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बिलासपुर: बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में पकड़े गए 23 लोगों में 18 भारतीय निकले, 15 दिन बाद रिहा

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी इलाके से बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में पकड़े गए 23 लोगों में से 18 भारतीय नागरिक पाए गए हैं। मुर्शिदाबाद और संबंधित थाना क्षेत्रों से दस्तावेजों व पहचान का सत्यापन होने के बाद इन सभी को रायपुर स्थित होल्डिंग/डिटेंशन सेंटर से 15 दिन के भीतर रिहा कर दिया गया। अब पुलिस बचे हुए 5 लोगों के दस्तावेजों की जांच कर रही है। इनके अतिरिक्त दस्तावेज भी मंगाए गए हैं। कुछ दस्तावेजों में कमियां सामने आई हैं, जबकि कुछ लोगों के नाम एसआईआर से हटाए जाने की जानकारी भी मिली है। पुलिस सत्यापन पूरा होने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी। 4 सितंबर को 23 लोगों को रायपुर भेजा गया था दरअसल, बिलासपुर पुलिस ने स्पेशल टास्क फोर्स गठित कर सिरगिट्टी इलाके में अभियान चलाया था। इस दौरान 23 लोगों को संदिग्ध मानकर पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, करीब दो महीने तक चले अभियान में जिले में 1,162 लोगों की जांच की गई थी। इनमें 23 लोगों के दस्तावेज और पहचान संदिग्ध पाए गए थे। इसके बाद पुलिस टीम मुर्शिदाबाद, जंगीपुर और आसपास के संबंधित थाना क्षेत्रों में पहुंची। संदिग्धों द्वारा बताए गए पते और दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। शुरुआती जांच के बाद 4 सितंबर को सभी 23 लोगों को पहचान और दस्तावेजों के अंतिम सत्यापन तक रायपुर के होल्डिंग/डिटेंशन सेंटर भेजा गया था। पिता की जगह ससुर का नाम मिलने से बढ़ा संदेह पुलिस की शुरुआती जांच में कुछ लोगों के दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे थे। बताया गया कि कुछ दस्तावेजों में पिता की जगह ससुर का नाम दर्ज था। इसके अलावा मूल निवास और पहचान से जुड़े कागजात में भी कमियां मिली थीं। इन्हीं आधारों पर पुलिस ने इन लोगों को संदिग्ध मानकर जांच आगे बढ़ाई थी। हालांकि, सत्यापन के बाद 18 लोगों के भारतीय नागरिक होने की पुष्टि हुई है। बाल के बदले बर्तन और टेंट-पंडाल का करते थे काम जांच के दौरान पुलिस को पता चला था कि इनमें से अधिकांश लोग सिरगिट्टी क्षेत्र में रहकर अलग-अलग छोटे-मोटे काम करते थे। कुछ लोग बाल के बदले बर्तन देने का काम करते थे, जबकि कुछ टेंट-पंडाल लगाने सहित अन्य कार्यों से जुड़े थे। पुलिस ने इनके पश्चिम बंगाल स्थित बताए गए पते और स्थानीय दस्तावेजों से संबंधित जानकारी भी जुटाई थी। अब 5 लोगों के दस्तावेजों की जांच जारी 18 लोगों के सत्यापन के बाद पुलिस का फोकस अब बचे हुए 5 लोगों पर है। पुलिस इनके अतिरिक्त दस्तावेज और पहचान से जुड़े रिकॉर्ड मंगा रही है। जिन लोगों के दस्तावेज अधूरे या संदिग्ध पाए गए हैं, उनका सत्यापन संबंधित थानों और स्थानीय रिकॉर्ड के आधार पर कराया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद पुलिस आगे की कार्रवाई तय करेगी।
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Radha Ashtami 2026

Radha Ashtami 2026: राधा रानी के जन्मोत्सव पर जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और Vrat Vidhi

