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IRCTC

IRCTC New Beta Website: Tatkal Ticket Booking होगी फटाफट, पहले कर लें ये 2 काम

Tatkal Ticket Booking करते समय सबसे बड़ी परेशानी यही होती है कि बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही मिनटों में सीटें भर जाती हैं। ऐसे में वेबसाइट का तेज चलना और पहले से तैयारी होना बेहद जरूरी हो जाता है। यात्रियों की इसी परेशानी को देखते हुए IRCTC ने अपनी नई Beta Website में कई बदलाव किए हैं। नए प्लेटफॉर्म को पहले के मुकाबले आसान और तेज बनाया गया है, ताकि टिकट बुक करते समय यात्रियों को कम परेशानी हो। अगर आप भी अक्सर Tatkal में टिकट बुक करते हैं, तो नई वेबसाइट के साथ कुछ जरूरी तैयारियां पहले से कर लेना आपके लिए काफी फायदेमंद रहेगा। IRCTC की नई Beta Website में क्या खास है? नई Beta Website को पुराने प्लेटफॉर्म की तुलना में ज्यादा user-friendly बनाने की कोशिश की गई है। टिकट खोजने से लेकर seat availability देखने और booking तक की प्रक्रिया को सरल किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Tatkal booking शुरू होने के शुरुआती तीन मिनट में नए प्लेटफॉर्म पर booking success rate में करीब 5 फीसदी का सुधार देखने को मिला है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर यात्री को confirmed ticket मिल जाएगा। Tatkal में सीटें सीमित होती हैं और एक साथ बड़ी संख्या में लोग बुकिंग करते हैं। नई वेबसाइट में single-screen seat availability, कम booking steps और कम CAPTCHA जैसी सुविधाएं भी शामिल की गई हैं। इससे खासकर peak booking time में यात्रियों का समय बच सकता है। Tatkal Ticket Booking से पहले कर लें ये 2 काम 1. Aadhaar Authentication पहले ही पूरा कर लें अगर आप IRCTC से online Tatkal ticket book करते हैं, तो सबसे पहले अपने account का Aadhaar authentication पूरा कर लेना जरूरी है। रेलवे के नियमों के अनुसार online Tatkal booking के लिए Aadhaar-authenticated user होना जरूरी है। Booking के दौरान Aadhaar-based OTP authentication की व्यवस्था भी लागू है। इसलिए Tatkal खुलने के समय Aadhaar verification करने के बजाय यह काम पहले ही पूरा कर लें। इससे booking के दौरान एक जरूरी step कम हो जाएगा और समय बचाने में मदद मिलेगी। 2. Passenger Details और Payment की तैयारी पहले करें Tatkal booking में हर सेकेंड मायने रखता है। इसलिए passenger details को आखिरी समय पर भरने के बजाय पहले से तैयार रखना समझदारी है। IRCTC की Master List सुविधा का इस्तेमाल करके यात्रियों की जरूरी जानकारी पहले से सेव की जा सकती है। इसके अलावा payment के लिए जिस माध्यम का इस्तेमाल करना है, उसे भी पहले से तैयार रखें। इस छोटी सी तैयारी का फायदा यह है कि Tatkal booking शुरू होने के बाद आपको बार-बार details भरने में समय नहीं गंवाना पड़ेगा। Tatkal Booking का Timing याद रखें Tatkal टिकट सामान्य तौर पर यात्रा की तारीख से एक दिन पहले बुक किए जाते हैं। यानी अगर आपको Tatkal ticket चाहिए तो booking शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही IRCTC account में login करके तैयार रहना बेहतर है। Agents को लेकर भी है खास नियम रेलवे ने Tatkal booking में आम यात्रियों को बेहतर मौका देने के लिए authorized agents पर भी शुरुआती समय में रोक लगाई है। नियमों के अनुसार agents को Tatkal booking खुलने के पहले 30 मिनट के दौरान opening-day Tatkal tickets बुक करने की अनुमति नहीं होती। AC और Non-AC दोनों श्रेणियों के लिए अलग-अलग booking opening time के हिसाब से यह व्यवस्था लागू होती है। क्या नई IRCTC Website से Confirm Ticket पक्का मिलेगा? यह सवाल सबसे ज्यादा यात्रियों के मन में होगा। इसका सीधा जवाब है—नहीं। नई Beta Website का मकसद booking process को तेज और आसान बनाना है। लेकिन confirmed ticket मिलना सीटों की उपलब्धता और उस समय booking करने वाले यात्रियों की संख्या पर निर्भर करता है। अगर किसी ट्रेन में Tatkal quota की सीटें कम हैं और मांग ज्यादा है, तो नई वेबसाइट होने के बावजूद टिकट जल्दी खत्म हो सकते हैं। Tatkal Ticket के लिए ये छोटी तैयारी आएगी काम अगर आप चाहते हैं कि Tatkal booking के दौरान समय कम से कम बर्बाद हो, तो इन बातों का ध्यान रखें: यात्रियों के लिए नई Website कितनी फायदेमंद? IRCTC की नई Beta Website निश्चित तौर पर Tatkal booking experience को बेहतर बनाने की दिशा में एक कदम है। कम steps और आसान interface से यात्रियों को booking के दौरान कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन Tatkal में सिर्फ वेबसाइट की speed ही सबकुछ नहीं है। समय पर login, Aadhaar authentication, passenger details और payment की तैयारी भी उतनी ही जरूरी है। ऐसे में अगर आपको अक्सर Tatkal ticket book करना पड़ता है, तो नई वेबसाइट का इस्तेमाल करने से पहले ये दो काम जरूर कर लें—Aadhaar authentication पूरा करें और passenger/payment details तैयार रखें। इससे booking शुरू होते ही आपका पूरा ध्यान टिकट बुक करने पर रहेगा, न कि details भरने में। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jharkhand

