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IMD Weather Update: 14 राज्यों में भारी बारिश का Red Alert, Delhi-NCR में तेज हवाएं बढ़ाएंगी परेशानी

देशभर में मानसून अब पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है और कई राज्यों में इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा और तेलंगाना समेत 14 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 48 घंटों के दौरान कई इलाकों में बारिश का दौर तेज हो सकता है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन कुछ क्षेत्रों में जलभराव और यातायात संबंधी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं। बिहार, बंगाल और झारखंड में बारिश को लेकर विशेष चेतावनी पूर्वी भारत के राज्यों बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड में मौसम विभाग ने भारी बारिश के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की आशंका जताई है। कई जिलों में प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने और मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है। खेती-किसानी से जुड़े लोगों के लिए यह बारिश राहत लेकर आ सकती है, लेकिन लगातार बारिश होने पर फसलों को नुकसान का खतरा भी बना रहेगा। Delhi-NCR में बदलेगा मौसम का मिजाज राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक मौसम सुहावना रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है और हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने, ट्रैफिक प्रभावित होने और बिजली आपूर्ति में बाधा जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में लोगों को अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है। महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में भी बारिश का जोर पश्चिमी तट के राज्यों महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक में मानसून पूरी ताकत के साथ सक्रिय है। कई इलाकों में लगातार बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने कुछ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों को भी मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है, क्योंकि पहाड़ी और तटीय इलाकों में मौसम अचानक बदल सकता है। मानसून की रफ्तार हुई तेज दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश के अधिकांश हिस्सों को कवर कर चुका है। इसके चलते मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ गई हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई की शुरुआत में मानसून और मजबूत हो सकता है, जिससे देश के कई राज्यों में अच्छी बारिश देखने को मिलेगी। लोगों के लिए जरूरी सावधानियां गर्मी से राहत, लेकिन सतर्कता भी जरूरी लगातार बढ़ती गर्मी और उमस के बीच मानसून की यह बारिश लोगों के लिए राहत लेकर आई है। हालांकि, भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण कुछ इलाकों में जनजीवन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेना और जरूरी सावधानियां बरतना बेहद आवश्यक है। आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है, जिससे मौसम सुहावना रहेगा, लेकिन लोगों को सतर्क रहने की जरूरत भी बनी रहेगी।
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लखनऊ अग्निकांड के बाद इंदौर में बड़ा एक्शन, 10 कोचिंग सेंटर और भवन सील; फायर सेफ्टी में मिली गंभीर लापरवाही

