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Yogini Ekadashi

Yogini Ekadashi 2026: दीपदान के ये 5 आसान उपाय, घर में सुख-समृद्धि आने की है मान्यता

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने वाली प्रमुख एकादशियों में गिना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं तथा सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी की शाम घर के कुछ खास स्थानों पर दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आर्थिक परेशानियां दूर होने की प्रार्थना की जाती है। अगर आप भी इस शुभ अवसर पर पूजा-पाठ कर रहे हैं, तो जानिए वे पांच स्थान जहां दीपक जलाना शुभ माना जाता है। Yogini Ekadashi 2026 पर इन 5 जगहों पर जरूर जलाएं दीपक 1. मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं घर का मुख्य द्वार सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि योगिनी एकादशी की शाम यहां घी या तिल के तेल का दीपक जलाने से घर में शुभता का आगमन होता है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। 2. तुलसी के पौधे के सामने तुलसी का पौधा भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना गया है। योगिनी एकादशी के दिन शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाकर पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आने की मान्यता है। कई परिवार इस दिन तुलसी की परिक्रमा भी करते हैं। 3. पूजा घर में भगवान विष्णु के समक्ष पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाना विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। 4. रसोईघर में वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोईघर माता अन्नपूर्णा का स्थान माना जाता है। यहां दीपक जलाने की परंपरा को अन्न और धन की वृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इससे घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। 5. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) घर का उत्तर-पूर्व भाग यानी ईशान कोण सबसे पवित्र दिशा मानी जाती है। इस स्थान पर दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के लिए सुख, शांति एवं आर्थिक उन्नति की कामना की जाती है। योगिनी एकादशी पर पूजा करते समय रखें इन बातों का ध्यान दान-पुण्य का भी है विशेष महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी के दिन अन्न, वस्त्र, फल, जल और दक्षिणा का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन किए गए दान और सेवा का विशेष फल प्राप्त होता है तथा जीवन की कई बाधाएं दूर होने की कामना की जाती है। क्या सच में दूर होती है आर्थिक तंगी? धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में योगिनी एकादशी पर दीपदान, व्रत और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। हालांकि, इन मान्यताओं का आधार आस्था है। इसे धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए। नियमित पूजा, सकारात्मक सोच, मेहनत और सही आर्थिक योजना के साथ जीवन में सफलता के अवसर और भी मजबूत हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rashifal 6 July 2026: जानिए आज सभी 12 राशियों का हाल, किसे मिलेगी सफलता और किसे बरतनी होगी सावधानी

Rashifal 6 July 2026: जानिए आज सभी 12 राशियों का हाल, किसे मिलेगी सफलता और किसे बरतनी होगी सावधानी

आज 6 जुलाई 2026, सोमवार का दिन कई राशियों के लिए नई उम्मीदें और अवसर लेकर आया है। खासकर वृषभ राशि के जातकों के लिए दिन मौज-मस्ती के साथ-साथ कामकाज में भी अच्छी खबर दे सकता है। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का दैनिक राशिफल। मेष (Aries) आज कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर फैसला लें। परिवार का सहयोग मिलेगा। वृषभ (Taurus) आज का दिन आपके लिए उत्साह और खुशियों से भरा रहेगा। दोस्तों और परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। नौकरी और व्यापार में भी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। मिथुन (Gemini) कामकाज में व्यस्तता बनी रहेगी। किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है। खर्चों पर नियंत्रण रखना बेहतर रहेगा। कर्क (Cancer) परिवार से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना पड़ सकता है। स्वास्थ्य का ध्यान रखें और अनावश्यक तनाव से बचें। सिंह (Leo) करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा। कन्या (Virgo) नई योजनाओं पर काम शुरू करने के लिए दिन अच्छा है। निवेश करने से पहले पूरी जानकारी जरूर लें। तुला (Libra) दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना हो सकती है। वृश्चिक (Scorpio) आज धैर्य और समझदारी से काम लें। जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचें। धनु (Sagittarius) यात्रा के योग बन सकते हैं। छात्रों के लिए दिन सकारात्मक रहेगा। रुके हुए काम पूरे होने की संभावना है। मकर (Capricorn) आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है। कुंभ (Aquarius) रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। मीन (Pisces) धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। किसी पुराने विवाद का समाधान निकल सकता है।
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Amarnath Yatra

