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Terrorist Attack in Pahalgam

🔴 Terrorist Attack in Pahalgam: पर्यटकों पर हमला, एक की मौत, घोड़े भी घायल

Terrorist Attack in Pahalgam: जम्मू-कश्मीर के टूरिस्ट हॉटस्पॉट पहलगाम के बैसरन इलाके में सोमवार को आतंकियों ने अचानक घुड़सवारी कर रहे पर्यटकों पर फायरिंग कर दी। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई है जबकि तीन पर्यटकों समेत कुल सात लोग घायल हुए हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। तीन स्थानीय निवासी भी इस हमले में घायल हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, हमलावरों की संख्या दो से तीन बताई जा रही है और वे पुलिस या आर्मी की यूनिफॉर्म में थे, जिससे किसी को उन पर शक नहीं हुआ। हमले में न केवल इंसानों को बल्कि घोड़ों को भी निशाना बनाया गया, जिन पर गोलियां चलीं। कई घोड़े गंभीर रूप से घायल हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए CRPF की अतिरिक्त Quick Reaction Team (QRT) को मौके पर भेजा गया है। सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है और टूरिस्ट ज़ोन को पूरी तरह सील कर दिया गया है। स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि आतंक का यह नया चेहरा सीधे घाटी की टूरिज़्म इंडस्ट्री को निशाना बना रहा है, जिससे ना सिर्फ स्थानीय रोजगार प्रभावित होगा बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा पर भी सवाल उठे हैं। हमले के वक्त टूरिस्ट ग्रुप घुड़सवारी का आनंद ले रहा था, तभी अचानक गोलियों की बौछार शुरू हो गई, जिससे भगदड़ मच गई। घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है और मृतक की पहचान की जा रही है। यह हमला उस वक्त हुआ है जब गर्मियों का टूरिस्ट सीजन शुरू हो चुका है और पहलगाम में टूरिस्ट्स की संख्या लगातार बढ़ रही थी। सुरक्षा एजेंसियां इस एंगल से भी जांच कर रही हैं कि कहीं हमलावरों का मकसद घाटी में डर का माहौल बनाकर टूरिज़्म को नुकसान पहुंचाना तो नहीं। Desh Harpal इस घटना की पल-पल की अपडेट्स आप तक पहुंचाता रहेगा।
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UPSC CSE Final Result 2024: प्रयागराज के शक्ति दुबे ने देश में टॉप किया, कुल 1009 अभ्यर्थी चयनित

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने आज 22 अप्रैल 2025 को सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2024 का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया है। इस बार प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के शक्ति दुबे ने ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल कर देशभर में टॉप किया है। UPSC द्वारा कुल 1009 उम्मीदवारों की नियुक्ति की सिफारिश की गई है। टॉप 10 सफल उम्मीदवारों की सूची: टॉप 3 उम्मीदवारों की प्रोफाइल: परीक्षा प्रक्रिया और आंकड़े: कुल 14,627 उम्मीदवारों ने मुख्य परीक्षा दी थी, जिनमें से 2,845 साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट हुए। अंततः 1,009 अभ्यर्थियों (725 पुरुष और 284 महिलाएं) को चयनित किया गया है। सेवा आवंटन विवरण: UPSC ने 230 उम्मीदवारों की रिजर्व सूची भी जारी की है, जबकि 241 अभ्यर्थियों का परिणाम प्रोविजनल है। महिला उम्मीदवारों की उल्लेखनीय भागीदारी: इस वर्ष टॉप 5 में से 3 स्थान महिलाओं के पास हैं, जो सिविल सेवा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। परिणाम देखने के लिए: उम्मीदवार UPSC की आधिकारिक वेबसाइट https://www.upsc.gov.in पर पूरी चयनित सूची देख सकते हैं।
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Congress

Judicial Politics और Congress का ‘संविधान बचाओ’ ड्रामा – निशिकांत दुबे का तगड़ा वार

(Desh Harpal l News Desk):BJP सांसद निशिकांत दुबे ने एक बार फिर Congress पर करारा हमला बोला है, लेकिन इस बार उनका निशाना बना एक ऐसा नाम जिसे लेकर राजनीति और न्यायपालिका के संबंधों पर गंभीर सवाल उठाए जा सकते हैं – Justice Baharul Islam. निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया और संसद में Judicial Politics और Congress का ‘संविधान बचाओ’ ड्रामा – निशिकांत दुबे का तगड़ा वार की संविधान बचाओ मुहिम को ‘मजेदार कहानी’ बताते हुए तंज कसा कि Judicial Politics और Congress का ‘संविधान बचाओ’ ड्रामा – निशिकांत दुबे का तगड़ा वारही वो पार्टी है जो जब सत्ता में थी, तब उसने कैसे न्यायपालिका का अपने हिसाब से इस्तेमाल किया। उन्होंने Justice Baharul Islam का उदाहरण देते हुए कहा: “1977 में जब इंदिरा गांधी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे, तब Baharul Islam ने वह सभी केस तन्मयता से समाप्त कर दिए। इसके इनामस्वरूप कांग्रेस ने उन्हें 1983 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर करवा कर तीसरी बार राज्यसभा में भेज दिया।” निशिकांत दुबे के इस बयान की पुष्टि सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट से भी होती है, जहाँ के अनुसार: निशिकांत दुबे ने इस इतिहास को उजागर करते हुए पूछा कि “क्या यही है कांग्रेस की न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा?” इस बयान के जरिए BJP सांसद ने न केवल कांग्रेस की राजनीतिक नीयत पर सवाल उठाया, बल्कि वर्तमान में जारी Judiciary vs Politics बहस को भी एक नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि ये पार्टी सिर्फ जब विपक्ष में होती है, तभी उसे संविधान और न्यायपालिका की याद आती है। अब देखना ये होगा कि कांग्रेस इस गंभीर आरोप का क्या जवाब देती है। लेकिन इतना तो तय है कि Baharul Islam का यह केस एक बार फिर Judicial Appointments और Political Rewards के बीच की ‘Thin Line’ को लोगों के सामने ला रहा है।
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Breaking: पोप फ्रांसिस(Pope Francis) का निधन – वेटिकन में शोक की लहर

