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Holika Dahan आज, मुहूर्त रात 12 बजे तक: जानिए पूजा विधि और होली की पौराणिक कहानी

Holika Dahan आज, मुहूर्त रात 12 बजे तक: जानिए पूजा विधि और होली की पौराणिक कहानी

आज देशभर में Holika Dahan मनाया जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुभ मुहूर्त रात 12 बजे तक है। इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने और अग्नि की परिक्रमा करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसी के साथ रंगों के त्योहार होली की शुरुआत होती है। क्या है होलिका दहन की कहानी? पौराणिक कथा के अनुसार असुर राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने की कई कोशिशें कीं। जब वह सफल नहीं हुआ तो उसने अपनी बहन होलिका की मदद ली, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। तभी से होलिका दहन बुराई के अंत और सच्चाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन की पूजा विधि मान्यता है कि होलिका की अग्नि में पुरानी नकारात्मक ऊर्जा जलकर खत्म हो जाती है और घर में सकारात्मकता आती है। डिजिटल दौर में होली की खास झलक अब होली का जश्न सिर्फ मोहल्लों तक सीमित नहीं रहा। लोग सोशल मीडिया पर डिजिटल इफेक्ट्स, एआर फिल्टर्स और खास फोटो एडिटिंग के जरिए होली की रंगीन यादें साझा कर रहे हैं। कई लोग होलिका दहन की लाइव स्ट्रीमिंग भी कर रहे हैं, ताकि दूर बैठे रिश्तेदार भी इस परंपरा से जुड़ सकें। सामाजिक संदेश भी देता है त्योहार होलिका दहन हमें यह सीख देता है कि अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित है। साथ ही यह पर्व हमें एकजुटता, भाईचारे और प्रेम का संदेश देता है। इस बार होली पर प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, पानी की बचत करें और सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाएं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मकर संक्रांति

मकर संक्रांति 2026 सूर्य की नई चाल से भारत में नई उम्मीदों की शुरुआत

भारत में मनाया जाने वाला मकर संक्रांति पर्व केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं बल्कि प्राकृतिक परिवर्तन, कृषि चक्र और सामाजिक एकता का प्रतीक है। मकर संक्रांति 2026 के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे उत्तरायण कहा जाता है। यह समय ऊर्जा, स्वास्थ्य और सकारात्मक बदलाव का संकेत माना जाता है। मकर संक्रांति 2026 का खगोलीय महत्व मकर संक्रांति एकमात्र हिंदू पर्व है जो सूर्य की स्थिति पर आधारित होता है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह पृथ्वी के झुकाव और सूर्य की किरणों की दिशा में बदलाव को दर्शाता है। इस दिन से दिन बड़े होने लगते हैं और सर्दी धीरे-धीरे विदा लेने लगती है, जिससे जीवन में नई सक्रियता आती है। किसानों के लिए खुशहाली का पर्व भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मकर संक्रांति बेहद महत्वपूर्ण है। यह नई फसल के आगमन का समय होता है। गेहूं, धान, गन्ना और तिलहन की फसल किसानों की मेहनत का प्रतिफल होती है।इसलिए मकर संक्रांति को कृषि उत्सव भी कहा जाता है। देशभर में अलग-अलग रूप मकर संक्रांति भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। हर क्षेत्र की परंपरा अलग है, लेकिन भावना एक—सूर्य और अन्नदाता का सम्मान। पतंगों से सजा भारत का आकाश मकर संक्रांति की सबसे सुंदर पहचान है पतंगबाजी। हजारों रंग-बिरंगी पतंगें आसमान में उड़कर उम्मीद, स्वतंत्रता और नई ऊँचाइयों का प्रतीक बन जाती हैं। गुजरात, राजस्थान और मध्य भारत में पतंग उत्सव सामाजिक मेल-मिलाप का बड़ा माध्यम बनता है। तिल-गुड़ और सामाजिक सौहार्द इस दिन तिल और गुड़ से बनी मिठाइयाँ बाँटने की परंपरा है। इसका अर्थ है—“कठिन समय में भी रिश्तों में मिठास बनाए रखना।” यह पर्व समाज को जोड़ने और प्रेम व भाईचारे को मजबूत करने का संदेश देता है। मकर संक्रांति 2026 का संदेश जब देश डिजिटल युग और वैश्विक बदलावों की ओर बढ़ रहा है, तब मकर संक्रांति 2026 हमें अपनी जड़ों, प्रकृति और परिश्रम को न भूलने की सीख देता है। यह त्योहार सिखाता है कि असली विकास तभी संभव है जब हम परंपरा और प्रगति दोनों को साथ लेकर चलें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vrindavan के बांके बिहारी मंदिर में परंपरा टूटी, हलवाई का वेतन न मिलने से ठाकुर जी का भोग नहीं बन पाया

