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RTE पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, सरकार से 3 सप्ताह में मांगा हर स्कूल का पूरा डेटा

रायपुर: छत्तीसगढ़ में राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत बच्चों के प्रवेश और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। नए चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कार्यभार संभालने के पहले ही दिन RTE से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार से छत्तीसगढ़ के हर स्कूल से जुड़ा RTE का पूरा डेटा भी मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी। RTE की धारा 12(1)(c) पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब सीवी भगवंत राव, विकास तिवारी समेत 13 अन्य लोगों ने RTE के क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की हैं। इन मामलों पर लगातार सुनवाई चल रही है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से पूछा कि RTE अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(c) को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए फिलहाल कौन सी SOP यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर लागू है। हर स्कूल की आरक्षित और खाली सीटों का देना होगा ब्योरा हाईकोर्ट ने सरकार को एक विस्तृत चार्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इसमें छत्तीसगढ़ के हर स्कूल में RTE के तहत आरक्षित कुल सीटों की संख्या बतानी होगी। इसके साथ ही सरकार को यह जानकारी भी देनी होगी कि प्रत्येक स्कूल में RTE के तहत कितने बच्चों को प्रवेश दिया गया है और कितनी सीटें अभी खाली हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह हलफनामा और जरूरी चार्ट राज्य सरकार के किसी सक्षम अधिकारी के माध्यम से तीन सप्ताह के भीतर पेश किया जाए। अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील ने अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को निर्धारित करने का अनुरोध किया। सरकार की ओर से कोर्ट को भरोसा दिलाया गया कि तब तक हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन कर लिया जाएगा। इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से 7 दिन पहले हलफनामा दाखिल किया जाए। साथ ही इसकी एक प्रति याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। पहले ही दिन RTE मामले पर दिखाई गंभीरता चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र ने कार्यभार संभालने के पहले दिन डिवीजन बेंच में जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के साथ कई मामलों की सुनवाई की। इसी दौरान RTE से जुड़े मामलों पर भी सुनवाई हुई। स्कूली बच्चों के प्रवेश और RTE कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने विस्तृत जानकारी मांगते हुए सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अब सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले हलफनामे और स्कूलवार डेटा पर अगली सुनवाई में कोर्ट की नजर रहेगी।
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रायपुर में पुरानी रंजिश को लेकर युवक से मारपीट, बाइक लूटने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर में पुरानी रंजिश को लेकर एक युवक से मारपीट कर उसकी बाइक लूटने के मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि बदमाशों ने युवक को घेरकर गाली-गलौज की, हाथ-मुक्कों से मारपीट की और जान से मारने की धमकी देने के बाद उसकी दोपहिया लेकर फरार हो गए। मामले में एक आरोपी अभी फरार है, जिसकी पुलिस तलाश कर रही है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल दो बाइक और एक स्कूटी भी जब्त की है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राज मिश्रा, यश मिश्रा उर्फ रोहन मिश्रा और अभिषेक पटेल उर्फ सोनू के रूप में हुई है। मंदिर के पास युवक को घेरकर की मारपीट पुलिस के अनुसार, बलराम साहू (38) ने 23 अगस्त को डीडीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 19 अगस्त की सुबह करीब 4 बजे वह मोटरसाइकिल से रायपुरा स्थित हटकेश्वरनाथ मंदिर, महादेव घाट गए थे। मंदिर के गेट के पास बाइक खड़ी करने के बाद जब वह वापस लौटे, तभी कुछ युवकों ने उन्हें घेर लिया। आरोपियों ने पुरानी रंजिश को लेकर उनके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर हाथ-मुक्कों से मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। मारपीट में नाक और पैर में आई चोट हमले के दौरान बलराम साहू के नाक और दाहिने पैर में चोट आई। इसके बाद आरोपी उनकी बाइक लेकर मौके से फरार हो गए। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने 3 आरोपियों को पकड़ा डीडीनगर थाना पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद राज मिश्रा (22), यश मिश्रा उर्फ रोहन मिश्रा (22) और अभिषेक पटेल उर्फ सोनू (20) को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल दो बाइक और एक स्कूटी बरामद की है। तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। फिलहाल पुलिस मामले में फरार चौथे आरोपी की तलाश कर रही है और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है।
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रायपुर में रक्षाबंधन पर चोरी करने वाला गिरोह पकड़ा गया, बच्चों को ढाल बनाकर चुराते थे जेवर; 7 वारदातों का खुलासा

रक्षाबंधन के मौके पर रायपुर के भीड़भाड़ वाले बाजारों में महिलाओं और बच्चों के गले से सोने-चांदी के आभूषण चोरी करने वाले गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। एसीसीयू और कोतवाली पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरोह से जुड़ी दो महिलाओं को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों महिलाओं ने शहर के अलग-अलग इलाकों में चोरी की 7 वारदातें करना स्वीकार किया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 12 लाख रुपए का सामान, जिसमें लगभग 10 लाख रुपए के सोने-चांदी के आभूषण भी शामिल हैं, बरामद किया गया है। गिरफ्तार महिलाओं की पहचान नंदनी राजपूत और सानिया मरकाम के रूप में हुई है। बच्चे के गले से लॉकेट चोरी के बाद खुला मामला रविवार को रक्षाबंधन की खरीदारी के लिए मालवीय रोड पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। इसी दौरान पैदल पेट्रोलिंग कर रही पुलिस को एक बच्चे के गले से सोने का लॉकेट चोरी होने की सूचना मिली। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू किया। फुटेज में दो संदिग्ध महिलाएं महिलाओं और बच्चों के आसपास घूमती नजर आईं। हुलिए के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की और दोनों महिलाओं को पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान शहर में हुई चोरी की अन्य घटनाओं का भी खुलासा हुआ। बच्चों को बनाती थीं चोरी के लिए ढाल पुलिस जांच में सामने आया कि नंदनी अपने बच्चों को साथ लेकर भीड़भाड़ वाले बाजारों में जाती थी। बच्चों के साथ होने के कारण उस पर लोगों को आसानी से शक नहीं होता था। आरोप है कि भीड़ का फायदा उठाकर वह बच्चों के गले से चेन और लॉकेट चोरी करती थी। इसके बाद चोरी के जेवर अपनी साथी सानिया को सौंप देती थी, जो सामान लेकर वहां से निकल जाती थी। 7 वारदातों में 12 लाख का सामान बरामद पुलिस के मुताबिक, दोनों महिलाओं ने गोलबाजार, महादेव घाट, इतवारी बाजार और मेला स्थलों में चोरी की 7 घटनाओं को अंजाम देना स्वीकार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने करीब 10 लाख रुपए के सोने-चांदी के आभूषण, 9,700 रुपए नकद, एक एक्टिवा और 5 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 12 लाख रुपए बताई गई है। पति जेल में, पुलिस कर रही नेटवर्क की जांच पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी नंदनी राजपूत का पति मोहन राजपूत गुढ़ियारी थाने का हिस्ट्रीशीटर है और फिलहाल नारकोटिक एक्ट के मामले में जेल में सजा काट रहा है। पुलिस अब गिरफ्तार महिलाओं से पूछताछ कर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और उनकी संभावित दूसरी वारदातों के बारे में जानकारी जुटा रही है। त्योहारों के दौरान बाजारों में बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस ने पैदल पेट्रोलिंग और CCTV निगरानी भी बढ़ा दी है, ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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छत्तीसगढ़ में NSUI जिला अध्यक्षों की नियुक्ति पर रोक, यूथ कांग्रेस चुनाव के बीच गुटबाजी तेज

