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कमर दर्द को न करें नजरअंदाज, पैर में सुन्नपन या यूरिन-मल पर नियंत्रण बिगड़े तो हो सकता है गंभीर संकेत

कमर दर्द को अक्सर लोग मांसपेशियों में खिंचाव या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार आराम और दवा से दर्द कम भी हो जाता है। लेकिन अगर कमर दर्द के साथ पैर में लगातार सुन्नपन, झुनझुनी, जलन या कमजोरी हो रही है, या यूरिन और मल पर नियंत्रण बिगड़ रहा है, तो इसे सामान्य दर्द मानकर टालना भारी पड़ सकता है। स्पाइन विशेषज्ञों ने इंदौर में आयोजित एंडोस्पाइनकॉन-2026 के पहले दिन यह जानकारी दी। सम्मेलन की थीम ‘फ्रॉम लर्निंग कर्व टू ग्लोबल एक्सीलेंस’ है। इसमें देश-विदेश के 120 से ज्यादा डेलीगेट्स हिस्सा ले रहे हैं। विशेषज्ञों ने एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी में नई तकनीकों, सर्जरी की बेहतर प्लानिंग और मरीजों की जल्दी रिकवरी पर चर्चा की। 100 मरीजों में सिर्फ 10-15 को सर्जरी की जरूरत ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. प्रसाद पाटगांवकर ने बताया कि ओपीडी में कमर दर्द के 100 मरीज आते हैं तो करीब 10 से 15 मरीजों को ही सर्जरी की जरूरत पड़ती है। यानी कमर दर्द होने का मतलब यह नहीं है कि सीधे ऑपरेशन की जरूरत है। शुरुआती 10-12 दिनों में अगर मरीज में कोई गंभीर या रेड फ्लैग साइन नहीं है, तो दवा, फिजियोथैरेपी और सामान्य उपचार से राहत मिल सकती है। हालांकि, दर्द लगातार बना रहे या पैर में कमजोरी और सुन्नपन जैसे लक्षण बढ़ें तो विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। उन्होंने बताया कि एक डिस्क में समस्या होने का मतलब यह नहीं है कि रीढ़ की दूसरी डिस्क भी खराब हो जाएगी। गलत पोश्चर और लंबे समय तक बैठना बढ़ा सकता है परेशानी विशेषज्ञों के मुताबिक, वजन बढ़ना, गलत पोश्चर, लंबे समय तक बैठे रहना और रोजमर्रा की गतिविधियों में गलत तरीके रीढ़ की समस्या को बढ़ा सकते हैं। डॉ. पाटगांवकर ने नई तकनीकों में PSLD (Percutaneous Stenoscopic Lumbar Decompression) का भी जिक्र किया। इस प्रक्रिया में छोटे चीरे के जरिए दूरबीन की मदद से रीढ़ की नसों पर पड़ रहे दबाव को कम किया जाता है। उनके मुताबिक, चयनित मामलों में इस तकनीक से 70, 80 और यहां तक कि 90 वर्ष की उम्र के मरीजों का भी उपचार किया जा सकता है। कम उम्र में भी बढ़ रही स्पाइन की समस्या उज्बेकिस्तान से आए स्पाइन सर्जन डॉ. अखरोर याकूबोव ने बताया कि उनके देश में भी कम उम्र में स्पाइन से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने 15 साल के मरीज की स्पाइन सर्जरी का उदाहरण साझा किया। विशेषज्ञों ने रीढ़ को स्वस्थ रखने के लिए नियमित एक्सरसाइज और वजन नियंत्रित रखने को महत्वपूर्ण बताया। हालांकि, हर स्लिप डिस्क या स्पाइन समस्या में सर्जरी की जरूरत नहीं होती। अगर एमआरआई में नस पर ज्यादा दबाव नहीं है और लक्षण गंभीर नहीं हैं, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा और एक्सरसाइज से भी इलाज किया जा सकता है। सर्जरी में ब्लड लॉस 10 एमएल से भी कम बरेली के गोयलखंड मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक्स प्रोफेसर प्रो. वरुण अग्रवाल ने बताया कि एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी में छोटे चीरे के जरिए दूरबीन की मदद से नसों पर पड़ रहे दबाव को हटाया जा सकता है। कुछ चुनिंदा मामलों में यह प्रक्रिया लोकल एनेस्थीसिया में भी की जा सकती है। कुछ मामलों में ब्लड लॉस 10 एमएल से भी कम हो सकता है और मरीज ऑपरेशन के कुछ घंटे बाद चलने की स्थिति में आ सकता है। कई मरीज अगले दिन से सामान्य गतिविधियां शुरू कर सकते हैं। हालांकि, रिकवरी के दौरान डॉक्टर की सलाह और सावधानियों का पालन जरूरी है। सिर्फ मशीन खरीदने से सर्जरी नहीं की जा सकती डॉ. गिरीश दातार ने कहा कि केवल मशीन या उपकरण खरीद लेने से कोई सर्जन एंडोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी शुरू नहीं कर सकता। इसके लिए उचित प्रशिक्षण और पर्याप्त अनुभव जरूरी है। रोबोट खुद तय नहीं करता कि सर्जरी कैसे करनी है महाराष्ट्र से आए डॉ. सुबोध बोरले ने स्पाइन सर्जरी में टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक ने सर्जरी की प्लानिंग और प्रक्रिया को पहले की तुलना में आसान बनाया है। आज नए सर्जन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नए सॉफ्टवेयर, बेहतर इमेजिंग और दूसरी डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे सर्जरी से पहले मरीज की स्थिति को समझने और प्रक्रिया की बेहतर प्लानिंग में मदद मिलती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, स्पाइन की समस्या में पहला प्रयास मरीज को बिना सर्जरी के ठीक करने का होना चाहिए। दवा, फिजियोथैरेपी, एक्सरसाइज और जीवनशैली में बदलाव से कई मरीजों को राहत मिल सकती है।