Radha Ashtami 2026 राधा रानी के भक्तों के लिए राधा अष्टमी का दिन बेहद खास होता है। हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा अष्टमी मनाई जाती है। इस बार तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल है कि आखिर राधा अष्टमी 18 सितंबर को है या 19 सितंबर को? अगर आपके मन में भी यही Confusion है, तो जान लीजिए कि इस साल राधा अष्टमी 19 सितंबर 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन राधा-कृष्ण की पूजा के साथ व्रत और विशेष आराधना करने की परंपरा है। Radha Ashtami 2026 Date: कब है राधा अष्टमी? हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर 2026 को दोपहर के समय शुरू होगी और 19 सितंबर की दोपहर तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार राधा अष्टमी का पर्व 19 सितंबर को मनाया जाएगा। यानी अगर आप सोच रहे हैं कि पूजा आज करनी है या कल, तो मुख्य पूजा 19 सितंबर को करना उचित माना गया है। राधा अष्टमी 2026 का शुभ मुहूर्त राधा रानी की पूजा के लिए मध्याह्न का समय विशेष माना जाता है। नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार 19 सितंबर को पूजा का मध्याह्न मुहूर्त करीब सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:28 बजे तक रहेगा। हालांकि, शहर के अनुसार सूर्योदय और पंचांग के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए स्थानीय पंचांग के समय को भी जरूर देखें। राधा अष्टमी 2026 की जरूरी Details Radha Ashtami Puja Vidhi: ऐसे करें पूजा राधा अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थान की सफाई कर राधा-कृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। सबसे पहले दीपक जलाकर भगवान का ध्यान करें। राधा रानी को फूल, माला, फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। इसके बाद राधा-कृष्ण के मंत्रों का जाप करें और आरती करें। कई जगहों पर इस दिन राधा रानी का विशेष अभिषेक भी किया जाता है। पूजा में सबसे जरूरी चीज दिखावा नहीं, बल्कि श्रद्धा और साफ मन माना जाता है। Radha Ashtami Vrat का क्या है महत्व? राधा अष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं। कुछ लोग पूरे दिन उपवास करते हैं, जबकि कुछ भक्त फलाहार करते हैं। व्रत रखने का तरीका अपनी क्षमता और परिवार की परंपरा के अनुसार रखा जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि राधा रानी की भक्ति करने से मन को शांति और सकारात्मकता मिलती है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन या अपनी क्षमता के अनुसार दान करने की परंपरा भी कई जगह देखने को मिलती है। बरसाना और वृंदावन में खास रहती है रौनक राधा अष्टमी का सबसे खास रंग ब्रज क्षेत्र में देखने को मिलता है। बरसाना और वृंदावन में इस अवसर पर मंदिरों को सजाया जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु राधा रानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भक्तों के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण के प्रति अपनी आस्था और प्रेम व्यक्त करने का अवसर भी होता है। आज या कल? जान लें सही तारीख तारीख को लेकर चल रहे Confusion को अब दूर कर लें। Radha Ashtami 2026 का मुख्य पर्व 19 सितंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन राधा रानी की पूजा, व्रत और भक्ति कार्यक्रम किए जाएंगे। अगर आप भी राधा रानी के भक्त हैं, तो इस पावन दिन उनके चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करें और परिवार के साथ पूजा-अर्चना करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ganesh Chaturthi 2026

Ganesh Chaturthi 2026 11 बजे वाला मुहूर्त छूटा? जानें अब कब करें Ganpati Sthapana