छत्तीसगढ़ में यूथ कांग्रेस चुनाव के बीच कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर विवाद सामने आया है। गुटबाजी की शिकायतों के बाद पांच जिलों में की गई NSUI जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई है। बताया जा रहा है कि बिलासपुर NSUI अध्यक्ष रंजित सिंह के भूपेश बघेल गुट के प्रत्याशी सत्येंद्र चेलक के समर्थन में प्रचार करने के बाद संगठन के भीतर विवाद बढ़ा। मामले की शिकायत राष्ट्रीय कार्यालय तक पहुंची, जिसके बाद 20 अगस्त को जारी नियुक्ति आदेश को होल्ड कर दिया गया। अब चर्चा है कि यूथ कांग्रेस चुनाव पूरा होने के बाद ही NSUI के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। 5 जिलों में हुई थी NSUI अध्यक्षों की नियुक्ति NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय ने 20 अगस्त को पांच जिलों में नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति का आदेश जारी किया था। इनमें रंजेश सिंह क्षत्री को बिलासपुर ग्रामीण, समर्थ मिरानी को बिलासपुर शहर, दुर्गांत आर्या को मुंगेली, उस्मान रजा को बालोद और रोशन सिंह ठाकुर को खैरागढ़-छुईखदान-गंडई का जिला अध्यक्ष बनाया गया था। हालांकि, रविवार को जारी नए आदेश में इन सभी नियुक्तियों को फिलहाल रोक दिया गया है। यूथ कांग्रेस चुनाव का दिया गया हवाला नियुक्तियों पर रोक लगाने वाले आदेश में छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस चुनाव का हवाला दिया गया है। बताया गया कि राष्ट्रीय कार्यालय से चर्चा के बाद 20 अगस्त को जारी किए गए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति आदेश को फिलहाल स्थगित किया जा रहा है। इसके बाद संगठन के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि NSUI की नई नियुक्तियों का फैसला अब यूथ कांग्रेस चुनाव के बाद ही हो सकता है। रंजित सिंह के समर्थन में सामने आए नेता बिलासपुर NSUI अध्यक्ष रंजित सिंह को हटाकर शहर और ग्रामीण के लिए अलग-अलग जिला अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद संगठन के भीतर विरोध शुरू हो गया था। रंजित सिंह वर्ष 2023 से बिलासपुर NSUI जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने छात्रहित से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार सक्रियता दिखाई है। नई नियुक्तियों का बिलासपुर के अलावा रायपुर के कुछ वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं द्वारा भी विरोध किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद मामला राष्ट्रीय कार्यालय तक पहुंचा और नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई। सत्येंद्र चेलक के प्रचार को लेकर विवाद विवाद की एक बड़ी वजह रंजित सिंह का भूपेश बघेल समर्थित प्रत्याशी सत्येंद्र चेलक के समर्थन में प्रचार करना बताया जा रहा है। रंजित सिंह उनके दौरे के दौरान साथ नजर आए थे। इसी को लेकर संगठन के दूसरे खेमे की ओर से राष्ट्रीय कार्यालय में शिकायत किए जाने की बात सामने आई। हालांकि, इस मामले में अलग-अलग पक्षों के अपने दावे हैं। रंजित सिंह ने प्रदेश अध्यक्ष पर लगाए गुटबाजी के आरोप रंजित सिंह ने NSUI प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए गुटबाजी के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि संगठन में फैसले किसी व्यक्ति या गुट के फायदे के लिए नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं और संगठन के हित को ध्यान में रखकर होने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिलासपुर NSUI को शहर और ग्रामीण में बांटकर बिना उनकी जानकारी के नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई। रंजित सिंह ने इस प्रक्रिया को संगठन के नियमों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में NSUI के आंतरिक चुनाव भी होने हैं। ऐसे में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति का फैसला संगठन के चुनाव को प्रभावित कर सकता है। 30 अगस्त से शुरू होना है युवा कांग्रेस का सदस्यता अभियान रंजित सिंह के मुताबिक, 30 अगस्त से युवा कांग्रेस का सदस्यता अभियान भी शुरू होने वाला है। उनका कहना है कि सदस्यता और संगठन चुनाव की प्रक्रिया में कार्यकर्ताओं को अपने नेतृत्व का चुनाव करने का अधिकार मिलना चाहिए। फिलहाल पांच जिलों में NSUI अध्यक्षों की नियुक्ति पर रोक लगने के बाद संगठन के अगले फैसले का इंतजार है। अब देखना होगा कि यूथ कांग्रेस चुनाव के बाद इन नियुक्तियों को बरकरार रखा जाता है या संगठन नए सिरे से फैसला करता है।
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बिलासपुर में स्मार्ट मीटर से बढ़ी बिजली उपभोक्ताओं की परेशानी, कहीं 6 महीने से बिल नहीं तो कहीं 5 हजार तक पहुंचा