Vrindavan के बांके बिहारी मंदिर में परंपरा टूटी, हलवाई का वेतन न मिलने से ठाकुर जी का भोग नहीं बन पाया

Vrindavan के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर से जुड़ी एक भावनात्मक खबर सामने आई है। मंदिर में वर्षों से चली आ रही परंपरा पहली बार टूटी है। जानकारी के अनुसार, मंदिर के हलवाई का वेतन समय पर नहीं मिल पाने के कारण ठाकुर जी का नियमित भोग नहीं बन सका। बांके बिहारी मंदिर में भोग केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भक्तों की आस्था से जुड़ा विषय है। रोज़ाना प्रेम और श्रद्धा के साथ तैयार किया जाने वाला भोग ठाकुर जी को अर्पित किया जाता है। लेकिन इस बार आर्थिक कारणों से यह परंपरा निभाई नहीं जा सकी, जिससे भक्तों में भी चिंता और दुख का माहौल देखा गया। मंदिर से जुड़े सेवायतों का कहना है कि हलवाई का वेतन लंबे समय से रुका हुआ है। इसी वजह से भोग बनाने की व्यवस्था प्रभावित हुई। यह घटना न सिर्फ व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी बताती है कि छोटी सी लापरवाही कैसे आस्था से जुड़ी परंपराओं को तोड़ सकती है। भक्तों को उम्मीद है कि मंदिर प्रशासन जल्द ही इस समस्या का समाधान करेगा और ठाकुर जी की सेवा में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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देवउठनी एकादशी

देवउठनी एकादशी 2025 भगवान विष्णु जागेंगे नींद से, शुरू होंगे सभी शुभ काम

देवउठनी एकादशी 2025 (Dev Uthani Ekadashi 2025) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और इसी के साथ मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। इसे प्रबोधिनी एकादशी या देव उठावनी एकादशी भी कहा जाता है। आइए जानते हैं इस दिन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और तुलसी विवाह की पूरी जानकारी। देवउठनी एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त इस वर्ष देवउठनी एकादशी 1 नवंबर 2025 (शनिवार) को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की विशेष पूजा करते हैं और उनसे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। देवउठनी एकादशी का धार्मिक महत्व हिंदू मान्यता के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इस चार माह की अवधि को चातुर्मास कहा जाता है, जिसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता।देवउठनी एकादशी के दिन जब भगवान विष्णु नींद से जागते हैं, तब से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।यह दिन आध्यात्मिक जागृति, नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। तुलसी विवाह 2025: तिथि और महत्व देवउठनी एकादशी के अगले दिन यानी 2 नवंबर 2025 (रविवार) को तुलसी विवाह मनाया जाएगा।इस दिन भगवान विष्णु का विवाह तुलसी माता से कराया जाता है। यह शुभ कार्य घर-घर में मनाया जाता है। माना जाता है कि तुलसी विवाह करवाने से जीवन में शांति, प्रेम और समृद्धि आती है तथा विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। देवउठनी एकादशी 2025 पूजा विधि इस दिन से शुरू होते हैं मांगलिक कार्य देवउठनी एकादशी के बाद विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे सभी शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है।यह दिन शुभता, सौभाग्य और नए आरंभ का प्रतीक है। जो लोग भगवान विष्णु और तुलसी माता की भक्ति से पूजा करते हैं, उनके जीवन में धन, यश और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है। महत्वपूर्ण बातें देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2025) का दिन धर्म, आस्था और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है। इस दिन भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। श्रद्धा और भक्ति के साथ इस व्रत को करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और शांति का संचार होता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Chhath Puja

