़े प्रतिष्ठान और सैन्य कमांड सेंटर को टारगेट किया गया। इजराइल का दावा है कि इन ठिकानों से उसके खिलाफ हमलों की योजना बनाई जा रही थी, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से यह कार्रवाई जरूरी थी। अमेरिका का सख्त रुख इसी बीच अमेरिका की ओर से भी कड़े संकेत मिले हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि अगर हालात इसी तरह बिगड़ते रहे तो ईरान के मिसाइल सिस्टम और सैन्य ढांचे को निशाना बनाकर और बड़े ऑपरेशन किए जा सकते हैं। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि आने वाले समय में ईरान की मिसाइल फैक्ट्रियों और लॉन्च साइट्स पर व्यापक कार्रवाई संभव है। ईरान ने भी किया जवाबी हमला दूसरी ओर ईरान ने भी इजराइल के खिलाफ मिसाइल हमले किए हैं। इस जवाबी कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच सीधा सैन्य टकराव और ज्यादा तेज हो गया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक जारी रही तो यह संघर्ष पूरे मध्य-पूर्व में बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। दुनिया की बढ़ी चिंता इस बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित है। संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और हालात को नियंत्रण में रखने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल बाजार, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल तेहरान और आसपास के इलाकों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
America

Middle East Tension Iran Conflict के बीच America से खफा हुए कई Gulf Nations

मध्य-पूर्व (Middle East) में एक बार फिर तनाव तेज़ होता दिखाई दे रहा है। America और Iran के बीच बढ़ते टकराव ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों को असहज स्थिति में डाल दिया है। हाल के घटनाक्रमों के बाद सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, बहरीन और ओमान जैसे देशों ने क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर चिंता जताई है। इन देशों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ता है, तो उसका सबसे बड़ा असर खाड़ी क्षेत्र पर ही पड़ेगा। America-Iran Tension: क्या है पूरा मामला हाल ही में America और Israel ने ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े स्थानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए। इन हमलों को लेकर अमेरिका का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया। हालांकि ईरान ने इन हमलों की कड़ी निंदा की और चेतावनी दी कि यदि उस पर हमला जारी रहा तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। इसके बाद पूरे क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों को लेकर अलर्ट बढ़ा दिया गया है। इस स्थिति ने मध्य-पूर्व में पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया है। Gulf Countries क्यों हुए अमेरिका से नाराज़ खाड़ी देशों की नाराज़गी की वजह काफी स्पष्ट है। इन देशों में कई जगहों पर अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अगर ईरान जवाबी कार्रवाई करता है, तो ये ठिकाने सीधे निशाने पर आ सकते हैं। इससे इन देशों की सुरक्षा और स्थिरता दोनों पर खतरा बढ़ जाता है। साथ ही खाड़ी देश दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हैं। किसी भी सैन्य संघर्ष का असर सीधे तेल उत्पादन और सप्लाई पर पड़ सकता है। यही वजह है कि इन देशों की कोशिश हमेशा यही रहती है कि क्षेत्र में शांति बनी रहे। Oil Market और Global Economy पर असर मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अगर खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है तो तेल की कीमतों में तेज़ उछाल आ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। खासकर भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में तेल आयात करते हैं, उन्हें इसका सीधा असर झेलना पड़ सकता है। War के बीच Diplomacy का नया Twist तनाव के बीच एक दिलचस्प मोड़ भी सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका अब ईरान के साथ परमाणु समझौते को लेकर बातचीत की संभावना भी खुली रखना चाहता है। यानी एक तरफ सैन्य दबाव और दूसरी तरफ कूटनीतिक बातचीत की कोशिश—यह दोहरी रणनीति कई देशों के लिए हैरान करने वाली है। खाड़ी देशों को डर है कि अगर हालात बिगड़े तो सबसे पहले असर उनके क्षेत्र पर ही दिखाई देगा। Middle East में आगे क्या हो सकता है विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह स्थिति कई दिशाओं में जा सकती है। अगर बातचीत आगे बढ़ती है तो तनाव कम हो सकता है, लेकिन अगर सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो पूरा क्षेत्र एक बड़े संकट की ओर बढ़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें America और Iran के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। खाड़ी देशों की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि हालात युद्ध की ओर न जाएं और बातचीत के जरिए समाधान निकले। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Iran