Ganesh Chaturthi 2026 आज 14 सितंबर को देशभर में गणपति बप्पा के स्वागत की धूम है। कहीं घरों में छोटी-बड़ी गणेश प्रतिमाएं सजाई जा रही हैं, तो कहीं बड़े पंडालों में बप्पा की स्थापना की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। भक्तों के बीच सबसे ज्यादा उत्सुकता इस बात को लेकर है कि Ganpati Sthapana का शुभ मुहूर्त कब है। गणपति स्थापना के लिए आज का मुख्य मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक बताया गया है। माना जाता है कि इस दौरान गणेश जी की पूजा और स्थापना करना विशेष शुभ रहता है। लेकिन अगर आपका यह मुहूर्त किसी वजह से निकल गया है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। दिन में कुछ और शुभ समय भी मिल सकते हैं, जिनमें स्थानीय पंचांग के अनुसार बप्पा की स्थापना की जा सकती है। पहला मुहूर्त निकल गया तो क्या करें? कई बार ऑफिस, यात्रा या घर के जरूरी कामों के चलते लोग तय समय पर गणपति स्थापना नहीं कर पाते। ऐसे में पूजा को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। शुभ, लाभ और अमृत चौघड़िया को धार्मिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। इसलिए मुख्य स्थापना मुहूर्त निकलने के बाद इन चौघड़ियों में अपने शहर के पंचांग के अनुसार गणपति स्थापना की जा सकती है। 1. शुभ चौघड़िया शुभ चौघड़िया में पूजा-पाठ और दूसरे मांगलिक कार्य किए जाते हैं। अगर मुख्य मुहूर्त निकल गया है तो स्थानीय पंचांग में शुभ चौघड़िया का समय देखकर बप्पा को घर में स्थापित कर सकते हैं। 2. लाभ चौघड़िया लाभ चौघड़िया को भी शुभ समय माना जाता है। गणपति स्थापना के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि सही समय शहर के अनुसार बदल सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर रहेगा। 3. अमृत चौघड़िया अमृत चौघड़िया को शुभ कार्यों के लिए खास माना जाता है। अगर दिन का मुख्य मुहूर्त छूट गया है तो इस समय में भी गणपति स्थापना का विकल्प रखा जा सकता है। Ganpati Sthapana के लिए मध्याह्न समय क्यों खास? गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न काल का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न के समय हुआ था। यही वजह है कि इस दौरान गणपति की स्थापना और पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। शहर के हिसाब से बदल सकता है शुभ समय गणपति स्थापना के मुहूर्त में स्थान के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने की वजह से चौघड़िया भी बदलते हैं। इसलिए अगर आप भोपाल, इंदौर, दिल्ली, मुंबई या किसी दूसरे शहर में रहते हैं तो अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार Ganpati Sthapana का समय जरूर जांच लें। घर में ऐसे करें बप्पा का स्वागत गणपति स्थापना से पहले पूजा की जगह को अच्छी तरह साफ कर लें। चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद गणपति बप्पा को फूल, दूर्वा और मोदक अर्पित करें। पूजा के दौरान गणेश मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करें। परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजा करें तो त्योहार की खुशी और भी बढ़ जाती है। मुहूर्त निकल गया है तो घबराएं नहीं गणेश चतुर्थी सिर्फ शुभ समय देखने का पर्व नहीं, बल्कि बप्पा के स्वागत और आस्था का त्योहार भी है। अगर किसी कारण से मुख्य मुहूर्त निकल गया है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। अपने शहर के पंचांग में दिए गए शुभ समय के अनुसार गणपति स्थापना कर सकते हैं। गणपति बप्पा से घर में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करें। गणपति बप्पा मोरया!
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Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sawan

Sawan Somwar: उज्जैन से Devghar तक गूंजा हर-हर महादेव, Kanwar Yatra को लेकर खास इंतजाम

सावन (Sawan) के पहले सोमवार पर सोमवार की सुबह से ही देशभर के शिवालयों में हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे हैं। भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों का रुख कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी को लेकर खास उत्साह है, तो झारखंड के देवघर में कांवड़ियों की लंबी कतार ने शहर की तस्वीर ही बदल दी है। वहीं उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में Kanwar Yatra को देखते हुए स्कूल-कॉलेज बंद रखने का फैसला लिया गया है। उज्जैन में Mahakal की सवारी को लेकर उत्साह सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन का माहौल पूरी तरह शिवमय नजर आ रहा है। Mahakaleshwar Temple में बाबा महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही बनी हुई है। सोमवार को बाबा महाकाल की पारंपरिक सवारी निकाली जाएगी। इसे लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की तैयारियां की हैं। सवारी के रास्ते में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। बाबा महाकाल की सवारी उज्जैन की धार्मिक परंपरा का अहम हिस्सा है। सावन में इसे देखने और बाबा के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग शहर पहुंचते हैं। Devghar में 5 KM तक पहुंची Kanwariyon की लाइन झारखंड के देवघर में सावन के पहले सोमवार पर भक्तों की भीड़ अपने चरम पर पहुंचती दिखाई दे रही है। Baba Baidyanath Dham में जल चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में कांवड़िए पहुंच रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कांवड़ियों की कतार करीब 5 किलोमीटर तक लंबी हो गई है। कई श्रद्धालु घंटों इंतजार करने के बाद बाबा बैद्यनाथ के दर्शन कर रहे हैं। सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर पहुंचने वाले कांवड़ियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। कतार में खड़े श्रद्धालुओं के बीच थकान के बावजूद उत्साह नजर आ रहा है। हर तरफ बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारे सुनाई दे रहे हैं। Muzaffarnagar में School-College बंद उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में Kanwar Yatra को देखते हुए स्कूल और कॉलेज बंद रखने का निर्णय लिया गया है। कांवड़ मार्ग पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है। कांवड़ यात्रा के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सड़कों पर श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ती है। ऐसे में कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव भी बढ़ जाता है। स्कूल-कॉलेज बंद रखने का उद्देश्य विद्यार्थियों की आवाजाही कम करना और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है। शिव मंदिरों में सुबह से लंबी कतारें सावन के पहले सोमवार का असर सिर्फ उज्जैन, देवघर और मुजफ्फरनगर तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में शिव मंदिरों के बाहर सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें नजर आ रही हैं। श्रद्धालु बेलपत्र, फूल और जल लेकर भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। कई मंदिरों में विशेष पूजा और अभिषेक का आयोजन किया गया है। सावन के सोमवार को लेकर भक्तों में खास आस्था रहती है, इसलिए सुबह से ही मंदिरों में रौनक देखने को मिल रही है। आस्था के साथ प्रशासन की भी परीक्षा सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए प्रशासन के सामने भीड़ संभालने, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती रहती है। उज्जैन और देवघर जैसे प्रमुख धार्मिक शहरों में श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। फिलहाल सावन के पहले सोमवार पर देश के कई हिस्सों में एक ही तस्वीर दिखाई दे रही है—हाथों में कांवड़, जुबां पर भोलेनाथ का नाम और मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारें। आस्था के इस माहौल में महाकाल की सवारी और देवघर की कांवड़ यात्रा श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Champat Rai