Amarnath Yatra कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुई यात्रा, पहले दिन 4,800 श्रद्धालु रवाना

देश की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में से एक अमरनाथ यात्रा 2026 (Amarnath Yatra 2026) गुरुवार से आधिकारिक रूप से शुरू हो गई। पहले ही दिन करीब 4,800 श्रद्धालुओं का पहला जत्था जम्मू से रवाना होकर कश्मीर पहुंच गया। अब ये श्रद्धालु बाबा बर्फानी के पवित्र हिमलिंग के दर्शन के लिए आगे बढ़ेंगे। इस बार यात्रा को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में श्रद्धालुओं को सांस लेने में परेशानी न हो, इसके लिए हर दो किलोमीटर पर Oxygen Booth लगाए गए हैं। वहीं, अचानक होने वाली बारिश और खराब मौसम से बचाव के लिए बालटाल रूट पर 12 Waterproof Dome तैयार किए गए हैं। पहले दिन उत्साह, सुरक्षा के बीच रवाना हुआ पहला जत्था जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच श्रद्धालुओं का पहला जत्था रवाना हुआ। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह सुरक्षा जांच की गई और पूरे काफिले की निगरानी की गई। कश्मीर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने यात्रा के सफल संचालन पर खुशी जताई और बाबा बर्फानी के दर्शन को लेकर उत्साह दिखाई दिया। हर 2 किलोमीटर पर Oxygen Booth की सुविधा अमरनाथ यात्रा समुद्र तल से काफी अधिक ऊंचाई पर होती है, जहां कई श्रद्धालुओं को ऑक्सीजन की कमी महसूस हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पूरे यात्रा मार्ग पर हर 2 किलोमीटर की दूरी पर ऑक्सीजन बूथ स्थापित किए हैं। इन बूथों पर प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ, ऑक्सीजन सिलेंडर और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी। किसी भी श्रद्धालु की तबीयत बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता दी जा सकेगी। Balatal Route पर बनाए गए 12 Waterproof Dome बालटाल मार्ग अपेक्षाकृत छोटा जरूर है, लेकिन इसे सबसे चुनौतीपूर्ण रास्तों में गिना जाता है। यहां मौसम कुछ ही मिनटों में बदल सकता है। इसी कारण प्रशासन ने 12 वाटरप्रूफ डोम तैयार किए हैं, जहां बारिश, तेज हवा या खराब मौसम की स्थिति में श्रद्धालु सुरक्षित ठहर सकेंगे। इन डोम में बैठने, आराम करने और आवश्यक सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई है। सुरक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा मजबूत इस वर्ष अमरनाथ यात्रा के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। यात्रा मार्ग पर हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की निगरानी के साथ ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे और हाई-टेक सर्विलांस सिस्टम का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। यात्रियों के वाहनों की जांच के साथ-साथ पूरे मार्ग पर लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है, ताकि यात्रा बिना किसी बाधा के पूरी हो सके। स्वास्थ्य सेवाओं का भी रखा गया विशेष ध्यान यात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर मेडिकल कैंप, एंबुलेंस, डॉक्टरों की टीमें और इमरजेंसी हेल्प सेंटर बनाए गए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि यदि यात्रा के दौरान किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या महसूस हो तो तुरंत नजदीकी मेडिकल कैंप या ऑक्सीजन बूथ से संपर्क करें। श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन की सलाह प्रशासन ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे केवल वैध पंजीकरण और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र के साथ ही यात्रा करें। मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखें, पर्याप्त पानी पीते रहें और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जल्दबाजी से बचें। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी परेशानी को नजरअंदाज न करें। आस्था और आधुनिक व्यवस्थाओं का अनोखा संगम हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ पहुंचते हैं। इस बार यात्रा में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और मौसम से बचाव के विशेष इंतजाम यह सुनिश्चित करने की कोशिश हैं कि श्रद्धालु सुरक्षित और सहज तरीके से अपनी धार्मिक यात्रा पूरी कर सकें।
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Amarnath Yatra