Jharkhand में Students का Protest तेज, CM Hemant Soren बोले- बातचीत को तैयार

झारखंड (Jharkhand) में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का गुस्सा अब सड़क से सरकार के दरवाजे तक पहुंच चुका है। JPSC और JSSC से जुड़ी मांगों को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करने की इच्छा जताई है। हालांकि, बातचीत से पहले ही छात्र प्रतिनिधिमंडल को लेकर एक नया विवाद सामने आ गया है। बातचीत के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तैयार किया गया है। लेकिन इस प्रतिनिधिमंडल में राज्य के पूर्व महाधिवक्ता के शामिल होने पर मुख्यमंत्री की ओर से आपत्ति जताए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में लंबे समय से चल रहे Student Protest के बीच अब बातचीत की प्रक्रिया भी चर्चा में आ गई है। छात्रों से बातचीत के लिए तैयार सरकार छात्रों की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सरकार की ओर से बातचीत की पहल को अहम माना जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, प्रक्रिया से जुड़े सवालों और अभ्यर्थियों के हित में ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। 11 सदस्यीय Delegation पर क्यों उठी आपत्ति? सरकार से बातचीत के लिए छात्रों ने 11 लोगों का प्रतिनिधिमंडल बनाया है। इसमें पूर्व महाधिवक्ता के शामिल होने को लेकर मुख्यमंत्री की आपत्ति सामने आई है। यही मुद्दा अब बातचीत से पहले चर्चा का कारण बन गया है। छात्रों की तरफ से प्रतिनिधिमंडल को लेकर क्या अंतिम फैसला होता है और सरकार किन लोगों से बातचीत करती है, इस पर सभी की नजर है। अनशनकारी छात्र की तबीयत बिगड़ी, Hospital में भर्ती इधर, आंदोलन कर रहे छात्रों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर भी सामने आई है। अनशन पर बैठे एक छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया गया कि छात्र की स्वास्थ्य स्थिति खराब होने पर उसे प्रदर्शन स्थल से सदर अस्पताल ले जाया गया। आंदोलन के दौरान अनशन कर रहे छात्रों की सेहत को लेकर पहले से ही चिंता जताई जा रही थी। ऐसे में एक छात्र के अस्पताल पहुंचने से मामला और गंभीर हो गया है। छात्रों की मांगों पर समाधान का इंतजार छात्रों का आंदोलन अब कई दिनों से जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए और ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे अभ्यर्थियों का भरोसा कायम रहे। सबसे बड़ी उम्मीद अब सरकार के साथ होने वाली बातचीत से जुड़ी है। अगर बातचीत में उनकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस रास्ता निकलता है तो लंबे समय से चल रहे आंदोलन को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ सकता है। बातचीत से खत्म होगा गतिरोध? झारखंड में Student Protest के बीच सरकार की बातचीत की पेशकश को एक सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन प्रतिनिधिमंडल में पूर्व महाधिवक्ता की मौजूदगी को लेकर उठी आपत्ति ने बातचीत से पहले ही पेच पैदा कर दिया है। अब असली सवाल यही है कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत किस रूप में होती है और क्या दोनों पक्ष किसी सहमति तक पहुंच पाते हैं। फिलहाल छात्रों की नजर सरकार के अगले कदम पर है, जबकि अनशनकारी छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलन की गंभीरता भी बढ़ गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rahul Gandhi