Ram Mandir Donation Case: विवादों के बीच Champat Rai ने चुना भक्ति का रास्ता, Ayodhya में 4 महीने करेंगे साधना

अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़े चढ़ावा विवाद (Ram Mandir Donation Controversy) के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय (Champat Rai) ने एक बड़ा आध्यात्मिक कदम उठाया है। उन्होंने अयोध्या में चार महीने तक चलने वाली चातुर्मास साधना (Chaturmas Sadhna) शुरू कर दी है। इस दौरान वह भगवान श्रीराम की आराधना, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए अपना समय आध्यात्मिक साधना में बिताएंगे। चंपत राय का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले चढ़ावे और दान से जुड़े मामले को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है। विवाद के बीच उनका अयोध्या में रहकर साधना करने का निर्णय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। चंपत राय ने क्यों शुरू की Chaturmas Sadhna? धार्मिक परंपराओं में चातुर्मास का विशेष महत्व माना जाता है। यह अवधि भगवान की भक्ति, आत्मसंयम और आध्यात्मिक चिंतन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी परंपरा के तहत चंपत राय ने चार महीने तक साधना करने का संकल्प लिया है। बताया जा रहा है कि इस दौरान वह राम नाम का जाप, रामचरितमानस पाठ और अन्य धार्मिक गतिविधियों में समय लगाएंगे। उनका उद्देश्य आध्यात्मिक अनुशासन और आत्ममंथन पर ध्यान केंद्रित करना है। Ram Mandir Donation Case को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा? श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान की व्यवस्था को लेकर कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद विवाद शुरू हुआ। मामले की जांच को लेकर सवाल उठे और जांच एजेंसियों ने कई पहलुओं की पड़ताल शुरू की। इस विवाद के बाद मंदिर प्रशासन की व्यवस्था, दान प्रबंधन और जिम्मेदार लोगों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अयोध्या में चंपत राय की भूमिका रही है अहम चंपत राय लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद मंदिर निर्माण से लेकर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में उनकी भूमिका रही है। राम मंदिर निर्माण और निधि संग्रह अभियान के दौरान भी वह लगातार सक्रिय रहे। यही वजह है कि उनसे जुड़ा कोई भी फैसला अयोध्या और देशभर में लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। विवाद के बीच आध्यात्मिक रास्ता चुना राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच चंपत राय का चार महीने की साधना का फैसला कई मायनों में देखा जा रहा है। उनके समर्थक इसे भक्ति, संयम और आत्मचिंतन का कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे मौजूदा विवाद के संदर्भ में भी जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल, अयोध्या में चंपत राय की चातुर्मास साधना और राम मंदिर से जुड़े विवाद की जांच दोनों ही सुर्खियों में हैं। आने वाले समय में जांच की दिशा और मंदिर प्रशासन से जुड़े फैसले इस पूरे मामले की तस्वीर साफ करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Virat