Amarnath Yatra Update: 5-8 घंटे का सफर अब 30 मिनट में, 2029 तक शुरू होगी Cable Car Service

Amarnath Yatra Cable Car Project: बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु जम्मू-कश्मीर पहुंचते हैं। लेकिन कठिन पहाड़ी रास्ते और कई घंटे की पैदल यात्रा अक्सर श्रद्धालुओं के लिए चुनौती बन जाती है। अब इस परेशानी को काफी हद तक कम करने की तैयारी हो चुकी है। सरकार अमरनाथ यात्रा को अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक बनाने के लिए केबल कार प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। तय योजना के मुताबिक अप्रैल 2027 से निर्माण कार्य शुरू होगा, जबकि 2029 तक केबल कार सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। 5 से 8 घंटे की यात्रा घटकर होगी सिर्फ 30 मिनट फिलहाल अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को बालटाल और पहलगाम मार्ग से लंबी चढ़ाई करनी पड़ती है। मौसम, भीड़ और रास्ते की स्थिति के अनुसार यह सफर करीब 5 से 8 घंटे तक का हो सकता है। केबल कार शुरू होने के बाद यही दूरी करीब 30 मिनट में पूरी की जा सकेगी। इससे न केवल यात्रा आसान होगी, बल्कि बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए भी बाबा बर्फानी के दर्शन पहले से कहीं ज्यादा सरल हो जाएंगे। अप्रैल 2027 से शुरू होगा निर्माण कार्य परियोजना की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। संबंधित एजेंसियां तकनीकी और पर्यावरण से जुड़ी सभी जरूरी मंजूरियों की प्रक्रिया पूरी कर रही हैं। योजना के अनुसार अप्रैल 2027 से Construction शुरू किया जाएगा, ताकि वर्ष 2029 तक केबल कार सेवा श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध हो सके। आधुनिक तकनीक से होगी सुरक्षित यात्रा यह केबल कार परियोजना आधुनिक इंजीनियरिंग और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुसार विकसित की जाएगी। पर्वतीय इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम को ध्यान में रखते हुए पूरी व्यवस्था तैयार की जाएगी, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर मिल सके। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को मिलेगी सबसे बड़ी राहत अभी तक कई श्रद्धालु स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं या अधिक उम्र की वजह से पूरी यात्रा नहीं कर पाते थे। केबल कार शुरू होने के बाद ऐसे श्रद्धालु बिना लंबी पैदल चढ़ाई किए आसानी से अमरनाथ गुफा तक पहुंच सकेंगे। इससे यात्रा के दौरान होने वाली थकान और जोखिम भी काफी कम होंगे। धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के शुरू होने के बाद जम्मू-कश्मीर में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी। यात्रा आसान होने से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ सकती है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय होटल, टैक्सी, दुकानदारों और पर्यटन से जुड़े कारोबारियों को मिलेगा। साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। अमरनाथ यात्रा बनेगी पहले से ज्यादा आसान बीते कुछ वर्षों में अमरनाथ यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। अब केबल कार परियोजना भी उसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। यदि सब कुछ तय समय पर पूरा हुआ, तो 2029 से श्रद्धालु केवल 30 मिनट में बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए गुफा तक पहुंच सकेंगे।
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Trigrahi Yog 2026: 15 जून को सूर्य गोचर से बनेगा त्रिग्रही राजयोग, इन राशियों की बदलेगी किस्मत

Trigrahi Yog 2026: 15 June को सूर्य गोचर से बनेगा त्रिग्रही राजयोग, इन राशियों की बदलेगी किस्मत

ज्योतिष के अनुसार 15 June 2026 को एक खास ग्रहों का संयोग बनने जा रहा है, जिसे Trigrahi Yog कहा जाता है। इस दिन सूर्य के गोचर के साथ यह शक्तिशाली राजयोग बनने की संभावना है, जिसका असर कई राशियों पर देखने को मिल सकता है। इस योग में Surya (Sun) का गोचर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार जब तीन प्रमुख ग्रह एक विशेष स्थिति में आते हैं, तो उसे त्रिग्रही योग कहा जाता है और यह समय भाग्य, करियर और आर्थिक स्थिति में बड़े बदलाव ला सकता है। मान्यता है कि इस योग के प्रभाव से कुछ राशियों को अचानक लाभ, नई नौकरी के अवसर, व्यापार में बढ़ोतरी और रुके हुए कामों में तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं कुछ लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास भी बढ़ सकता है। हालांकि इसका प्रभाव हर राशि पर अलग-अलग होता है और यह व्यक्ति की कुंडली पर भी निर्भर करता है।
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Varanasi