Middle East Crisis Iran की Missile Strike से Israel में अलर्ट, Bahrain Refinery पर भी हमला

मध्य-पूर्व (Middle East) में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है। हाल ही में Iran ने इजराइल की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। रिपोर्टों के अनुसार इन मिसाइलों में क्लस्टर वारहेड लगे थे, जिनमें से प्रत्येक मिसाइल हवा में फटकर लगभग 20 छोटे-छोटे बम छोड़ सकती है। इन हमलों ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है और आम लोगों के बीच डर का माहौल भी देखा जा रहा है। Isreal के कई इलाकों में सायरन, लोगों में दहशत हमलों के बाद Isreal के कई शहरों में एयर-रेड सायरन बजने लगे। लोगों को तुरंत सुरक्षित जगहों और बंकरों में जाने की चेतावनी दी गई। इजराइल की एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों को रास्ते में ही रोकने की कोशिश की, लेकिन कुछ मिसाइलें जमीन तक पहुंच गईं। कुछ इलाकों में इमारतों और बुनियादी ढांचे को नुकसान होने की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अचानक हुए धमाकों की आवाज से कई परिवार रात भर डर के माहौल में रहे। Cluster Bomb वाली मिसाइलें क्यों मानी जाती हैं खतरनाक सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक क्लस्टर वारहेड वाली मिसाइलें ज्यादा खतरनाक मानी जाती हैं। ये मिसाइलें हवा में फटकर कई छोटे बमों में बंट जाती हैं, जो बड़े इलाके में गिरते हैं। इससे एक ही हमले में व्यापक नुकसान होने की आशंका रहती है। इसी वजह से दुनिया के कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने क्लस्टर हथियारों के इस्तेमाल को लेकर चिंता भी जताई है। Bahrain Oil Refinery पर भी हमला इस तनाव के बीच खाड़ी देश बहरीन भी इस संघर्ष की चपेट में आ गया। बहरीन की सरकारी तेल रिफाइनरी पर एक मिसाइल गिरने से वहां आग लग गई। अधिकारियों ने तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू किया और कुछ समय बाद आग पर काबू पा लिया गया। सरकारी बयान के अनुसार रिफाइनरी में काम कर रहे कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है। हालांकि इस घटना ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। Middle East में बढ़ता तनाव, दुनिया की नजर विश्लेषकों का मानना है कि Iran और Isreal के बीच बढ़ता टकराव पूरे मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। अगर हालात इसी तरह बिगड़ते रहे तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया भर के देश स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं। लेकिन जमीन पर हालात बताते हैं कि आने वाले दिनों में यह संकट और गंभीर रूप ले सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
FBI

FBI ने पकड़ा पाकिस्तानी नागरिक Trump और Biden के खिलाफ Assassination Plot का खुलासा

अमेरिका में एक पाकिस्तानी नागरिक पर पूर्व और वर्तमान अमेरिकी नेताओं की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा है। आरोपी आसिफ मर्चेंट (Asif Merchant) ने न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में अदालत के सामने आकर रोते हुए दावा किया कि उसे इस साजिश में शामिल होने के लिए ईरानी खुफिया एजेंटों (Iranian Intelligence Agents) ने मजबूर किया। कौन है आरोपी और क्या है साजिश आसिफ मर्चेंट पाकिस्तान का रहने वाला एक व्यापारी है। अदालत में उसने कहा कि ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps के एजेंटों ने उसके परिवार को धमकाया और उसे हत्या की साजिश में शामिल होने पर मजबूर किया। उसके कथित हैंडलर ने आरोपी को तीन प्रमुख अमेरिकी नेताओं के नाम दिए, जिन्हें संभावित लक्ष्य बनाया जाना था: आसिफ ने अदालत में कहा:“मेरे पास कोई और विकल्प नहीं था, मेरे परिवार को धमकी दी गई थी।” FBI ने कैसे पकड़ा आसिफ मर्चेंट ने अमेरिका में कुछ “हिटमैन” को पैसे देने की कोशिश की। ये सभी असल में अंडरकवर FBI एजेंट थे। उसने उन्हें करीब 5,000 डॉलर देने का प्रस्ताव रखा। जुलाई 2024 में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अभियोजन पक्ष की दलील अमेरिकी सरकारी वकीलों का कहना है कि आरोपी के “मजबूरी” वाले दावे के कोई ठोस सबूत नहीं हैं। उनका कहना है कि आसिफ मर्चेंट वास्तव में हत्या की साजिश को अंजाम देने की कोशिश कर रहा था। संभावित सजा अगर अदालत में आरोपी दोषी पाया गया, तो उसे आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा हो सकती है। यह मामला अमेरिका, पाकिस्तान और ईरान के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
IRAN पर अमेरिकी हमले के 100 घंटे पूरे: 1000 से ज्यादा लोगों की मौत