बिलासपुर में स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। कई उपभोक्ता बिलिंग में गड़बड़ी और मीटर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं की शिकायत लेकर बिजली विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। विभाग के अधिकारी इन तकनीकी दिक्कतों के लिए मीटर लगाने वाली जीनस कंपनी की व्यवस्था को जिम्मेदार बता रहे हैं। नेहरू नगर स्थित सीएसईबी के सिटी डिविजन कार्यालय में लगातार ऐसे उपभोक्ता पहुंच रहे हैं, जिनकी शिकायत स्मार्ट मीटर, बिल नहीं आने या अचानक ज्यादा बिल आने से जुड़ी है। थ्री-फेज कनेक्शन लिया, लेकिन नहीं लगा स्मार्ट मीटर कई उपभोक्ताओं ने गर्मियों में बिजली की बढ़ी खपत को देखते हुए थ्री-फेज कनेक्शन लिया था। इसके लिए जांच प्रक्रिया पूरी करने और शुल्क जमा करने के बाद भी उनके यहां नया स्मार्ट मीटर नहीं लगाया गया। ऐसे में कुछ घरों में अभी भी पुराने मीटर से ही बिजली सप्लाई जारी है। विभाग के मुताबिक, फिलहाल ऐसे करीब 20 मामले सामने आए हैं, हालांकि वास्तविक संख्या इससे ज्यादा होने की संभावना जताई जा रही है। नए स्मार्ट मीटर नहीं लग पाने के कारण इन उपभोक्ताओं को बिलिंग में परेशानी हो रही है। कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें छह महीने से ज्यादा समय से बिजली का बिल ही नहीं मिला। किसी का बिल 5 हजार, किसी का महीनों से नहीं आया स्मार्ट मीटर और बिलिंग से जुड़ी शिकायतों को लेकर शशिलता श्रीवास निवासी चड्डा बाड़ी, नेहरू नगर और एसके चतुर्वेदी निवासी कुदुदंड सहित कई उपभोक्ता नेहरू नगर कार्यालय पहुंचे। वहीं प्रकाश यादव और भरत कश्यप ने बिजली की खपत के मुकाबले ज्यादा बिल आने की शिकायत की है। ‘प्लंबर हूं, पूरी कमाई बिजली बिल में जा रही’ कस्तूरबा नगर निवासी प्रकाश यादव ने बताया कि वह प्लंबर का काम करते हैं। सामान्य मीटर के समय उनका बिजली बिल करीब 300 से 400 रुपए प्रतिमाह आता था। अब यह बढ़कर 4 से 5 हजार रुपए तक पहुंच रहा है। उनका कहना है कि आसपास रहने वाले कई लोगों की भी इसी तरह की शिकायत है। प्रकाश यादव के मुताबिक, इतनी अधिक राशि का बिल आने से उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा बिजली बिल चुकाने में चला जा रहा है। ‘गर्मियों में 2-2.5 हजार, अब 5-6 हजार का बिल’ नगर निगम में विपक्ष के नेता भरत कश्यप ने बताया कि नेहरू नगर स्थित उनके घर में सामान्य मीटर के दौरान गर्मियों में भी बिजली का बिल 2 से 2.5 हजार रुपए से ज्यादा नहीं आया। उनका कहना है कि अब बारिश के मौसम में बिजली की खपत कम होने के बावजूद बिल 5 से 6 हजार रुपए महीने तक पहुंच गया है। विभाग ने माना तकनीकी दिक्कत से हो रही परेशानी सीएसईबी नेहरू नगर के एई गिरीश श्रीवास्तव ने बताया कि नेहरू नगर जोन में करीब 15 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। उन्होंने माना कि मीटर से जुड़ी तकनीकी समस्याएं सामने आती रहती हैं। उनके मुताबिक, डेटा अपडेट करने का अथॉराइजेशन जीनस कंपनी के पास है और तकनीकी समस्या होने पर कंपनी से इसे क्लियर कराया जाता है। उन्होंने यह भी माना कि कभी-कभी इस प्रक्रिया में देरी हो जाती है। अधिकारी के अनुसार, किसी शिकायत के समाधान में छह महीने का समय नहीं लगना चाहिए और अगर इतना समय लग रहा है तो इसे विभाग की चूक माना जाएगा। खपत कम होने के बावजूद ज्यादा बिल पर सवाल सीएसपीडीसीएल के ईडी अम्बष्ट से बिजली खपत और बिलिंग को लेकर सवाल किया गया। उन्होंने बताया कि जून की तुलना में वर्तमान समय में बिजली की खपत करीब 50 प्रतिशत कम हो चुकी है। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि यदि खपत कम हो गई है तो कुछ उपभोक्ताओं के बिल पहले की तुलना में ज्यादा क्यों आ रहे हैं, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया और फोन काट दिया। दोबारा संपर्क करने पर भी कॉल रिसीव नहीं किया गया। फिलहाल स्मार्ट मीटर की तकनीकी गड़बड़ी, डेटा अपडेट और बिलिंग में अंतर को लेकर उपभोक्ताओं की परेशानी बनी हुई है। विभाग का कहना है कि शिकायतों का जल्द निराकरण करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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रायपुर में करंट लगने से मां-बेटे की मौत, बचाने पहुंचा बेटा भी चपेट में आया