Varanasi Mega Project: 130 फीट ऊंचे Shivling के साथ काशी को मिलेगी नई पहचान

भगवान शिव की नगरी Varanasi अब एक और ऐतिहासिक पहचान बनाने जा रही है। Varanasi में जल्द ही दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग स्थापित किया जाएगा। इस भव्य प्रोजेक्ट को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। खास बात यह है कि यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं होगा, बल्कि आधुनिक सुविधाओं से लैस एक वर्ल्ड क्लास स्पिरिचुअल पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक वाराणसी नगर निगम करीब 20 एकड़ जमीन पर इस मेगा प्रोजेक्ट को तैयार करने जा रहा है। पार्क के बीचों-बीच 130 फीट ऊंचा विशाल शिवलिंग बनाया जाएगा, जिसे दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग बताया जा रहा है। काशी की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करने के लिए इस प्रोजेक्ट को बेहद खास माना जा रहा है। पुराने जलकल परिसर को मिलेगा नया रूप यह पूरा प्रोजेक्ट भेलूपुर-कमच्छा स्थित पुराने जलकल परिसर की जमीन पर विकसित किया जाएगा। वर्षों से खाली पड़ी इस जगह को अब धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में बदला जाएगा। बताया जा रहा है कि इस परियोजना पर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जाएंगे। काशी पहले ही बाबा विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के कारण दुनियाभर में चर्चा में है। अब यह नया शिवलिंग पार्क शहर को एक नई पहचान देने की तैयारी में है। पार्क में होंगी आधुनिक सुविधाएं इस स्पिरिचुअल पार्क को सिर्फ धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं रखा जाएगा। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। पार्क में सिंथेटिक वॉकिंग ट्रैक, बच्चों के लिए गेमिंग जोन, फूड प्लाजा, लाइब्रेरी, फैमिली पिकनिक एरिया और हरियाली से भरा ऑक्सीजन पार्क बनाया जाएगा। इसके अलावा काशी की संस्कृति और इतिहास को दर्शाने वाले वॉल म्यूरल्स भी लगाए जाएंगे। काशी की विरासत दिखाएगा Museum इस प्रोजेक्ट में एक बड़ा म्यूजियम भी बनाया जाएगा, जहां काशी की धार्मिक परंपरा, घाटों की संस्कृति, संगीत, कला और बाबा विश्वनाथ से जुड़ी विरासत को आधुनिक तकनीक के जरिए दिखाया जाएगा। इसके साथ ही एक आधुनिक प्लैनेटेरियम बनाने की भी योजना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट आने वाले समय में काशी के पर्यटन को नई ऊंचाई देगा। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी बड़ा इजाफा हो सकता है। सोशल मीडिया पर Viral हुआ 3D Video परियोजना का 3D वीडियो सामने आने के बाद सोशल media पर लोग इसकी भव्यता की जमकर चर्चा कर रहे हैं। वीडियो में विशाल शिवलिंग, हरियाली और आधुनिक डिजाइन की झलक देखने को मिल रही है। कई लोगों ने इसे काशी की नई पहचान बताया है। धार्मिक आस्था और आधुनिक विकास का यह अनोखा संगम आने वाले वर्षों में वाराणसी को Spiritual Tourism का बड़ा केंद्र बना सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vastu Tips: पीली रोटी का 43 दिन का उपाय, बढ़ सकता है Wealth और Bank Balance

