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सागर में पारिवारिक विवाद बना खूनी संघर्ष, रिटायर्ड पुलिसकर्मी पर बहू की हत्या का आरोप

सागर के गायत्री नगर में मंगलवार सुबह पारिवारिक विवाद के दौरान एक दर्दनाक घटना सामने आई। 65 वर्षीय रिटायर्ड पुलिसकर्मी पर अपनी 36 वर्षीय बहू सविता दीक्षित की हत्या करने का आरोप है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया और आरोपी ससुर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है। मृतका के पति देवेश दीक्षित सीमा सुरक्षा बल (BSF) में जवान हैं और वर्तमान में पश्चिम बंगाल में पदस्थ हैं। घटना की सूचना उन्हें दे दी गई है। सविता अपने सास-ससुर के साथ गायत्री नगर स्थित घर में रहती थीं। पड़ोसियों की सूचना पर पहुंची पुलिस मकरोनिया थाना प्रभारी नितिन पाल के अनुसार, बहू के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची तो आरोपी घर में ही मौजूद मिला। प्रारंभिक जांच में महिला के शरीर पर 7 से 8 चोटों के निशान मिले हैं। पुलिस और एफएसएल टीम ने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी का दूसरा बेटा पुलिस विभाग में कार्यरत है। आरोपी का दावा- बहू ने पहले किया हमला पूछताछ में आरोपी रामनरेश दीक्षित ने दावा किया कि मंगलवार सुबह बहू ने घर में रखे मंदिर को उठाकर फेंक दिया और कुर्सियों में भी तोड़फोड़ की। इसके बाद वह बड़ी बेटी को स्कूल छोड़ने चली गई। आरोपी के मुताबिक, जब वह नहाकर पूजा कर रहे थे, तभी बहू वापस लौटी और छोटी बच्ची को उठाकर पटकने लगी। उसे बचाने पहुंचे तो बहू ने उन पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे उनके हाथ में चोट आई। उन्होंने दावा किया कि चाकू छीनने के बाद दोनों के बीच मारपीट हुई, जिसमें बहू गंभीर रूप से घायल हो गई और उसकी मौत हो गई। लंबे समय से चल रहा था पारिवारिक विवाद आरोपी का कहना है कि बहू के घर आने के बाद से परिवार में लगातार विवाद होते थे और मोहल्ले के लोग भी इस स्थिति से परिचित थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार पुलिस का कहना है कि महिला की मौत का सटीक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल आरोपी के बयान, घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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जबलपुर: मुंह के छाले की सर्जरी के बाद मुंह के अंदर उगने लगे बाल, मरीज ने डॉक्टर पर लापरवाही का लगाया आरोप

जबलपुर के अधारताल निवासी 55 वर्षीय मुकेश गंभीर ने एक निजी अस्पताल के डॉक्टर पर ऑपरेशन में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि मुंह के अंदर हुए एक छोटे से छाले की सर्जरी के बाद पिछले 19 महीनों से उनके मुंह के भीतर बाल उग रहे हैं, जिससे खाना-पीना और निगलना बेहद मुश्किल हो गया है। गले की त्वचा लगाने का आरोप पीड़ित के अनुसार, जून 2024 में डॉक्टर अर्पण मिश्रा ने उनके मुंह के छाले का ऑपरेशन किया था। आरोप है कि सर्जरी के दौरान डॉक्टर ने गले की त्वचा (स्किन ग्राफ्ट) का इस्तेमाल मुंह के अंदर किया, जिसके कारण वहां लगातार बाल उगने लगे। मुकेश गंभीर का कहना है कि ऑपरेशन से पहले उन्हें इस तरह के संभावित दुष्प्रभाव या जोखिम के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। आयुष्मान योजना के बावजूद नकद राशि लेने का आरोप पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि इलाज का कुछ हिस्सा आयुष्मान भारत योजना के तहत कवर होने के बावजूद अस्पताल ने उनसे 75 हजार रुपये नकद वसूले। उनका कहना है कि ऑपरेशन से कुछ मिनट पहले घबराहट की स्थिति में उनसे और उनके परिजनों से कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, जिनमें यह उल्लेख था कि अस्पताल ने कोई अतिरिक्त राशि नहीं ली है। कई अस्पतालों में कराया इलाज, नहीं मिली राहत मुकेश गंभीर ने बताया कि समस्या बढ़ने पर उन्होंने संबंधित डॉक्टर से संपर्क किया, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने भोपाल, मेमोरियल अस्पताल और होशंगाबाद सहित कई अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन अब तक स्थायी राहत नहीं मिल सकी। प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग लगातार शारीरिक परेशानी और मानसिक तनाव झेल रहे पीड़ित ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, बेहतर इलाज उपलब्ध कराने और यदि लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। नोट: यह खबर पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों और शिकायत पर आधारित है। संबंधित डॉक्टर या अस्पताल की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत पर खंडवा में जश्न, कार्यकर्ताओं ने निकाली रैली और की आतिशबाजी