21 अप्रैल 2025 को वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वेटिकन के कैमरलेंगो कार्डिनल केविन फैरेल ने उनके निधन की पुष्टि की। पिछले कुछ महीनों से वे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, जिसमें दोनों फेफड़ों में निमोनिया प्रमुख था। ​ अंतिम क्षण और स्वास्थ्य स्थिति पोप फ्रांसिस को फरवरी 2025 में ब्रोंकाइटिस के कारण रोम के जेमेली अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उनकी स्थिति बिगड़ती गई और उन्हें डबल निमोनिया हो गया, जिससे उनकी हालत गंभीर बनी रही। हालांकि मार्च में उनकी स्थिति में कुछ सुधार हुआ था, लेकिन वे पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो पाए। ​ 12 वर्षों की प्रेरणादायक पोपाई 2013 में चुने गए पोप फ्रांसिस पहले लैटिन अमेरिकी और जेसुइट पोप थे। उनकी पोपाई सुधारों, करुणा और समावेशिता के लिए जानी जाती है। उन्होंने LGBTQ समुदाय, पुनर्विवाहित तलाकशुदा व्यक्तियों और प्रवासियों के लिए सहानुभूति और समर्थन दिखाया। उनकी प्रसिद्ध टिप्पणी “Who am I to judge?” ने चर्च के रूढ़िवादी दृष्टिकोण को चुनौती दी। ​Latest news & breaking headlines अंतिम संस्कार और अगला कदम पोप फ्रांसिस के निधन के बाद वेटिकन में नौ दिवसीय शोक अवधि (Novemdiales) शुरू हो गई है। इस दौरान सेंट पीटर्स स्क्वायर में विशेष मास आयोजित किए जाएंगे। पोप का अंतिम संस्कार चौथे से छठे दिन के बीच किया जाएगा, जिसके बाद उन्हें सेंट पीटर्स बेसिलिका में दफनाया जाएगा। ​АТВ दुनिया भर से श्रद्धांजलियाँ दुनिया भर के नेता, धार्मिक प्रमुख और आम लोग पोप फ्रांसिस को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। उनकी करुणा, सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता और समावेशी दृष्टिकोण को याद किया जा रहा है।​ पोप फ्रांसिस की विरासत उनके सुधारवादी दृष्टिकोण, करुणा और समावेशिता के लिए हमेशा याद की जाएगी।​
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Rahul Gandhi

Rahul Gandhi ने अमेरिका में उठाए चुनाव पर सवाल, बोले- महाराष्ट्र में दो घंटे में कैसे पड़े 65 लाख वोट?

Congress नेता Rahul Gandhi एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते नजर आए हैं। इस बार उन्होंने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय चुनावों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सिर्फ दो घंटे—शाम 5:30 से 7:30 बजे के बीच—में 65 लाख वोट कैसे पड़ सकते हैं? Rahul Gandhi ने यह सवाल उठाते हुए चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक आम आदमी को यह जानने का हक है कि उसका वोट सुरक्षित और सही तरीके से दर्ज हो रहा है या नहीं। “इतने कम समय में इतने ज्यादा वोट पड़ना असंभव सा लगता है,” राहुल ने कहा। Rahul का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में लोकसभा चुनाव का माहौल गरम है और हर पार्टी अपनी रणनीति में जुटी है। राहुल ने यह भी कहा कि आज के समय में लोगों को यह समझना जरूरी है कि लोकतंत्र की बुनियाद क्या है और इसे मजबूत रखने के लिए पारदर्शिता कितनी जरूरी है। उनके इस बयान पर बीजेपी की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया भी आ सकती है, क्योंकि इससे पहले भी कई बार राहुल गांधी ईवीएम और चुनाव आयोग पर सवाल उठा चुके हैं। हालांकि, राहुल गांधी का मकसद चुनावी प्रक्रिया को और मजबूत और साफ-सुथरा बनाना बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये सवाल किसी पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र के हक में हैं।
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Joint Operation में Security Forces की बड़ी कामयाबी, भारी मात्रा में Arms और Ammunition बरामद