Vastu Tips: पीली रोटी का 43 दिन का उपाय, बढ़ सकता है Wealth और Bank Balance

Vastu शास्त्र में कई ऐसे आसान उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर लोग अपनी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव महसूस करने का दावा करते हैं। इन्हीं में से एक उपाय इन दिनों काफी चर्चा में है—पीली रोटी का उपाय। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति लगातार 43 दिनों तक पीली रोटी का एक छोटा सा उपाय करता है, तो इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आर्थिक स्थिति में सुधार होने की संभावना बताई जाती है। माना जाता है कि यह उपाय धन, समृद्धि और स्थिरता को आकर्षित करने में मदद कर सकता है। हालांकि, यह भी कहा जाता है कि यह पूरी तरह से आस्था और विश्वास पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन कई लोग इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करके मानसिक संतोष और सकारात्मकता महसूस करते हैं। आज के समय में जब लोग आर्थिक परेशानियों से गुजर रहे हैं, ऐसे वास्तु उपायों की चर्चा सोशल मीडिया और धार्मिक प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उपायों के साथ-साथ मेहनत, सही प्लानिंग और आर्थिक अनुशासन भी बेहद जरूरी है।
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Virat Kohli

Virat Kohli Vrindavan Visit: IPL Champion बनने के बाद प्रेमानंद महाराज से मिले विराट, तस्वीरें वायरल

आईपीएल का खिताब जीतने के बाद भारतीय क्रिकेट के सुपरस्टार विराट कोहली (Virat Kohli)एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह क्रिकेट नहीं बल्कि उनकी आध्यात्मिक यात्रा है। पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ विराट वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान दोनों का सादगी भरा अंदाज सोशल Media पर खूब वायरल हो रहा है। IPL जीत के बाद वृंदावन पहुंचे विराट-अनुष्का आईपीएल ट्रॉफी जीतने की खुशी के बीच विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने वृंदावन पहुंचकर प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए। आश्रम से सामने आए वीडियो और तस्वीरों में विराट माथे पर तिलक लगाए बेहद शांत और संतुलित नजर आए। वहीं अनुष्का भी बेहद साधारण भारतीय परिधान में दिखाई दीं। क्रिकेट मैदान पर अपने जोशीले अंदाज के लिए मशहूर विराट का यह शांत और भक्तिमय रूप फैंस को काफी पसंद आ रहा है। सोशल मीडिया पर लोग उनकी आध्यात्मिक सोच और संस्कारों की सराहना कर रहे हैं। प्रेमानंद महाराज से लिया आशीर्वाद वृंदावन स्थित आश्रम में दोनों ने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। बताया जा रहा है कि इस दौरान जीवन, आध्यात्म और मानसिक शांति जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। गौरतलब है कि विराट और अनुष्का पहले भी कई बार प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए वृंदावन आ चुके हैं। दोनों अक्सर अपनी व्यस्त जिंदगी से समय निकालकर धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों पर जाते रहे हैं। अनुष्का शर्मा की सादगी बनी चर्चा का विषय इस मुलाकात के दौरान जहां विराट के माथे का तिलक और चेहरे की मुस्कान लोगों का ध्यान खींच रही थी, वहीं अनुष्का शर्मा की सादगी ने भी सभी का दिल जीत लिया। बिना किसी दिखावे के साधारण लुक में नजर आईं अनुष्का की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। फैंस का कहना है कि स्टारडम और सफलता के बावजूद इस कपल का जमीन से जुड़ा रहना उन्हें खास बनाता है। सोशल मीडिया पर फैंस ने लुटाया प्यार विराट और अनुष्का की तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। किसी ने उन्हें “सफलता और संस्कारों का प्रतीक” बताया तो किसी ने लिखा कि “यही वजह है कि लोग विराट को सिर्फ क्रिकेटर नहीं बल्कि प्रेरणा मानते हैं।” कई यूजर्स ने यह भी कहा कि इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने के बाद भी दोनों का विनम्र और आध्यात्मिक बने रहना युवाओं के लिए एक सकारात्मक संदेश है। सफलता के साथ आध्यात्म का संतुलन आईपीएल चैंपियन बनने के बाद विराट कोहली की यह वृंदावन यात्रा बताती है कि जीवन में सफलता के साथ मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन भी जरूरी है। करोड़ों फैंस के दिलों पर राज करने वाले विराट और अनुष्का ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सादगी और संस्कार ही व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान होते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Premanand Maharaj