खंडवा। दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद सोमवार को खंडवा में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उत्साह के साथ जीत का जश्न मनाया। कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य किया, एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी और आतिशबाजी कर खुशी का इजहार किया। जश्न की शुरुआत गांधी भवन से हुई, जहां से कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विजय रैली निकाली। यह रैली केवलराम पेट्रोल पंप चौराहे से होते हुए घंटाघर पहुंची। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने “कांग्रेस जिंदाबाद”, “लोकतंत्र की जीत” और “जनता की जीत” जैसे नारे लगाए। भगवान गणेश का लिया आशीर्वाद रैली के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता सराफा स्थित भगवान श्री गणेश मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और कांग्रेस की निरंतर सफलता की कामना की। मंदिर में दर्शन के बाद कार्यकर्ता दोबारा चौराहे पर पहुंचे, जहां देर तक ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न और आतिशबाजी का सिलसिला चलता रहा। कांग्रेस ने जीत को बताया लोकतंत्र की विजय कांग्रेस शहर अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी ने कहा कि दतिया उपचुनाव का परिणाम प्रदेश की जनता के कांग्रेस की नीतियों, जनहित के मुद्दों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास को दर्शाता है। उनके अनुसार, यह केवल एक विधानसभा सीट की जीत नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता की भावनाओं की जीत है। उन्होंने कहा कि इस सफलता से आगामी चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं में नया उत्साह और ऊर्जा का संचार हुआ है। सिंगोट गांव में कई लोगों ने थामा कांग्रेस का दामन दतिया उपचुनाव के नतीजों का असर खंडवा जिले के पंधाना विधानसभा क्षेत्र में भी देखने को मिला। ग्राम सिंगोट में करीब 20 से 25 लोगों ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। जिला कांग्रेस अध्यक्ष (ग्रामीण) उत्तमपाल सिंह पुरनी ने नए सदस्यों को कांग्रेस का गमछा पहनाकर पार्टी में शामिल कराया। कांग्रेस नेताओं ने इसे संगठन के विस्तार और पार्टी के प्रति बढ़ते जनसमर्थन का संकेत बताया। मध्य प्रदेश और देश की ताजा राजनीतिक खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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ग्वालियर में 15 वर्षीय किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म का आरोप, शादी का प्रस्ताव ठुकराने के बाद वारदात की आशंका