Rahul Gandhi के आवास का घेराव करने पहुंचे साधु-संत, Police Action से मची हलचल

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi के दिल्ली स्थित आवास के बाहर शुक्रवार को साधु-संतों का एक समूह प्रदर्शन करने पहुंच गया। प्रदर्शनकारियों ने राहुल गांधी के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। अचानक हुए इस प्रदर्शन के बाद मौके पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ गई और कुछ ही देर में प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया गया। राहुल गांधी के आवास के बाहर हुए इस प्रदर्शन ने दिल्ली के राजनीतिक माहौल को एक बार फिर गरमा दिया है। प्रदर्शन के दौरान साधु-संतों ने अपनी नाराजगी जाहिर की और राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी भी की। Rahul Gandhi के घर के बाहर क्यों पहुंचे साधु-संत? रिपोर्टों के अनुसार, साधु-संतों का समूह राहुल गांधी के आवास का घेराव करने के इरादे से वहां पहुंचा था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे कुछ मुद्दों को लेकर राहुल गांधी से नाराज हैं और इसी नाराजगी को सामने रखने के लिए विरोध करने पहुंचे हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों और उनकी मांगों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। ऐसे में पूरे मामले की तस्वीर संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान आने के बाद ही ज्यादा स्पष्ट हो सकेगी। Police ने मौके पर संभाला मोर्चा प्रदर्शन की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को राहुल गांधी के आवास के आसपास से हटाया। रिपोर्टों में कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस की कार्रवाई के बाद इलाके में स्थिति सामान्य हो गई। सुरक्षा को देखते हुए राहुल गांधी के आवास के आसपास अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। पहले से गर्म है राजनीतिक माहौल यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राहुल गांधी और केंद्र सरकार के बीच कई मुद्दों को लेकर राजनीतिक टकराव लगातार जारी है। संसद से लेकर सड़क तक कांग्रेस और बीजेपी के नेता एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। राहुल गांधी लगातार सरकार की नीतियों और विभिन्न मुद्दों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। दूसरी ओर, बीजेपी और उसके समर्थक भी कांग्रेस नेता के बयानों और राजनीतिक गतिविधियों पर जवाबी हमला करते रहे हैं। प्रदर्शन के बाद बढ़ी सियासी हलचल राहुल गांधी के आवास के बाहर साधु-संतों का पहुंचना महज एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं माना जा रहा है। दिल्ली में इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में चर्चा जरूर बढ़ा दी है। फिलहाल पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटा दिया है और स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि Congress और BJP की ओर से इस पूरे मामले पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gen-Z

Gen-Z का मन टटोलेगी Yogi Government, स्वतंत्र युवा आयोग से बनेगी नई Youth Policy

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अब प्रदेश के युवाओं से जुड़े मुद्दों को समझने और उनकी आवाज को नीति-निर्माण तक पहुंचाने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार की ओर से स्वतंत्र राज्य युवा आयोग के गठन की पहल की जा रही है। इसका उद्देश्य युवाओं की बदलती जरूरतों, समस्याओं और अपेक्षाओं को करीब से समझना और उनके लिए बेहतर नीतियां तैयार करना बताया जा रहा है। आज की Gen-Z पहले की पीढ़ियों से काफी अलग है। रोजगार, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ डिजिटल दुनिया, स्टार्टअप, सोशल मीडिया, मानसिक दबाव, स्किल डेवलपमेंट और नए करियर विकल्प भी युवाओं की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। ऐसे में सरकार का फोकस अब युवाओं से सीधे संवाद बढ़ाने पर दिखाई दे रहा है। क्या करेगा स्वतंत्र युवा आयोग? प्रस्तावित युवा आयोग युवाओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर सरकार को सुझाव देने और उनकी समस्याओं को सामने लाने का काम कर सकता है। आयोग के जरिए अलग-अलग वर्गों के युवाओं से संवाद स्थापित करने की कोशिश होगी, ताकि जमीनी स्तर की परेशानियां सरकार तक पहुंच सकें। खास तौर पर Education, Employment, Skill Development और Entrepreneurship जैसे मुद्दे युवाओं के लिए अहम हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों से लेकर नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं और अपना कारोबार शुरू करने वाले युवाओं तक, अलग-अलग समूहों की समस्याओं को समझना आयोग की भूमिका का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। Youth Policy पर भी जोर सरकार की इस पहल को उत्तर प्रदेश की प्रस्तावित Youth Policy से भी जोड़कर देखा जा रहा है। बदलते समय के साथ युवाओं की जरूरतें भी बदल रही हैं। ऐसे में केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित रहने के बजाय शिक्षा, कौशल, उद्यमिता और सामाजिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। नई नीति के जरिए युवाओं को ज्यादा अवसर देने और उन्हें प्रदेश के विकास से जोड़ने की दिशा में काम किए जाने की उम्मीद है। Gen-Z से सीधे संवाद की कोशिश सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने युवाओं के सरकार और प्रशासन से संवाद करने का तरीका भी बदल दिया है। आज युवा अपनी समस्या को सीधे सोशल मीडिया पर उठा सकता है और किसी मुद्दे पर तेजी से अपनी राय रख सकता है। ऐसे माहौल में स्वतंत्र युवा आयोग सरकार और युवाओं के बीच एक Bridge की भूमिका निभा सकता है। अगर युवाओं की राय नियमित रूप से सुनी जाती है और उनके सुझावों को नीतियों में जगह मिलती है, तो इससे सरकारी योजनाओं को जमीन पर लागू करने में भी मदद मिल सकती है। रोजगार से लेकर करियर तक कई मुद्दे अहम उत्तर प्रदेश में बड़ी युवा आबादी को देखते हुए रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाएं हमेशा महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। इसके अलावा Skill Training, Startups, Digital Jobs, Sports और Innovation जैसे क्षेत्र भी तेजी से युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहे हैं। युवा आयोग इन विषयों पर युवाओं की जरूरतों का आकलन कर सरकार को सुझाव देने का माध्यम बन सकता है। इससे युवाओं के लिए बनाई जाने वाली योजनाओं को उनकी वास्तविक जरूरतों के करीब लाने की कोशिश होगी। सरकार के लिए भी होगी बड़ी जिम्मेदारी स्वतंत्र युवा आयोग का गठन केवल एक संस्था बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। इसकी असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि युवाओं की बात कितनी गंभीरता से सुनी जाती है और उनके सुझावों पर कितना अमल होता है। युवाओं के बीच आयोग की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी होगा कि इसमें अलग-अलग क्षेत्रों और वर्गों का प्रतिनिधित्व हो तथा युवाओं से मिलने वाली शिकायतों और सुझावों पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाए। क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम? उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में युवाओं की संख्या काफी अधिक है। ऐसे में युवा वर्ग की आकांक्षाओं को समझना किसी भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण है। स्वतंत्र युवा आयोग के जरिए अगर Government और Gen-Z के बीच सीधा संवाद मजबूत होता है, तो यह आने वाले समय में युवा-केंद्रित नीतियों के लिए अहम भूमिका निभा सकता है। फिलहाल इस पहल की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि युवाओं की आवाज केवल सोशल मीडिया या आंदोलनों तक सीमित न रहे, बल्कि वह सीधे नीति बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा बने। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Patna