Premanand Maharaj Health 9 दिन से नहीं निकली पदयात्रा, भक्तों से की खास अपील

वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj)इन दिनों अपनी खराब तबीयत को लेकर चर्चा में हैं। पिछले 9 दिनों से उनकी नियमित पदयात्रा बंद है, जिससे देशभर के भक्त चिंतित नजर आ रहे हैं। इसी बीच प्रेमानंद महाराज का एक भावुक संदेश सामने आया है, जिसने श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं। उन्होंने अपने भक्तों से कहा,“मेरी चिंता मत कीजिए, श्रीजी का ध्यान लगाइए। मैं रहूं न रहूं, हमेशा साथ रहूंगा।” तबीयत बिगड़ने के बाद रुकी पदयात्रा प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा वृंदावन की पहचान बन चुकी है। हर रोज हजारों श्रद्धालु उनके साथ भक्ति और नाम-स्मरण में शामिल होते थे। लेकिन स्वास्थ्य खराब होने के कारण पिछले 9 दिनों से यह यात्रा पूरी तरह बंद है। महाराजजी के आश्रम से जुड़े लोगों के मुताबिक डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है। यही वजह है कि उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों और पदयात्रा से दूरी बनाई हुई है। भक्तों से बोले- भक्ति में मन लगाइए अपने संदेश में प्रेमानंद महाराज ने भक्तों को एक बड़ी आध्यात्मिक सीख भी दी। उन्होंने कहा कि इंसान शरीर से नहीं, अपने विचारों और भक्ति से लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि वे उनकी बीमारी को लेकर परेशान न हों, बल्कि श्री राधारानी और भगवान के भजन-कीर्तन में मन लगाएं। उनका यह संदेश सोशल Media पर तेजी से वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया पर भावुक हुए श्रद्धालु जैसे ही प्रेमानंद महाराज का वीडियो सामने आया, लाखों भक्तों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना शुरू कर दी। Instagram, Facebook और YouTube पर लोग लगातार उनके लिए प्रार्थना और शुभकामनाएं लिख रहे हैं। कई श्रद्धालुओं ने लिखा कि महाराजजी सिर्फ एक संत नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और मानसिक शांति का सहारा हैं। युवाओं के बीच भी काफी लोकप्रिय हैं प्रेमानंद महाराज प्रेमानंद महाराज अपने सरल शब्दों और भावुक प्रवचनों के कारण युवाओं के बीच भी बेहद लोकप्रिय हैं। सोशल मीडिया पर उनके सत्संग और वीडियो लाखों बार देखे जाते हैं। उनकी बातों में आध्यात्म के साथ जीवन की सच्चाई भी झलकती है, यही वजह है कि हर उम्र के लोग उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं। भक्त कर रहे जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना फिलहाल श्रद्धालु यही उम्मीद कर रहे हैं कि प्रेमानंद महाराज जल्द स्वस्थ होकर फिर से पदयात्रा और सत्संग में लौटेंगे। वृंदावन समेत देश के कई हिस्सों में उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए भजन और प्रार्थनाएं की जा रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Amarnath Yatra

Amarnath Yatra 2026 गुफा में दिखा Baba Barfani, श्रद्धालुओं में उत्साह

जम्मू-कश्मीर की पवित्र अमरनाथ गुफा से इस साल की अमरनाथ यात्रा 2026 (Amarnath Yatra) से पहले बाबा बर्फानी (Baba Barfani) की पहली झलक सामने आई है। गुफा के अंदर इस बार प्राकृतिक रूप से बना बर्फ का शिवलिंग करीब 6 से 7 फीट ऊँचा दिखाई दे रहा है, जिसे देखकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिल रहा है। 6–7 फीट का प्राकृतिक Shivling बना आकर्षण हर साल की तरह इस बार भी यह बर्फीला शिवलिंग मौसम के साथ अपने अलग-अलग रूप में नजर आता है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव का दिव्य स्वरूप मानते हैं। अमरनाथ की गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन को बेहद पवित्र और दुर्लभ माना जाता है। 3 जुलाई से शुरू होगी Amarnath Yatra 2026 इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रही है। यात्रा से पहले सुरक्षा बलों ने गुफा क्षेत्र का निरीक्षण किया और तैयारियों का जायजा लिया। जवानों ने भी मौके पर पहुंचकर बाबा बर्फानी के दर्शन किए। सुरक्षा और व्यवस्थाओं की कड़ी तैयारी प्रशासन का कहना है कि इस बार यात्रा को पहले से ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। रास्तों की निगरानी, मेडिकल सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था पर खास ध्यान दिया जा रहा है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र देशभर से हर साल लाखों श्रद्धालु कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर अमरनाथ गुफा तक पहुंचते हैं और बाबा बर्फानी के दर्शन करते हैं। इस साल भी बड़ी संख्या में भक्तों के आने की उम्मीद है। प्रशासन की श्रद्धालुओं से अपील स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करें और नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित दर्शन करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बिलासपुर केंद्रीय जेल से 19 बंदी रिहा, 15 से 16 साल की सजा काटने के बाद मिली मुक्ति