Chhath Puja 2025 Special सूर्य देव की आराधना और आस्था का सबसे पवित्र पर्व

Chhath Puja 2025 आने वाली है, और पूरे भारत में श्रद्धा, आस्था और उत्साह का माहौल बन चुका है। यह पर्व सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति, सूर्य देव और जल के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई इलाकों में शुरू हुई यह परंपरा अब पूरे देश और विदेशों में मनाई जाती है। Chhath Puja 2025 चार दिन तक चलने वाला यह पर्व – नहाय खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य – शुद्धता और तपस्या का प्रतीक माना जाता है। छठ पूजा का महत्व (Chhath Puja Significance) छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का पर्व है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य की उपासना करने से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है।यह पर्व हमें प्रकृति और मानव के बीच सामंजस्य की याद दिलाता है। छठी मैया (ऊषा देवी) को संतान, स्वास्थ्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। इस दिन व्रती महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और समाज की भलाई के लिए कठोर व्रत रखती हैं। Chhath Puja Vidhi (छठ पूजा की विधि) इन चार दिनों में व्रती पूर्ण संयम, पवित्रता और श्रद्धा से सभी विधियां निभाते हैं। Eco-Friendly Message of Chhath Puja (प्रकृति संग आस्था का मेल) छठ पूजा का एक बड़ा संदेश है प्रकृति और पर्यावरण का सम्मान।इस दिन घाटों, नदियों और तालाबों की सफाई की जाती है। पूजा में केवल प्राकृतिक सामग्रियों जैसे बांस की टोकरी, केला, नारियल, और दीपक का प्रयोग होता है — जिससे यह पर्व सस्टेनेबल लिविंग का उदाहरण बनता है। भक्ति गीत और छठ घाटों की रौनक (Chhath Puja Songs & Celebration) छठ के दौरान गली-गली में गूंजते हैं पारंपरिक गीत —“केलवा जे केरवा, लहराए हो… छठी मईया आइलें अंगना हो…”दीपों की रोशनी और भक्ति गीतों से सजा माहौल हर किसी के दिल को छू जाता है।लोग अपने पूरे परिवार के साथ घाटों पर जाकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और एकता का संदेश फैलाते हैं। छठ पूजा का संदेश (Spiritual Message of Chhath Puja) छठ पूजा सिखाती है कि सच्ची आस्था और तपस्या से कोई भी मनोकामना पूरी हो सकती है।यह पर्व नारी शक्ति, त्याग और सादगी का प्रतीक है।सूर्य देव से प्रार्थना की जाती है कि सभी के जीवन में उज्ज्वलता, समृद्धि और सुख-शांति बनी रहे। Chhath Puja 2025 सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की आत्मा है — जहाँ सूर्य, जल, वायु और मनुष्य के बीच अटूट संबंध झलकता है।इस छठ पर्व पर आइए हम सब छठी मैया और सूर्य देव से प्रार्थना करें कि हमारे घरों में हमेशा उजाला और खुशियाँ बनी रहें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhai Dooj

Bhai Dooj 2025 शुभ मुहूर्त भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का त्योहार