Patna Accident: युवक की मौत पर भड़की भीड़, 10 वाहन जलाए; 5 थानों की Police पहुंची

राजधानी पटना (Patna) में सड़क हादसे (Road Accident) में एक युवक की मौत के बाद हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। हादसे से नाराज लोगों ने जमकर हंगामा किया और सड़क पर खड़ी कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान एक ट्रैफिक पोस्ट और स्लीपर बस में भी आग लगा दी गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और NH-30 पर लंबा जाम लग गया। मामले की सूचना मिलते ही पांच थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश शुरू की। पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाकर सड़क खाली कराने का प्रयास किया। तनाव को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया। युवक की मौत के बाद भड़का आक्रोश बताया जा रहा है कि सड़क हादसे में एक युवक की मौत हो गई थी। घटना की जानकारी फैलते ही स्थानीय लोग और मृतक के परिचित मौके पर जुटने लगे। लोगों में हादसे को लेकर काफी नाराजगी थी। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया। आक्रोशित भीड़ ने सड़क पर खड़ी कई गाड़ियों को निशाना बनाया। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 10 वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। इसके अलावा एक ट्रैफिक पोस्ट और स्लीपर बस में भी आग लगा दी गई। NH-30 पर लगा लंबा जाम आगजनी और प्रदर्शन के कारण NH-30 पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालने और यातायात बहाल कराने की कोशिश शुरू की। घटना के बाद आसपास के इलाकों में भी तनाव का माहौल बन गया। पुलिस की कई टीमें मौके पर मौजूद रहीं और भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। पांच थानों की पुलिस मौके पर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पांच थानों की पुलिस को मौके पर बुलाया गया। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और आगजनी में शामिल लोगों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस की प्राथमिकता इलाके में शांति व्यवस्था कायम करने और NH-30 पर यातायात को सामान्य कराने की रही। घटनास्थल के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। हादसे के बाद कानून-व्यवस्था पर सवाल एक सड़क हादसे के बाद शुरू हुआ विरोध इतना बढ़ गया कि कई वाहनों और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। घटना ने इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। आगजनी और तोड़फोड़ में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। हादसे में युवक की मौत के कारणों और घटना के पूरे घटनाक्रम की भी जांच की जा रही है।
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Delimitation Bill

Delimitation Bill पर DMK का बड़ा दांव, Modi Government को समर्थन के लिए रखीं 3 शर्तें

