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खंडवा कांग्रेस में बवाल: नियुक्तियों पर उठे सवाल, इस्तीफा और विरोध शुरू

मध्य प्रदेश के खंडवा में कांग्रेस संगठन के भीतर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में ब्लॉक अध्यक्षों और किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष की नियुक्तियों के बाद पार्टी के अंदर ही विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस के कई नेता अब खुलकर सोशल मीडिया पर संगठन के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं। आरोप है कि बाहरी लोगों, बिना दावेदारी करने वालों और चुनाव के दौरान कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं को पद दे दिए गए। इंदौर के नेता बने खंडवा के जिलाध्यक्ष विवाद उस वक्त और बढ़ गया जब किसान कांग्रेस जिलाध्यक्ष की लिस्ट सामने आई। इसमें इंदौर निवासी सोनू गुर्जर पहलवान को खंडवा का जिलाध्यक्ष बना दिया गया। हैरानी की बात यह रही कि लिस्ट में नाम तो सोनू गुर्जर का था, लेकिन मोबाइल नंबर संजय पाटीदार का लिखा हुआ था, जिन्होंने इस पद के लिए दावेदारी की थी। बताया जा रहा है कि सोनू गुर्जर को रॉबर्ट वाड्रा का करीबी माना जाता है, जबकि संजय पाटीदार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नजदीकी बताए जाते हैं। इस पर कांग्रेस नेता नारायण सिंह तोमर ने तंज कसते हुए कहा— “गुर्जर को बधाई देने फोन लगाया तो पाटीदार को लग गया… क्या खंडवा में कोई किसान नहीं मिला?” भाजपा से जुड़े लोगों को पद? विवाद सिर्फ यहीं नहीं रुका। छैगांवमाखन ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में जयेश पटेल की नियुक्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने 2023 विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी छाया मोरे का समर्थन किया था। स्थानीय नेताओं का कहना है कि वर्तमान में भी जयेश पटेल भाजपा विधायक के करीबी हैं, ऐसे में उनकी नियुक्ति से कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई है। इस्तीफा और बढ़ता विरोध इस पूरे विवाद के बीच खालवा ब्लॉक के कांग्रेस नेता वीरेंद्र प्रजापति ने नाराज होकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। वहीं, सिंगोट उपब्लॉक में केदार पाटीदार को अध्यक्ष बनाए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने इस पद के लिए न तो आवेदन किया था और न ही कोई बायोडाटा दिया था। संगठन के खिलाफ खुलकर आवाज अब कांग्रेस प्रत्याशी रही रूपाली बारे के समर्थक भी इन नियुक्तियों को लेकर विरोध की तैयारी में हैं और जल्द ही संगठन प्रभारी से शिकायत करने वाले हैं। खंडवा कांग्रेस में उठे इस विवाद ने साफ कर दिया है कि संगठन के अंदर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है। 👉 इस खबर से जुड़ी हर अपडेट के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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इंदौर EV हादसा: चार्जिंग के दौरान ब्लास्ट का शक, 8 लोगों की दर्दनाक मौत

