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1 अप्रैल 2025 (मंगलवार) – दैनिक राशिफल

सभी 12 राशियों का दैनिक राशिफल मेष: मजाक-मस्ती के चक्कर में कोई बड़ा काम हाथ से निकल सकता है।वृषभ: कार्यस्थल पर कोई नई जिम्मेदारी मिल सकती है।मिथुन: किसी से झूठ न बोलें, वरना मुश्किल में पड़ सकते हैं।कर्क: पैसों के लेन-देन में सतर्क रहें, फालतू खर्चों पर नियंत्रण रखें।सिंह: मन प्रसन्न रहेगा, रुके हुए काम पूरे होंगे।कन्या: करियर में नए अवसर मिल सकते हैं, समय का सही उपयोग करें।तुला: कोई बड़ा निर्णय लेने से पहले अनुभवी व्यक्ति से सलाह लें।वृश्चिक: पुराने निवेश से लाभ मिलेगा, लेकिन स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें।धनु: पारिवारिक जीवन में खुशियां आएंगी, आत्मविश्वास बढ़ेगा।मकर: ऑफिस में प्रशंसा मिलेगी, लेकिन सहकर्मियों से विवाद न करें।कुंभ: सेहत को लेकर लापरवाही न करें, खानपान पर ध्यान दें।मीन: आध्यात्मिक रुचि बढ़ेगी, किसी धार्मिक यात्रा पर जा सकते हैं।
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31 मार्च 2025 (सोमवार) – दैनिक राशिफल

मेष: कार्यक्षेत्र में तरक्की के योग हैं, लेकिन वाद-विवाद से बचें।वृषभ: आर्थिक स्थिति सुधरेगी, घर में सुख-शांति बनी रहेगी।मिथुन: किसी पुराने दोस्त से मुलाकात हो सकती है, सेहत का ध्यान रखें।कर्क: नौकरी में प्रमोशन के योग हैं, लेकिन खर्च बढ़ सकते हैं।सिंह: प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी, कार्यक्षेत्र में मेहनत का फल मिलेगा।कन्या: परिवार के साथ अच्छा समय बिताएंगे, कोई शुभ समाचार मिलेगा।तुला: व्यापार में लाभ होगा, लेकिन वाणी पर नियंत्रण रखें।वृश्चिक: अनावश्यक यात्राओं से बचें, महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लें।धनु: कोई बड़ी उपलब्धि मिल सकती है, आत्मविश्वास बढ़ेगा।मकर: धन प्राप्ति के योग हैं, निवेश करने से पहले सलाह लें।कुंभ: सेहत में उतार-चढ़ाव रहेगा, वाहन चलाते समय सावधानी रखें।मीन: जीवनसाथी से मधुर संबंध रहेंगे, विदेश यात्रा के योग बन सकते हैं।
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Eid

चांद दिखा, ईद कल: यूपी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, मौलाना फरंगी महली की अपील – सड़कों पर न पढ़ें नमाज

लखनऊ: रमज़ान का मुकद्दस महीना खत्म होने के साथ ही देशभर में ईद-उल-फितर का चांद दिख गया है। चांद नजर आते ही देशभर में ईद की तैयारियां तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में ईद 11 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस बीच, यूपी में कानून-व्यवस्था को लेकर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। मौलाना फरंगी महली की अपील – सड़कों पर न पढ़ें नमाजलखनऊ के इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने अपील की है कि ईद की नमाज मस्जिदों और ईदगाहों में ही पढ़ी जाए, सड़कों पर नमाज न अदा की जाए। उन्होंने मुसलमानों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रशासन का सहयोग करने की भी गुजारिश की है। यूपी में सुरक्षा कड़ी, फ्लैग मार्च और ड्रोन से निगरानीउत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन ने ईद को लेकर सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए हैं। संवेदनशील जिलों में अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई है और पुलिस द्वारा फ्लैग मार्च किया जा रहा है। प्रमुख शहरों में ड्रोन कैमरों से निगरानी की जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। आतिशबाजी पर निगरानी, शांति बनाए रखने की अपीलसरकार ने लोगों से अपील की है कि वे शांति और सौहार्द बनाए रखें। ईद के मौके पर आतिशबाजी करने पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। किसी भी तरह की अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज समेत कई जिलों में अलर्टराजधानी लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, अलीगढ़, वाराणसी समेत कई शहरों में प्रशासन हाई अलर्ट पर है। संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। ईद के लिए खास तैयारियां, बाजारों में रौनकचांद नजर आते ही बाजारों में खरीदारी के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और कोलकाता समेत देशभर के बाजारों में मिठाइयों, सेवइयों और नए कपड़ों की खरीदारी जोरों पर है। प्रशासन की अपील – अफवाहों से बचें, शांति बनाए रखेंप्रशासन और पुलिस ने लोगों से सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की है। अगर कोई भी संदिग्ध गतिविधि नजर आती है तो तुरंत स्थानीय प्रशासन को सूचित करने के लिए कहा गया है। ईदगाहों और मस्जिदों में विशेष इंतजामईद के मौके पर मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष इंतजाम किए गए हैं। लखनऊ की ऐतिहासिक ईदगाह और दिल्ली की जामा मस्जिद समेत प्रमुख मस्जिदों में हजारों लोग नमाज अदा करेंगे। ईद मुबारक!देशभर में ईद की खुशियों का माहौल है। लोग एक-दूसरे को बधाइयां दे रहे हैं और त्योहार की तैयारियों में जुटे हुए हैं। प्रशासन और धर्मगुरुओं ने अपील की है कि लोग मिलजुल कर इस पावन पर्व को शांति और भाईचारे के साथ मनाएं।
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चैत्र नवरात्रि प्रथम दिन