संसद में Delimitation Bill 2026 को लेकर सियासी हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। अब तक इस बिल का खुलकर विरोध कर रही DMK के रुख में नरमी के संकेत मिल रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी केंद्र की मोदी सरकार को इस बिल पर समर्थन देने के लिए तैयार हो सकती है, लेकिन इसके लिए उसने तीन अहम शर्तें रखी हैं। DMK का कहना है कि परिसीमन केवल सीटों की संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संघीय ढांचे से है। यही वजह है कि पार्टी चाहती है कि सरकार उसकी मांगों को कानूनी रूप से स्पष्ट करे। DMK की पहली शर्त क्या है? पहली मांग 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों के बंटवारे पर लगी रोक से जुड़ी है। पार्टी चाहती है कि यह व्यवस्था, जिसकी मौजूदा अवधि 2027 में समाप्त होनी है, संविधान संशोधन के जरिए आगे 25 साल तक जारी रखी जाए। दक्षिणी राज्यों की चिंता लंबे समय से यही रही है कि जनसंख्या को परिसीमन का प्रमुख आधार बनाने पर जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम हो सकती है। दूसरी शर्त—सभी राज्यों में 50% सीटों का इजाफा DMK की दूसरी बड़ी मांग है कि लोकसभा सीटों में सभी राज्यों के लिए समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की जाए। पार्टी चाहती है कि इस संबंध में केवल राजनीतिक या मौखिक आश्वासन न हो, बल्कि कानून में स्पष्ट प्रावधान किया जाए। केंद्र सरकार की ओर से पहले यह तर्क दिया गया है कि प्रस्तावित व्यवस्था में दक्षिणी राज्यों को नुकसान नहीं होगा। गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था कि 543 लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 816 करने के प्रस्ताव में दक्षिण भारत की सीटें भी बढ़ेंगी। उनके मुताबिक दक्षिणी राज्यों की मौजूदा 129 सीटें बढ़कर 195 हो सकती हैं और कुल सदन में उनका हिस्सा करीब 24 प्रतिशत के आसपास बना रहेगा। तीसरी शर्त—नई सीटों की पूरी लिस्ट जारी हो DMK की तीसरी मांग भी काफी महत्वपूर्ण है। पार्टी चाहती है कि नए कानून के साथ-साथ सभी राज्यों में बदले जाने वाले लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की पूरी सूची भी सार्वजनिक की जाए। यानी पार्टी केवल सीटों की कुल संख्या जानने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि यह भी स्पष्ट देखना चाहती है कि परिसीमन के बाद किन क्षेत्रों की सीमाएं कैसे बदलेंगी। DMK के समर्थन से क्या बदलेगा? परिसीमन बिल को लेकर केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती संविधान संशोधन से जुड़ी आवश्यक संख्या जुटाना है। रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा में NDA की मौजूदा ताकत 319 बताई गई है, जबकि DMK के 22 सांसद हैं। यदि DMK समर्थन देती है तो NDA की संख्या 341 तक पहुंच सकती है। हालांकि, केवल DMK के समर्थन से ही जरूरी आंकड़ा पूरा नहीं होता। ऐसे में सरकार को दूसरे दलों और सांसदों का समर्थन भी जुटाना होगा। अप्रैल में बिल पेश किए जाने के दौरान इसे 298 वोट मिले थे। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लोकसभा में सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 किए जाने की बात सामने आई है। दक्षिण बनाम उत्तर की बहस क्यों? परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंता मुख्य रूप से जनसंख्या और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और अन्य दक्षिणी राज्यों का तर्क रहा है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के प्रयास किए हैं, इसलिए केवल आबादी के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण उनके लिए राजनीतिक नुकसान का कारण बन सकता है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि प्रस्तावित मॉडल में दक्षिणी राज्यों की सीटें घटने के बजाय बढ़ेंगी। सरकार के मुताबिक तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59, कर्नाटक की 28 से 42 और केरल की 20 से 30 हो सकती हैं। अभी अंतिम फैसला बाकी फिलहाल DMK का समर्थन पूरी तरह तय नहीं माना जा सकता। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अंतिम निर्णय बिल के अंतिम ड्राफ्ट और उसके प्रावधानों की समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और DMK के बीच बातचीत पर सबकी नजर रहेगी। परिसीमन बिल अब सिर्फ संसद में सीटों के पुनर्वितरण का मुद्दा नहीं रह गया है। इसके साथ दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी, जनसंख्या नियंत्रण और केंद्र-राज्य संबंधों का सवाल भी जुड़ गया है। ऐसे में DMK की तीन शर्तें मानना सरकार के लिए आसान होगा या नहीं, यही इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NEET Paper Leak Case

NEET Paper Leak Case में बड़ा खुलासा, NTA Experts पर सवाल; WhatsApp-Telegram से फैला पेपर