इंदौर में हुए दिल दहला देने वाले इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) हादसे को लेकर अब बिजली कंपनी की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि, इस रिपोर्ट को अभी आधिकारिक तौर पर जारी नहीं किया गया है, लेकिन जो जानकारी सामने आई है, वह काफी चौंकाने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक, आग की शुरुआत घर में लगे EV चार्जिंग पॉइंट से हुई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि घर के लिए 15 किलोवॉट का बिजली लोड स्वीकृत था, लेकिन आमतौर पर 2 से 9 किलोवॉट तक ही बिजली का इस्तेमाल हो रहा था। ऐसे में ओवरलोड की संभावना कम बताई जा रही है। चार्जिंग के दौरान हुआ धमाका बिजली कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि हादसे के समय कार चार्जिंग पर लगी हुई थी। स्मार्ट मीटर के डिजिटल डेटा से यह पुष्टि हुई है कि देर रात EV चार्जिंग चल रही थी। कंपनी ने पिछले 3 महीनों का डेटा खंगालकर यह रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चार्जिंग के दौरान पहले ऑटो कट-ऑफ हुआ, लेकिन करीब आधे घंटे बाद दोबारा चार्जिंग शुरू हुई। इसके बाद कार की बैटरी में जोरदार ब्लास्ट हो गया, जो आग का कारण बना। रोज रात होती थी चार्जिंग जांच में यह भी सामने आया कि कार रोज रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक चार्ज होती थी। हादसे वाली रात भी यही क्रम था। जैसे ही चार्जिंग शुरू होती, घर का कुल बिजली लोड 2 किलोवॉट से बढ़कर करीब 9 किलोवॉट तक पहुंच जाता था। रहवासियों ने क्या बताया पास में रहने वाले लोगों के मुताबिक, रात करीब 3 से 3:15 बजे के बीच कार से धुआं उठता देखा गया था। लोगों ने तुरंत आसपास के लोगों को जगाया और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। लेकिन दमकल की गाड़ियां करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंचीं। 8 लोगों की गई जान यह हादसा बेहद दर्दनाक साबित हुआ। आग ने देखते ही देखते तीन मंजिला मकान को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में कारोबारी मनोज पुगलिया, उनकी गर्भवती बहू समेत कुल 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4 लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि आग ने घर के अंदर रखे गैस सिलेंडरों को भी अपनी चपेट में ले लिया, जिससे एक के बाद एक धमाके हुए। घर में लगे डिजिटल लॉक भी समय पर नहीं खुल सके, जिसके कारण लोग बाहर नहीं निकल पाए। जिम्मेदारी से बचने की कोशिश? सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में जिम्मेदारी तय होने से बचने के लिए कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी अपने कर्मचारियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ पाएगी। 👉 इस खबर से जुड़ी हर अपडेट के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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Indore

Indore EV Fire Case इंदौर में EV Charging से लगी आग, Digital Lock Fail होने से 8 की मौत

इंदौर (Indore) से आई यह खबर दिल दहला देने वाली है। एक साधारण सी लगने वाली रात अचानक चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गई, जब EV (Electric Vehicle) चार्जिंग के दौरान लगी आग ने 8 लोगों की जान ले ली। इस हादसे में 4 लोग घायल भी हुए हैं, जिनका इलाज जारी है। एक छोटी सी चिंगारी, बड़ा हादसा प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बिल्डिंग के अंदर इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज किया जा रहा था। इसी दौरान अचानक आग भड़क उठी। कुछ ही मिनटों में धुआं पूरे परिसर में फैल गया। लोगों को समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है। कई परिवार अपने घरों में ही फंसे रह गए—कुछ सो रहे थे, कुछ ने दरवाजे खोलने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। Digital Lock बना जानलेवा जाल इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू था डिजिटल लॉक सिस्टम का फेल होना। आग लगते ही बिजली सप्लाई बंद हो गई, जिससे दरवाजों के डिजिटल लॉक काम करना बंद कर गए। लोग अंदर ही कैद हो गए। सोचिए, जब बाहर आग हो और अंदर से दरवाजा ही न खुले—यह स्थिति कितनी भयावह रही होगी। अपनों को खोने का दर्द इस हादसे में जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया, उनके लिए यह सिर्फ एक खबर नहीं, जिंदगी भर का जख्म है। पड़ोसियों के अनुसार, कई लोग मदद के लिए पुकारते रहे, लेकिन धुएं और आग ने किसी को मौका नहीं दिया। राहत और जांच जारी दमकल विभाग और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता चल सके कि: क्या हम सुरक्षित हैं? यह घटना कई सवाल छोड़ जाती है: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal

MP Bhopal Breaking न्याय यात्रा में बवाल, स्वास्थ्य कर्मियों और पुलिस के बीच तनाव

