झारखंड (Jharkhand) में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का गुस्सा अब सड़क से सरकार के दरवाजे तक पहुंच चुका है। JPSC और JSSC से जुड़ी मांगों को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करने की इच्छा जताई है। हालांकि, बातचीत से पहले ही छात्र प्रतिनिधिमंडल को लेकर एक नया विवाद सामने आ गया है।
बातचीत के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तैयार किया गया है। लेकिन इस प्रतिनिधिमंडल में राज्य के पूर्व महाधिवक्ता के शामिल होने पर मुख्यमंत्री की ओर से आपत्ति जताए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में लंबे समय से चल रहे Student Protest के बीच अब बातचीत की प्रक्रिया भी चर्चा में आ गई है।
छात्रों से बातचीत के लिए तैयार सरकार
छात्रों की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच सरकार की ओर से बातचीत की पहल को अहम माना जा रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, प्रक्रिया से जुड़े सवालों और अभ्यर्थियों के हित में ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
11 सदस्यीय Delegation पर क्यों उठी आपत्ति?
सरकार से बातचीत के लिए छात्रों ने 11 लोगों का प्रतिनिधिमंडल बनाया है। इसमें पूर्व महाधिवक्ता के शामिल होने को लेकर मुख्यमंत्री की आपत्ति सामने आई है।
यही मुद्दा अब बातचीत से पहले चर्चा का कारण बन गया है। छात्रों की तरफ से प्रतिनिधिमंडल को लेकर क्या अंतिम फैसला होता है और सरकार किन लोगों से बातचीत करती है, इस पर सभी की नजर है।
अनशनकारी छात्र की तबीयत बिगड़ी, Hospital में भर्ती
इधर, आंदोलन कर रहे छात्रों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर भी सामने आई है। अनशन पर बैठे एक छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बताया गया कि छात्र की स्वास्थ्य स्थिति खराब होने पर उसे प्रदर्शन स्थल से सदर अस्पताल ले जाया गया। आंदोलन के दौरान अनशन कर रहे छात्रों की सेहत को लेकर पहले से ही चिंता जताई जा रही थी। ऐसे में एक छात्र के अस्पताल पहुंचने से मामला और गंभीर हो गया है।
छात्रों की मांगों पर समाधान का इंतजार
छात्रों का आंदोलन अब कई दिनों से जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए और ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे अभ्यर्थियों का भरोसा कायम रहे।
सबसे बड़ी उम्मीद अब सरकार के साथ होने वाली बातचीत से जुड़ी है। अगर बातचीत में उनकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस रास्ता निकलता है तो लंबे समय से चल रहे आंदोलन को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ सकता है।
बातचीत से खत्म होगा गतिरोध?
झारखंड में Student Protest के बीच सरकार की बातचीत की पेशकश को एक सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन प्रतिनिधिमंडल में पूर्व महाधिवक्ता की मौजूदगी को लेकर उठी आपत्ति ने बातचीत से पहले ही पेच पैदा कर दिया है।
अब असली सवाल यही है कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत किस रूप में होती है और क्या दोनों पक्ष किसी सहमति तक पहुंच पाते हैं। फिलहाल छात्रों की नजर सरकार के अगले कदम पर है, जबकि अनशनकारी छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलन की गंभीरता भी बढ़ गई है।
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