NEET Paper Leak Case को लेकर CBI की जांच में एक के बाद एक गंभीर बातें सामने आने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित पेपर लीक की साजिश परीक्षा से काफी पहले शुरू हो गई थी। आरोप है कि परीक्षा से जुड़े कुछ लोगों ने प्रश्नपत्र तैयार होने के दौरान ही सवालों को याद किया और बाद में इन्हें छात्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। CBI की जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि पेपर से जुड़े सवालों को छात्रों तक पहुंचाने के लिए WhatsApp और Telegram जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया। इस पूरे मामले ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की गोपनीयता और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पेपर तैयार होने के दौरान सवाल याद करने का आरोप जांच से जुड़े दावों के अनुसार, कथित तौर पर परीक्षा प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़े कुछ NTA एक्सपर्ट्स ने सवालों को याद कर लिया था। इसके बाद इन सवालों को आगे पहुंचाने की कोशिश की गई। CBI का मानना है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि इसके पीछे पहले से बनाई गई योजना हो सकती है। एजेंसी इसी कड़ी को जोड़ते हुए यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र से संबंधित जानकारी किस स्तर पर बाहर निकली और किन लोगों के बीच इसका आदान-प्रदान हुआ। WhatsApp और Telegram बने कथित जरिया जांच में डिजिटल माध्यमों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। आरोप है कि प्रश्नपत्र से संबंधित सवालों या उनकी जानकारी को WhatsApp और Telegram के जरिए छात्रों तक पहुंचाया गया। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से ऐसी जानकारी को कम समय में कई लोगों तक पहुंचाना आसान हो जाता है। यही वजह है कि जांच एजेंसियां डिजिटल चैट, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की भी जांच कर रही हैं। छात्रों और अभिभावकों के बीच बढ़ी चिंता NEET जैसी परीक्षा लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती है। मेडिकल कॉलेज में दाखिले की उम्मीद लेकर विद्यार्थी महीनों और कई बार वर्षों तक तैयारी करते हैं। ऐसे में पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी की कोई भी खबर छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा देती है। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर प्रश्नपत्र की गोपनीय जानकारी वास्तव में परीक्षा से पहले बाहर गई थी, तो वह सुरक्षा व्यवस्था को पार करके बाहर कैसे पहुंची और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। CBI जांच में आगे क्या? CBI इस मामले में कथित पेपर लीक की पूरी कड़ी को समझने की कोशिश कर रही है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि प्रश्नपत्र से जुड़ी जानकारी किसने हासिल की, उसे किस तरह सुरक्षित रखा गया और फिर छात्रों तक कैसे पहुंचाया गया। जांच एजेंसी डिजिटल सबूतों के साथ-साथ आरोपियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क की भूमिका सामने लाने की कोशिश कर रही है। फिलहाल जांच से सामने आए दावों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामले में अदालत की कार्यवाही और CBI की आगे की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि कथित पेपर लीक की पूरी साजिश किस तरह काम कर रही थी और इसमें कौन-कौन लोग वास्तव में शामिल थे। NEET Paper Leak Case ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि देश की महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र की गोपनीयता और सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Uttarakhand

Monsoon Update: Uttarakhand में 6 नदियां खतरे के निशान पर, UP में बाढ़ और Delhi में हादसा

उत्तर भारत में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तराखंड (Uttarakhand) से लेकर उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक बारिश और जलभराव का असर दिखाई दे रहा है। Uttarakhand में भारी बारिश के बाद कई नदियां उफान पर हैं, जबकि भूस्खलन के कारण बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले मार्ग प्रभावित हुए हैं। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं और दिल्ली में भी जलभराव के बीच एक युवक के नाले में बहने की घटना सामने आई है। Uttarakhand में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के चलते नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य की छह नदियां उफान पर हैं। कई जगहों पर सड़कें पानी और मलबे से प्रभावित हुई हैं, जिससे लोगों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। चारधाम यात्रा पर भी मौसम का असर पड़ा है। Badrinath, Gangotri और Yamunotri Highway पर भूस्खलन और मलबा आने के कारण कई हिस्सों में यातायात बाधित हुआ है। प्रशासन और संबंधित विभाग रास्तों को खोलने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन खराब मौसम के कारण राहत एवं सड़क बहाली के काम में भी चुनौतियां बनी हुई हैं। चारधाम यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह बारिश और भूस्खलन को देखते हुए पहाड़ी मार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। अचानक पहाड़ से मलबा आने और सड़क पर पानी भरने के कारण जोखिम बढ़ जाता है। प्रशासन की ओर से यात्रियों से मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा आगे बढ़ाने की अपील की जा रही है। चारधाम मार्गों पर फंसे यात्रियों के लिए स्थानीय स्तर पर जरूरी व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। UP में करीब 30 गांव बाढ़ की चपेट में उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश में भी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कई इलाकों में नदियों का पानी गांवों की ओर पहुंच गया है। करीब 30 गांवों में बाढ़ जैसे हालात बताए जा रहे हैं। बाढ़ का असर खेतों और ग्रामीण रास्तों पर भी पड़ा है। कई जगहों पर लोगों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। ग्रामीण इलाकों में सबसे बड़ी चिंता लगातार बढ़ते पानी को लेकर है। यदि बारिश का दौर आगे भी जारी रहता है, तो प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। Delhi में नाले में बहा युवक बारिश का असर राजधानी दिल्ली में भी देखने को मिला। जलभराव के बीच एक युवक के नाले में बह जाने की घटना ने लोगों को झकझोर दिया। घटना के बाद राहत और बचाव टीमों ने तलाश अभियान चलाया। दिल्ली में बारिश के बाद कई इलाकों में पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हुआ। निचले इलाकों में जलभराव ने लोगों की परेशानी बढ़ाई। इस घटना ने एक बार फिर भारी बारिश के दौरान खुले नालों और जलभराव वाले स्थानों पर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक साथ कई राज्यों में Weather Alert जैसा माहौल उत्तराखंड में पहाड़ों पर भारी बारिश, उत्तर प्रदेश में बाढ़ और दिल्ली में जलभराव—इन तीनों घटनाओं ने उत्तर भारत में मानसून की गंभीर स्थिति को सामने ला दिया है। पहाड़ी इलाकों में बारिश का असर मैदानी क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। फिलहाल प्रशासन की नजर नदियों के जलस्तर, संवेदनशील इलाकों और प्रमुख सड़कों पर बनी हुई है। लोगों से अपील की जा रही है कि वे नदी, नाले और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें और बिना जरूरी काम के जोखिम वाले रास्तों पर जाने से बचें। लोगों के लिए जरूरी सावधानी बारिश और बाढ़ की स्थिति में लोगों को प्रशासन की advisory का पालन करना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोग निकलने से पहले सड़क की स्थिति जरूर जांच लें। वहीं बाढ़ प्रभावित गांवों में रहने वाले लोगों को पानी बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर जाने में देरी नहीं करनी चाहिए। उत्तर भारत में बिगड़े मौसम ने साफ कर दिया है कि मानसून के दौरान थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। ऐसे में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bofors