बिलासपुर केंद्रीय जेल में लंबे समय से बंद 19 पुरुष बंदियों को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। ये बंदी 15 से 16 साल तक जेल में सजा काट चुके थे। सजा की अवधि पूरी होने के बावजूद शासन स्तर से माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई लंबित थी। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया था। इसके बाद संबंधित बंदियों के प्रकरणों की समीक्षा की गई और रिहाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। स्वीकृति मिलने के बाद सभी 19 बंदियों को जेल से रिहा कर दिया गया। बंदियों से बातचीत में सामने आई थी समस्या केंद्रीय जेल के निरीक्षण के दौरान जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान कुछ बंदियों ने बताया कि वे अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं, लेकिन माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो पा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित बंदियों के आचरण और जेल के अभिलेखों की जांच कराई गई। परीक्षण के दौरान अच्छे आचरण वाले और अधिक उम्र के बंदियों के प्रकरणों पर विचार करते हुए रिहाई के प्रस्ताव तैयार किए गए और शासन को भेजे गए। परिवार के बीच लौटकर नई शुरुआत का अवसर शासन से स्वीकृति मिलने के बाद शुक्रवार को 19 पुरुष बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब ये बंदी अपने परिवारों के बीच लौट सकेंगे और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नई शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के दौरान केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी, जेलर विजयानंद सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, सभी 19 बंदियों को शासन के निर्देश पर रिहा किया गया है।

ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर कार्रवाई की मांग, 4 दिन में तालाबंदी का अल्टीमेटम

ग्वालियर के एजी ऑफिस स्थित ‘दारुल कुरआन’ मदरसे में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के निरीक्षण के बाद विवाद बढ़ गया है। मदरसे में बच्चों की देखरेख, साफ-सफाई और जरूरी दस्तावेजों को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं के विरोध में राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रदर्शन किया। संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर मदरसे पर ताला नहीं लगाया गया, तो उसके कार्यकर्ता खुद तालाबंदी करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। निरीक्षण के दौरान मिले थे 26 बच्चे शुक्रवार को मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता ने बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम के साथ मदरसे का औचक निरीक्षण किया था। मौके पर 4 से 14 वर्ष की उम्र के 8 बच्चियां और 18 बच्चे मिले थे। इस तरह कुल 26 बच्चे मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि रजिस्टर्ड 15 बच्चियों में से मौके पर केवल 8 मौजूद थीं। खबर के अनुसार, कुछ बच्चियों को पिछले रास्ते से बाहर भेजे जाने की आशंका भी जताई गई। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। टीम के मुताबिक, मदरसा प्रबंधन मौके पर मान्यता और पंजीकरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। रसोई और टॉयलेट में मिली गंदगी निरीक्षण के दौरान टीम को रसोईघर और टॉयलेट में गंदगी मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर दरवाजे भी नहीं थे। बच्चों के सोने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। बताया गया कि 42 पंजीकृत बच्चों के लिए एक छोटे हॉल में पलंग के बजाय पतली चादरों पर सोने की व्यवस्था थी। इन स्थितियों को लेकर बाल अधिकारों और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय सनातन सेना ने की सख्त कार्रवाई की मांग राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला ने मदरसे में कथित अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे संस्थानों में बच्चों को भड़काऊ शिक्षा दी जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। फिलहाल, मदरसे के संचालन, निर्माण, जमीन और फंडिंग के स्रोतों से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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