Bhai Dooj भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। यह त्योहार भाई और बहन के रिश्ते को मजबूत करने और परिवार में खुशियों का माहौल बनाने का अवसर है। इस साल भाई दूज 23 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा, जो दीपावली के दूसरे दिन पड़ता है। भाई दूज का महत्व Bhai Dooj का मुख्य महत्व भाई-बहन के रिश्ते में विश्वास, सुरक्षा और प्यार को दर्शाना है। इस दिन बहन अपने भाई के लिए टिका, आरती, और मीठा भोजन तैयार करती है, जबकि भाई उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करता है। यह त्योहार बताता है कि चाहे भाई दूर ही क्यों न हो, बहन का प्यार और आशीर्वाद हमेशा उसके साथ रहता है। भाई दूज 2025 की परंपराएं Bhai Dooj शुभ मुहूर्त 2025 इस समय बहन अपने भाई को टिका करके उसका आशीर्वाद ले सकती है। Bhai Dooj की खास बातें भाई दूज 2025 का पर्व आपके रिश्तों को मजबूत करने और परिवार में खुशियों की लहर लाने का सबसे अच्छा मौका है।
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Govardhan Puja

Govardhan Puja 2025 दिवाली के बाद का खास पर्व और पूजा का महत्व

Govardhan Puja 2025, दिवाली के अगले दिन मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिन्दू त्योहार है। इसे अन्नकूट पूजा या इंदिरा पूजा भी कहा जाता है। यह पर्व भगवान कृष्ण और उनकी लीला, विशेषकर गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा, के लिए प्रसिद्ध है। गोवर्धन पूजा की कहानी (Govardhan Puja Story in Hindi) पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान कृष्ण ने गोकुलवासियों को समझाया कि केवल प्रकृति और गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, न कि केवल इन्द्रदेव की, तब इन्द्रदेव क्रोधित होकर भारी वर्षा करने लगे। तब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अपने छोटे अंगूठे पर उठाकर गोकुलवासियों और उनके पशुओं की रक्षा की। इस घटना के बाद से हर साल Govardhan Puja मनाई जाती है, जो भक्ति, प्रेम और प्रकृति संरक्षण का संदेश देती है। Govardhan Puja कब और कैसे मनाई जाती है? गोवर्धन पूजा का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व Govardhan Puja केवल भगवान कृष्ण की भक्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण और सामाजिक समरसता का संदेश भी देती है। अन्नकूट बनाकर गांव और शहर के लोग मिलकर भोजन करते हैं और जरूरतमंदों में दान वितरित करते हैं। Govardhan Puja 2025 प्रेम, भक्ति और प्राकृतिक संतुलन का पर्व है। मिट्टी के गोवर्धन पर्वत का निर्माण कर, अन्नकूट चढ़ाकर और गायों की सेवा करके हम अपने जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Laxmi Pooja

Laxmi Pooja 2025 Diwali पर घर में समृद्धि और खुशियों का त्यौहार

दिवाली या दीपावली, भारत का सबसे बड़ा और आनंदमय त्यौहार है। यह अंधकार पर प्रकाश, दुख पर सुख और कठिनाई पर समृद्धि की जीत का प्रतीक है। दिवाली के मुख्य दिन Laxmi Pooja का विशेष महत्व है। इस दिन घर और व्यापार में मां लक्ष्मी की पूजा कर समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। Laxmi Pooja का महत्व Laxmi Pooja सिर्फ धन पाने के लिए नहीं, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि लाने के लिए मनाई जाती है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी उन्हीं घरों में आती हैं जो साफ-सुथरे, व्यवस्थित और श्रद्धाभाव से भरे हों। इसलिए दिवाली से पहले घर की सफाई और सजावट बहुत जरूरी है। Diwali 2025 में Laxmi Pooja का शुभ मुहूर्त इस वर्ष Laxmi Pooja 20 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी।शुभ मुहूर्त: 7.08 P.M बजे से 8.18 P.M बजे तक।इस समय पूजा करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में धन-संपत्ति बढ़ती है। दिवाली और Laxmi Pooja की प्रमुख रीतियाँ दिवाली का संदेश दिवाली सिर्फ धन और समृद्धि का त्यौहार नहीं है। यह अच्छाई, सकारात्मकता और ज्ञान की जीत का प्रतीक भी है। इस दिवाली अपने जीवन में खुशियाँ और प्रेम फैलाना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि धन-संपत्ति बढ़ाना। Diwali 2025 हमें यह सिखाते हैं कि खुशहाल जीवन के लिए घर और मन की सफाई और सकारात्मक सोच आवश्यक है। इस दिवाली घर में उजाला और जीवन में खुशियाँ लाएँ। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Chhoti Diwali