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सीहोर में गणेश विसर्जन के दौरान हादसा, खदान के गहरे पानी में डूबने से 16 वर्षीय किशोर की मौत

सीहोर के अहमदपुर थाना क्षेत्र में शुक्रवार को गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान बड़ा हादसा हो गया। सीलखेड़ा से मुंगावली जाने वाले मार्ग पर स्थित एक खदान के पानी में डूबने से 16 वर्षीय अतुल अहिरवार की मौत हो गई। अतुल सीलखेड़ा गांव का रहने वाला था। विसर्जन के दौरान गहरे पानी में चला गया जानकारी के मुताबिक, अतुल गांव के अन्य लोगों के साथ गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए खदान के पानी में गया था। इसी दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। हादसे के बाद मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई और पुलिस को सूचना दी गई। ग्रामीणों ने करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद अतुल को पानी से बाहर निकाला। इसके बाद उसे निजी वाहन से अहमदपुर ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे दोराहा स्वास्थ्य केंद्र रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। ग्रामीणों ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल हादसे के बाद ग्रामीणों ने गणेश विसर्जन के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर पर्याप्त पुलिस बल मौजूद नहीं था और पुलिस करीब दो घंटे की देरी से पहुंची। ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले साल इसी स्थान पर गणेश विसर्जन के दौरान दो पुलिस जवानों की तैनाती की गई थी, लेकिन इस बार मौके पर कोई जवान मौजूद नहीं था। हालांकि, पुलिस की ओर से पुलिस के पहुंचने में देरी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच एडिशनल एसपी प्रशांत चौबे ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। पुलिस घटना की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद हादसे से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आएगी।
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भारत-वेस्टइंडीज T20 के टिकट 2 घंटे 20 मिनट में SOLD OUT, इंदौर में फैंस में जबरदस्त उत्साह

इंदौर के होलकर स्टेडियम में 11 अक्टूबर को होने वाले भारत-वेस्टइंडीज T20 मुकाबले के टिकटों की ऑनलाइन बिक्री शुक्रवार को शुरू हुई और महज 2 घंटे 20 मिनट में सभी सामान्य टिकट SOLD OUT हो गए। सुबह 6 बजे ऑनलाइन बिक्री शुरू होते ही बड़ी संख्या में क्रिकेट फैंस ने टिकट बुक किए। सबसे पहले ईस्ट गैलरी के टिकट फुल हुए। इसके बाद वेस्ट गैलरी और पवेलियन के टिकट भी तेजी से बिक गए। सुबह 8:20 बजे तक सभी सामान्य टिकटों की बिक्री पूरी हो चुकी थी। भारत-वेस्टइंडीज मुकाबले को लेकर इंदौर में पहले से ही क्रिकेट प्रेमियों में उत्साह बना हुआ है। टिकटों की तेजी से हुई बिक्री से मैच को लेकर फैंस की दिलचस्पी का अंदाजा लगाया जा सकता है। कैटेगरी के हिसाब से तय हुई टिकटों की कीमत मैच के टिकट अलग-अलग कैटेगरी के अनुसार रखे गए हैं। सामान्य ईस्ट और वेस्ट गैलरी के टिकट ₹1,000 से ₹1,800 तक हैं। वहीं, पवेलियन कैटेगरी के टिकटों की कीमत ₹5,500 से ₹8,500 तक है। हॉस्पिटैलिटी कैटेगरी के टिकट ₹11,000 और ₹12,500 तक रखे गए हैं। एक व्यक्ति अधिकतम 4 टिकट खरीद सकता है। स्टूडेंट कोटे में 1200 रजिस्ट्रेशन स्टूडेंट और खासतौर पर दिव्यांग दर्शकों के लिए आरक्षित रियायती टिकटों की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी। स्टूडेंट कोटे में करीब 1,200 रजिस्ट्रेशन कुछ ही समय में पूरे हो गए। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद करीब 1,000 छात्रों को टिकट दिए जाने हैं। ऑनलाइन बिक्री पूरी होने के बाद टिकटों की उपलब्धता मांग के अनुसार बदल रही है।