लखनऊ कोचिंग सेंटर अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद इंदौर प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। शहर में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी करने वाले करीब 10 कोचिंग सेंटर और व्यावसायिक भवनों को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया है। लखनऊ हादसे में मध्य प्रदेश के अनूपपुर निवासी 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर जयनील चक्रवर्ती की मौत के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्थाओं की व्यापक जांच शुरू की है। कैटालाइजर कोचिंग में मिला बंद इमरजेंसी एग्जिट इंदौर प्रशासन, नगर निगम और फायर विभाग की संयुक्त टीम ने मंगलवार को कई कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान गीता भवन स्थित कैटालाइजर कोचिंग सेंटर में गंभीर सुरक्षा खामियां सामने आईं। अधिकारियों ने पाया कि भवन का इमरजेंसी एग्जिट बंद था। प्रशासन का कहना है कि आग या किसी अन्य आपदा की स्थिति में यह छात्रों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता था। इसी कारण संस्थान को तत्काल सील कर दिया गया। 10 भवनों पर कार्रवाई फायर सेफ्टी मानकों का पालन नहीं करने वाले 10 संस्थानों और भवनों पर कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने उन भवनों को प्राथमिकता से सील किया, जहां अग्निशमन और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था बेहद कमजोर पाई गई। वेदा बिजनेस पार्क से अपोलो आर्केड तक जांच विशेष अभियान के तहत वेदा बिजनेस पार्क, अपोलो एवेन्यू, अपोलो आर्केड और भंवरकुआं क्षेत्र के कई व्यावसायिक परिसरों की भी जांच की गई। अधिकारियों ने भवनों में मौजूद फायर सिस्टम, आपातकालीन निकास मार्ग और सुरक्षा उपकरणों की स्थिति का निरीक्षण किया। कई जगह खराब मिले फायर सिस्टम जांच के दौरान कई इमारतों में फायर सेफ्टी सिस्टम खराब या मानकों के अनुरूप नहीं मिले। कुछ भवनों में लंबे समय से अग्निशमन उपकरणों का रखरखाव भी नहीं किया गया था। प्रशासन ने संबंधित संचालकों को नोटिस जारी कर तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं। बहुमंजिला इमारतों में मिला बड़ा खतरा निरीक्षण के दौरान कई बहुमंजिला भवनों में इमरजेंसी एग्जिट बंद या बाधित पाए गए। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में ऐसे रास्तों का खुला और सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है। निकासी मार्ग बंद होने से जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। ‘ऑपरेशन कोचिंग’ के तहत जारी रहेगी जांच भंवरकुआं और गीता भवन क्षेत्र में यह अभियान एसडीएम घनश्याम धनगर के नेतृत्व में चलाया गया। प्रशासन ने बताया कि छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए ‘ऑपरेशन कोचिंग’ अभियान लगातार जारी रहेगा। रेस्टोरेंट और कार्यालय भी आए कार्रवाई की जद में अधिकारियों के अनुसार जिन भवनों में कोचिंग संस्थानों के साथ अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं और वहां फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं, उन पर भी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कुछ रेस्टोरेंट, म्यूजियम और कार्यालय भी सील किए गए हैं। सुरक्षा इंतजाम पूरे करने पर खुलेगी सील एसडीएम घनश्याम धनगर ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई का उद्देश्य संस्थानों को स्थायी रूप से बंद करना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है। भवन संचालकों को शपथपत्र देना होगा कि वे 15 से 20 दिनों के भीतर आवश्यक फायर सेफ्टी उपकरण और सुरक्षा व्यवस्थाएं स्थापित कर देंगे। इसके साथ ही उपकरणों की खरीद और स्थापना से जुड़े दस्तावेज भी प्रशासन को सौंपने होंगे। सभी मानकों के पालन के बाद ही सील किए गए भवनों को दोबारा खोलने की अनुमति दी जाएगी। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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Monsoon

Monsoon Update: यूपी में आंधी-बारिश का कहर, पंजाब में 2 की मौत, Mumbai में 24 घंटे में दस्तक देगा मानसून

देशभर में Monsoon तेजी से करवट बदल रहा है। उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक तेज आंधी, बारिश और गरज-चमक ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई शहरों में तेज हवाओं के कारण पेड़ और बिजली के पोल उखड़ गए, जबकि कुछ जगहों पर पेड़ कारों के ऊपर गिर गए। पंजाब में खराब मौसम के बीच हुए हादसे में दो लोगों की जान चली गई। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राहत भरी खबर देते हुए कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले 24 घंटे के भीतर मुंबई पहुंच सकता है। यूपी में आंधी और बारिश से जनजीवन प्रभावित उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सोमवार देर शाम और रात के दौरान तेज आंधी के साथ बारिश हुई। तेज हवाओं ने कई इलाकों में तबाही मचाई। सड़कों पर बड़े-बड़े पेड़ गिरने से यातायात बाधित हो गया, जबकि कई बिजली के पोल भी गिर गए, जिससे घंटों तक बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। कुछ स्थानों पर खड़ी कारों के ऊपर पेड़ गिरने से वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। राहत की बात यह रही कि अधिकांश घटनाओं में बड़ा जनहानि का मामला सामने नहीं आया। नगर निगम और बिजली विभाग की टीमें पूरी रात रास्ते साफ करने और बिजली बहाल करने में जुटी रहीं। मध्य प्रदेश में आकाशीय बिजली का खतरा मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भी मौसम ने अचानक करवट ली। गरज-चमक के साथ बारिश होने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन इसके साथ ही आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, खेत, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। कई जिलों में अगले 48 घंटे तक बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। पंजाब में दर्दनाक हादसा, पेड़ गिरने से दो लोगों की मौत पंजाब में तेज आंधी के दौरान बड़ा हादसा हुआ। तेज हवाओं के कारण एक विशाल पेड़ गिर गया, जिसकी चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। राज्य के कई इलाकों में पेड़ उखड़ने और बिजली के खंभे गिरने की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे सामान्य जनजीवन कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। हरियाणा और राजस्थान में भी बदला मौसम हरियाणा के कई जिलों में तेज हवाओं के कारण बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई। कई जगह बिजली के पोल और पेड़ गिरने की खबरें मिली हैं। वहीं राजस्थान के कुछ हिस्सों में धूलभरी आंधी के बाद हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ और सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण उत्तर-पश्चिम भारत के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक ऐसा ही मौसम बना रह सकता है। 24 घंटे में मुंबई पहुंचेगा मानसून भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो अगले 24 घंटे के भीतर मानसून मुंबई में दस्तक दे सकता है। मानसून के मुंबई पहुंचने के बाद महाराष्ट्र के कई हिस्सों में व्यापक बारिश होने की संभावना है। इसका असर गुजरात, मध्य भारत और उत्तर भारत के कुछ इलाकों में भी देखने को मिल सकता है। IMD ने जारी की अहम सलाह मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतें। एक ओर जहां बारिश ने भीषण गर्मी से राहत दी है, वहीं तेज आंधी और आकाशीय बिजली ने कई इलाकों में परेशानी भी बढ़ा दी है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य जारी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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21 दिन से नहीं मिला जीवनरक्षक इंजेक्शन, बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा पिता; जिला अस्पताल के सामने लगाया जाम