नियमितीकरण और वेतन वृद्धि को लेकर सड़कों पर उतरे कर्मचारी मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal) में आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। ‘न्याय यात्रा’ के तहत बड़ी संख्या में कर्मचारी एकजुट हुए। उनकी प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, वेतन वृद्धि, सेवा सुरक्षा और ठेका प्रथा समाप्त करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया। न्याय यात्रा के दौरान बिगड़ी महिला कर्मचारी की तबीयत प्रदर्शन के दौरान उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला, जब यात्रा में शामिल एक महिला कर्मचारी अचानक गश खाकर गिर पड़ी। तेज धूप और लगातार नारेबाजी के बीच उनकी तबीयत बिगड़ गई। साथी कर्मचारियों ने तुरंत उन्हें संभाला, पानी पिलाया और प्राथमिक उपचार दिलाया। कुछ देर के लिए मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन बाद में उनकी हालत स्थिर बताई गई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की आंदोलन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई। प्रशासन ने पहले से बैरिकेडिंग कर रखी थी। जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे तनाव की स्थिति बन गई। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद हालात नियंत्रण में आ गए। यातायात प्रभावित, बातचीत की उम्मीद प्रदर्शन के चलते शहर के कई मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को जाम का सामना करना पड़ा। वहीं कर्मचारी संगठनों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। प्रशासन की ओर से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की संभावना जताई जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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MP

MP Cabinet Decision उड़द पर ₹600 Bonus, Tribal जिलों में होगी Agriculture Meeting

मध्यप्रदेश के किसानों के लिए राहत और उत्साह की खबर है। Mohan Yadav की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उड़द (Urad) पर ₹600 प्रति क्विंटल बोनस देने को मंजूरी मिल गई है। इस फैसले से खासकर खरीफ सीजन में उड़द की खेती करने वाले किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। किसानों को MSP के साथ मिलेगा अतिरिक्त लाभ सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह ₹600 प्रति क्विंटल की राशि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अतिरिक्त दी जाएगी। यानी किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम सुनिश्चित होगा। लंबे समय से किसान दलहन फसलों पर प्रोत्साहन की मांग कर रहे थे, ऐसे में यह निर्णय उनके लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में खेती सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि परिवार की उम्मीदों से जुड़ी होती है। ऐसे में जब फसल का दाम अच्छा मिलता है, तो घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और भविष्य की योजनाएं भी साकार होती हैं। Tribal Districts में होगी Agriculture Cabinet Meeting मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि आगामी कृषि कैबिनेट बैठक जनजातीय बहुल (Tribal Majority) जिलों में आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य है कि सरकार सीधे किसानों से संवाद कर सके और उनकी जमीनी समस्याओं को समझ सके। जनजातीय क्षेत्रों में अक्सर संसाधनों और तकनीकी सुविधाओं की कमी महसूस की जाती है। वहां बैठक आयोजित करने से स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं बनाई जा सकेंगी और कृषि निवेश को बढ़ावा मिलेगा। दलहन उत्पादन बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उड़द पर बोनस से प्रदेश में दलहन (Pulses) उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि राज्य और देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी। आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में यह एक सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है। सरकार का यह फैसला सिर्फ एक आर्थिक घोषणा नहीं, बल्कि किसानों के आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला कदम है। जब नीति और नीयत दोनों साथ हों, तो खेतों की हरियाली ही प्रदेश की समृद्धि बनती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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डॉ. मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का विजन विकसित मध्यप्रदेश @2047 में बड़ा कदम