रायपुर में एक दर्दनाक हादसे में मां और बेटे की करंट लगने से मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ, जब मां बालकनी में सूख रहे कपड़े लेने गई थीं। कपड़े उतारते समय उन्होंने जैसे ही जीआई पाइप को छुआ, वह करंट की चपेट में आ गईं। मां को करंट से चिपका देखकर उनका बेटा उन्हें बचाने के लिए पहुंचा, लेकिन वह भी बिजली की चपेट में आ गया। हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना टिकरापारा थाना क्षेत्र की है। बेटी से मिलने रायपुर आए थे मां-बेटे जानकारी के मुताबिक, महिला अपने बेटे के साथ रायपुर में रहने वाली अपनी बेटी से मिलने आई थीं। बेटी किराए के मकान में रहती है। इसी मकान की बालकनी में यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि बालकनी में कपड़े सूख रहे थे। महिला कपड़े उतारने पहुंचीं और जीआई पाइप को छूते ही करंट की चपेट में आ गईं। मां को बचाने पहुंचा बेटा भी झुलसा महिला को करंट से चिपका देखकर उनका बेटा मदद के लिए दौड़ा। उसने मां को बचाने की कोशिश की, लेकिन जीआई पाइप में फैले करंट की चपेट में वह भी आ गया। हादसा इतना गंभीर था कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई। कूलर से पाइप में फैला था करंट शुरुआती जांच में सामने आया है कि मकान में लगे कूलर से करंट जीआई पाइप में फैल गया था। पाइप में करंट आने की वजह से महिला जैसे ही उसे छूने पहुंचीं, हादसा हो गया। सूचना मिलने के बाद टिकरापारा पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस हादसे के कारणों और बिजली कनेक्शन की स्थिति की भी जांच कर रही है।
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रायपुर में चोरी की एक्टिवा से मोबाइल स्नेचिंग, युवक और नाबालिग गिरफ्तार; 5 मोबाइल बरामद

रायपुर में चोरी की एक्टिवा से मोबाइल छीनने वाले एक युवक और नाबालिग को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों पर सरस्वती नगर इलाके में मोबाइल स्नेचिंग की दो वारदातों के साथ मोबाइल चोरी की तीन अन्य घटनाओं में शामिल होने का आरोप है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 5 मोबाइल फोन और चोरी की एक्टिवा बरामद की है। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 1.50 लाख रुपए बताई गई है। मॉर्निंग वॉक पर निकली महिला से मोबाइल छीना पुलिस के मुताबिक, 19 अगस्त की सुबह कोटा निवासी उन्नति ठाकुर मॉर्निंग वॉक के लिए निकली थीं। दिशा कॉलेज रोड पर रेयांश किचन के सामने ग्रे रंग की एक्टिवा पर सवार दो युवकों ने उनका मोबाइल झपट लिया और फरार हो गए। इसी सुबह चौबे कॉलोनी निवासी युवराज मेहर कॉलेज जा रहे थे। उसी इलाके में बाइक सवार युवकों ने उनका मोबाइल भी इसी तरह छीन लिया। दोनों घटनाओं की शिकायत सरस्वती नगर थाने में दर्ज कराई गई थी। मेडिकल कॉलेज की पार्किंग से चोरी हुई थी एक्टिवा पुलिस जांच में सामने आया कि मोबाइल स्नेचिंग में इस्तेमाल की गई एक्टिवा CG 04 KS 6757 भी चोरी की थी। पुलिस के अनुसार, यह एक्टिवा 21 जुलाई को मेडिकल कॉलेज की पार्किंग से चोरी हुई थी। इस संबंध में मौदहापारा थाने में मामला दर्ज था। पुलिस ने स्नेचिंग की घटनाओं के CCTV फुटेज खंगाले तो दोनों वारदातों में इसी चोरी की एक्टिवा का इस्तेमाल दिखाई दिया। इसके बाद तकनीकी जांच और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की गई। एमजी रोड पर घेराबंदी कर पकड़ा पुलिस टीम को सूचना मिली कि चोरी की एक्टिवा पर दो युवक एमजी रोड इलाके में घूम रहे हैं। इसके बाद टीम ने घेराबंदी कर दोनों को पकड़ लिया। पूछताछ में एक आरोपी ने अपना नाम वरुण साहू (23), निवासी राम नगर, गुढ़ियारी बताया। दूसरा आरोपी नाबालिग है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों ने एक्टिवा चोरी करने के साथ इसी वाहन से मोबाइल स्नेचिंग की दो वारदात और तीन अन्य मोबाइल चोरी की घटनाओं में शामिल होने की बात स्वीकार की है। आरोपियों के पास से 5 मोबाइल बरामद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर 5 मोबाइल फोन और चोरी की एक्टिवा बरामद की है। पुलिस अब उन तीन अन्य मोबाइल चोरी की घटनाओं के संबंध में भी जांच कर रही है, जिन्हें आरोपियों ने पूछताछ में कबूल किया है। यह कार्रवाई डीसीपी वेस्ट जोन रॉबिंसन गुड़िया के निर्देशन, एडीसीपी राहुल देव शर्मा के मार्गदर्शन और एसीपी आजाद चौक ईशू अग्रवाल के नेतृत्व में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और सरस्वती नगर पुलिस की संयुक्त टीम ने की।
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बिलासपुर में मकान के बेसमेंट से टनों कृषि दवाइयां जब्त, बिना लाइसेंस भंडारण का आरोप