सीहोर में एक पिता की बेबसी उस वक्त सड़क पर उतर आई, जब हीमोफीलिया से पीड़ित उसके दो बच्चों को पिछले 21 दिनों से जीवनरक्षक इंजेक्शन नहीं मिल पाया। बच्चों की बिगड़ती हालत से परेशान पिता ने परिवार सहित जिला अस्पताल के सामने चक्काजाम कर प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। आष्टा तहसील के ग्राम गुराडिया रूपचन्द्र निवासी श्रवण कुमार मेवाड़ा के दो बच्चे हीमोफीलिया जैसी गंभीर अनुवांशिक बीमारी से पीड़ित हैं। इस बीमारी में चोट लगने या रक्तस्राव होने पर खून का थक्का नहीं जमता, जिससे मरीज की जान तक खतरे में पड़ सकती है। इलाज के लिए नियमित रूप से फैक्टर VIII (Factor VIII) इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। 21 दिनों से अस्पताल में नहीं है इंजेक्शन परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने बच्चों के लिए फैक्टर VIII इंजेक्शन लिख रखा है, लेकिन जिला अस्पताल के मुख्य दवा स्टोर में पिछले 21 दिनों से यह दवा उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, भोपाल में भी सरकारी स्तर पर यह इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। आर्थिक तंगी बनी मजबूरी श्रवण कुमार ने बताया कि वे बेरोजगार हैं और उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि निजी मेडिकल स्टोर से महंगा इंजेक्शन खरीद सकें। उन्होंने 19 जून को कलेक्टर को आवेदन देकर मदद की मांग भी की थी। पिता का कहना है कि यदि मध्य प्रदेश में दवा उपलब्ध नहीं है तो प्रशासन उन्हें बच्चों के इलाज के लिए मुंबई जाने हेतु कम से कम 15 दिनों की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए। बच्चों की जान बचाने सड़क पर बैठा परिवार जब लगातार शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला तो परेशान पिता अपने परिवार के साथ जिला चिकित्सालय के सामने सड़क पर बैठ गए। देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हो गया। बच्चों की जान बचाने की गुहार लगाते इस परिवार को देखकर मौके पर मौजूद लोग भी भावुक हो गए। सिविल सर्जन ने दिया आश्वासन चक्काजाम और हंगामे की सूचना मिलते ही जिला अस्पताल के सिविल सर्जन मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिवार से बातचीत कर उनकी समस्या सुनी और जल्द से जल्द फैक्टर VIII इंजेक्शन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कराने के प्रयास किए गए। व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता और गरीब मरीजों को समय पर इलाज मिलने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते दवा उपलब्ध करा दी जाती, तो एक परिवार को सड़क पर उतरकर अपनी पीड़ा जाहिर करने की नौबत नहीं आती। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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कैलाश विजयवर्गीय बोले- ‘अगर हम काफिर हैं तो हमारी बनाई सड़क पर मत चलो’, बयान पर छिड़ी चर्चा