Joint Operation में Security Forces की बड़ी कामयाबी, भारी मात्रा में Arms और Ammunition बरामद

Manipur में जारी तनावपूर्ण हालातों के बीच Security Forces को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। Assam Rifles और Manipur Police की Joint Operation टीम ने हाल ही में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान भारी मात्रा में arms और ammunition बरामद किए हैं। यह ऑपरेशन Imphal East, Thoubal और Kakching जिलों में अलग-अलग जगहों पर चलाया गया। Security agencies को इन इलाकों में illegal weapons की movement की intelligence inputs मिली थी, जिसके बाद ये coordinated operations शुरू किए गए। तलाशी के दौरान सुरक्षाबलों ने कुल 6 arms, जिनमें एक AK series rifle, दो Single Barrel Guns, एक .303 Rifle और दो Improvised weapons शामिल हैं, को बरामद किया। इसके साथ-साथ लगभग 17 hand grenades, 5 types के mortars, detonators और बड़ी मात्रा में live ammunition भी जब्त की गई है। इन हथियारों और विस्फोटकों की बरामदगी से साफ है कि कुछ असामाजिक तत्व राज्य में फिर से हिंसा भड़काने की साजिश में लगे हुए हैं। Security Forces की सजगता और सटीक action के चलते एक बड़ी अनहोनी टल गई। इस Joint operation में local police की active भागीदारी भी सराहनीय रही, जिन्होंने ground level पर intelligence sharing और coordination में अहम भूमिका निभाई। Authorities के अनुसार, यह अभियान आगे भी जारी रहेगा ताकि राज्य में peace और stability को सुनिश्चित किया जा सके। State government ने भी इन efforts की सराहना करते हुए कहा है कि किसी भी कीमत पर law and order की स्थिति को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। देश हरपल की रिपोर्टManipur में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन अभी भी challenges बाकी हैं। ऐसे में इस तरह की joint operations न सिर्फ आतंक के मंसूबों को नाकाम कर रहे हैं, बल्कि आम जनता में सुरक्षा को लेकर विश्वास भी जगा रहे हैं।
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Nishikant Dubye

Supreme Court, Contempt, Nishikant Dubey – अब कानूनी घेरे में घिरते दिख रहे हैं बीजेपी सांसद?

नई दिल्ली।Supreme Court के खिलाफ की गई कथित ‘अवमाननापूर्ण टिप्पणी’ अब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकती है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब वरिष्ठ अधिवक्ता शिवकुमार त्रिपाठी ने देश के Attorney General (एटॉर्नी जनरल) को एक आधिकारिक चिट्ठी भेजकर निशिकांत दुबे के खिलाफ Contempt of Court (कोर्ट की अवमानना) की कार्यवाही की अनुमति मांगी। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दुबे ने उच्चतम न्यायालय के एक आदेश को लेकर आपत्ति जताते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट में कथित तौर पर ऐसी टिप्पणी की, जिसे न्यायपालिका के सम्मान और स्वायत्तता पर सीधा हमला माना जा रहा है। शिवकुमार त्रिपाठी की इस चिट्ठी में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणियां न केवल अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि आम जनता में न्यायिक व्यवस्था के प्रति विश्वास को भी कमजोर करती हैं। उन्होंने मांग की है कि सांसद दुबे पर Contempt of Court Act, 1971 के तहत कार्यवाही होनी चाहिए। त्रिपाठी ने चिट्ठी में यह भी उल्लेख किया है कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते निशिकांत दुबे को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा का सम्मान करना चाहिए था, न कि उस पर उंगली उठानी चाहिए। हालांकि, इस मामले पर अब तक दुबे की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यह साफ है कि अगर एटॉर्नी जनरल इस चिट्ठी को गंभीरता से लेते हैं और सहमति देते हैं, तो निशिकांत दुबे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की विधिवत सुनवाई शुरू हो सकती है। इस प्रकरण ने एक बार फिर Judiciary vs Legislature की पुरानी बहस को हवा दे दी है, जिसमें यह सवाल उठ रहा है कि क्या लोकसभा सदस्य न्यायपालिका की आलोचना की आड़ में अपनी सीमाएं लांघ रहे हैं? अब सबकी निगाहें Attorney General की प्रतिक्रिया और Supreme Court के रुख पर टिकी हैं। क्या यह मामला आने वाले दिनों में संसद और अदालत के बीच टकराव का कारण बनेगा? देश हरपल इस प्रकरण से जुड़ी हर अहम जानकारी आपको सबसे पहले देगा।
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"Serious Problem" in Electoral System: Rahul Gandhi Raises Maharashtra Election Issue at Brown University

Brown University :चुनाव प्रणाली में गंभीर समस्या…’, राहुल गांधी ने अमेरिका में उठाया महाराष्ट्र चुनाव का मुद्दा