Virat-Anushka Vrindavan Visit: प्रेमानंदजी महाराज के आश्रम पहुंचे विराट-अनुष्का

भारतीय क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज Virat Kohli और बॉलीवुड अभिनेत्री Anushka Sharma एक बार फिर अपनी सादगी और आध्यात्मिक जुड़ाव को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में दोनों वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने Premanand Maharaj से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनका सरल अंदाज और श्रद्धा देखकर वहां मौजूद लोग भी प्रभावित हुए। बारिश के बीच बदला रास्ता, लेकिन नहीं बदली श्रद्धा Virat और Anushka जब प्रेमानंदजी महाराज के आश्रम पहुंचे तो मौसम की वजह से रास्ता आसान नहीं था। बारिश के कारण रास्ते में कीचड़ था, लेकिन दोनों ने किसी परेशानी की परवाह किए बिना नंगे पैर पैदल चलकर आश्रम तक पहुंचने का फैसला किया। उनकी यह तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। फैंस ने विराट-अनुष्का की इस सादगी की जमकर तारीफ की और कहा कि प्रसिद्धि के बावजूद दोनों जमीन से जुड़े हुए नजर आते हैं। आश्रम में करीब एक घंटे तक रुके विराट-अनुष्का जानकारी के मुताबिक, विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने वृंदावन आश्रम में करीब एक घंटे का समय बिताया। इस दौरान दोनों ने प्रेमानंदजी महाराज से बातचीत की और जीवन से जुड़े कई विषयों पर मार्गदर्शन लिया। बताया जा रहा है कि दोनों ने परिवार, आध्यात्मिक शांति और जीवन में सकारात्मक सोच को लेकर चर्चा की। मुलाकात के दौरान विराट और अनुष्का बेहद शांत और सहज नजर आए। आध्यात्मिक यात्राओं को लेकर पहले भी चर्चा में रहे हैं दोनों विराट कोहली और अनुष्का शर्मा इससे पहले भी कई धार्मिक स्थलों पर दर्शन के लिए जा चुके हैं। दोनों अक्सर अपने व्यस्त शेड्यूल के बीच आध्यात्मिक यात्राओं के लिए समय निकालते हैं। अनुष्का और विराट का मानना है कि जीवन में सफलता के साथ-साथ मानसिक शांति भी जरूरी है। यही वजह है कि दोनों समय-समय पर धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों पर जाते दिखाई देते हैं। सोशल मीडिया पर फैंस ने की तारीफ विराट-अनुष्का की वृंदावन यात्रा के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से शेयर की जा रही हैं। फैंस ने उनके इस व्यवहार को विनम्रता और आस्था का उदाहरण बताया। कई लोगों ने कहा कि करोड़ों लोगों के पसंदीदा सितारे होने के बावजूद विराट और अनुष्का की सादगी उन्हें खास बनाती है। Virat-Anushka की यात्रा बनी चर्चा का विषय विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की यह वृंदावन यात्रा सिर्फ एक धार्मिक दौरा नहीं बल्कि उनकी आस्था और जीवन के प्रति सोच को भी दर्शाती है। कीचड़ भरे रास्ते पर नंगे पैर चलकर आश्रम पहुंचने का उनका अंदाज लोगों के दिलों को छू गया। फिलहाल, विराट-अनुष्का की प्रेमानंदजी महाराज से मुलाकात सोशल मीडिया और खबरों में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rath Yatra 2026

Rath Yatra 2026: अहमदाबाद में बदले सुरक्षा इंतजाम, हाथियों के पैर बांधकर निकाली यात्रा; Puri में निभेगी सदियों पुरानी रस्म

Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा देशभर में आस्था और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। गुजरात के अहमदाबाद और ओडिशा के पुरी में इस बार भी लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए उमड़े। हालांकि अहमदाबाद की रथयात्रा इस बार एक खास वजह से rerचर्चा में रही। पिछले साल हाथियों के बेकाबू होने की घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा में शामिल हाथियों के पैरों को हल्के बंधन में रखा। दूसरी ओर पुरी में सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार गजपति महाराज सोने की झाड़ू से भगवान के रथों की सफाई करेंगे। पिछले साल की घटना के बाद बदली तैयारी अहमदाबाद की जगन्नाथ रथयात्रा देश की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक रथयात्राओं में से एक मानी जाती है। लेकिन वर्ष 2025 की यात्रा के दौरान तीन हाथी अचानक बेकाबू हो गए थे। भीड़ में अफरा-तफरी मच गई थी और कई श्रद्धालु घायल हुए थे। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठे थे। इसी अनुभव से सीख लेते हुए इस बार प्रशासन, वन विभाग और पशु चिकित्सकों ने मिलकर विस्तृत सुरक्षा योजना तैयार की। हाथियों के आगे और पीछे के पैरों को हल्की रस्सियों से नियंत्रित रखा गया ताकि वे भीड़ में अचानक तेज़ी से न दौड़ सकें। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया गया है और इसमें पशुओं की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया। सुरक्षा व्यवस्था रही हाई अलर्ट पर रथयात्रा के पूरे मार्ग पर हजारों पुलिसकर्मी तैनात किए गए। ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी, कंट्रोल रूम और क्विक रिस्पॉन्स टीम के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी गई। हाथियों के साथ अनुभवी महावत, वन विभाग की टीम और पशु चिकित्सक भी लगातार मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह मेडिकल कैंप, एम्बुलेंस, पेयजल केंद्र और हेल्प डेस्क बनाए गए। ट्रैफिक को भी पहले से तय डायवर्जन प्लान के अनुसार संचालित किया गया ताकि यात्रा बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके। Puri में निभेगी ‘छेरा पहंरा’ की अनोखी परंपरा ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। यहां रथयात्रा के दौरान गजपति महाराज ‘छेरा पहंरा’ नामक विशेष अनुष्ठान करते हैं। इस रस्म में वे सोने की झाड़ू से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों की सफाई करते हैं और चंदन मिश्रित पवित्र जल का छिड़काव करते हैं। यह परंपरा इस बात का संदेश देती है कि भगवान के सामने हर व्यक्ति समान है। चाहे वह राजा हो या आम भक्त, सभी भगवान के सेवक हैं। लाखों श्रद्धालुओं ने लगाए जयकारे अहमदाबाद और पुरी दोनों शहरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भगवान जगन्नाथ के जयघोष के बीच भक्तों ने रथों को खींचकर अपनी आस्था व्यक्त की। पूरे वातावरण में भक्ति, उत्साह और पारंपरिक संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी। आस्था के साथ सुरक्षा का भी संदेश इस बार की रथयात्रा ने दो महत्वपूर्ण संदेश दिए। पहला, धार्मिक परंपराओं का सम्मान और दूसरा, श्रद्धालुओं की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं। अहमदाबाद में पिछले साल की घटना से सीख लेकर किए गए इंतजाम और पुरी में सदियों से चली आ रही परंपराओं का निर्वहन, दोनों ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। यही वजह है कि जगन्नाथ रथयात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी प्रतीक मानी जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kalki Avatar