ग्वालियर के बहोड़ापुर थाना क्षेत्र में 15 वर्षीय किशोरी के कथित अपहरण और दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, रिश्तेदारी का एक युवक बातचीत के बहाने किशोरी को कार में बैठाकर ले गया और होटल में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी गई है। दवा लेने गई थी किशोरी पुलिस के मुताबिक, शंकरपुर निवासी 15 वर्षीय किशोरी 25 जुलाई की शाम तबीयत खराब होने पर किशनबाग स्थित मेडिकल स्टोर दवा लेने गई थी। इसी दौरान उसका दूर का रिश्तेदार साहिद अहमद ऑल्टो कार लेकर वहां पहुंचा। आरोप है कि युवक ने बातचीत के बहाने किशोरी को कार में बैठाया। जब उसने जाने से इनकार किया, तो आरोपी ने धमकाकर उसे जबरन अपने साथ ले गया। होटल ले जाकर दुष्कर्म का आरोप शिकायत के अनुसार, आरोपी किशोरी को पुरानी छावनी क्षेत्र के एक होटल में ले गया, जहां कथित तौर पर जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद आरोपी किशोरी को वापस किशनबाग के पास छोड़कर फरार हो गया। छह दिन बाद परिजनों को बताई आपबीती पीड़िता आरोपी की धमकियों से डरी हुई थी, इसलिए उसने कई दिनों तक किसी को घटना की जानकारी नहीं दी। बाद में उसने अपनी मां और मौसी को पूरी बात बताई। इसके बाद परिजन उसे बहोड़ापुर थाने लेकर पहुंचे, जहां शिकायत दर्ज कराई गई। पहले आया था शादी का प्रस्ताव पुलिस जांच में सामने आया है कि कुछ समय पहले आरोपी के परिवार ने किशोरी के लिए शादी का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि, किशोरी के नाबालिग होने के कारण उसके परिजनों ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया था। पुलिस इस पहलू को भी जांच में शामिल कर रही है। आरोपी की तलाश जारी बहोड़ापुर थाना प्रभारी आलोक परिहार ने बताया कि पीड़िता की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। नोट: यह मामला पुलिस में दर्ज शिकायत पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के बाद होगी। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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मध्य प्रदेश में कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ सस्ता, भोपाल में 194 रुपए तक घटे दाम; होटल-रेस्टोरेंट कारोबार को राहत

देशभर में शनिवार से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के नए रेट लागू हो गए हैं। मध्य प्रदेश में इसकी कीमत में 190 से 194 रुपए तक की कमी की गई है। राजधानी भोपाल में अब 19 किलो का कमर्शियल गैस सिलेंडर 2,743 रुपए में मिलेगा। नई दरों से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। होटल और रेस्टोरेंट कारोबार को मिलेगा फायदा होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल गैस सिलेंडर लगातार महंगा होने से संचालन लागत बढ़ गई थी। इसके चलते कई जगह खाने और कैटरिंग सेवाओं के दाम 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ाने पड़े थे। अब गैस सस्ती होने से आने वाले समय में ग्राहकों को भी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। तीन महीने पहले रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचे थे दाम व्यापारियों के मुताबिक, ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में तेज उछाल आया था। कई शहरों में इसकी कीमत 3,300 रुपए से अधिक पहुंच गई थी। जबकि इससे पहले 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 1,800 से 2,000 रुपए के बीच थी। रीवा में सबसे महंगा, शाजापुर में सबसे सस्ता सिलेंडर नई कीमतों के अनुसार प्रदेश में सबसे महंगा कमर्शियल सिलेंडर रीवा में 2,991.50 रुपए का मिलेगा। अन्य प्रमुख शहरों के रेट इस प्रकार हैं: कैटरिंग कारोबार पर पड़ा था असर कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि गैस महंगी होने के कारण बड़े आयोजनों की लागत में भारी बढ़ोतरी हुई थी। करीब 500 लोगों के भोजन आयोजन में 45 से 50 हजार रुपए तक अतिरिक्त खर्च आ रहा था। इसी वजह से कई कैटरर्स ने प्रति प्लेट कीमतें बढ़ा दी थीं। अब कमर्शियल LPG सिलेंडर सस्ता होने से कारोबारियों को राहत मिलने के साथ-साथ आने वाले दिनों में ग्राहकों को भी कुछ हद तक कम कीमतों का फायदा मिल सकता है। अधिक बिजनेस और मध्य प्रदेश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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Bhojshala