“Serious Problem” in Electoral System: Rahul Gandhi Raises Maharashtra Election Issue at Brown University कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अमेरिका के ब्राउन यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान भारत की चुनाव प्रणाली में ‘गंभीर समस्या’ की बात कही। उन्होंने विशेष रूप से महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में मतदाता सूची में अचानक हुए बड़े बदलावों को लेकर चिंता जताई।​ महाराष्ट्र चुनाव पर सवाल राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच लगभग 70 लाख नए मतदाता जोड़े गए, जो हिमाचल प्रदेश की आबादी के बराबर है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव असामान्य है और चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग की। उनका कहना था कि विपक्ष द्वारा बार-बार अनुरोध करने के बावजूद चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और हरियाणा की मतदाता सूचियाँ प्रदान नहीं कीं।​ चुनाव आयोग पर आरोप गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पारदर्शिता में विफल रहा है और विपक्ष को आवश्यक जानकारी नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह आयोग की जिम्मेदारी है कि वह चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए और सभी पक्षों को आवश्यक जानकारी प्रदान करे।​ अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया मुद्दा ब्राउन यूनिवर्सिटी में छात्रों से बातचीत के दौरान, राहुल गांधी ने कहा, “हमारे लिए यह बहुत साफ था कि चुनाव आयोग समझौता कर चुका है। यह बहुत साफ है कि सिस्टम में कुछ बहुत गड़बड़ है। हमने इसे सार्वजनिक रूप से कहा है, मैंने इसे कई बार कहा है।” राहुल गांधी का यह बयान भारत की चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। उनकी मांग है कि चुनाव आयोग सभी राजनीतिक दलों को समान रूप से जानकारी प्रदान करे और चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए।
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West Bengal Riots, Murshidabad Violence

West Bengal Riots: मुर्शिदाबाद से मालदा तक बेघर हुए हिंदू परिवार, ममता सरकार पर उठे गंभीर सवाल”

(Desh Harpal l विशेष रिपोर्ट): West Bengal Riots, Murshidabad Violence, Hindu Refugees, Detention Camp Allegations West Bengal के Murshidabad जिले में दंगों के बाद हालात इतने बिगड़ गए कि सैकड़ों Hindu Families को जान बचाकर Malda के शरणार्थी शिविरों में पनाह लेनी पड़ी। पर अफसोस की बात यह रही कि जिस सरकार से उन्हें सुरक्षा की उम्मीद थी, उसी के तंत्र ने उन्हें ‘डिटेंशन कैंप’ जैसे माहौल में कैद कर दिया। Murshidabad Riots के दौरान, बड़ी संख्या में दंगाई भीड़ ने हिंदू घरों और दुकानों को निशाना बनाया। जब ये लोग जान बचाकर Malda पहुंचे, तो उन्हें सरकारी कैंपों में रखा गया—जहां उनके साथ मानवीय व्यवहार की जगह उन्हें धमकियों और निगरानी का सामना करना पड़ा। Refugees ने State Human Rights Commission, Mahila Aayog और यहां तक कि राज्यपाल तक को अपनी पीड़ा सुनाई। सबसे चौंकाने वाला हिस्सा ये रहा कि जब मीडिया इस मुद्दे को रिपोर्ट करने पहुंचा, तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। IPS Officer Faisal Raza ने कोर्ट के किसी कथित आदेश का हवाला देकर मीडिया कवरेज पर रोक लगाई, लेकिन जब उनसे आदेश दिखाने की मांग की गई तो वो टालमटोल और धमकियों पर उतर आए। BJP Leader Suvendu Adhikari ने इन शिविरों को ‘Detention Camps’ बताया और कहा, “सरकार ने इन शरणार्थियों को संवेदनशील क्षेत्र में राहत देने की बजाय जेल जैसा ट्रीटमेंट दिया है। करीब 400 लोग अपने घर छोड़कर यहां आए हैं और अब उन्हें कैद की तरह रखा जा रहा है।” Congress ने भी राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। इस बीच सबसे गंभीर सवाल यह है कि – मिडिया की टीम ने जब इन कैंपों की जमीनी सच्चाई जानने की कोशिश की, तो कई स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्हें Forced Silence में रखा गया है। न मीडिया से बात करने की अनुमति है, न ही बाहर किसी को बुलाने की। ये हालात न सिर्फ एक राज्य की विफलता को दिखाते हैं, बल्कि ये भी दर्शाते हैं कि भारत में अपने ही देश में कुछ नागरिक खुद को Refugee जैसा महसूस कर रहे हैं। Note: यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि मानवता का भी है। देश को इस पर ध्यान देने की सख्त ज़रूरत है। (पांचजन्य से साभार)
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दिल्ली

दिल्ली के मुस्तफाबाद में 4 मंजिला इमारत ढही, CCTV में कैद हुआ खौफनाक पल; 4 की मौत, कई अब भी मलबे में फंसे