प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश लाकर नई तकनीकों के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करना राज्य सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। इसी संकल्प के साथ मध्यप्रदेश को आगामी 25 वर्षों में एक मजबूत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। यह बात मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘अभ्युदय इंडस्ट्री लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026’ में कही। राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका ऑर्गेनाइजर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने संपादक प्रफुल्ला केतकर के साथ संवाद करते हुए ‘विकसित मध्यप्रदेश’ के विजन पर विस्तार से चर्चा की। निवेश और रोजगार सृजन पर सरकार का फोकस मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से प्रगति कर रहा है और इस दिशा में मध्यप्रदेश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तय किया है, जिसके लिए सभी क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए आगामी 25 वर्षों का विस्तृत दृष्टिपत्र तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की वर्तमान प्रति व्यक्ति आय लगभग 1 लाख 55 हजार रुपये है, जिसे अगले 25 वर्षों में बढ़ाकर 22 लाख 50 हजार रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। एमएसएमई से औद्योगिक विकास को मिलेगी गति मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि के क्षेत्र में लंबे समय से अग्रणी रहा है, लेकिन औद्योगिक विकास के लिए एमएसएमई सेक्टर राज्य की रीढ़ है। राज्य सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है, ताकि छोटे शहरों और कस्बों तक औद्योगिक विकास पहुंचे और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लागू की गई 18 नई औद्योगिक नीतियों के माध्यम से निवेशकों को आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। क्षेत्रीय कॉन्क्लेव से छोटे शहरों में उद्योग विस्तार डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने संभागीय स्तर पर विभिन्न सेक्टर आधारित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए हैं, जिससे उद्योगों का विस्तार बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों तक भी हो सके। माइनिंग, टेक्सटाइल, टूरिज्म और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट जैसे क्षेत्रों में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। कटनी और शहडोल में माइनिंग सेक्टर में निवेश के लिए देश के बड़े उद्योगपति आगे आए हैं, वहीं नर्मदापुरम के बाबई-मोहासा क्षेत्र में इलेक्ट्रिकल उपकरण निर्माण के लिए औद्योगिक क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। युवाओं को रोजगार देने वाला बनाने की पहल उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं को नौकरी खोजने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला बनाना है। इसके लिए स्वरोजगार योजनाओं और युवा उद्यमिता को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ होम-स्टे जैसी पहल ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि इन प्रयासों का ही परिणाम है कि प्रदेश में बेरोजगारी दर तेजी से घटकर मात्र 1 से 1.5 प्रतिशत के आसपास रह गई है। रोजगार आधारित उद्योगों की स्थापना पर निवेशकों को विशेष अनुदान भी दिया जा रहा है। किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान कृषि क्षेत्र को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की समृद्धि के लिए ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के तहत विशेष योजनाएं लागू कर रही है। कृषि उत्पादन के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग और पशुपालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ साल में ही 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का दायरा बढ़ा है और इसे 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने की योजना है। नवीकरणीय ऊर्जा में प्रदेश की मजबूत बढ़त नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य देश में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के मामले में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश के साथ मिलकर मुरैना में सोलर एनर्जी का बड़ा प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है, जिससे दोनों राज्य छह-छह महीने बिजली का उपयोग करेंगे। किसानों को सोलर पंप देकर बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। मंदसौर के गांधी सागर बांध में पंप स्टोरेज परियोजना भी कम समय में पूरी की गई है। बजट, शहरीकरण और औद्योगिकीकरण पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का आगामी बजट भी विकास को नई गति देगा। राज्य का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में बजट को दोगुना करना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विकास के लिए शहरीकरण और औद्योगिकीकरण दोनों जरूरी हैं। इंदौर और भोपाल में मेट्रोपोलिटन एरिया विकसित किए जा रहे हैं, जिससे निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सरकार का मानना है कि जहां उद्योग स्थापित होंगे, वहीं शहरों का भी तेजी से विकास होगा। नक्सलवाद से मुक्ति एक बड़ी उपलब्धि एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश 31 मार्च की तय समय-सीमा से पहले नक्सलवाद से मुक्त होने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में दोबारा नक्सलवाद न पनपे, इसके लिए प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा पर फोकस युवाओं के कौशल विकास पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ भविष्य में बड़ी संख्या में कुशल कामगारों की आवश्यकता होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत युवाओं के कौशल उन्नयन के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। इंजीनियरिंग कॉलेजों में आईटी सेंटर खोले जा रहे हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों के सकारात्मक उपयोग के लिए छात्रों को तैयार किया जा रहा है। कार्यक्रम में उद्योग जगत की सहभागिता कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप भी उपस्थित थे। भारत प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण कुमार गोयल ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में दोहराया कि विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में मध्यप्रदेश की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी...
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Bhopal

Bhopal Hostel Incident MBBS छात्रा की संदिग्ध हालत में मौत, बाथरूम से बरामद हुई Acid Bottle