Chhoti Diwali 2025 शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्त्व

छोटी दिवाली 2025, जिसे Chhoti Diwali या Kali Chaudas भी कहते हैं, दीपावली का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व मुख्य रूप से यमराज की पूजा और घर में सुख-समृद्धि लाने के लिए मनाया जाता है। छोटी दिवाली 2025 की तारीख और शुभ मुहूर्त छोटी दिवाली का महत्त्व छोटी दिवाली का मुख्य उद्देश्य यमराज की पूजा करना है। मान्यता है कि इस दिन यमराज अपने भक्तों को लंबी आयु और स्वास्थ्य का आशीर्वाद देते हैं। साथ ही, घर में दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि आती है। छोटी दिवाली पूजा विधि (Special Puja Vidhi) छोटी दिवाली पर विशेष टिप्स छोटी दिवाली 2025 Special केवल यमराज को प्रसन्न करने का पर्व नहीं है, बल्कि यह घर में सुख, शांति और समृद्धि लाने का अवसर भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Dhanteras 2025

Dhanteras 2025 शुभ मुहूर्त, पूजा समय और सोना-चांदी खरीदने का सही तरीका

धनतेरस (Dhanteras 2025) दीवाली (Diwali) के पांच दिवसीय महापर्व की शुरुआत का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। यह दिन भगवान धन्वंतरि, देवी लक्ष्मी और कुबेर भगवान को समर्पित होता है और इसे स्वास्थ्य, समृद्धि और धन के लिए सबसे शुभ माना जाता है। Dhanteras 2025 Date and Time Dhanteras पूजा Vrishabha Kaal में करना सबसे शुभ माना जाता है। Best Time to Buy Gold and Silver on Dhanteras धनतेरस पर सोना (Gold), चांदी (Silver) और नए बर्तन खरीदना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस समय में की गई खरीदारी से घर में धन और समृद्धि बढ़ती है। Dhanteras 2025 Puja Rituals धनतेरस के दिन निम्नलिखित पूजा और रीति-रिवाज अपनाए जाते हैं: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold Price India सोना ₹2000 चढ़ा, Silver में बड़ा उछाल

देश के सर्राफा बाजार में आज अचानक आई तेजी ने खरीदारों और निवेशकों दोनों को चौंका दिया। सुबह जैसे ही बाजार खुला, Gold और Silver के दामों में जोरदार उछाल देखने को मिला। खास बात यह रही कि Silver ने एक ही दिन में ₹4500 तक की छलांग लगाकर सबका ध्यान खींच लिया, जबकि Gold भी करीब ₹2000 तक महंगा हो गया। आज के ताजा रेट (Gold Silver Price Today) आज के बाजार भाव पर नजर डालें तो: ध्यान रहे कि शहर और ज्वेलर्स के हिसाब से इन कीमतों में थोड़ा फर्क देखने को मिल सकता है। MCX Market में भी तेजी का असर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी आज तेजी साफ दिखी। यह संकेत देता है कि सिर्फ घरेलू बाजार ही नहीं, बल्कि फ्यूचर्स मार्केट में भी खरीदारी बढ़ी है। आखिर क्यों बढ़े सोना-चांदी के दाम? इस तेजी के पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं: इन वजहों से सोना और चांदी दोनों की मांग अचानक बढ़ गई, जिससे कीमतों में उछाल आया। बड़े शहरों में क्या है हाल? दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी आज दामों में तेजी दर्ज की गई। हालांकि, स्थानीय टैक्स और मेकिंग चार्ज के कारण हर शहर में कीमत थोड़ी अलग हो सकती है। आगे क्या करें – खरीदें या रुकें? अगर आप सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो यह फैसला थोड़ा सोच-समझकर लेना होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
China