दिल्ली के मुस्तफाबाद इलाके से शनिवार तड़के एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां एक चार मंजिला इमारत अचानक भरभरा कर गिर गई, जिसमें अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। 14 लोगों को बचा लिया गया, लेकिन 8-10 लोग अब भी मलबे में दबे होने की आशंका है। यह दर्दनाक हादसा आसपास के लोगों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं था। घटना की भयावहता सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसमें देखा गया कि अचानक एक चिंगारी उठी और कुछ ही सेकंड में गली धूल के गुबार से भर गई, जिससे कैमरा भी कुछ नहीं रिकॉर्ड कर पाया। CCTV Footage: कैसे गिरी इमारत? CCTV फुटेज में दिखा कि इमारत गिरने से पहले एक हल्की चिंगारी उठी और उसके तुरंत बाद धूल का विशाल गुबार फैल गया। ये दृश्य इतने अचानक और भयावह थे कि किसी को कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला। 2:50 AM पर मिला फोन कॉल, NDRF और फायर ब्रिगेड ने संभाली कमान डिविजनल फायर ऑफिसर राजेंद्र अटवाल ने बताया कि उन्हें तड़के 2:50 बजे कॉल मिला था। जब उनकी टीम मौके पर पहुंची, तब तक पूरी इमारत जमींदोज हो चुकी थी। फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। NDRF अधिकारी ने इस घटना को “पैनकेक कोलैप्स” कहा, यानी जब एक के ऊपर एक फ्लोर गिरते हैं। ऐसी स्थितियों में ज़िंदा बचने की संभावना बेहद कम होती है, लेकिन हर ज़िंदगी को बचाने की पूरी कोशिश जारी है। घनी बस्ती और तंग गलियों ने बचाव कार्य को बनाया चुनौतीपूर्ण मुस्तफाबाद की तंग गलियों के कारण रेस्क्यू टीम को भारी मशीनें अंदर लाने में परेशानी हो रही है। फिर भी जवान हर हाथ से मलबा हटाकर लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। बारिश और आंधी के बाद हुआ हादसा, कारण की जांच जारी हादसे से कुछ घंटे पहले दिल्ली में तेज़ बारिश और आंधी आई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी के बाद इमारत कमजोर हो गई होगी। हालांकि प्रशासन ने कहा है कि असली वजह की जांच की जा रही है। GTB अस्पताल में चल रहा घायलों का इलाज जो लोग मलबे से निकाले गए हैं, उन्हें जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार घायलों का इलाज कर रही है। सरकार और प्रशासन से अपील स्थानीय लोग प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस हादसे की निष्पक्ष जांच हो और क्षेत्र में जर्जर इमारतों का सर्वे कराकर उन्हें खाली कराया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
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Premanand Maharaj

Premanand Maharaj Viral Video: ‘मेरा जन्म ही नहीं हुआ…’ बयान ने खींचा लोगों का ध्यान

वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) अपने प्रवचनों और आध्यात्मिक विचारों को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चा में रहते हैं। इन दिनों उनके एक वीडियो को लेकर लोगों के बीच काफी दिलचस्पी देखी जा रही है। ‘मेरा जन्म ही नहीं हुआ…’ जैसे शब्दों से चर्चा में आए इस वीडियो को लोग आध्यात्मिक नजरिए से समझने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस कथन का पूरा संदर्भ समझना जरूरी है, ताकि किसी अधूरी क्लिप के आधार पर गलत मतलब न निकाला जाए। प्रेमानंद महाराज का वीडियो क्यों हो रहा वायरल? Premanand Maharaj के प्रवचनों में अक्सर जीवन, मृत्यु, आत्मा, भगवान की भक्ति और मन की शांति जैसे विषयों पर चर्चा होती है। उनके विचारों को बड़ी संख्या में लोग सुनते और सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। इसी वजह से उनके प्रवचनों के छोटे-छोटे वीडियो भी लोगों का ध्यान खींचते हैं। ‘मेरा जन्म ही नहीं हुआ…’ जैसे कथन को आध्यात्मिक संदर्भ में समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि महाराज किस सवाल का जवाब दे रहे थे और उससे पहले तथा बाद में उन्होंने क्या कहा था। केवल एक वाक्य के आधार पर उनके विचारों का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। जीवन और आत्मा को लेकर क्या है आध्यात्मिक नजरिया? भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं में आत्मा, शरीर और जन्म-मृत्यु को लेकर अलग-अलग दार्शनिक व्याख्याएं मिलती हैं। भगवद्गीता में भी आत्मा को शरीर से अलग और अविनाशी बताया गया है। इसी तरह संतों के प्रवचनों में व्यक्ति की वास्तविक पहचान, अहंकार और ईश्वर से जुड़ाव जैसे विषयों पर चर्चा होती रहती है। ऐसे विचारों को समझने के लिए उनके मूल संदर्भ को देखना जरूरी है। किसी आध्यात्मिक कथन का अर्थ सामान्य बोलचाल के अर्थ से अलग भी हो सकता है। प्रेमानंद महाराज का पुराना भावुक वीडियो भी हुआ था वायरल हाल ही में Premanand Maharaj का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि यह वीडियो उनके शिष्य रसिक दुलारी की मौत के बाद का है। हालांकि, आजतक की फैक्ट चेक रिपोर्ट के मुताबिक, यह वीडियो नया नहीं था। इसका लंबा संस्करण प्रेमानंद महाराज के आधिकारिक YouTube चैनल ‘भजन मार्ग’ पर 1 मार्च 2026 को अपलोड किया गया था। वायरल हिस्सा उसी प्रवचन में लगभग 7 मिनट 10 सेकंड पर मौजूद था। इसलिए इसे सितंबर में सामने आई घटना के बाद का वीडियो बताना भ्रामक था। इस मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की तारीख और संदर्भ की जांच करना जरूरी है। <escape><Cite refs={[“turn157990search0″,”turn157990search1”]}/></escape> आश्रम से जुड़ी घटनाओं के बीच भी चर्चा में हैं महाराज वृंदावन स्थित राधा केली कुंज आश्रम से जुड़े मामले और शिष्य रसिक दुलारी की मौत के बाद प्रेमानंद महाराज को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं सामने आईं। इस बीच आश्रम से जुड़ी घटनाओं के बारे में अलग-अलग दावे भी किए गए। ऐसे मामलों में पुलिस जांच और आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता देना जरूरी है। 9 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रेमानंद महाराज का एक अन्य वीडियो भी चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने भक्ति के मार्ग पर बने रहने की कठिनाई पर बात की। <escape><Cite refs={[“turn157990search2″,”turn585743search3”]}/></escape> वायरल वीडियो को पूरा देखना क्यों जरूरी है? सोशल मीडिया पर किसी संत या सार्वजनिक व्यक्ति के बयान का छोटा हिस्सा तेजी से वायरल हो सकता है। लेकिन कई बार वीडियो का शुरुआती या अंतिम हिस्सा न होने से उसका वास्तविक अर्थ स्पष्ट नहीं हो पाता। इसलिए किसी कथन पर राय बनाने से पहले उसका पूरा वीडियो, तारीख और मूल स्रोत देखना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Pakistan