चैत्र नवरात्रि प्रथम दिन

चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री और शक्ति की प्रतीक हैं। उनकी उपासना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। भक्त दीप जलाकर, भोग अर्पित कर श्रद्धा से पूजा करते हैं। मंत्रोच्चारण और ध्यान से विशेष फल की प्राप्ति होती है।शुभ रंग -पीला रंग
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चैत्र नवरात्रि 2025 : 9 दिन, 9 रंग – जानिए किस दिन कौन सा रंग पहनना है और क्या है इसका महत्व

निखिल भोपाल , 29 मार्च 2025: चैत्र नवरात्रि 2025 की शुरुआत 30 मार्च से हो रही है और यह 7 अप्रैल तक चलेगी। यह 9 दिनों तक देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना का पर्व है। हर दिन माता के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है और इस दिन विशेष रंग के वस्त्र पहनने का महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इन रंगों को धारण करने से देवी मां की कृपा प्राप्त होती है और हर मनोकामना पूरी होती है। आइए जानते हैं इस बार के नवरात्रि में हर दिन के लिए शुभ रंग कौन-सा है। चैत्र नवरात्रि 2025 के 9 दिनों के शुभ रंग और महत्व 1️⃣ 30 मार्च (प्रतिपदा) – पीला रंग 2️⃣ 31 मार्च (द्वितीया) – हरा रंग 3️⃣ 1 अप्रैल (तृतीया) – ग्रे रंग 4️⃣ 2 अप्रैल (चतुर्थी) – नारंगी रंग 5️⃣ 3 अप्रैल (पंचमी) – सफेद रंग 6️⃣ 4 अप्रैल (षष्ठी) – लाल रंग 7️⃣ 5 अप्रैल (सप्तमी) – नीला रंग 8️⃣ 6 अप्रैल (अष्टमी) – गुलाबी रंग 9️⃣ 7 अप्रैल (नवमी) – बैंगनी रंग क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य? ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इन शुभ रंगों के वस्त्र धारण करने से न केवल देवी मां की कृपा प्राप्त होती है बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा को भी सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। इस दौरान व्रत, पूजा-पाठ और दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। नवरात्रि में विशेष पूजा और उपाय निष्कर्ष चैत्र नवरात्रि सिर्फ पूजा-पाठ का पर्व नहीं, बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा, आत्मबल और नए संकल्पों का भी समय है। इन नौ दिनों में यदि भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ देवी दुर्गा की आराधना करते हैं और हर दिन के शुभ रंगों को धारण करते हैं, तो माता रानी की कृपा से जीवन में खुशहाली और सफलता प्राप्त होती है। (देश-हरपाल के लिए विशेष रिपोर्ट)
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26 मार्च 2025 के लिए हिंदू पंचांग