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MP में 21 साल बाद फिर दौड़ेंगी सरकारी बसें, आज से शुरू होगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा; 7 शहरों में 351 बसें

मध्य प्रदेश में करीब 21 साल बाद सरकारी बस सेवा फिर शुरू होने जा रही है। शुक्रवार से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत होगी। इस सेवा का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच बस कनेक्टिविटी को बेहतर करना है। 2005 में बंद हो गई थी सरकारी बस सेवा मध्य प्रदेश में पहले मध्य प्रदेश राज्य परिवहन निगम की बसें संचालित होती थीं। वर्ष 2005 में इन बस सेवाओं को बंद कर दिया गया था। अब लंबे अंतराल के बाद सरकारी परिवहन व्यवस्था को नए स्वरूप में शुरू किया जा रहा है। 7 शहरों में 351 बसों को मिलेगी हरी झंडी भोपाल के BHEL दशहरा मैदान में शुक्रवार को राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी 7 शहरों की 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को हरी झंडी दिखाकर मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ करेंगे। शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच बढ़ेगी कनेक्टिविटी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के जरिए प्रदेश में शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों को भी बेहतर बस कनेक्टिविटी से जोड़ने की योजना है। इससे यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन के अधिक विकल्प उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
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खंडवा रेलवे स्टेशन पर 3.7 किलो चरस के साथ पकड़ा आरोपी दोषी, कोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा

खंडवा रेलवे स्टेशन पर मादक पदार्थ चरस के साथ पकड़े गए आरोपी को कोर्ट ने 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनिल चौधरी की अदालत ने आरोपी सीमरूद्दीन शेख पिता सरफुद्दीन शेख (35), निवासी इंदौर को एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा और एक लाख रुपए के जुर्माने से दंडित किया। मामले में अभियोजन की ओर से अतिरिक्त सहायक निदेशक अभियोजन रामदास जमरे ने पैरवी की। प्लेटफॉर्म नंबर-6 के पीछे पकड़ा गया था आरोपी अभियोजन के अनुसार, घटना 3 जून 2024 की दरम्यानी रात की है। कोतवाली खंडवा पुलिस को सूचना मिली थी कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-6 के पीछे काले रंग के कपड़े पहने एक संदिग्ध व्यक्ति मौजूद है। उसके पास कपड़े की थैली में मादक पदार्थ होने और ट्रेन से भागने की कोशिश करने की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना के बाद टीआई दिलीपसिंह देवड़ा के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। टीम में एसआई चंद्रकांत सोनवने, एएसआई जितेंद्र तिवारी, प्रधान आरक्षक लतेश तोमर, अमित यादव समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस ने मुखबिर द्वारा बताए स्थान पर पहुंचकर प्लेटफॉर्म नंबर-6 की सीढ़ियों के सामने संदिग्ध व्यक्ति की घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। थैली से मिली 3.7 किलो चरस पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम सीमरूद्दीन शेख बताया। पुलिस ने उसके पास मौजूद कपड़े की थैली की तलाशी ली। इसमें पॉलीथिन के अंदर काले-कत्थई रंग का मादक पदार्थ मिला। आरोपी ने पुलिस को बताया कि यह चरस है। इलेक्ट्रॉनिक कांटे से वजन करने पर पॉलीथिन समेत इसका कुल वजन 3 किलो 700 ग्राम पाया गया। पुलिस के अनुसार, बरामद चरस की अनुमानित कीमत 18 लाख 50 हजार रुपए थी। पुलिस ने चरस के अलावा आरोपी का मोबाइल फोन और मादक पदार्थ रखने के लिए इस्तेमाल की गई कपड़े की थैली भी जब्त की। कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। जांच के बाद कोर्ट में पेश किया गया चालान पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद आरोपी के खिलाफ अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने आरोपी के कब्जे से चरस की बरामदगी, मौके की कार्रवाई और अन्य साक्ष्य न्यायालय के सामने रखे। मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनिल चौधरी की अदालत ने आरोपी को एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट ने उसे 10 साल के कठोर कारावास और 1 लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई।