इंदौर में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान दिया गया बयान चर्चा का विषय बन गया है। मंत्री ने मंच से कहा कि उनकी सरकार बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों के लिए काम करती है, लेकिन कुछ लोग उन्हें “काफिर” कहते हैं। वार्ड क्रमांक-1 में आयोजित विकास कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रम में संबोधित करते हुए विजयवर्गीय ने कहा, “यहां हिंदू भाई भी रहते हैं और मुस्लिम भाई भी रहते हैं। कई मुस्लिम भाई हमें काफिर बोलते हैं। अगर हम काफिर हैं, तो हमने सड़क बनाई है, उस पर मत चलो। यदि हम काफिर हैं और आपके घर में लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजना का पैसा आ रहा है, तो वह भी मत लो।” ‘सबका साथ, सबका विकास’ हमारी नीति मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा सरकार ने कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” रही है। उन्होंने कहा, “आप हमें वोट दें या न दें, हमारा काम जनता की सेवा करना है। वोट देंगे तो और अधिक उत्साह से काम करेंगे, नहीं देंगे तब भी जनता के लिए काम करना बंद नहीं करेंगे।” 2.39 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन रविवार को विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1 में आयोजित दो दिवसीय विकास कार्यक्रम के दूसरे दिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने वार्ड क्रमांक-1 और 5 में करीब 2 करोड़ 39 लाख 80 हजार रुपए की लागत वाले 10 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता होना और जनप्रतिनिधि बनकर जनता की सेवा करना उनके जीवन का सौभाग्य है। बयान पर शुरू हुई राजनीतिक चर्चा मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में विकास कार्यों की शुरुआत था, लेकिन उनके बयान ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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खेत में मोटर चालू करने गया किसान करंट की चपेट में आया, दर्दनाक मौत से गांव में मातम

गुना जिले के धरनावदा थाना क्षेत्र के ग्राम खेजराबाबा में एक दर्दनाक हादसे में किसान की करंट लगने से मौत हो गई। किसान रात में खेत पर सिंचाई के लिए मोटर चालू करने गया था, लेकिन बिजली के तार की चपेट में आने से उसकी जान चली गई। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। जानकारी के अनुसार 35 वर्षीय बनवारी सहरिया बुधवार रात अपने खेत में बने कुएं पर मोटर चालू करने गया था। इसी दौरान वह बिजली के तार की चपेट में आ गया। करंट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई और रातभर उसका शव खेत में ही पड़ा रहा। सुबह परिजनों को लगी घटना की जानकारी गुरुवार सुबह जब परिजन खेत पहुंचे तो उन्होंने बनवारी को जमीन पर अचेत अवस्था में पड़ा देखा। परिजनों ने तुरंत बिजली की डोरी हटाई और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले गए, लेकिन वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार का सहारा था बनवारी बताया जा रहा है कि बनवारी सहरिया खेती-किसानी के साथ ऑटो चलाकर भी परिवार का पालन-पोषण करता था। उसके परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं। अचानक हुई इस घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने शुरू की जांच घटना की सूचना मिलने पर धरनावदा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में बिजली व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को लेकर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके। अधिक खबरों और ताजा अपडेट्स के लिए पढ़ते रहें www.deshharpal.com
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NEET

MP NEET Re-Exam Controversy: 30 Seconds Late Entry से छूटी परीक्षा, गेट पर रोते रहे छात्र