Kalki Avatar Mystery: क्या बदलते हालात दे रहे हैं भगवान कल्कि के आगमन के संकेत

दुनिया में बढ़ते तनाव, युद्ध की खबरों और बदलते हालात के बीच एक बार फिर भगवान कल्कि (Kalki Avatar) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया से लेकर धार्मिक मंचों तक यह सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाला समय कलियुग के अंत की ओर इशारा कर रहा है? क्या Third World War यानी तीसरा विश्व युद्ध भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि के आगमन से जुड़ा कोई संकेत हो सकता है? हालांकि, धार्मिक ग्रंथों में कल्कि अवतार का वर्णन जरूर मिलता है, लेकिन तीसरे विश्व युद्ध और कल्कि भगवान के आगमन के बीच सीधा संबंध बताने वाली कोई प्रमाणित भविष्यवाणी नहीं मिलती। आइए जानते हैं Hindu Dharma में Kalki Avatar की मान्यता और इससे जुड़े रहस्य। भगवान कल्कि कौन हैं? जानिए Kalki Avatar की कहानी हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार को कल्कि अवतार कहा जाता है। पुराणों में बताया गया है कि जब धरती पर अधर्म, अन्याय और पाप बढ़ जाएंगे, तब भगवान विष्णु कल्कि रूप में प्रकट होकर धर्म की स्थापना करेंगे। विष्णु पुराण, श्रीमद्भागवत पुराण और कल्कि पुराण में कल्कि अवतार का उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कल्कि सफेद घोड़े पर सवार होकर आएंगे और अधर्म का अंत कर सत्य और धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे। Third World War और Kalki Avatar को क्यों जोड़ा जा रहा है? वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध, राजनीतिक तनाव और देशों के बीच बढ़ते विवाद देखने को मिल रहे हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व की स्थिति और वैश्विक तनाव के कारण लोगों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ी है। इन्हीं घटनाओं के बीच कुछ लोग इन्हें कलियुग के संकेतों से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि जब दुनिया में अशांति और अधर्म बढ़ता है, तब धार्मिक ग्रंथों में बताए गए बदलावों की शुरुआत हो सकती है। लेकिन विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इन घटनाओं को सीधे भगवान कल्कि के आगमन से जोड़ना सही नहीं है। धार्मिक कथाओं को कई बार प्रतीकात्मक रूप में भी समझा जाता है। Kaliyuga Prediction: कलियुग के अंत को लेकर क्या कहते हैं ग्रंथ? हिंदू धर्म में समय को चार युगों में बांटा गया है — सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। मान्यता है कि वर्तमान समय कलियुग का है। पुराणों में कलियुग के दौरान समाज में लालच, हिंसा, झूठ और अधर्म बढ़ने का वर्णन मिलता है। वहीं यह भी बताया गया है कि जब अधर्म अपनी सीमा पार करेगा, तब धर्म की रक्षा के लिए भगवान का अवतार होगा। क्या 2026 में आएंगे भगवान कल्कि? जानें सच्चाई समय-समय पर सोशल मीडिया और इंटरनेट पर भगवान कल्कि के आगमन को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहते हैं। कुछ लोग निश्चित तारीखों और वर्षों का दावा करते हैं, लेकिन इन दावों का कोई ठोस धार्मिक या ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। हिंदू धर्म में भगवान के अवतार की अवधारणा विश्वास और आध्यात्मिक संदेश से जुड़ी है, न कि किसी निश्चित तारीख की घोषणा से। Kalki Avatar की मान्यता हमें क्या संदेश देती है? भगवान कल्कि की कथा केवल भविष्य की घटना के रूप में नहीं, बल्कि एक संदेश के रूप में भी देखी जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को सत्य, न्याय, ईमानदारी और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देना है। आज के समय में जब समाज कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब कल्कि अवतार की चर्चा लोगों को अपने कर्म और जिम्मेदारियों पर विचार करने का अवसर देती है। भगवान कल्कि के आगमन और तीसरे विश्व युद्ध के बीच संबंध को लेकर कई चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन इसे प्रमाणित भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता। हिंदू धर्म में कल्कि अवतार का अर्थ मुख्य रूप से अधर्म पर धर्म की जीत और सत्य की स्थापना से जुड़ा है। आस्था के साथ तथ्यों को समझना भी जरूरी है। भगवान कल्कि की मान्यता हमें यही संदेश देती है कि कठिन समय में भी धर्म, सत्य और मानवता का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jagannath Rath Yatra

Jagannath Rath Yatra 2026: Tradition बनाम अलग आयोजन, ISKCON को लेकर पुरी राजा ने उठाई आवाज

भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक Jagannath Puri Rath Yatra को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। पुरी के राजा ने ISKCON (International Society for Krishna Consciousness) की ओर से अलग समय पर रथयात्रा आयोजित किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस मामले में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भगवान जगन्नाथ की सदियों पुरानी परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा करने की अपील की है। पुरी राजा का कहना है कि Jagannath Rath Yatra सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसलिए इससे जुड़े नियमों और परंपराओं का पालन बेहद जरूरी है। ISKCON की अलग रथयात्रा पर क्यों उठा विवाद? ISKCON दुनिया के कई देशों में भगवान कृष्ण और भगवान जगन्नाथ से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करता है। संस्था की ओर से कई जगहों पर Rath Yatra का आयोजन भी किया जाता है। हालांकि, पुरी की मुख्य रथयात्रा की अपनी अलग धार्मिक मान्यता और परंपरागत व्यवस्था है। पुरी राजा ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अलग-अलग समय पर रथयात्रा आयोजित होने से भगवान जगन्नाथ की परंपरा को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि इस विषय पर ध्यान दिया जाए और सदियों से चली आ रही धार्मिक व्यवस्था को सुरक्षित रखा जाए। President और PM को लिखा पत्र, परंपरा बचाने की अपील पुरी राजा की ओर से लिखे गए पत्र में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से अनुरोध किया गया है कि भगवान जगन्नाथ से जुड़ी परंपराओं की गरिमा बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि पुरी की रथयात्रा केवल ओडिशा की पहचान नहीं है, बल्कि देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों भक्तों की भावनाओं से जुड़ी हुई है। ऐसे में इससे जुड़े किसी भी बदलाव को संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। Jagannath Rath Yatra का है ऐतिहासिक महत्व पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक आयोजनों में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए पुरी पहुंचते हैं। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर की ओर जाते हैं। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है। आस्था और Tradition के बीच बढ़ी बहस Jagannath Puri Rath Yatra से जुड़ा यह विवाद एक बार फिर इस बात को सामने लाता है कि धार्मिक परंपराओं और आधुनिक आयोजनों के बीच संतुलन कितना जरूरी है। जहां ISKCON दुनिया भर में भगवान जगन्नाथ और कृष्ण भक्ति का प्रचार करता है, वहीं पुरी की पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े लोग मूल परंपराओं और धार्मिक नियमों को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार और संबंधित पक्ष इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, Jagannath Puri Rath Yatra Controversy ने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर नई चर्चा शुरू कर दी है।
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बिलासपुर केंद्रीय जेल से 19 बंदी रिहा, 15 से 16 साल की सजा काटने के बाद मिली मुक्ति