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अनंत चतुर्दशी पर MP में गणेश विसर्जन और झांकियों की धूम, इंदौर में 9 किमी लंबे रूट पर निकलेगा चल समारोह

मध्यप्रदेश में अनंत चतुर्दशी के मौके पर शुक्रवार को गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ प्रदेश के प्रमुख शहरों में झांकियों और चल समारोह की रौनक देखने को मिलेगी। इंदौर में 103 साल पुरानी झांकी परंपरा के तहत शाम 6 बजे से झांकियां निकलेंगी। इसके लिए 9 किलोमीटर से ज्यादा लंबा मार्ग तय किया गया है। उज्जैन, ग्वालियर और भोपाल समेत प्रदेश के अन्य शहरों में भी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। विसर्जन स्थलों और घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ पुलिस, गोताखोर, फायर ब्रिगेड और ड्रोन के जरिए निगरानी की जाएगी। इंदौर में 103 साल पुरानी झांकी परंपरा इंदौर में अनंत चतुर्दशी पर झांकियों का चल समारोह खास आकर्षण का केंद्र रहेगा। 103 साल पुरानी इस परंपरा के तहत शाम 6 बजे से 9 किलोमीटर से अधिक लंबे मार्ग पर झांकियां निकलेंगी। झांकियों में धार्मिक और पौराणिक प्रसंगों के साथ सामाजिक संदेशों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा अखाड़ों के उस्ताद और खलीफा पारंपरिक खेलों और युद्ध कलाओं के करतब दिखाएंगे। उज्जैन में रामघाट और सुनहरी घाट पर विसर्जन उज्जैन में गणेश प्रतिमाओं के चल समारोह के बाद उन्हें निर्धारित विसर्जन स्थलों तक पहुंचाया जाएगा। प्रतिमाओं का विसर्जन रामघाट और सुनहरी घाट समेत तय स्थानों पर कराया जाएगा। प्रशासन की ओर से घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। ग्वालियर में सागरताल के अस्थायी कुंड में विसर्जन ग्वालियर में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए सागरताल में अस्थायी कुंड तैयार किया गया है। चल समारोह के बाद प्रतिमाओं को इसी निर्धारित स्थान पर विसर्जित कराया जाएगा। विसर्जन स्थलों पर पुलिस बल और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं तैनात रहेंगी। भोपाल में बनाए गए कृत्रिम विसर्जन कुंड भोपाल में प्रमुख घाटों के अलावा अलग-अलग आकार की गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए छोटे-बड़े कृत्रिम कुंड बनाए गए हैं। प्रशासन और पुलिस ने विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ भीड़ प्रबंधन के इंतजाम किए हैं। कई शहरों में चल समारोह और विसर्जन के दौरान यातायात डायवर्जन भी लागू रहेगा। ड्रोन और गोताखोरों से निगरानी अनंत चतुर्दशी के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के सड़कों और विसर्जन स्थलों पर पहुंचने की संभावना को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है। विसर्जन स्थलों पर गोताखोर और फायर ब्रिगेड की टीमें तैनात रहेंगी। संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाकों में ड्रोन से निगरानी की जाएगी। प्रमुख शहरों में यातायात व्यवस्था संभालने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती और डायवर्जन प्लान भी तैयार किया गया है।
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इंदौर में शिवाजी महाराज की प्रतिमा के ढांचे पर विवाद, नगर निगम की कार्रवाई के बाद थाने पहुंचे रहवासी और हिंदू संगठन

इंदौर के मोती तबेला इलाके में शासकीय भूमि पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने के लिए तैयार किए जा रहे ढांचे को नगर निगम द्वारा हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। कार्रवाई से नाराज स्थानीय रहवासी, क्षेत्रीय पार्षद और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता गुरुवार रात पंढरीनाथ थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने थाने के बाहर नारेबाजी करते हुए निर्माणाधीन चबूतरा तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर मामला शांत कराया। सरकारी जमीन पर तैयार किया गया था चबूतरा जानकारी के मुताबिक, मोती तबेला क्षेत्र में शासकीय भूमि पर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की ओर से छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी की जा रही थी। इसके लिए मौके पर चबूतरा बनाया गया था। गुरुवार को नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और निर्माणाधीन ढांचे को ध्वस्त कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई से पहले उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। ढांचा हटाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में विरोध शुरू हो गया। पार्षद के नेतृत्व में थाने पहुंचे प्रदर्शनकारी क्षेत्रीय पार्षद रूपाली पंडित के नेतृत्व में बड़ी संख्या में रहवासी और विभिन्न हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता एकत्र हुए। इसके बाद सभी जुलूस के रूप में पंढरीनाथ थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने चबूतरा तोड़ने की कार्रवाई में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही प्रतिमा स्थापना को लेकर अनुमति देने की मांग भी रखी। प्रतिमा स्थापना की अनुमति देने की मांग पार्षद रूपाली पंडित और प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने के लिए विधिवत अनुमति दी जाए। उन्होंने बिना संवाद के कार्रवाई किए जाने का आरोप लगाते हुए संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर मामला शांत कराया। पार्षद की ओर से मामले को लेकर पुलिस को लिखित शिकायत भी दी गई है।
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मध्य प्रदेश में शुक्रवार से शुरू होगी सुगम परिवहन सेवा, 7 शहरों में दौड़ेंगी 351 बसें; ₹2 प्रति किमी किराया तय

मध्य प्रदेश में शुक्रवार से सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत होने जा रही है। भोपाल, इंदौर समेत प्रदेश के 7 शहरों में कुल 351 बसें संचालित की जाएंगी। परिवहन विभाग ने इंटरसिटी बस सेवा के लिए 2 रुपए प्रति किलोमीटर किराया निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी शुक्रवार को भोपाल के बीएचईएल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बसों को हरी झंडी दिखाकर सेवा की शुरुआत करेंगे। सेवा के शुभारंभ से पहले गुरुवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीएचईएल दशहरा मैदान पहुंचकर कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने मंच, सभा स्थल और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने बसों को देखा और ड्राइवरों से बातचीत की। इस दौरान परिवहन सचिव मनीष सिंह भी मौजूद रहे। सीएम बोले- बेहतर और आधुनिक परिवहन सुविधा मिलेगी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 21 साल बाद प्रदेश में लोक परिवहन बस सेवा दोबारा शुरू होना ऐतिहासिक निर्णय है। उन्होंने कहा कि आधुनिक ई-बसों और सुविधायुक्त बसों का नेटवर्क चरणबद्ध तरीके से नगरों और जिलों तक पहुंचाया जाएगा। इसके तहत यात्रियों की सुविधा के लिए बस स्टॉप, बस स्टैंड, इलेक्ट्रॉनिक सुविधाएं और बेहतर कंट्रोलिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी। एक व्यवस्था के तहत संचालित होंगी बसें सुगम परिवहन सेवा के तहत अलग-अलग बस एजेंसियों की सेवाओं को एक व्यवस्था के तहत लाने की योजना है। भोपाल में भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड के साथ पीएम बस सेवा का संचालन किया जा रहा है। इसी तरह इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन समेत अन्य शहरों में भी बस सेवाओं को एक व्यवस्था के तहत संचालित किया जाएगा। बसों को एकरूपता देने के लिए एक ही रंग में पेंट या स्टीकर लगाने का काम किया गया है। सोशल मीडिया पर इससे संबंधित फोटो और वीडियो सामने आने के बाद अधिकारियों ने बताया कि यह काम संबंधित बस एजेंसियों की ओर से किया गया है। सुगम परिवहन सेवा में इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल सुगम परिवहन सेवा में ईजी मायट्रिप की सहायक कंपनी ईएमटीईवी/ईजी ग्रीनमोबिलिटी की बसें भी शामिल हैं। कंपनी की 12 मीटर इलेक्ट्रिक सीटर बस को लंबी दूरी के सार्वजनिक परिवहन के लिए तैयार किया गया है। इन बसों में प्रीमियम और एर्गोनॉमिक सीटिंग, व्यक्तिगत एयर वेंट और यात्रियों के लिए पर्याप्त बैठने की जगह उपलब्ध कराई गई है। बसों में यात्रियों के प्रवेश और आवागमन को भी सुविधाजनक बनाने की व्यवस्था की गई है।
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सीहोर में जीतू पटवारी का बीजेपी पर हमला, चुनावी गड़बड़ियों के विरोध में कांग्रेस करेगी प्रदेशव्यापी प्रदर्शन