Bhojshala Update: कमाल मौला मस्जिद के पास बढ़ी निगरानी, धार में प्रशासन ने संभाला मोर्चा

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला (Bhojshala) परिसर में एक बार फिर गतिविधियां बढ़ गई हैं। कमाल मौला मस्जिद से सटे क्षेत्र में नमाजियों के पहुंचने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। मौके पर बैरिकेडिंग की गई है, तिरपाल बिछाई गई है और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। प्रशासन की ओर से पूरे क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी तरह की स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से संभाला जा सके। संवेदनशीलता को देखते हुए आसपास के इलाकों में सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए गए हैं। Bhojshala परिसर में प्रशासन का विशेष ध्यान धार की भोजशाला को लेकर लंबे समय से धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद जुड़ा हुआ है। इसी कारण यहां होने वाली हर गतिविधि पर प्रशासन की नजर रहती है। नमाज के समय किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस बल को अलर्ट मोड पर रखा गया है। मौके पर लगाए गए बैरिकेड लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए लगाए गए हैं। वहीं, तिरपाल की व्यवस्था भी की गई है ताकि आने वाले लोगों को सुविधा मिल सके और व्यवस्था बनी रहे। क्या है Bhojshala विवाद? धार की भोजशाला एक प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल है, जिसे लेकर हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे हैं। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष यहां कमाल मौला मस्जिद में नमाज की परंपरा का दावा करता है। इस विवाद को लेकर कई वर्षों से कानूनी प्रक्रिया चल रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा भी भोजशाला परिसर का सर्वे कराया जा चुका है, जिसके बाद यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। Police Deployment से लेकर Monitoring तक, प्रशासन सतर्क मौजूदा हालात को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। पुलिसकर्मी क्षेत्र में तैनात हैं और आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उसकी पहली प्राथमिकता है। सोशल मीडिया पर भी नजर प्रशासन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली अफवाहों पर भी नजर रख रहा है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि बिना पुष्टि किए किसी भी तरह की जानकारी साझा न करें, जिससे माहौल खराब हो सकता है। फिलहाल भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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नर्मदापुरम में 28 करोड़ की सरकारी मूंग घोटाला: मिट्टी से भरी मिलीं बोरियां, जिला प्रबंधक समेत 3 पर FIR

मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में सरकारी मूंग के भंडारण में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच में सरकारी मूंग की बोरियों में मिट्टी और अन्य बाहरी पदार्थ मिलाए जाने का मामला सामने आने के बाद वेयरहाउस कॉर्पोरेशन के जिला प्रबंधक सहित तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में शासन को करीब 28.14 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। जांच में मिट्टी से भरी मिलीं बोरियां माखननगर स्थित कनकधारा वेयरहाउस में रखी सरकारी मूंग की शिकायत मिलने पर कलेक्टर सोमेश मिश्रा के निर्देश पर 22 जुलाई को गठित जांच दल ने औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान वेयरहाउस में रखे 23 स्टैक में गंभीर अनियमितताएं मिलीं। कई बोरियों में निर्धारित सीमा से अधिक मिट्टी और अन्य बाहरी पदार्थ पाए गए, जबकि कुछ बोरियां पूरी तरह मिट्टी से भरी हुई थीं। मामला सामने आने के बाद वेयरहाउस को सील कर दिया गया और स्टॉक के नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए। 31 हजार क्विंटल से अधिक सरकारी मूंग प्रभावित जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान मार्कफेड और नाफेड की करीब 31,298.89 क्विंटल सरकारी मूंग में मिलावट की गई। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इससे शासन को लगभग 28.14 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। जिला प्रबंधक समेत तीन लोगों पर FIR जांच रिपोर्ट के आधार पर कनकधारा वेयरहाउस के संचालक तारेश पुरोहित, तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्याम होसले और वेयरहाउस कॉर्पोरेशन के जिला प्रबंधक वासुदेव डवडे को लापरवाही और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का जिम्मेदार माना गया है। जिला विपणन अधिकारी अनिल जैन की शिकायत पर माखननगर थाने में तीनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पहले भी ब्लैकलिस्ट हो चुका था वेयरहाउस जांच में यह भी सामने आया कि जिस कनकधारा वेयरहाउस में यह गड़बड़ी मिली, उसे लगभग एक वर्ष पहले भी अनियमितताओं के कारण ब्लैकलिस्ट किया गया था। उस समय जांच समिति में जिला प्रबंधक वासुदेव डवडे भी शामिल थे। इसके बावजूद दोबारा सरकारी मूंग के भंडारण में गंभीर गड़बड़ी सामने आने से निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। अन्य वेयरहाउसों की भी होगी जांच एसडीएम देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिले के अन्य वेयरहाउसों का भी चरणबद्ध तरीके से निरीक्षण और जांच की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोका जा सके। आरोपी वेयरहाउस संचालक अस्पताल में भर्ती एफआईआर में नामजद वेयरहाउस संचालक तारेश पुरोहित फिलहाल एक निजी हार्ट केयर अस्पताल में भर्ती हैं। जानकारी के अनुसार वे पिछले तीन दिनों से उपचाराधीन हैं। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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MP में बिल्डिंग परमिशन के नियम आसान: अब नहीं देनी होगी कई NOC, पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