Bofors Scam: 40 साल बाद खत्म हुआ विवाद, Supreme Court के फैसले से कानूनी अध्याय बंद

करीब 40 साल से देश की राजनीति और अदालतों में चर्चा का विषय बना रहा Bofors Case अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़ी आखिरी याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही बोफोर्स विवाद की लंबी कानूनी कहानी पर विराम लग गया है। बोफोर्स सिर्फ एक रक्षा सौदे का विवाद नहीं था। इस मामले ने एक दौर में दिल्ली की सत्ता की तस्वीर तक बदल दी थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और 1989 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया। कैसे शुरू हुआ था Bofors विवाद? कहानी 1980 के दशक के उस रक्षा सौदे से शुरू हुई, जब भारत ने अपनी सेना के लिए स्वीडन की कंपनी Bofors से 155mm हॉवित्जर तोपें खरीदने का समझौता किया था। सौदा होने के कुछ समय बाद आरोप सामने आए कि तोपों की खरीद में कथित तौर पर कमीशन और बिचौलियों की भूमिका रही। मामला सामने आते ही देश की राजनीति में हलचल मच गई। तत्कालीन सरकार पर सवाल उठे कि रक्षा सौदे में आखिर किसे और कितना फायदा पहुंचाया गया। विपक्ष ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया और सरकार पर लगातार दबाव बनाया। राजीव गांधी सरकार पर क्या आरोप लगे थे? बोफोर्स विवाद का सबसे बड़ा राजनीतिक असर राजीव गांधी सरकार पर पड़ा। सरकार पर रक्षा सौदे में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए गए। राजीव गांधी ने खुद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार किया था। इसके बावजूद बोफोर्स का नाम उनकी सरकार की राजनीतिक छवि से लंबे समय तक जुड़ा रहा। मामला इतना बड़ा बन गया कि संसद से लेकर चुनावी सभाओं तक इसकी चर्चा होने लगी। विपक्ष के लिए यह सरकार को घेरने का सबसे प्रभावी मुद्दा बन गया। 1989 Election में Bofors बना बड़ा मुद्दा 1984 में भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई कांग्रेस को 1989 के लोकसभा चुनाव में बड़ा झटका लगा। चुनाव प्रचार के दौरान बोफोर्स विवाद लगातार चर्चा में रहा। विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार और सरकार की जवाबदेही से जोड़कर जनता के बीच उठाया। चुनाव के बाद कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई और राजीव गांधी प्रधानमंत्री नहीं रहे। यही वजह है कि भारतीय राजनीति में बोफोर्स केस को सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि एक ऐसा विवाद माना जाता है जिसने चुनावी राजनीति पर भी गहरा असर डाला। 40 साल तक क्यों चर्चा में रहा Bofors Case? बोफोर्स मामले की जांच और इससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया कई वर्षों तक अलग-अलग स्तरों पर चलती रही। जांच एजेंसियों और अदालतों के सामने अलग-अलग पहलुओं की जांच हुई। मामले से जुड़े लोगों और कथित बिचौलियों को लेकर भी लंबे समय तक कानूनी और राजनीतिक बहस जारी रही। अलग-अलग समय पर सामने आने वाली जांच और अदालत की कार्यवाही के कारण यह मामला बार-बार सुर्खियों में लौटता रहा। चार दशक गुजरने के बावजूद बोफोर्स भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित रक्षा सौदों में शामिल रहा। Supreme Court के फैसले से क्या हुआ? अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा आखिरी याचिका खारिज किए जाने के बाद इस मामले की लंबी न्यायिक प्रक्रिया पर विराम लग गया है। इस फैसले ने उस विवाद के कानूनी अध्याय को बंद कर दिया, जिसकी शुरुआत करीब चार दशक पहले हुई थी। हालांकि बोफोर्स का राजनीतिक इतिहास आज भी भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय है। Bofors विवाद की विरासत बोफोर्स मामले ने भारत में रक्षा सौदों की पारदर्शिता और सरकारी जवाबदेही को लेकर बड़ी बहस छेड़ी थी। इसके बाद रक्षा खरीद प्रक्रिया और उसमें बिचौलियों की भूमिका जैसे मुद्दे भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने। इस पूरे प्रकरण की सबसे बड़ी खासियत यही रही कि एक रक्षा सौदे से शुरू हुआ विवाद देश की राजनीति के केंद्र तक पहुंच गया। इसका असर एक चुनाव पर पड़ा और मामला दशकों तक अदालतों में चलता रहा। अब Supreme Court के ताजा फैसले के बाद 40 साल पुरानी इस कानूनी कहानी का अंत हो गया है। लेकिन भारतीय राजनीति के इतिहास में Bofors Case का नाम लंबे समय तक दर्ज रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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देवेंद्र नाथ महतो