IRAN पर अमेरिकी हमले के 100 घंटे पूरे: 1000 से ज्यादा लोगों की मौत

अमेरिका और Iran के बीच जारी संघर्ष को अब 100 घंटे पूरे हो चुके हैं। इन हमलों में अब तक 1000 से ज्यादा लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में ईरान के 17 जहाज डुबो दिए गए। इन हमलों से ईरान की सैन्य और समुद्री ताकत को बड़ा नुकसान पहुंचा है। कई बंदरगाहों और सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। हमलों के बाद ईरान और उससे जुड़े समूहों ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, 9 अलग-अलग देशों में मौजूद 14 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए। इन हमलों के कारण पूरे क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो यह संघर्ष और भी गंभीर रूप ले सकता है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। इस बीच आम लोगों में डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। लोग शांति की उम्मीद कर रहे हैं ताकि इस टकराव को जल्द से जल्द रोका जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
1 22 23 24 25 26 53

Editor's Picks

ग्वालियर: साइबर ठगी के पैसों से खरीदा 50 ग्राम का सोने का सिक्का, ज्वेलर्स का बैंक खाता हुआ फ्रीज

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम को वैध बनाने का एक नया तरीका सामने आया है। पुलिस के अनुसार, एक युवक ने सराफा बाजार स्थित ‘गहना जेम्स एंड ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड’ से 50 ग्राम का सोने का सिक्का खरीदा और उसका भुगतान कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त रकम के जरिए ऑनलाइन किया। बाद में इस लेनदेन के चलते ज्वेलर्स का बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया गया। ऑनलाइन ट्रांसफर से किया लाखों रुपये का भुगतान पुलिस के मुताबिक, झांसी रोड स्थित माधव नगर निवासी सराफा कारोबारी अजय मंगल का लश्कर सराफा बाजार में ज्वेलरी शोरूम है। बताया गया कि 4 अप्रैल 2026 को अभिषेक परिहार नाम का युवक शोरूम पहुंचा और 50 ग्राम का सोने का सिक्का खरीदने का सौदा किया। उसने अग्रिम भुगतान के रूप में 1 लाख रुपये NEFT और 10 हजार रुपये IMPS के माध्यम से जमा कराए। अगले दिन, 5 अप्रैल, वह दोबारा शोरूम पहुंचा और 5 लाख रुपये, 1.41 लाख रुपये ऑनलाइन बैंक ट्रांसफर तथा 52,900 रुपये नकद देकर पूरा भुगतान किया। इसके बाद कारोबारी ने जीएसटी का बिल जारी कर सोने का सिक्का उसे सौंप दिया। 20 दिन बाद बैंक खाता हुआ फ्रीज करीब 20 दिन बाद, 24 अप्रैल को ज्वेलर्स का बैंक खाता अचानक होल्ड कर दिया गया। बैंक ने ई-मेल के माध्यम से बताया कि खाते में आई 5.10 लाख रुपये की राशि को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के निर्देश पर फ्रीज किया गया है। इसके बाद 4 जून को बेंगलुरु साइबर क्राइम पुलिस का नोटिस मिला। नोटिस में बताया गया कि सोने के सिक्के के भुगतान में इस्तेमाल किए गए 5.10 लाख रुपये, बेंगलुरु के एक कारोबारी से हुई 14 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का हिस्सा थे। पुलिस के अनुसार, ठगों ने कथित रूप से ठगी की रकम सीधे ज्वेलर्स के खाते में ट्रांसफर कर सोने का सिक्का खरीद लिया। पुलिस ने दर्ज किया मामला मामले की जानकारी मिलने के बाद अजय मंगल ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान खरीदारी के समय जमा कराए गए आधार कार्ड से पता चला कि आरोपी अभिषेक परिहार बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के घोसीपुरा का निवासी है। पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। सीसीटीवी फुटेज नहीं मिले सीएसपी लश्कर किरण अहिरवार ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपी की तलाश जारी है। उन्होंने कहा कि शोरूम का सीसीटीवी बैकअप केवल 15 से 20 दिन तक सुरक्षित रहता है, इसलिए घटना के फुटेज उपलब्ध नहीं हो सके। हालांकि आधार कार्ड के विवरण और साइबर ट्रेल के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