अमेरिका नहीं China बना India से बड़ा खरीदार – Plan-B का बड़ा कमाल

वैश्विक व्यापार की तस्वीर तेजी से बदल रही है और इसका सीधा फायदा अब भारत को मिल रहा है। जहां पहले उम्मीद थी कि अमेरिका भारत से इस खास प्रोडक्ट का सबसे बड़ा खरीदार बनेगा, वहीं अब चीन (China) ने बाजी मार ली है। China ने भारत से इस प्रोडक्ट की बड़ी मात्रा में खरीद शुरू कर दी है, जिससे एक्सपोर्ट सेक्टर में नई जान आ गई है। सरकार की “Plan-B” रणनीति को इस पूरे बदलाव का अहम कारण माना जा रहा है। क्या है पूरा बदलाव? कुछ समय पहले तक भारत के एक्सपोर्ट में अमेरिका और कुछ यूरोपीय देश ही मुख्य खरीदार थे। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। भारत ने अपनी व्यापार नीति को डायवर्सिफाई करते हुए नए बाजारों की ओर कदम बढ़ाया है। इसी बदलाव के तहत चीन के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत हुए हैं और अब वह भारत से बड़े पैमाने पर आयात कर रहा है। चीन की बढ़ती डिमांड क्यों अहम है? चीन जैसे बड़े बाजार का भारत से जुड़ना सिर्फ एक सामान्य व्यापारिक लेन-देन नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा आर्थिक संकेत है। इससे भारतीय कंपनियों को नए अवसर मिल रहे हैं और एक्सपोर्ट ग्रोथ में तेजी आई है। Government Plan-B कैसे बना गेमचेंजर? भारत सरकार की Plan-B रणनीति का मुख्य उद्देश्य था: इस रणनीति के चलते भारत ने चीन जैसे बड़े बाजारों में अपनी पकड़ बनानी शुरू की है। भारत को क्या फायदा हो रहा है? इस पूरे बदलाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है: आगे की तस्वीर कैसी हो सकती है? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो भारत आने वाले समय में ग्लोबल सप्लाई चेन का एक बड़ा हिस्सा बन सकता है। चीन जैसे देशों से बढ़ता व्यापार भारत के लिए लंबे समय में बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Bada Mangal 2026: 19 Years बाद ज्येष्ठ में 8 बड़े मंगल, इन 4 राशियों पर Money की बरसेगी बारिश

Bada Mangal 2026: 19 Years बाद ज्येष्ठ में 8 बड़े मंगल, इन 4 राशियों पर Money की बरसेगी बारिश

नई दिल्ली: साल 2026 में ज्येष्ठ महीने में एक खास संयोग बन रहा है। करीब 19 years बाद इस बार 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जिसे बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान Lord Hanuman की पूजा करने से विशेष फल मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। क्या है बड़ा मंगल का महत्व? ज्येष्ठ महीने के हर मंगलवार को बड़ा मंगल कहा जाता है। इस दिन भक्त Lord Hanuman की पूजा, व्रत और भंडारा करते हैं। माना जाता है कि इससे संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 19 साल बाद बन रहा खास योग इस बार ज्येष्ठ महीने में 8 मंगलवार पड़ रहे हैं, जो बहुत दुर्लभ माना जाता है। इससे धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है और लोग खास तैयारी कर रहे हैं। इन 4 राशियों को होगा बड़ा फायदा ज्योतिष के अनुसार इस बार 4 राशियों के लिए यह समय बेहद लाभदायक माना जा रहा है: कैसे करें पूजा? बड़े मंगल के दिन सुबह स्नान कर लाल वस्त्र पहनें और Lord Hanuman को सिंदूर, चमेली का तेल और बूंदी का प्रसाद चढ़ाएं। हनुमान चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता और आस्था यह पर्व सिर्फ पूजा का नहीं, बल्कि सेवा और भक्ति का भी प्रतीक है। कई जगहों पर भंडारे और प्रसाद वितरण किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।
कॉन्सर्ट में ‘धुरंधर’ सिंगर पर फैंस भड़के, LipSync के आरोप के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग तेज