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कृषि विभाग ने एक मकान के बेसमेंट से बड़ी मात्रा में कीटनाशक और कृषि में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां जब्त की हैं। विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो कृषि दवाओं और खाद के भंडारण से जुड़े जरूरी लाइसेंस और दस्तावेज नहीं मिले। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद सामग्री की मात्रा काफी ज्यादा है और इसकी तौल व लिस्टिंग का काम किया जा रहा है। आशंका है कि कृषि दवाइयां उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से मंगाई गई थीं और बिलासपुर में बिक्री के लिए रखी गई थीं। लोखंडी के मकान में मिला स्टॉक कृषि विभाग को सूचना मिली थी कि लोखंडी इलाके में एक मकान के बेसमेंट में बड़ी मात्रा में कीटनाशक और कृषि दवाइयां रखी गई हैं। सूचना के बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बेसमेंट की जांच शुरू की। जांच के दौरान बड़ी संख्या में कृषि दवाइयां और अन्य सामग्री मिली। विभाग अब बरामद स्टॉक से जुड़े दस्तावेज और लाइसेंस की जांच कर रहा है। एक्सपायर या नकली दवाओं की भी आशंका कार्रवाई के दौरान मिली कुछ कृषि दवाओं के एक्सपायर या नकली होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, दवाओं के सैंपल की जांच और रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इनमें से कोई दवा नकली या निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं है। अगर ऐसा पाया जाता है तो मामले में आगे कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। बिना लाइसेंस भंडारण की जांच कृषि दवाओं और कीटनाशकों के भंडारण और बिक्री के लिए निर्धारित नियम और लाइसेंस जरूरी होते हैं। बेसमेंट में इतनी बड़ी मात्रा में कृषि सामग्री मिलने के बाद विभाग ने संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि दवाइयां कहां से लाई गईं, किसके नाम पर थीं और इन्हें रखने या बेचने के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं। कार्रवाई के दौरान मकान मालिक नहीं मिला जिस मकान के बेसमेंट से कृषि दवाइयां बरामद हुई हैं, वह गाजियाबाद निवासी आशु सिंह पाल का बताया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान वह मौके पर मौजूद नहीं था। फिलहाल कृषि विभाग ने बरामद सामग्री को जब्त कर लिया है। स्टॉक की गिनती और तौल के बाद पूरी सूची तैयार की जा रही है। दस्तावेजों और दवाओं की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। एसएसपी ने पुलिस टीम को भेजा मामले की जानकारी मिलने के बाद बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने भी इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने सकरी थाना पुलिस की टीम को मौके पर भेजा। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बरामद सामग्री की मात्रा टनों में है। फिलहाल उसकी गिनती, तौल और लिस्टिंग की प्रक्रिया चल रही है। कार्रवाई के दौरान संयुक्त संचालक कृषि राजेश राठौर, सहायक संचालक कृषि अनिल शुक्ला, सहायक संचालक शशांक शिंदे समेत कृषि विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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बिलासपुर में तालाब में डूबे दो सगे भाई, छोटे को बचाने के लिए बड़े भाई ने लगाई छलांग

बिलासपुर के पचपेड़ी थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम एक दर्दनाक हादसे में दो सगे भाइयों की तालाब में डूबने से मौत हो गई। दोनों बच्चे अपने पिता के साथ तालाब के पास गए थे। इसी दौरान छोटा भाई पानी में फिसलकर गहरे हिस्से में चला गया। उसे बचाने के लिए बड़ा भाई भी तालाब में कूद गया, लेकिन गहराई अधिक होने के कारण दोनों डूब गए। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। एक साथ दो बेटों की मौत से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता से कुछ दूर जाते ही हुआ हादसा जानकारी के मुताबिक, चिल्हाटी निवासी भक्त प्रहलाद पैकरा किसान हैं। गुरुवार शाम वह अपने दोनों बेटों दीपू पैकरा (7) और चींटू पैकरा (4) को लेकर तालाब के पास गए थे। बताया जा रहा है कि पिता बच्चों को तालाब किनारे छोड़कर कुछ दूर चले गए और मोबाइल पर बात करने लगे। इसी दौरान तालाब के पास खेल रहा चार वर्षीय चींटू अचानक फिसलकर पानी में गिर गया और गहरे हिस्से में चला गया। छोटे भाई को बचाने तालाब में कूदा बड़ा भाई छोटे भाई को पानी में डूबता देखकर सात वर्षीय दीपू उसे बचाने के लिए तालाब में कूद गया। बताया जा रहा है कि तालाब की गहराई अधिक थी और बच्चों को इसका अंदाजा नहीं था। देखते ही देखते दोनों बच्चे पानी में डूब गए। युवक ने देखा तो ग्रामीणों को बुलाया हादसे के दौरान एक युवक की नजर तालाब में डूब रहे दोनों बच्चों पर पड़ी। उसने तुरंत शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया। आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तालाब में उतरकर दोनों बच्चों को बाहर निकाला। परिजन और ग्रामीण दोनों बच्चों को लेकर तत्काल पचपेड़ी अस्पताल पहुंचे। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें मस्तूरी अस्पताल रेफर कर दिया। डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित किया मस्तूरी अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पचपेड़ी पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। एक साथ दो मासूम बेटों की मौत से परिवार में गम का माहौल है। गांव में भी इस हादसे के बाद शोक की लहर है।
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बीमार सास-ससुर को छोड़ने का दबाव बनाना मानसिक क्रूरता, तलाक बरकरार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक विवाद और तलाक से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने कहा कि शादी के बाद भले ही नया परिवार बनता है, लेकिन इससे बुजुर्ग और बीमार माता-पिता के प्रति संतान की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारियां खत्म नहीं होतीं। कोर्ट ने कहा कि यदि पत्नी बिना किसी ठोस और उचित वजह के बीमार सास-ससुर को छोड़कर अलग रहने के लिए पति पर लगातार दबाव बनाती है, तो ऐसा व्यवहार पति के प्रति मानसिक क्रूरता माना जा सकता है। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट से मिले तलाक के आदेश को बरकरार रखते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी। शादी के एक साल बाद शुरू हुआ विवाद मामला राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ निवासी एक सिख युवक और पत्थलगांव निवासी महिला से जुड़ा है। दोनों की शादी 8 मार्च 2007 को हुई थी। पति के मुताबिक शादी के करीब एक साल बाद से ही दोनों के बीच पारिवारिक विवाद शुरू हो गया था। पति ने बताया कि उसके पिता गंभीर हृदय रोग से पीड़ित हैं और उनकी तीन बार हार्ट सर्जरी हो चुकी है। इसके बावजूद पत्नी लगातार उन पर माता-पिता को छोड़कर अलग रहने का दबाव बनाती रही। बच्चे को लेकर मायके चली जाती थी पत्नी पति का आरोप था कि उसके मना करने पर पत्नी सास-ससुर से दुर्व्यवहार करती थी और कई बार बिना बताए छोटे बेटे को लेकर मायके चली जाती थी। वर्ष 2018 में दोनों परिवारों के रिश्तेदारों के बीच सामाजिक स्तर पर समझौता कराने की कोशिश हुई। इस दौरान पत्नी ने लिखित माफीनामा भी दिया था। हालांकि, पति के अनुसार इसके बाद भी विवाद और व्यवहार में कोई खास बदलाव नहीं आया। फैमिली कोर्ट ने दिया था तलाक का आदेश लगातार विवाद से परेशान पति ने डोंगरगढ़ फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की। मामले की सुनवाई के बाद फैमिली कोर्ट ने 11 नवंबर 2024 को मानसिक क्रूरता के आधार पर पति के पक्ष में तलाक का फैसला सुनाया। इस फैसले के खिलाफ पत्नी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। पत्नी ने लगाए थे 50 लाख रुपए मांगने के आरोप हाईकोर्ट में पत्नी ने आरोप लगाया कि सास के उकसाने पर पति उसे प्रताड़ित करता था। उसने यह भी दावा किया कि पेट्रोल पंप खोलने के लिए उसके मायके से 50 लाख रुपए की मांग की गई थी। पत्नी ने माफीनामे को लेकर भी आरोप लगाया कि उस पर दबाव डालकर हस्ताक्षर कराए गए थे। हाईकोर्ट ने आरोपों को बताया निराधार हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े दस्तावेजों, गवाहों और बयानों की जांच की। कोर्ट ने पत्नी के आरोपों को साबित करने वाला पर्याप्त आधार नहीं पाया। मामले में पत्नी के भाई और मामा ने भी गवाही दी और स्वीकार किया कि उन्होंने माफीनामा बिना किसी दबाव के पढ़ने के बाद हस्ताक्षर किया था। माता-पिता की देखभाल करना संतान की जिम्मेदारी हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि माता-पिता की सेवा और उनका भरण-पोषण करना संतान का दायित्व है। शादी के बाद यह जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। कोर्ट ने माना कि पति का अपने गंभीर रूप से बीमार पिता की देखभाल के लिए माता-पिता से अलग रहने से इनकार करना स्वाभाविक और उचित था। वहीं, पत्नी द्वारा बिना उचित कारण लगातार अलग रहने का दबाव बनाना पति के लिए मानसिक प्रताड़ना और मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश को सही ठहराते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी।
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न्यूजीलैंड क्रिकेट का बड़ा फैसला, MLC में नहीं करेगा निवेश; NZ20 लीग भी टली

