बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina के बेटे और पूर्व सलाहकार Sajeeb Wazed Joy एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने बांग्लादेश में बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ और सुरक्षा हालात को लेकर भारत के लिए चिंता जताई है। Joy का कहना है कि बांग्लादेश में जिस तरह राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियां बदल रही हैं, उसका असर सिर्फ बांग्लादेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
‘दूसरे Pakistan’ जैसा खतरा?
Sajeeb Wazed Joy ने बांग्लादेश में बढ़ते कट्टरपंथ को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनके बयान का मुख्य केंद्र यह है कि यदि देश में कट्टरपंथी ताकतों को बढ़ने का मौका मिलता रहा, तो बांग्लादेश की स्थिति भविष्य में पाकिस्तान जैसी दिशा ले सकती है।
हालांकि, यह Joy का राजनीतिक आकलन है और इसे किसी स्वतंत्र सुरक्षा आकलन या आधिकारिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके बयान ने भारत-बांग्लादेश संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चल रही बहस को जरूर तेज कर दिया है।
भारत के लिए क्यों अहम है Bangladesh?
भारत और बांग्लादेश की करीब 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और पूर्वोत्तर भारत से जुड़े कई अहम मुद्दे हैं। ऐसे में पड़ोसी देश में राजनीतिक अस्थिरता या कट्टरपंथी गतिविधियों का बढ़ना भारत के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
Joy पहले भी बांग्लादेश की स्थिति को भारत की सुरक्षा से जोड़कर बयान दे चुके हैं। दिसंबर 2025 में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बांग्लादेश में सुरक्षा हालात को भारत के लिए बढ़ता हुआ खतरा बताया था।
Pakistan का भी आया जिक्र
Joy के बयानों में Pakistan और उसकी खुफिया एजेंसी ISI का संदर्भ पहले भी सामने आ चुका है। अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए बड़े राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान उन्होंने विदेशी हस्तक्षेप की आशंका जताते हुए ISI की संभावित भूमिका का आरोप लगाया था। हालांकि, उस समय भी यह एक आरोप था और इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर स्थापित नहीं किया गया था।
यही वजह है कि बांग्लादेश की मौजूदा परिस्थितियों पर Joy की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है।
Sheikh Hasina के बयान से भी बढ़ा तनाव
इस पूरे घटनाक्रम के बीच Sheikh Hasina भी चर्चा में हैं। भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री ने अगस्त 2026 में दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित किया और दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का इरादा जताया। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने उनके बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है।
ढाका और नई दिल्ली के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों के बीच Hasina के सार्वजनिक बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। भारत ने भी स्पष्ट किया है कि वह उस कार्यक्रम का आयोजक नहीं था और वहां व्यक्त विचारों से खुद को अलग रखा है।
बांग्लादेश की राजनीति में बढ़ती खींचतान
2024 में Sheikh Hasina की सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदली हैं। Awami League पर प्रतिबंध, Hasina के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और उनकी भारत में मौजूदगी दोनों देशों के बीच रिश्तों के लिए लगातार संवेदनशील मुद्दे बने हुए हैं।
ऐसे समय में Sajeeb Wazed Joy का कट्टरपंथ और Pakistan से जुड़ा बयान केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है। इसके असर का दायरा भारत-बांग्लादेश संबंधों और पूरे South Asia की regional security तक जाता है।
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