Imran Khan की PTI को झटका! Pakistan के खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू

Pakistan की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी लागू करने और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की प्रांतीय सरकार के अधिकार सीमित किए जाने की खबर सामने आई है। इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान की संघीय सरकार और PTI के बीच पहले से जारी टकराव को और बढ़ा दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने संघीय कैबिनेट की सिफारिश पर इस फैसले को मंजूरी दी। सरकार ने इसके पीछे आतंकवाद और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को प्रमुख वजह बताया है। वहीं, PTI इस कदम का विरोध कर रही है। हालांकि, प्रांतीय प्रशासन में हुए बदलाव और उसके कानूनी प्रभावों से जुड़ी सभी जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। Khyber Pakhtunkhwa में Emergency लगाने की वजह क्या है? पाकिस्तान की संघीय सरकार का कहना है कि खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। अफगानिस्तान की सीमा से लगे इस प्रांत में आतंकवादी घटनाओं और सुरक्षा चुनौतियों के कारण लंबे समय से तनाव है। सरकार का आरोप है कि PTI के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रही थी। इसी आधार पर संघीय कैबिनेट ने इमरजेंसी लागू करने की सिफारिश की। दूसरी ओर, PTI का कहना है कि सुरक्षा संबंधी समस्याओं का समाधान राजनीतिक अधिकारों को सीमित करके नहीं किया जा सकता। इस मामले में केंद्र सरकार और विपक्ष के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है। Imran Khan की PTI सरकार पर क्या पड़ेगा असर? खैबर पख्तूनख्वा को इमरान खान की पार्टी का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है। ऐसे में यहां प्रशासनिक अधिकारों में बदलाव PTI के लिए अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। यदि प्रांतीय सरकार की शक्तियां निलंबित करके प्रशासन राज्यपाल या संघीय सरकार के नियंत्रण में दिया जाता है, तो इससे शासन व्यवस्था और केंद्र-प्रांत के संबंधों पर सीधा असर पड़ सकता है। हालांकि, इमरजेंसी लागू होने और निर्वाचित सरकार के अधिकार समाप्त होने के बीच कानूनी अंतर होता है। इसलिए अंतिम स्थिति समझने के लिए राष्ट्रपति के आदेश, संबंधित संवैधानिक प्रावधानों और आधिकारिक अधिसूचना की पुष्टि आवश्यक है। इमरान खान की रिहाई को लेकर PTI का प्रदर्शन इमरान खान की रिहाई की मांग PTI के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल है। अगस्त 2023 से जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री के समर्थन में पार्टी लगातार सरकार पर दबाव बना रही है। PTI समर्थकों के इस्लामाबाद की ओर मार्च और संभावित प्रदर्शन को लेकर भी राजनीतिक माहौल गर्म है। पार्टी चाहती है कि इमरान खान से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए और उनकी रिहाई की मांग पर ध्यान दिया जाए। वहीं, संघीय सरकार के सामने राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। प्रदर्शन, सुरक्षा इंतजाम और केंद्र-विपक्ष के बीच बातचीत का परिणाम आने वाले दिनों में पाकिस्तान की राजनीति की दिशा को प्रभावित कर सकता है। PTI ने फैसले पर उठाए सवाल PTI ने केंद्र सरकार के कदम का विरोध करते हुए इसे प्रांतीय अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बताया है। पार्टी का तर्क है कि आतंकवाद से निपटने के लिए केंद्र और प्रांत के बीच सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए। दूसरी तरफ, संघीय सरकार सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अपने फैसले को जरूरी बता रही है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के कारण राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJP

Delhi Protest: CJP नेताओं का आरोप- फ्लाइट से किया Kidnap, दिल्ली में दूसरे दिन भी प्रदर्शन

दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर सियासी माहौल गरम है। 10 अक्टूबर को शुरू हुआ विरोध 11 अक्टूबर को भी जारी रहा। इस बीच CJP के नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें मुंबई से दिल्ली पहुंचने के बाद विमान के अंदर से ही हिरासत में ले लिया गया। पार्टी के नेता सौरव दास ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार अपने ही लोगों से जंग लड़ रही है। वहीं, दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है। यह मामला अब केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। हिरासत की कार्रवाई, चुनाव आयोग की भूमिका और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। CJP नेताओं ने क्यों लगाया Kidnap करने का आरोप? अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका 10 अक्टूबर को मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे। उन्हें जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होना था। नेताओं के मुताबिक, विमान के दिल्ली पहुंचने के बाद पुलिसकर्मी अंदर आए और उन्हें हिरासत में ले लिया। CJP नेताओं ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए आरोप लगाया कि उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए हिरासत में लिया गया। सौरव दास ने इसे फ्लाइट से किडनैप किए जाने जैसा बताया और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। हालांकि, पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत का हवाला दिया गया। ऐसे में इस मामले में प्रदर्शनकारियों के आरोप और पुलिस का पक्ष अलग-अलग हैं। Delhi Protest: लगातार दूसरे दिन सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। कई इलाकों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई, जबकि कुछ स्थानों पर बैरिकेडिंग भी की गई। प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें राजनीतिक कार्यकर्ता और विरोध प्रदर्शन में शामिल अन्य लोग भी थे। 11 अक्टूबर को भी प्रदर्शन जारी रहने के बीच पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठते रहे। CJP समर्थकों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना चाहते हैं। उनका आरोप है कि हिरासत में लेकर प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की गई। दूसरी ओर, पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही। हिरासत के बाद CJP नेताओं को मिली राहत रिपोर्टों के मुताबिक, अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद उन्हें शांति बनाए रखने से जुड़ी शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। CJP नेताओं ने हिरासत की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सरकार और संवैधानिक संस्थाओं के फैसलों पर सवाल उठाना नागरिकों का अधिकार है। इस मामले में हिरासत की परिस्थितियों और संबंधित कानूनी प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है। आखिर क्यों हो रहा है Election Commission के खिलाफ प्रदर्शन? CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी और उसके समर्थक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। वे इस मामले की जांच और चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया का बचाव किया है। भाजपा ने भी मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किया है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। Democracy में Protest के अधिकार पर फिर छिड़ी बहस दिल्ली में हुई इस कार्रवाई के बाद शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अपनी बात रखने और संस्थाओं से जवाब मांगने का अधिकार लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दूसरी ओर, प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखे और किसी भी आयोजन के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करे। ऐसे में जरूरी है कि पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के आरोपों की जांच तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर हो। फिलहाल, CJP नेताओं की हिरासत और दिल्ली में लगातार दूसरे दिन हुए प्रदर्शन ने चुनाव आयोग तथा SIR को लेकर चल रही बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर राजनीतिक दलों और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण रहेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gautam Gambhir

Gautam Gambhir in Ujjain: महाकाल मंदिर में टेका माथा, Team India के लिए मांगा आशीर्वाद

भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीसरे T20 मुकाबले से पहले भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir ) उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भारतीय टीम के बैटिंग कोच सितांशु कोटक के साथ बाबा महाकाल के दर्शन किए। गंभीर ने देश की खुशहाली और टीम इंडिया की सफलता के लिए प्रार्थना की। क्रिकेट के मैदान पर रणनीति बनाने वाले गंभीर का यह धार्मिक दौरा आस्था और खेल के जुड़ाव को दिखाता है। Gautam Gambhir ने बाबा महाकाल से क्या मांगा? उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में गौतम गंभीर ने विधि-विधान से दर्शन किए और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनके साथ सितांशु कोटक भी मौजूद रहे। गंभीर ने कामना की कि बाबा महाकाल की कृपा देश और भारतीय क्रिकेट टीम पर बनी रहे। उनका यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब टीम इंडिया भारत-वेस्टइंडीज T20 सीरीज के अहम मुकाबले की तैयारी कर रही है। महाकाल मंदिर में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। क्रिकेट जगत की हस्तियों का यहां आना भी अक्सर प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है। Mahakal Temple पहुंचे बैटिंग कोच सितांशु कोटक गौतम गंभीर के साथ भारतीय टीम के बैटिंग कोच सितांशु कोटक ने भी बाबा महाकाल के दर्शन किए। दोनों का उज्जैन दौरा भारत-वेस्टइंडीज मुकाबले से पहले हुआ। क्रिकेट में खिलाड़ियों की मेहनत, सही रणनीति और दबाव में प्रदर्शन की अहम भूमिका होती है। ऐसे में कई खिलाड़ी और खेल से जुड़े लोग बड़े मुकाबलों से पहले मंदिरों में जाकर प्रार्थना करते हैं। गंभीर का महाकाल दर्शन भी इसी वजह से चर्चा में है। India vs West Indies 3rd T20: इंदौर में होगी भिड़ंत भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीसरा T20 इंटरनेशनल मुकाबला इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेला जाना है। इस मैच को लेकर क्रिकेट फैंस के बीच काफी उत्साह है। सीरीज के दूसरे मुकाबले में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा था। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बड़ा स्कोर बनाया, लेकिन वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने लक्ष्य हासिल कर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस नतीजे के बाद तीसरे मैच में भारतीय टीम की वापसी पर सबकी नजरें रहेंगी। बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में भी बेहतर प्रदर्शन करना टीम इंडिया के लिए अहम होगा। Team India की सफलता के लिए की प्रार्थना गौतम गंभीर के लिए यह दौरा केवल मंदिर में दर्शन करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने देश और टीम इंडिया के लिए भी शुभकामनाएं दीं। भारतीय क्रिकेट टीम के प्रशंसक भी उम्मीद कर रहे हैं कि खिलाड़ी मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे और मुकाबले में जीत हासिल करने की पूरी कोशिश करेंगे। अब सभी की नजरें इंदौर के मैदान पर होने वाले भारत-वेस्टइंडीज मुकाबले पर हैं। बाबा महाकाल के दरबार में दर्शन के बाद टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर की यह यात्रा खेल और आस्था के खूबसूरत मेल के रूप में देखी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Shivraj Singh Chouhan