मध्य प्रदेश में NEET री-एग्जाम के दौरान सामने आई एक घटना ने पूरे परीक्षा सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिर्फ 30 सेकंड की देरी की वजह से कई छात्रों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिला और उनकी परीक्षा छूट गई। गेट के बाहर घंटों तक रोते-बिलखते छात्र और परेशान परिजन प्रशासन से गुहार लगाते रहे, लेकिन नियमों के आगे किसी की एक नहीं चली। Madhya Pradesh के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर यह मामला सामने आने के बाद माहौल काफी तनावपूर्ण और भावुक हो गया। 30 सेकंड की देरी बनी जिंदगी का बड़ा झटका रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ छात्र परीक्षा केंद्र पर तय समय से बेहद मामूली—सिर्फ 30 सेकंड—देरी से पहुंचे थे। लेकिन गेट पहले ही बंद कर दिया गया था। नियमों के अनुसार, एक बार प्रवेश बंद होने के बाद किसी भी अभ्यर्थी को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इस सख्ती के चलते कई छात्रों को बिना परीक्षा दिए ही लौटना पड़ा, जिससे उनका भविष्य और मानसिक स्थिति दोनों पर गहरा असर पड़ा है। गेट के बाहर दर्दनाक दृश्य, परिजनों की आखिरी कोशिश परीक्षा केंद्रों के बाहर जो दृश्य देखने को मिला, वह बेहद भावुक कर देने वाला था। छात्र गेट के सामने हाथ जोड़कर अंदर जाने की गुहार लगाते रहे। कई परिजन सुरक्षा कर्मियों और अधिकारियों से आखिरी उम्मीद के साथ अनुरोध करते रहे। लेकिन परीक्षा नियमों की सख्ती के चलते किसी को भी अंदर प्रवेश नहीं मिला। नंगे पैर परीक्षा और धार्मिक प्रतीकों पर विवाद कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि सुरक्षा जांच के दौरान उन्हें जूते-चप्पल उतारकर नंगे पैर परीक्षा हॉल में जाना पड़ा। वहीं कुछ मामलों में कलावा हटवाने जैसी बातें भी सामने आईं, जिससे अभ्यर्थियों में नाराजगी और बढ़ गई। इन घटनाओं ने परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सख्त नियम या मानवीय दृष्टिकोण? शुरू हुई बहस इस घटना के बाद एक नई बहस तेज हो गई है कि क्या राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में इतनी सख्ती जरूरी है या फिर कुछ मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। प्रशासन का कहना है कि NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त नियम अनिवार्य हैं। वहीं दूसरी ओर, अभिभावकों का कहना है कि इतनी छोटी सी देरी पर छात्रों का भविष्य दांव पर लगना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर भी उठा तूफान यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। कई लोगों ने छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई है और नियमों में थोड़ी लचीलापन की मांग की है। वहीं कुछ लोग इसे परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Murmu

MP Breaking: Jabalpur में राष्ट्रपति Murmu का दौरा, Yoga Event और Convocation में शामिल

मध्य प्रदेश के जबलपुर में आज एक बेहद खास और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब राष्ट्रपति Droupadi Murmu अपने एक दिवसीय दौरे पर शहर पहुंचीं। उनका यह दौरा सिर्फ औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें योग, शिक्षा और सामाजिक संदेशों का मजबूत समावेश देखने को मिला। योग कार्यक्रम में दिखा उत्साह और एकता जबलपुर में आयोजित योग कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मु ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ हिस्सा लिया। खुले वातावरण में हुए इस कार्यक्रम में लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास किया और पूरे माहौल में सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिली। राष्ट्रपति ने योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की और कहा कि यह शरीर के साथ-साथ मन को भी संतुलित और शांत रखता है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए यह क्षण बेहद खास रहा, जब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठी राष्ट्रपति ने खुद योग कर एक मजबूत संदेश दिया कि स्वास्थ्य ही असली संपत्ति है। RDVV दीक्षांत समारोह में छात्रों को मिला प्रेरणादायक संदेश इसके बाद राष्ट्रपति मुर्मु ने Rani Durgavati Vishwavidyalaya के दीक्षांत समारोह में शिरकत की। यहां उन्होंने मेधावी छात्रों को सम्मानित किया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज के युवा देश का भविष्य हैं और उन्हें न केवल शिक्षा में बल्कि चरित्र निर्माण में भी आगे रहना चाहिए। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रपति के आगमन को लेकर सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे। शिक्षा और स्वास्थ्य का मिला सुंदर संदेश पूरा दिन जबलपुर के लिए बेहद महत्वपूर्ण और यादगार बन गया, जहां एक ओर योग के माध्यम से स्वास्थ्य का संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं को नई दिशा और प्रेरणा मिली। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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दुग्ध संघ

International Yoga Day 2026: भोपाल दुग्ध संघ में उत्साहपूर्ण Yoga Session, अधिकारियों ने किया अभ्यास