JPSC-JSSC Protest: देवेंद्र नाथ महतो की बिगड़ी तबीयत, Hunger Strike के बीच जताया जान का खतरा

झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों का गुस्सा अब सड़क से लेकर विधानसभा तक दिखाई दे रहा है। JPSC-JSSC Exam और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन लगातार चर्चा में है। इसी बीच आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने से मामला और गंभीर हो गया है। महतो पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। तबीयत खराब होने के बावजूद उन्होंने आंदोलन से पीछे हटने से इनकार किया है। इसी दौरान उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि ‘मेरी जान को खतरा है।’ कई दिनों से जारी है Student Protest रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। आंदोलनकारी मुख्य रूप से 14वीं JPSC Civil Services परीक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। छात्रों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और अगर अनियमितताएं साबित होती हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए। प्रदर्शनकारी भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में सुधार की मांग भी कर रहे हैं। भूख हड़ताल के दौरान बिगड़ी तबीयत लंबे समय से खाना नहीं लेने के कारण देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई है। उनकी स्थिति को लेकर आंदोलनकारी छात्रों में भी चिंता बढ़ी है। इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने महतो से बातचीत कर उनसे स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पानी लेने की अपील की। इसके बाद महतो ने पानी लिया, लेकिन उन्होंने साफ किया कि इससे उनका आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। यानी फिलहाल भूख हड़ताल और छात्र आंदोलन दोनों जारी हैं और प्रदर्शनकारी अपनी प्रमुख मांगों पर सरकार से ठोस जवाब चाहते हैं। क्या है छात्रों की Demand? छात्र संगठनों की मांगों में सबसे प्रमुख मुद्दा 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़ा है। प्रदर्शनकारी परीक्षा को रद्द करने और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा आंदोलनकारी चाहते हैं कि JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए, ताकि परीक्षा देने वाले युवाओं को किसी तरह की परेशानी न हो। कुछ प्रदर्शनकारियों ने मामले की जांच CBI या सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों की समिति से कराने की मांग भी रखी है। सरकार से बातचीत की तैयारी लगातार बढ़ते आंदोलन के बीच सरकार और छात्रों के बीच बातचीत की संभावना भी बनी है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से बातचीत के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तैयार किया है। इस टीम में छात्र प्रतिनिधियों के साथ विशेषज्ञ और एक वकील को भी शामिल किया गया है। सरकार की ओर से भी बातचीत के लिए प्रतिनिधिमंडल बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। छात्रों को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए उनकी मांगों पर कोई ठोस रास्ता निकल सकता है। विधानसभा में भी उठा JPSC-JSSC का मुद्दा छात्रों का यह आंदोलन अब झारखंड विधानसभा तक पहुंच चुका है। विपक्षी विधायकों ने भी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है। विपक्ष की ओर से मामले की CBI जांच की मांग भी की गई है। इस तरह JPSC-JSSC का मुद्दा अब केवल छात्रों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य की राजनीति में भी चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। अब सरकार के फैसले पर टिकी नजर झारखंड में जारी छात्र आंदोलन के बीच सबसे बड़ी चिंता देवेंद्र नाथ महतो की बिगड़ती सेहत को लेकर है। एक तरफ छात्र अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, वहीं लंबे समय से चल रही भूख हड़ताल स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन गई है। अब सबकी नजर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत पर है। अगर दोनों पक्ष किसी समाधान पर पहुंचते हैं तो आंदोलन को खत्म करने का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल छात्र भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग पर कायम हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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