26 मार्च 2025 के लिए हिंदू पंचांग की जानकारी निम्नलिखित है: तिथि: कृष्ण पक्ष द्वादशी, जो रात 10:16 बजे तक रहेगी, उसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी। नक्षत्र: धनिष्ठा नक्षत्र। योग: सिद्ध योग, जो दोपहर 12:26 बजे तक रहेगा। करण: कौलव। सूर्योदय एवं सूर्यास्त: चंद्रमा की स्थिति: मकर राशि में स्थित। राहुकाल: दोपहर 12:43 बजे से 2:15 बजे तक। यमगंड काल: सुबह 8:07 बजे से 9:39 बजे तक। गुलिक काल: सुबह 11:11 बजे से दोपहर 12:43 बजे तक। व्रत एवं त्योहार: इस दिन वैष्णव पापमोचनी एकादशी व्रत मनाया जाएगा। कृपया ध्यान दें कि पंचांग की जानकारी स्थान के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती है।
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बिलासपुर केंद्रीय जेल से 19 बंदी रिहा, 15 से 16 साल की सजा काटने के बाद मिली मुक्ति

बिलासपुर केंद्रीय जेल में लंबे समय से बंद 19 पुरुष बंदियों को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। ये बंदी 15 से 16 साल तक जेल में सजा काट चुके थे। सजा की अवधि पूरी होने के बावजूद शासन स्तर से माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई लंबित थी। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया था। इसके बाद संबंधित बंदियों के प्रकरणों की समीक्षा की गई और रिहाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। स्वीकृति मिलने के बाद सभी 19 बंदियों को जेल से रिहा कर दिया गया। बंदियों से बातचीत में सामने आई थी समस्या केंद्रीय जेल के निरीक्षण के दौरान जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान कुछ बंदियों ने बताया कि वे अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं, लेकिन माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो पा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित बंदियों के आचरण और जेल के अभिलेखों की जांच कराई गई। परीक्षण के दौरान अच्छे आचरण वाले और अधिक उम्र के बंदियों के प्रकरणों पर विचार करते हुए रिहाई के प्रस्ताव तैयार किए गए और शासन को भेजे गए। परिवार के बीच लौटकर नई शुरुआत का अवसर शासन से स्वीकृति मिलने के बाद शुक्रवार को 19 पुरुष बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब ये बंदी अपने परिवारों के बीच लौट सकेंगे और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नई शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के दौरान केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी, जेलर विजयानंद सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, सभी 19 बंदियों को शासन के निर्देश पर रिहा किया गया है।

ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर कार्रवाई की मांग, 4 दिन में तालाबंदी का अल्टीमेटम

ग्वालियर के एजी ऑफिस स्थित ‘दारुल कुरआन’ मदरसे में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के निरीक्षण के बाद विवाद बढ़ गया है। मदरसे में बच्चों की देखरेख, साफ-सफाई और जरूरी दस्तावेजों को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं के विरोध में राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रदर्शन किया। संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर मदरसे पर ताला नहीं लगाया गया, तो उसके कार्यकर्ता खुद तालाबंदी करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। निरीक्षण के दौरान मिले थे 26 बच्चे शुक्रवार को मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता ने बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम के साथ मदरसे का औचक निरीक्षण किया था। मौके पर 4 से 14 वर्ष की उम्र के 8 बच्चियां और 18 बच्चे मिले थे। इस तरह कुल 26 बच्चे मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि रजिस्टर्ड 15 बच्चियों में से मौके पर केवल 8 मौजूद थीं। खबर के अनुसार, कुछ बच्चियों को पिछले रास्ते से बाहर भेजे जाने की आशंका भी जताई गई। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। टीम के मुताबिक, मदरसा प्रबंधन मौके पर मान्यता और पंजीकरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। रसोई और टॉयलेट में मिली गंदगी निरीक्षण के दौरान टीम को रसोईघर और टॉयलेट में गंदगी मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर दरवाजे भी नहीं थे। बच्चों के सोने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। बताया गया कि 42 पंजीकृत बच्चों के लिए एक छोटे हॉल में पलंग के बजाय पतली चादरों पर सोने की व्यवस्था थी। इन स्थितियों को लेकर बाल अधिकारों और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय सनातन सेना ने की सख्त कार्रवाई की मांग राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला ने मदरसे में कथित अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे संस्थानों में बच्चों को भड़काऊ शिक्षा दी जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। फिलहाल, मदरसे के संचालन, निर्माण, जमीन और फंडिंग के स्रोतों से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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