बिलासपुर केंद्रीय जेल में लंबे समय से बंद 19 पुरुष बंदियों को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। ये बंदी 15 से 16 साल तक जेल में सजा काट चुके थे। सजा की अवधि पूरी होने के बावजूद शासन स्तर से माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई लंबित थी। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया था। इसके बाद संबंधित बंदियों के प्रकरणों की समीक्षा की गई और रिहाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। स्वीकृति मिलने के बाद सभी 19 बंदियों को जेल से रिहा कर दिया गया। बंदियों से बातचीत में सामने आई थी समस्या केंद्रीय जेल के निरीक्षण के दौरान जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान कुछ बंदियों ने बताया कि वे अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं, लेकिन माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो पा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित बंदियों के आचरण और जेल के अभिलेखों की जांच कराई गई। परीक्षण के दौरान अच्छे आचरण वाले और अधिक उम्र के बंदियों के प्रकरणों पर विचार करते हुए रिहाई के प्रस्ताव तैयार किए गए और शासन को भेजे गए। परिवार के बीच लौटकर नई शुरुआत का अवसर शासन से स्वीकृति मिलने के बाद शुक्रवार को 19 पुरुष बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब ये बंदी अपने परिवारों के बीच लौट सकेंगे और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नई शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के दौरान केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी, जेलर विजयानंद सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, सभी 19 बंदियों को शासन के निर्देश पर रिहा किया गया है।

ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर कार्रवाई की मांग, 4 दिन में तालाबंदी का अल्टीमेटम

ग्वालियर के एजी ऑफिस स्थित ‘दारुल कुरआन’ मदरसे में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के निरीक्षण के बाद विवाद बढ़ गया है। मदरसे में बच्चों की देखरेख, साफ-सफाई और जरूरी दस्तावेजों को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं के विरोध में राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रदर्शन किया। संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर मदरसे पर ताला नहीं लगाया गया, तो उसके कार्यकर्ता खुद तालाबंदी करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। निरीक्षण के दौरान मिले थे 26 बच्चे शुक्रवार को मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता ने बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम के साथ मदरसे का औचक निरीक्षण किया था। मौके पर 4 से 14 वर्ष की उम्र के 8 बच्चियां और 18 बच्चे मिले थे। इस तरह कुल 26 बच्चे मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि रजिस्टर्ड 15 बच्चियों में से मौके पर केवल 8 मौजूद थीं। खबर के अनुसार, कुछ बच्चियों को पिछले रास्ते से बाहर भेजे जाने की आशंका भी जताई गई। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। टीम के मुताबिक, मदरसा प्रबंधन मौके पर मान्यता और पंजीकरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। रसोई और टॉयलेट में मिली गंदगी निरीक्षण के दौरान टीम को रसोईघर और टॉयलेट में गंदगी मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर दरवाजे भी नहीं थे। बच्चों के सोने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। बताया गया कि 42 पंजीकृत बच्चों के लिए एक छोटे हॉल में पलंग के बजाय पतली चादरों पर सोने की व्यवस्था थी। इन स्थितियों को लेकर बाल अधिकारों और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय सनातन सेना ने की सख्त कार्रवाई की मांग राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला ने मदरसे में कथित अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे संस्थानों में बच्चों को भड़काऊ शिक्षा दी जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। फिलहाल, मदरसे के संचालन, निर्माण, जमीन और फंडिंग के स्रोतों से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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