कॉन्सर्ट में ‘धुरंधर’ सिंगर पर फैंस भड़के, LipSync के आरोप के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग तेज

एक बड़े कॉन्सर्ट के दौरान मशहूर सिंगर धुरंधर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। फैंस ने आरोप लगाया कि सिंगर ने लाइव गाने की जगह LipSync किया, जिससे दर्शकों में नाराज़गी देखने को मिली। क्या हुआ कॉन्सर्ट में? कॉन्सर्ट के दौरान सिंगर ने मंच पर शानदार एंट्री की और परफॉर्मेंस शुरू की। लेकिन कुछ ही देर में दर्शकों को शक हुआ कि गाना लाइव नहीं गाया जा रहा। कई फैंस का कहना है कि सिंगर सिर्फ गाने के साथ होंठ हिला रही थीं। परफॉर्मेंस के दौरान अलग अंदाज़ परफॉर्मेंस के बीच सिंगर ने खुद पर पानी डालकर और जोश में झूमकर माहौल बनाने की कोशिश की। हालांकि, यह अंदाज़ कुछ लोगों को पसंद आया, लेकिन कई फैंस को लगा कि यह असली गायकी से ध्यान हटाने की कोशिश है। सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग कॉन्सर्ट के वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कई यूज़र्स ने सिंगर की आलोचना की और कहा कि फैंस टिकट खरीदकर लाइव सिंगिंग सुनने आते हैं, न कि लिप सिंक देखने। फैंस की मिली-जुली प्रतिक्रिया जहां कुछ फैंस ने सिंगर का समर्थन किया और इसे सिर्फ एक एंटरटेनमेंट शो बताया, वहीं कई लोगों ने इसे फैंस के साथ धोखा करार दिया। क्या कहती है इंडस्ट्री? म्यूजिक इंडस्ट्री में कभी-कभी लिप सिंक का इस्तेमाल होता है, खासकर बड़े शो में। लेकिन फैंस की उम्मीद हमेशा लाइव परफॉर्मेंस की ही रहती है।
‘दो साल में दूसरी Maternity Leave संभव’, इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

‘दो साल में दूसरी Maternity Leave संभव’, इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

महिलाओं के हक में एक अहम फैसले में Allahabad High Court ने कहा है कि अगर जरूरत हो, तो महिला कर्मचारी दो साल के अंदर दूसरी Maternity Leave भी ले सकती है। इस फैसले से कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। क्या है पूरा मामला? मामला एक महिला कर्मचारी की छुट्टी से जुड़ा था, जिसे दूसरी बार मातृत्व अवकाश लेने में दिक्कत आ रही थी। इस पर कोर्ट ने साफ किया कि कानून महिलाओं के स्वास्थ्य और बच्चे की देखभाल को प्राथमिकता देता है। कोर्ट ने क्या कहा? Allahabad High Court ने अपने आदेश में कहा कि मातृत्व अवकाश का उद्देश्य मां और बच्चे दोनों की भलाई है। ऐसे में इसे सीमित सोच के साथ नहीं देखा जाना चाहिए। महिलाओं के लिए क्यों है अहम? यह फैसला उन महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो कम समय के अंतर में दो बच्चों की प्लानिंग करती हैं। अब उन्हें छुट्टी को लेकर ज्यादा चिंता नहीं करनी पड़ेगी। काम और परिवार के बीच संतुलन कोर्ट का यह फैसला कामकाजी महिलाओं को अपने परिवार और करियर के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद करेगा। साथ ही यह संदेश भी देता है कि महिलाओं के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। समाज पर क्या असर पड़ेगा? विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के फैसले महिलाओं को और सशक्त बनाते हैं और कार्यस्थल पर उनके अधिकारों को मजबूत करते हैं।

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