न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट (MLC) में निवेश नहीं करने का फैसला किया है। बोर्ड ने 2027 सीजन से पहले लीग की नई टीम शुरू करने के लिए अमेरिकी कंपनी ट्रू नॉर्थ स्पोर्ट्स (TNS) वेंचर्स के साथ साझेदारी की थी। हालांकि, अब न्यूजीलैंड क्रिकेट घरेलू क्रिकेट और अपने संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। मेजर लीग क्रिकेट में न्यूजीलैंड के कई प्रमुख खिलाड़ी हिस्सा लेते रहे हैं। इनमें रचिन रवींद्र, फिन एलन, डेवोन कॉनवे, टिम सेफर्ट और लॉकी फर्ग्यूसन जैसे नाम शामिल हैं। अप्रैल 2025 में हुई थी साझेदारी की घोषणा न्यूजीलैंड क्रिकेट ने अप्रैल 2025 में TNS वेंचर्स के साथ साझेदारी की घोषणा की थी। इस समझौते के तहत बोर्ड को 2027 में MLC की प्रस्तावित दो नई टीमों में से एक को शुरू करने और संचालित करने में सहयोग देना था। इसके लिए न्यूजीलैंड क्रिकेट को हाई-परफॉर्मेंस और संचालन से जुड़ी सहायता उपलब्ध करानी थी। हालांकि, अब बोर्ड ने इस योजना से पीछे हटने का निर्णय लिया है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने कहा- अभी सही समय नहीं न्यूजीलैंड क्रिकेट के CEO ज्योफ एलॉट ने कहा कि उन्हें इस साझेदारी के उद्देश्य और महत्वाकांक्षा पर भरोसा है। उनके मुताबिक, अमेरिकी बाजार में क्रिकेट के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन विस्तृत आकलन के बाद बोर्ड को लगता है कि फिलहाल इस दिशा में आगे बढ़ने का सही समय नहीं है। एलॉट ने TNS और MLC के सह-संस्थापक समीर मेहता तथा विजय श्रीनिवासन का अवसर तलाशने में सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड क्रिकेट भविष्य में दोनों के साथ संपर्क बनाए रखेगा। न्यूजीलैंड की NZ20 टी-20 लीग भी टली न्यूजीलैंड में प्रस्तावित पुरुष और महिला टी-20 लीग NZ20 की शुरुआत भी टाल दी गई है। इस लीग की योजना मौजूदा सुपर स्मैश टूर्नामेंट की जगह एक नई प्रतियोगिता शुरू करने की थी। पहले NZ20 को जनवरी 2027 में शुरू करने की योजना थी, लेकिन अब इसकी शुरुआत दिसंबर 2027 तक के लिए टाल दी गई है। इससे न्यूजीलैंड क्रिकेट की घरेलू टी-20 प्रतियोगिता की योजनाओं में भी बदलाव हुआ है।

Zomato-Blinkit की पैरेंट कंपनी Eternal लाएगी Dark.ai, सीक्रेट चैट और प्राइवेसी पर होगा फोकस