Bhopal मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) भोपाल की एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा का शव एक निजी हॉस्टल के बाथरूम में संदिग्ध हालत में मिला। मौके से एसिड की बोतल बरामद होने के बाद यह मामला और भी गंभीर हो गया है। मृत छात्रा की पहचान रोशनी के रूप में हुई है, जो अलीराजपुर जिले की रहने वाली थी। उसने करीब चार महीने पहले ही गांधी मेडिकल कॉलेज में MBBS कोर्स में एडमिशन लिया था और पढ़ाई के लिए भोपाल में रह रही थी। सुबह नहीं निकली तो हुआ शक सोमवार सुबह जब रोशनी तय समय पर कॉलेज नहीं पहुंची और कई बार फोन करने पर भी संपर्क नहीं हो सका, तो उसकी सहेलियों को चिंता हुई। हॉस्टल पहुंचकर जब उन्होंने कमरे का दरवाजा खटखटाया और कोई जवाब नहीं मिला, तब हॉस्टल स्टाफ को सूचना दी गई। दरवाजा खोलने पर बाथरूम में रोशनी का शव पड़ा मिला। तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को बुलाया गया। छात्रा को हमीदिया अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। Acid Bottle मिलने से बढ़ा संदेह घटनास्थल से एसिड की एक बोतल मिलने के बाद पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि छात्रा की मौत आत्महत्या, दुर्घटना या किसी अन्य कारण से हुई है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और कहा है कि रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह सामने आएगी। पढ़ाई का दबाव बना हुआ था कॉलेज सूत्रों और सहपाठियों के अनुसार, रोशनी पिछले कुछ समय से पढ़ाई के तनाव में थी। MBBS जैसे कठिन कोर्स के शुरुआती महीनों में वह काफी दबाव महसूस कर रही थी। पुलिस छात्रा के मोबाइल फोन और व्यक्तिगत बातचीत की भी जांच कर रही है। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ घटना की सूचना मिलते ही छात्रा के परिजन भोपाल के लिए रवाना हो गए। बेटी की असमय मौत से परिवार सदमे में है। कॉलेज प्रशासन ने भी घटना पर शोक व्यक्त किया है। जांच जारी Bhopal कोहेफिजा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी। यह घटना एक बार फिर मेडिकल छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और तनाव को उजागर करती है, जिस पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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MP Youth Games

MP Youth Games 2026 TT Nagar में शाम 5 बजे से बदली यातायात व्यवस्था

भोपाल के टीटी नगर में आज से MP Youth Games 2026 का भव्य शुभारंभ हो रहा है। यह आयोजन युवा खिलाड़ियों के लिए न केवल अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच है, बल्कि भोपाल में खेलों के उत्साह को भी बढ़ाएगा। इस वजह से शहर की यातायात व्यवस्था में बड़े पैमाने पर बदलाव किया गया है। प्रशासन ने समारोह के दौरान नागरिकों और खिलाड़ियों दोनों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन को सख्त किया है। मुख्य जानकारी: समारोह स्थल के आसपास के मार्गों पर डायवर्ट किए जाने के कारण शाम के समय यातायात भीड़भाड़ वाला और धीमा रह सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय से पहले यात्रा योजना बनाएं और समारोह स्थल पर आने वाले लोगों के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। MP Youth Games का आयोजन मध्य प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस खेल महोत्सव में विभिन्न खेलों में प्रतिभागी अपनी योग्यता दिखाएंगे और राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। आयोजन में आने वाले दर्शकों के लिए भी व्यवस्था की गई है ताकि वे आराम से खेलों का आनंद ले सकें। ट्रैफिक डायवर्जन और वैकल्पिक मार्ग:TT Nagar और आसपास के मुख्य मार्गों पर शाम 5 बजे से वाहनों का डायवर्जन किया जाएगा। नागरिकों से अनुरोध है कि वे शहर की भीड़भाड़ वाली सड़कों से बचें और वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग करें। साथ ही, सोशल मीडिया और स्थानीय ट्रैफिक अपडेट्स के माध्यम से लोगों को यातायात की ताजा जानकारी दी जाएगी। इस भव्य आयोजन के माध्यम से भोपाल में युवा खेलों का उत्साह चरम पर पहुंचने की संभावना है। प्रशासन का उद्देश्य है कि MP Youth Games 2026 सफलतापूर्वक संपन्न हो और नागरिकों तथा खिलाड़ियों दोनों के लिए सुरक्षित और सहज अनुभव सुनिश्चित हो। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal

Bhopal Republic Day Celebration भोपाल में राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह, राज्यपाल ने फहराया तिरंगा