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर भोपाल दुग्ध संघ परिसर में शनिवार को एक शांत, अनुशासित और ऊर्जा से भरपूर योग सत्र का आयोजन किया गया। सुबह के समय आयोजित इस कार्यक्रम में अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक सभी ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और योग के महत्व को करीब से महसूस किया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल योग करना नहीं, बल्कि रोजमर्रा की व्यस्त जीवनशैली में स्वास्थ्य और संतुलन को शामिल करने का संदेश देना भी था। इस अवसर पर मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ (MP State Cooperative Dairy Federation) के प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोवाणी, एनडीडीबी के महाप्रबंधक जयदेव बिस्वास और भोपाल दुग्ध संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रितेश जोशी विशेष रूप से मौजूद रहे। योग सत्र का संचालन योग प्रशिक्षक डॉ. विनीता सिसोदिया ने किया। करीब एक घंटे चले इस सत्र में प्रतिभागियों को सरल लेकिन प्रभावी योगासन और प्राणायाम करवाए गए, जिनका उद्देश्य शरीर के प्रमुख अंगों को सक्रिय और स्वस्थ रखना था। सत्र के दौरान पैरों, हाथों, गर्दन, हृदय और आंखों को मजबूत बनाने वाली योग क्रियाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रतिभागियों ने न केवल अभ्यास किया, बल्कि इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करने का संकल्प भी लिया। इस मौके पर डॉ. संजय गोवाणी ने कहा कि योग भारत की प्राचीन परंपरा का हिस्सा है, जो आज पूरी दुनिया में स्वास्थ्य और संतुलित जीवन का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने सभी से अपील की कि योग को केवल एक दिन का कार्यक्रम न मानकर इसे रोज की आदत बनाया जाए। कार्यक्रम का समापन सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें सभी ने स्वस्थ जीवन और नियमित योग अभ्यास को अपनाने की प्रतिबद्धता जताई। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IMD Alert: 20 राज्यों में आंधी-बारिश की चेतावनी, 8 राज्यों में अब भी 40°C के पार तापमान

देशभर में मौसम का मिजाज एक बार फिर तेजी से बदल रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत 20 राज्यों में तेज आंधी, बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। दूसरी ओर, मानसून की रफ्तार पिछले 13 दिनों से तेलंगाना के आसपास थमी हुई है, जिसके कारण देश के कई हिस्सों में लोगों को अब भी भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि आठ राज्यों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है। 20 राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट IMD के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों में अगले 24 से 72 घंटों के दौरान मौसम अचानक बदल सकता है। कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है, जबकि कुछ स्थानों पर आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है। Telangana में थमा Monsoon, कई राज्यों में बढ़ा इंतजार आमतौर पर जून के तीसरे सप्ताह तक मानसून मध्य भारत के बड़े हिस्से को कवर कर लेता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है। पिछले करीब 13 दिनों से मानसून तेलंगाना के आसपास ही सक्रिय बना हुआ है और आगे नहीं बढ़ पाया है। इसका सीधा असर महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के कई इलाकों में देखने को मिल रहा है, जहां सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वातावरण में अनुकूल परिस्थितियां बनते ही मानसून दोबारा तेजी पकड़ सकता है। 8 राज्यों में Heatwave जैसे हालात बारिश में देरी का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दे रहा है। देश के आठ राज्यों में कई शहरों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। विदर्भ, पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में गर्म हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक मानसून सक्रिय नहीं होता, तब तक इन इलाकों में गर्मी से तुरंत राहत मिलने की संभावना कम है। MP और Rajasthan को जल्द मिल सकती है राहत हालांकि मौसम विभाग का अनुमान है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई जिलों में अगले कुछ दिनों के भीतर बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। यदि अनुमान सही साबित होता है तो तापमान में गिरावट आएगी और लंबे समय से गर्मी झेल रहे लोगों को राहत मिलेगी। बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के लिए भी यह अच्छी खबर हो सकती है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है। खेती पर भी पड़ रहा असर मानसून की धीमी चाल ने खेती-किसानी की रफ्तार को भी प्रभावित किया है। कई जिलों में किसान खेत तैयार करके बारिश का इंतजार कर रहे हैं। पर्याप्त वर्षा होने के बाद ही धान, सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई तेज होने की उम्मीद है। मौसम विभाग की जरूरी सलाह मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि तेज आंधी और बिजली गिरने के दौरान खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें। भारी बारिश वाले इलाकों में यात्रा करने से पहले मौसम की जानकारी जरूर लें। वहीं जिन क्षेत्रों में गर्मी का असर बना हुआ है, वहां पर्याप्त पानी पीते रहें, हल्के कपड़े पहनें और दोपहर के समय धूप में निकलने से बचें। आगे कैसा रहेगा मौसम? मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून दोबारा सक्रिय हो सकता है। इसके बाद मध्य भारत, पश्चिम भारत और उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश का दायरा बढ़ने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो भीषण गर्मी से राहत मिलने के साथ-साथ किसानों को भी बड़ी राहत मिलेगी और खरीफ सीजन की गतिविधियां रफ्तार पकड़ेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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