मध्यप्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण की अनुमति (Building Permission) की प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब बिल्डिंग परमिशन के लिए विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लाने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। साथ ही पूरी भवन अनुज्ञा प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और आवेदन के लिए केवल डिजिटल दस्तावेज ही मान्य होंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा सभी नगरीय निकायों को जारी निर्देशों के अनुसार, इस व्यवस्था से नागरिकों, निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे भवन अनुमति प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनेगी, जिससे प्रदेश में Ease of Doing Business को भी बढ़ावा मिलेगा। पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन नई व्यवस्था के तहत भवन अनुज्ञा के लिए आवेदन, भवन का नक्शा और अन्य आवश्यक दस्तावेज केवल ऑनलाइन जमा किए जाएंगे। किसी भी स्थिति में हार्ड कॉपी जमा करने की जरूरत नहीं होगी। यदि भूमि स्वामी स्वयं आवेदन करता है तो उसे ऑनलाइन शपथ-पत्र देना होगा। वहीं, अधिकृत कंसल्टेंट के माध्यम से आवेदन करने पर भूमि स्वामी के हस्ताक्षरित शपथ-पत्र की डिजिटल कॉपी अपलोड करनी होगी। इन मामलों में ही लगेगी NOC की जरूरत सरकार ने स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) और हेरिटेज क्षेत्रों से संबंधित NOC केवल उन्हीं मामलों में आवश्यक होगी, जहां ऑनलाइन GIS आधारित जांच में संबंधित भूखंड प्रतिबंधित या प्रभावित क्षेत्र में पाया जाएगा। अन्य सभी मामलों में इन विभागों की अनापत्ति की जरूरत नहीं होगी। हाउसिंग सोसायटी, बिजली और नजूल विभाग से भी राहत नए निर्देशों के तहत सहकारिता विभाग, गृह निर्माण सहकारी समितियों, बिजली विभाग और नजूल विभाग से मांगी जाने वाली कई अनापत्ति प्रमाण-पत्रों की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में आवेदकों को स्वयं NOC लाने की जरूरत नहीं होगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित सक्षम प्राधिकारी आवेदन मिलने के सात दिनों के भीतर संबंधित विभाग को प्रकरण भेजेगा और विभाग को 21 दिनों के भीतर अपनी सहमति या आपत्ति दर्ज करनी होगी। तय समय में जवाब नहीं मिलने पर आगे की प्रक्रिया जारी रखी जाएगी। पर्यावरण और फायर NOC के नियम भी हुए आसान नए निर्देशों के अनुसार पर्यावरणीय स्वीकृति अब केवल निर्धारित क्षेत्रफल से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए ही आवश्यक होगी। इसी तरह वृक्ष कटाई की अनुमति केवल उन्हीं मामलों में ली जाएगी, जहां वास्तव में पेड़ों की कटाई प्रस्तावित होगी। अग्निशमन विभाग (Fire NOC) से संबंधित प्रक्रिया भी राष्ट्रीय भवन संहिता (National Building Code) के प्रावधानों के अनुरूप लागू की जाएगी, जिससे भवन निर्माण अनुमति प्रक्रिया और अधिक सरल एवं पारदर्शी बनेगी। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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जैन संत मुनिश्री सुधासागर महाराज के चातुर्मास में आस्था का अद्भुत संगम, कलश स्थापना की बोली पहुंची 53 करोड़ रुपये