भरतपुर: REET में पास कराने के नाम पर लिए 5 लाख, पैसे वापस मांगने पर ठेकेदार की हत्या; 14 महीने बाद हुआ खुलासा

भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर जिले में करीब 14 महीने पहले लापता हुए ठेकेदार प्रहलाद बैरवा हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, REET-2021 परीक्षा में प्रहलाद की पत्नी को पास कराने का झांसा देकर 5 लाख रुपये लेने के बाद जब आरोपी रकम लौटाने के दबाव में आए तो उन्होंने प्रहलाद की हत्या कर दी। पुलिस ने बताया कि पॉलीग्राफ टेस्ट के बाद दोनों आरोपियों ने अपराध स्वीकार कर लिया। उनकी निशानदेही पर धौलपुर के जंगल से शव के अवशेष भी बरामद किए गए हैं। कोर्ट जाते समय हुए थे लापता भरतपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) राजेश मीणा ने बताया कि वैर निवासी ठेकेदार प्रहलाद बैरवा 26 मार्च 2025 को कोर्ट जाने के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे। अगले दिन उनकी पत्नी पूनम बैरवा ने वैर थाने में अपहरण का मामला दर्ज कराया था। मामले की जांच के लिए कई पुलिस टीमें गठित की गईं, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला। इस दौरान परिजनों ने कई बार प्रदर्शन कर मामले के खुलासे की मांग भी की थी। REET में पास कराने का झांसा बना हत्या की वजह पुलिस जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 में पूनम बैरवा REET परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान आरोपी धर्मेंद्र जाखड़ ने परीक्षा में पास कराने का दावा करते हुए प्रहलाद से 5 लाख रुपये ले लिए। जब परीक्षा का परिणाम आया और पूनम सफल नहीं हुईं तो प्रहलाद ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार, लगातार पैसों की मांग से परेशान होकर धर्मेंद्र ने अपने साथी विनोद मीणा के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। अपहरण के बाद जंगल में की हत्या पुलिस के अनुसार, 26 मार्च 2025 को आरोपियों ने प्रहलाद का कथित रूप से अपहरण कर उन्हें धौलपुर के जंगल में ले गए, जहां गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद पहचान छिपाने के उद्देश्य से शव को जंगल में दफना दिया गया। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने जंगल से शव के अवशेष बरामद किए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पॉलीग्राफ टेस्ट के बाद खुला राज जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों से पूछताछ की, लेकिन वे लगातार गुमराह करते रहे। इसके बाद पॉलीग्राफ टेस्ट कराया गया। पुलिस का कहना है कि टेस्ट के बाद आरोपियों ने हत्या की बात स्वीकार की, जिसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अन्य लेन-देन की भी जांच जारी पुलिस ने बताया कि मामले में अन्य आर्थिक लेन-देन के पहलुओं की भी जांच की जा रही है। वहीं, करीब 25 दिन पहले एसपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान प्रहलाद की पत्नी पूनम बैरवा ने आरोप लगाया था कि उनके पति ने धर्मेंद्र जाखड़ को 4.50 लाख रुपये और राजेश कुमार गर्ग को 15 लाख रुपये उधार दिए थे। उन्होंने दावा किया कि रकम वापस मांगने को लेकर पहले से विवाद चल रहा था और इस संबंध में धोखाधड़ी का मामला भी अदालत में विचाराधीन है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। राजस्थान, अपराध और देश की ताज़ा एवं विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स: पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत पदक से चूका, स्विमिंग और बॉक्सिंग में बढ़ीं उम्मीदें

ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स के दूसरे दिन भारत को पैरा पावरलिफ्टिंग के पहले मेडल इवेंट में निराशा हाथ लगी। पुरुष लाइटवेट वर्ग में अशोक कुमार मलिक पदक से मामूली अंतर से चूकते हुए चौथे स्थान पर रहे, जबकि परमजीत कुमार छठे स्थान पर रहे। हालांकि स्विमिंग, जिम्नास्टिक्स और बॉक्सिंग में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने पदकों की उम्मीदें बरकरार रखी हैं। पैरा पावरलिफ्टिंग में अशोक चौथे स्थान पर पुरुष लाइटवेट फाइनल में नौ बार के राष्ट्रीय चैंपियन अशोक कुमार मलिक ने पहली कोशिश में 195 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। दूसरी कोशिश में उन्होंने 200 किलोग्राम की अपनी व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (Personal Best) लिफ्ट पूरी कर 143.8 अंक हासिल किए। तीसरे प्रयास में 205 किलोग्राम वजन उठाने में असफल रहने के कारण वह चौथे स्थान पर रहे और पदक से चूक गए। वहीं परमजीत कुमार ने पहले प्रयास में 176 किलोग्राम वजन उठाकर 135.6 अंक अर्जित किए। इसके बाद 179 किलोग्राम वजन उठाने के दोनों प्रयास असफल रहे और वह छठे स्थान पर रहे। अब महिला लाइटवेट वर्ग में जसप्रीत कौर और सुमन देवी, जबकि महिला हेवीवेट में कस्तूरी राजामणि तथा पुरुष हेवीवेट में झंडू कुमार और सुधीर भारत की ओर से पदक की चुनौती पेश करेंगे। स्विमिंग में भारतीय खिलाड़ियों ने बनाई फाइनल और सेमीफाइनल में जगह भारत के लिए अच्छी खबर स्विमिंग से आई। इस स्पर्धा में कुल आठ प्रतिभागी होने के कारण दोनों भारतीय तैराक फाइनल में पहुंच गए हैं। वहीं स्टार तैराक श्रीहरि नटराज ने पुरुष 50 मीटर बैकस्ट्रोक हीट में 25.52 सेकेंड का समय निकालते हुए अपनी हीट में पांचवां और कुल मिलाकर 14वां स्थान हासिल किया। इसके साथ उन्होंने सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया। जिम्नास्टिक्स में भारत मजबूत स्थिति में आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स की पुरुष टीम ऑलराउंड स्पर्धा में दो उपकरणों के बाद भारत सब-डिवीजन-2 में सिंगापुर के बाद दूसरे स्थान पर चल रहा है। भारतीय टीम में तपन मोहंती, स्वाथिश केपी, तपेश्वरनाथ दास और योगेश्वर सिंह शामिल हैं। बॉक्सिंग में आज से भारत का अभियान बॉक्सिंग में भारत की ओर से जदुमणि सिंह पुरुष 55 किलोग्राम वर्ग के राउंड ऑफ-32 मुकाबले में स्कॉटलैंड के आरोन कुलेन का सामना करेंगे। वहीं ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन को महिला 75 किलोग्राम वर्ग में बाय मिला है, जिससे वह सीधे सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार दोनों सेमीफाइनल में हारने वाले खिलाड़ियों को भी कांस्य पदक दिया जाता है। ऐसे में लवलीना का कम से कम ब्रॉन्ज मेडल सुनिश्चित हो गया है। जूडो में भारत को झटका भारत की जूडो खिलाड़ी तूलिका मान को पिछले 12 महीनों में तीन बार वेयरअबाउट्स नियम के उल्लंघन के कारण NADA ने अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इसके चलते उन्हें भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया है। इससे पहले पुरुष 73 किलोग्राम वर्ग के अरुण कुमार भी प्रतियोगिता से बाहर हो चुके हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स, भारतीय खिलाड़ियों और खेल जगत की हर बड़ी खबर के लिए विजिट करें:deshharpal.com