जोमैटो और ब्लिंकइट की पैरेंट कंपनी एटरनल (Eternal) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में नया कदम उठाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के प्रमुख दीपिंदर गोयल ने ‘Dark.ai’ नाम के नए AI ऐप के बारे में जानकारी दी है। इसका मुख्य फोकस यूजर्स की प्राइवेसी और संवेदनशील बातचीत की सुरक्षा पर होगा। गोयल के मुताबिक, इस ऐप को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि लोग अपनी निजी बातें, गोपनीय विचार, रिसर्च और जटिल सवाल बिना किसी झिझक के साझा कर सकें। फिलहाल कंपनी के कर्मचारी इसकी टेस्टिंग कर रहे हैं। डेटा सुरक्षा पर जोर, कंपनी भी नहीं पढ़ पाएगी चैट दीपिंदर गोयल ने बताया कि Dark.ai को कंपनी के अपने कंप्यूटर सिस्टम और सुरक्षित तकनीक पर चलाने की योजना है। इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन जैसी सुरक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है, ताकि बातचीत को अनधिकृत रूप से पढ़े जाने से बचाया जा सके। ऐप में एक विशेष मेमोरी सिस्टम भी होगा, जिस पर यूजर का नियंत्रण रहेगा। इसके जरिए यूजर अपनी जरूरत के अनुसार पुरानी बातचीत से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित रख सकेंगे या हटा सकेंगे। हालांकि, ऐप की सुरक्षा व्यवस्था और डेटा प्रबंधन से जुड़े सभी तकनीकी विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसलिए कंपनी के दावों की वास्तविक सीमा लॉन्च के समय उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट होगी। स्टार्टअप, वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स के लिए होगा उपयोगी Dark.ai को खास तौर पर उन लोगों और संस्थानों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिन्हें संवेदनशील जानकारियों के साथ काम करना पड़ता है। इनमें स्टार्टअप संस्थापक, वैज्ञानिक, रिसर्चर्स, बड़ी कंपनियां और सरकारी कार्यालय शामिल हैं। गोयल के मुताबिक, इस AI को केवल यूजर को खुश करने के लिए जवाब देने के बजाय तथ्यों के आधार पर उत्तर देने के लिए तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य ऐसा सिस्टम बनाना है, जो यूजर की बातों से सहमत होने के बजाय अपनी समझ के अनुसार जवाब दे। मौजूदा AI ऐप्स की प्राइवेसी पर उठाए सवाल गोयल ने मौजूदा AI प्लेटफॉर्म्स पर डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई सेवाओं में यूजर डेटा सेव न करने का विकल्प चुनने के बाद भी बैकएंड पर जानकारी के प्रबंधन को लेकर स्पष्टता की कमी महसूस हो सकती है। उन्होंने कहा कि आम AI ऐप्स इस्तेमाल करते समय यूजर्स के मन में यह आशंका बनी रह सकती है कि उनकी बातचीत कोई पढ़ सकता है। उनके मुताबिक, इसी तरह का डर और अविश्वास लोगों को AI का पूरी क्षमता से इस्तेमाल करने से रोक सकता है। Dark.ai के जरिए कंपनी इस चिंता को कम करने और यूजर्स को निजी बातचीत के लिए अधिक सुरक्षित माहौल देने की कोशिश कर रही है। इसी साल लॉन्च की तैयारी, कीमत पर फैसला नहीं कंपनी की ओर से ऐप की लॉन्चिंग को लेकर इसी साल की तैयारी का संकेत दिया गया है। हालांकि, इसके काम करने की गति, इस्तेमाल किए जाने वाले AI मॉडल और अन्य तकनीकी विशेषताओं की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐप मुफ्त होगा या इसके लिए सब्सक्रिप्शन लेना पड़ेगा, इस बारे में भी कंपनी ने कोई जानकारी नहीं दी है। इससे होने वाली संभावित कमाई को लेकर भी फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो और क्विक कॉमर्स सेवा ब्लिंकइट के बाद AI सॉफ्टवेयर क्षेत्र में एटरनल का यह संभावित कदम कंपनी के कारोबार के विस्तार की दिशा में अहम हो सकता है।

eMudhra में तकनीकी गड़बड़ी की जांच के लिए IT मंत्रालय ने बनाई स्पेशल टीम, सरकार बोली- भारतीय वेबसाइट्स और ऐप सुरक्षित

डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देने वाली कंपनी ई-मुद्रा (eMudhra) में तकनीकी गड़बड़ी सामने आने के बाद आईटी मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। सरकार के मुताबिक, इस गड़बड़ी का असर कंपनी के विदेशी कारोबार तक सीमित है। भारतीय वेबसाइट्स और ऐप्स की सुरक्षा प्रभावित होने की बात सामने नहीं आई है। सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सावधान रहने की अपील की है। मामले की जांच साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से की जा रही है, ताकि गड़बड़ी की वजह और उसके संभावित प्रभाव का पता लगाया जा सके। eMudhra दो तरह की डिजिटल सुरक्षा सेवाएं देती है ई-मुद्रा का कारोबार मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में फैला है। पहला, भारत में डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाएं देना। दूसरा, विदेशी वेबसाइट्स के लिए डिजिटल सुरक्षा प्रमाणपत्र जारी करना। कंपनी से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, हालिया तकनीकी गड़बड़ी उसके विदेशी कारोबार से संबंधित डिजिटल सर्टिफिकेट्स में सामने आई। भारतीय डिजिटल सिग्नेचर और eSign सेवाओं पर इसका असर होने की जानकारी नहीं दी गई है। सिस्टम की खराबी से बने कमजोर सुरक्षा कोड ई-मुद्रा के मुताबिक, सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण कुछ कमजोर सुरक्षा कोड बन गए थे। एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने इस समस्या के बारे में एप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और मोजिला जैसी बड़ी टेक कंपनियों को अलर्ट किया। चिंता जताई गई कि इन कमजोर कोड का फायदा उठाकर साइबर हमलावर सुरक्षा प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि इन कोड का इस्तेमाल करके वास्तव में कोई हमला हुआ था। गूगल और मोजिला ने प्रभावित सर्टिफिकेट्स पर की कार्रवाई तकनीकी गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद ब्राउजर कंपनियों ने प्रभावित सुरक्षा प्रमाणपत्रों के खिलाफ कदम उठाए। इन कदमों का उद्देश्य प्रभावित प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से जुड़े जोखिम को सीमित करना है। eMudhra का दावा- ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ ई-मुद्रा ने कहा है कि उसका मुख्य सिस्टम सुरक्षित है और किसी ग्राहक का डेटा चोरी नहीं हुआ है। कंपनी के अनुसार, जिस विदेशी कारोबार में गड़बड़ी सामने आई, उससे उसकी कुल कमाई का लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा आता है। कंपनी प्रभावित विदेशी ग्राहकों को नए और सुरक्षित डिजिटल सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में भी जुटी है, ताकि उनकी सेवाएं जारी रह सकें। सरकार ने अफवाहों से बचने की अपील की आईटी मंत्रालय ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है और सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों के आधार पर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार की साइबर सुरक्षा टीम और विशेषज्ञ तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल, गड़बड़ी के वास्तविक दायरे और संभावित प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
Gold

Gold Price Today: सोने के दाम में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.43 लाख पर