Shivraj Singh Chouhan की अपील: नवरात्रि पर महिलाओं के सम्मान का लें संकल्प

नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ महिलाओं के सम्मान की बात भी उतनी ही जरूरी है। इसी संदेश के साथ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह (Shivraj Singh Chouhan) चौहान ने सोशल मीडिया पर एक Reel शेयर की और लोगों से बेटियों, बहनों और माताओं का आदर करने की अपील की। उनके संदेश का सार है कि अगर हम मां दुर्गा की पूजा करते हैं, तो हमें अपने जीवन में भी महिलाओं को सम्मान देना चाहिए। शिवराज सिंह चौहान की यह अपील ऐसे समय में सामने आई है, जब नवरात्रि के दौरान देशभर में देवी आराधना और कन्या पूजन की तैयारियां चल रही हैं। उनका संदेश लोगों को यह सोचने का मौका देता है कि पूजा-पाठ के साथ हमारा व्यवहार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। Shivraj Singh Chouhan ने Reel शेयर कर क्या संदेश दिया? शिवराज सिंह चौहान ने नवरात्रि के अवसर पर Reel के जरिए महिलाओं के सम्मान का मुद्दा उठाया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी बेटियों और बहनों के प्रति आदर का भाव रखें और महिलाओं को सम्मानजनक माहौल देने का संकल्प लें। उनके संदेश का मुख्य भाव है कि मां दुर्गा की आराधना केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। महिलाओं के साथ घर, समाज और सार्वजनिक स्थानों पर कैसा व्यवहार किया जाता है, यह भी हमारी सोच और संस्कार को दर्शाता है। ‘बेटी-बहन का सम्मान नहीं, तो मां की पूजा बेकार’ यह संदेश सीधे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ता है। नवरात्रि में हम मां दुर्गा को शक्ति का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं। ऐसे में अपने आसपास की महिलाओं के साथ सम्मान और समानता का व्यवहार करना भी जरूरी है। महिलाओं का सम्मान सिर्फ अच्छी बातें कहने तक सीमित नहीं है। उनकी राय सुनना, उनकी पसंद और फैसलों का आदर करना, भेदभाव से बचना और उन्हें सुरक्षित माहौल देना भी इसका हिस्सा है। शिवराज सिंह चौहान की अपील इसी बात पर जोर देती है कि धार्मिक आस्था और सामाजिक जिम्मेदारी एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। Women Respect और Safety क्यों है जरूरी? महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने में परिवार, समाज और प्रशासन सभी की भूमिका होती है। बेटियों को आगे बढ़ने के अवसर देना, उनके साथ भेदभाव न करना और गलत व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। अक्सर त्योहारों के दौरान हम अच्छे विचारों और संकल्पों की बात करते हैं, लेकिन असली बदलाव तब आता है, जब इन विचारों को रोजमर्रा के जीवन में अपनाया जाए। घर में बेटियों को बराबरी का अधिकार देना और महिलाओं की स्वतंत्रता का सम्मान करना इसी बदलाव की शुरुआत हो सकती है। नवरात्रि पर लें महिलाओं के सम्मान का संकल्प नवरात्रि आस्था, शक्ति और सकारात्मक बदलाव का पर्व है। इस दौरान मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। यह अवसर अपने व्यवहार और सोच पर विचार करने का भी है। शिवराज सिंह चौहान की अपील का संदेश यही है कि मां दुर्गा की पूजा के साथ बेटियों, बहनों और माताओं को सम्मान देना भी हमारी जिम्मेदारी है। महिलाओं के प्रति आदर केवल नवरात्रि के नौ दिनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। क्योंकि पूजा का भाव तभी सार्थक होता है, जब हम अपने व्यवहार में भी सम्मान, समानता और संवेदनशीलता को जगह दें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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