Gold Price Today: सोना ₹824 सस्ता, चांदी में मामूली तेजी; जानें आज के ताजा भाव

नई दिल्ली। घरेलू सर्राफा बाजार में 24 जुलाई को सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी के दाम में हल्की बढ़त देखने को मिली। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत 824 रुपये घटकर 1,43,781 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। वहीं, एक किलोग्राम चांदी की कीमत 241 रुपये बढ़कर 2,22,721 रुपये हो गई। इससे पहले सोना 1,44,605 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,22,480 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। इस साल कीमतों में रहा बड़ा उतार-चढ़ाव वर्ष 2026 में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। चांदी की बात करें तो— आगे क्या रह सकता है रुख? कमोडिटी विशेषज्ञ अजय केडिया के अनुसार, सोना और चांदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अवसर हो सकता है। हालांकि उन्होंने सलाह दी कि निवेशकों को एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध (SIP या किस्तों में) निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए, ताकि बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सके। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो साल के अंत तक सोना 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.80 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है। सोना-चांदी, शेयर बाजार, निवेश और बिजनेस से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए विजिट करें:deshharpal.com

NEET पेपर लीक मामला: शिक्षा मंत्रालय का बड़ा एक्शन, NTA के 47 अधिकारी बर्खास्त, दर्ज होंगे आपराधिक केस

नई दिल्ली। देशभर में NEET पेपर लीक मामले को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्रालय ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। समाचार एजेंसी ANI के सूत्रों के अनुसार, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही इन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। यह कार्रवाई परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार का अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। एक दिन पहले हुए थे बड़े प्रशासनिक फेरबदल इससे पहले गुरुवार को केंद्र सरकार ने 17 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और पदोन्नति के आदेश जारी किए थे। सबसे बड़ा बदलाव शिक्षा मंत्रालय में हुआ, जहां 1994 बैच के राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया। उन्होंने विनीत जोशी का स्थान लिया है, जिन्हें पंचायती राज मंत्रालय का सचिव बनाया गया है। इसके अलावा 1995 बैच के IAS अधिकारी टी.के. अनिल कुमार को पदोन्नत कर स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। पेपर लीक पर सरकार लगातार दे रही सख्त संदेश पिछले कुछ दिनों में केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामलों पर लगातार कड़े रुख के संकेत दिए हैं। 24 जुलाई: सख्त कानून लाने का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात जारी वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक जैसे अपराधों को रोकने के लिए कड़े दंड का प्रावधान करने वाला विधेयक संसद में लाया जाएगा। 23 जुलाई: फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि पेपर लीक मामलों में दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए। 21 जुलाई: “पेपर लीक घोर पाप है” एनडीए संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा था कि पेपर लीक युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा अन्याय है। उन्होंने बताया कि मामले में अब तक 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही राज्यों से भी इस तरह की घटनाओं को रोकने में सहयोग की अपील की गई। युवाओं के भविष्य पर सरकार का फोकस सरकार का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से प्रशासनिक कार्रवाई, कानूनी सुधार और जांच प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। देश, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी हर बड़ी और विश्वसनीय खबर के लिए विजिट करें:deshharpal.com

About Me

देशहरपल सिर्फ खबरों का मंच नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां आपको ताज़ातरीन खबरों के साथ-साथ नौकरी, शिक्षा, और नए भारत की बदलती आर्थिक तस्वीर पर उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी मिलेगी।

Phone: +91 9406783569, +91 755 484 8829
Email: support@deshharpal.com
Address : A-23 Sakshi Bunglow Trilanga Near Aura Mall Bhopal M.P

Recent Posts

  • All Post
  • Breaking News
  • Education
  • More News
  • Web Story
  • एंटरटेनमेंट
  • देश-हरपल
  • धर्म-कर्म
  • प्रदेश
  • बिज़नेस
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • वीडियो
  • स्पोर्ट्स
    •   Back
    • एक्सक्लूसिव
    • Editorial
    •   Back
    • IPL 2026
    • T20 वर्ल्ड कप
    • FIFA 2026
    •   Back
    • सोच-विचार
    • हेल्थ
    • ट्रैवल
    • कल्चर
    • एनवायरनमेंट
    • Impact Feature
    •   Back
    • राशिफल
    • पंचांग
    • पर्व-त्यौहार
    • पूजा-पाठ
    • चैत्र नवरात्रि 2025
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    •   Back
    • टीवी
    • वेब-सीरीज
    • फिल्म रिव्यू
    • बॉलीवुड
    •   Back
    • लाइफस्टाइल
    •   Back
    • स्टॉक-मार्केट

© 2023 Deshharpal. All Rights Reserved.