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले तीन दिनों में दोनों कीमती धातुओं के भाव में अच्छी-खासी गिरावट आई है। सोना करीब ₹3,000 और चांदी लगभग ₹9,000 तक सस्ती हुई है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने या निवेश की योजना बना रहे लोगों की नजर अब बाजार के अगले रुख पर है। 22 अक्टूबर 2026 के बाजार अपडेट के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.43 लाख और चांदी का भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में कीमतों का अंतर हो सकता है। Gold Rate Today: ₹1.43 लाख पर पहुंचा 10 ग्राम सोना Gold Price में आई गिरावट से खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है। बीते तीन दिनों में भाव करीब ₹3,000 नीचे आने से उन लोगों के लिए खरीदारी का मौका बन सकता है, जो लंबे समय से कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सोना खरीदने से पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर पता कर लें। 24 कैरेट सोने की कीमत और गहने बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के भाव में अंतर होता है। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। Silver Rate Today: चांदी ₹9,000 तक हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। पिछले तीन दिनों में चांदी करीब ₹9,000 तक सस्ती हुई है और इसका भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो के स्तर पर बताया जा रहा है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उन ग्राहकों पर भी पड़ता है, जो त्योहारों पर चांदी के सिक्के, बर्तन या दूसरे सामान खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में चांदी का ताजा भाव और शुद्धता की जानकारी लेना जरूरी है। सोना-चांदी के दाम क्यों गिर रहे हैं? Gold or Silver की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, रुपये की स्थिति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें भी इनके भाव पर असर डालती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कमजोर होती हैं, तो भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, बाजार में आई गिरावट की किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। कीमतों की चाल कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। क्या अभी सोना और चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा गिरावट आपके लिए राहत की बात हो सकती है। लेकिन केवल तीन दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना ठीक नहीं है कि आगे भी भाव लगातार कम होंगे। खरीदारी से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट की तुलना करें। सोने पर हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें तथा बिल में मेकिंग चार्ज और GST का पूरा विवरण देखें। निवेश के लिहाज से भी जल्दबाजी करने के बजाय अपने बजट और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर है। आगे Gold-Silver Price में क्या बदलाव हो सकता है? आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों से जुड़ी खबरें और रुपये की चाल सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भाव में फिर तेजी आने या गिरावट जारी रहने, दोनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, तीन दिनों में सोने और चांदी के दाम में आई गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। अगर आप आज खरीदारी करने जा रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जांच लें, क्योंकि बाजार भाव और ज्वेलरी की अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Amit Shah

Amit Shah Statement: धरने से कुछ नहीं होगा, जनता के बीच जाएं- विपक्ष को शाह की सलाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ धरना-प्रदर्शन करने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। अगर विपक्ष को राजनीति में आगे बढ़ना है, तो उसे जनता के बीच जाकर काम करना होगा। शाह ने कांग्रेस को लेकर दावा किया कि पार्टी अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं लौट पाएगी। उन्होंने अपने बयान में राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी राजनीति और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए। अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच सियासी टकराव जारी है। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है, जबकि भाजपा विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा से जोड़ रही है। Amit Shah Statement: कांग्रेस पर क्यों बरसे गृह मंत्री? अमित शाह ने अपने संबोधन में कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए केवल विरोध प्रदर्शन करना काफी नहीं है। राजनीतिक दलों को जनता की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना चाहिए। शाह के मुताबिक, विपक्ष को अपनी चुनावी हार की वजहों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पार्टी की मौजूदा राजनीति उसे लंबे समय तक सत्ता से दूर रख सकती है। हालांकि, कांग्रेस के अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आने का बयान अमित शाह का राजनीतिक दावा है। इसे किसी निश्चित चुनावी नतीजे के तौर पर नहीं देखा जा सकता। Rahul Gandhi का नाम लिए बिना क्या बोले अमित शाह? अमित शाह ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना विपक्ष के धरने और प्रदर्शनों पर टिप्पणी की। उनके बयान को कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए जा रहे सवालों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। शाह का कहना है कि विपक्ष को जनता के बीच जाकर अपना समर्थन बढ़ाना चाहिए। केवल आरोप लगाने या सड़कों पर उतरने से चुनावी राजनीति में सफलता नहीं मिलती। दूसरी तरफ, कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। पार्टी और INDIA गठबंधन के नेता मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। Vote Chori और SIR पर भाजपा-विपक्ष में टकराव देश की राजनीति में वोट चोरी और SIR यानी Special Intensive Revision का मुद्दा लगातार चर्चा में है। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इन मामलों में स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। वहीं, भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है और विपक्ष पर चुनावी हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाती है। इस विवाद में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की सच्चाई समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, चुनाव आयोग के जवाब और उपलब्ध प्रमाणों को देखना जरूरी है। चुनाव आयोग को लेकर भी जारी है सियासी लड़ाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों का विरोध पहले भी सामने आ चुका है। विपक्ष ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर जवाब मांगा है। वहीं, भाजपा का कहना है कि चुनावी नतीजों को लेकर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय विपक्ष को अपनी रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। इस मुद्दे ने भाजपा और INDIA गठबंधन के बीच राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह विवाद चुनावी भाषणों और विपक्षी अभियानों में भी अहम भूमिका निभा सकता है। Amit Shah ने AAP पर भी साधा निशाना अमित शाह ने अपने संबोधन में आम आदमी पार्टी (AAP) की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विपक्षी दलों को सलाह दी कि वे आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनता के लिए काम करें। दिल्ली की राजनीति में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच लंबे समय से टकराव रहा है। ऐसे में शाह का बयान विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने के साथ-साथ भाजपा के चुनावी संदेश को मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। आगे क्या होगा? कांग्रेस के सामने क्या चुनौती है? अमित शाह के बयान से साफ है कि भाजपा कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। दूसरी ओर, कांग्रेस चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगने की अपनी रणनीति पर कायम है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने रखता है और चुनाव आयोग इन सवालों पर क्या जवाब देता है। साथ ही, यह भी देखना होगा कि इन मुद्दों का आने वाले चुनावों में मतदाताओं पर कितना असर पड़ता है। फिलहाल, अमित शाह का 30 साल वाला बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। लेकिन आखिरकार चुनाव में किसे जनता का समर्थन मिलेगा, इसका फैसला मतदाता ही करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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