जैन संत मुनिश्री सुधासागर महाराज के चातुर्मास को लेकर देशभर के श्रद्धालुओं में गहरा उत्साह और आस्था देखने को मिली। चातुर्मास के शुभ अवसर पर आयोजित कलश स्थापना की बोली में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी श्रद्धा का अनूठा परिचय दिया। कलश स्थापना का लाभ प्राप्त करने के लिए आयोजित बोली ने नया इतिहास रच दिया। बोली की राशि बढ़ते-बढ़ते 53 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जिसे जैन समाज में गुरु भक्ति, समर्पण और धार्मिक आस्था का अभूतपूर्व उदाहरण माना जा रहा है। बोली के दौरान लगातार बढ़ती राशि ने आयोजन स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं को भी आश्चर्यचकित कर दिया। धार्मिक आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि यह केवल आर्थिक बोली नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, गुरु के प्रति समर्पण और धर्म के प्रति विश्वास का प्रतीक है। चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रवचन, पूजा-अर्चना, तप, स्वाध्याय तथा विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। जैन धर्म में चातुर्मास को सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पर्वों में से एक माना जाता है। इस अवधि में श्रद्धालु धर्म साधना, सेवा, तप और धार्मिक अनुष्ठानों में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। मुनिश्री सुधासागर महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस वर्ष के चातुर्मास में भी देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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गुना के जंगल में तेंदुए का क्षत-विक्षत शव मिलने से सनसनी, शिकार कर अंगों की तस्करी की आशंका

मध्य प्रदेश के गुना जिले में एक तेंदुए का क्षत-विक्षत शव मिलने से वन विभाग और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। शव की हालत देखकर शिकार कर उसके अंगों की तस्करी किए जाने की आशंका जताई जा रही है। मामला गुना उत्तर वन परिक्षेत्र की भदौरा सब रेंज के आगरा-हंसली जंगल का है। गुरुवार को जंगल में पहुंचे ग्रामीणों ने तेंदुए का शव पड़ा देखा और इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। वन अधिकारियों के अनुसार, तेंदुए का शव बेहद क्षत-विक्षत अवस्था में मिला। उसके चारों पैर और सिर गायब थे, जबकि केवल धड़ मौके पर पड़ा मिला। धड़ की खाल भी नहीं थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर मौत के कारणों का पता लगाया जाएगा। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि तेंदुए का शिकार उसके नाखून, दांत और अन्य अंगों की तस्करी के उद्देश्य से किया गया है। घटना के बाद क्षेत्र में वन्यजीव तस्करों की सक्रियता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह सामान्य मौत नहीं बल्कि सुनियोजित शिकार का मामला प्रतीत होता है। उन्होंने वन विभाग की गश्त व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए मांग की है कि यह पता लगाया जाए कि घटना के समय बीट गार्ड और गश्ती दल कहां मौजूद थे तथा तेंदुए के शव को इस हालत में किसने पहुंचाया। मामले की जानकारी मिलने पर गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने वन विभाग को तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर जांच करने के निर्देश दिए हैं। वन विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और दोषियों की तलाश की जा रही है। गौरतलब है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत तेंदुए का शिकार एक गंभीर गैर-जमानती अपराध है। दोषी पाए जाने पर सात वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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