लाल परेड मैदान में गरिमा और उत्साह का माहौल Bhopal के ऐतिहासिक लाल परेड मैदान में 76वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह, गरिमा और देशभक्ति के माहौल में मनाया गया। राज्य स्तरीय समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल ने ध्वजारोहण किया और भव्य परेड की सलामी ली। इस मौके पर मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक मौजूद रहे। परेड में दिखा अनुशासन और देशभक्ति का जज़्बा सुबह से ही लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। परेड में पुलिस, होमगार्ड, एनसीसी, स्काउट-गाइड और स्कूली बच्चों की टुकड़ियों ने अनुशासन और समर्पण का परिचय दिया। जवानों की सधी हुई कदमताल और बैंड की देशभक्ति धुनों ने पूरे माहौल को गर्व से भर दिया। झांकियों में मध्यप्रदेश की संस्कृति और विकास की झलक समारोह का मुख्य आकर्षण विभिन्न विभागों और जिलों की झांकियां रहीं। इन झांकियों में मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, आदिवासी परंपराएं, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और विकास योजनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। दर्शकों ने झांकियों को खूब सराहा और मोबाइल कैमरों में यादें कैद कीं। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन स्कूली बच्चों और सांस्कृतिक दलों की देशभक्ति गीतों और नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। हर प्रस्तुति में देश के प्रति प्रेम, एकता और समर्पण का संदेश साफ झलक रहा था। उत्कृष्ट सेवा के लिए सम्मान कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट सेवा के लिए पुलिसकर्मियों, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके समर्पण और जिम्मेदारी का प्रतीक रहा। राज्यपाल का संदेश राज्यपाल ने अपने संबोधन में प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं और संविधान के मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश विकास, समरसता और आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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उज्जैन

Breaking News Tarana उज्जैन के तराना में उपद्रव, घरों पर पथराव, 10 से ज्यादा बसों को नुकसान

मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले के तराना कस्बे में एक बार फिर हिंसा ने लोगों की नींद उड़ा दी। गुरुवार शाम मामूली कहासुनी से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते बड़े बवाल में बदल गया। गुस्साई भीड़ ने कई घरों पर पत्थर फेंके, दुकानों में तोड़फोड़ की और बस स्टैंड पर खड़ी बसों को निशाना बनाया। कुछ बसों में आग लगाए जाने की भी पुष्टि हुई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, विवाद की जड़ एक युवक पर हुआ हमला बताया जा रहा है। युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसी घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और कुछ ही देर में भीड़ उग्र हो गई। लोग अपने घरों में दुबक गए, बाजार बंद हो गए और सड़कों पर अफरा-तफरी मच गई। बस स्टैंड पर सबसे ज्यादा नुकसान हिंसा के दौरान तराना बस स्टैंड पर खड़ी करीब 10 से 11 बसों के शीशे तोड़ दिए गए। कुछ बसों में आग लगाने की कोशिश की गई और एक-दो बसों के अंदर आग भी भड़क गई। इसके अलावा आसपास खड़ी गाड़ियां और दुकानों को भी नुकसान पहुंचा। कई घरों पर पत्थर फेंके गए, जिससे लोगों में भारी दहशत फैल गई। पुलिस और प्रशासन हरकत में स्थिति बिगड़ने की खबर मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। भारी पुलिस बल तैनात किया गया और हालात काबू में करने के लिए इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। रात भर पुलिस गश्त करती रही ताकि हालात दोबारा न बिगड़ें। प्रशासन ने उपद्रवियों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है और ड्रोन की मदद भी ली जा रही है। अब तक कई लोगों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं और कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। लोग सहमे, बाजार बंद घटना के बाद तराना के कई इलाकों में सन्नाटा पसरा रहा। दुकानदारों ने एहतियात के तौर पर बाजार बंद रखे। जिन घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचा है, उनके मालिक गहरे सदमे में हैं। लोगों का कहना है कि पहले भी यहां तनाव की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इस बार हिंसा ने ज्यादा डर पैदा कर दिया है। प्रशासन की अपील प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और नुकसान का आकलन कर मुआवजे की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। तराना की यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि छोटे-से विवाद कैसे बड़ी हिंसा में बदल जाते हैं। स्थानीय लोग चाहते हैं कि हालात जल्द सामान्य हों और कस्बे में फिर से सुकून लौटे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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