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी सीहोर के चिंतामन गणेश मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार, चुनाव व्यवस्था और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा। ‘मैच फिक्सिंग’ वाले चुनाव पर उठाए सवाल जीतू पटवारी ने कहा कि राहुल गांधी ने देश के सामने चुनाव व्यवस्था को लेकर सच्चाई रखी है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अब देश को सोचना होगा कि क्या ‘मैच फिक्सिंग’ वाले चुनाव से देश का भविष्य तय हो सकता है। पटवारी ने संविधान और लोकतंत्र को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्या देश का संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा कायम रह पाएगा, इसका फैसला अब जनता को करना है। चुनावी गड़बड़ियों के विरोध में कांग्रेस का आंदोलन पटवारी ने चुनावी गड़बड़ियों के विरोध में कांग्रेस के प्रदेशव्यापी आंदोलन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पार्टी चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि मंगलवार को प्रदेश के सभी जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ता कलेक्टर कार्यालय और निर्वाचन कार्यालयों का घेराव करेंगे। वहीं, सोमवार को प्रदेशभर से हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता भोपाल स्थित मुख्य निर्वाचन कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन करेंगे। कांग्रेस की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज कर जेल भेजने की मांग किए जाने की बात भी पटवारी ने कही। आंबेडकर की तस्वीर हटाने पर जताई आपत्ति सीहोर के पीजी कॉलेज से डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर हटाए जाने के मामले पर भी जीतू पटवारी ने आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि महापुरुषों का अनादर करना बीजेपी की सोच का हिस्सा है। पटवारी ने बीजेपी पर नफरत और बंटवारे की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी हर जगह अपना राजनीतिक फायदा देखती है। उन्होंने कहा कि देश की जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले चुनावों में बीजेपी को इसका जवाब देगी।
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उज्जैन में गणेश पंडाल में लगी भीषण आग, 11 फीट की गणेश प्रतिमा खंडित; शॉर्ट सर्किट की आशंका

उज्जैन के नीलगंगा थाना क्षेत्र की संत राम सिंधी कॉलोनी में बुधवार शाम गणेश पंडाल में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। श्री सम्राट नवयुवक मित्र मंडल के गणेश पंडाल में लगी आग कुछ ही देर में तेजी से फैल गई, जिससे पंडाल का ज्यादातर हिस्सा जल गया। आग की चपेट में आने से पंडाल में स्थापित करीब 11 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा भी खंडित हो गई। हालांकि, राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। धुआं उठता देख मची अफरा-तफरी बुधवार शाम स्थानीय लोगों ने पंडाल से धुआं उठता देखा। इसके बाद आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। जानकारी मिलते ही नीलगंगा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। दमकल की दो गाड़ियों ने आसपास के लोगों की मदद से आग पर काबू पाया। आग बुझाने के बाद पंडाल में मौजूद जले हुए सामान को बाहर निकाला गया। माता वैष्णो देवी की थीम पर बनाया गया था पंडाल गणेश पंडाल को माता वैष्णो देवी की थीम पर सजाया गया था। यहां गजानन गणपति के साथ उनकी बहन अशोक सुंदरी की प्रतिमा भी स्थापित की गई थी। आग में पंडाल का सजावटी सामान और अन्य सामग्री जल गई। गणेश प्रतिमा को भी काफी नुकसान पहुंचा और वह खंडित हो गई। बिजली लाइन और उपकरण भी जले आग की घटना के बाद बिजली विभाग के कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आग से क्षतिग्रस्त बिजली लाइन और अन्य उपकरणों को ठीक करने का काम शुरू किया। प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, आग के वास्तविक कारण की पुष्टि पंडाल का पूरा निरीक्षण और जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने कहा- जांच के बाद स्पष्ट होगी वजह नीलगंगा थाना प्रभारी तरुण कुरील ने बताया कि गणेश पंडाल में आग लगने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई थी। दमकल की दो गाड़ियों की मदद से आग पर तत्काल काबू पा लिया गया। उन्होंने बताया कि घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है। आग किस कारण से लगी, इसका पता पंडाल का पूरा निरीक्षण करने के बाद ही चल पाएगा।
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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